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सिवनी अनुराग डेहरिया हत्या कांड: पुरानी दुश्मनी में अनुराग डहेरिया की हत्या, 2 आरोपी निखिल और आर्यन गिरफ्तार, चाकू और बेसबॉल डंडा किया जब्त

Seoni News: मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में पुरानी रंजिश एक बार फिर खूनी संघर्ष में बदल गई। कोतवाली थाना क्षेत्र में हुए बहुचर्चित हत्या कांड में पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों के कब्जे से हत्या में इस्तेमाल किया गया धारदार चाकू और बेसबॉल डंडा भी बरामद किया गया है। वहीं मामले के दो अन्य आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश लगातार जारी है।

पुलिस के अनुसार यह पूरा मामला पुरानी दुश्मनी से जुड़ा हुआ है, जिसने एक युवक की जान ले ली। घटना के बाद इलाके में दहशत और तनाव का माहौल बना हुआ था

रात 10:30 बजे हुआ खूनी हमला

जानकारी के मुताबिक 13 मई 2026 की रात करीब 10:30 बजे अकबर वार्ड निवासी कान्हा उर्फ बिट्टू बैरागी ने थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि आरोपी निखिल कुशवाहा, आर्यन धुर्वे और ऋषि रावत ने मिलकर अनुराग डहेरिया पर जानलेवा हमला कर दिया।

बताया जा रहा है कि आरोपियों ने बेसबॉल डंडे, धारदार चाकू और हाथ-मुक्कों से अनुराग डहेरिया को बुरी तरह पीटा। हमले में अनुराग के सिर, गर्दन और पेट में गंभीर चोटें आईं। हालत गंभीर होने के कारण उसकी मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी।

हत्या के बाद हरकत में आई पुलिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए कृष्ण लालचंदानी के मार्गदर्शन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दीपक मिश्रा के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। एसडीओपी सचिन परते के नेतृत्व में पुलिस ने संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी।

कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान:

  • निखिल कुशवाहा (29 वर्ष), निवासी शास्त्री वार्ड, बारापत्थर
  • आर्यन धुर्वे (19 वर्ष), निवासी शास्त्री वार्ड, बारापत्थर

के रूप में हुई है।

पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया एक धारदार चाकू और बेसबॉल डंडा जब्त कर लिया है। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

अब भी फरार हैं 2 आरोपी

पुलिस के अनुसार मामले में ऋषि रावत सहित एक अन्य आरोपी अभी फरार है। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही बाकी आरोपियों को भी पकड़ लिया जाएगा।

2023 की दुश्मनी बनी हत्या की वजह

जांच में सामने आया है कि इस हत्या की जड़ वर्ष 2023 में हुए एक चर्चित हत्याकांड से जुड़ी हुई है। जानकारी के अनुसार 18 मार्च 2023 को बारापत्थर स्थित नीलगिरी हनुमान मंदिर के सामने योगेश अग्रवाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

उस मामले में मृतक अनुराग डहेरिया मुख्य आरोपी था। तभी से दोनों पक्षों के बीच गहरी रंजिश चली आ रही थी। पुलिस का मानना है कि इसी पुरानी दुश्मनी के चलते इस वारदात को अंजाम दिया गया।

इन पुलिसकर्मियों की रही अहम भूमिका

इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक सतीश तिवारी सहित पुलिस टीम के कई अधिकारियों और जवानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस विभाग ने टीम की त्वरित कार्रवाई की सराहना की है।

सिवनी में 39 लाख की ट्रेडिंग ठगी का बड़ा खुलासा! BMW में घूम रहे शातिर आरोपी भोपाल से गिरफ्तार, विदेश भागने की थी तैयारी

सिवनी। मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में ऑनलाइन ट्रेडिंग और ग्लोबल मार्केटिंग के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने वाले दो आरोपियों को कोतवाली पुलिस ने भोपाल से गिरफ्तार कर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। आरोपियों ने लोगों को कम समय में रकम दोगुनी करने का लालच देकर करीब 39 लाख 29 हजार रुपये की ठगी की। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों के कब्जे से 60 लाख की BMW कार, महंगे मोबाइल फोन समेत कुल 62 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है।

इस सनसनीखेज मामले के सामने आने के बाद सिवनी समेत भोपाल क्षेत्र में भी हड़कंप मच गया है। पुलिस को आशंका है कि आरोपियों ने कई अन्य लोगों को भी अपने जाल में फंसाकर करोड़ों की ठगी की हो सकती है।

कम समय में दोगुना पैसा बनाने का झांसा

जानकारी के अनुसार, 18 मई 2026 को प्रार्थी शिशांत सोनी सहित 6 लोगों ने थाना कोतवाली पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि भोपाल निवासी नितिन सोनी और ललित पुरोहित ने खुद को ग्लोबल मार्केटिंग और ट्रेडिंग एक्सपर्ट बताकर निवेश करने पर रकम जल्दी दोगुनी करने का भरोसा दिलाया।

आरोपियों ने हाई रिटर्न का लालच देकर अलग-अलग लोगों से लाखों रुपये जमा कराए, लेकिन बाद में रकम वापस नहीं लौटाई। जब पीड़ितों को ठगी का एहसास हुआ तो उन्होंने पुलिस का दरवाजा खटखटाया।

कोतवाली पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक कृष्ण लालचंदानी के निर्देश पर तत्काल विशेष टीम गठित की गई। पुलिस टीम भोपाल रवाना हुई और लगातार निगरानी एवं तकनीकी जांच के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर सिवनी लाया गया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान:

  • नितिन सोनी, पिता गौरीशंकर सोनी, उम्र 44 वर्ष, निवासी नेहरू नगर, कमलानगर, भोपाल
  • ललित पुरोहित, पिता मोहनलाल पुरोहित, उम्र 36 वर्ष, निवासी निरुपम कॉलोनी, जाटखेड़ी, भोपाल

पुलिस पूछताछ में दोनों आरोपियों ने ठगी की बात स्वीकार कर ली है।

ठगी के पैसों से खरीदी लग्जरी BMW

पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी नितिन सोनी ठगी की रकम से लग्जरी लाइफस्टाइल जी रहा था। उसने ठगी के पैसों से करीब 60 लाख रुपये कीमत की BMW कार (MP04 CY8566) फाइनेंस कराई थी और उसकी किस्तें जमा कर रहा था।

इसके अलावा पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो महंगे एंड्रॉयड मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। कुल जब्त संपत्ति की कीमत लगभग 62 लाख रुपये आंकी गई है।

विदेश भागने की थी तैयारी! पासपोर्ट भी मिला

जांच के दौरान पुलिस को आरोपी नितिन सोनी का पासपोर्ट भी मिला है। पुलिस को आशंका है कि ठगी का मामला खुलने के बाद आरोपी देश छोड़कर विदेश भागने की तैयारी में था। यही वजह है कि पुलिस ने तेजी दिखाते हुए कार्रवाई की और समय रहते दोनों आरोपियों को दबोच लिया।

और भी पीड़ित सामने आने की संभावना

फिलहाल इस मामले में 6 लोगों की शिकायत पर प्रकरण दर्ज किया गया है, लेकिन पुलिस का मानना है कि ठगी का दायरा काफी बड़ा हो सकता है। भोपाल और अन्य शहरों से भी कई लोगों के साथ धोखाधड़ी किए जाने की आशंका जताई जा रही है।

पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, निवेश, चल-अचल संपत्तियों और अन्य आर्थिक लेनदेन की गहराई से जांच कर रही है।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

थाना कोतवाली में आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 356/2026 के तहत धारा 318(4) एवं 61(2) भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जहां उनसे लगातार पूछताछ जारी है।

पुलिस टीम की रही अहम भूमिका

इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक सतीश तिवारी, उपनिरीक्षक राजेश शर्मा, प्रधान आरक्षक मनोज पाल एवं महिला आरक्षक निशा दोनावट की विशेष भूमिका रही।

सिवनी हवाला कांड में बड़ा ट्विस्ट! जेल में बच्चे के साथ रह रहीं SDOP पूजा पांडे को मिली जमानत

SDOP POOJA PANDEY NEWS: मध्य प्रदेश के चर्चित सिवनी हवाला लूटकांड में मुख्य आरोपी निलंबित एसडीओपी पूजा पांडे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। करीब 3 करोड़ रुपए के कथित हवाला लूट मामले में लंबे समय से जेल में बंद पूजा पांडे को सोमवार को देश की सर्वोच्च अदालत ने जमानत दे दी। कोर्ट में उनकी ओर से यह दलील दी गई कि वह एकल मां हैं और उनका 2 साल का बच्चा उनके साथ जेल में रह रहा है। इसी मानवीय आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें राहत प्रदान की।

हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में पहले की तरह जारी रहेगी और जांच प्रक्रिया पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद पूरे प्रदेश में इस हाई-प्रोफाइल केस को लेकर फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

मुख्य न्यायाधीश की अदालत ने कही यह बात

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अदालत में सुनवाई के दौरान कहा गया कि याचिकाकर्ता महिला हैं और उनका दो वर्षीय बच्चा उनके साथ जेल में रह रहा है। अदालत ने इस पहलू को गंभीरता से लेते हुए जमानत मंजूर की।

यह मामला सिवनी जिले के खैरीटेक क्षेत्र में कथित हवाला रकम की लूट से जुड़ा हुआ है, जिसने उस समय पूरे मध्य प्रदेश में सनसनी फैला दी थी। आरोप है कि इस पूरी वारदात को पुलिस वर्दी और हथियारों के इस्तेमाल के साथ बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था।

3 करोड़ की रकम और पुलिस विभाग में मचा था हड़कंप

मामले के अनुसार, सिवनी पुलिस ने खैरीटेक क्षेत्र में नागपुर निवासी सोहन परमार से करीब 3 करोड़ रुपए जब्त किए थे। लेकिन बाद में आरोप लगे कि आधिकारिक रिकॉर्ड में केवल 1 करोड़ 45 लाख रुपए की ही जब्ती दिखाई गई। इतना ही नहीं, संबंधित व्यक्ति को बिना किसी वैधानिक कार्रवाई के छोड़ दिया गया और मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक भी नहीं पहुंचाई गई।

जैसे ही यह मामला उजागर हुआ, पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पूरे प्रदेश में इस केस को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चाएं शुरू हो गई थीं।

SIT जांच में सामने आए कई चौंकाने वाले तथ्य

घटना के बाद राज्य स्तर पर विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई थी। जांच टीम ने कई पुलिसकर्मियों से पूछताछ की और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी एकत्र किए। जांच के दौरान कई पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी।

बताया जाता है कि 9 अक्टूबर को तत्कालीन सीएसपी पूजा पांडे और एसआई अर्पित भैरम ने 1.45 करोड़ रुपए की रकम जमा कराई थी। इसके बाद मामला सार्वजनिक होते ही उसी रात तत्कालीन आईजी प्रमोद वर्मा ने थाना प्रभारी अर्पित भैरम समेत 9 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। अगले दिन डीजीपी कैलाश मकवाना ने एसडीओपी पूजा पांडे को भी सस्पेंड कर दिया था।

कई आरोपियों को पहले ही मिल चुकी है राहत

इस मामले में शामिल अधिकांश आरोपियों को पहले ही जबलपुर हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। वहीं, दो आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर भी निरस्त हो चुकी हैं। इसके बाद पूजा पांडे ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, जिस पर अब फैसला आया है।

पूरे प्रदेश की नजर अब ट्रायल कोर्ट पर

सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद भले ही पूजा पांडे को राहत मिल गई हो, लेकिन सिवनी हवाला लूटकांड की कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। ट्रायल कोर्ट में इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई जारी रहेगी और आने वाले समय में कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

सिवनी: मिशन स्कूल के सामने जनपद शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में शुभम माथुर की मिली लाश

Seoni News: मध्यप्रदेश के सिवनी जिला मुख्यालय में रविवार शाम उस समय सनसनी फैल गई, जब मिशन स्कूल के सामने स्थित जनपद शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में एक युवक की लाश मिलने की खबर सामने आई। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के क्षेत्र में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक का शव कॉम्प्लेक्स परिसर में संदिग्ध अवस्था में पड़ा मिला। स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने शव को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस कर रही मौत के कारणों की जांच

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक मृत युवक की पहचान काली चौक निवासी शुभम माथुर पिता मनोज माथुर उम्र लगभग 28 वर्ष के रूप में हुई है । पुलिस आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और लोगों से पूछताछ की जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि मामला हत्या का है, आत्महत्या का या फिर किसी अन्य कारण से युवक की मौत हुई है।

पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

इलाके में चर्चा का विषय बनी घटना

घटना के बाद मिशन स्कूल और जनपद शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के आसपास काफी देर तक लोगों की भीड़ लगी रही। स्थानीय नागरिकों में घटना को लेकर दहशत और कई तरह की चर्चाएं देखने को मिलीं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और जल्द ही पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया जाएगा।

खूनी बनी सिवनी-बालाघाट रोड! तेज रफ्तार मौत ने फिर छीनी एक युवक की जिंदगी, दूसरा मौत से जंग लड़ रहा”

सिवनी/बरघाट/धारनाकला। सिवनी-बालाघाट मार्ग अब लोगों के बीच “खूनी सड़क” के नाम से पहचाना जाने लगा है। इस सड़क पर आए दिन हो रहे भीषण हादसे और उनमें हो रही मौतें अब आम लोगों के लिए दर्दनाक लेकिन परिचित दृश्य बन चुकी हैं। हर गुजरते दिन के साथ यह सड़क किसी न किसी परिवार का सहारा छीन रही है। बावजूद इसके जिम्मेदार विभाग और प्रशासन अब तक ठोस कदम उठाते नजर नहीं आ रहे हैं।

एक बार फिर इसी जर्जर सड़क ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। शुक्रवार को सिवनी-बालाघाट रोड पर धारनाकला क्षेत्र के पास धनई नाले के समीप एक मारुति वैन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि वैन के परखच्चे उड़ गए और वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे की आवाज इतनी जोरदार थी कि आसपास के ग्रामीण मौके की ओर दौड़ पड़े। दुर्घटना में वैन सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हुए, जिनमें से एक युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दूसरा युवक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। घायल युवक को गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया है।

बताया जा रहा है कि दोनों युवक कान्हीवाड़ा-भोमा क्षेत्र के निवासी हैं। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी गई।

लगातार हादसों से दहशत में लोग

सिवनी-बालाघाट रोड की हालत लंबे समय से बेहद खराब बनी हुई है। जगह-जगह गड्ढे, टूटी सड़क और बढ़ता यातायात दबाव इस मार्ग को दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बना रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क पर सफर करना अब जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है।

ग्रामीणों और वाहन चालकों का आरोप है कि सड़क की मरम्मत और चौड़ीकरण को लेकर कई बार मांग उठाई गई, लेकिन अब तक हालात जस के तस बने हुए हैं। आए दिन हो रहे हादसों के बावजूद प्रशासन की उदासीनता लोगों में भारी नाराजगी पैदा कर रही है।

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी नहीं शुरू हुआ फोरलेन कार्य

प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav द्वारा सिवनी-बालाघाट रोड को फोरलेन में तब्दील करने की घोषणा किए करीब दो वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अब तक जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हो पाया है। यही वजह है कि लोगों का गुस्सा अब बढ़ता जा रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क का चौड़ीकरण और सुधार कार्य शुरू हो जाता, तो शायद कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी। हर नए हादसे के बाद कुछ दिनों तक चर्चा होती है, लेकिन फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।

कब रुकेगा मौत का यह सिलसिला?

सवाल यही उठ रहा है कि आखिर सिवनी-बालाघाट रोड पर मौत का यह सिलसिला कब थमेगा? कितने और परिवार उजड़ेंगे, कितने घरों के चिराग बुझेंगे, तब जाकर जिम्मेदार विभाग जागेगा?

स्थानीय लोग अब जल्द से जल्द सड़क निर्माण और फोरलेन परियोजना शुरू करने की मांग कर रहे हैं ताकि इस खूनी सड़क पर हो रही लगातार मौतों पर रोक लग सके।

सिवनी: सहकारिता विभाग में ‘दैनिक वेतन भोगी भर्ती’ का बड़ा खेल! रातों-रात हुई भर्तियां, नियम ताक पर रखकर बांटे गए लाभ

Seoni News: सिवनी जिले के बरघाट विकासखंड अंतर्गत आने वाली सहकारी समितियों में कथित तौर पर दैनिक वेतनभोगी भर्ती और कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने का बड़ा मामला सामने आया है। सहकारिता विभाग से जुड़ा यह मामला अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुका है। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया के भर्ती की गई और बाद में कुछ कर्मचारियों को विशेष लाभ भी पहुंचाए गए।

ताजा मामला सहकारी समिति धारनाकला से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां संचालक मंडल के प्रस्ताव के आधार पर एक कर्मचारी को दैनिक वेतनभोगी के रूप में नियुक्त किया गया। आरोप है कि कुछ ही समय में उसे नियमित कर्मचारी जैसी सुविधाएं और लाभ मिलने लगे। यही नहीं, उस कर्मचारी को दो-दो राशन दुकानों का प्रभार सौंपे जाने और अन्य कर्मचारियों की तुलना में अधिक वेतन दिए जाने की चर्चा भी अब जोरों पर है।

स्थायी पद नहीं, फिर भी नियुक्तियां सवालों के घेरे में

जानकारों के अनुसार सहकारी समितियों में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नियुक्ति सामान्यतः अस्थायी, आकस्मिक या मौसमी कार्यों के लिए की जाती है। यह नियुक्तियां किसी स्थायी रिक्त पद के स्थान पर नहीं होतीं और इनके लिए विभागीय अनुमति आवश्यक मानी जाती है। नियुक्ति के समय यह भी स्पष्ट किया जाता है कि सेवा पूरी तरह अस्थायी होगी और आवश्यकता समाप्त होने पर कभी भी खत्म की जा सकती है।

लेकिन बरघाट क्षेत्र की कई समितियों में जिस तरह भर्ती और लाभ का सिलसिला चला, उसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है तो भर्ती प्रक्रिया सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।

2020 में भी उठ चुके थे फर्जी भर्ती के मुद्दे

यह मामला नया नहीं बताया जा रहा। वर्ष 2020 में भी कार्यालय उपायुक्त सहकारिता, जिला सिवनी द्वारा कृषि साख समितियों में कथित फर्जी भर्तियों को लेकर पत्र जारी किया गया था। उस पत्र में शिकायतों के आधार पर उल्लेख किया गया था कि जिले की कई समितियों में अधिकारियों और प्रबंधकों की मिलीभगत से लाखों रुपये लेकर नियुक्तियां की गईं।

कुछ मामलों में रिश्तेदारों को नियमों के विरुद्ध नियुक्त किए जाने और अपात्र व्यक्तियों को प्रबंधक पद पर बैठाने जैसे आरोप भी सामने आए थे।

क्या सेवा नियमों का पालन हुआ?

सहकारिता विभाग के सेवा नियमों के अनुसार समितियों में कर्मचारियों की भर्ती के लिए चयन समिति गठित होना जरूरी है। नियमों के मुताबिक:

  • रिक्त पदों की समीक्षा की जानी चाहिए
  • आवश्यक योग्यता और अनुभव की जांच होनी चाहिए
  • चयन के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित होना अनिवार्य है
  • भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए
  • विज्ञापन या सूचना जारी कर आवेदन आमंत्रित किए जाने चाहिए

लेकिन आरोप है कि कई समितियों में इन नियमों का पालन नहीं हुआ। धारनाकला समिति के मामले में भी बिना किसी विज्ञापन या निविदा के भर्ती किए जाने की बात सामने आई है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि रातों-रात नियुक्तियां कर दी गईं और लंबे समय से शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

प्रशासक की ‘मेहरबानी’ से बढ़ा वेतन?

संचालक मंडल भंग होने के बाद वर्तमान में कई सहकारी समितियों का संचालन प्रशासकों के हाथों में है। जिले की दर्जनों समितियों में एक ही प्रशासक व्यवस्था संभाल रहे हैं। ऐसे में कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने और वेतन निर्धारण में मनमानी के आरोप लग रहे हैं।

धारनाकला समिति में कार्यरत कर्मचारियों का आरोप है कि एक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी को विशेष लाभ देते हुए न केवल दो राशन दुकानों का प्रभार दिया गया बल्कि उसका वेतन भी अन्य कर्मचारियों से अधिक कर दिया गया। जब अन्य कर्मचारियों ने समान वेतन वृद्धि की मांग की तो संबंधित कर्मचारी को “नियमित” बताया गया।

दिलचस्प बात यह है कि समिति में अनुकंपा नियुक्ति के तहत कार्यरत कर्मचारी भी हैं, लेकिन उन्हें नियमित कर्मचारी की श्रेणी में नहीं माना जा रहा। वहीं दैनिक वेतनभोगी के रूप में भर्ती कर्मचारी को कथित रूप से नियमित जैसी सुविधाएं मिलने लगीं।

उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज

पूरा मामला अब सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो तो कई समितियों में भर्ती, वेतन और भत्तों से जुड़े बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

वहीं इस मामले में जब संयुक्त आयुक्त जबलपुर राकेश पांडे से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा:

“इस संबंध में फिलहाल जानकारी नहीं है। शिकायत मिलने पर निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”

अब देखने वाली बात होगी कि सहकारिता विभाग इस पूरे मामले में जांच कर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी कागजों तक सीमित रह जाएगा।

प्रेस क्लब सिवनी में तानाशाही के आरोप: बिना स्पष्टीकरण सदस्य का निष्कासन, अध्यक्ष अयोध्या विश्वकर्मा का पक्ष भी आया सामने


सिवनी। प्रेस क्लब ऑफ सिवनी (प्रेस एसोसिएशन) द्वारा हाल ही में कार्यकारिणी की बैठक में वरिष्ठ सदस्य श्री अखिलेश दुबे की सदस्यता समाप्त करने के निर्णय को लेकर विवाद गहरा गया है। संस्था के इस कदम को लेकर अब विरोध के स्वर उठने लगे हैं और इसे एकतरफा व न्याय-संगत प्रक्रिया के विरुद्ध बताया जा रहा है।

इस निर्णय पर आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे संस्था की गरिमा के प्रतिकूल बताया गया है। विरोध जता रहे सदस्यों का मानना है कि इस कार्रवाई में नियमों और पारदर्शिता की पूरी तरह अनदेखी की गई है।

निष्कासन पर उठाए गए मुख्य बिंदु:
पक्ष रखने का नहीं मिला मौका: शिकायत है कि अनुशासनहीनता का आरोप लगाकर की गई इस बड़ी कार्रवाई से पहले संबंधित सदस्य को अपना पक्ष रखने या स्पष्टीकरण देने का कोई अवसर नहीं दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

अपारदर्शी कार्यप्रणाली: सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि श्री दुबे द्वारा किस प्रकार की अनुशासनहीनता की गई थी। बिना किसी ठोस कारण या सार्वजनिक विवरण के सदस्यता समाप्त करना संस्था की साख पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।

व्यक्तिगत द्वेष की आशंका: उचित प्रक्रिया का पालन न किए जाने के कारण यह आशंका जताई जा रही है कि संभवतः अध्यक्ष और सचिव द्वारा यह निर्णय व्यक्तिगत रंजिश या द्वेष की भावना से प्रेरित होकर लिया गया है।
​निष्पक्ष जांच की मांग

प्रेस क्लब के अन्य जागरूक सदस्यों और पत्रकार जगत ने मांग की है कि न्याय की गरिमा को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए। साथ ही, लगाए गए आरोपों की किसी निष्पक्ष समिति से जांच कराई जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

प्रेस क्लब ऑफ सिवनी अध्यक्ष का पक्ष भी आया सामने

प्रेस क्लब ऑफ सिवनी के अध्यक्ष अयोध्या विश्वकर्मा ने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पूर्व सदस्य अखिलेश दुबे द्वारा सदस्य रहते हुए प्रेस क्लब के खिलाफ कई गतिविधियों में संलिप्तता पाई गई थी।

अध्यक्ष के अनुसार, प्रेस क्लब चुनाव के दौरान अखिलेश दुबे मतदान परिसर में मौजूद थे, लेकिन उन्होंने अपने मताधिकार का उपयोग नहीं किया। साथ ही उन पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करने के आरोप भी लगाए गए हैं।

अयोध्या विश्वकर्मा ने बताया कि पूरे मामले को कार्यकारिणी सदस्यों के समक्ष रखा गया था। चर्चा के बाद कार्यकारिणी द्वारा अखिलेश दुबे की सदस्यता स्थायी रूप से समाप्त करने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इसके बाद उनकी सदस्यता निरस्त करने की कार्रवाई की गई।

सिवनी में लोकायुक्त का बड़ा धमाका! 20 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया ASI दिनेश रघुवंशी, बस स्टैंड के पास हुई कार्रवाई

सिवनी। मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में जबलपुर लोकायुक्त संगठन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए थाना कोतवाली सिवनी में पदस्थ कार्यवाहक सहायक उप निरीक्षक (ASI) दिनेश रघुवंशी को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई मंगलवार 13 मई 2026 को बस स्टैंड स्थित एक चाय की दुकान पर की गई, जिससे पूरे पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया।

लोकायुक्त से मिली जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता नंदकिशोर चौरसिया पिता श्री चंदन लाल चौरसिया (उम्र 54 वर्ष), निवासी ग्राम छितापार, थाना कुरई, जिला सिवनी ने आरोपी पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

बेटे को नौकरी दिलाने के नाम पर हुई थी ठगी

बताया गया कि आवेदक के बेटे अभिषेक चौरसिया को नौकरी दिलाने और सरकारी विभाग में वाहन लगवाने का झांसा देकर कुछ लोगों द्वारा फर्जीवाड़ा और ठगी की गई थी। इस मामले में नंदकिशोर चौरसिया ने थाना कोतवाली सिवनी में शिकायत देकर एफआईआर दर्ज करवाई थी।

जब आवेदक मामले की जांच और एफआईआर की प्रगति की जानकारी लेने जांच अधिकारी दिनेश रघुवंशी के पास पहुंचे, तब आरोपी ASI ने सही रिपोर्ट तैयार करने और कथित फर्जी हस्ताक्षरों की जांच करवाने के बदले 30 हजार रुपये रिश्वत की मांग की।

शिकायतकर्ता द्वारा बार-बार बातचीत करने पर आरोपी 20 हजार रुपये लेने को तैयार हो गया। इसके बाद आवेदक ने पूरे मामले की शिकायत जबलपुर लोकायुक्त कार्यालय में की।

बस स्टैंड की चाय दुकान पर बिछाया गया जाल

लोकायुक्त टीम ने शिकायत का सत्यापन करने के बाद योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई की। मंगलवार को बस स्टैंड स्थित चाय की दुकान पर जैसे ही आरोपी ASI दिनेश रघुवंशी ने शिकायतकर्ता से 20 हजार रुपये रिश्वत के रूप में लिए, लोकायुक्त टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया।

कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। अचानक हुई इस कार्रवाई से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज

लोकायुक्त अधिकारियों ने बताया कि आरोपी दिनेश रघुवंशी पिता स्वर्गीय तुकरसिंह रघुवंशी (उम्र 57 वर्ष), पद- कार्यवाहक सहायक उप निरीक्षक, थाना कोतवाली जिला सिवनी, के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7, 13(1)(B), 13(2) के तहत कार्रवाई की जा रही है।

लोकायुक्त टीम में शामिल रहे ये अधिकारी

इस ट्रैप कार्रवाई में दल प्रभारी नीतू त्रिपाठी, उप पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त जबलपुर, निरीक्षक राहुल गजभिए, टीएलओ निरीक्षक शशिकला मस्कुले, उप निरीक्षक शिशिर पांडेय सहित लोकायुक्त जबलपुर की विशेष टीम शामिल रही।

लोकायुक्त की आम जनता से अपील

लोकायुक्त संगठन ने कहा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत की मांग करता है, तो आमजन लोकायुक्त कार्यालय जबलपुर से संपर्क कर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

कार्यालय पता:
पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त
सिविक सेंटर, जेडीए बिल्डिंग, तीसरी मंजिल, जबलपुर।