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बूंद-बूंद के लिए तरस रहा सिवनी शहर, प्रशासन को अब गंभीर होना होगा – आशीष मानाठाकुर

सिवनी नगर में पेयजल संकट कोई नई बात नहीं है, परंतु हर वर्ष जैसे ही ग्रीष्म ऋतु दस्तक देती है, यह समस्या विकराल रूप धारण कर लेती है। शहरवासियों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ता है, और प्रशासन की उदासीनता इस संकट को और भी गंभीर बना देती है। भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष श्री आशीष मानाठाकुर ने इस समस्या को लेकर जिला कलेक्टर सुश्री संस्कृति जैन से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल समाधान की मांग की।

नगरपालिका की जल आपूर्ति व्यवस्था असफल

श्री मानाठाकुर ने बताया कि नगर पालिका परिषद सिवनी के पास दो WTP (Water Treatment Plant) अवश्य हैं, परंतु उनमें जलशुद्धिकरण की क्षमता नगण्य है। इस वजह से जल आपूर्ति व्यवस्था चरमराई हुई है और लोगों को स्वच्छ पेयजल प्राप्त नहीं हो पा रहा है।

उन्होंने यह सुझाव दिया कि:

  • बंडोल और सुआखेड़ा WTP को पुनः सक्रिय किया जाए।
  • बैनगंगा नदी से नियमित जलग्रहण किया जाए ताकि जलस्रोतों की उपलब्धता सुनिश्चित हो।
  • सौर ऊर्जा आधारित वैकल्पिक ट्रांसफार्मर की स्थापना की जाए जिससे बिजली कटौती के कारण जलापूर्ति में रुकावट न हो।

ग्रामीण क्षेत्रों की जलापूर्ति पर पुनर्विचार की आवश्यकता

वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए PHE विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों को जो ट्यूबवेल और बीच लाइन से पानी सिंचाई के लिए दिया जा रहा है, उस पर तात्कालिक रूप से रोक लगाई जाए ताकि शहर की जनता को राहत मिल सके।

सिवनी की आबादी दिन-ब-दिन बढ़ रही है, परंतु जल संसाधन और वितरण प्रणाली में किसी प्रकार का व्यापक सुधार नहीं किया गया है। यह एक खतरनाक संकेत है, जिससे आने वाले वर्षों में हालात और बदतर हो सकते हैं।

प्रशासन द्वारा किया जा रहा वार्षिक भुगतान भी बेअसर

यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि नगर पालिका परिषद सिवनी द्वारा जल संसाधन विभाग को प्रतिवर्ष बड़ी राशि का भुगतान किया जाता है, परंतु इसके बावजूद नगरवासियों को नियमित पेयजल नहीं मिल रहा है। यह एक बड़ी प्रशासनिक विफलता है, जिससे जनता का भरोसा टूट रहा है।

शहर में टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की मांग

श्री मानाठाकुर ने अपने प्रेस वक्तव्य में यह भी कहा कि जब तक स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक शहर के 24 वार्डों, मोहल्लों, कालोनियों, चौक-चौराहों पर नगर पालिका परिषद के माध्यम से पानी के टैंकरों की व्यवस्था की जाए। इससे तत्काल राहत मिलेगी और जनता का आक्रोश भी कुछ हद तक शांत हो सकेगा।

जिला कलेक्टर ने दिया समाधान का भरोसा

इस गंभीर मुद्दे को लेकर जिला कलेक्टर सुश्री संस्कृति जैन ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही पेयजल संकट को समाप्त करने के लिए भरपूर प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने विभागों को निर्देश दिए हैं कि जल्द से जल्द कार्य योजना बनाकर उसे क्रियान्वित किया जाए।

पेयजल संकट से प्रभावित क्षेत्र और जनता की पीड़ा

सिवनी के बड़ी बाजार, जुने चौक, डूंडा सिवनी, बरघाट रोड, गणेश चौक, सिविल लाइन, नया बस स्टैंड, छोटी मस्जिद इत्यादि इलाकों में घंटों लाइन में लगने के बाद भी लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है।

बुजुर्ग, महिलाएं, और बच्चे पीने के पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं। कई इलाकों में पानी की आपूर्ति सप्ताह में एक या दो दिन ही हो रही है, वह भी केवल आधे घंटे के लिए।

पानी ना होने से शिक्षा और रोजगार पर भी प्रभाव

पानी की किल्लत का असर सिर्फ घरेलू जीवन तक सीमित नहीं है। छात्रों की पढ़ाई, ऑनलाइन क्लासेस, और कार्यालयों में कार्यरत लोगों के दैनिक जीवन पर इसका गहरा असर पड़ रहा है। छोटे व्यवसाय, जैसे होटल, रेस्टोरेंट, नाई, धोबी आदि का कार्य भी ठप पड़ा है।

स्थायी समाधान के लिए आवश्यक सुझाव

  1. नई जल योजनाओं का निर्माण: जिले में नई जलापूर्ति योजनाओं की आवश्यकता है जो आने वाले वर्षों की जनसंख्या को ध्यान में रखकर बनाई जाएं।
  2. पुरानी पाइप लाइनों का प्रतिस्थापन: लीक हो रही पाइप लाइनें लाखों लीटर पानी बर्बाद कर रही हैं, उन्हें तुरंत बदला जाए।
  3. रेनवॉटर हार्वेस्टिंग: हर मोहल्ले, स्कूल, सरकारी दफ्तर और कॉलोनी में वर्षा जल संचयन प्रणाली अनिवार्य की जाए।
  4. जल जन-जागरूकता अभियान: लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाए ताकि वे भी इस संकट को समाप्त करने में भागीदार बनें।
  5. स्थायी जल स्रोत का विकास: सिवनी में एक स्थायी जल स्रोत की तलाश और उसका विकास प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।

जनता को चाहिए प्रशासनिक जवाबदेही

अब समय आ गया है जब सिवनी की जनता प्रशासन से जवाबदेही की मांग करे। जनता को यह जानने का अधिकार है कि प्रतिवर्ष दिए जा रहे करोड़ों रुपये के बावजूद उन्हें पानी क्यों नहीं मिल रहा है।

शहरवासियों के मौलिक अधिकारों में पेयजल आपूर्ति एक महत्वपूर्ण अधिकार है, और यदि प्रशासन इस पर गंभीरता नहीं दिखाता तो जनता को सड़क पर उतरकर आंदोलन करना पड़ सकता है।

सिवनी कलेक्टर ने शुरू किया “Gift A Desk” अभियान: जिले की प्राथमिक शालाओं में डेस्क-बेंच उपलब्धता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम

सिवनी: सिवनी जिले में शिक्षा के स्तर को ऊँचाई तक पहुँचाने के लिए कलेक्टर संस्कृति जैन (Seoni Collector Sanskriti Jain) के मार्गदर्शन में एक अभिनव पहल “गिफ्ट अ डेस्क” (Gift A Desk) अभियान के रूप में शुरू की गई है। “गिफ्ट अ डेस्क” (Gift A Desk) अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले की शासकीय प्राथमिक शालाओं में अध्ययनरत विद्यार्थियों को उपयुक्त फर्नीचर — विशेषकर डेस्क एवं बेंच — की सुविधा उपलब्ध कराना है, जिससे बच्चों को बेहतर अध्ययन वातावरण मिल सके।

📚 शिक्षा की बुनियाद में सुधार की अनोखी पहल

जिले के 1492 शासकीय विद्यालयों में कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों के लिए डेस्क और बेंच की भारी कमी लंबे समय से एक चुनौती रही है। इस अभाव के कारण विद्यार्थियों को फर्श पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है, जिससे न केवल उनकी एकाग्रता प्रभावित होती है बल्कि उनके स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है।

“गिफ्ट अ डेस्क” अभियान के माध्यम से इस समस्या का समाधान जनसहयोग से किया जा रहा है। यह अभियान केवल एक फर्नीचर वितरण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को शिक्षा में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने का एक मंच है।

🛠️ फर्नीचर निर्माताओं की भूमिका और सहभागिता

दिनांक 3 अप्रैल को सिवनी कलेक्टर सुश्री संस्कृति जैन ने जिले के सभी फर्नीचर निर्माताओं के साथ बैठक कर उन्हें इस अभियान से जोड़ने का आग्रह किया। उन्होंने अपील की कि वे बिना मुनाफा के आधार पर उच्च गुणवत्ता वाले डेस्क-बेंच का निर्माण करें जिससे सरकारी विद्यालयों को न्यूनतम लागत पर बेहतर फर्नीचर उपलब्ध कराया जा सके।

इस बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि यह न केवल एक सामाजिक दायित्व है बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को सशक्त बनाने का एक सशक्त माध्यम भी है। कलेक्टर ने निर्माणकर्ताओं को प्रेरित किया कि वे “गिफ्ट अ डेस्क” अभियान को एक मानव सेवा का अवसर समझकर आगे आएं।

👨‍👩‍👧‍👦 जनभागीदारी की मिसाल बनता यह अभियान

यह अभियान सिर्फ प्रशासनिक पहल नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने वाली जनचेतना का भी प्रतीक है। जनप्रतिनिधियों, व्यापारी संघों, सामाजिक संगठनों, शिक्षकों, अभिभावकों और आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे आगे आकर इस “#गिफ्ट_अ_डेस्क” पहल का हिस्सा बनें।

जनता के स्वैच्छिक योगदान से अब तक सैकड़ों विद्यालयों में डेस्क-बेंच की व्यवस्था की जा चुकी है। कई व्यापारी संगठनों एवं समाजसेवियों ने पूरे स्कूलों को गोद लेकर पूर्ण फर्नीचर की जिम्मेदारी उठाई है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है।

🎯 लक्ष्य : हर विद्यार्थी को मिले डेस्क-बेंच की सुविधा

अभियान का उद्देश्य केवल डेस्क-बेंच उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि “हर विद्यार्थी के लिए एक डेस्क” का सिद्धांत लागू करना है। इससे छात्रों को न केवल पढ़ाई का अनुकूल माहौल मिलेगा बल्कि उनमें सम्मान, अनुशासन और एकाग्रता की भावना भी विकसित होगी।

साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया गया है कि दिए गए डेस्क-बेंच सुरक्षित, टिकाऊ और बच्चों के लिए अनुकूल ऊँचाई के हों ताकि उनका शारीरिक विकास प्रभावित न हो।

📈 “गिफ्ट अ डेस्क” का सामाजिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव

शोध बताते हैं कि जब बच्चों को बेहतर बैठने की सुविधा मिलती है, तो उनकी शैक्षणिक उपलब्धियाँ बेहतर होती हैं। जब एक बच्चा डेस्क पर बैठकर आत्मसम्मान से पढ़ाई करता है, तो उसमें आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता स्वतः विकसित होती है।

“गिफ्ट अ डेस्क” अभियान ने न केवल विद्यालयों के भौतिक ढांचे को बदला है, बल्कि समाज को शिक्षा की ओर संवेदनशील और उत्तरदायी भी बनाया है।

📢 प्रशासन की अपील : आइए हम सब मिलकर एक नई कहानी लिखें

जिला प्रशासन सिवनी द्वारा जिले के सभी नागरिकों से निवेदन किया गया है कि वे इस अभियान में स्वेच्छा से भाग लें और जरूरतमंद विद्यालयों में फर्नीचर दान कर बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में सहयोग करें।

डेस्क बेंच दान करने के लिए विशेष पोर्टल, संपर्क सूत्र, और अभियान से जुड़ने के तरीके भी सार्वजनिक किए गए हैं।

इस अभियान की सफलता तभी संभव है जब हर नागरिक इसे अपना व्यक्तिगत दायित्व समझकर योगदान देगा।

💬 “गिफ्ट अ डेस्क” : कैसे जुड़ें इस मुहिम से?

यदि आप भी इस अभियान से जुड़न चाहते है तो आप सीधे महेश बघेल से संपर्क कर सकते है जिनका मोबाइल नंबर 8989033115 है। महेश बघेल ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अभियान में आम नागरिक से लेकर राजनेताओं तक अपनी क्षमता अनुसार अपना योगदान दे सकते है.

  • डेस्क-बेंच निर्माण में सहयोग करें, चाहे वह धनराशि के रूप में हो या सामग्री के रूप में।
  • स्थानीय व्यापारिक संस्थाओं, एनजीओ, धार्मिक संगठनों से संपर्क कर सामूहिक रूप से डोनेशन ड्राइव शुरू करें।
  • सोशल मीडिया पर #Gift_a_Desk #गिफ्ट_अ_डेस्क टैग के साथ इस अभियान को साझा करें, ताकि और लोग जागरूक हों।

🔚 शिक्षा में निवेश, राष्ट्र निर्माण का आधार

“गिफ्ट अ डेस्क” अभियान आज केवल सिवनी जिले की कहानी नहीं रह गया है, यह एक राष्ट्रीय स्तर पर अपनाए जाने योग्य मॉडल बन गया है। हर बच्चा जब अपने डेस्क पर बैठेगा और गर्व से पढ़ाई करेगा, तब यह पहल सच्चे अर्थों में सफल मानी जाएगी। आइए, हम सब मिलकर शिक्षा की इस क्रांति में भागीदार बनें और अपने छोटे-छोटे प्रयासों से एक बड़ा परिवर्तन लाएँ।

सिवनी: सावधान रहें, सतर्क रहें, बुधवारी बाजार में एक्टिवा सवार ठग महिलाओं को बना रहे हैं निशाना – Watch Video

सिवनी। बुधवारी बाजार सिवनी से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है जहाँ दो संदिग्ध युवक सफेद रंग की एक्टिवा (White Activa) पर सवार होकर बाजार की दुकानों में महिलाओं को निशाना बना रहे हैं। यह दोनों युवक चालाकी से महिलाओं की व्यस्तता का फायदा उठाकर सामान और नगद पैसे चोरी कर मौके से फरार हो जा रहे हैं।

वायरल सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि दोनों युवक स्कूटी में दुकान पहुंचते है जिसमे से एक युवक सामान लेने के बहाने दुकान में आता है और दूसरा युवक गाड़ी में सवार रहता है.

दुकान में आए युवक द्वारा महिला दुकानदार को सामान लेने के बहाने पैसे का लेनदेन करते करते अपनी बातों में उलझा देता है और फिर अंत में सामान और पैसे दोनों चीज लेकर स्कूटी में बैठकर फरार हो जाता है।

स्थानीय दुकानदारों और ग्राहकों में भय का माहौल

इस घटना के बाद बुधवारी बाजार में खरीदारी कर रही महिलाओं और दुकानदारों में डर और चिंता का माहौल है। कई दुकानदारों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से ऐसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

सिवनी कोतवाली प्रभारी सतीश तिवारी की लोगों की अपील

सिवनी कोतवाली थाना प्रभारी सतीश तिवारी ने आम जनता और दुकानदारों से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि यदि कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आए तो तुरंत 100 नंबर या नजदीकी पुलिस थाने में सूचना दें। साथ ही दुकानों में सीसीटीवी कैमरा अनिवार्य रूप से लगाने का आग्रह किया गया है।

सिवनी पुलिस से दुकानदारों की अपील

स्थानीय दुकानदारों ने पुलिस प्रशासन से अपील की है कि बाजार क्षेत्र में गश्त बढ़ाई जाए और सीसीटीवी कैमरों की मदद से इन युवकों की पहचान कर जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए।

सिवनी: श्री पीपलेश्वर हनुमान मंदिर रेलवे स्टेशन में श्रद्धा व भक्ति के साथ मनाया जाएगा श्री हनुमान जन्मोत्सव 2025

सिवनी (मध्यप्रदेश): श्री हनुमान जन्मोत्सव 2025 का भव्य आयोजन इस वर्ष भी परंपरानुसार शनिवार, 12 अप्रैल 2025 को श्री पिप्लेश्वर हनुमान मंदिर, रेलवे स्टेशन सिवनी में आयोजित किया जा रहा है। यह धार्मिक आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का अनुपम संगम होगा।

भक्ति, आस्था और उल्लास से भरपूर रहेगा दिनभर का कार्यक्रम

श्री हनुमान जी महाराज के जन्मोत्सव पर होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा कुछ इस प्रकार है:

कार्यक्रम का समय-सारणी

12 अप्रैल 2025, शनिवार

  • प्रातः 5:00 बजे – प्रातः कालीन श्रृंगार दर्शन
  • प्रातः 6:00 बजे – श्री सुंदरकांड पाठ
  • प्रातः 11:00 बजे से – अभिषेक एवं पूजन
  • दोपहर 1:00 बजे – हवन पूजन
  • दोपहर 3:30 बजे – भव्य पालकी यात्रा
  • शाम 7:00 बजे – संध्याकालीन महाआरती
  • रात्रि 7:30 बजे से – महाप्रसाद (विशाल भंडारा)

भव्य पालकी यात्रा होगी आकर्षण का केंद्र

शाम को निकलने वाली भव्य पालकी यात्रा में श्री हनुमान जी महाराज की मनोहारी झांकी नगर भ्रमण करेगी, जिसमें बैंड-बाजे, भजन संकीर्तन एवं भक्तों की जयकार गूंजेगी। यह यात्रा नगरवासियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी।

प्रत्येक शनिवार को होता है महाआरती और भंडारा

इस पावन स्थल पर हर शनिवार को रात्रि 7:30 बजे महाआरती का आयोजन होता है, जिसके उपरांत महाप्रसाद वितरण किया जाता है। यह परंपरा सैकड़ों श्रद्धालुओं को प्रतिदिन भगवान के दर्शन और प्रसाद का लाभ दिलाती है।

श्री हनुमान जन्मोत्सव 2025 आमंत्रण

श्री पिप्लेश्वर हनुमान मंदिर परिवार की ओर से समस्त श्रद्धालुओं, धर्मप्रेमियों एवं नगरवासियों से सादर निवेदन है कि वे इस पावन अवसर पर सपरिवार पधारें एवं श्री हनुमान जी महाराज की कृपा प्राप्त करें।

श्री हनुमान जी महाराज आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें।

संपर्क सूत्र: देवी शीतला माता श्री पिप्लेश्वर हनुमान मंदिर, रेलवे स्टेशन, सिवनी: मोबाइल: 7067719250

सिवनी में गौवंश मांस तस्करी का भंडाफोड़: लखनवाड़ा पुलिस ने 57.390 किलो गौ मांस के साथ एक आरोपी को किया गिरफ्तार

सिवनी: थाना लखनवाड़ा पुलिस ने शुक्रवार को एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए गौवंश मांस की तस्करी में लिप्त एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 57.390 किलोग्राम गौवंश मांस, दो दोपहिया वाहन, तथा एक गौवंश को बरामद किया है। इस मामले में चार अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस जुट गई है।

इस कार्रवाई को अंजाम देने से पहले पुलिस अधीक्षक सिवनी श्री सुनील मेहता एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री जी.डी. शर्मा ने जिले में गौवंश से संबंधित अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने हेतु सभी थाना एवं चौकी प्रभारियों को सख्त निर्देश दिए थे।

मुखबिर की सूचना पर की गई कार्रवाई

दिनांक 11 अप्रैल 2025 की सुबह लगभग 6:00 बजे पुलिस को सूचना मिली कि कुछ लोग सफेद रंग की एक्टिवा गाड़ी से ग्राम पायली के जंगलों में गौवंश मांस ले जा रहे हैं। सूचना मिलते ही नगर पुलिस अधीक्षक सिवनी श्रीमती पूजा पांडे के निर्देश पर थाना प्रभारी लखनवाड़ा एवं उनकी टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके पर दबिश दी।

पुलिस टीम को जंगल में एक व्यक्ति सफेद रंग की स्कूटी से आता दिखा, जो पुलिस को देखकर भागने लगा। घेराबंदी कर पुलिस ने उसे पकड़ लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम रिजवान खान पिता मोहम्मद उस्मान खान उम्र 27 वर्ष निवासी तिग्गा मोहल्ला, संजय वार्ड, सिवनी बताया। स्कूटी की जांच करने पर उसके आगे रखी बोरी में लगभग 20 किलो गौवंश मांस मिला।

संगठित तरीके से रची गई थी योजना

पूछताछ में आरोपी रिजवान ने बताया कि संजय उर्फ संजू उईके, इंद्रलाल उर्फ भूरा उईके, शहजाद खान, जुबेर उर्फ जुब्बू एवं अन्य दो अज्ञात व्यक्तियों के साथ मिलकर ग्राम पायली के जंगल में एक गाय और एक बछिया को काटकर मांस बेचने की योजना बनाई गई थी। आज सुबह बछिया को काटकर मांस बेचने ले जाया जा रहा था।

मौके से बरामद हुआ अवशेष, वाहन और उपकरण

रिजवान की निशानदेही पर पुलिस ने घटनास्थल से कटा हुआ बछिया का सिर, आंतें, मांस के टुकड़े, चमड़ा, एक पैर, मांस काटने का लकड़ी का टुकड़ा, चाकू, एक मोटरसाइकिल (MP 53 MD 0562), और एक स्कूटी (MP 22 JE 9868) बरामद की। इसके अलावा इंद्रलाल उईके के घर के पास एक सफेद रंग की गाय भी बरामद की गई।

गौवंश मांस का किया गया नष्टीकरण

गौवंश मांस के संक्रमण फैलने की संभावना को देखते हुए इसे सक्षम अधिकारियों की निगरानी में गढ़ढे में दफन कर नष्ट किया गया।

आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज

पुलिस ने इस मामले में अपराध क्रमांक 160/2025 के तहत धारा 4/9, 5/9 मध्यप्रदेश गौवंश प्रतिषेध अधिनियम, धारा 11(1)(एल) पशु क्रूरता अधिनियम, धारा 325, 3(5) भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत मामला दर्ज किया है।

आरोपी व जप्त सामग्री

गिरफ्तार आरोपी:

  • रिजवान खान पिता उस्मान खान, उम्र 27 वर्ष, निवासी तिग्गा मोहल्ला, संजय वार्ड, सिवनी।

फरार आरोपी:

  • शहजाद खान पिता कमर खान (संजय वार्ड, सिवनी)
  • जुबेर उर्फ जुब्बू (हड्डी गोदाम, सिवनी)
  • संजय उर्फ संजू उईके (ग्राम पायली, थाना लखनवाड़ा)
  • इंद्रलाल उर्फ भूरा उईके (ग्राम पायली, थाना लखनवाड़ा)
  • अन्य दो अज्ञात व्यक्ति

जप्तशुदा सामग्री:

  • 57.390 किग्रा गौवंश मांस (कीमत: ₹5,700)
  • एक गौवंश (कीमत: ₹10,000)
  • मोटरसाइकिल MP 53 MD 0562 (कीमत: ₹20,000)
  • स्कूटी MP 22 JE 9868 (कीमत: ₹80,000)
  • कुल जप्त मशरूका: ₹1,15,700

पुलिस टीम का सराहनीय कार्य

इस सफलता के लिए थाना लखनवाड़ा के निरीक्षक सी.के. सिरामे, उप निरीक्षक कोमल टोप्पो, प्र.आर. 271 राजेश माथरे, प्र.आर. 214 योगेन्द्र सिंह चौहान, आर. 535 अरुण झरे, एवं आर. 202 शिवदीप ठाकुर की टीम की सराहना की गई है।

लखनवाड़ा पुलिस द्वारा की गई यह कार्रवाई गौवंश मांस तस्करी पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। फरार आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी के लिए अभियान जारी है।

सिवनी में फिर मिला गौ-माता का कटा हुआ सिर, लखनवाड़ा थाना क्षेत्र के पायली गांव की घटना

सिवनी जिले के लखनवाड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत गांव पायली, जो कि पोस्ट जाम के अंतर्गत आता है, वहां पायली डेम के पास कथित तौर पर गाय का कटा हुआ सिर व मांस मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। यह घटना न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली है, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, जैसे ही लोगों ने घटना की जानकारी प्राप्त की, वहां पर भीड़ एकत्रित हो गई और ग्रामवासियों में भारी आक्रोश देखा गया। गांव के लोगों ने तुरंत ही इस गंभीर मुद्दे की जानकारी पुलिस प्रशासन को दी।

पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया और घटनास्थल पर दबिश

घटना की सूचना मिलते ही लखनवाड़ा पुलिस थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस बल मौके पर पहुंचा और घटनास्थल को घेर लिया। पुलिस ने स्थिति को संवेदनशील मानते हुए गांव में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए फोर्स की तैनाती की गई है।

गौ तस्करी की पुष्टि, एक आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने अपनी प्रारंभिक जांच में पाया कि यह मामला गौ तस्करी से जुड़ा हो सकता है। जांच के दौरान पुलिस ने एक गो तस्कर को मौके से गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य आरोपी मौके से फरार हो गए हैं। पकड़े गए आरोपी से पुलिस पूछताछ कर रही है ताकि घटना में शामिल अन्य लोगों की जानकारी प्राप्त की जा सके।

गांव में तनावपूर्ण माहौल, पुलिस बल तैनात

घटना के बाद से पायली गांव और आसपास के इलाकों में तनाव का माहौल बना हुआ है। ग्रामवासियों की भावनाएं आहत हुई हैं और वह सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

स्थानीय नेताओं और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और धार्मिक नेताओं ने मौके पर पहुंचकर घटना की निंदा की और प्रशासन से दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। कई संगठनों ने इस घटना को गंभीर धार्मिक उल्लंघन बताते हुए राज्य सरकार से विशेष जांच की मांग की है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही घटना की तस्वीरें

घटना से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इससे गांव में भय और गुस्से का माहौल बनता जा रहा है। प्रशासन ने लोगों से गैर-प्रमाणिक जानकारी साझा न करने की अपील की है और अफवाह फैलाने वालों पर कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी है।

गांववासियों की मांग और प्रशासन की चुनौती

गांववासी दोषियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में सजा दिलाने की मांग कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि इस प्रकार की घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए गांवों में निगरानी तंत्र मजबूत किया जाए। वहीं प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है – शांति बनाए रखना और जांच में पारदर्शिता।

कड़ी कार्रवाई ही ला सकती है विश्वास

यह घटना धार्मिक आस्थाओं, सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था पर एक गंभीर हमला है। जब तक प्रशासन दोषियों पर सख्त कार्यवाही नहीं करता, तब तक ग्रामवासियों में विश्वास बहाल होना मुश्किल है। आवश्यकता है कि सरकार और प्रशासन मिलकर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस रणनीति बनाएं।

मंडला की शुचि उपाध्याय का अंतर्राष्ट्रीय महिला क्रिकेट टीम में चयन: मध्यप्रदेश का गौरव

Suchi Upadhyay Mandla: मध्यप्रदेश के मंडला जिले की धरती एक बार फिर खेल जगत में चमक उठी है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा घोषित की गई महिला भारतीय क्रिकेट टीम में मंडला की शुचि उपाध्याय का चयन होना न केवल जिले बल्कि पूरे राज्य के लिए गौरव का विषय है। यह चयन श्रीलंका के कोलंबो में आयोजित होने वाली त्रिकोणीय महिला क्रिकेट श्रृंखला के लिए हुआ है, जिसमें भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश की टीमें हिस्सा लेंगी।

भारतीय टीम में जगह पाना शुचि के लिए एक मील का पत्थर

भारतीय टीम में 15 सदस्यीय दल का गठन किया गया है, जिसमें शुचि को लेफ्ट आर्म स्पिनर के रूप में शामिल किया गया है। शुचि की गेंदबाज़ी शैली, उनकी लाइन और लेंथ पर पकड़, और विकेट लेने की अद्वितीय क्षमता ने उन्हें इस ऊँचाई तक पहुँचाया है। उनकी प्रतिभा और मेहनत को अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मंच मिलने जा रहा है।

हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में होगा भारत का नेतृत्व

टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर हैं, जो अपनी आक्रामक बल्लेबाज़ी और प्रेरणादायक कप्तानी के लिए प्रसिद्ध हैं। टूर्नामेंट का आयोजन 27 अप्रैल से 7 मई 2025 के बीच कोलंबो, श्रीलंका में किया जाएगा। इसमें भारत की टीम अपने कौशल और टीमवर्क का परिचय देगी और इस बार सभी की निगाहें शुचि उपाध्याय पर रहेंगी।

देहरादून में नेशनल चैलेंजर ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन

वर्तमान में शुचि उपाध्याय देहरादून में आयोजित नेशनल चैलेंजर ट्रॉफी में भाग ले रही हैं। इस प्रतियोगिता में उन्होंने लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन किया है, जिससे उनका आत्मविश्वास चरम पर है। इससे पूर्व वे नेशनल सीनियर विमेंस टूर्नामेंट में सर्वाधिक विकेट लेने वाली खिलाड़ी रह चुकी हैं, जिसके लिए उन्हें “प्लेयर ऑफ द सीरीज” के खिताब से नवाज़ा गया।

शुचि की मेहनत और समर्पण ने दिलाई पहचान

शुचि उपाध्याय का सफर कभी आसान नहीं रहा। मंडला जैसे दूरस्थ जिले से निकलकर राष्ट्रीय और अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीम में चयनित होना यह दर्शाता है कि प्रबल इच्छाशक्ति, अनुशासन और लगन से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। बचपन से ही क्रिकेट में रुचि रखने वाली शुचि ने कठिन प्रशिक्षण, निरंतर अभ्यास और आत्मबल के माध्यम से इस मुकाम को हासिल किया है।

परिवार और कोच का अहम योगदान

शुचि की सफलता में उनके परिवार और कोचिंग स्टाफ का विशेष योगदान रहा है। उनके माता-पिता ने हर परिस्थिति में उनका साथ दिया। वहीं, मंडला और भोपाल में प्रशिक्षकों ने उन्हें तकनीकी और मानसिक रूप से तैयार किया। कोच के अनुसार, शुचि हमेशा सीखने को तैयार रहती थीं और यही गुण उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग करता है।

मंडला जिले में खुशी की लहर

शुचि उपाध्याय के चयन की खबर से मंडला जिले में उत्साह और गर्व का माहौल है। जिले के खेल प्रेमियों, स्कूली छात्रों, स्थानीय प्रशासन और खेल अधिकारियों ने इस अवसर पर उन्हें बधाई दी है। जिला कलेक्टर से लेकर खेल संघों तक ने इसे स्थानीय खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत बताया है।

शुचि के चयन से महिला क्रिकेट को मिलेगा नया आयाम

भारत में महिला क्रिकेट को अब पहले की अपेक्षा अधिक पहचान और समर्थन मिल रहा है। शुचि जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के चयन से यह स्पष्ट है कि अब छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से भी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकल सकते हैं। इससे देशभर की बेटियों को खेलों में आगे बढ़ने की नई प्रेरणा मिलेगी।

शुचि उपाध्याय से भविष्य की उम्मीदें

शुचि उपाध्याय न केवल वर्तमान श्रृंखला में बल्कि आने वाले वर्षों में भी भारत की टीम का मूल स्तंभ बन सकती हैं। उनकी स्पिन गेंदबाजी, विविधताओं से भरपूर तकनीक, और बल्लेबाज़ों को छकाने की कला भारत को जीत की ओर ले जा सकती है। यदि वे ऐसे ही निरंतर प्रदर्शन करती रहीं तो वह दिन दूर नहीं जब वे भारत के लिए वर्ल्ड कप में भी अहम भूमिका निभाएंगी।

मंडला की बेटी बनी देश का मान

मंडला जिले की यह बेटी अब पूरे देश की शान बन चुकी है। शुचि उपाध्याय ने साबित कर दिया कि प्रतिभा, मेहनत और समर्पण के साथ कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। उनकी यह उपलब्धि न केवल खेल प्रेमियों के लिए बल्कि हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो किसी भी क्षेत्र में कुछ बड़ा करने का सपना देखता है।

EPFO ने शुरू की आधार फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी के ज़रिए UAN जनरेट करने की सुविधा

नई दिल्ली: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने करोड़ों अंशधारकों को डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण तोहफा दिया है। अब PF खाताधारक UMANG मोबाइल ऐप के ज़रिए फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी (FAT) का उपयोग करके अपना यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) जनरेट कर सकते हैं। यह सेवा पूरी तरह से संपर्क रहित, सुरक्षित और उपयोगकर्ता के लिए सरल है।

क्या है नया यूएएन जनरेशन प्रोसेस और क्यों है यह महत्वपूर्ण

नए FAT-आधारित प्रोसेस के तहत EPFO ने PF खाताधारकों के लिए एक सुविधाजनक, तेज और कागज रहित प्रणाली विकसित की है। इस प्रक्रिया के जरिए कोई भी कर्मचारी अब बिना किसी दफ्तर गए, बिना फॉर्म भरे, सिर्फ अपने चेहरे की पहचान से UAN बना और सक्रिय कर सकता है।

EPFO की 7 मुख्य गारंटी जो FAT प्रक्रिया को बनाती है अद्वितीय

ईपीएफओ ने निम्नलिखित 7 महत्वपूर्ण बातों को सुनिश्चित किया है, जो इस नई सेवा को पुराने तरीके से कहीं बेहतर बनाती हैं:

100% सत्यापन – फेस ऑथेंटिकेशन से

अब उपयोगकर्ता के आधार कार्ड और वास्तविक चेहरे का मिलान फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक से होता है, जिससे धोखाधड़ी की संभावना शून्य हो जाती है।

डेटा स्वतः भरा जाता है

UMANG ऐप के ज़रिए आधार से जुड़े सभी डेटा जैसे नाम, जन्म तिथि, पता आदि स्वचालित रूप से भरे जाते हैं, जिससे मैनुअल एंट्री की त्रुटियाँ नहीं होतीं।

रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से मिलान

उपयोगकर्ता का मोबाइल नंबर सीधे आधार डेटाबेस से वेरीफाई होता है, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की OTP या सूचना संबंधित समस्या नहीं आती।

UAN जनरेशन और एक्टिवेशन एक साथ

UAN जनरेट करने के साथ ही उसका एक्टिवेशन भी स्वतः हो जाता है, यानी एक ही बार में प्रक्रिया पूर्ण।

नियोक्ता पर निर्भरता समाप्त

अब कर्मचारी स्वयं ही e-UAN कार्ड डाउनलोड कर सकता है, जिससे नियोक्ता के ऊपर निर्भरता खत्म हो जाती है।

ऑनबोर्डिंग के लिए तैयार दस्तावेज़

नई नौकरी मिलने पर कर्मचारी केवल e-UAN कार्ड की PDF और UAN की कॉपी ही नियोक्ता को देकर ईपीएफओ के साथ जुड़ सकता है।

तुरंत ईपीएफओ सेवाओं की सुविधा

एक बार UAN जनरेट होते ही पासबुक देखना, केवाईसी अपडेट करना, क्लेम करना, आदि सेवाएं तत्काल शुरू की जा सकती हैं।

UMANG ऐप के ज़रिए UAN जनरेट करने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

स्टेप 1: UMANG ऐप डाउनलोड करें

अपने स्मार्टफोन के Google Play Store या Apple App Store से UMANG ऐप डाउनलोड करें।

स्टेप 2: EPFO सर्विस चुनें

UMANG ऐप में लॉग इन करके “EPFO” सेवा सेक्शन पर जाएं।

स्टेप 3: फेस ऑथेंटिकेशन ऑप्शन चुनें

“Generate UAN using Face Authentication” पर क्लिक करें।

स्टेप 4: आधार विवरण दर्ज करें

अपना आधार नंबर और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज करें।

स्टेप 5: कैमरा एक्सेस दें

फेस ऑथेंटिकेशन के लिए ऐप को कैमरा एक्सेस दें और अपने चेहरे का लाइव स्कैन करें।

स्टेप 6: विवरण की पुष्टि करें

आपका सारा डाटा आधार से स्वतः भर जाएगा, आप केवल पुष्टि करें और “सबमिट” पर क्लिक करें।

स्टेप 7: UAN जनरेट और डाउनलोड करें

आपका UAN जनरेट होकर एक्टिवेट हो जाएगा, और आप उसी समय e-UAN कार्ड PDF डाउनलोड कर सकते हैं।

नियोक्ताओं के लिए क्या हैं लाभ

यह नई सुविधा सिर्फ कर्मचारियों ही नहीं, नियोक्ताओं के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। अब वे बिना किसी कागजी कार्यवाही के, अपने नए कर्मचारियों को ईपीएफओ प्रणाली में जोड़ सकते हैं। इससे समय और संसाधनों की बचत होती है।

पेंशनभोगियों को भी मिलेगा लाभ – जीवन प्रमाण के लिए नई पहल

EPFO अब “माई भारत” स्वयंसेवकों के साथ मिलकर पेंशनभोगियों को उनके घर पर जाकर डिजिटल जीवन प्रमाण (Digital Life Certificate) बनाने की सुविधा देने जा रहा है। यह कार्य भी फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी से होगा। इससे वरिष्ठ नागरिकों को बायोमेट्रिक मशीन या बैंक जाने की जरूरत नहीं रहेगी।

डिजिटल इंडिया की दिशा में ईपीएफओ की बड़ी छलांग

आधार फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक का उपयोग कर UAN जनरेट करने की सुविधा, भारत के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में एक ऐतिहासिक कदम है। इससे ना केवल प्रक्रियाएं सरल हुई हैं, बल्कि पारदर्शिता, सुरक्षा और समय की बचत जैसे लाभ भी सुनिश्चित हुए हैं।

आज ही अपनाएं EPFO की नई FAT सुविधा

यदि आप एक कर्मचारी हैं और आपने अब तक अपना UAN जनरेट या सक्रिय नहीं किया है, तो यह सबसे बेहतरीन अवसर है। UMANG ऐप के ज़रिए केवल कुछ मिनटों में बिना किसी झंझट के अपने PF खाते को सक्रिय करें और भविष्य को सुरक्षित बनाएं।

सिवनी: जल संसाधन, विद्युत विभाग और पट्टा माफिया का बड़ा गठजोड़, बैनगंगा नदी के सीने पर होती खेती; जनता जल संकट से त्रस्त

सिवनी जिले की पवित्र बैनगंगा नदी जो कभी जीवनदायिनी मानी जाती थी, आज अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। यह नदी छपारा नगर और आसपास के सैकड़ों गांवों के लिए मुख्य जलस्रोत रही है, लेकिन जल संसाधन विभाग, विद्युत विभाग और पट्टा माफिया के गठजोड़ ने इस जीवन रेखा को संकट में डाल दिया है। अब यह नदी सिर्फ कागज़ी योजनाओं में ही संरक्षित दिखाई देती है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान करती है।

सिवनी: जल संसाधन, विद्युत विभाग और पट्टा माफिया का बड़ा गठजोड़ – बैनगंगा नदी के सीने पर होती खेती, जनता जल संकट से त्रस्त
SEONI: वैनगंगा नदी छपारा के सीने पर हजारों एकड़ में हो रही अवैध खेती

नदी के सीने पर हजारों एकड़ में हो रही अवैध खेती

बैनगंगा नदी के दोनों तटों पर नहीं, बल्कि अब तो नदी के बीचों-बीच तक पट्टा माफियाओं ने कब्जा कर लिया है। हजारों मोटर पंप लगाकर धड़ल्ले से पानी की चोरी की जा रही है। यह सारा कार्य कथित रूप से जल संसाधन और विद्युत विभाग की मौन स्वीकृति से हो रहा है। परिणामस्वरूप नदी में पानी की मात्रा इतनी कम हो गई है कि अप्रैल माह की शुरुआत में ही छपारा, सिवनी और आसपास के सैकड़ों गांवों में भीषण जल संकट गहराने लगा है।

भीमगढ़ डैम और पट्टा माफियाओं का इतिहास

1980 के दशक में जब भीमगढ़ डैम का निर्माण हुआ था, तब यह सोचा गया था कि इससे क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल की स्थिति में सुधार आएगा। लेकिन इसी समय से पट्टा माफियाओं ने डूब क्षेत्र और नदी के किनारों पर अवैध कब्जा करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह कब्जा नदी के अंदर तक पहुंच गया और अब स्थिति यह है कि सरकारी विभागों की मिलीभगत से ही बैनगंगा नदी की छाती पर हल चलाए जा रहे हैं।

छपारा से माहलनवाड़ा तक नदी पर कब्जा – भयावह स्थिति

हमारी टीम द्वारा मुंडारा से छपारा तक किए गए स्थलीय निरीक्षण में जो स्थिति सामने आई, वह बेहद चौंकाने वाली है। लखनवाड़ा, दिघोरी, बंडोल, धड़धड़ा घाट, रेस्ट हाउस घाट, फोरलेन पुल, और माहलनवाड़ा तक नदी के भीतर तक खेत बना दिए गए हैं। यह सब मोटर पंपों की लंबी कतारों के सहारे हो रहा है, जिससे पेयजल के लिए आवश्यक जलस्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

जनता जल संकट से जूझ रही, प्रशासन मौन

जहां एक ओर गांव की जनता बूंद-बूंद पानी को तरस रही है, वहीं दूसरी ओर माफिया नदी से हजारों लीटर पानी प्रतिदिन खींचकर खेतों की सिंचाई कर रहे हैं। यह सब कुछ प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है, लेकिन अब तक किसी ठोस कार्यवाही के संकेत नहीं मिले हैं। इस लापरवाही से यह प्रतीत होता है कि प्रशासनिक मिलीभगत या अकर्मण्यता के चलते बैनगंगा नदी का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

नदी संरक्षण योजनाओं की सच्चाई – सिर्फ कागजों तक सीमित

भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा नदी संरक्षण के लिए अनेक योजनाएं लागू की गई हैं, लेकिन यदि इनकी वास्तविकता जाननी हो तो छपारा की बैनगंगा नदी का दौरा करना पर्याप्त है। यहां नदी सूखने के कगार पर पहुंच गई है, और संरक्षण योजनाएं केवल रिपोर्ट और बैठकों में ही सीमित रह गई हैं। भूजल स्तर निरंतर गिरता जा रहा है और जल संकट गंभीर रूप ले चुका है।

जनप्रतिनिधियों की चुप्पी – जिम्मेदार कौन?

सबसे अफसोसजनक पहलू यह है कि इस पूरे मसले पर स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौन साधे हुए हैं। चुनावों के समय जो नेता जल स्रोतों की सुरक्षा की बातें करते हैं, वे अब कहीं नजर नहीं आ रहे। क्या यह उनकी निर्लज्जता नहीं, कि वे जनता को जल संकट में छोड़कर माफियाओं को नदी की छाती चीरने की खुली छूट दे रहे हैं?

बैनगंगा बचाओ: समय की मांग

अब वक्त आ गया है कि इस घातक गठजोड़ के खिलाफ कड़ी कार्यवाही हो। जल संसाधन विभाग और विद्युत विभाग के भ्रष्ट अफसरों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। साथ ही, पट्टा माफियाओं के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही कर उनकी अवैध मोटर पंपों और कब्जों को तत्काल हटाया जाना चाहिए। नहीं तो वो दिन दूर नहीं जब बैनगंगा नदी का अस्तित्व पूरी तरह मिट जाएगा और यह क्षेत्र जल के लिए पूरी तरह निर्भर और विपन्न बन जाएगा।

क्या बैनगंगा बचेगी या इतिहास बन जाएगी?

बैनगंगा नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि सैकड़ों गांवों की जीवनरेखा है। अगर अभी भी संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि चुप्पी साधे रहे, तो भविष्य में यहां के बच्चे शायद केवल किताबों में ही बैनगंगा का नाम पढ़ पाएंगे। हमें एकजुट होकर इस नदी के लिए आवाज उठानी होगी, और इस प्राकृतिक धरोहर को बचाने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे।

सिवनी: स्कूली बच्चों को भीषण गर्मी से राहत दिलाने की आवश्यकता, अभिभावकों ने की SEONI COLLECTOR और DEO से छुट्टियों की अपील

सिवनी: वर्तमान में मौसम की स्थिति अत्यंत गंभीर हो चुकी है। मध्यप्रदेश के कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है, जिससे स्कूली बच्चों की सेहत पर गंभीर खतरे मंडरा रहे हैं। ऐसी स्थिति में अभिभावकों का यह अनुरोध बिल्कुल तर्कसंगत है कि जिला कलेक्टर एवं जिला शिक्षा अधिकारी बच्चों के हित में स्कूलों की छुट्टियों को 30 जून तक बढ़ाने पर विचार करें।

सूरज की तपिश और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

गर्मी के मौसम में विशेष रूप से मई और जून के महीने, बच्चों के लिए अत्यधिक जोखिमभरे होते हैं। हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, थकावट, त्वचा संबंधी बीमारियां जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ती हैं। अनेक बार विद्यालयों में पीने के पानी की समुचित व्यवस्था भी नहीं होती। ऐसे में बच्चों का स्कूल जाना उनकी जान को जोखिम में डालना है।

कंधों पर बोझिल स्कूल बैग और दुखती पीठ

बढ़ते स्कूली बैग का भार बच्चों के लिए एक नवीन स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। छोटे-छोटे बच्चों को 5 से 8 किलो तक के बैग रोजाना ढोने पड़ते हैं, जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यह समस्या तब और गंभीर हो जाती है जब बच्चे तपती धूप में स्कूल आते-जाते हैं, जहां न तो छांव होती है और न ही कोई परिवहन सुविधा।

अभिभावकों की मांग : 30 जून तक छुट्टियां हों घोषित

एक बच्चे के पिता तरुण जैन ने खबर सत्ता से बातचीत करते हुए बताया कि मेरे साथ अनेकों स्कूली छात्रों के अभिभावकों का यह स्पष्ट और दृढ़ मत है कि,

“जब तक तापमान सामान्य स्तर पर नहीं आता, तब तक बच्चों को स्कूल भेजना अनुचित है।“

अतः वे प्रशासन से यह अपील करते हैं कि:

  • सभी शासकीय एवं निजी स्कूलों की ग्रीष्मकालीन छुट्टियां 30 जून तक बढ़ाई जाएं।
  • स्कूल पुनः प्रारंभ होने पर बैग के वजन के नियमों को सख्ती से लागू किया जाए।
  • बच्चों को अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाए।

NCRT और शिक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देश

राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) और शिक्षा मंत्रालय ने भी स्कूल बैग के वजन को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनके अनुसार:

  • कक्षा 1-2 के बच्चों का बैग 1.5 किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए।
  • कक्षा 3-5 का अधिकतम वजन 2-3 किलोग्राम।
  • कक्षा 6-8 के लिए 4 किलोग्राम।
  • कक्षा 9-12 के लिए 5 किलोग्राम से अधिक नहीं।

अक्सर यह देखा गया है कि इन नियमों का विद्यालयों में पालन नहीं होता, जिससे बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

अन्य रचनात्मक गतिविधियों के लिए अवसर

छुट्टियों के समय में बच्चे:

  • पठन-पाठन के अलावा संगीत, नृत्य, खेलकूद, कला, विज्ञान प्रयोग, आदि गतिविधियों में भाग लेकर अपनी रचनात्मकता का विकास कर सकते हैं।
  • मानसिक रूप से तनावमुक्त रहते हैं और समाज एवं परिवार से जुड़ाव भी बढ़ता है।
  • आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन कोर्स, शौक पर आधारित प्रोजेक्ट आदि से बच्चे नई चीजें सीख सकते हैं।

शिक्षकों और विद्यालयों की भूमिका

विद्यालयों को चाहिए कि:

  • वे छात्रों के लिए बैग रहित दिन (Bagless Days) लागू करें।
  • हफ्ते में एक दिन ऐसा हो जब बच्चे केवल रचनात्मक गतिविधियों में भाग लें।
  • छात्रों को लाइटवेट नोटबुक और डिजिटल मटेरियल प्रदान करें, ताकि बैग का बोझ कम हो।

प्रशासन से अपील

हम, समस्त अभिभावकों की ओर से, जिला कलेक्टर महोदय एवं जिला शिक्षा अधिकारी महोदय से विनम्र अपील करते हैं कि:

  • भीषण गर्मी की गंभीरता को समझते हुए स्कूलों की छुट्टियों को 30 जून तक के लिए आगे बढ़ाया जाए।
  • बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
  • विद्यालयों को निर्देशित किया जाए कि वे NCERT के बैग नियमों का पालन सुनिश्चित करें।

बच्चे देश का भविष्य हैं। उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और मानसिक विकास की जिम्मेदारी सिर्फ परिवार की नहीं, बल्कि प्रशासन और विद्यालयों की भी है। इस भीषण गर्मी में उन्हें आराम, सुरक्षा और रचनात्मक विकास का अवसर मिलना चाहिए। यही समय है कि हम सभी मिलकर उनके स्वस्थ और सुरक्षित बचपन की ओर कदम बढ़ाएं।