Home Blog Page 2209

भारतीय अर्थव्यवस्था और राजनीति – हम सिर्फ कमियों की ही बात क्यों करते हैं?

इस ब्लॉग में सद्‌गुरु हमें बता रहे हैं की विश्व की सभी बड़ी आर्थिक संस्थाएं भारत की तरक्की की ओर इशारा कर रही हैं, और हर अच्छे कदम की तारीफ करना जरुरी है। (कमेंट बॉक्स में आप अपनी राय अवश्य दे )

प्रश्न : जब हम भारतीय राजनीति या भारतीय अर्थव्यवस्था की बात करते हैं तो बहुत सारी कमियां या नकारात्मकता सामने आ जाती हैं। ऐसा क्यों हैं, सद्गुरु? सद्गुरु: आज हम ऐसे हो गए हैं कि कहीं भी कुछ नकारात्मक होता है तो हम कहने लगते हैं कि ‘बहुत राजनीति’ हो रही है। यह कितने अफसोस की बात है! राजनीति का मतलब देश में नीति बनाने जैसी एक बेहद महत्वपूर्ण गतिविधि है, जिससे यह तय होता है कि देश कैसे और किस दिशा में आगे बढ़ेगा। अफसोस की बात है कि राजनीतिज्ञों की इस तरह की छवि बन गई है। जहां तक भारतीय अर्थव्यवस्था में नकारात्मकता की बात है तो मेरा मानना है कि ऐसी बातें कुछ खास तरह के लोग फैला रहे हैं, जो नहीं चाहते कि देश तरक्की करे और आगे बढ़े।

आर्थिक संस्थाएं भारत की तरक्की की ओर इशारा कर रही हैं

अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए कुछ महत्वपूर्ण व बड़े कदम उठाए जा रहे हैं, जो दीर्घकालीन कदम हैं, जिन्हें उठाने के लिए साहस और एक दृढ़ निश्चय की जरूरत होती है। दुनिया की जितनी भी महत्वपूर्ण आर्थिक संस्थाएं हैं, जैसे – वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, इंटरनैशनल मोनेटरी फंड व वर्ल्ड बैंक जैसी संस्थाएं और कुछ बेहद प्रतिष्ठित रेटिंग एजेंसियां, आज उनमें से ज्यादातर ये कह रही हैं कि भारत एक महत्वपूर्ण आर्थिक भविष्य की ओर बढ़ रहा है। लेकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं जो यह दुष्प्रचार करने में लगे हैं कि यहां सबकुछ गलत हो रहा है। कुछ लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि ‘यह सब फिक्स किया हुआ है’। सुनकर मुझे लगा कि यह तो और भी शानदार बात है कि अगर भारत सरकार वाकई वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, इंटरनैशनल मोनेटरी फंड, वर्ल्ड बैंक व मूडी जैसी संस्थाओं के साथ फिक्सिंग कर सकती है, तो इसका मतलब है कि हम वाकई बहुत अच्छा कर रहे हैं! अभी हाल तक देश की कुल तीन प्रतिशत आबादी ही कर(टैक्स) दे रही थी। आज कर से होने वाली आमदनी सौ फीसदी तक बढ़ गई है और यह हालत तब है जब अभी तक देश की सिर्फ चौंसठ प्रतिशत कंपनियों ने अपने कर का रिटर्न भरा है। अगर बाकी बची हुई छत्तीस प्रतिशत कंपनियां भी टैक्स रिटर्न भरेंगी तो राजस्व से होने वाली आय शायद डेढ़ सौ प्रतिशत तक बढ़ जाए।

जीएसटी लागू करने वाला भारत सिर्फ तीसरा देश है



कोई भी देश तब तरक्की करता है, जब देश की आर्थिक प्रक्रिया में सभी लोग भागीदारी करते हैं। देश ऐसे तरक्की नहीं कर सकता कि मैं अपनी छोटी सी अर्थव्यवस्था चलाऊं और आप अपनी अलग छोटी सी अर्थव्यवस्था चलाएं। तो अभी तक जो लोग इसी तरह से काम करते रहे हैं, वो लोग इस नई व्यवस्था पर थोड़े हैरान हैं और हालात से संघर्ष कर रहे हैं। हालाँकि कई वैध तरीके से काम करने वाले कारोबारी व संस्थाएं भी इससे थोड़ा परेशान हो रहे हैं। लेकिन यह तकलीफ तो होनी ही थी, जब 42 अलग-अलग तरह के करों को मिलाकर एक कर बनाया गया। यह कोई छोटी कोशिश नहीं थी, पूरी दुनिया में सिर्फ सात ऐसे देश हैं, जिन्होंने यह कदम उठाया है। इन सात में से पांच देशों ने इस तरह से कर ढांचा बनाया है कि उसमें एक संघीय स्तर का कर है, और एक राज्य स्तर का कर है। दुनिया में दो ही देश ऐसे हैं, जिन्होंने सफलतापूर्वक जीएसटी लागू किया है। इस कड़ी में भारत तीसरा देश बन गया है। भारत एक ऐसा देश है जो अपने आप में इतनी विविधताओं से भरा है और यहां अर्थव्यवस्था छोटी-छोटी आर्थिक गतिविधियों से विकसित हुई है। यहां हर कस्बे की अपनी अलग अर्थव्यवस्था है। यहां अर्थव्यवस्था एक संगठित तरीके से विकसित नहीं हुई, यह लोगों का उद्यम(मेहनत) था, जिसने अर्थव्यवस्था का रूप लिया। अगर भारत को एक आर्थिक ताकत बनना है, तो बिलकुल यही समय है कि छोटी-छोटी अर्थव्यवस्थाओं को संगठित करके राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का रूप दिया जाए। आज भारतीय आबादी का लगभग साठ प्रतिशत हिस्सा कुपोषित है। जब मैं आर्थिक शक्ति की बात करता हूं तो मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि देश के सारे लोग अच्छी तरह से खाएं। मेरे लिए इसका यही मतलब है।

हर अच्छे कदम की तारीफ होनी चाहिए

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस राजनैतिक दल से आते हैं या आप किस धर्म से हैं, असली चीज है कि जब कोईं सकारात्मक कदम उठाया जाए तो हम सब को इसके समर्थन में खड़े होना चाहिए। भले ही ऐसा करने में हमें थोड़ी दिक्कत का सामना ही क्यों न करना पड़े। आपमें कम से कम इतनी जागरूकता तो होनी ही चाहिए कि आप देख सकें कि किस चीज में हर इंसान की भलाई छिपी है, फिर भले ही वो काम आपका दुश्मन या विरोधी ही क्यों न कर रहा हो, आपको उसके लिए ताली बजानी चाहिए। तभी आप एक समझदार इंसान कहलाएंगे। चूंकि मैं आपको पसंद नहीं करता, इसलिए आप जो भी करेंगे, मैं उसके बारे में नकारात्मक चीजें ही कहूंगा – जीवन जीने का यह बेवकूफी भरा तरीका है। इस तरह तो दुनिया में कभी भी कोई अच्छी चीज नहीं होगी। तो सारे आर्थिक मापदंड साफतौर पर कह रहे हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था के कदम मजबूत हो रहे हैं, लेकिन यहां कुछ लोग हैं, जो रो-पीट रहे हैं, क्योंकि उनके पैसे का नुकसान हो गया। हम लोगों को एक बेहद कठोर तरीके से याद दिलाया गया है कि मुद्रा का मतबल ही है कि इसे हमेशा चलन में रहना चाहिए। यह सिर्फ एक साधन है, कोई उत्पाद या वस्तु नहीं है कि आप इसको जमा करके रखें।


भारतीय अर्थव्यवस्था और राजनीति – हम सिर्फ कमियों की ही बात क्यों करते हैं? कमेंट बॉक्स में आप अपनी राय अवश्य दे

रास्ते में है मानसून अगले 24 घण्टे में पहुंच जाएगा MP

पिछले कुछ दिनों से कमजोर रहने के बाद मानसून फिर से गति पकड़ रहा है। मौसम विभाग ने 48 घंटों के भीतर झारखंड, बिहार और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में मानसून के तेजी से सक्रिय होने की आशंका जताई है। फिलहाल ज्यादातर इलाकों में हल्की बारिश का क्रम बना रहेगा। वही उत्तरी पश्चिमी राज्यों उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा सहित कई राज्यों में हल्की बारिश हो सकती है। कई जगह तूफान भी आ सकता है।

मौसम विभाग ने 25 जून को कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है। राजधानी और आसपास के इलाकों में आज भी हल्के बादल छाए रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह के अनुसार शनिवार को बंगाल की खाड़ी की ओर से आने वाला मानसून सक्रिय हो गया है। महीने के अंत में मानसून उत्तर भारत में भी छा जाएगा। बता दें कि झारखंड, बिहार तथा मध्य प्रदेश में मानसून समय से 10 दिन लेट चल रहा है।

पूर्वोत्तर भारत में मानसून की भारी बारिश जारी है। जिस कारण से कई राज्यों में बाढ़ जैसे हालात तक पैदा हो गए हैं। मौसम विभाग ने अगले दो-तीन दिनों में पूर्वोत्तर में भारी बारिशकी चेतावनी भी जारी की है। लेकिन मौसम विभाग की ओर से जारी किए आंकड़ों के अनुसार पिछले 23 दिनों में बारिश में दस फीसदी की कमी देखने को मिली है। इस समय सीमा के अंदर लगभग 110 मिमी बारिश होनी चाहिए लेकिन 99.5 मिमी बारिश ही दर्ज की गई है। पश्चिम भारत में 24, पूर्वोत्तर में 29 और मध्य भारत में 9 फीसदी कम बारिश रिकॉर्ड हुई है। वहीं तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश में सामान्य से 29 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है।

अज्ञात बीमारी से मोठार के ग्रामीण अस्पताल में भर्ती

सिवनी -जिले के छपारा विकासखण्ड के अंतर्गत आने वाले ग्राम मोठार में विगत तीन दिनों से ग्रामीण अज्ञात बीमारी की चपेट में आये हुये है जिसकी सूचना विकासखण्ड चिकित्सा अधिकारी डॉ. कमलेश को मिलने के पश्चात गांव में तीन दिनों से शिविर लगाया गया, लेकिन इसकी जानकारी जिला कलेक्टर एवं विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी गई। जिसके चलते इस अज्ञात बीमारी ने गांव के और लोगों को अपनी चपेट में ले लिया और आज स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। तब विभाग के अधिकारी और डॉक्टर जागे।

जिला चिकित्सालय में विगत गुरूवार, शुक्रवार एवं शनिवार के इन तीन दिनों में लगभग 30 से अधिक ग्रामीण भर्ती हो चुके है उपचार हेतु भर्ती ग्रामीणों ने बताया कि इन्हें हाथ-पैर और जोड़ों में दर्द होने के साथ सिर दर्द और बुखार भी आ रहा है। चिकित्सालय में लगभग एक दर्जन पुरूष, एक दर्जन महिलाएं एवं आधा दर्जन बच्चे उपचार हेतु भर्ती है जिनका उपचार जिला चिकित्सालय में जारी है। आज प्रात: जब अज्ञात बीमारी से भर्ती मरीजों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं जिला कलेक्टर गोपालचंद्र को लगी तो वे मरीजों को हाल जाननेअस्पताल पहुंचे।

चिकित्सालय के मेल मेडिकल वार्ड, महिला मेडिकल वार्ड एवं शिशु में संतोषी डहेरिया, चौशीला लोधी, रामजलि जंघेला, सहजपुरी डहेरिया, बसंती जंघेला, ब्रजकली जंघेला, फूलवती यादव, रूपाली जंघेला, दीवांशी 9 माह, दुर्गा 5 साल, रोशनी 10 साल, खुशबू, धन्नक जंघेला, देवीसिंह जंघेला, दयाराम चौधरी, सुरत डहेरिया, अंकित डहेरिया, कलीराम लोधी, बलराम लोधी, महतलाल लोधी, नर्मवदी लोधी सहित अन्य ग्रामीण उपचार हेतु जिला चिकित्सालय में भर्ती है।

ट्रक की चपेट में आयी महिला की मौत

सिवनी- जिले के धनौरा थाना के ग्राम लावेशर्रा निवासी सुभाष बरकडे की पत्नी सोनिया वरकडे उम्र 35 साल, लकडी से लदे ट्रक को ओव्हरटेक करते समय ट्रक के नीचे आ जाने से मौके पर मौत हो गयी,

महिला दुपहिया वाहन में धनौरा से लावेसर्रा वापिस जा रही थी जबकी ट्रक धनौरा की तरफ आ रहा था।

उक्त ट्रक क्रमांक mp 20 G 0917 जबलपुर के गुरूनानक ट्रांसपोर्ट का बताया जा रहा है।

….सफाई कर्मियों की अवैध हड़ताल

सफाई कर्मियों की हड़ताल अवैध ठहरायी सीएस ने

जिला चिकित्सालय की सफाई के लिये मनमाने तरीके से रखे गये सफाई कर्मियों की हड़ताल को अस्पताल के सिविल सर्जन (जिन्हें पद से हटाने शासन के द्वारा दिसंबर 2017 में आदेश जारी किया गया था) डॉ.आर.के. श्रीवास्तव ने अवैध करार दिया है।

शनिवार को जारी सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ.आर.के.श्रीवास्ताव द्वारा जिला चिकित्सालय के सामने सफाई कर्मियों द्वारा की जा रही हडताल के संबंध में जानकारी देते हुए बताया गया है कि यह हड़ताल पूरी तरह से अवैधानिक है।

उक्त संबंध में उन्होंने बताया कि वर्ष 2016-17 में निविदा शर्ताें के अनुरूप मेसर्स कॉमथेन सिक्योरिटी सर्विस को जिला चिकित्सालय की साफ सफाई व्यवस्था का कार्य सौंपा गया था, जिसे शासन के निर्देश के अनुसार 31 मार्च 2018 को बंद कर दिया गया था तथा जिला चिकित्सालय की सफाई व्यवस्था के मद्देनजर अगली व्यवस्था तक तत्कालीन मजदूरी दर पर मौखिक सहमति से कॉमथेन सिक्योरिटी सर्विस के कर्मचारियों को 15 जून 2018 तक कार्य पर रखा गया था। इसके लिये रोगी कल्यारण समिति द्वारा कोई भी अनुबंध पत्र व कार्यादेश जारी नहीं किये गये थे।



उन्होंने बताया कि विगत 14 जून को आयोजित हुई रोगी कल्याण समिति की बैठक में लिये गये निर्णय अनुसार आउटसोर्स के माध्यम से सफाई कर्मियों की व्यवस्था हेतु मेसर्स न्यू जय अम्बे सर्विस को कार्य दिया गया है तथा सफाई कर्मियों को माह अप्रैल, मई तथा 15 जून तक का सम्पूर्ण वेतन संबंधितों के खाते में जमा कर दिया गया है।

इस विज्ञप्ति में इस साल अक्टूबर माह में सेवा निवृत्त होने वाले सिविल सर्जन डॉ.आर.के. श्रीवास्तव के हवाले से यह नहीं बताया गया है कि 01 अप्रैल से 15 जून तक रखे गये सफाई कर्मियों की भर्त्ती के लिये क्या निविदा जारी की गयी थी। इसके अलावा क्या जय अंबे सिक्योरिटी को दिये गये सफाई के ठेके के संबंध में क्या निविदा आमंत्रित की गयी है, के बारे में भी कुछ स्पष्ट नहीं कहा गया है।

वहीं सफाई कर्मियों के बीच चल रहीं चर्चाओं के अनुसार उनको जब रोगी कल्याण समिति के द्वारा रखा गया था, तब उसके बाद उनका न तो पुलिस वेरीफिकेशन कराया गया था और न ही स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया गया था। इसी तरह वर्तमान में काम करने वाली सफाई एजेंसी के द्वारा भी कर्मचारियों का पुलिस वेरीफिकेशन और स्वास्थ्य परीक्षण अब तक नहीं कराया गया है।


जब हुई चापलूसी की हद : पहले अश्लील विडियो फिर जूता राजनीति

हले अश्लील विडियो फिर जूता राजनीति

सिवनी- पद प्रतिष्ठा और अभिमान ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि इंसान को अपने ही पांव में जूते पहनने के लिए किसी का सहारा लेना पड़ जाए। जी हाँ ऐसी चर्चा इन दिनों सिवनी जिले में एक विधायक द्वारा पद लोलुपता के चलते घटित कृत्य के वायरल हुए वीडियो को देखकर पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनती जा रही है। लोग अपने तरह-तरह के कयास लगाने लगे हैं कोई कहते नहीं थक रहा है कि यह सब नौटंकी बाज विधायक के लिए कुछ भी नहीं है। वहीं दूसरी ओर लोगों का कहना है कि इस विधायक ने अभी से बता दिया कि कांग्रेस की परिपाटी ऐसी है जहां पैर पकड़ने और जूता पहनाने के बाद के बाद ही शुरू होती है।

लोगों ने यहां तक कहना शुरू कर दिया कि जब विधायक जैसे लोग अपने नेता के पांव पर जूते डाल रहे हैं तो आम जनता इससे ज्यादा क्या कर पाएगी…? प्राप्त जानकारी के अनुसार हिमाचल प्रदेश की पूर्व राज्यपाल स्व. श्रीमती उर्मिला सिंह के निधन के… पश्चात उनको श्रद्धांजलि अर्पित करने उनके गृह ग्राम सिवनी जिले के आदिवासी विधानसभा क्षेत्र लखनादौन के अंतर्गत ग्राम घूरवाड़ा पहुंचे प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष व पडोसी जिले छिंदवाड़ा से सांसद कमलनाथ ने सबसे पहले स्व. श्रीमती उर्मिला सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि देकर उनके पुत्र लखनादौन विधानसभा क्षेत्र के विधायक योगेंद्र सिंह बाबा व अन्य परिजनों संग बैठकर शोक संवेदना प्रकट करते हुए श्रीमती सिंह के राजनीतिक जीवन की चर्चा भी की और वहां उपस्थित जिले भर से आए हजारों की संख्या में कांग्रेसियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त कर चर्चा करते हुए कुछ समस्याओं से ग्रसित ग्रामीणों ने अनेकों आवेदन देकर श्री नाथ से सहयोग व निराकरण के लिए अपील की।



अपने मुख्य कार्यक्रम को समाप्त कर प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ शोकाकुल परिवार से विदा लेकर जाने को तैयार हुए इस दौरान उनके साथ बिल्कुल बराबरी से चल रहे जिले की खास विधानसभा क्षेत्र के विधायक ठाकुर रजनीश हरवंश सिंह ने श्री नाथ के पैरों में झूककर जूते पहनाते हुए देखे गए। जिसकी वीडियो वहां मौजूद मीडिया कर्मियों ने अपने कैमरे में कैद कर ली।

उक्त वीडियो में स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि अपनी पद लोलुपता के लिए व्याकुल ठाकुर खानदान से जिला-महाकौशल ही नहीं अपितु पूरे प्रदेश में अपनी स्पष्ट साफ सुथरी राजनीतिक छवि के पुरोधा कांग्रेस शासन के त्रिविभागीय मंत्री रहे स्व. ठाकुर हरवंश सिंह जिन्हें क्षेत्र की जनता दादा ठाकुर कहकर संबोधित करती थी के होनहार पुत्र केवलारी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रजनीश हरवंश सिंह किस तरह झुककर सांसद / प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ को जूते पहना रहे हैं। ज्ञात होवे कि रजनीश सिंह वहीं विधायक हैं जो समय-समय पर क्षेत्र की जनता को आकर्षित करने और मनोरंजन करने के लिए तरह-तरह के रुप धारण कर लेते हैं। ये वही विधायक हैं जिन्होंने पिछले कुछ महीनों में अपने मोबाइल से वाट्सअप ग्रुप में अश्लील वीडियो डालकर जिले की जनता को चौका दिया था। मध्यप्रदेश विधानसभा में एक जिम्मेदार जनता के सेवक के रुप में चुने जाने वाले विधायक श्री सिंह के इस कृत्य का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो तरह तरह की चर्चाओं का दौर शुरु हो गया।

विधायक के इस कृत्य और प्रदेशाध्यक्ष की सहजता को देकर साफ तौर पर आमजन को यह सीख देती है कि अब कांग्रेस में अपना पद पाने और काम कराने के लिए खुशामद के अलावा चरण वंदना सहित चरण पादुका भी धारण कराना भी आना चाहिए।

…समाजसेवियों से रक्तदान की कैसी उम्मीद

मरीज के परिजन अपने ही मरीज को बचाने रक्तदान नहीं करते तो समाजसेवियों से रक्तदान की कैसी उम्मीद, रक्तदान के लिए खुद हो जागरूक व दूसरों को भी करें प्रेरित

ब्लड बैंक, अस्पताल व मरीज रक्तदाताओं की कमी से जूझ रहे हैं, अत्यधिक मरीजों की संख्या होने के साथ-साथ रक्त की आवश्यकता की भी उससे कई गुना अधिक होने से ब्लड की डिमांड होने के कारण चिकित्सकों को मरीजों का उपचार करने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस वजह से मरीजों को समय में उपचार नहीं मिल पा रहा है, जिसके लिए डॉक्टरों व समाजसेवियों ने सभी से अधिक से अधिक संख्या में रक्त करने व करवाने के लिए प्रेरित करने की अपील की है।

अक्सर देखने में आया है की जब-जब उपचार के दौरान चिकित्सकों द्वारा मरीज को रक्त की कमी बताई जाती है और उसके बाद परिजनों को रक्त की कमी को पूरा करने के लिए ब्लड का इंतजाम करने के लिए कहा जाता है, तब-तब परिजन किसी दूसरे पर आश्रित होकर ब्लड का इंतजाम करने में जुट जाते हैं और स्वयं रक्तदान करने से कतराते हैं। ऐसी स्थिति में परिजन समाजसेवियों का सहारा लेकर रक्त का इतंजाम करते हैं।

ऐसे किया जा सकता है रक्तदान की कमी को पूरा :-
जानकारों ने बताया की अगर किसी मरीज को रक्त की कमी होती है तो इस दौरान मरीज के परिजनों को अपने रिश्तेदारों, दोस्तों व परिचितों से संपर्क करना चाहिए, इस प्रकार संपर्क कर परिजनों को आसानी से ब्लड मिल जाएगा और उनके मरीज का भी उपचार समय से हो सकेगा, लेकिन परिजन व अन्य ऐसा न करके सीधे रक्तदान के क्षेत्र में काम करने वाली समाजसेवी संस्थाओं को फोन करते हैं और स्वयं अपने रिश्तेदारों व परिचितों से संपर्क नहीं करते हैं। अगर परिजन अपने परिचितों व रिश्तेदारों से संपर्क कर उनसे रक्तदान करवाएंगे तो ब्लड बैंकों, अस्पतालों से ब्लड की कमी पूरी हो जाएगी।

परिजन जब अपने ही मरीज को नहीं देंगे बल्ड तो दूसरा क्यों करेगा रक्तदान:-
विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बताया की जब भी किसी भी मरीज को ब्लड की कमी होती है, तब सबसे पहले मरीज के परिजनों को स्वयं रक्तदान करने के लिए कहा जाता है, इस दौरान मरीज के परिजनों को अपने मरीज के लिए रक्तदान करने के लिए सतत रूप से प्रेरित करते हुए उनसे रक्तदान करवाया जाता है और इस दौरान यह भी बताया जाता है की जब मरीज के परिजन स्वयं अपने मरीज को ब्लड नहीं देंगे तो दूसरे व समाजसेवी भी आपकी मदद क्यों करेंगे।

परिजनों के कारण हो रही परेशानी:-
चिकित्सकों के अनुसार कई बार ऐसी स्थिति आ जाती है की जब मरीज की गंभीर हालात होती है और इस हालत में परिजन स्वयं अपने मरीज के लिए रक्तदान नहीं करते हैं तो उपचार के दौरान परेशानी आ जाती है। जिससे समय पर ब्लड नहीं मिल पाता है और कई बार ब्लड के अभाव में मरीज की मृत्यु भी हो जाती है।


रक्तदान करने से होते हैं यह फायदे:-
:- ब्लड देने से पहले मिनी ब्लड टेस्ट होता है, जिसमें हीमोग्लोबिन टेस्ट, ब्लड प्रेशर व वजन लिया जाता है, ब्लड डोनेट करने के बाद इसमें हेपेटाइटिस बी और सी, एचआईवी, सिफ लिस और मलेरिया आदि की जांच की जाती है। इन बीमारियों के लक्षण पाए जाने पर डोनर का ब्लड न लेकर उसे तुरंत सूचित किया जाता है।
:- ब्लड की कमी का एकमात्र कारण जागरूकता का अभाव है।
:- 18 साल से अधिक उम्र के स्त्री.पुरुष जिनका वजन 50 किलोग्राम या अधिक हो, ऐसे व्यक्ति वर्ष में तीन से चार बार ब्लड डोनेट कर सकते हैं।
:- ब्लड डोनेट करने योग्य व्यक्तियों द्वारा रक्तदान करने से असमय होने वाली मौतों को रोका जा सकता है।
:- ब्लड डोनेट करने से पहले व कुछ घंटे बाद तक धूम्रपान से परहेज करना चाहिए।
:- ब्लड डोनेट करने वाले शख्स को रक्तदान के 24 से 48 घंटे पहले ड्रिंक नहीं करनी चाहिए।
:- रक्तदान के दौरान ब्लड से संबंधित सभी जांचे होती है, जिससे रक्तदाता की सभी जांच हो जाती है और रक्तदान करने के बाद रक्तदाता को खुशी मिलती है व पीडि़त मरीज को जीवनदान मिलता है।

सिवनी ब्लड डोनर्स टीम के फाउंडर शुभम शर्मा

परिजनों को खुद करना चाहिए रक्तदान:-
सिवनी ब्लड डोनर्स टीम के फाउंडर शुभम शर्मा ने बताया की मरीज के परिजनों को हमारे द्वारा सबसे पहले रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया जाता है, जब मरीज के परिजन रक्तदान करते हैं और इसके बाद पुन: ब्लड की आवश्यकता होती है तो समाजसेवियों की मदद ली जाती है। समाजसेवियों को रक्तदान के क्षेत्र में काम करने में बहुत कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है, अत: मरीज के परिजनों को खुद रक्तदान करना चाहिए और अपने परिचितों से भी करवाना चाहिए।

माँ वैनगंगा सेवा अभियान और नेकी की दीवार टीम सिवनी के सदस्य विपिनशर्मा

समाजसेवी तो गरीब व बेहसहारों की करते हैं मदद:-
माँ वैनगंगा सेवा अभियान और नेकी की दीवार टीम सिवनी के सदस्य विपिनशर्मा ने बताया की थैलेसीमिया से पीडि़तों को हर माह दो से तीन बार ब्लड चढ़ता है, बीमारी से पीडि़तों की मदद करने के लिए हर वर्ग को आगे आना चाहिए और हर तीन माह में ब्लड दान करना चाहिए, रक्तदान बहुत ही नेक काम है। अगर समाजसेवी अन्य लोगों की मदद कर उन्हें ब्लड दिलवा देंगे तो ऐसे बच्चों का क्या होगा, जिनको तो हर माह दो से तीन यूनिट ब्लड लगना है, इसलिए सभी को रक्तदान करना और करवाना चाहिए।

प्रभांश सोनी सिवनी ब्लड डोनर्स टीम मेम्बर

रक्तदान करें और सभी से करवाएं:-
प्रभांश सोनी सिवनी ब्लड डोनर्स टीम मेम्बर ने बताया की रक्तदान करने से डरना नहीं चाहिए, व्यक्ति को हमेशा स्वस्थ्य रहना है तो उसे नियमित रूप से हर तीन से चार माह में रक्तदान करना चाहिए। रक्तदान सबसे बड़ा काम है, जिससे बीमारियों से बचा जा सकता है। रक्तदान के क्षेत्र में काम करना बहुत ही मुश्किल काम है, क्योंकि समाजसेवी रोजाना न जाने कितने लोगों से रक्तदान करवाते हुए कितनों की जिंदगी बचाते हैं और मरीज के परिजन जब स्वयं ब्लड न दे तो ऐसी स्थिति में स्थितियां और खराब हो जाती है। अत सभी से निवेदन है की वर्ष में तीन से चार बार रक्तदान करें और दूसरों से करवाते हुए पीडि़तों की मदद करें।

सिवनी जिला चिकित्साय ब्लड बैंक प्रभारी डॉ हर्षवर्धन जैन

रक्तदान करने से बहुत ही खुशी मिलती है:-
सिवनी जिला चिकित्साय ब्लड बैंक प्रभारी डॉ हर्षवर्धन जैन ने बताया की रक्तदान से बड़ा कोई महान काम नहीं है, इसे करने से खुद को खुशी मिलने के साथ-साथ आप किसी दूसरे को जीवनदान देने वाले बनते हैं, स्वस्थ्य व्यक्ति वर्ष में 3 से 4 बार रक्तदान कर सकता है। आज जब भी किसी को रक्त की आवश्यकता पड़ती है तो वह सीधे समाजसेवियों को फोन कर देते हैं, जबकि मरीज के परिजनों को स्वयं रक्तदान करना चाहिए और अपने परिचितों से भी रक्तदान करवाना चाहिए, तभी देश से हम रक्तदाताओं की संख्या को बढ़ा पाएंगे। रक्तदान करने से कोई बीमारी नहीं होती है, बल्कि नियमित रक्तदान करने वाला व्यक्ति हमेशा स्वस्थ्य रहता है और उसे रक्तदान करने के बाद किसी के जीवन को बचाने का मौका मिलता है व बहुत खुशी मिलती है।



 

सिवनी का नही है अश्लील वीडियो

सिवनी- मुख्यलाय के मिशन स्कुल मैदान में आरभ प्रदर्शनी से जुड़ा बताकर एक वीडियो इन दिनों शोशल मीडिया में पुनः वायरल हो रहा है, इससे पूर्व भी इस वीडियो के सम्बद्ध में प्रदर्शनी के सचालक मूलचन्द बता चुके है कि उक्त वीडियो सिविनि में चल रही प्रदर्शनी का नही है। इससे उनकी बदनामी हो रही है,एक बार यही वीडियो वायरल होने के बाद आज इस मामले में नगर कोतवाल अमित दानी ने बतया की वीडियो में दिखाई दे रहे डिज़ाइन वाले झूले सिवनी की प्रदर्शनी में नहीं लगे है। साथ ही उनका गेट भी वीडियो में दिखाई दे रहे स्थान पर नहीं है। यह वीडियो किसी अन्य स्थान का है। इस प्रकार के अपुष्टीकृत पोस्ट से अनावश्यक अफवाह फैलती है। कृपया इस संबंध में ध्यान रखना चाहिए।




 

निजी दुकानों में होने वाले आधार पंजीयन पर होगी कार्यवाही

    अपर कलेक्‍टर श्रीमति रानी बाटड द्वारा बताया गया कि शासन के निर्देशानुसार 31 मार्च 18 से आधार पंजीयन कार्य स्टेट रजिस्ट्रार मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रानिक डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन के माध्यम से किया जाना है। शासन द्वारा प्राईवेट/निजी एनरोलमेंट एजेंसियों पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया गया है। वर्तमान में सिवनी जिले के कुछ आधार पंजीयन केन्द्र प्राईवेट/निजी भवन में संचालित किये जा रहे है जो कि पूर्णत: अवैधानिक है। अत: समस्त आधार पंजीयन केन्द्र संचालकों को आदेशित किया जाता है कि आधार पंजीयन कार्य प्राइवेट/निजी भवन/दुकान में नहीं किया जाये। यदि आदेश के उपरांत भी प्राईवेट/निजी भवन/दुकान के आधार पंजीयन किया जाता है तो आधार पंजीयन केन्द्र के संचालक के विरूद्व दंडात्मक कार्यवाही की जाकर आधार मशीन जब्त की जायेगी। जिसके लिये वह स्वंय जिम्मेदार होगा।