सिवनी/बरघाट/धारनाकला। सिवनी-बालाघाट मार्ग अब लोगों के बीच “खूनी सड़क” के नाम से पहचाना जाने लगा है। इस सड़क पर आए दिन हो रहे भीषण हादसे और उनमें हो रही मौतें अब आम लोगों के लिए दर्दनाक लेकिन परिचित दृश्य बन चुकी हैं। हर गुजरते दिन के साथ यह सड़क किसी न किसी परिवार का सहारा छीन रही है। बावजूद इसके जिम्मेदार विभाग और प्रशासन अब तक ठोस कदम उठाते नजर नहीं आ रहे हैं।
एक बार फिर इसी जर्जर सड़क ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। शुक्रवार को सिवनी-बालाघाट रोड पर धारनाकला क्षेत्र के पास धनई नाले के समीप एक मारुति वैन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि वैन के परखच्चे उड़ गए और वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे की आवाज इतनी जोरदार थी कि आसपास के ग्रामीण मौके की ओर दौड़ पड़े। दुर्घटना में वैन सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हुए, जिनमें से एक युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दूसरा युवक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। घायल युवक को गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया है।
बताया जा रहा है कि दोनों युवक कान्हीवाड़ा-भोमा क्षेत्र के निवासी हैं। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी गई।
लगातार हादसों से दहशत में लोग
सिवनी-बालाघाट रोड की हालत लंबे समय से बेहद खराब बनी हुई है। जगह-जगह गड्ढे, टूटी सड़क और बढ़ता यातायात दबाव इस मार्ग को दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बना रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क पर सफर करना अब जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है।
ग्रामीणों और वाहन चालकों का आरोप है कि सड़क की मरम्मत और चौड़ीकरण को लेकर कई बार मांग उठाई गई, लेकिन अब तक हालात जस के तस बने हुए हैं। आए दिन हो रहे हादसों के बावजूद प्रशासन की उदासीनता लोगों में भारी नाराजगी पैदा कर रही है।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी नहीं शुरू हुआ फोरलेन कार्य
प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav द्वारा सिवनी-बालाघाट रोड को फोरलेन में तब्दील करने की घोषणा किए करीब दो वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अब तक जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हो पाया है। यही वजह है कि लोगों का गुस्सा अब बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क का चौड़ीकरण और सुधार कार्य शुरू हो जाता, तो शायद कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी। हर नए हादसे के बाद कुछ दिनों तक चर्चा होती है, लेकिन फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
कब रुकेगा मौत का यह सिलसिला?
सवाल यही उठ रहा है कि आखिर सिवनी-बालाघाट रोड पर मौत का यह सिलसिला कब थमेगा? कितने और परिवार उजड़ेंगे, कितने घरों के चिराग बुझेंगे, तब जाकर जिम्मेदार विभाग जागेगा?
स्थानीय लोग अब जल्द से जल्द सड़क निर्माण और फोरलेन परियोजना शुरू करने की मांग कर रहे हैं ताकि इस खूनी सड़क पर हो रही लगातार मौतों पर रोक लग सके।

