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प्रथम जिला स्तरीय सपाक्स सम्मेलन 21 जनवरी को…

सामान्य,पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था सपाक्स का “प्रथम जिला स्तरीय सपाक्स सम्मेलन” प्रदेश संरक्षक सपाक्स सम्मान्य श्री राजीव शर्मा जी आई.ए.एस.अपर सचिव नगरीय प्रशासन के मुख्य आतिथ्य एवं प्रदेश अध्यक्ष सपाक्स सम्मान्य श्री डॉ के.एस.तोमर जी,प्रदेश अध्यक्ष सपाक्स समाज सम्मान्य श्री इंजी.पी.एस.परिहार जी,प्रदेश उपाध्यक्ष सपाक्स युवा संगठन सम्मान्य श्री प्रसंग परिहार जी एवं प्रांतीय पदाधिकारियों के विशिष्ट आतिथ्य तथा गरिमामयी उपस्थिति में होगा सम्पन्न

सामान्य,पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था सपाक्स का “प्रथम जिला स्तरीय सपाक्स सम्मेलन” प्रदेश संरक्षक सपाक्स सम्मान्य श्री राजीव शर्मा जी आई.ए.एस.अपर सचिव नगरीय प्रशासन के मुख्य आतिथ्य एवं प्रदेश अध्यक्ष सपाक्स सम्मान्य श्री डॉ के.एस.तोमर जी,प्रदेश अध्यक्ष सपाक्स समाज सम्मान्य श्री इंजी.पी.एस.परिहार जी,प्रदेश उपाध्यक्ष सपाक्स युवा संगठन सम्मान्य श्री प्रसंग परिहार जी एवं प्रांतीय पदाधिकारियों के विशिष्ट आतिथ्य तथा गरिमामयी उपस्थिति में दिनाँक 21 जनवरी 2018,दिन रविवार को, प्रातः10.30 बजे, स्मृति लॉन,बारापत्थर,सिवनी में आयोजित किया जा रहा है।
जिला नोडल अधिकारी एवं जिला अध्यक्ष सपाक्स श्री प्रद्युम्न चतुर्वेदी,जिला नोडल अधिकारी एवं कार्यकारी अध्यक्ष सपाक्स श्री एन.एस.बैश,जिला सचिव श्री अजय शर्मा,जिला उपाध्यक्ष श्री के.के.दुबे,श्री चुनेन्द्र बिसेन,
संयोजक श्री अरुण राय,संरक्षक श्री डी.एल.तिवारी,श्री एम.के.गौतम एवं सपाक्स समाज संस्था के जिलाध्यक्ष श्री मुरलीधर पांडे ने बताया कि 10 फरवरी 2016 को पदोन्नति में आरक्षण समाप्त किये जाने के उद्देश्य से सपाक्स का गठन हुआ।30 अप्रैल 2016 को माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा पदोन्नति में आरक्षण समाप्त किये जाने का ऐतिहासिक फैसला पारित किया गया। पदोन्नति में आरक्षण को लेकर म.प्र सरकार द्वारा माननीय उच्चन्यायालय का निर्णय लागू नहीं किया गया।जिससे प्रदेश का सपाक्स वर्ग आहत है।12 जून 2016 को टीटीनगर दशहरा मैदान भोपाल में विशेष वर्ग के अधिकारी कर्मचारी सम्मेलन में अचानक पहुंचे माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा कहा गया था कि ‘कोई माई का लाल आरक्षण खत्म नहीं कर सकता।”
जिससे सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में राज्य सरकार के प्रति जमकर आक्रोश है। माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर ने प्रदेश में आरक्षित समुदाय के प्रमोशन से जुड़े सिविल सर्विसेस प्रमोशन नियम 2002 को असंवैधानिक घोषित करार दिया है।माननीय उच्च न्यायालय ने 2002 में सरकार द्वारा बनाये गये नियम को रद्ध कर 2002 से 2016 तक जिन्हें नये नियम के अनुसार पदोन्नति दी गयी है उन्हें रिवर्ट करने के आदेश दिये थे।म.प्र सरकार ने इस आदेश के खिलाफ माननीय सर्वोच्च न्यायालय में स्पेशल लीव पिटीशन(LIP) दायर की है।
फैसले के इंतजार में हमें सिर्फ बढ़ी हुई सुनवाई की तारीखें मिल रही हैं। राज्य सरकार की कूटनीति के चलते उक्त प्रकरण माननीय सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ को सौंप दिया गया है।राज्य सरकार ‘‘सामान्य पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग के अधिकारी कर्मचारी’’ के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। सपाक्स कर्मचारियों/अधिकारियों में राज्य सरकार के प्रति जमकर आक्रोश है।क्या?सामान्य पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग के अधिकारी कर्मचारियों के प्रति राज्य सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं है…? राज्य सरकार संविधान के प्रावधान अनुरूप सभी वर्गो से समानता का व्यवहार न करते हुए सौतेला व्यवहार कर रही है।म.प्र सरकार के रवैये से सामान्य पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग के सिर्फ अधिकारियों कर्मचारियों में रोष ही नहीं बल्कि समाज के आमजनों में भी असंतोष व्याप्त है।जिला नोडल अधिकारी एवं जिला अध्यक्ष सपाक्स श्री प्रद्युम्न चतुर्वेदी,जिला नोडल अधिकारी एवं कार्यकारी अध्यक्ष सपाक्स श्री एन.एस.बैश,जिलाध्यक्ष सपाक्स समाज संस्था श्री मुरलीधर पांडे ने 21 जनवरी को सामान्य,पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारियों,
सपाक्स समाज,प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से प्रथम जिला स्तरीय सपाक्स सम्मेलन में उपस्थिति की अपील की है ।।
उक्ताशय की जानकारी जिला मीडिया प्रभारी विपिन शर्मा ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में दी।

उक्त शासकीय कर्मचारियों की स्थानांतरण नीति ,प्रदेश सरकार द्वारा आज 2018-19 के लिय तबादले नीति जारी कर दी है।

भोपाल। मध्यप्रदेश IPS मीट 2018 का आयोजन आगामी 19 जनवरी से राजधानी भोपाल में शुरु होगा। IPS मीट 20 जनवरी को समाप्त होगी। यह जानकारी भोपाल डीआईजी धर्मेन्द्र चौधरी ने आज बुधवार को पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में दी है। डीआईजी चौधरी ने प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि एमपी पुलिस द्वारा आयोजित एक दिवसीय पुलिस संगोष्ठी का शुभारंभ 19 जनवरी की सुबह सीएम शिवराज सिंह चौहान द्वारा विधानसभा सभागार में किया जाएगा। इस कार्यक्रम में प्रदेश गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह और विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा, विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।

डीआईजी चौधरी ने आगे बताया कि संगोष्ठी के प्रथम सत्र में ‘कट्टरता का सुधारवाद’ विषय पर इंटरनेशनल रिसर्चर जेरिन जिराल्ड वक्तव्य देंगी। द्वितीय सत्र में ‘सोशल मीडिया के नए आयाम एवं कानून प्रवर्तन संस्थाओं के लिए चुनौतियां’ विषय पर व्याख्यान होगा।

डीआईजी चौधरी का कहना है कि 19 जनवरी को सुबह साढ़े दस बजे अधिकारियों के परिवार वालों के लिए बड़ी झील में बोटिंग, क्रूज, वन विहार की गतिविधियां रखी जाएंगे। शाम 7 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम मुख्यालय आॅफिसर्स मेस में होगा, जिसमें लोक नृत्य, लोक गान एवं अन्य कार्यक्रम शामिल होंगे।

20 जनवरी को सुबह मोतिलाल स्टेडियम में डीजीपी इलेवन एवं डीजीपी पुलिस हाउसिंग इलेवन के बीच मैत्र क्रिकेट मैच, रस्सा कसी एवं अन्य खेलकूद की प्रतियोगित आयोजित होगी। इसमें सभी अधिकारी अपने परिवार के साथ हिस्सा लेंगे। इसी सत्र में पुलिस परिवार की विभिन्न रुचि जैसे क्वाइंस कलेक्शन एवं स्टेम्स कलेक्शन का प्रदर्शन होगा। 20 जनवरी की शाम पुलिस परिवार के सदस्यों द्वारा विभिन्न प्रकार की व्यक्तिगत योग्यताओं का प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें नृत्य, गायन, वाद्ध यंत्र एवं अन्य कलाएं प्रस्तुत की जाएंगी।

डीआईजी चौध

कभी सोचा है कि गर्भपात के दौरान उस बच्चे का क्या होता है जिसे अबॉर्ट करवाया जाता है?

एक औरत के लिए मां बनना उसकी ज़िन्दगी का सबसे खूबसूरत पल होता है. लेकिन ज़रा सोचिये उस वक़्त उस औरत के दिल पर क्या बीतती होगी जब उससे बोला जाता है कि बच्चा गिरा दो, गर्भपात करा लो, ये बच्चा अभी नहीं चाहिए, ऐसे में उसके दर्द का अंदाजा लगाना नामुमकिन है. मगर हमारे देश में गर्भपात को एक बहुत ही आसान शब्द जानकर बोल दिया जाता है. ख़ास तौर पर उस वक़्त महिला का गर्भपात कराने की बात बोली जाती है, जबकि उसके गर्भ में कन्या भ्रूण हो. कई बार लोगों को बच्चा नहीं चाहिए होता है, तो गर्भपात करा देते हैं. मगर क्या आपको पता है कि आसान सी लगने वाली गर्भपात की ये प्रक्रिया कितनी दर्दनाक और भयानक होती है. शायद नहीं सोचा होगा. गर्भपात को लेकर तो लोगों को कई बार चर्चा करते सुना होगा, लेकिन उस बच्चे के बारे में कोई बात नहीं करता कि आखिर उन अजन्मे बच्चों का क्या होता है…आज हम आपको गर्भपात के दौरान होने वाली भयानक प्रक्रिया से रू-ब-रू कराएंगे. ये भी बताएंगे कि कैसे किया जाता है गर्भपात? पिछले साल Felicia Cash नाम की एक महिला ने फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर की थी, जिसमें उन्होंने बताया कि गर्भपात के दौरान उन बच्‍चों के साथ क्‍या होता है?

Felicia Cash ने अपनी पोस्ट में लिखा, ‘जुलाई 2014 में मेरा मिसकैरेज हो गया था, जिसके कारण मेरा 14 हफ़्तों और 6 दिन का प्यारा बेटा Japeth Peace मर गया था. उस वक़्त वो आश्चर्यजनक रूप से काफ़ी विकसित हो चुका था, उसके पैरों की उंगलियां और अंगूठा भी बन चुका था. यहां तक कि उसके नाख़ून भी निकलने शुरू हो गए थे और दिखने लगे थे. उसकी छोटी-छोटी और महीन नसों को उसकी पतली स्किन के ज़रिये देखा जा सकता था, जो उसके नाज़ुक शरीर में रक़्त प्रवाहित कर रही थीं. यहां तक कि उसकी मांसपेशियां भी दिखाई दे रही थीं. उसके लिए मैं ये कहती हूं कि गर्भावस्था की आधी अवधि में वो कोशिकाओं का एक समूह या केवल एक मांस का टुकड़ा मात्र नहीं था, बल्कि उसकी बॉडी ह्यूमन जैसी दिखने लगी थी. वो एक सुन्दर और स्वस्थ बच्चा था जिसकी रचना भगवान ने की थी और अब वो उन्हीं के साथ रहेगा.इसके साथ ही Felicia ये लिखा, ‘मैं ये पोस्ट उन लोगों को सही जानकारी देने के लिए लिख रही हूं, जिनको ये नहीं पता होता कि 3 महीने की गर्भावस्था में भी भ्रूण पूरी तरह से विकसित हो जाता है. और इसलिए 3 महीने में गर्भपात को हल्के में नहीं लेना चाहिए. दरअसल, मैं ये बताना चाहती हूं कि साढ़े तीन महीने की अवधि में भी बच्चा कोई मांस का टुकड़ा या निर्जीव वस्तु नहीं होता. इतने कम समय में भी बच्चा विकसित हो जाता है.

गर्भधारण के 16 दिनों बाद ही उसका छोटा सा दिल धड़कने लगता है, और अपने खून को पंप करने लगता है. मतलब कि बच्चे का दिल महिला के गर्भवती होने की जानकारी होने से पहले ही अपना काम शुरू कर देता है. जबकि लोगों में एक गलत धारणा है कि जब तक वो बच्चे की धड़कन सुन नहीं सकते हैं या नहीं देख सकते हैं, उसका दिल विकसित नहीं हुआ है ऐसा नहीं होता है. जबकि सबसे पहले दिल ही बनता है और अपना काम शुरू करता है. गर्भधारण के 6 हफ़्तों के बाद बच्चे के श्रवण अंगों यानि कि कान बनने लगते हैं और उनका तंत्रिका तंत्र 7वें हफ्ते में काम करना शुरू कर देता है.इसके साथ ही उन्होंने लिखा, ‘ये सारी जानकारी आपको इंटरनेट पर और मेडिकल जर्नल्स या फिर प्रेग्नेंसी गाइड्स में आसानी से मिल जायेगी. हालांकि, कुछ कारणों से लोगों को लगता है कि यह सब गर्भावस्था में बहुत बाद में होता है. हो सकता है ऐसा इसलिए हो कि वो उन लोगों द्वारा बेवकूफ़ बनाये जा रहे हों, जो उनका शोषण करना चाहते हैं. या ऐसा भी हो सकता है कि वो सब कुछ जानकर भी अपनी आंखों पर पट्टी और कानों में रुई डाल लेते हैं, क्योंकि ये सच बहुत ही कड़वा है और ये सच्चाई उनके कुछ अहम निर्णयों में बाधा ना बन जाए इसलिए वो सब कुछ जानते हुए भी अपनी इच्छा से गर्भपात कराते हैं.’

एक औरत के लिए मां बनना उसकी ज़िन्दगी का सबसे खूबसूरत पल होता है. लेकिन ज़रा सोचिये उस वक़्त उस औरत के दिल पर क्या बीतती होगी जब उससे बोला जाता है कि बच्चा गिरा दो, गर्भपात करा लो, ये बच्चा अभी नहीं चाहिए, ऐसे में उसके दर्द का अंदाजा लगाना नामुमकिन है. मगर हमारे देश में गर्भपात को एक बहुत ही आसान शब्द जानकर बोल दिया जाता है. ख़ास तौर पर उस वक़्त महिला का गर्भपात कराने की बात बोली जाती है, जबकि उसके गर्भ में कन्या भ्रूण हो. कई बार लोगों को बच्चा नहीं चाहिए होता है, तो गर्भपात करा देते हैं. मगर क्या आपको पता है कि आसान सी लगने वाली गर्भपात की ये प्रक्रिया कितनी दर्दनाक और भयानक होती है. शायद नहीं सोचा होगा. गर्भपात को लेकर तो लोगों को कई बार चर्चा करते सुना होगा, लेकिन उस बच्चे के बारे में कोई बात नहीं करता कि आखिर उन अजन्मे बच्चों का क्या होता है…

 

आज हम आपको गर्भपात के दौरान होने वाली भयानक प्रक्रिया से रू-ब-रू कराएंगे. ये भी बताएंगे कि कैसे किया जाता है गर्भपात?

पिछले साल Felicia Cash नाम की एक महिला ने फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर की थी, जिसमें उन्होंने बताया कि गर्भपात के दौरान उन बच्‍चों के साथ क्‍या होता है?

FelicaCash ने अपनी पोस्ट में लिखा, ‘जुलाई 2014 में मेरा मिसकैरेज हो गया था, जिसके कारण मेरा 14 हफ़्तों और 6 दिन का प्यारा बेटा Japeth Peace मर गया था. उस वक़्त वो आश्चर्यजनक रूप से काफ़ी विकसित हो चुका था, उसके पैरों की उंगलियां और अंगूठा भी बन चुका था. यहां तक कि उसके नाख़ून भी निकलने शुरू हो गए थे और दिखने लगे थे. उसकी छोटी-छोटी और महीन नसों को उसकी पतली स्किन के ज़रिये देखा जा सकता था, जो उसके नाज़ुक शरीर में रक़्त प्रवाहित कर रही थीं. यहां तक कि उसकी मांसपेशियां भी दिखाई दे रही थीं. उसके लिए मैं ये कहती हूं कि गर्भावस्था की आधी अवधि में वो कोशिकाओं का एक समूह या केवल एक मांस का टुकड़ा मात्र नहीं था, बल्कि उसकी बॉडी ह्यूमन जैसी दिखने लगी थी. वो एक सुन्दर और स्वस्थ बच्चा था जिसकी रचना भगवान ने की थी और अब वो उन्हीं के साथ रहेगा. इसके साथ ही Felicia ये लिखा, ‘मैं ये पोस्ट उन लोगों को सही जानकारी देने के लिए लिख रही हूं, जिनको ये नहीं पता होता कि 3 महीने की गर्भावस्था में भी भ्रूण पूरी तरह से विकसित हो जाता है. और इसलिए 3 महीने में गर्भपात को हल्के में नहीं लेना चाहिए. दरअसल, मैं ये बताना चाहती हूं कि साढ़े तीन महीने की अवधि में भी बच्चा कोई मांस का टुकड़ा या निर्जीव वस्तु नहीं होता. इतने कम समय में भी बच्चा विकसित हो जाता है.

गर्भधारण के 16 दिनों बाद ही उसका छोटा सा दिल धड़कने लगता है, और अपने खून को पंप करने लगता है. मतलब कि बच्चे का दिल महिला के गर्भवती होने की जानकारी होने से पहले ही अपना काम शुरू कर देता है. जबकि लोगों में एक गलत धारणा है कि जब तक वो बच्चे की धड़कन सुन नहीं सकते हैं या नहीं देख सकते हैं, उसका दिल विकसित नहीं हुआ है ऐसा नहीं होता है. जबकि सबसे पहले दिल ही बनता है और अपना काम शुरू करता है. गर्भधारण के 6 हफ़्तों के बाद बच्चे के श्रवण अंगों यानि कि कान बनने लगते हैं और उनका तंत्रिका तंत्र 7वें हफ्ते में काम करना शुरू कर देता है.

इसके साथ ही उन्होंने लिखा, ‘ये सारी जानकारी आपको इंटरनेट पर और मेडिकल जर्नल्स या फिर प्रेग्नेंसी गाइड्स में आसानी से मिल जायेगी. हालांकि, कुछ कारणों से लोगों को लगता है कि यह सब गर्भावस्था में बहुत बाद में होता है. हो सकता है ऐसा इसलिए हो कि वो उन लोगों द्वारा बेवकूफ़ बनाये जा रहे हों, जो उनका शोषण करना चाहते हैं. या ऐसा भी हो सकता है कि वो सब कुछ जानकर भी अपनी आंखों पर पट्टी और कानों में रुई डाल लेते हैं, क्योंकि ये सच बहुत ही कड़वा है और ये सच्चाई उनके कुछ अहम निर्णयों में बाधा ना बन जाए इसलिए वो सब कुछ जानते हुए भी अपनी इच्छा से गर्भपात कराते हैं.’

मैं आशा करती हूं कि ये जानकारी और मेरे प्यारे बेटे की दिल-दहला देने वाली ये फ़ोटोज़ गर्भावस्था, गर्भस्थ शिशु और गर्भपात से जुड़ी जानकारी को समझने में थोड़ी और ज़्यादा मदद करेंगी. सच में बच्चे की इन मार्मिक तस्वीरों को देखकर ये लगता है कि अबॉर्ट हुए बच्चों को कितनी तकलीफ होती होगी

अंत में मैं बस ये कहना चाहती हूं कि अगर आप गर्भपात कराने का विचार कर रहे हैं, तो एक बार इस सच्चाई को जानने के बाद पुनः विचार करें कि क्या ये सही है. ये किसी भी तरह से शर्मनाक, कमज़ोर, या किसी की निंदा करने का प्रयास नहीं है. ये उस मां की आपसे अपील है, जिसने मिसकैरेज के कारण अपना प्यारा बच्चा खो दिया कि जो भी कदम उठायें सोच-समझ कर उठायें. गर्भपात के अलावा भी कई विकल्प मौजूद हैं.

Felicia Cash की ये पोस्ट उनके दिलों तक ज़रूर पहुंचेगी जिनका किन्हीं कारणों से मिसकैरेज हो गया और उन्होंने अपना बच्चा खो दिया हो.

मगर मैं एक सवाल उनसे करना चाहती हूं जो अपनी मर्जी से गर्भपात करवाते हैं क्या उनको इस बात का एहसास नहीं होता कि वो दुनिया में आने से पहले ही गर्भ के अंदर बच्चे को मार देते हैं. क्या आपको पता है कि गर्भपात के दौरान बच्चे को कितनी तकलीफ़ होती है? शायद नहीं, तभी तो अजन्में बच्चे के साथ इतनी क्रूरता करने की हिम्मत कर पाते हैं.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब हॉस्पिटल में किसी महिला का अबॉर्शन किया जाता है तो उसे सैलाइन अबॉर्शन (Saline Abortion) कहा जाता है. ये प्रक्रिया बेहद दर्दनाक होती है. इसमें इंजेक्शन की मदद से महिला के गर्भ में एक ऐसा लिक्वीड डाला जाता है, जिसके असर से बच्चा मर जाता है. इस लिक्वीड का असर इतना खतरनाक होता है कि बच्चे के फ़ेंफड़े और स्किन पूरी तरह जल जाती है और वो मर जाता है. उसके बाद महिला का प्रसव कराया जाता है, जिसके बाद मरा हुआ बच्चा कोख से बाहर आता है. मगर ज़रा सोचिये अगर इसके बाद भी बच्चा ज़िंदा बच जाए (कई केसेज़ में ऐसा हो जाता है) तो उस जले और अविकसित बच्चे का न हीं कोई इलाज किया जाता है और न ही कोई देख भाल, बल्कि उसको मरने के लिए छोड़ दिया जाता है.

आज भी हमारे देश में गर्भ में लड़की होने की बात पता चलते ही गर्भवती महिला का जबरन घरों में ही अबॉर्शन करा दिया जाता है, जिसके कारण कई बार महिला की भी मौत हो जाती है. वहीं कई बार बलात्कार के परिणाम स्वरूप गर्भवती महिला का डॉक्टर्स की मदद से अबॉर्शन कराया जाता है. क्योंकि हमारा समाज उसको अपनाता नहीं है. क्योंकि हम आज भी दकियानूसी नियमों और क़ानूनों को मानते हैं ना…

यहां मैं एक बात यही कहना चाहूंगी कि अगर आपको बच्चा नहीं चाहिए तो प्रोटेक्शन का इस्तेमाल क्यों नहीं करते? अगर फिर भी गर्भधारण हो जाता है, तो भी क्या उसे मारना सही है, क्या उसके लिए दूसरे विकल्प नहीं है, उस बच्चे को आप उन लोगों को दे सकते हैं, जो बेऔलाद हैं, जो बच्चे के लिए तरस रहे हैं. क्योंकि आप परेशानी नहीं उठाना चाहते हैं और आपको वो अपनी आंखों के सामने दिख नहीं रहा है, तो आप उसको मार देते हैं. अगर मारना ही है तो उसको आने ही क्यों देते हो? प्रोटेक्शन खरीदने में शर्म आती है, लेकिन नन्हीं सी जान को मारने में शर्म नहीं आती…

ये बहुत बड़ा सवाल है सोचियेगा ज़रूर इसके बारे में. अगर आप सोचेंगे तो आपको उस जान का दर्द समझ आएगा जो दुनिया में आना चाहता है, पर आ नहीं पाता है.

IPS मीट का आयोजन 19 जनवरी से

भोपाल। मध्यप्रदेश IPS मीट 2018 का आयोजन आगामी 19 जनवरी से राजधानी भोपाल में शुरु होगा। IPS मीट 20 जनवरी को समाप्त होगी। यह जानकारी भोपाल डीआईजी धर्मेन्द्र चौधरी ने आज बुधवार को पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में दी है।

डीआईजी चौधरी ने प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि एमपी पुलिस द्वारा आयोजित एक दिवसीय पुलिस संगोष्ठी का शुभारंभ 19 जनवरी की सुबह सीएम शिवराज सिंह चौहान द्वारा विधानसभा सभागार में किया जाएगा। इस कार्यक्रम में प्रदेश गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह और विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा, विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।

डीआईजी चौधरी ने आगे बताया कि संगोष्ठी के प्रथम सत्र में ‘कट्टरता का सुधारवाद’ विषय पर इंटरनेशनल रिसर्चर जेरिन जिराल्ड वक्तव्य देंगी। द्वितीय सत्र में ‘सोशल मीडिया के नए आयाम एवं कानून प्रवर्तन संस्थाओं के लिए चुनौतियां’ विषय पर व्याख्यान होगा।

डीआईजी चौधरी का कहना है कि 19 जनवरी को सुबह साढ़े दस बजे अधिकारियों के परिवार वालों के लिए बड़ी झील में बोटिंग, क्रूज, वन विहार की गतिविधियां रखी जाएंगे। शाम 7 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम मुख्यालय आॅफिसर्स मेस में होगा, जिसमें लोक नृत्य, लोक गान एवं अन्य कार्यक्रम शामिल होंगे।

20 जनवरीको सुबह मोतिलाल स्टेडियम में डीजीपी इलेवन एवं डीजीपी पुलिस हाउसिंग इलेवन के बीच मैत्र क्रिकेट मैच, रस्सा कसी एवं अन्य खेलकूद की प्रतियोगित आयोजित होगी। इसमें सभी अधिकारी अपने परिवार के साथ हिस्सा लेंगे। इसी सत्र में पुलिस परिवार की विभिन्न रुचि जैसे क्वाइंस कलेक्शन एवं स्टेम्स कलेक्शन का प्रदर्शन होगा। 20 जनवरी की शाम पुलिस परिवार के सदस्यों द्वारा विभिन्न प्रकार की व्यक्तिगत योग्यताओं का प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें नृत्य, गायन, वाद्ध यंत्र एवं अन्य कलाएं प्रस्तुत की जाएंगी।

प्रेस क्लब का वार्षिक सम्मेलन 18 को

रक्तदाताओं और वरिष्ठ पत्रकारों का होगा सम्मान

लखनादौन- अपने गठन के तीन वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में स्थानीय पत्रकारों का संगठन प्रेस क्लब लखनादौन का वार्षिक सम्मेलन आगामी 18 जनवरी को स्थानीय सात फेरे मेरिज गार्डन में आयोजित हैं। इस कार्यक्रम में प्रेस क्लब भवन निर्माण के लिए भूमिपूजन, जिले भर में 10 या उससे अधिक बार रक्तदान कर मानवता की सेवा करने वाले रक्तवीरों का सम्मान, दिवंगत पत्रकार के परिजनों का सम्मान, प्रेस क्लब के सदस्यों का रक्तवीरों की सूची में पंजीयन, सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ मप्र तृतीय श्रेणी कर्मचारी संगठन के वार्षिक कलेण्डर का विमोचन उपस्थित अतिथियों के कर कमलों से किया जायेगा।
उक्त कार्यक्रम में मण्डला सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, राजसभा सांसद सम्पतिया उइके, लखनादौन विधायक योगेन्द्र सिंह, सिवनी विधायक दिनेष राय मुनमुन, बरघाट विधायक कमल मर्सकोले सहित सनत जैन ईएमएस ग्रुप भोपाल, दीपक सुरजन सम्पादक देषबंधु जबलपुर सहित अधिकारी गण सिवनी कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड, पुलिस अधीक्षक तरूण नायक, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी स्वरोचिष सोमवंषी भी उपस्थित रहेंगें। इसके साथ ही सिवनी जिले से प्रसारित होने वाले समाचार पत्रों के संपादक, जबलपुर से प्रसारित होने वाले समाचार पत्रों के जिला ब्यूरों सहित इलेक्ट्रानिक मीडिया के समस्त पत्रकार बंधुओं के साथ केवलारी, पलारी कान्हीवाड़ा, धनौरा, घंसौर, कहानी, धूमा, नागनदेवरी, आदेगांव, गनेषगंज एवं छपारा के पत्रकार बंधुओं की उपस्थित में यह गरिमामय कार्यक्रम सम्पन्न होगा। उक्त कार्यक्रम के संबंध में प्रेस क्लब लखनादौन के प्रवक्ता दिलीप चौरसिया ने बताया कि कार्यक्रम की पूरी तैयारी पूर्ण हो चुकी हैं। सम्मानीय अतिथियों ने कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति भी प्राप्त हो चुकी हैं। सम्मानीय अतिथियों, रक्तदाताओं सहित पत्रकारों ने उक्त कार्यक्रम में अपनी सहमति प्रदान कर दी हैं। इससे पूर्व भी प्रेस क्लब ने नगर में सामाजिक गतिविधियों के साथ ही 2 बडे कार्यक्रम आयोजित कर चुका हैं जिसमें पहली कार्यक्रम लखनादौन तहसील के शताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में लखनादौन को जिला बनाओं विषय पर विचार संगोष्ठी और गत वर्ष 26 जनवरी में हुये सांस्कृतिक कार्यक्रमों में पुरूस्कार वितरण का कार्यक्रम कर चुका हैं। आशा हैं कि यह कार्यक्रम भी सफल होगा।

मानसिक विक्षिप्त महिला ने बीच सड़क में दिया बच्चे को जन्म

जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ्य, केवलारी अस्पताल में भर्ती
सिवनी । जिले के केवलारी विकासखंड के अंतर्गत आने वाले उगली थाना क्षेत्र के ग्राम मोहगांव में 16 व 17 जनवरी की दरम्यिानी रात में एक मानसिक विक्षिप्त महिला ने बीच सड़क में बच्चे को जन्म दिया। हालाकि जन्म के तुरंत बाद जच्चा-बच्चा दोनों को 108 वाहन द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र केवलारी ले जाकर भर्ती कराया गया है, जहां दोनों स्वस्थ्य है।
मिली जानकारी के अनुसार उगली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम मोहगांव में सड़़क पर एक मानसिक विक्षिप्त महिला द्वारा बच्चे को जन्म दिये जाने की जानकारी 108 वाहन को दी गई। रात्रि लगभग 11 बजे उगली के 108 वाहन चालक दीपक घिघोड़े द्वारा महिला और बच्चे को वाहन में उठाकर लाया गया और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र केवलारी लाकर भर्ती कराया गया।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र केवलारी के विकासखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. अमृत लाकरा ने दैनिक सिवनी लोकवाणी से चर्चा करते हुये बताया कि रात्रि लगभग 1 बजे उक्त महिला को बच्चे सहित अस्पताल में लाकर भर्ती कराया गया है, जिसे 108 वाहन उगली ने लाया है। उक्त महिला की उम्र लगभग 26 वर्ष है जो कि मानसिक रूप से विक्षिप्त है वह अपना नाम रामप्यारी बाई ग्राम दुतका की रहने वाली बता रही है। अस्पताल में जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ्य है। पूर्व में भी महिला को अस्पताल से मोहगांव व तारटोला में ले जाकर दवाईयां दी गई थी। अभी तक उक्त महिला की शिनाख्त नहीं हो पायी है।

विधायक के बिगड़े बोल : देखे विडियो

धार-मनावर विधायक की रंगदारी जवान से कहा तेरी निकाल दूंगी पुलिसगिरी नगर निकाय चुनाव के जहां एक और मतदान हो रहे हैं वहीं दूसरी ओर मनावर विधायक अपनी दादागिरी दिखाने में पीछे नहीं हट रही है यह वही विधायक हैं जिनका थप्पड़ विधानसभा में भी गूंजा था और आज एक बार फिर इस विधायक ने अपनी दादागिरी पुलिसवालों पर दिखाई है कुर्सी लगाने की बात पर जहां पुलिस वालों ने कुर्सी लगाने से मना किया वही विधायक ने पहुंचकर वही कुर्सी लगाने की बात कही और पुलिस वालों को यह तक कर डाला तेरी पुलिसगिरी निकाल दूंगी

नपा में व्याप्त अव्यवस्था को लेकर आप की रैली

सिवनी–आम आदमी पार्टी, विधानसभा सिवनी के तत्वावधान मेंनगर पालिका, सिवनी में चल रही अव्यवस्थाओं के विरोध में नगर पालिका परिषद प्रांगण, सिवनी में 18/1/18 गुरुवार को दोपहर 2:00 बजे से धरना प्रदर्शन उपरांत पैदल रैली कर कलेक्टर सिवनी को ज्ञापसौंपा जावेगा। इस विरोध प्रदर्शन में अवैध & सुविधा विहीन कालोनी, नल जल योजना, बड़ी रेल लाइन बनने से मुआवजा & विस्थापन, व्याप्त भ्रस्टाचार एवं सत्ता-प्रशाषन गतिरोध सहित जन समश्याओं को उठाया जाना है।
नगर पालिका में व्याप्त अनियमितता के सम्बंध में आप सभी नागरिक गण जिन्हें व्यक्तिगत कोई भी समस्या है वे भी सादर आमंत्रित हैं।
अतः आप सभी से अपील की जाती है कि अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर नगर पालिका परिषद सिवनी में व्याप्त अनियमितताओं के विरोध में आम आदमी पार्टी का साथ दें ,उक्ताशय की जानकारी जयदीप सिंह बैस(जिला संयोजक), याहया आरिफ कुरेशी(विधनसभा सिवनी संगठन प्रभारी), विजय सिंह(जिला सचिव), रिजवान अहमद(जिला कोशाध्यक्ष), रामगोपाल चौधरी(जिला सह सचिव), परमानंद जैसवाल(व्यापारी प्रकोष्ठ,जिला संयोजक), राजेश पटेल जिला संयोजक श्रमिक विकास संगठन ऋषिकिशोर कुमारे(युवा शक्ति, पू.जिला संयोजक), राजेन्द्र चौधरी(अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ, जिला संयोजक) सहित आम आदमी पार्टी सिवनी द्वारा दी गई हे।

तमिलनाडु: सड़क हादसे में इंदौर के छह लोगों सहित 10 की मौत

तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले में देर रात हुए भीषण सड़क हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई, वहीं 13 लोग घायल हुए हैं. मृतकों में छह लोग मध्य प्रदेश के इंदौर के बताए जा रहे है.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ये लोग एक प्राइवेट वैन के जरिये मदुरई से कन्याकुमारी जा रहे थे. तभी तुतीकोरिन के थलवईपुरम इलाके में उनका वाहन नेशनल हाइवे पर एक पुल से जा भिड़ा. यह टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि 6 महिलाओं और 4 पुरुषों की मौके पर ही मौत हो गई. वहीं हादसे में घायल हुए 13 लोगों को तिरुनेलवेली के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

निर्धारित मापदंड की स्कूली बसो की जानकारी दे पालक- गोपालचन्द्र

सिवनी – अधिकांश अशासकीय स्कूलों में छात्र-छात्राओं के परिवहन हेतु स्कूल बसों की सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है। स्कूलों द्वारा उपलब्ध कराए गए वाहन मानक युक्त हो ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना का भय न रहे l इस हेतु माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्कूल बसों एवं अन्य 4 पहिया वाहनों के लिए मानक मापदंड जारी किये गये है। मापदंड अनुरूप स्कूल बस अथवा अन्य 4 पहिया वाहनों का रंग पीला होना चाहये तथा वाहन के सामने, पीछे व दोनो तरफ स्कूल का नाम लिखा होना चाहिये, यदि स्कूल वाहन स्वयं स्कूल का नहीं है, अनुबंधित हो तो उसमें on school duty लिखा होना चहिये। स्कूल वाहन में नीले रंग से ड्राईवर का नाम, पता, लाइसेंस नंबर तथा बस का रजिस्ट्रेशन नं एवं स्कूल संचालक या स्कूल का टेलीफोन नं. लिखा होना चाहिये, स्कूल वाहन में स्कूल बैग रखने हेतु पर्याप्त जगह होना चाहिये, स्कूल वाहन के दरवाजे दुरूस्त हो व चलती गाडी में दरवाजा लॉक होना चाहिये, स्कूल बस में मुख्य दरवाजा सहित एक आपातकाल दरवाजा होना चहिये, स्कूल बस में कम से कम 2 अग्निशमन यंत्र होना चाहिये, स्कूल
वाहन में स्पीड गवर्नर होना चाहिये व वाहन की गति 40 कि.मी. से तेज नहीं होना चाहिये, स्कूल वाहन में जी.पी.एस. सिस्टम तथा सी.सी.टी.वी. कैमरा हमेशा चालू हालत में होना चाहिये, वाहन में क्षमता से अधिक बच्चे नहीं होना चाहिए, बच्चों को उतारने-चढाने हेतु एक सहायक व एक सहायिका होनी चाहिये, स्कूल बस में एक महिला अटेंडेंट होना अनिवार्य है, वाहन में फस्ट एड बॉक्स व पीने का पानी की व्यवस्था होनी चाहिये, स्कूल वाहन में एक मोबाईल फोन होना चाहिये जो आपातकाल के वक्त उपयोग किया जा सके, वाहन चालक को कम से कम 05 वर्ष वाहन चलाने का अनुभव होना चाहिये तथा प्रतिवर्ष मेडिकल चेकअप होना चाहिये, इसके अतिरक्ति ड्राईवर तथा कंडेक्टर का पुलिस वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य है, ड्राईवर को शासन अथवा संस्था द्वारा निर्धारित यूनिफार्म पहने रहना चाहिये, वाहन रजिस्टर्ड तथा बीमाकृत होना चाहिये, 15 वर्ष से पुराने वाहनों को स्कूल बस हेतु परमिट नहीं दिया जावे। इस संबंध में स्कूल संचालकों एवं अभिभावकों को सतर्क रहने की अपील की है तथा मापदंड अनुरूप वाहन न पाये जाने पर इसकी जानकारी कलेक्टर कार्यालय व क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में देने की अपील की है।