घंसौर, उमेश श्रीवास्तव -: डिजिटल युग में साइबर अपराध लगातार नए-नए तरीकों से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। फर्जी कॉल, ओटीपी, केवाईसी अपडेट, निवेश के झांसे, सोशल मीडिया हैकिंग और फर्जी लिंक के माध्यम से साइबर ठग आम नागरिकों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं। इन बढ़ते साइबर अपराधों पर रोक लगाने और लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से घंसौर पुलिस ने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) घंसौर में विशेष साइबर जनजागरूकता अभियान चलाया।
यह अभियान पुलिस अधीक्षक कृष्णचंद्र लालचंदानी के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दीपक मिश्रा के मार्गदर्शन एवं पुलिस अनुविभागीय अधिकारी अपूर्व भलावी के सानिध्य में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में थाना प्रभारी लक्ष्मण सिंह झारिया एवं घंसौर पुलिस की टीम ने विद्यार्थियों को साइबर अपराधों से बचाव के व्यावहारिक उपाय बताए।
थाना प्रभारी श्री झारिया ने कहा कि साइबर अपराधी लोगों की छोटी-सी लापरवाही का फायदा उठाकर बैंक खाते खाली कर देते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि किसी भी अनजान व्यक्ति से अपना ओटीपी, बैंक खाता, एटीएम, यूपीआई पिन या अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांचें तथा सोशल मीडिया पर आने वाले फर्जी संदेशों और लुभावने ऑफरों से सतर्क रहें।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आजकल साइबर अपराधी बैंक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, बिजली विभाग, केवाईसी अपडेट, लॉटरी, नौकरी और निवेश के नाम पर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं तथा साइबर क्राइम पोर्टल के माध्यम से भी रिपोर्ट करें, ताकि समय रहते कार्रवाई कर नुकसान को रोका जा सके।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, सोशल मीडिया सुरक्षा और मोबाइल एप्लिकेशन के सुरक्षित उपयोग की जानकारी दी गई। साथ ही उन्हें मजबूत पासवर्ड बनाने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करने और साइबर ठगी की किसी भी घटना की तत्काल पुलिस को सूचना देने की सलाह दी गई।
घंसौर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि जागरूक रहें, सतर्क रहें और किसी भी प्रकार के ऑनलाइन प्रलोभन या दबाव में आकर अपनी व्यक्तिगत एवं बैंकिंग जानकारी साझा न करें। पुलिस का कहना है कि “सावधानी ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
