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सिवनी में महिला कलेक्टर के होते हुए बरघाट में महिलाओं के अधिकारों का हो रहा हनन: नियमों का नहीं हो रहा पालन

सिवनी (बरघाट): मध्य प्रदेश आजीविका मिशन का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है। इसके तहत महिला ग्राम संगठन और संकुल स्तरीय संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये संगठन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, आर्थिक सहायता प्रदान करने और संगठित बचत को बढ़ावा देने का कार्य करते हैं। लेकिन हाल के दिनों में सिवनी जिले के बरघाट क्षेत्र में महिला अधिकारों की अनदेखी और नियमों के उल्लंघन की घटनाएं बढ़ी हैं।

ग्राम संगठन अध्यक्ष का चुनाव विवादों में

बरघाट में महिला स्व सहायता समूह ग्राम संगठन अध्यक्ष के चुनाव को लेकर विभागीय अधिकारियों की उदासीनता सामने आई है। एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी रिक्त पद की पूर्ति नहीं हो सकी है। यह स्थिति तब है जब जिला कलेक्टर संस्कृति जैन के आदेश के बाद पूर्व अध्यक्ष रंजीता बोपचे ने इस्तीफा दे दिया था।

विभागीय अधिकारी सरकारी आदेशों को नजरअंदाज कर रहे हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि महिला सशक्तिकरण की योजनाएं केवल कागजों तक ही सीमित रह गई हैं।

भोपाल के निर्देशों का पालन नहीं

मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, भोपाल के निर्देशों के बावजूद बरघाट विकासखंड सहित पूरे जिले में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया नहीं हुई। अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी संजीव सिन्हा द्वारा जारी निर्देश में कहा गया था कि सामुदायिक संस्थाओं में नेतृत्व परिवर्तन किया जाए और हर दो वर्ष में पदाधिकारियों का चुनाव अनिवार्य रूप से हो। लेकिन वर्षों से ग्राम संगठन और संकुल अध्यक्षों के चुनाव नहीं हुए हैं।

महिला अधिकारों का हनन: लचर प्रशासनिक व्यवस्था

बरघाट ही नहीं, पूरे जिले में स्थिति एक समान है। विभागीय अधिकारी भोपाल के आदेशों को अमल में नहीं ला रहे, जिससे महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। एक बार कोई व्यक्ति ग्राम संगठन का अध्यक्ष या सचिव बन जाए, तो वह वर्षों तक पद पर बना रहता है। इस दौरान प्रशासन द्वारा बैठकों का आयोजन तक नहीं किया जाता।

हजारों महिलाएं प्रभावित

बरघाट में हजारों महिलाएं स्व सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं। प्रत्येक स्व सहायता समूह में 11 से 15 महिलाएं शामिल होती हैं, और 25 से 30 समूह मिलकर ग्राम संगठन का गठन करते हैं। यही ग्राम संगठन अध्यक्ष और सचिव का चुनाव करता है, जो शासन से प्राप्त वित्तीय सहायता का प्रबंधन करते हैं।

लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण महिला समूहों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा। कई मामलों में राजनीतिक प्रभाव रखने वाली महिलाएं ही इन पदों पर कब्जा जमाए बैठी हैं।

महिला अधिकारियों की कमी

मध्य प्रदेश आजीविका मिशन महिलाओं से जुड़ा एक केंद्रित कार्यक्रम है, लेकिन ब्लॉक और जिला स्तर पर महिला अधिकारियों की भारी कमी है। जिला प्रबंधक से लेकर ब्लॉक प्रबंधक तक अधिकांश पदों पर पुरुष अधिकारी कार्यरत हैं, जिससे महिलाओं को अपनी समस्याएं खुलकर रखने में कठिनाई होती है।

क्या जिला प्रशासन इस ओर ध्यान देगा?

महिलाओं की सशक्तिकरण योजनाओं का सही क्रियान्वयन आवश्यक है। जिला प्रशासन और आजीविका मिशन को चाहिए कि वे नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करें, ताकि महिलाओं को स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का अधिकार मिले। क्या संवेदनशील जिला कलेक्टर इस ओर ध्यान देंगी?

सिवनी: प्रयागराज महाकुंभ जा रहे वाहनों से जबलपुर – नागपुर हाईवे पर भारी जाम, श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही

प्रयागराज में महाकुंभ 2025 के आयोजन के चलते देशभर से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। इस कारण जबलपुर-नागपुर नेशनल हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। खासतौर पर सिवनी जिले के धूमा, छपारा, लखनादौन, सिवनी और खवासा में प्रशासन को वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करनी पड़ी है। पुलिस प्रशासन और जिला अधिकारी हाईवे पर ट्रैफिक को व्यवस्थित करने में जुटे हुए हैं।

जब जबलपुर-नागपुर हाईवे बना जाम का केंद्र

प्रयागराज की ओर जाने वाले वाहनों की अत्यधिक संख्या के कारण जबलपुर से नागपुर मार्ग पर कई स्थानों पर ट्रैफिक की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। प्रशासन को धूमा, छपारा, लखनादौन, सिवनी और खवासा में वाहनों को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा, जिससे हाईवे पर लंबा जाम लग गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जिन वाहनों ने शनिवार रात को सिवनी से प्रयागराज की यात्रा शुरू की थी, वे अभी भी कटनी और अन्य मार्गों में जाम में फंसे हुए हैं। इंटरस्टेट चेक पोस्ट खवासा पर भी जबरदस्त ट्रैफिक का दबाव देखा गया। यहां पुलिस प्रशासन मुस्तैद है और यात्रियों को असुविधा न हो, इसके लिए नाश्ता, चाय और बिस्किट की व्यवस्था की गई है।

सिवनी में होटल और ढाबों पर भारी भीड़

महाकुंभ में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु आ रहे हैं। इनमें छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक से आने वाले यात्री भी बड़ी संख्या में शामिल हैं। इस वजह से सिवनी जिले के प्रमुख हाईवे के ढाबों, होटलों और रेस्टोरेंटों में भारी भीड़ देखी जा रही है।

होटल और ढाबों के संचालकों ने भी श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए 24 घंटे सेवा देने की योजना बनाई है ताकि लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

महाकुंभ की ओर बढ़ता श्रद्धालुओं का रेला

महाकुंभ में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है, जिससे यातायात व्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ रहा है। सिवनी पुलिस प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं। पुलिस का कहना है कि जबलपुर-नागपुर मार्ग पर वाहनों की संख्या इतनी अधिक हो गई है कि प्रयागराज तक पहुंचने में अधिक समय लग रहा है।

क्या कह रहे हैं प्रशासनिक अधिकारी?

सिवनी पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार मेहता ने कहा:
“महाकुंभ जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बहुत अधिक है, जिससे हाईवे पर जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसलिए, हमने धूमा, लखनादौन, छपारा, सिवनी और खवासा में वाहनों को नियंत्रित किया है। यात्रियों की सुविधा के लिए ढाबों, होटलों और रेस्टोरेंटों में पर्याप्त व्यवस्था की गई है ताकि उन्हें किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।”

सिवनी की जनता की जान से खिलवाड़: भगत सिंह वार्ड में एक साथ 2 मोबाइल नेटवर्क टावर लगने से डबल हुआ रेडिएशन का खतरा

सिवनी: सिवनी जिले के बस स्टैंड क्षेत्र के पीछे भगत सिंह वार्ड (घनी आबादी वाले इलाके) में मोबाइल टावर स्थापित करने को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। पहले से ही इस क्षेत्र में जिओ (Jio) कंपनी का एक टावर स्थापित था, लेकिन अब उसी के ठीक बगल में एयरटेल (Airtel) कंपनी का एक और टावर लगाने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। इससे रेडिएशन (Radiation) का खतरा दोगुना हो गया है, जिससे वहां रहने वाले लोगों की सेहत पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

भगत सिंह वार्ड क्षेत्र के स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब से इस क्षेत्र में दूसरा टावर लगाय जा रहा है तभ इसे यहाँ के लोगों द्वारा लगातार ही इसका विरोध किया जा रहा है. स्थानीय लोगों द्वारा नगरपालिका सिवनी में आवेदन दिया गया जिसके बाद नगरपालिका से स्थानीय निवासियों को जानकारी मिली की नगरपलिअक सिवनी द्वारा परमिशन नहीं दी गयी है और उन्हें परमिशन कलेक्टर कार्यालय द्वारा मिली है.

इसके बाद स्थानीय निवासियों द्वारा सिवनी कलेक्टर के समक्ष भी जाया गया लेकिन कलेक्टर ने इस मामले को गंभीरता से ना लेते हुए लोगों को वापस भेज दिया. जिसके बाद भी स्थानीय निवासियों द्वारा जनसुनवाई में घनी आबादी वाले इस क्षेत्र में टावर ना लगाया जाये इसका आवेदन दिया किन्तु जन सुनवाई से भी उन्हें सिर्फ आवेदन लेकर पहुंचा दिया गया. किसी प्रकार की कोई कार्यवाही उनके द्वारा नहीं की गयी.

इसके बाद उन्होंने बताया कि सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन के पास भी स्थानीय निवासी अपनी समस्या को लेकर पहुंचे जहाँ दिनेश राय मुनमुन द्वारा तत्काल टावर के काम को रोकने के लिए नगरपालिकाअध्यक्ष को कहा गया साथ ही किसी अधिकारी को कॉल किया गया किन्तु स्थानीय निवासियों का कहना है कि विधायक दिनेश राय मुनमुन के कॉल के बाद भी टावर का काम नहीं रुका.

स्थिति यह है कि आम जनता अपनी परेशानी के लिए सिर्फ नगरपालिका से कलेक्टर कार्यालय और कलेक्टर कार्यालय से विधायक के पास चक्कर लगा रही है पर उन्हें किसी भी प्रकार का कोई समाधान नहीं मिल रहा है.

मोबाइल टावर से बढ़ता रेडिएशन का खतरा

आज के समय में मोबाइल टावर की जरूरत से कोई इंकार नहीं कर सकता, लेकिन जब ये घनी आबादी वाले क्षेत्रों में लगाए जाते हैं, तो इनके दुष्प्रभाव भी उतने ही गंभीर हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल टावरों से निकलने वाला इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन (EMR) लंबे समय तक संपर्क में रहने पर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। यह खासकर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, बच्चों और हृदय रोगियों के लिए अधिक खतरनाक साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) भी इस बात की पुष्टि कर चुका है कि मोबाइल टावरों से निकलने वाले रेडिएशन का अधिक मात्रा में संपर्क मनुष्यों के लिए हानिकारक हो सकता है।

स्थानीय लोग क्यों कर रहे हैं विरोध ?

स्थानीय निवासियों का कहना है कि:

  1. रेडिएशन का स्तर पहले ही एक टावर के कारण बढ़ा हुआ था, अब दूसरे टावर के लगने से यह और अधिक खतरनाक हो सकता है।
  2. जिस जगह यह टावर लगाया जा रहा है, वह एक अवैध कॉलोनी बताई जा रही है। यदि कॉलोनी अवैध है तो वहां मोबाइल टावर लगाने की अनुमति किसने और कैसे दी?
  3. स्वास्थ्य पर प्रभाव: आसपास रहने वाले लोगों को पहले से ही सर दर्द, नींद की समस्या, थकावट और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
  4. सरकार और प्रशासन की अनदेखी: लोग लगातार प्रशासन से शिकायत कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

क्या अवैध कॉलोनी में टावर लगाना उचित है?

यह सवाल सबसे बड़ा है कि यदि कॉलोनी अवैध है तो वहां मोबाइल टावर स्थापित करने की अनुमति कैसे मिल गई? आमतौर पर किसी भी मोबाइल टावर को लगाने के लिए नगर निगम, नगर पालिका, टेली कम्युनिकेशन विभाग और पर्यावरण विभाग से स्वीकृति लेनी होती है।

प्रशासन की भूमिका पर सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन और नगर पालिका की मिलीभगत से यह टावर लगाया जा रहा है।

  • क्या नगर निगम ने इस इलाके को वैध घोषित कर दिया है?
  • क्या टावर लगाने से पहले स्थानीय लोगों की सहमति ली गई थी?
  • क्या मोबाइल कंपनियों ने सुरक्षा मानकों और पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन किया था?

यह सभी सवाल स्थानीय प्रशासन की गंभीर अनदेखी की ओर इशारा कर रहे हैं।

मोबाइल टावर से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव

मोबाइल टावर से निकलने वाले रेडिएशन से हो सकने वाली स्वास्थ्य समस्याएं:
✔ मस्तिष्क पर प्रभाव: लगातार रेडिएशन के संपर्क में रहने से याददाश्त कमजोर हो सकती है और ब्रेन ट्यूमर का खतरा बढ़ सकता है।
✔ नींद न आने की समस्या (इंसोम्निया): रेडिएशन के कारण मस्तिष्क की तरंगों पर प्रभाव पड़ता है, जिससे नींद की समस्या बढ़ जाती है।
✔ हृदय रोग का खतरा: शोध बताते हैं कि रेडिएशन हृदय की धड़कन को असंतुलित कर सकता है और इससे हाई ब्लड प्रेशर और अन्य हृदय रोग हो सकते हैं।
✔ बच्चों पर असर: मोबाइल टावरों का रेडिएशन बच्चों के न्यूरोलॉजिकल विकास को प्रभावित कर सकता है, जिससे उनमें सीखने की क्षमता कमजोर हो सकती है।

स्थानीय लोगों की मांगें और समाधान

स्थानीय निवासियों ने प्रशासन के सामने अपनी कुछ महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं:
🔹 मोबाइल टावर को घनी आबादी वाले क्षेत्र से हटाया जाए।
🔹 स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस क्षेत्र में रेडिएशन का स्तर जांचा जाए।
🔹 यदि कॉलोनी अवैध है तो वहां टावर लगाने की अनुमति क्यों दी गई, इसकी जांच हो।
🔹 सरकार इस क्षेत्र को वैध घोषित करे या फिर यहां मोबाइल टावर लगाने पर रोक लगाए।

क्या किया जा सकता है?

  1. मोबाइल टावर को घनी आबादी से दूर लगाना चाहिए।
  2. सख्त नियम बनाए जाएं ताकि मोबाइल कंपनियां बिना जनहित की परवाह किए टावर न लगा सकें।
  3. रेडिएशन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया जाए ताकि लोग जान सकें कि रेडिएशन स्तर कितना है।
  4. लोगों को इस विषय में जागरूक किया जाए कि वे अपने अधिकारों की रक्षा कैसे कर सकते हैं।

सिवनी जिले के बस स्टैंड क्षेत्र के पीछे एक घनी आबादी वाले इलाके में दो मोबाइल टावरों के कारण बढ़ते रेडिएशन को लेकर स्थानीय लोगों की चिंताएं पूरी तरह जायज हैं। सरकार और प्रशासन को इस मामले में तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और यह सुनिश्‍चित करना चाहिए कि लोगों की सेहत को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे।

यदि सरकार, प्रशासन और मोबाइल कंपनियां इस समस्या का समाधान नहीं करती हैं, तो स्थानीय नागरिकों का आंदोलन और तेज हो सकता है। लोगों को अपने स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा के लिए जागरूक होने की जरूरत है।

सिवनी: ड्रीमलैंड सिटी PART -1 में EWS प्लाटों में हुआ करोड़ों का घोटाला, जांच रिपोर्ट तैयार फिर भी FIR से परहेज

सिवनी जिले की ड्रीमलैंड सिटी कॉलोनी, जो डोरली छतरपुर ग्राम पंचायत के अंतर्गत आती है, एक बड़े घोटाले का केंद्र बनी हुई है। कॉलोनाइजर ने कॉलोनी में रहने वाले लोगों से किए गए वादों को न केवल तोड़ा, बल्कि EWS (Economically Weaker Section) के लिए आरक्षित भूमि पर भी हेराफेरी कर करोड़ों रुपये का गबन किया।

शिकायतकर्ता श्री सोनू खुशलानी एवं अन्य निवासी द्वारा विधायक श्री दिनेश राय मुनमुन के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसमें कॉलोनाइजर पर विकास कार्यों को अधूरा छोड़ने एवं कमजोर वर्ग के लिए निर्धारित भूखंडों को हड़पने का आरोप लगाया गया। इस शिकायत के आधार पर मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार की गई है।

कॉलोनाइजर पंकज मालू द्वारा नियमों का उल्लंघन

ड्रीमलैंड सिटी कॉलोनी के कॉलोनाइजर पंकज मालू (रामदेव बाबा पद्मावती डेवलपर्स सिवनी) ने कमजोर वर्गों के नाम पर फर्जीवाड़ा कर करोड़ों की कमाई की। नियमानुसार EWS के लिए आरक्षित भूमि को विकसित कर सक्षम प्राधिकारी को सौंपना अनिवार्य था, लेकिन कोई भी विकास कार्य नहीं किया गया।

EWS भूखंडों की अवैध बिक्री

जांच में पाया गया कि EWS के लिए आरक्षित भूमि को कॉलोनाइजर ने अन्य लोगों को बेच दिया। पहले यह भूमि गोपाल चांडक नामक व्यक्ति को बेची गई और बाद में इसे पांच अन्य व्यक्तियों को पुनः बेच दिया गया। यह टाउन एंड कंट्री प्लानिंग नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

EWS भूखंड पर बनी अवैध सड़क

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कॉलोनाइजर ने EWS भूखंड पर कॉलोनी की सड़क भी बना दी, जो पूर्ण रूप से अवैध है। यह कमजोर वर्गों के हक पर खुला अतिक्रमण और सरकारी नियमों की अवहेलना है।

शिकायत के मुख्य बिंदु

  1. विकास कार्य अधूरे छोड़ना – कॉलोनाइजर द्वारा किए गए वादों के अनुरूप कॉलोनी में आधारभूत सुविधाएं प्रदान नहीं की गईं।
  2. ईडब्ल्यूएस (EWS) श्रेणी के भूखंडों की हड़प – समाज के कमजोर वर्गों को आवंटित भूखंडों का अन्य उपयोग में लाना।
  3. प्रस्तावित लेआउट के नियमों का उल्लंघन – कॉलोनी के मास्टर प्लान के अनुसार निर्माण न होना।
  4. विक्रय प्रक्रिया में अनियमितता – ईडब्ल्यूएस के भूखंडों को अन्य व्यक्तियों को बेचना।

जांच रिपोर्ट का अवलोकन

जांच में राजस्व निरीक्षक एवं हल्का पटवारी द्वारा मौके पर निरीक्षण किया गया, जिसमें निम्न निष्कर्ष निकाले गए:

1. कॉलोनी का कुल क्षेत्रफल एवं प्लाटिंग

  • ड्रीमलैंड सिटी डोरली छतरपुर का कुल क्षेत्रफल 67551.30 वर्गमीटर है।
  • इसमें से 15% (10132.70 वर्गमीटर) और 25% (2533.17 वर्गमीटर) का हिस्सा समाज के कमजोर वर्गों के लिए आरक्षित था।
  • ईडब्ल्यूएस श्रेणी में G+2 निर्माण की योजना थी, जिसमें कुल 116 आवासीय इकाइयाँ प्रस्तावित थीं।
  • लेकिन मौके पर कोई निर्माण नहीं पाया गया और यह क्षेत्र रिक्त था।

2. कॉलोनाइजर द्वारा विकास कार्यों की स्थिति

  • कॉलोनाइजर श्री पंकज मालू, फर्म – मेसर्स रामदेव बाबा पद्मावती डेवलपर्स सिवनी को लाइसेंस प्राप्त था।
  • समाज के कमजोर वर्गों के लिए निर्धारित भूमि पर कोई निर्माण नहीं किया गया।
  • ईडब्ल्यूएस भूखंडों की भूमि का अप्रोच रोड में उपयोग कर लिया गया।

3. भूमि विक्रय प्रक्रिया में अनियमितता

  • भूमि विक्रेता: गोपाल चांडक पिता हरिकिशन चांडक (आधार नं: XXXX XXXX 9115, PAN: XXXXXX453D)
  • क्रेता: जयेंद्र कुमार श्रीवास्तव पिता गजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव
  • नामांतरण प्रक्रिया के बाद भूमि के खसरा नंबर बदले गए और भूखंड अन्य व्यक्तियों को बेचे गए।

क्रेताओं की सूची:

  1. राजेश कुमार पिता तुलसीराम मिश्रा – 1950 वर्गफुट
  2. प्रमिला तिवारी पत्नी रामपाल तिवारी – 1950 वर्गफुट
  3. विजय प्रकाश मिश्रा पुत्र बालकृष्ण मिश्रा – 2275 वर्गफुट
  4. रीना गुप्ता पत्नी राजेश गुप्ता – 1657.5 वर्गफुट
  5. श्रीमती अलीना फरहत पत्नी काशिफ खान – अज्ञात क्षेत्रफल

4. नियमानुसार उल्लंघन

  • ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए आरक्षित भूमि को अन्य व्यक्तियों को बेच दिया गया।
  • यह टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अनुमोदित अभिन्यास एवं शर्तों का उल्लंघन है।

सरकार से अपेक्षित कार्यवाही

  • भूमि का पुनः अधिग्रहण और पुनर्निर्माण: सरकार को अनधिकृत रूप से बेची गई भूमि को वापस लेना चाहिए।
  • कॉलोनाइजर पर कानूनी कार्यवाही: इस अनियमितता के लिए कॉलोनाइजर पर धोखाधड़ी और अनुबंध उल्लंघन का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
  • समाज के कमजोर वर्गों को उनका अधिकार दिलाना: ईडब्ल्यूएस आवासीय योजना को पुनः लागू किया जाए।

सिवनी: ATM से पैसे निकालने के लिए नहीं मिली पार्किंग की जगह, तो विदेशी पर्यटक ने सड़क पर पार्क कर दिया ट्रक

सिवनी: सिवनी जिला मुख्यालय के कचहरी चौक स्थित HDFC बैंक के सामने एक अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई जब एक विदेशी पर्यटक ने अपने ट्रक को बीच सड़क पर पार्क कर दिया। ट्रैफिक बाधित होने से वहां भीड़ एकत्रित हो गई और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

आज गुरुवार दोपहर को एक विदेशी नागरिक ATM से पैसे निकालने के लिए HDFC बैंक पहुँचा। बैंक के पास कोई पार्किंग व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी, जिसके चलते उसने अपना ट्रक सड़क के बीचोबीच पार्क कर दिया। इस वजह से ट्रैफिक बाधित हो गया और सड़क पर लंबा जाम लग गया।

पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और विदेशी पर्यटक को ट्रक हटाने के लिए कहा, लेकिन भाषा की बाधा के कारण वह समझ नहीं पा रहा था। पुलिसकर्मी लगातार उसे नियमों के बारे में समझाने का प्रयास कर रहे थे, परंतु हिंदी भाषा न समझने के कारण वह कुछ भी समझ नहीं पा रहा था।

स्थानीय नागरिक ने किया मदद का प्रयास

इस दौरान मौके पर मौजूद एहराज खान नामक व्यक्ति ने अंग्रेजी में बातचीत कर विदेशी नागरिक को ट्रैफिक नियमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत में सड़क पर इस प्रकार ट्रक खड़ा करना अवैध है और इसके लिए चालान भी कट सकता है।

विदेशी पर्यटक ने जवाब देते हुए कहा, “यह कैसा ट्रैफिक नियम है? यहाँ बैंक और एटीएम के पास पार्किंग की जगह ही नहीं है, तो हम अपना वाहन कहाँ खड़ा करें?”

करीब 30 मिनट तक बहस के बाद, विदेशी मेहमान ने अपनी गलती मानी और ट्रक लेकर रवाना हो गए।

सिवनी जिले में पार्किंग की समस्या बनी मुसीबत

सिवनी जिले में मुख्य मार्गों पर स्थित बैंक और कार्यालयों के पास उचित पार्किंग व्यवस्था नहीं होना एक बड़ी समस्या बन गई है। आए दिन ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ती जा रही है, जिसका मुख्य कारण पार्किंग की उचित सुविधा का अभाव है।

मुख्य पार्किंग समस्याएँ:

  1. बैंकों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के पास पर्याप्त पार्किंग स्थानों की कमी।
  2. सड़क किनारे अव्यवस्थित रूप से खड़े वाहन, जिससे ट्रैफिक बाधित होता है।
  3. प्रशासन द्वारा पर्याप्त पार्किंग स्थलों का निर्माण न किया जाना।

प्रशासन की जिम्मेदारी और आवश्यक कदम

इस घटना के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि स्थानीय प्रशासन को पार्किंग व्यवस्था को लेकर गंभीर कदम उठाने की जरूरत है।

समाधान के संभावित सुझाव:

  • बैंकों और प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में पार्किंग स्थलों का निर्माण किया जाए।
  • ट्रैफिक पुलिस द्वारा सख्त नियम लागू किए जाएं ताकि गलत स्थानों पर वाहन पार्क न हों।
  • सार्वजनिक पार्किंग स्थलों की संख्या बढ़ाई जाए और लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जाए।
  • बैंकों को अपने ग्राहकों के लिए अलग से पार्किंग की व्यवस्था करनी चाहिए।

सिवनी में ATM और बैंकों के पास पार्किंग की कमी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। प्रशासन को चाहिए कि वह इस समस्या का स्थायी समाधान निकाले ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं न हों। साथ ही, स्थानीय नागरिकों को भी जागरूक रहना चाहिए और अपने वाहनों को सही स्थान पर पार्क करने की आदत डालनी चाहिए। जिला प्रशासन को इस विषय पर ध्यान देना चाहिए और ऐसे बैंक और कार्यालयों को चिन्हित कर पार्किंग के लिए पुख्ता इंतजाम करने चाहिए।

सिवनी: कान्हीवाड़ा थाना प्रभारी ओमेश्वर ठाकरे का ऑडियो वायरल, गौ तस्करी में सहयोग के आरोप!

सिवनी। मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार के नेतृत्व में गौ तस्करी को लेकर सख्ती बरतने की बातें की जाती हैं, लेकिन सिवनी ज़िले में पुलिस प्रशासन पर ही गौ तस्करों को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। ताजा मामला कान्हीवाड़ा (Kanhiwara) थाना प्रभारी ओमेश्वर ठाकरे (Omeshwar Thakre) से जुड़ा है, जिनकी एक कथित ऑडियो क्लिप वायरल (Viral Audio) हो रही है। इस ऑडियो में वह गौ रक्षकों को यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि “इन्वेस्टिगेशन अधिकारी मत बनो” जब उन्होंने संदिग्ध गाय-बैल परिवहन की जानकारी दी।

गौरक्षकों ने दी थी सूचना, उल्टा मिली नसीहत

सूत्रों के अनुसार, कुछ गौरक्षकों ने कान्हीवाड़ा थाना प्रभारी को इलाके में संदिग्ध गौ तस्करी की सूचना दी थी। लेकिन बजाय कार्रवाई करने के, थाना प्रभारी ने सूचना देने वालों को ही “इन्वेस्टिगेशन अधिकारी मत बनो” की नसीहत दे दी। यह ऑडियो वायरल होते ही स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया, और थाना प्रभारी पर गौ तस्करों को संरक्षण देने के आरोप लगने लगे।

पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल

गौरतलब है कि सिवनी ज़िले में पहले भी कई बार गौ तस्करी के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन पुलिस की निष्क्रियता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। प्रदेश में भाजपा की मोहन यादव सरकार रहते हुए भी अगर गौ तस्करों को पुलिस का समर्थन मिल रहा है, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।

मामले की निष्पक्ष जांच की मांग

वायरल ऑडियो के बाद हिंदू संगठनों और गौ रक्षकों ने थाना प्रभारी ओमेश्वर ठाकरे पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अगर प्रशासन सही तरीके से जांच करे, तो कई बड़े नाम इस मामले में सामने आ सकते हैं।

प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

इस पूरे मामले में अभी तक जिले के वरिष्ठ अधिकारियों की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस प्रशासन ऐसे मामलों को गंभीरता से लेगा, या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

क्या होगी कार्रवाई?

अब देखना होगा कि राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन इस मामले पर क्या रुख अपनाते हैं। क्या वायरल ऑडियो की जांच होगी? क्या थाना प्रभारी पर कोई कार्रवाई होगी? या फिर सिवनी में गौ तस्करी के मामले यूं ही जारी रहेंगे?

सिवनी: बरघाट तहसीलदार के निर्देश पर हटाया गया अवैध अतिक्रमण, किन्तु सिवनी कलेक्टर के निर्देशों को किया जा रहा नजरअंदाज

सिवनी जिले के बरघाट तहसील में अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही तेज हो गई है। हाल ही में तहसीलदार के निर्देशानुसार ग्राम घीसी में सिवनी-बालाघाट राजमार्ग के किनारे से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। इस दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में सख्ती से सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया।

हालांकि, दूसरी ओर इसी मार्ग पर कुछ अन्य अतिक्रमणों को हटाने में प्रशासन की निष्क्रियता सवालों के घेरे में आ गई है। स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि प्रशासन केवल कमजोर और गरीब वर्ग के अतिक्रमण हटाने पर जोर दे रहा है, जबकि प्रभावशाली लोगों के अवैध कब्जों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

धारनाकला में अतिक्रमण चिन्हित, लेकिन कार्रवाई अधूरी

यह भी उल्लेखनीय है कि धारनाकला मुख्य मार्ग पर स्थित सरकारी भूमि का सीमांकन जिला कलेक्टर के आदेशानुसार किया गया था। इस दौरान संयुक्त दल द्वारा कई जगहों पर अवैध अतिक्रमण चिन्हित किए गए थे। जनपद पंचायत बरघाट की बहुमूल्य भूमि का भी सीमांकन किया गया था, लेकिन महीनों बीत जाने के बावजूद भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यहाँ क्लिक कर पढ़ें इस मामले की पुरानी खबर: – सिवनी बालाघाट मुख्य मार्ग पर अतिक्रमण: 137 स्थान हुए चिन्हित, सिवनी कलेक्टर के आदेश पर हुआ अमल

गरीबों पर गाज, दबंगों पर नरमी

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन केवल कमजोर और गरीब वर्ग के अतिक्रमण हटाने में रुचि दिखा रहा है, जबकि भूमाफियाओं और दबंगों द्वारा कब्जाई गई भूमि को खाली कराने में ढिलाई बरती जा रही है। धारनाकला में मुख्य मार्ग से सटी जनपद पंचायत की भूमि पर दबंगों ने अवैध निर्माण कर लिए हैं, लेकिन प्रशासन अब तक इस पर कार्रवाई करने में विफल रहा है।

संयुक्त दल द्वारा राजस्व विभाग, एमपीआरडीसी और पंचायत विभाग के समन्वय से किए गए सर्वेक्षण में इन अवैध कब्जों की पुष्टि हुई थी, फिर भी तहसील प्रशासन की ओर से अब तक नोटिस तक जारी नहीं किए गए हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि कार्रवाई केवल कमजोर तबके पर की जा रही है, जबकि रसूखदार लोग बच निकलते हैं।

रोड किनारे अतिक्रमण का जाल – सिवनी कलेक्टर के निर्देशों को नजरअंदाज

धारनाकला समेत आसपास के क्षेत्रों में सैकड़ों अतिक्रमणकारी सरकारी जमीन पर काबिज हैं। जिला कलेक्टर संस्कृति जैन के निर्देशानुसार संयुक्त दल द्वारा मुख्य मार्ग और जनपद पंचायत की भूमि का सीमांकन किया गया था। इस दौरान पाया गया कि बड़ी संख्या में अस्थायी व स्थायी अतिक्रमण सरकारी भूमि पर बने हुए हैं।

  • सरकारी जमीन पर अस्थायी झोपड़ियां
  • पक्के निर्माण और व्यावसायिक प्रतिष्ठान
  • अवैध रूप से बनाई गई दुकानें और गोदाम

इसके बावजूद, महीनों बीत जाने के बाद भी इन अतिक्रमणों को हटाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। स्थानीय लोग प्रशासन की इस ढीली कार्यप्रणाली से बेहद नाराज हैं और बार-बार मांग कर रहे हैं कि सभी अवैध कब्जों पर समान रूप से कार्रवाई हो।

अवैध अतिक्रमण के चलते सड़क हादसों में वृद्धि

सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के चलते मुख्य मार्ग संकरा हो गया है, जिससे आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। अतिक्रमण के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को आवागमन में कठिनाई हो रही है।

दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण:
✅ सड़क किनारे अवैध निर्माण
✅ अवैध दुकानों और ठेलों की भरमार
✅ पैदल चलने के लिए समुचित स्थान का अभाव
✅ ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाएं

स्थानीय प्रशासन को इस समस्या पर तुरंत ध्यान देना चाहिए और सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेज करनी चाहिए।

प्रशासन की निष्क्रियता पर उठ रहे सवाल

अवैध अतिक्रमण हटाने को लेकर प्रशासन की दोहरी नीति पर सवाल उठ रहे हैं। लोग यह जानना चाहते हैं कि कमजोर वर्ग के घर तोड़े जा सकते हैं, लेकिन रसूखदारों के अवैध कब्जों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?

जनता की प्रमुख मांगें:
✔️ सभी अवैध अतिक्रमणों को बिना भेदभाव हटाया जाए।
✔️ गरीब और अमीर के बीच कोई अंतर न किया जाए।
✔️ सड़क किनारे अवैध निर्माणों पर जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए।
✔️ सरकारी भूमि को संरक्षित रखने के लिए सख्त कानून लागू किए जाएं।

स्थानीय प्रशासन यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाता, तो आने वाले दिनों में जनता का आक्रोश बढ़ सकता है और बड़े पैमाने पर आंदोलन होने की संभावना भी बनी रहेगी।

सरकार को चाहिए सख्त कदम उठाए

राजस्व विभाग, पुलिस प्रशासन और नगर पंचायत को मिलकर संयुक्त अभियान चलाना होगा ताकि सभी अवैध अतिक्रमणों को हटाया जा सके। इसके साथ ही, भविष्य में अतिक्रमण न हो, इसके लिए निगरानी प्रणाली को भी मजबूत करना होगा।

समाधान के लिए सुझाव:
✅ सख्त अतिक्रमण विरोधी नीति लागू हो।
✅ दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
✅ सरकारी जमीन पर हो रहे नए अतिक्रमण को रोका जाए।
✅ अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।

यदि प्रशासन और सरकार जल्द से जल्द ठोस कदम नहीं उठाते हैं, तो जनता का भरोसा प्रशासन से उठ सकता है और लोग न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

बच्चों में भगवान का वास है, इन्हें खुश रखना ईश्वर को प्रसन्न रखने के समान : MP CM MOHAN YADAV

भारतीय संस्कृति में ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे संतु निरामयः’ का विचार हर व्यक्ति के हृदय में रचा-बसा है। इसी भावना को साकार करने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘नन्हीं खुशियां’ कार्यक्रम के तहत हर्षिनी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन के बच्चों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने कहा कि बच्चों में भगवान का वास होता है और इन्हें खुश रखना ईश्वर को प्रसन्न रखने के समान है।

नन्हीं खुशियां कार्यक्रम : एक अनुकरणीय पहल

नवदुनिया प्रकाशन समूह के सामाजिक सरोकारों के तहत ‘नन्हीं खुशियां’ कार्यक्रम वर्षों से संचालित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सामाजिक रूप से पिछड़े बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर बच्चों के अनुभवों को जाना, उनकी रुचियों को समझा और उन्हें प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि जो बच्चे विभिन्न कारणों से समाज की मुख्यधारा से दूर हो जाते हैं, उनके लिए सरकार और समाज को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने समाज के उन व्यक्तियों और संस्थाओं की भी सराहना की जो निःस्वार्थ भाव से बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रयासरत हैं।

बच्चों के साथ आत्मीय संवाद और प्रेरक संदेश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बच्चों से स्कूल के अनुभव, पढ़ाई, खेल और उनकी रुचियों के बारे में चर्चा की। उन्होंने बच्चों को जीवन में आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा,

“सफलता का कोई छोटा या बड़ा रास्ता नहीं होता, बल्कि कड़ी मेहनत और ईमानदारी से किए गए प्रयास ही व्यक्ति को मंजिल तक पहुंचाते हैं।”

उन्होंने बच्चों को शिक्षा के महत्व को समझाते हुए कहा कि ज्ञान ही वह साधन है जो व्यक्ति को गरीबी, निराशा और असफलता से निकालकर सफलता के शिखर तक पहुंचा सकता है।

भोपाल भ्रमण का आयोजन : बच्चों के लिए एक यादगार अनुभव

इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री ने हर्षिनी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन के बच्चों को भोपाल भ्रमण के लिए रवाना किया। बच्चों के लिए इस दिन को और भी खास बनाने के लिए कई गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसमें शामिल थे:

  • मध्यप्रदेश विधानसभा का भ्रमण: बच्चों ने विधानसभा भवन का दौरा किया और लोकतंत्र की कार्यप्रणाली को समझा।
  • फाइव-स्टार होटलों का दौरा: बच्चों ने पलाश होटल और ताज होटल का भ्रमण किया और वहां की कार्यप्रणाली को जाना।
  • फिल्म देखने का आयोजन: मनोरंजन के लिए बच्चों को एक प्रेरणादायक फिल्म दिखाई गई।
  • विशेष भोजन व्यवस्था: बच्चों के लिए हाई-टी और दिन के भोजन की विशेष व्यवस्था की गई।

समाज को प्रेरित करने वाला संदेश

मुख्यमंत्री ने समाज के सभी लोगों से अपील की कि वे आगे आकर अभावग्रस्त बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रयास करें। उन्होंने कहा कि समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है जब हर बच्चा शिक्षा, स्वास्थ्य और अवसरों की समानता से परिपूर्ण होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सामाजिक संगठनों और नागरिकों के साथ मिलकर बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।

भेड़ाघाट, पाटन, कटंगी, मझौली, पनागर, सिहोरा और दमोह जिले के तेंदूखेड़ा को मिल रहा जल प्रदाय योजना का लाभ

मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी द्वारा जबलपुर परियोजना इकाई के अतंर्गत 7 नगरीय निकायों में जल प्रदाय योजना का काम पूरा कर लिया गया है। यह कंपनी नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग के अंतर्गत कार्य कर रही है।

एशियन डेवपलमेंट बैंक की सहायता से नर्मदा पेयजल योजना तैयार की गई है। इस योजना को नर्मदा पेयजल योजना भेड़ाघाट के नाम से जाना जा रहा है। इस पेयजल योजना से जिन निकायों को पेयजल उपलब्ध हो रहा है, उनमें भेड़ाघाट, पाटन, कटंगी, मझौली, पनागर, सिहोरा और दमोह जिले का तेंदूखेड़ा शामिल हैं।

जल प्रदाय योजना के लिए नर्मदा नदी के किनारे लम्हेटाघाट में इंटैकवैल स्थापित किया गया है। वहीं जल शोधन के लिए 31 एमएलडी का जल शोधन संयंत्र स्थापित किया गया है। सभी 7 निकायों में जल संग्रहण के लिए कुल 13 उच्च स्तरीय टंकियों का निर्माण किया गया है। हर घर नल से शुद्ध जल पहुँचे, इसके लिए 159 किलोमीटर की मुख्य पाईप लाईन और 328 किलोमीटर की वितरण पाईप लाईन बिछाई गई है।

भेड़ाघाट जल प्रदाय योजना से 7 नगरों में 32 हजार से अधिक घरों को नल कनेक्शन दिए गए हैं। इन नगरों की 1 लाख 62 हजार की आबादी लाभन्वित हो रही है। योजना की विशेष बात यह है कि आगामी 30 वर्षों की जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रख कर योजना डिजाइन की गई है। दस वर्षों के संचालन और संधारण के साथ योजना की लागत लगभग 257 करोड़ रूपये है।

पहले इन निकायों में जल प्रदाय की कोई स्थाई व्यवस्था नहीं थी। महिला हो या बच्चे पानी लेने के लिए घर से दूर जाकर कठिन कार्य करते थे। पूर्व में इन नगरों में हैंडपंप के आस-पास लंबी कतारें होती थीं और जनसामान्य तकलीफों का सामना करता था।

मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी की कोशिशों से शोधन उपरांत शुद्ध पानी घर घर पहुँचाने की व्यवस्था की जा रही है। शोधित पानी होने के कारण जल से होने वाली बीमारियों से भी जनसामान्य को छुटकारा मिला है।

E Anugya MP: एमपी के किसानों के लिए खुशखबरी, ई-अनुज्ञा प्रणाली लागू अब आसानी से होगा कृषकों को भुगतान

eanugya.mp.gov.in : मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों की उपज के भुगतान को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए ई-अनुज्ञा प्रणाली (E Anugya MP) को लागू किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार कृषकों के कल्याण एवं समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयासरत है। इस नई प्रणाली के तहत अब किसानों को भुगतान प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

मुख्यमंत्री मोहन यादव (MP CM MOHAN YADAV) के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों के कल्याण एवं समस्याओं के निराकरण के लिये प्रतिबद्ध है। किसानों की उपज का भुगतान आसान बनाने के लिये प्रदेश में ई-अनुज्ञा प्रणाली लागू की गई है। कृषकों को इस प्रणाली से जोड़कर प्रत्येक भुगतान की एंट्री ई-अनुज्ञा पोर्टल (MP E Anugya Portal) पर हो रही है। व्यापारियों द्वारा इस प्रणाली का इस्तेमाल कर क्रय की गई कृषि उपज के परिवहन के लिये गेट पास बनाये जा रहे हैं। रिकॉर्ड संधारण में इस प्रणाली से बहुत लाभ हुआ है।

ई-मंडी योजना, ई-अनुज्ञा प्रणाली का विस्तारित रूप है। मंडियों में इस योजना के लागू होने से मैनुअली संधारित रिकॉर्ड धीर-धीरे समाप्त हो रहा है। ई-मंडी योजना मंडी प्रांगण के अंदर कृषकों को प्रवेश से लेकर नीलामी, तौल और भुगतान की प्रक्रिया को इलेक्ट्रॉनिकली कैप्चर करने की प्रक्रिया है। योजना को स्कॉच आर्डर ऑफ मेरिट वर्ष 2023 प्रदान किया गया है।

ई-अनुज्ञा प्रणाली क्या है? eanugya.mp.gov.in

ई-अनुज्ञा प्रणाली एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से किसानों की उपज की बिक्री, भुगतान, परिवहन, और रिकॉर्ड प्रबंधन को पारदर्शी और तेज बनाया गया है। इस प्रणाली के तहत:

  • प्रत्येक किसान का डेटा ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज किया जाता है।
  • व्यापारियों को खरीद के बाद गेट पास प्राप्त करने की सुविधा मिलती है।
  • भुगतान की प्रक्रिया को ट्रैक करने और पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल एंट्री की जाती है।

ई-अनुज्ञा प्रणाली के प्रमुख लाभ – E Anugya MP GOV

  1. भुगतान में तेजी और पारदर्शिता: किसानों को उनकी फसल का भुगतान समय पर और सीधे उनके बैंक खाते में प्राप्त होता है।
  2. भ्रष्टाचार पर लगाम: यह प्रणाली किसानों और व्यापारियों के बीच किसी भी प्रकार की धांधली को रोकने में सहायक होगी।
  3. डिजिटल रिकॉर्ड संधारण: सभी लेन-देन और परमिट ऑनलाइन दर्ज किए जाते हैं, जिससे रिकॉर्ड का दुरुपयोग नहीं हो सकता।
  4. किसानों को बेहतर मूल्य: किसान अपनी उपज को मंडी के डिजिटल पोर्टल पर अधिकतम मूल्य पर बेच सकते हैं।
  5. गेट पास प्रणाली: व्यापारियों को फसल परिवहन के लिए इलेक्ट्रॉनिक गेट पास जारी किया जाता है, जिससे अवैध व्यापार पर अंकुश लगता है।

कैसे काम करती है MP E Anugya Pranali?

  1. किसान अपना पंजीकरण ई-अनुज्ञा पोर्टल पर करते हैं।
  2. फसल बिक्री के लिए व्यापारी ऑनलाइन निविदा डालते हैं।
  3. सौदा तय होने पर ई-अनुज्ञा पोर्टल पर भुगतान और फसल उठाव की प्रक्रिया शुरू होती है।
  4. व्यापारी को गेट पास जारी किया जाता है, जिससे फसल को राज्य या बाहरी बाजारों में ले जाया जाता है।
  5. किसानों को उनके बैंक खाते में भुगतान सीधा ट्रांसफर किया जाता है।

ई-मंडी योजना: ई-अनुज्ञा प्रणाली का उन्नत रूप – E Anugya MP

ई-मंडी योजना ई-अनुज्ञा प्रणाली का विस्तारित रूप है, जो मंडियों में सभी गतिविधियों को डिजिटली नियंत्रित करती है। इसके तहत:

  • मंडी में किसान के प्रवेश से लेकर नीलामी, तौल, और भुगतान तक की प्रक्रिया को डिजिटल किया गया है।
  • मैनुअल रिकॉर्ड संधारण समाप्त हो रहा है, जिससे धोखाधड़ी और गड़बड़ियों पर नियंत्रण हुआ है।
  • इस योजना को वर्ष 2023 में स्कॉच ऑर्डर ऑफ मेरिट पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

किसानों और व्यापारियों के लिए लाभ

किसानों के लिए:

✔ तेजी से भुगतान की सुविधा ✔ उचित मूल्य पर फसल बेचने का अवसर ✔ डिजिटल रिकॉर्ड और पारदर्शिता ✔ सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ

व्यापारियों के लिए:

✔ गेट पास की तेज प्रक्रिया ✔ भ्रष्टाचार और अवैध खरीद-फरोख्त में कमी ✔ डिजिटल लेन-देन से पारदर्शिता ✔ व्यवसाय करने में आसानी

कैसे करें ई-अनुज्ञा प्रणाली में पंजीकरण?

किसानों और व्यापारियों को इस प्रणाली से जुड़ने के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन करना होगा:

  1. आधिकारिक ई-अनुज्ञा पोर्टल पर जाएं।
  2. “नया पंजीकरण” विकल्प पर क्लिक करें।
  3. अपने आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण, और फसल विवरण भरें।
  4. OTP के माध्यम से सत्यापन करें।
  5. पंजीकरण पूरा होने के बाद, लॉगिन करके फसल की बिक्री शुरू करें।