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Seoni News: बारिश में तिरपाल के नीचे हुआ अंतिम संस्कार, केवलारी के इस गांव ने खोली विकास के दावों की पोल

मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के केवलारी विकासखंड से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने ग्रामीण विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम पंचायत चौरापाठा में श्मशान घाट पर टीन शेड नहीं होने के कारण मूसलाधार बारिश के बीच परिजनों को तिरपाल तानकर अंतिम संस्कार करना पड़ा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

मुख्य बातें (Highlights)

  • ● मामला केवलारी जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत चौरापाठा का
  • ● श्मशान घाट पर टीन शेड नहीं होने से बारिश में हुई परेशानी
  • ● परिजनों ने तिरपाल के नीचे किया अंतिम संस्कार
  • ● घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
  • ● ग्रामीणों ने मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाई

बारिश ने उजागर की श्मशान घाट की बदहाल व्यवस्था

केवलारी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत चौरापाठा में एक अंतिम संस्कार के दौरान श्मशान घाट की अव्यवस्था सामने आई। लगातार हो रही बारिश के बीच श्मशान स्थल पर टीन शेड नहीं होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों को तिरपाल लगाकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी।

इस दौरान मौजूद लोगों ने घटना का वीडियो भी बनाया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

ग्रामीणों ने लगाए उपेक्षा के आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान घाट पर टीन शेड और अन्य आवश्यक सुविधाओं की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

उनका आरोप है कि कई बार मांग रखने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिले। पहली ही तेज बारिश में व्यवस्थाओं की कमी साफ दिखाई दे गई।

वायरल वीडियो के बाद उठे सवाल

घटना का वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीण क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि अंतिम संस्कार जैसी मूलभूत सुविधा भी यदि सम्मानजनक तरीके से उपलब्ध नहीं हो पा रही है, तो ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

हालांकि, इस मामले में संबंधित पंचायत या प्रशासन की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि श्मशान घाट पर जल्द से जल्द टीन शेड, बैठने की व्यवस्था और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को अंतिम संस्कार के दौरान ऐसी कठिन परिस्थिति का सामना न करना पड़े।

ग्रामीण क्षेत्रों में श्मशान घाटों के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत टीन शेड, पहुंच मार्ग, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है। हालांकि कई गांवों में अब भी ऐसी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है, जिससे बारिश या अन्य मौसम की परिस्थितियों में लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।

यदि वायरल वीडियो के बाद प्रशासन संज्ञान लेता है, तो ग्राम पंचायत चौरापाठा के श्मशान घाट पर आवश्यक सुविधाओं के विकास का रास्ता खुल सकता है। साथ ही अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के श्मशान घाटों की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा होने की संभावना है।

चौरापाठा की यह घटना केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को भी सामने लाती है। अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील व्यवस्था के लिए सम्मानजनक और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना स्थानीय प्रशासन और पंचायतों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

MP सरकार का बड़ा तोहफा: दिव्यांग विद्यार्थियों को मिलेंगे लैपटॉप और मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, 31 अगस्त तक करें आवेदन

भोपाल: मध्यप्रदेश सरकार ने दिव्यांग विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। योजना के अंतर्गत पात्र छात्र-छात्राओं को लैपटॉप और मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जाएगी। आवेदन की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है।

मुख्य बातें (Highlights)
● 31 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन किए जा सकते हैं।
● पात्र दिव्यांग विद्यार्थियों को मिलेगा लैपटॉप या मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल।
● आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी।
● 15 सितंबर तक आवेदनों का परीक्षण और स्वीकृति।
● 3 दिसंबर, विश्व दिव्यांग दिवस पर होगा वितरण।
● योजना का उद्देश्य दिव्यांग विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है।

मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना के लिए आवेदन शुरू

सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। पात्र विद्यार्थी 31 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

योजना का उद्देश्य दिव्यांग विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी संसाधनों से जोड़ते हुए उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में सहयोग देना है।

पात्र विद्यार्थियों को क्या मिलेगा?

योजना के तहत पात्र एवं चयनित विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकता और पात्रता के अनुसार— लैपटॉप, मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल प्रदान की जाएगी, ताकि वे शिक्षा और दैनिक आवागमन दोनों में सुविधा प्राप्त कर सकें।

मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने क्या कहा?

सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार दिव्यांगजनों को शिक्षा, तकनीक और गतिशीलता से जोड़ने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि यह योजना दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ बनाएगी। साथ ही पात्र विद्यार्थियों से समय-सीमा के भीतर आवेदन करने और जिला अधिकारियों से योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन

सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के आयुक्त कृष्ण गोपाल तिवारी ने बताया कि योजना का पूरा संचालन ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। इससे आवेदन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध होगी।

उन्होंने संयुक्त एवं उप संचालकों को निर्देश दिए हैं कि सभी पात्र विद्यार्थियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर योजना का लाभ सुनिश्चित कराया जाए।

आवेदन से वितरण तक का पूरा शेड्यूल

आवेदन से वितरण तक का पूरा शेड्यूल

प्रक्रियातिथि
ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि31 अगस्त 2026
आवेदन परीक्षण एवं स्वीकृति15 सितंबर 2026 तक
लैपटॉप/मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल की खरीद प्रक्रिया15 अक्टूबर 2026 तक
वितरण3 दिसंबर 2026 (विश्व दिव्यांग दिवस)
वितरण की रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड5 दिसंबर 2026 तक

कैसे करें आवेदन?

योजना के पात्र छात्र-छात्राएं स्वयं ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्राप्त होने के बाद जिला कार्यालय पात्रता की जांच करेंगे और नियमों के अनुसार स्वीकृति प्रदान करेंगे।

विभाग ने विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से अपील की है कि अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन पूरा करें।

मध्यप्रदेश सरकार समय-समय पर दिव्यांगजनों के लिए शिक्षा, कौशल विकास और सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाएं संचालित करती है। मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना का उद्देश्य तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाकर दिव्यांग विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में बेहतर अवसर प्रदान करना है।

यह योजना आर्थिक रूप से जरूरतमंद दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। लैपटॉप से पढ़ाई में तकनीकी सहायता मिलेगी, जबकि मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल से उनकी आवाजाही आसान होगी, जिससे शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना दिव्यांग विद्यार्थियों को शिक्षा और तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। पात्र छात्र-छात्राओं को 31 अगस्त 2026 से पहले ऑनलाइन आवेदन कर इस योजना का लाभ अवश्य लेना चाहिए।

MP Pulse Polio Campaign: 3 दिन में 1.06 करोड़ से ज्यादा बच्चों को पिलाई गई पोलियो की खुराक, अभियान रहा सफल

भोपाल: मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान ने एक बार फिर बच्चों को पोलियो से सुरक्षित रखने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 28 से 30 जून तक चले राज्यव्यापी अभियान के दौरान 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के 1 करोड़ 6 लाख 51 हजार 737 बच्चों को पोलियो वैक्सीन की खुराक पिलाई गई।

मुख्य बातें (Highlights)
● 28 से 30 जून तक चला राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान
● प्रदेशभर में 1,06,51,737 बच्चों को पिलाई गई पोलियो की खुराक
● बूथों के साथ घर-घर जाकर भी बच्चों को दी गई वैक्सीन
● छूटे हुए बच्चों की पहचान कर उन्हें भी कराया गया टीकाकरण
● उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने अभियान की सफलता पर जताई खुशी

मध्यप्रदेश में सफल रहा राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान

मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का सफल संचालन 28 से 30 जून तक किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अभियान के दौरान 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के कुल 1 करोड़ 6 लाख 51 हजार 737 बच्चों को पोलियो वैक्सीन की खुराक पिलाई गई।

अभियान के सफल संचालन में प्रदेश के सभी जिलों ने बेहतर समन्वय, प्रभावी सूक्ष्म योजना, मजबूत मॉनिटरिंग और व्यापक जनजागरूकता के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बूथ से लेकर घर-घर तक पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीमें

स्वास्थ्य विभाग ने प्रत्येक पात्र बच्चे तक पोलियो की खुराक पहुंचाने के लिए व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं कीं। पोलियो बूथों के संचालन के साथ-साथ स्वास्थ्य कर्मियों ने घर-घर जाकर भी बच्चों को वैक्सीन पिलाई।

इसके अलावा अभियान के दौरान जिन बच्चों को किसी कारणवश पहले खुराक नहीं मिल सकी थी, उन्हें चिन्हित कर विशेष प्रयासों के माध्यम से टीकाकरण कराया गया।

दुर्गम क्षेत्रों में भी पहुंची स्वास्थ्य सेवाएं

अभियान के दौरान दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक विशेष टीमें भेजी गईं ताकि कोई भी पात्र बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे। इस उद्देश्य से स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने समन्वित रूप से कार्य किया।

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने जताई संतुष्टि

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान की सफलता पोलियो उन्मूलन के प्रति प्रदेश की प्रतिबद्धता, स्वास्थ्य कर्मियों की मेहनत और आम जनता के सहयोग का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भविष्य में भी बच्चों को पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास करती रहेगी।

जनप्रतिनिधियों और समुदाय की रही सक्रिय भागीदारी

अभियान की शुरुआत विभिन्न स्थानों पर जनप्रतिनिधियों द्वारा पोलियो बूथों का उद्घाटन कर की गई। अभियान के सफल संचालन में स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी रही।

राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का उद्देश्य जन्म से 5 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को पोलियो की खुराक उपलब्ध कराकर इस गंभीर बीमारी से बचाव सुनिश्चित करना है। भारत को वर्ष 2014 में पोलियो मुक्त घोषित किया गया था, लेकिन इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए समय-समय पर ऐसे अभियान चलाए जाते हैं, ताकि किसी भी संभावित संक्रमण को रोका जा सके।

इस खबर का असर

प्रदेशभर में बड़े पैमाने पर चलाया गया यह अभियान बच्चों के स्वास्थ्य सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। व्यापक टीकाकरण से पोलियो मुक्त भारत की उपलब्धि को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का सफल संचालन स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय प्रशासन और नागरिकों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। प्रत्येक पात्र बच्चे तक वैक्सीन पहुंचाने की यह पहल भविष्य में भी बच्चों को पोलियो से सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाएगी।

Seoni News: जल गंगा संवर्धन अभियान का जिला स्तरीय समापन, सिवनी कलेक्टर नेहा मीना ने जल संरक्षण को बताया भविष्य की जिम्मेदारी

सिवनी: सिवनी में शनिवार को आयोजित जल गंगा संवर्धन अभियान के जिला स्तरीय समापन समारोह में जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में कलेक्टर नेहा मीना ने जल बचाने को आने वाली पीढ़ियों के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी बताया, जबकि विधायक दिनेश राय ने हर खेत में तालाब और हर घर में वर्षा जल संचयन की आवश्यकता पर जोर दिया।

मुख्य बातें (Highlights)
● मानस भवन, सिवनी में हुआ जिला स्तरीय समापन समारोह
● जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान
● हर खेत में तालाब और हर घर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर जोर
● महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रही अभियान की विशेष उपलब्धि
● “मेरा वाटर बैंक” पहल का हुआ विमोचन
● उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी, कर्मचारी और जनप्रतिनिधि सम्मानित

मानस भवन में संपन्न हुआ जिला स्तरीय समापन कार्यक्रम

सिवनी के मानस भवन में शनिवार को जल गंगा संवर्धन अभियान का जिला स्तरीय समापन समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया।

इस अवसर पर अभियान के दौरान जिले में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों के पुनर्जीवन, पौधरोपण और जनजागरूकता के क्षेत्र में किए गए कार्यों का प्रस्तुतिकरण किया गया। उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को सम्मानित भी किया गया।

जल संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए हमारी जिम्मेदारी: कलेक्टर नेहा मीना

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर नेहा मीना ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि जिले में जनभागीदारी के माध्यम से कई नवाचार किए गए हैं, जिनसे जल संरक्षण के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। कलेक्टर ने खेत तालाब, अमृत सरोवर, वर्षा जल संचयन, जल संरचनाओं के संरक्षण और नदियों के कैचमेंट क्षेत्रों के विकास को निरंतर गति देने पर बल दिया।

उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से दीर्घकालिक कार्ययोजना बनाकर भूजल संवर्धन एवं जल सुरक्षा के लिए सतत प्रयास करने की अपील की।

हर खेत में तालाब और हर घर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग हो: विधायक दिनेश राय

कार्यक्रम में विधायक दिनेश राय ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देशभर में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया गया है। अब केवल पानी बचाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वर्षा जल को धरती के भीतर पहुंचाकर भविष्य सुरक्षित करना भी जरूरी है।

उन्होंने किसानों से अपनी कृषि भूमि पर छोटे-छोटे खेत तालाब बनाने का आग्रह किया, जिससे वर्षा जल का बेहतर उपयोग हो और भूजल स्तर में सुधार आए। साथ ही उन्होंने शहरी क्षेत्रों में प्रत्येक घर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

महिलाओं की भागीदारी बनी अभियान की सबसे बड़ी ताकत

जल गंगा संवर्धन अभियान में महिला जनप्रतिनिधियों, स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण महिलाओं की सक्रिय भागीदारी विशेष आकर्षण रही।

महिलाओं ने जल स्रोतों के संरक्षण, पौधरोपण, वर्षा जल संचयन, जनजागरूकता और सामुदायिक श्रमदान जैसे कार्यों में बढ़-चढ़कर योगदान दिया। ग्राम नंदौरा की सरपंच संगीता सोनकटे और ग्राम साजपानी की सरपंच सुदामा धुर्वे ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जनसहभागिता से जल संरक्षण के प्रयासों को व्यापक समर्थन मिला।

“मेरा वाटर बैंक” पहल बनी आकर्षण का केंद्र

समारोह में जनपद पंचायत धनोरा द्वारा विकसित “मेरा वाटर बैंक” पहल के लीफलेट का विमोचन किया गया।

इस पहल के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर वर्षा जल संचयन की व्यवस्था विकसित की जा रही है। प्रशासन के अनुसार इस पहल से लगभग एक करोड़ लीटर वर्षा जल का संचयन संभव हो सकेगा, जो भविष्य में जल संकट कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

उत्कृष्ट कार्य करने वालों को किया गया सम्मानित

अभियान में उल्लेखनीय योगदान देने पर विभिन्न विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों, पंचायत प्रतिनिधियों, शिक्षकों, वन विभाग के कर्मचारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया।

सम्मानित होने वालों में जनपद पंचायत धनोरा के सीईओ ओंकार सिंह ठाकुर, उपयंत्री चंद्रशेखर यादव, अभिनव सिंह ठाकुर, एपीओ मनरेगा भूपेंद्र सिंह राजपूत, सहायक यंत्री रोहणी बघेल, संगीता सोनकटे, सुदामा धुर्वे, नमिता साहू, संतोष सरयाम सहित विभिन्न विभागों के अनेक अधिकारी-कर्मचारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहे।

कार्यक्रम में रही जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उपस्थिति

समापन समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष मालती डेहरिया, जनपद पंचायत अध्यक्ष किरण भलावी, नगर पालिका अध्यक्ष ज्ञानचंद सनोड़िया, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अंजली शाह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान का उद्देश्य जल स्रोतों का संरक्षण, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना, भूजल स्तर में सुधार लाना और जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाना है। अभियान के तहत प्रदेशभर में तालाबों, कुओं, नदियों और अन्य जल संरचनाओं के संरक्षण एवं पुनर्जीवन पर कार्य किया जा रहा है।

जल संकट और बदलते जलवायु परिदृश्य के बीच ऐसे अभियान भविष्य की जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि नागरिक, किसान और स्थानीय संस्थाएं निरंतर भागीदारी निभाएं तो जल संरक्षण को स्थायी जनआंदोलन का रूप दिया जा सकता है।

सिवनी में आयोजित जल गंगा संवर्धन अभियान का समापन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जल संरक्षण के प्रति सामूहिक संकल्प का संदेश लेकर आया। जनभागीदारी, महिलाओं की सक्रिय भूमिका और “मेरा वाटर बैंक” जैसी पहलें भविष्य में जल सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।

Balaghat Flood: खेतों में बाढ़ से घिरे 16 ग्रामीणों को मौत के मुंह से निकाल लाई पुलिस, रेस्क्यू का Video चर्चा में

Balaghat Flood: मध्य प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के बीच बालाघाट जिले से राहत भरी खबर सामने आई है। किरनापुर थाना क्षेत्र के भानपुर गांव में खेतों पर काम करने गए 16 ग्रामीण अचानक बाढ़ के पानी से घिर गए। सूचना मिलते ही पुलिस, एसडीआरएफ और हॉक फोर्स ने संयुक्त अभियान चलाकर सभी ग्रामीणों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

मुख्य बातें (Highlights)

  • बालाघाट के किरनापुर थाना क्षेत्र के भानपुर गांव की घटना
  • खेतों में काम कर रहे 16 ग्रामीण बाढ़ के पानी में फंस गए
  • किरनापुर पुलिस, हट्टा पुलिस, एसडीआरएफ और हॉक फोर्स ने चलाया संयुक्त रेस्क्यू अभियान
  • सभी ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया
  • समय पर कार्रवाई से किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई
  • पुलिस ने बारिश के मौसम में सतर्क रहने की अपील की1

खेतों में काम के दौरान बढ़ा जलस्तर, चारों ओर से घिरे ग्रामीण

लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण बालाघाट जिले के किरनापुर थाना क्षेत्र के भानपुर गांव में खेतों पर कृषि कार्य करने गए करीब 16 ग्रामीण अचानक बाढ़ के पानी में फंस गए। देखते ही देखते आसपास के नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया, जिससे उनके वापस लौटने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया।

ग्रामीणों के चारों ओर पानी भर जाने से स्थिति गंभीर हो गई और उन्होंने मदद की गुहार लगाई।

पुलिस, एसडीआरएफ और हॉक फोर्स ने चलाया संयुक्त अभियान

घटना की सूचना मिलते ही किरनापुर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए हट्टा पुलिस, राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और हॉक फोर्स की टीम के साथ संयुक्त रेस्क्यू अभियान शुरू किया।

तेज बहाव और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद रेस्क्यू टीम ने समन्वय और साहस का परिचय देते हुए बाढ़ प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचकर सभी 16 ग्रामीणों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इसके बाद सभी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।

समय पर कार्रवाई से टला बड़ा हादसा

रेस्क्यू अभियान की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि सभी ग्रामीण सुरक्षित बचा लिए गए और किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। समय पर मिली सूचना और बचाव दल की त्वरित कार्रवाई से संभावित बड़ा हादसा टल गया।

बारिश के मौसम में पुलिस की महत्वपूर्ण अपील

मध्यप्रदेश पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि लगातार बारिश के दौरान नदी, नाले, पुल-पुलिया या जलमग्न रास्तों को पार करने का जोखिम न उठाएं।

पुलिस ने लोगों से खेतों या अन्य स्थानों पर जाने से पहले मौसम और जलस्तर की जानकारी लेने तथा प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की भी अपील की है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के मद्देनजर बैरिकेडिंग की गई है, इसलिए प्रतिबंधित मार्गों का उपयोग नहीं करना चाहिए।

किसी भी आपात स्थिति में नागरिक डायल-112 या नजदीकी पुलिस थाने से तत्काल संपर्क कर सकते हैं।

मध्य प्रदेश के कई जिलों में लगातार बारिश के कारण नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों तक पहुंचने और लौटने के दौरान जोखिम बढ़ जाता है। प्रशासन लगातार लोगों से सतर्क रहने और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की अपील कर रहा है।

यह घटना बताती है कि आपदा के समय त्वरित सूचना और विभिन्न एजेंसियों के बेहतर समन्वय से बड़ी जनहानि टाली जा सकती है। साथ ही यह लोगों के लिए भी संदेश है कि बारिश के दौरान जोखिम वाले क्षेत्रों में जाने से पहले पूरी सावधानी बरतें।

बालाघाट के भानपुर गांव में चलाया गया यह सफल रेस्क्यू अभियान पुलिस, एसडीआरएफ और हॉक फोर्स की तत्परता का उदाहरण है। समय पर की गई कार्रवाई से 16 ग्रामीणों की जान सुरक्षित बचाई जा सकी।

सिवनी में भीषण बस हादसा: विक्षिप्त युवक को बचाने के प्रयास में पेड़ से टकराकर पलटी सरगम ट्रैवल्स की बस, 9 घायल, 4 गंभीर

सिवनी, केवलारी, आदिल खान: मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में शुक्रवार शाम एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। केवलारी के पास ग्राम बोथिया में सिवनी से मंडला जा रही सरगम ट्रैवल्स की यात्री बस एक मानसिक रूप से विक्षिप्त युवक को बचाने के प्रयास में अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गई और पलट गई। हादसे में 9 यात्री घायल हुए हैं, जिनमें से 4 की हालत गंभीर बताई जा रही है।

केवलारी के बोथिया में हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार, सिवनी से मंडला जा रही सरगम ट्रैवल्स की यात्री बस शुक्रवार शाम करीब 5:30 बजे केवलारी थाना क्षेत्र के ग्राम बोथिया के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई।

प्रत्यक्ष जानकारी के मुताबिक, सड़क पर अचानक एक मानसिक रूप से विक्षिप्त युवक आ गया। उसे बचाने के प्रयास में चालक ने बस को मोड़ा, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक पेड़ से टकरा गया और पलट गया।

हादसे के बाद मची अफरा-तफरी, ग्रामीणों ने की मदद

बस पलटते ही घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। आसपास मौजूद ग्रामीण और राहगीर तुरंत मौके पर पहुंचे और बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकालने में मदद की। इसके बाद घायलों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

9 यात्री घायल, 4 को जिला अस्पताल सिवनी रेफर

घटना में कुल 9 यात्री घायल हुए हैं। सभी को पहले सिविल अस्पताल केवलारी ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया। प्राथमिक जांच के बाद 4 गंभीर घायलों को बेहतर उपचार के लिए जिला चिकित्सालय सिवनी रेफर कर दिया गया।

प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची

हादसे की सूचना मिलते ही एसडीएम महेश अग्रवाल और एसडीओपी आशीष भंराडे सिविल अस्पताल पहुंचे और घायलों का हालचाल जाना। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त बस को सड़क से हटवाकर यातायात सामान्य कराया तथा घटना की आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी।

मुख्य बातें (Highlights)

  • केवलारी के ग्राम बोथिया में शुक्रवार शाम बस हादसा।
  • सिवनी से मंडला जा रही सरगम ट्रैवल्स की बस दुर्घटनाग्रस्त।
  • मानसिक रूप से विक्षिप्त युवक को बचाने के प्रयास में हादसा।
  • बस पेड़ से टकराकर पलट गई।
  • 9 यात्री घायल, 4 की हालत गंभीर।
  • गंभीर घायलों को जिला चिकित्सालय सिवनी रेफर किया गया।
  • एसडीएम और एसडीओपी ने अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।

केवलारी-मंडला मार्ग पर यात्री बसों का नियमित संचालन होता है। इस मार्ग पर शाम के समय यातायात अपेक्षाकृत अधिक रहता है। ऐसे में सड़क पर अचानक किसी व्यक्ति या पशु के आ जाने से दुर्घटना का जोखिम बढ़ जाता है।

यह हादसा सड़क सुरक्षा और सतर्क वाहन संचालन की आवश्यकता को एक बार फिर सामने लाता है। साथ ही, दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों द्वारा घायलों की तत्काल मदद मानवता की मिसाल भी बनी।

केवलारी के बोथिया में हुआ यह बस हादसा राहत की बात यह है कि समय रहते घायलों को अस्पताल पहुंचा दिया गया। गंभीर रूप से घायल यात्रियों का जिला अस्पताल में इलाज जारी है, जबकि पुलिस दुर्घटना के संबंध में आवश्यक जांच कर रही है।

आपके बच्चे को नहीं पता आगे क्या पढ़ें? सही करियर चुनने में माता-पिता की भूमिका सबसे अहम

– पं. कृष्णकांत तिवारी, पत्रकार एवं लेखक: स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद कॉलेज और करियर का चुनाव किसी भी छात्र के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ होता है। यही वह समय होता है जब लिया गया एक निर्णय भविष्य की दिशा तय करता है। दुर्भाग्य से अधिकांश छात्र अपनी रुचि और क्षमता के बजाय दोस्तों, रिश्तेदारों या समाज के दबाव में विषय और करियर का चयन कर लेते हैं। परिणामस्वरूप बाद में वे असंतुष्टि, बेरोजगारी या करियर बदलने जैसी परिस्थितियों का सामना करते हैं।

हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा अच्छी शिक्षा प्राप्त करे और जीवन में सफल बने। लेकिन केवल अच्छी शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है। उतना ही आवश्यक है कि बच्चे की रुचि, उसकी क्षमता और स्वाभाविक प्रतिभा को भी समझा जाए। जिस क्षेत्र में बच्चे की वास्तविक रुचि होती है, उसी क्षेत्र में उसके सफल होने की संभावना सबसे अधिक रहती है।

अक्सर देखा जाता है कि माता-पिता अपने पेशे को ही बच्चों का भविष्य मान लेते हैं। यदि परिवार व्यवसाय से जुड़ा है तो बच्चे से भी व्यापार संभालने की अपेक्षा की जाती है। यदि माता-पिता शिक्षक, डॉक्टर या किसी अन्य पेशे में हैं तो वे चाहते हैं कि बच्चा भी उसी राह पर चले। कई बार इस प्रक्रिया में बच्चे की अपनी पसंद और क्षमता पीछे छूट जाती है।

हालांकि नई पीढ़ी के माता-पिता में सकारात्मक बदलाव भी दिखाई दे रहा है। अब कई परिवार बच्चों की रुचि को समझने का प्रयास कर रहे हैं। यह बदलाव स्वागतयोग्य है, क्योंकि किसी भी विषय में सफलता तभी संभव है जब उसके प्रति स्वाभाविक लगाव हो। बिना रुचि के केवल डिग्री तो हासिल की जा सकती है, लेकिन उत्कृष्ट करियर बनाना कठिन होता है।

यदि माता-पिता चाहते हैं कि बच्चे में किसी क्षेत्र के प्रति रुचि विकसित हो, तो केवल सलाह देना पर्याप्त नहीं है। उसे उस क्षेत्र का व्यावहारिक अनुभव भी मिलना चाहिए। उदाहरण के लिए यदि बच्चा कानून के क्षेत्र में जाना चाहता है तो उसे किसी अनुभवी वकील के कार्यालय का वातावरण देखने, समझने और समय-समय पर वहां जाने का अवसर मिलना चाहिए। इसी प्रकार व्यवसायी अपने बच्चों को बचपन से ही व्यापार की बारीकियों से परिचित कराते हैं, जिससे उनमें अनुभव और आत्मविश्वास दोनों विकसित होते हैं।

बच्चे का करियर तय करने से पहले माता-पिता को उसकी गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए। उसके शिक्षकों से चर्चा करनी चाहिए, उसकी रुचियों को समझना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर करियर काउंसलर की सलाह भी लेनी चाहिए। जल्दबाजी में लिया गया निर्णय भविष्य में बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है।

आज बड़ी संख्या में छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे यूपीएससी, नीट और जेईई की तैयारी करते हैं। इनमें सफलता पाने वाले छात्रों की संख्या सीमित होती है। ऐसे में यदि छात्र केवल एक ही विकल्प पर निर्भर रहता है और अपनी अन्य क्षमताओं का विकास नहीं करता, तो असफलता की स्थिति में उसे मानसिक और आर्थिक दोनों तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास भी उतना ही आवश्यक है।

हमारी शिक्षा व्यवस्था लंबे समय तक पुस्तकीय ज्ञान पर केंद्रित रही है। हालांकि हाल के वर्षों में कौशल आधारित शिक्षा पर जोर बढ़ा है, फिर भी व्यावहारिक प्रशिक्षण को और मजबूत करने की आवश्यकता है। यदि स्कूल और कॉलेज स्तर पर विद्यार्थियों को वास्तविक कार्य अनुभव, इंटर्नशिप और कौशल प्रशिक्षण अधिक मिले, तो वे रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार के लिए भी बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे।

माता-पिता को चाहिए कि वे बचपन से ही बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करें। केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहकर उन्हें प्रेरणादायक पुस्तकों, सफल व्यक्तियों की जीवनियां और कौशल विकास से जुड़ी सामग्री पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें। यह आदत उनके व्यक्तित्व और सोच दोनों को समृद्ध करेगी।

सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। शिक्षकों को शिक्षण के अलावा सर्वेक्षण, जनगणना, चुनाव और अन्य प्रशासनिक कार्यों में लगाया जाता है, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है। यदि शिक्षकों को मुख्य रूप से शिक्षण कार्य पर ही केंद्रित रखा जाए और अन्य कार्यों के लिए अलग व्यवस्था विकसित की जाए, तो विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार संभव है।

अंततः शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसा सक्षम और आत्मनिर्भर नागरिक तैयार करना होना चाहिए जो अपनी रुचि, कौशल और मेहनत के बल पर जीवन में आगे बढ़ सके। इसलिए हर माता-पिता को यह प्रयास करना चाहिए कि उनका बच्चा पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ किसी न किसी व्यावहारिक कौशल से भी अवश्य जुड़े। यही संतुलन उसे भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर ढंग से तैयार करेगा।

सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों पर सख्त हुईं सिवनी कलेक्टर नेहा मीना, अधिकारियों को दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

सिवनी जिले में सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 100 दिनों से अधिक समय से लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित और संतुष्टिपूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई विभागवार समीक्षा

शुक्रवार को आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना ने विभिन्न विभागों से संबंधित सीएम हेल्पलाइन शिकायतों की विभागवार समीक्षा की। बैठक में उन्होंने लंबे समय से लंबित प्रकरणों पर चिंता जताते हुए संबंधित अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ समयबद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि शिकायतों का समाधान केवल औपचारिकता नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा हो जिससे शिकायतकर्ता को वास्तविक संतुष्टि मिल सके।

100 दिन से लंबित मामलों पर विशेष फोकस

समीक्षा बैठक के दौरान कलेक्टर ने उन शिकायतों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए, जो 100 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों का शीघ्र निराकरण कर लंबित प्रकरणों की संख्या कम की जाए।

साथ ही अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया कि जिले की सीएम हेल्पलाइन रैंकिंग को प्रभावित करने वाली शिकायतों का प्राथमिकता के साथ समाधान किया जाए।

बिना अटेंड कोई शिकायत लंबित नहीं रहे

कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी शिकायत बिना अटेंड किए लंबित नहीं रहनी चाहिए। प्रत्येक विभाग शिकायत मिलने के बाद नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करे और अधिक से अधिक मामलों का संतुष्टिपूर्ण निराकरण सुनिश्चित करे।

उन्होंने समय-सीमा का पालन करने के साथ शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण समाधान पर भी जोर दिया।

पेयजल और जल गुणवत्ता संबंधी शिकायतों को दी सर्वोच्च प्राथमिकता

बैठक में नगरीय निकाय, जल निगम और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने कहा कि पेयजल आपूर्ति और जल गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों का तत्काल निराकरण किया जाए, क्योंकि ये सीधे आमजन के दैनिक जीवन से जुड़े विषय हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

जनसेवा व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर

कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना ने अधिकारियों से कहा कि सीएम हेल्पलाइन शासन की महत्वपूर्ण जनसेवा व्यवस्था है। इसलिए शिकायतों के निराकरण में संवेदनशीलता, जवाबदेही और समय-सीमा का पालन अनिवार्य है, ताकि लोगों को समय पर राहत मिल सके और जिले की सीएम हेल्पलाइन रैंकिंग में भी सुधार हो।

मुख्य बातें (Highlights)

  • कलेक्टर नेहा मीना ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा की।
  • 100 दिनों से अधिक समय से लंबित शिकायतों पर गंभीरता जताई।
  • विभागों को त्वरित और संतुष्टिपूर्ण निराकरण के निर्देश दिए।
  • बिना अटेंड कोई शिकायत लंबित न रखने की हिदायत।
  • पेयजल और जल गुणवत्ता संबंधी शिकायतों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश।
  • समय-सीमा और गुणवत्ता के साथ शिकायतों का समाधान सुनिश्चित करने पर जोर।

सीएम हेल्पलाइन मध्य प्रदेश सरकार की प्रमुख शिकायत निवारण प्रणाली है, जिसके माध्यम से नागरिक विभिन्न सरकारी विभागों से जुड़ी समस्याओं और शिकायतों को दर्ज कराते हैं। शिकायतों के समयबद्ध और संतोषजनक निराकरण के आधार पर जिलों एवं विभागों की कार्यप्रणाली का भी मूल्यांकन किया जाता है।

प्रशासन के इस सख्त रुख से लंबित शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। विशेष रूप से पेयजल और अन्य नागरिक सेवाओं से जुड़ी समस्याओं के शीघ्र निराकरण से आम लोगों को राहत मिल सकती है।

सीएम हेल्पलाइन शिकायतों की समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देश बताते हैं कि जिला प्रशासन लंबित मामलों के निपटारे और जनसेवा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर गंभीरता से काम कर रहा है। यदि विभाग समय-सीमा और गुणवत्ता के साथ कार्रवाई करते हैं, तो इससे शिकायतकर्ताओं का भरोसा और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों मजबूत होंगे।

सिवनी: भोमा कटिया के जैविक कृषि प्रक्षेत्र का कलेक्टर नेहा मीना ने किया निरीक्षण, किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए किया प्रेरित

सिवनी जिले में पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शुक्रवार को कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना ने भोमा कटिया स्थित शासकीय जैविक कृषि प्रक्षेत्र का दौरा कर पौधरोपण किया और किसानों से प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाने की अपील की।

भोमा कटिया के जैविक कृषि प्रक्षेत्र का किया भ्रमण

सिवनी जिले के भोमा कटिया स्थित शासकीय जैविक कृषि प्रक्षेत्र में शुक्रवार को कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना ने विभिन्न कृषि गतिविधियों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण और जल संसाधनों के संवर्धन का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जल स्रोतों की रक्षा, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करने की सामूहिक पहल है।

बीज उत्पादन कार्यक्रम की प्रगति का लिया जायजा

भ्रमण के दौरान कलेक्टर ने कृषि विभाग द्वारा संचालित गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन कार्यक्रम का अवलोकन किया। अधिकारियों से उन्होंने कार्यक्रम की कार्यप्रणाली, प्रगति और किसानों को दिए जा रहे तकनीकी मार्गदर्शन की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

उन्होंने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले बीज और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियां किसानों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ जिले की कृषि को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

किसानों से किया संवाद, प्राकृतिक खेती पर दिया जोर

कलेक्टर ने उपस्थित किसानों से चर्चा करते हुए प्राकृतिक और जैविक खेती को समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता कम कर प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित खेती को अपनाना चाहिए।

उन्होंने किसानों को बताया कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होता है और खेती की लागत भी कम होती है, जिससे किसानों को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।

वर्मी कम्पोस्ट इकाई का किया निरीक्षण

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने प्रक्षेत्र में संचालित वर्मी कम्पोस्ट इकाई का भी अवलोकन किया। उन्होंने वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने की प्रक्रिया की जानकारी ली और किसानों को जैविक खाद के अधिकाधिक उपयोग के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि वर्मी कम्पोस्ट मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ टिकाऊ एवं लाभकारी खेती की मजबूत नींव तैयार करता है।

अधिकारियों ने दी योजनाओं की जानकारी

कृषि विभाग के अधिकारियों ने कलेक्टर को जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए संचालित विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों की जानकारी दी।

इस अवसर पर सीईओ जिला पंचायत श्रीमती अंजली शाह, कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा क्षेत्र के अनेक किसान मौजूद रहे।

मुख्य बातें (Highlights)

  • कलेक्टर नेहा मीना ने भोमा कटिया के जैविक कृषि प्रक्षेत्र का निरीक्षण किया।
  • जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत पौधरोपण किया।
  • बीज उत्पादन कार्यक्रम और कृषि गतिविधियों की समीक्षा की।
  • किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।
  • वर्मी कम्पोस्ट इकाई का निरीक्षण कर जैविक खाद के उपयोग पर जोर दिया।
  • सीईओ जिला पंचायत अंजली शाह सहित कृषि विभाग के अधिकारी और किसान रहे उपस्थित।

मध्य प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं। जैविक कृषि प्रक्षेत्र किसानों को उन्नत तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज, जैविक खाद और प्राकृतिक खेती की आधुनिक पद्धतियों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

प्राकृतिक और जैविक खेती को लेकर प्रशासन की सक्रियता किसानों को कम लागत वाली, पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ खेती की ओर प्रेरित कर सकती है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के साथ कृषि उत्पादन को दीर्घकालिक रूप से लाभ मिलने की संभावना है।

भोमा कटिया के जैविक कृषि प्रक्षेत्र का कलेक्टर नेहा मीना का दौरा पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। पौधरोपण, बीज उत्पादन और जैविक खेती पर दिया गया जोर जिले में टिकाऊ कृषि मॉडल को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक कदम है।

केवलारी के लोगों के लिए बड़ा मौका, 7 जुलाई को सिवनी कलेक्टर नेहा मीणा सुनेंगी आपकी शिकायतें, मौके पर होगा समाधान

यदि आप केवलारी क्षेत्र से हैं और लंबे समय से किसी सरकारी समस्या के समाधान का इंतजार कर रहे हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। 7 जुलाई को आयोजित होने वाली विशेष जनसुनवाई में नागरिक अपनी शिकायतें, मांगें और समस्याएं सीधे कलेक्टर के समक्ष रख सकेंगे, जिससे उनके निराकरण की प्रक्रिया तेजी से शुरू हो सकेगी।

केवलारी में 7 जुलाई को होगी विशेष जनसुनवाई

सिवनी जिले के विकासखंड केवलारी में मंगलवार, 7 जुलाई को विशेष जनसुनवाई आयोजित की जाएगी। इस जनसुनवाई की अध्यक्षता कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना करेंगी। कार्यक्रम का उद्देश्य आम नागरिकों को प्रशासन से सीधे संवाद का अवसर उपलब्ध कराना और उनकी समस्याओं का प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है।

जनसुनवाई के दौरान क्षेत्रवासी अपनी व्यक्तिगत समस्याओं के साथ-साथ सार्वजनिक हित से जुड़े मामलों, शिकायतों और विभिन्न मांगों से संबंधित आवेदन प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत कर सकेंगे।

शिकायतों पर होगी नियमानुसार कार्रवाई

जिला प्रशासन के अनुसार जनसुनवाई में प्राप्त सभी आवेदनों का संबंधित विभागों द्वारा परीक्षण किया जाएगा। जिन मामलों में कार्रवाई आवश्यक होगी, उनमें नियमानुसार प्रक्रिया अपनाते हुए समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

प्रशासन का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य लोगों की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी निराकरण करना है।

नागरिकों से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील

जिला प्रशासन ने केवलारी क्षेत्र के नागरिकों से अपील की है कि वे 7 जुलाई को आयोजित विशेष जनसुनवाई में अधिक से अधिक संख्या में शामिल हों। जिन लोगों की किसी विभाग से संबंधित शिकायत, समस्या या जनहित का कोई मुद्दा लंबित है, वे आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।

प्रमुख बातें

  • 7 जुलाई को केवलारी में विशेष जनसुनवाई आयोजित होगी।12
  • कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना जनसुनवाई की अध्यक्षता करेंगी।
  • नागरिक अपनी व्यक्तिगत एवं सार्वजनिक समस्याओं से जुड़े आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे।
  • संबंधित विभाग आवेदनों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।
  • पात्र मामलों के समयबद्ध निराकरण पर विशेष जोर रहेगा।
  • प्रशासन ने नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।

जनसुनवाई व्यवस्था का उद्देश्य प्रशासन और आम नागरिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है। इसके माध्यम से लोगों को अपनी समस्याएं बिना किसी मध्यस्थ के संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का अवसर मिलता है। इससे शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनने में मदद मिलती है।

यदि आपके क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी, राजस्व, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, प्रमाण-पत्र, पेंशन या किसी अन्य सरकारी सेवा से जुड़ी समस्या लंबित है, तो यह जनसुनवाई सीधे प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकती है।

केवलारी में आयोजित होने वाली विशेष जनसुनवाई आम नागरिकों और प्रशासन के बीच संवाद को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे लोगों को अपनी समस्याएं सीधे जिला प्रशासन के सामने रखने का अवसर मिलेगा और पात्र मामलों के समाधान की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।