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सबकी योजना सबका विकास अभियान: 2 अक्टूबर से शुरू होगा Sabki Yojana Sabka Vikas Abhiyan

Sabki Yojana Sabka Vikas Abhiyan: देश की सभी पेसा ग्राम पंचायतों में आगामी 2 अक्टूबर से “सबकी योजना-सबका विकास” अभियान प्रारंभ किया जायेगा। इस अभियान में पेसा ग्राम पंचायतों को विकास के लिये अपनी जरूरतों के मुताबिक योजना बनाने के लिये प्रोत्साहित किया जायेगा। पेसा अधिनियम की महत्ता को देखते हुए केन्द्रीय पंचायती राज मंत्रालय एक उत्कृष्टता केन्द्र (एक्सीलेंस सेंटर) स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। यह सेंटर संभवत: किसी केन्द्रीय जनजातीय विश्विविद्यालय (सेंट्रल ट्राइबल यूनिवर्सिटी) में स्थापित किया जायेगा। नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में गत 26 सितम्बर को पेसा एक्ट पर हुए राष्ट्रीय सम्मेलन में यह जानकारी दी गई।

सम्मेलन मे केंद्रीय पंचायती राज राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा की सफलता के लिए शासन में महिलाओं का सशक्तिकरण और सक्रिय भागीदारी सर्वोपरि है। आदिवासी समुदायों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त धन, बुनियादी ढांचा और बेहतर जीवन स्तर, स्वास्थ्य और शिक्षा तक पहुंच बेहद जरूरी है। हम सबके लिए उज्ज्वल और अधिक समावेशी भविष्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

सम्मेलन में केन्द्रीय जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समुदायों के उत्थान और इन्हें विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। श्री उइके ने उम्मीद जताई कि पेसा ग्राम सभाओं के पदाधिकारियों के लिए पंचायती राज मंत्रालय के क्षमता निर्माण प्रयासों से वे अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों से परिचित हो सकेंगे।

सम्मेलन में मध्यप्रदेश के पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने प्रदेश में पेसा एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन एवं प्रगति, पहलों और नवाचारों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने अन्य संबंधित अधिनियमों, वित्तीय प्रावधानों, प्रशिक्षण गतिविधियों और सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित करते हुए आर्थिक आत्मनिर्भरता के प्रयासों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश के 20 जिलों के 88 विकासखंडों की 5 हजार 133 ग्राम पंचायतों के अधीन 11 हजार 596 ग्राम पेसा क्षेत्र में आते हैं। अलीराजपुर, झाबुआ, मंडला, बड़वानी, अनूपपुर एवं डिंडोरी पूर्ण पेसा जिलों में रूप में चिन्हित हैं। जबकि बालाघाट, बैतूल, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, धार, खंडवा, नर्मदापुरम, खरगोन, सिवनी, शहडोल, श्योपुर, सीधी उमरिया एवं रतलाम आंशिक पेसा जिले हैं। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में ग्राम स्तर, पंचायत स्तर, विकासखंड, जिला एवं राज्य स्तरीय प्रशिक्षण के जरिये पेसा एक्ट के क्रियान्वयन में प्रगति आई है।

सम्मेलन में पीएम जनमन और प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान पर भी चर्चा की गई, जिसका उद्देश्य पीएम जनमन की सीख के आधार पर जनजातीय क्षेत्रों का सतत और समग्र विकास सुनिश्चित कर यहां सामाजिक बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका का विकास करना है। केन्द्रीय पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज और मध्यप्रदेश के पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री मलय श्रीवास्तव ने भी उद्घाटन सत्र में अपने विचार रखे।

केन्द्रीय सचिव श्री भारद्वाज ने कहा कि पेसा की मूल भावना आदिवासी समुदायों को उनकी पारंपरिक संस्कृति और हितों को संरक्षित करते हुए विकास की मुख्यधारा में लाना है। अधिकांश पेसा राज्यों ने अब पेसा नियम तैयार कर लिए हैं। श्री भारद्वाज ने कहा कि राज्यों के सहयोग से सात उन्मुखीकरण प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किए गए हैं, और मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षण भी शुरू हो गया है। श्री भारद्वाज ने सभी पेसा ग्राम सभाओं से 2 अक्टूबर से शुरू होने वाले “सबकी योजना, सबका विकास” अभियान में उत्साहपूर्वक भाग लेने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि पंचायती राज मंत्रालय पेसा पर एक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है, जिसे संभवत: देश के किसी केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में स्थापित किया जा सकता है।

राष्ट्रीय सम्मेलन में दस पेसा राज्यों के 500 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इसमे राज्यों के पंचायती राज मंत्री, केंद्रीय और राज्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, पंचायती राज प्रणाली के सभी तीन स्तरों के प्रतिनिधि और गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुये।

विवाह के लिए कुंडली मिलान से ज्यादा जरूरी है सिकल सेल कार्ड का मिलान: एमपी राज्यपाल मंगुभाई पटेल

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने हाल ही में एक कार्यक्रम में सिकल सेल एनीमिया की रोकथाम के लिए विशेष महत्व दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विवाह पूर्व जन्म कुंडली मिलान से ज्यादा जरूरी सिकल सेल जेनेटिक काउंसलिंग है। यदि सिकल सेल रोगी और वाहक विवाह करते हैं, तो उनकी संतानों में इस रोग का खतरा काफी बढ़ जाता है। इस लेख में हम सिकल सेल एनीमिया और इसके समाधान के बारे में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करेंगे।

सिकल सेल एनीमिया क्या है?

सिकल सेल एनीमिया एक आनुवंशिक रक्त रोग है, जो कि सिकल सेल (सर्पिल आकार के) रक्त कोशिकाओं के निर्माण का कारण बनता है। यह रोग विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है, जैसे कि संक्रमण, थकान, और अन्य गंभीर जटिलताएँ।

विवाह पूर्व जेनेटिक काउंसलिंग का महत्व

राज्यपाल पटेल ने बताया कि यदि पति-पत्नी दोनों सिकल सेल के वाहक हैं, तो उनकी संतान के सिकल सेल से प्रभावित होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए, विवाह से पहले जेनेटिक काउंसलिंग आवश्यक है। यह न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए बल्कि आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है।

खान-पान और दिनचर्या

राज्यपाल ने सिकल सेल एनीमिया के रोगियों को खान-पान का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पौष्टिक आहार, योग और नियमित व्यायाम शामिल करना जरूरी है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से रोगियों की स्थिति में सुधार संभव है।

सिकल सेल जागरूकता कार्यक्रम

श्री पटेल ने सिकल सेल जागरूकता बढ़ाने के लिए बेटियों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर सक्रिय रूप से लोगों को जागरूक करें। यह महत्वपूर्ण है कि समुदाय में सभी लोग इस रोग के लक्षणों और रोकथाम के तरीकों के बारे में जागरूक हों।

सरकार की पहलें

केंद्र और राज्य सरकार मिलकर सिकल सेल एनीमिया के उन्मूलन के लिए विशेष प्रयास कर रही हैं। राज्यपाल ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि वे लक्षित जनसंख्या की गंभीरता से स्क्रीनिंग करें।

स्वास्थ्य विभाग की योजनाएँ

राज्य सरकार ने स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से यह सुनिश्चित करने की योजना बनाई है कि हर छात्रावास में एक नर्स नियमित रूप से विद्यार्थियों की जांच करें। इससे छात्रों के स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल संभव होगी।

निष्कर्ष

सिकल सेल एनीमिया एक गंभीर समस्या है, लेकिन जागरूकता और उचित स्वास्थ्य उपायों के माध्यम से इसे रोका जा सकता है। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल के प्रयास इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाने के लिए हमें सामूहिक रूप से प्रयास करने की आवश्यकता है, ताकि हम 2047 तक भारत को सिकल सेल एनीमिया से मुक्त बना सकें।

आप क्या कर सकते हैं?

यदि आप या आपके किसी परिचित में सिकल सेल एनीमिया के लक्षण हैं, तो कृपया तुरंत चिकित्सा सलाह लें और स्क्रीनिंग के लिए संपर्क करें। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहकर हम अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य को सुरक्षित रख सकते हैं।

यह लेख सिकल सेल एनीमिया की गंभीरता और इसके रोकथाम के उपायों को समझाने के लिए है। यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगी हो, तो कृपया इसे साझा करें और दूसरों को जागरूक करें।

मुख्यमंत्री मोहन यादव का देवघर प्रवास: भगवान महादेव के दर्शन और प्रदेश की मंगलकामना

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आज सोमवार को झारखण्ड प्रवास के दौरान देवघर स्थित ज्योतिर्लिंग श्री बाबा बैद्यनाथ धाम में भगवान महादेव के दर्शन किए। इस विशेष अवसर पर उन्होंने पूजा-अर्चना कर प्रदेश और देशवासियों के कल्याण के लिए प्रार्थना की।

देवघर का महत्व

देवघर, जो झारखण्ड राज्य में स्थित है, भारतीय संस्कृति और धर्म में विशेष स्थान रखता है। यहां का बाबा बैद्यनाथ धाम श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। यहाँ भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग की पूजा की जाती है, जो भक्तों के लिए आध्यात्मिक और मानसिक शांति का स्रोत है।

मुख्यमंत्री की प्रार्थना

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भगवान महादेव से प्रार्थना की कि उनकी कृपा सभी पर सदैव बरसती रहे। उन्होंने देश और प्रदेशवासियों के लिए मंगलकामना की, जिससे सभी को सुख और समृद्धि प्राप्त हो सके। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भगवान का आशीर्वाद हमारे प्रयासों को और मजबूती प्रदान करेगा।

राज्य के विकास में आस्था का योगदान

मुख्यमंत्री यादव ने इस यात्रा को राज्य के विकास में आस्था के महत्व के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों की यात्रा से न केवल आत्मिक शांति मिलती है, बल्कि यह लोगों को एकजुट करने का कार्य भी करती है। इससे प्रदेश में सांस्कृतिक एकता और सामंजस्य को बढ़ावा मिलता है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव का बाबा बैद्यनाथ धाम में किया गया यह दौरा न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह प्रदेश के विकास और कल्याण के लिए एक सकारात्मक संदेश भी है। इस प्रकार के आयोजन से प्रदेशवासियों में विश्वास और प्रेरणा का संचार होता है।

मुख्यमंत्री की इस यात्रा ने यह साबित कर दिया कि धर्म और राजनीति का संगम एक नई दिशा दे सकता है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन आ सकता है।

आप भी इस महत्वपूर्ण घटना पर अपने विचार साझा करें और आगे बढ़ें, ताकि हम सभी मिलकर एक समृद्ध और खुशहाल समाज की ओर बढ़ सकें।

MP: वन रक्षकों से वसूला जाएगा 145 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वेतन, आदेश जारी

भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है, जिसके तहत राज्य के वन रक्षकों को दी गई अतिरिक्त वेतन राशि की वसूली की जाएगी। यह आदेश 2006 से लेकर अब तक काम कर रहे 6,592 वन रक्षकों के संबंध में है, जिनकी वेतन ग्रेड में गलती से अधिक राशि दी गई थी। इस गलती को सुधारने के लिए सरकार ने कुल 145 करोड़ रुपये की वसूली का फैसला लिया है। आइए इस मुद्दे को विस्तार से समझते हैं।

वेतन वसूली का आदेश: क्या है पूरा मामला?

2006 से कार्यरत वन रक्षकों को उनके वेतन में अधिक राशि दी गई थी। यह अधिक राशि गलत वेतन ग्रेड के कारण दी गई, जो कि नियमानुसार नहीं थी। वन विभाग ने इसे अब संज्ञान में लिया है और इन रक्षकों से यह राशि वापस वसूलने के आदेश जारी किए हैं।

विभाग के आदेश के अनुसार, 2006 से काम कर रहे वन रक्षकों से 5 लाख रुपये और 2013 से काम कर रहे वन रक्षकों से 1.50 लाख रुपये वापस लिए जाएंगे। यह राशि उनके भविष्य के वेतन से कटौती के रूप में वसूली जाएगी।

गलती किसकी थी: सरकार या वन रक्षकों की?

इस मुद्दे पर सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि गलती किसकी थी? क्या यह वन रक्षकों की गलती थी या सरकारी तंत्र की? पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे पूरी तरह से सरकार की गलती बताया है।

नाथ के अनुसार, हर साल ऑडिटर जनरल (एजी) ग्वालियर विभाग का ऑडिट करते हैं, लेकिन उन्होंने इस गलती को पहचानने में चूक की। यदि समय पर इस गलती का पता चल जाता, तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

कमल नाथ का कहना है कि वन रक्षकों को जो भी वेतन मिला, वह सरकारी आदेशों के तहत था। इस गलती का दायित्व वन रक्षकों पर डालने के बजाय सरकार को इसे अपनी जिम्मेदारी माननी चाहिए और इस आर्थिक बोझ को उठाना चाहिए।

वेतन वसूली के आदेश का असर

वन रक्षकों से इस भारी भरकम राशि की वसूली करने का सीधा असर उनके आर्थिक जीवन पर पड़ेगा। वन रक्षक, जिनकी औसत आय सीमित है, के लिए 5 लाख रुपये या 1.50 लाख रुपये की कटौती एक बड़ी आर्थिक चुनौती बन सकती है।

सरकार ने इस वसूली का आदेश जारी करते समय वन रक्षकों के आर्थिक हालातों पर ध्यान नहीं दिया है, जिससे उनमें नाराजगी पैदा हो रही है। इसके अलावा, यह मामला राज्य के श्रमिक संगठनों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है, जो सरकार के इस कदम का विरोध कर रहे हैं।

कांग्रेस का विरोध और सरकार की जवाबदेही

इस मुद्दे पर विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भी सरकार को घेरा है। कांग्रेस नेता कमल नाथ ने कहा कि यह सरकार की गलती है और इस गलती का भुगतान वन रक्षकों से वसूलना गलत है।

नाथ ने कहा, “यदि एजी ग्वालियर की यह गलती वन विभाग में हो सकती है, तो यह गलती अन्य विभागों में भी संभव है। इसका सीधा अर्थ यह है कि सरकार की प्रणाली में गंभीर खामियां हैं, जिनका खामियाजा अब वन रक्षकों को भुगतना पड़ रहा है।”

वेतन वसूली के कानूनी पहलू

सरकार के इस आदेश को लेकर कानूनी विशेषज्ञ भी अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि वन रक्षकों को वेतन की अतिरिक्त राशि दी गई थी, तो यह सरकार की गलती थी, न कि वन रक्षकों की।

कानूनी दृष्टिकोण से देखें तो इस वसूली का आदेश चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। सरकार का यह कदम न्यायालय में भी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि वेतन की अतिरिक्त राशि सरकारी प्रणाली की खामी के कारण दी गई थी, और कर्मचारियों को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

आगे की राह: सरकार की चुनौतियाँ

इस पूरे मुद्दे से सरकार के सामने कई चुनौतियाँ खड़ी हो गई हैं। वन रक्षकों में फैली नाराजगी को दूर करना, उनके आर्थिक हितों का ध्यान रखना और इस गलती का सही समाधान निकालना, सरकार के लिए बड़ी जिम्मेदारियाँ हैं।

सरकार को चाहिए कि वह इस मुद्दे पर पुनर्विचार करे और वन रक्षकों के आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए, इस वसूली का कोई न्यायसंगत और मानवीय समाधान निकाले।

वन रक्षकों से वेतन की वसूली का मामला राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। यह मामला न केवल वन विभाग की प्रशासनिक गलती को उजागर करता है, बल्कि सरकार की जवाबदेही और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़ा करता है।

यदि सरकार इस गलती का भार वन रक्षकों पर डालती है, तो इसका सीधा असर उनके जीवन और उनके काम पर पड़ेगा। इसलिए यह आवश्यक है कि सरकार इस मुद्दे का एक संवेदनशील और न्यायपूर्ण समाधान निकाले, ताकि कर्मचारियों का विश्वास बना रहे और सरकारी प्रणाली में सुधार हो सके।

भोपाल में 5 साल की बच्ची की हत्या: हत्यारे की बहन के मोबाइल में नाबालिग लड़कियों की फोटो का भंडार

Bhopal News: पिछले सप्ताह शाहजहांपुर में पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी आरोपी की मां और बहन के पिछले रिकॉर्ड खंगाल रही है, जिन्होंने सबूत नष्ट करने और अपराध को छिपाने में उसकी मदद की थी।

एसआईटी का नेतृत्व करने वाले अधिकारियों ने रविवार को एक बड़ा खुलासा किया। एडिशनल डीसीपी (जोन-3) शालिनी दीक्षित ने बताया कि मुख्य आरोपी अतुल भालसे की बहन चंचल भालसे 12 लोगों के संपर्क में थी।

पुलिस ने चंचल का मोबाइल फोन जब्त कर लिया और उसकी डिटेल खंगाली तो यह बात सामने आई। उन्होंने बताया कि यह भी पता चला है कि वह नाबालिग लड़कियों की तस्वीरें सभी 12 लोगों के साथ शेयर करती थी। इसलिए, यह संदेह जताया जा रहा है कि वह सेक्स रैकेट का हिस्सा थी।

हालांकि, डीसीपी दीक्षित के अनुसार, सेक्स रैकेट चलाने में चंचल की भूमिका की पुष्टि नहीं हुई है, क्योंकि उससे पूछताछ की जा रही है। अतुल की पुलिस रिमांड सोमवार को खत्म होगी।

शाहजहानाबाद एसीपी निहित उपाध्याय ने बताया कि आरोपी अतुल खरगोन का रहने वाला है। उसके खिलाफ छेड़छाड़, सार्वजनिक हमला और चोरी से जुड़े कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। जब उसने अपने तौर-तरीके नहीं बदले तो खरगोन पुलिस ने उसे देश से निकाल दिया। पिछले चार सालों से खरगोन में उसका घर बंद है और वह पुलिस कार्रवाई के डर से जिले में नहीं जाता।

हरदा: 5 साल की बच्ची से बलात्कार, आरोपी ने खाया जहर; भोपाल रेफर किया गया

HARDA NEWS: हरदा में 5 साल की बच्ची से बलात्कार करने वाले और फरार आरोपी को पुलिस ने छह दिन बाद रविवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि पकड़े जाने के बाद आरोपी ने पुलिस के डर से जहर खाने की बात कही है और उसे भोपाल रेफर कर दिया गया है।

हरदा एसपी अभिनव चौकसे ने मीडिया को बताया कि गिरफ्तार आरोपी की पहचान सुनील कोरकू के रूप में हुई है। उसे शहर के रेहटगांव इलाके के नज़रपुरा इलाके से गिरफ्तार किया गया।

बलात्कार की घटना की सूचना मिलने के बाद हरदा कलेक्टर आदित्य सिंह ने पुलिस को विशेष तलाशी अभियान चलाने के निर्देश दिए थे, जिसके तहत पुलिस ने हरदा के 33 गांवों में टीमें तैनात कीं और आरोपियों का पता लगाने के लिए नाइट विजन ड्रोन का इस्तेमाल किया।

रविवार को कोरकू को पकड़ने के बाद उसने पुलिस को बताया कि पुलिस के डर से उसने जहर खा लिया है। उसे पहले हरदा जिला अस्पताल भेजा गया, जहां से उसे भोपाल रेफर कर दिया गया। एसपी चौकसे ने बताया कि इलाज के बाद आरोपी को कोर्ट में पेश किया जाएगा।

MP WEATHER: बरगी बांध के 9 गेट खुले; भोपाल, इंदौर, छिंदवाडा, जबलपुर समेत 37 जिलों में बारिश

MP WEATHER: सोमवार को भोपाल और इंदौर समेत 37 जिलों में हल्की बूंदाबांदी का पूर्वानुमान जारी किया गया है। भारी बारिश का कोई अलर्ट नहीं है। अधिकांश जिलों में धूप खिलने की संभावना है। हालांकि, जबलपुर शहर में फिलहाल तेज बारिश हो रही है। 

बरगी बांध के 9 गेट खोले गए

जबलपुर और आसपास के इलाकों में बारिश का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। संभाग के कई जिलों में लगातार बारिश हो रही है।

अधिकारियों ने एक बार फिर बरगी बांध के गेटों की संख्या बढ़ा दी है, जिससे अब कुल 9 गेटों से पानी छोड़ा जा रहा है। बढ़ते जलस्तर के कारण नर्मदा के विभिन्न तटों पर अलर्ट जारी कर दिया गया है

बांध के जलग्रहण क्षेत्र के जिलों से पानी आ रहा है, जिससे पहले से ही ऊंचा स्तर और अधिक बढ़ गया है।

सोमवार को मौसम का पूर्वानुमान 

जारी रहेगी तेज धूप: ग्वालियर, मुरैना, श्योपुर, भिंड, दतिया, शिवपुरी, अशोकनगर, गुना, राजगढ़, शाजापुर, आगर मालवा, देवास, नीमच, रीवा, मंदसौर, सिंगरौली, सीधी और अनूपपुर में तेज धूप बनी रह सकती है।

गरज के साथ हल्की बारिश: भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और मध्य प्रदेश के बाकी जिलों में गरज के साथ हल्की बारिश होगी

मौसम विज्ञानी क्या कहते हैं?

आईएमडी भोपाल के वरिष्ठ वैज्ञानिक अभिजीत चक्रवर्ती के अनुसार, बारिश कराने वाला मौसमी सिस्टम अब कमजोर पड़ रहा है और मौसम साफ रहने के साथ धूप खिलने की उम्मीद है। रविवार को इंदौर, भोपाल, उज्जैन, शिवपुरी और रतलाम समेत 10 जिलों में बारिश दर्ज की गई।

इस साल मध्य प्रदेश में औसत से 18% ज़्यादा बारिश हुई है। आम तौर पर राज्य में 37.3 इंच बारिश होती है, लेकिन इस साल 43.9 इंच बारिश हो चुकी है। दरअसल, 10 जिलों में 50 इंच से ज़्यादा बारिश हुई है।

मौसम विभाग का कहना है कि मानसून अब विदाई के करीब है, जो मौसम के अंत का संकेत है

वर्षा रिकॉर्ड

इस मॉनसून सीजन में सबसे ज्यादा बारिश जबलपुर संभाग में हुई है, जिसमें मंडला में 60.5 इंच से ज्यादा बारिश हुई है, जबकि सिवनी में 56.8 इंच बारिश हुई है। श्योपुर, निवाड़ी, भोपाल, सागर, राजगढ़, अलीराजपुर, छिंदवाड़ा और सीधी जैसे अन्य जिलों में भी अच्छी खासी बारिश हुई है, जो 50 इंच के आंकड़े को पार कर गई है।

Shardiya Navratri 2024: जानिए नवरात्रि में कौन से 9 रंग अपनाए जाने चाहिए और वे क्या दर्शाते हैं?

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Shardiya Navratri 2024: नवरात्रि उत्सव का हिंदू समाज में बहुत महत्व है। दिव्य स्त्री शक्ति का सम्मान करने वाला यह जीवंत और पवित्र त्योहार देवी दुर्गा और उनके विभिन्न स्वरूपों की आराधना पर केंद्रित है। यह उत्सव आश्विन माह में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होता है और नवमी तक चलता है।

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, आश्विन माह में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा 3 अक्टूबर 2024 को दोपहर 12:19 बजे शुरू होगी और 4 अक्टूबर को सुबह 2:58 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार शारदीय नवरात्रि 3 अक्टूबर 2024 को गुरुवार से शुरू होगी।

जैसे-जैसे त्योहार नजदीक आ रहा है, विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा, प्रत्येक दिन के लिए अलग-अलग रंगों का महत्व, तथा उनके बारे में अधिक जानें।

दिन 1: लाल

शैलपुत्री: साहस की देवी

नवरात्रि के पहले दिन देवी शैलपुत्री को वीरता और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। भक्त लाल रंग पहनते हैं, जो शक्ति और संकल्प का प्रतीक है।

ब्रह्मचारिणी: पवित्रता की देवी

दिन 2: रॉयल ब्लू

ब्रह्मचारिणी: पवित्रता की देवी

दूसरा दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए समर्पित है, जो पवित्रता और भक्ति का प्रतीक है। शांति और सुकून का प्रतीक होने के कारण उनसे जुड़ा रंग शाही नीला है।

चंद्रघंटा: शांति की देवी

दिन 3: पीला

चंद्रघंटा: शांति की देवी

तीसरे दिन, भक्त देवी चंद्रघंटा की पूजा करते हैं, जो शांति और स्थिरता का प्रतिनिधित्व करती हैं। पीला रंग, जो खुशी और आनंद का प्रतीक है, उनसे जुड़ा हुआ है।

दिन 4: हरा

कूष्मांडा: समृद्धि की देवी

चौथे दिन हरा रंग देवी कुष्मांडा का प्रतीक है। वह सभी सृष्टि की मूल निर्माता हैं और अपने अनुयायियों को समृद्धि प्रदान करती हैं।

दिन 5: ग्रे

स्कंदमाता: स्कंद की माता

पांचवा दिन देवी स्कंदमाता की पूजा के लिए समर्पित है, जो भगवान स्कंद की माता हैं। ग्रे रंग, जो संतुलन और स्थिरता का प्रतिनिधित्व करता है, उनसे जुड़ा हुआ है।

दिन 6: नारंगी

कात्यायनी: योद्धा देवी

छठे दिन शक्ति और साहस की प्रतीक देवी कात्यायनी की पूजा की जाती है। ऊर्जा और चमक से भरपूर नारंगी रंग उनके साहसी व्यक्तित्व का प्रतीक है।

कालरात्रि: अंधकार की देवी

दिन 7: सफेद

कालरात्रि: अंधकार की देवी

सातवां दिन देवी दुर्गा के शक्तिशाली स्वरूप कालरात्रि की पूजा के लिए समर्पित है। पवित्रता और आध्यात्मिकता का प्रतीक सफेद रंग उनसे जुड़ा है।

महागौरी: सौंदर्य की देवी

दिन 8: गुलाबी

महागौरी: सौंदर्य की देवी

आठवां दिन देवी महागौरी की पूजा के लिए समर्पित है, जो सुंदरता और अनुग्रह का प्रतिनिधित्व करती हैं। गुलाबी रंग, जो प्रेम और करुणा का प्रतीक है, उनकी दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है।

माँ दुर्गा

दिन 9: आसमानी नीला

सिद्धिदात्री: बुद्धि प्रदान करने वाली

नवरात्रि के आखिरी दिन हम बुद्धि और ज्ञान की दाता देवी सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं। उनके साथ आसमानी नीला रंग जुड़ा हुआ है, जो विशालता और आध्यात्मिकता का प्रतीक है।

सिवनी: बरघाट के धारनाकला में पानी टंकी बनकर तैयार, किन्तु पेयजल सुविधा अभी भी दूर

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Seoni News: जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर जल योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सभी घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना है। इसके अंतर्गत सिवनी जिले के बरघाट जनपद के अंतर्गत ग्राम पंचायत धारनाकला में पानी टंकी का निर्माण छह महीने पहले ही पूरा कर लिया गया था। साथ ही, पाइपलाइन बिछा कर ग्रामीणों के घरों तक नल कनेक्शन भी लगाए गए हैं। बावजूद इसके, ग्रामीण आज भी शुद्ध पेयजल से वंचित हैं।

छह महीने पहले तैयार हुई पानी टंकी, लेकिन पानी अब तक नहीं पहुंचा

धारनाकला में छह महीने पहले ही पानी टंकी का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसके साथ ही, हर घर को जल पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाई गई थी। लेकिन अफसोस की बात है कि अब तक इस योजना का कोई लाभ गांव के लोगों को नहीं मिला है। गर्मी का मौसम बीत चुका है, अब बरसात का मौसम भी समाप्त होने को है, फिर भी ग्रामीणों के घरों में नल से पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई है। पाइपलाइन गांव में सिर्फ सजावट के तौर पर घरों के सामने दिखाई देती है।

पंचायत का अधिकार क्षेत्र नहीं, ठेकेदार पर टिकी निगाहें

ग्राम पंचायत धारनाकला के अनुसार, पानी टंकी और पाइपलाइन का निर्माण ठेकेदार द्वारा किया गया है। लेकिन, अभी तक यह कार्य पूर्ण नहीं किया गया है और न ही पंचायत के अधीन पानी टंकी और पेयजल व्यवस्था को सौंपा गया है। पंचायत का कहना है कि जब तक ठेकेदार अपना काम पूरा नहीं करता, तब तक यह योजना पूरी तरह सफल नहीं हो सकती। पंचायत ने कई बार इस संबंध में पीएचई विभाग को जानकारी दी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। फिलहाल, ग्रामीणों को पुरानी पानी टंकी से पानी की आपूर्ति की जा रही है।

हैंडपंप भी हुआ बेकार, बोरिंग के कारण बढ़ी समस्या

धारनाकला में राधे कृष्ण मंदिर के पास स्थित हैंडपंप पहले ग्रामीणों को पेयजल सुविधा मुहैया करा रहा था। लेकिन, पानी टंकी के लिए किए गए बोरिंग के कारण अब यह हैंडपंप पानी उगलने में सक्षम नहीं रहा। इससे ग्रामीणों को पेयजल की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। बोरिंग के पास स्थित हैंडपंप का सूखना इस समस्या को और बढ़ा रहा है। जबकि नई पानी टंकी बोरिंग से भर जाती है, फिर भी इसके संचालन में आ रही दिक्कतें पंचायत के अधिकार क्षेत्र में न होने के कारण ग्रामीणों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।

हर घर जल योजना: कागजों तक सीमित

सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर जल योजना केवल कागजों तक सीमित रह गई है। इसके अंतर्गत गांव के सभी घरों में नल कनेक्शन तो लगा दिए गए हैं, लेकिन पेयजल की सप्लाई आज तक शुरू नहीं हो पाई है। यह समस्या केवल धारनाकला गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि बरघाट क्षेत्र की कई अन्य ग्राम पंचायतों में भी यही स्थिति बनी हुई है। पानी टंकी का निर्माण हो गया है, पाइपलाइन बिछा दी गई है, फिर भी नल से पानी नहीं आ रहा है।

नल कनेक्शन बने शोपीस, करोड़ों का खर्च व्यर्थ

जनपद सदस्य गजानंद हरिनखेड़े का कहना है कि सरकार ने हर घर जल योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च करके पानी टंकी और पाइपलाइन का निर्माण कराया। गांव के प्रत्येक घर में नल कनेक्शन तो लग गए हैं, लेकिन पानी की आपूर्ति अब तक शुरू नहीं हो पाई है। कनेक्शन केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, सरकार और प्रशासन के कड़े निर्देशों के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

गांव की गलियों में बेकार बह रहा पानी

गांव के कई हिस्सों में पाइपलाइन से व्यर्थ पानी बह रहा है। नल कनेक्शन तो लगाए गए हैं, लेकिन सही तरीके से उनका संचालन नहीं हो पा रहा है, जिससे गलियों में पानी बेकार बह रहा है। यह एक और चिंता का विषय है, क्योंकि पानी की कमी के बावजूद यह संसाधन व्यर्थ जा रहा है।

यह समस्या केवल धारनाकला तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे बरघाट क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में यह हाल है। पानी टंकी निर्माण और पाइपलाइन बिछाने के बावजूद पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों की उम्मीदें सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना से जुड़ी हुई हैं, लेकिन ठेकेदारों की लापरवाही और पंचायत के सीमित अधिकारों के चलते लोग अब भी शुद्ध पेयजल के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

सिवनी पुलिस की गौवंश तस्करों पर कमर तोड़ कार्रवाई: 50 मवेशियों सहित एक ट्रक ज़ब्त, तीन आरोपी गिरफ्तार

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Seoni News: सिवनी पुलिस अधीक्षक सुनील मेहता के नेतृत्व में कोतवाली पुलिस ने गौवंश तस्करों पर एक और कड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। गौवंश तस्करी और अवैध परिवहन पर कठोर कदम उठाते हुए पुलिस ने इस माह की तीसरी बड़ी कार्रवाई की, जिसमें 50 मवेशियों से भरे ट्रक को ज़ब्त किया गया और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

यह कार्रवाई ए.एस.पी  गुरुदत्त शर्मा और सी.एस.पी पूजा पाण्डेय के मार्गदर्शन में की गई, जिसमें कोतवाली थाना प्रभारी सतीश तिवारी और उनकी टीम की सूझबूझ और सतर्कता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सिवनी पुलिस की माह में तीसरी बड़ी कार्रवाई: 50 मवेशियों सहित एक ट्रक ज़ब्त, तीन आरोपी गिरफ्तार

दिनांक 28/09/2024 को कोतवाली पुलिस को सूचना मिली कि ट्रक क्रमांक डी.डी.01 टी. 9744 में गौवंश तस्करी कर मवेशियों को नागपुर ले जाया जा रहा है। यह ट्रक जबलपुर-लखनादौन नेशनल हाईवे होते हुए नागपुर की ओर बढ़ रहा था। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए नागपुर रोड बायपास पर जाम लगाकर उक्त ट्रक को रोका। पुलिस की सतर्कता के कारण ट्रक को रोका गया और उसमें से 50 मवेशी मिले, जिनके परिवहन के संबंध में कोई वैध दस्तावेज नहीं थे।

50 मवेशी मुक्त, पाँच मृत पाए गए

पुलिस द्वारा ज़ब्त किए गए मवेशियों में से 45 मवेशियों को सुरक्षित गौशाला भेजा गया, जबकि पाँच मवेशी मृत अवस्था में पाए गए। मृत मवेशियों का विधिवत डॉक्टरी परीक्षण कराया गया। ज़ब्तशुदा ट्रक को पुलिस ने राजसात करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है और तीनों आरोपियों के खिलाफ गौवंश अधिनियम के तहत कठोर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

सिवनी पुलिस की पिछली बड़ी कार्रवाइयां

कोतवाली पुलिस द्वारा इस माह में यह तीसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले दिनांक 05/09/2024 को 25 टन गौ मांस से भरे एक ट्रक को ज़ब्त किया गया था, वहीं 22/09/2024 को 22 मवेशियों से भरा एक और ट्रक पकड़ा गया था। इन सभी मामलों में आरोपी पहले से ही पुलिस की रडार पर थे और उनका आपराधिक रिकॉर्ड है। यह स्पष्ट है कि कोतवाली पुलिस ने गौवंश तस्करी के खिलाफ एक व्यापक अभियान चला रखा है।

गिरफ्तार आरोपी

गौवंश तस्करी में संलिप्त आरोपियों की पहचान इस प्रकार की गई है:

  1. हरीश पिता रामचंद्र चौधरी, उम्र 50 वर्ष, निवासी ग्राम मोड़ा, जिला कोटा, राजस्थान
  2. शालिकर पिता अमनत अली, उम्र 40 वर्ष, निवासी सारंगपुर, जिला राजगढ़
  3. असलम पिता अनवर खान, उम्र 34 वर्ष, निवासी सारंगपुर, जिला राजगढ़

इन आरोपियों से पूछताछ के दौरान पुलिस ने पाया कि ये पहले भी गौवंश तस्करी के मामलों में लिप्त रहे हैं और इनके खिलाफ पहले भी मामले दर्ज हैं।

ज़ब्त की गई संपत्ति

पुलिस द्वारा इस कार्रवाई में निम्नलिखित संपत्तियाँ ज़ब्त की गईं:

  1. ट्रक क्रमांक डी.डी.01 टी. 9744
  2. दो मोबाइल फोन

पुलिस की सराहनीय टीम

इस सराहनीय कार्रवाई में कोतवाली पुलिस के निम्नलिखित अधिकारियों और कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही:

  1. निरीक्षक सतीश तिवारी
  2. उप निरीक्षक ओमप्रकाश धौपुरी
  3. सहायक उप निरीक्षक संजय यादव
  4. आरक्षक नितेश राजपूत
  5. शिपाई संजीव, इरफान खान, रविन्द्र डहरिया, विश्राम धुर्वे, रत्नेश कुशवाह
  6. 100 डायल के चालक ज्योतिष

गौवंश तस्करी के खिलाफ पुलिस की सख्त कार्रवाई

कोतवाली पुलिस द्वारा गौवंश तस्करी के खिलाफ की जा रही यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि पुलिस प्रशासन इन अवैध गतिविधियों को लेकर पूरी तरह से गंभीर है। गौवंश तस्करी एक गंभीर अपराध है और पुलिस द्वारा तस्करों के खिलाफ निरंतर अभियान चलाया जा रहा है। श्रीमान पुलिस अधीक्षक सुनील मेहता के निर्देश पर पुलिस इस प्रकार की अवैध गतिविधियों के खिलाफ पूरी तरह से सतर्क है और अपराधियों पर कड़ी नजर बनाए हुए है।

समाज में पुलिस की भूमिका

इस प्रकार की सख्त कार्रवाइयों से न केवल अपराधियों के मन में भय उत्पन्न होता है, बल्कि समाज में भी पुलिस की भूमिका की सराहना होती है। गौवंश तस्करी न केवल एक कानूनी अपराध है, बल्कि यह समाज के नैतिक और धार्मिक मूल्यों के खिलाफ भी है। कोतवाली पुलिस द्वारा तस्करों पर लगातार की जा रही सख्ती से यह स्पष्ट है कि कानून का शासन किसी भी प्रकार के अवैध कार्यों को बर्दाश्त नहीं करेगा।