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सिवनी हवाला कांड में बड़ा ट्विस्ट! जेल में बच्चे के साथ रह रहीं SDOP पूजा पांडे को मिली जमानत

SDOP POOJA PANDEY NEWS: मध्य प्रदेश के चर्चित सिवनी हवाला लूटकांड में मुख्य आरोपी निलंबित एसडीओपी पूजा पांडे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। करीब 3 करोड़ रुपए के कथित हवाला लूट मामले में लंबे समय से जेल में बंद पूजा पांडे को सोमवार को देश की सर्वोच्च अदालत ने जमानत दे दी। कोर्ट में उनकी ओर से यह दलील दी गई कि वह एकल मां हैं और उनका 2 साल का बच्चा उनके साथ जेल में रह रहा है। इसी मानवीय आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें राहत प्रदान की।

हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में पहले की तरह जारी रहेगी और जांच प्रक्रिया पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद पूरे प्रदेश में इस हाई-प्रोफाइल केस को लेकर फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

मुख्य न्यायाधीश की अदालत ने कही यह बात

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अदालत में सुनवाई के दौरान कहा गया कि याचिकाकर्ता महिला हैं और उनका दो वर्षीय बच्चा उनके साथ जेल में रह रहा है। अदालत ने इस पहलू को गंभीरता से लेते हुए जमानत मंजूर की।

यह मामला सिवनी जिले के खैरीटेक क्षेत्र में कथित हवाला रकम की लूट से जुड़ा हुआ है, जिसने उस समय पूरे मध्य प्रदेश में सनसनी फैला दी थी। आरोप है कि इस पूरी वारदात को पुलिस वर्दी और हथियारों के इस्तेमाल के साथ बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था।

3 करोड़ की रकम और पुलिस विभाग में मचा था हड़कंप

मामले के अनुसार, सिवनी पुलिस ने खैरीटेक क्षेत्र में नागपुर निवासी सोहन परमार से करीब 3 करोड़ रुपए जब्त किए थे। लेकिन बाद में आरोप लगे कि आधिकारिक रिकॉर्ड में केवल 1 करोड़ 45 लाख रुपए की ही जब्ती दिखाई गई। इतना ही नहीं, संबंधित व्यक्ति को बिना किसी वैधानिक कार्रवाई के छोड़ दिया गया और मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक भी नहीं पहुंचाई गई।

जैसे ही यह मामला उजागर हुआ, पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पूरे प्रदेश में इस केस को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चाएं शुरू हो गई थीं।

SIT जांच में सामने आए कई चौंकाने वाले तथ्य

घटना के बाद राज्य स्तर पर विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई थी। जांच टीम ने कई पुलिसकर्मियों से पूछताछ की और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी एकत्र किए। जांच के दौरान कई पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी।

बताया जाता है कि 9 अक्टूबर को तत्कालीन सीएसपी पूजा पांडे और एसआई अर्पित भैरम ने 1.45 करोड़ रुपए की रकम जमा कराई थी। इसके बाद मामला सार्वजनिक होते ही उसी रात तत्कालीन आईजी प्रमोद वर्मा ने थाना प्रभारी अर्पित भैरम समेत 9 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। अगले दिन डीजीपी कैलाश मकवाना ने एसडीओपी पूजा पांडे को भी सस्पेंड कर दिया था।

कई आरोपियों को पहले ही मिल चुकी है राहत

इस मामले में शामिल अधिकांश आरोपियों को पहले ही जबलपुर हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। वहीं, दो आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर भी निरस्त हो चुकी हैं। इसके बाद पूजा पांडे ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, जिस पर अब फैसला आया है।

पूरे प्रदेश की नजर अब ट्रायल कोर्ट पर

सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद भले ही पूजा पांडे को राहत मिल गई हो, लेकिन सिवनी हवाला लूटकांड की कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। ट्रायल कोर्ट में इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई जारी रहेगी और आने वाले समय में कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

सिवनी: मिशन स्कूल के सामने जनपद शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में शुभम माथुर की मिली लाश

Seoni News: मध्यप्रदेश के सिवनी जिला मुख्यालय में रविवार शाम उस समय सनसनी फैल गई, जब मिशन स्कूल के सामने स्थित जनपद शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में एक युवक की लाश मिलने की खबर सामने आई। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के क्षेत्र में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक का शव कॉम्प्लेक्स परिसर में संदिग्ध अवस्था में पड़ा मिला। स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने शव को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस कर रही मौत के कारणों की जांच

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक मृत युवक की पहचान काली चौक निवासी शुभम माथुर पिता मनोज माथुर उम्र लगभग 28 वर्ष के रूप में हुई है । पुलिस आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और लोगों से पूछताछ की जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि मामला हत्या का है, आत्महत्या का या फिर किसी अन्य कारण से युवक की मौत हुई है।

पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

इलाके में चर्चा का विषय बनी घटना

घटना के बाद मिशन स्कूल और जनपद शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के आसपास काफी देर तक लोगों की भीड़ लगी रही। स्थानीय नागरिकों में घटना को लेकर दहशत और कई तरह की चर्चाएं देखने को मिलीं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और जल्द ही पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया जाएगा।

खूनी बनी सिवनी-बालाघाट रोड! तेज रफ्तार मौत ने फिर छीनी एक युवक की जिंदगी, दूसरा मौत से जंग लड़ रहा”

सिवनी/बरघाट/धारनाकला। सिवनी-बालाघाट मार्ग अब लोगों के बीच “खूनी सड़क” के नाम से पहचाना जाने लगा है। इस सड़क पर आए दिन हो रहे भीषण हादसे और उनमें हो रही मौतें अब आम लोगों के लिए दर्दनाक लेकिन परिचित दृश्य बन चुकी हैं। हर गुजरते दिन के साथ यह सड़क किसी न किसी परिवार का सहारा छीन रही है। बावजूद इसके जिम्मेदार विभाग और प्रशासन अब तक ठोस कदम उठाते नजर नहीं आ रहे हैं।

एक बार फिर इसी जर्जर सड़क ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। शुक्रवार को सिवनी-बालाघाट रोड पर धारनाकला क्षेत्र के पास धनई नाले के समीप एक मारुति वैन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि वैन के परखच्चे उड़ गए और वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे की आवाज इतनी जोरदार थी कि आसपास के ग्रामीण मौके की ओर दौड़ पड़े। दुर्घटना में वैन सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हुए, जिनमें से एक युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दूसरा युवक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। घायल युवक को गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया है।

बताया जा रहा है कि दोनों युवक कान्हीवाड़ा-भोमा क्षेत्र के निवासी हैं। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी गई।

लगातार हादसों से दहशत में लोग

सिवनी-बालाघाट रोड की हालत लंबे समय से बेहद खराब बनी हुई है। जगह-जगह गड्ढे, टूटी सड़क और बढ़ता यातायात दबाव इस मार्ग को दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बना रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क पर सफर करना अब जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है।

ग्रामीणों और वाहन चालकों का आरोप है कि सड़क की मरम्मत और चौड़ीकरण को लेकर कई बार मांग उठाई गई, लेकिन अब तक हालात जस के तस बने हुए हैं। आए दिन हो रहे हादसों के बावजूद प्रशासन की उदासीनता लोगों में भारी नाराजगी पैदा कर रही है।

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी नहीं शुरू हुआ फोरलेन कार्य

प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav द्वारा सिवनी-बालाघाट रोड को फोरलेन में तब्दील करने की घोषणा किए करीब दो वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अब तक जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हो पाया है। यही वजह है कि लोगों का गुस्सा अब बढ़ता जा रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क का चौड़ीकरण और सुधार कार्य शुरू हो जाता, तो शायद कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी। हर नए हादसे के बाद कुछ दिनों तक चर्चा होती है, लेकिन फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।

कब रुकेगा मौत का यह सिलसिला?

सवाल यही उठ रहा है कि आखिर सिवनी-बालाघाट रोड पर मौत का यह सिलसिला कब थमेगा? कितने और परिवार उजड़ेंगे, कितने घरों के चिराग बुझेंगे, तब जाकर जिम्मेदार विभाग जागेगा?

स्थानीय लोग अब जल्द से जल्द सड़क निर्माण और फोरलेन परियोजना शुरू करने की मांग कर रहे हैं ताकि इस खूनी सड़क पर हो रही लगातार मौतों पर रोक लग सके।

सिवनी: सहकारिता विभाग में ‘दैनिक वेतन भोगी भर्ती’ का बड़ा खेल! रातों-रात हुई भर्तियां, नियम ताक पर रखकर बांटे गए लाभ

Seoni News: सिवनी जिले के बरघाट विकासखंड अंतर्गत आने वाली सहकारी समितियों में कथित तौर पर दैनिक वेतनभोगी भर्ती और कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने का बड़ा मामला सामने आया है। सहकारिता विभाग से जुड़ा यह मामला अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुका है। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया के भर्ती की गई और बाद में कुछ कर्मचारियों को विशेष लाभ भी पहुंचाए गए।

ताजा मामला सहकारी समिति धारनाकला से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां संचालक मंडल के प्रस्ताव के आधार पर एक कर्मचारी को दैनिक वेतनभोगी के रूप में नियुक्त किया गया। आरोप है कि कुछ ही समय में उसे नियमित कर्मचारी जैसी सुविधाएं और लाभ मिलने लगे। यही नहीं, उस कर्मचारी को दो-दो राशन दुकानों का प्रभार सौंपे जाने और अन्य कर्मचारियों की तुलना में अधिक वेतन दिए जाने की चर्चा भी अब जोरों पर है।

स्थायी पद नहीं, फिर भी नियुक्तियां सवालों के घेरे में

जानकारों के अनुसार सहकारी समितियों में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नियुक्ति सामान्यतः अस्थायी, आकस्मिक या मौसमी कार्यों के लिए की जाती है। यह नियुक्तियां किसी स्थायी रिक्त पद के स्थान पर नहीं होतीं और इनके लिए विभागीय अनुमति आवश्यक मानी जाती है। नियुक्ति के समय यह भी स्पष्ट किया जाता है कि सेवा पूरी तरह अस्थायी होगी और आवश्यकता समाप्त होने पर कभी भी खत्म की जा सकती है।

लेकिन बरघाट क्षेत्र की कई समितियों में जिस तरह भर्ती और लाभ का सिलसिला चला, उसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है तो भर्ती प्रक्रिया सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।

2020 में भी उठ चुके थे फर्जी भर्ती के मुद्दे

यह मामला नया नहीं बताया जा रहा। वर्ष 2020 में भी कार्यालय उपायुक्त सहकारिता, जिला सिवनी द्वारा कृषि साख समितियों में कथित फर्जी भर्तियों को लेकर पत्र जारी किया गया था। उस पत्र में शिकायतों के आधार पर उल्लेख किया गया था कि जिले की कई समितियों में अधिकारियों और प्रबंधकों की मिलीभगत से लाखों रुपये लेकर नियुक्तियां की गईं।

कुछ मामलों में रिश्तेदारों को नियमों के विरुद्ध नियुक्त किए जाने और अपात्र व्यक्तियों को प्रबंधक पद पर बैठाने जैसे आरोप भी सामने आए थे।

क्या सेवा नियमों का पालन हुआ?

सहकारिता विभाग के सेवा नियमों के अनुसार समितियों में कर्मचारियों की भर्ती के लिए चयन समिति गठित होना जरूरी है। नियमों के मुताबिक:

  • रिक्त पदों की समीक्षा की जानी चाहिए
  • आवश्यक योग्यता और अनुभव की जांच होनी चाहिए
  • चयन के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित होना अनिवार्य है
  • भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए
  • विज्ञापन या सूचना जारी कर आवेदन आमंत्रित किए जाने चाहिए

लेकिन आरोप है कि कई समितियों में इन नियमों का पालन नहीं हुआ। धारनाकला समिति के मामले में भी बिना किसी विज्ञापन या निविदा के भर्ती किए जाने की बात सामने आई है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि रातों-रात नियुक्तियां कर दी गईं और लंबे समय से शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

प्रशासक की ‘मेहरबानी’ से बढ़ा वेतन?

संचालक मंडल भंग होने के बाद वर्तमान में कई सहकारी समितियों का संचालन प्रशासकों के हाथों में है। जिले की दर्जनों समितियों में एक ही प्रशासक व्यवस्था संभाल रहे हैं। ऐसे में कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने और वेतन निर्धारण में मनमानी के आरोप लग रहे हैं।

धारनाकला समिति में कार्यरत कर्मचारियों का आरोप है कि एक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी को विशेष लाभ देते हुए न केवल दो राशन दुकानों का प्रभार दिया गया बल्कि उसका वेतन भी अन्य कर्मचारियों से अधिक कर दिया गया। जब अन्य कर्मचारियों ने समान वेतन वृद्धि की मांग की तो संबंधित कर्मचारी को “नियमित” बताया गया।

दिलचस्प बात यह है कि समिति में अनुकंपा नियुक्ति के तहत कार्यरत कर्मचारी भी हैं, लेकिन उन्हें नियमित कर्मचारी की श्रेणी में नहीं माना जा रहा। वहीं दैनिक वेतनभोगी के रूप में भर्ती कर्मचारी को कथित रूप से नियमित जैसी सुविधाएं मिलने लगीं।

उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज

पूरा मामला अब सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो तो कई समितियों में भर्ती, वेतन और भत्तों से जुड़े बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

वहीं इस मामले में जब संयुक्त आयुक्त जबलपुर राकेश पांडे से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा:

“इस संबंध में फिलहाल जानकारी नहीं है। शिकायत मिलने पर निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”

अब देखने वाली बात होगी कि सहकारिता विभाग इस पूरे मामले में जांच कर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी कागजों तक सीमित रह जाएगा।

प्रेस क्लब सिवनी में तानाशाही के आरोप: बिना स्पष्टीकरण सदस्य का निष्कासन, अध्यक्ष अयोध्या विश्वकर्मा का पक्ष भी आया सामने


सिवनी। प्रेस क्लब ऑफ सिवनी (प्रेस एसोसिएशन) द्वारा हाल ही में कार्यकारिणी की बैठक में वरिष्ठ सदस्य श्री अखिलेश दुबे की सदस्यता समाप्त करने के निर्णय को लेकर विवाद गहरा गया है। संस्था के इस कदम को लेकर अब विरोध के स्वर उठने लगे हैं और इसे एकतरफा व न्याय-संगत प्रक्रिया के विरुद्ध बताया जा रहा है।

इस निर्णय पर आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे संस्था की गरिमा के प्रतिकूल बताया गया है। विरोध जता रहे सदस्यों का मानना है कि इस कार्रवाई में नियमों और पारदर्शिता की पूरी तरह अनदेखी की गई है।

निष्कासन पर उठाए गए मुख्य बिंदु:
पक्ष रखने का नहीं मिला मौका: शिकायत है कि अनुशासनहीनता का आरोप लगाकर की गई इस बड़ी कार्रवाई से पहले संबंधित सदस्य को अपना पक्ष रखने या स्पष्टीकरण देने का कोई अवसर नहीं दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

अपारदर्शी कार्यप्रणाली: सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि श्री दुबे द्वारा किस प्रकार की अनुशासनहीनता की गई थी। बिना किसी ठोस कारण या सार्वजनिक विवरण के सदस्यता समाप्त करना संस्था की साख पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।

व्यक्तिगत द्वेष की आशंका: उचित प्रक्रिया का पालन न किए जाने के कारण यह आशंका जताई जा रही है कि संभवतः अध्यक्ष और सचिव द्वारा यह निर्णय व्यक्तिगत रंजिश या द्वेष की भावना से प्रेरित होकर लिया गया है।
​निष्पक्ष जांच की मांग

प्रेस क्लब के अन्य जागरूक सदस्यों और पत्रकार जगत ने मांग की है कि न्याय की गरिमा को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए। साथ ही, लगाए गए आरोपों की किसी निष्पक्ष समिति से जांच कराई जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

प्रेस क्लब ऑफ सिवनी अध्यक्ष का पक्ष भी आया सामने

प्रेस क्लब ऑफ सिवनी के अध्यक्ष अयोध्या विश्वकर्मा ने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पूर्व सदस्य अखिलेश दुबे द्वारा सदस्य रहते हुए प्रेस क्लब के खिलाफ कई गतिविधियों में संलिप्तता पाई गई थी।

अध्यक्ष के अनुसार, प्रेस क्लब चुनाव के दौरान अखिलेश दुबे मतदान परिसर में मौजूद थे, लेकिन उन्होंने अपने मताधिकार का उपयोग नहीं किया। साथ ही उन पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करने के आरोप भी लगाए गए हैं।

अयोध्या विश्वकर्मा ने बताया कि पूरे मामले को कार्यकारिणी सदस्यों के समक्ष रखा गया था। चर्चा के बाद कार्यकारिणी द्वारा अखिलेश दुबे की सदस्यता स्थायी रूप से समाप्त करने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इसके बाद उनकी सदस्यता निरस्त करने की कार्रवाई की गई।

सिवनी में लोकायुक्त का बड़ा धमाका! 20 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया ASI दिनेश रघुवंशी, बस स्टैंड के पास हुई कार्रवाई

सिवनी। मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में जबलपुर लोकायुक्त संगठन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए थाना कोतवाली सिवनी में पदस्थ कार्यवाहक सहायक उप निरीक्षक (ASI) दिनेश रघुवंशी को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई मंगलवार 13 मई 2026 को बस स्टैंड स्थित एक चाय की दुकान पर की गई, जिससे पूरे पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया।

लोकायुक्त से मिली जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता नंदकिशोर चौरसिया पिता श्री चंदन लाल चौरसिया (उम्र 54 वर्ष), निवासी ग्राम छितापार, थाना कुरई, जिला सिवनी ने आरोपी पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

बेटे को नौकरी दिलाने के नाम पर हुई थी ठगी

बताया गया कि आवेदक के बेटे अभिषेक चौरसिया को नौकरी दिलाने और सरकारी विभाग में वाहन लगवाने का झांसा देकर कुछ लोगों द्वारा फर्जीवाड़ा और ठगी की गई थी। इस मामले में नंदकिशोर चौरसिया ने थाना कोतवाली सिवनी में शिकायत देकर एफआईआर दर्ज करवाई थी।

जब आवेदक मामले की जांच और एफआईआर की प्रगति की जानकारी लेने जांच अधिकारी दिनेश रघुवंशी के पास पहुंचे, तब आरोपी ASI ने सही रिपोर्ट तैयार करने और कथित फर्जी हस्ताक्षरों की जांच करवाने के बदले 30 हजार रुपये रिश्वत की मांग की।

शिकायतकर्ता द्वारा बार-बार बातचीत करने पर आरोपी 20 हजार रुपये लेने को तैयार हो गया। इसके बाद आवेदक ने पूरे मामले की शिकायत जबलपुर लोकायुक्त कार्यालय में की।

बस स्टैंड की चाय दुकान पर बिछाया गया जाल

लोकायुक्त टीम ने शिकायत का सत्यापन करने के बाद योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई की। मंगलवार को बस स्टैंड स्थित चाय की दुकान पर जैसे ही आरोपी ASI दिनेश रघुवंशी ने शिकायतकर्ता से 20 हजार रुपये रिश्वत के रूप में लिए, लोकायुक्त टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया।

कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। अचानक हुई इस कार्रवाई से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज

लोकायुक्त अधिकारियों ने बताया कि आरोपी दिनेश रघुवंशी पिता स्वर्गीय तुकरसिंह रघुवंशी (उम्र 57 वर्ष), पद- कार्यवाहक सहायक उप निरीक्षक, थाना कोतवाली जिला सिवनी, के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7, 13(1)(B), 13(2) के तहत कार्रवाई की जा रही है।

लोकायुक्त टीम में शामिल रहे ये अधिकारी

इस ट्रैप कार्रवाई में दल प्रभारी नीतू त्रिपाठी, उप पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त जबलपुर, निरीक्षक राहुल गजभिए, टीएलओ निरीक्षक शशिकला मस्कुले, उप निरीक्षक शिशिर पांडेय सहित लोकायुक्त जबलपुर की विशेष टीम शामिल रही।

लोकायुक्त की आम जनता से अपील

लोकायुक्त संगठन ने कहा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत की मांग करता है, तो आमजन लोकायुक्त कार्यालय जबलपुर से संपर्क कर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

कार्यालय पता:
पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त
सिविक सेंटर, जेडीए बिल्डिंग, तीसरी मंजिल, जबलपुर।

सिवनी कलेक्टर कार्यालय परिसर में धारा 163 लागू: प्रतिबंधात्‍मक आदेश जारी

सिवनी: अपर कलेक्‍टर एवं अतिरिक्‍त जिला दण्डाधिकारी सुश्री सुनीता खंडायत द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के अंतर्गत कलेक्टर कार्यालय परिसर में कानून-व्यवस्था एवं लोक शांति बनाए रखने हेतु प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए हैं।

जारी आदेशानुसार कलेक्टर कार्यालय परिसर में बिना पूर्व अनुमति पांच या उससे अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने पर प्रतिबंध रहेगा। साथ ही परिसर में किसी भी प्रकार के प्रदर्शन, जुलूस या रैली निकालने तथा बिना अनुमति ज्ञापन देने हेतु प्रवेश करना भी पूर्णतः वर्जित रहेगा। कोई भी व्यक्ति लाठी, डंडा या अन्य किसी प्रकार के हथियार लेकर परिसर में प्रवेश नहीं करेगा।

ज्ञापन प्रस्तुत करने के इच्छुक व्यक्तियों को पूर्व सूचना अनुविभागीय दण्डाधिकारी/कार्यपालिक दण्डाधिकारी सिवनी को देना अनिवार्य होगा।
यदि किसी को ज्ञापन देने की अनुमति प्रदान की जाती है, तो समूह में से केवल एक अधिकृत प्रतिनिधि ही कार्यालय में प्रवेश करेगा तथा संबंधित कार्यपालिक दण्डाधिकारी के मार्गदर्शन में ज्ञापन प्रस्तुत करेगा। ज्ञापन प्राप्ति कार्यालय के भीतर अथवा बाहर, संबंधित अधिकारी के विवेकानुसार की जाएगी।

इसके अतिरिक्त, परिसर में किसी भी प्रकार के भड़काऊ नारे, सामाजिक वैमनस्यता फैलाने वाले कथन या किसी व्यक्ति विशेष की मानहानि करने वाले वक्तव्य पूर्णतः प्रतिबंधित रहेंगे। सभी ज्ञापन अनुविभागीय दण्डाधिकारी कार्यालय में कार्यपालिक दण्डाधिकारी एवं थाना प्रभारी की उपस्थिति में स्वीकार किए जाएंगे।

यह आदेश कलेक्टर कार्यालय परिसर में आमजन पर लागू रहेगा, शासकीय कर्तव्य पर तैनात अधिकारी-कर्मचारी, पुलिस बल, मजिस्ट्रेट तथा शासन द्वारा आयोजित बैठकों में आमंत्रित व्यक्तियों को इससे छूट प्रदान की गई है। उक्त आदेश जारी होने की तिथि से दो माह की अवधि तक प्रभावशील रहेगा।

सिवनी: सरकारी जमीन पर दबंगों का कब्जा! कोर्ट के आदेश भी बेअसर, विरोध करने पर फर्जी केस का आरोप – सिवनी से चौंकाने वाला मामला

Seoni News। मध्यप्रदेश के सिवनी जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और कानून के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के भोमा तहसील अंतर्गत ग्राम किरकिरंजी (पोस्ट हिनोतिया, थाना कन्हीवाड़ा) में शासकीय भूमि पर कथित अवैध कब्जा और निर्माण का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है।

ग्राम निवासी धर्मराज साहू (पिता श्री राम साहू) ने इस संबंध में प्रशासन से शिकायत करते हुए आरोप लगाया है कि उनकी निजी भूमि से सटी शासकीय रास्ता भूमि (खसरा नंबर 34/1, रकबा 0.03 हेक्टेयर) पर दबंगों द्वारा जबरन कब्जा कर अवैध निर्माण किया जा रहा है।

आवागमन बाधित, ग्रामीणों को हो रही परेशानी

आवेदक के अनुसार, उक्त शासकीय भूमि वर्षों से आम रास्ते के रूप में उपयोग में रही है। लेकिन अब पुसूलाल बोनिया (पिता लक्ष्मण बोनिया) एवं उनके पुत्र राकेश बोनिया द्वारा इस जमीन पर मकान निर्माण कर लिया गया है, जिससे न केवल आवेदक बल्कि पूरे गांव के लोगों के आने-जाने में भारी दिक्कतें उत्पन्न हो रही हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह कब्जा नहीं हटाया गया तो भविष्य में रास्ता पूरी तरह बंद हो सकता है।

कोर्ट के आदेशों की खुलेआम अवहेलना!

इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अवैध कब्जा हटाने के लिए पहले ही न्यायालय आदेश जारी कर चुका है।

  • राजस्व न्यायालय तहसीलदार सिवनी (भोमा) द्वारा
    • प्रकरण क्रमांक 2/अ-68/2013-14
    • प्रकरण क्रमांक 16/अ-70/2015-16
  • सिविल न्यायालय (षष्ठम व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ खंड, जिला सिवनी)
    • प्रकरण क्रमांक RCS 13A/2018

इन सभी मामलों में अवैध कब्जा हटाने के स्पष्ट आदेश दिए गए थे, लेकिन आरोप है कि इन आदेशों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।

विरोध करने पर झूठे केस का आरोप

धर्मराज साहू का आरोप है कि जब भी वे इस अवैध निर्माण का विरोध करते हैं, तो उनके खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत झूठी शिकायतें दर्ज कराई जाती हैं, जिससे उन्हें और उनके परिवार को मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है।

यह आरोप यदि सही साबित होता है, तो यह कानून के दुरुपयोग का गंभीर मामला माना जाएगा।

प्रशासनिक निष्क्रियता पर उठे सवाल

आवेदक ने स्थानीय प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि—

  • थाना कन्हीवाड़ा
  • राजस्व विभाग
  • ग्राम पंचायत (सरपंच-सचिव)

सभी को जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे प्रशासनिक उदासीनता और संभावित संरक्षण की आशंका जताई जा रही है।

आवेदक की मांग: तुरंत हटे अवैध कब्जा

धर्मराज साहू ने प्रशासन से मांग की है कि—

  • शासकीय भूमि से तत्काल अवैध कब्जा हटाया जाए
  • न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जाए
  • दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए
  • झूठे मामलों की निष्पक्ष जांच हो

क्या कहते हैं जानकार?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा होता है और न्यायालय द्वारा आदेश जारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती, तो यह न केवल कानून की अवहेलना है बल्कि प्रशासनिक विफलता भी मानी जाती है।

सिवनी का यह मामला अब प्रशासन की कार्यशैली पर एक बड़ा सवाल बन चुका है। एक ओर न्यायालय के आदेश हैं, तो दूसरी ओर उनका पालन न होना गंभीर चिंता का विषय है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कब तक कार्रवाई करता है और क्या पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं।

सिवनी के नए एसपी होंगे कृष्ण लालचंदानी : सिवनी को मिला नया युवा एसपी, एमपी में एक साथ 62 IPS अफसरों का तबादला

Seoni New SP News – सिवनी : मध्यप्रदेश में पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक भूचाल देखने को मिला है। राज्य सरकार के गृह विभाग ने एक साथ 62 आईपीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं, जिससे कई जिलों में पुलिस नेतृत्व पूरी तरह बदल गया है। इस बड़े फेरबदल में सबसे ज्यादा चर्चा सिवनी जिले की हो रही है, जहां नए और युवा आईपीएस अधिकारी को कमान सौंपी गई है।

सिवनी को मिला नया पुलिस कप्तान

मध्यप्रदेश शासन के आदेश के अनुसार, 2020 बैच के आईपीएस अधिकारी कृष्ण लालचंदानी को सिवनी का नया पुलिस अधीक्षक (SP) नियुक्त किया गया है।

युवा, ऊर्जावान और तेज-तर्रार अधिकारी के रूप में उनकी पहचान पहले से ही प्रशासनिक गलियारों में चर्चा में रही है। ऐसे में उनकी नियुक्ति को जिले के लिए एक सकारात्मक और निर्णायक बदलाव माना जा रहा है।

सिर्फ सिवनी ही नहीं, कई जिलों में बड़ा फेरबदल

इस बड़े ट्रांसफर में केवल सिवनी ही नहीं, बल्कि प्रदेश के कई अहम जिलों के एसपी भी बदले गए हैं।

👉 सूत्रों के मुताबिक:

  • लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात अधिकारियों को हटाया गया
  • कई युवा अधिकारियों को फील्ड में जिम्मेदारी दी गई
  • प्रशासनिक कसावट बढ़ाने पर जोर दिया गया

यह कदम राज्य में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

फील्ड पोस्टिंग पर खास फोकस

गृह विभाग ने इस बार तबादलों में खास तौर पर फील्ड पोस्टिंग को प्राथमिकता दी है। इसका मकसद है:

✔️ जमीनी स्तर पर पुलिसिंग को मजबूत करना
✔️ जनता और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय
✔️ अपराध नियंत्रण में तेजी

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव आने वाले समय में अपराध दर पर सीधा असर डाल सकता है

क्या बदलेगा अब सिवनी में?

नए एसपी की नियुक्ति के बाद जिले में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं:

  • अपराध नियंत्रण पर सख्त एक्शन
  • पुलिस की जवाबदेही बढ़ेगी
  • जनता से सीधे संवाद की संभावना
  • नए ऑपरेशन और अभियान शुरू हो सकते हैं

स्थानीय लोगों में भी इस बदलाव को लेकर उम्मीद और उत्साह देखा जा रहा है।

इन अफसरों के तबादले

क्र.अधिकारी का नामवर्तमान पदस्थापनानवीन पदस्थापना
1रवि कुमार गुप्ताADG रेल, भोपालADG प्रशिक्षण, भोपाल
2राजाबाबू सिंहADG प्रशिक्षणADG रेल, भोपाल
3डी.पी. गुप्ताADG शिकायत/मानव अधिकारADG सामुदायिक पुलिसिंग
4सोलोमन मिंजADG PHQADG शिकायत/मानव अधिकार
5अमित सिंहअतिरिक्त पुलिस आयुक्त, इंदौरDIG विसबल
6अवधेश गोस्वामीअतिरिक्त पुलिस आयुक्त, भोपालDIG PHQ
7अमित सांधीDIG ग्वालियरDIG SAF, भोपाल
8वीरेन्द्र कुमार सिंहDIG चयन, PHQDIG नर्मदापुरम
9प्रशांत खरेDIG नर्मदापुरमDIG PHQ
10मनीष अग्रवालDIG SAFDIG PHQ
11मनोज कुमार रायSP खंडवाDIG PHQ
12रियाज इकबालSP रेडियोDIG PHQ
13राहुल कुमार लोढ़ाSP रेलDIG PHQ
14सिमाला प्रसादSP रेल जबलपुरDIG PHQ
15अमित यादवSP भिंडDIG ग्वालियर
16विवेक सिंहDCP भोपालDIG शहडोल
17शैलेन्द्र सिंह चौहानSP रीवाअतिरिक्त पुलिस आयुक्त भोपाल
18कुमार प्रतीकDCP इंदौरDIG नारकोटिक्स
19शिव दयालSP झाबुआDIG PHQ
20मयंक अवस्थीSP धारअतिरिक्त पुलिस आयुक्त इंदौर
21अरविंद तिवारीAIG PHQसेनानी, 4वीं बटालियन
22सूरज वर्माSP दतियाSP भिंड
23यांगचेन डोलकरSP इंदौर देहातSP शिवपुरी
24गुरकरण सिंहसेनानीSP रीवा
25दीपक शुक्लाSP सीहोरसेनानी SAF
26अमन सिंह राठौड़SP शिवपुरीDCP इंदौर
27अनुराग सुजानियाAIG PHQSP सागर
28सचिन शर्माप्रतिनियुक्तिSP धार
29वाहिनी सिंहSP डिंडोरीSP PTS इंदौर
30विकास सहवालSP सागरDCP भोपाल
31धर्मराज मीणाSAFSP मुरैना
32समीर सौरभSP मुरैनाSP रेडियो भोपाल
33रजत सकलेचाSP मंडलाSP छतरपुर
34अगम जैनSP छतरपुरSP खंडवा
35सुंदर सिंह कनेशSP पांढुर्णा SP रेल जबलपुर
36सुनील कुमार मेहताSP सिवनीDCP इंदौर
37राजेश व्यासDCP इंदौरSP नीमच
38विनोद कुमार सिंहSP आगर मालवासेनानी विसबल
39पंकज कुमार पांडेAIG PHQSP देहात भोपाल
40प्रकाश चन्द्र परिहारDCP इंदौरSP पांढुर्णा
41दिलीप कुमार सोनीSP मऊगंजSP आगर मालवा
42राजेन्द्र कुमार वर्माSP PTS इंदौरSP देहात इंदौर
43विक्रांत मुरावAIG PHQSP अनूपपुर
44सुरेन्द्र कुमार जैनSP PTS रीवाSP मऊगंज
45आशीष खरेविशेष शाखा जबलपुरSP डिंडोरी
46अंकित जायसवालSP नीमचSP रेल भोपाल
47राजेश रघुवंशीअतिरिक्त SP खंडवाSP मंडला
48मोतीउर रहमानSP अनूपपुरसेनानी SAF रीवा
49श्रुतकीर्ति सोमवंशीSP दमोहसेनानी SAF ग्वालियर
50मयूर खंडेलवालDCP भोपालSP दतिया
51सोनाक्षी सक्सेनाDCP भोपालSP सीहोर
52शिराज के.एम.हॉकफोर्स बालाघाटSP सिंगरौली
53आनंद कलादगीDCP इंदौरSP दमोह
54कृष्ण लालचंदानी DCP इंदौरSP सिवनी
55आयुष गुप्ताअतिरिक्त SP जबलपुरDCP भोपाल
56आदर्शकांत शुक्लाएंटी नक्सल बालाघाटDCP भोपाल
57नरेन्द्र रावतराजभवन परिसहायDCP इंदौर
58अभिषेक रंजनअतिरिक्त SP उज्जैनDCP इंदौर
59राहुल देशमुखCSP उज्जैनराजभवन परिसहाय
60रामशरण प्रजापतिSP, देहात, भोपालएआईजी पीएचक्यू
61मनीष खत्रीSP सिंगरौलीAIG PHQ भोपाल
62देवेंद्र कुमार पाटीदारSP बुरहानपुरSP झाबुआ

सरकार का बड़ा संदेश

राज्य सरकार का यह फैसला साफ संकेत देता है कि प्रशासन अब परफॉर्मेंस बेस्ड सिस्टम पर ज्यादा ध्यान दे रहा है।

➡️ लगातार ट्रांसफर और नई पोस्टिंग से यह संदेश भी गया है कि
“काम करो या हटो” की नीति अब सख्ती से लागू हो रही है।

मध्यप्रदेश में हुए इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल को पुलिसिंग में सुधार की दिशा में एक मजबूत और जरूरी कदम माना जा रहा है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि नए एसपी कृष्ण लालचंदानी सिवनी में कानून-व्यवस्था को किस तरह नई दिशा देते हैं।

सिवनी राशन घोटाला: गरीबों का राशन अमीरों के घर! सिवनी में फ्री राशन योजना पर बड़ा खुलासा, SAMAGRA ID में हेरफेर का खेल

सिवनी, बरघाट, धारनाकला (एस. शुक्ला): देशभर में गरीबों के लिए चलाई जा रही मुफ्त राशन योजना अब कई जगह सवालों के घेरे में है। सिवनी जिले के बरघाट क्षेत्र से सामने आई स्थिति ने इस योजना की जमीनी हकीकत पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर गरीब परिवार राशन के लिए लंबी कतारों में खड़े नजर आते हैं, वहीं दूसरी ओर आर्थिक रूप से संपन्न लोग भी इस योजना का लाभ उठाते दिख रहे हैं।

नियमों के बावजूद अमीर उठा रहे लाभ

सरकारी नियमों के अनुसार जिन परिवारों के पास चार पहिया वाहन, ट्रैक्टर, 100 वर्ग मीटर से अधिक का मकान या प्लॉट, या जिनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक है, वे मुफ्त राशन योजना के पात्र नहीं होने चाहिए।

लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। गांवों में ऐसे कई परिवार हैं जिनके पास पक्के मकान, वाहन और लाखों की आय है, फिर भी वे सरकारी राशन का लाभ ले रहे हैं।

दबंगई के दम पर पहले मिलता है राशन

स्थानीय लोगों का आरोप है कि गांव के प्रभावशाली और संपन्न लोग राशन दुकान पर पहुंचते ही प्राथमिकता मांगते हैं।

  • वे लाइन में लगना अपनी शान के खिलाफ मानते हैं
  • राशन विक्रेताओं पर दबाव बनाकर पहले राशन लेते हैं
  • यदि उनकी मांग पूरी न हो, तो विवाद की स्थिति बन जाती है

राशन विक्रेताओं का कहना है कि वे मजबूरी में ऐसे लोगों को पहले सेवा देते हैं, क्योंकि उन्हें शिकायतों और दबाव का सामना करना पड़ता है।

181 हेल्पलाइन का हो रहा दुरुपयोग

बताया जा रहा है कि कई संपन्न लोग 181 सीएम हेल्पलाइन का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए करते हैं।
कम कमीशन पर काम कर रहे राशन विक्रेता इस दबाव के चलते नियमों का पालन करने में असमर्थ हो जाते हैं।

वाहनों से पहुंचते हैं राशन लेने

हैरानी की बात यह है कि राशन दुकानों पर कई लाभार्थी टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर वाहनों से आते हैं, जबकि वे खुद को गरीब श्रेणी में दर्ज कराए हुए हैं।

PMGKAY योजना: गरीबों के लिए या सबके लिए?

भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही प्रधान मंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत पात्र राशन कार्ड धारकों को 2028 तक मुफ्त गेहूं और चावल प्रदान किया जा रहा है।

  • प्रति व्यक्ति 5 किलो राशन
  • अंत्योदय (AAY) परिवारों को 35 किलो तक राशन

लेकिन अब यह योजना कई जगह अमीरों के लिए भी “फायदे का सौदा” बनती जा रही है

समग्र परिवार ID में हेरफेर का खेल

जांच में यह भी सामने आया है कि कई परिवारों ने परिवार ID अलग-अलग बनवाकर योजना का लाभ कई हिस्सों में बांट लिया है।
जबकि वास्तविकता में पूरा परिवार एक साथ ही रहता है।

इसी तरह की गड़बड़ी प्रधान मंत्री आवास योजना में भी देखने को मिली है, जहां सक्षम लोगों ने भी सरकारी लाभ हासिल कर लिया।

90% गांव गरीब श्रेणी में? आंकड़े चौंकाने वाले

सबसे बड़ा सवाल यह है कि गांव के लगभग 90% लोग गरीबी रेखा में दर्ज हैं, जबकि उनके पास:

  • महंगे वाहन
  • बड़ी जमीन
  • आलीशान मकान

फिर भी सरकारी रिकॉर्ड में वे गरीब हैं।

क्या समाधान है? सरकार से उठी नई मांग

स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि:

  • नियमों में सख्ती लाई जाए
  • अपात्र लोगों को सूची से हटाया जाए
  • दबंग और संपन्न लोगों के लिए अलग व्यवस्था बनाई जाए

कुछ लोगों ने यह भी सुझाव दिया है कि ऐसे प्रभावशाली लोगों को घर पहुंच राशन सेवा दी जाए, ताकि राशन दुकानों पर विवाद और दबाव की स्थिति खत्म हो सके।

क्या जिला प्रशासन करेगा कार्रवाई?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर सख्त कदम उठाएगा या फिर गरीबों का हक यूं ही छीना जाता रहेगा?यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो सरकार की सबसे बड़ी जनकल्याणकारी योजना की विश्वसनीयता पर सवाल उठना तय है।

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