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नितिन शुक्ला की सिवनी कांग्रेस से तकरार: जीतू पटवारी पर तीखी टिप्पणी, 6 वर्ष का निष्कासन, दिल्ली के जैक से 2 माह में अध्यक्ष पद पर वापसी!

सिवनी। कांग्रेस पार्टी की आंतरिक राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में है। असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस के सिवनी जिलाध्यक्ष नितिन शुक्ला को पार्टी ने वरिष्ठ नेता जीतू पटवारी पर अनर्गल टिप्पणी करने के आरोप में 6 वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया था। लेकिन यह निष्कासन मात्र 2 माह में ही पलट दिया गया और नितिन शुक्ला ने फिर से अध्यक्ष पद पर वापसी कर ली।

असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस के सिवनी जिला अध्यक्ष नितिन शुक्ला जिनका 6 साल का निष्कासन केवल 2 महीने में पलट दिया गया था। यह घटनाक्रम कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी राजनीति, गुटबाजी और नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

जीतू पटवारी पर हमलावर रहे नितिन शुक्ला

नितिन शुक्ला, जो कि असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस के सिवनी जिले के अध्यक्ष पद पर कार्यरत थे, उन्हें पार्टी से निष्कासित करने का निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जीतू पटवारी पर सोशल मीडिया पर लगातार तीखी टिप्पणियां की थीं।

यह आरोप काफी गंभीर था और इसे पार्टी विरोधी गतिविधि के रूप में देखा गया। इसके परिणामस्वरूप मप्र कांग्रेस कमेटी ने 6 वर्षों के लिए निष्कासन का आदेश जारी कर दिया। यह निर्णय जिले की राजनीति में एक भूचाल की तरह आया।

दिल्ली से ‘जैक’ लगाकर की धमाकेदार वापसी!

लेकिन इससे भी बड़ा झटका तब लगा जब निष्कासन के सिर्फ 2 माह बाद, नितिन शुक्ला ने फिर से अपने पुराने पद पर वापसी कर ली। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने दिल्ली में उच्च स्तरीय नेताओं से मुलाकात कर संगठन पर दबाव बनाया और अपने लिए वापसी का रास्ता साफ किया

उनकी यह वापसी न केवल तेज़ थी, बल्कि उसने जिले में सक्रिय नेताओं प्रसन्न मालू और राजकुमार खुराना की रणनीतियों को भी ध्वस्त कर दिया। यह घटना कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच गहरी असंतोष की लहर लेकर आई है। 2 माह में ही निष्कासन के बाद वापसी को जिले के कई कांग्रेस कार्यकर्ता नेतृत्व के मुंह पर करारा तमाचा मान रहे हैं।

क्या पार्टी की कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है?

यह सवाल अब तेजी से उठ रहे हैं कि अगर पार्टी ने इतनी बड़ी सजा दी थी, तो उसे इतने कम समय में क्यों पलटा गया?

  • क्या पार्टी के निर्णय अब केवल प्रदर्शन भर रह गए हैं?
  • क्या कोई भी नेता, ऊपरी संपर्कों के बल पर कानूनी और संगठनात्मक अनुशासन को ताक पर रख सकता है?
  • क्या पार्टी अब स्थानीय कार्यकर्ताओं की भावनाओं को दरकिनार कर रही है?

29 और 30 मई को जीतू पटवारी का सिवनी दौरा, उठेंगी बड़ी राजनीतिक लहरें

सिवनी में अब सभी की निगाहें 29 और 30 मई पर टिकी हैं, जब जीतू पटवारी जिले का दौरा करेंगे। माना जा रहा है कि वे यहां कई कार्यक्रमों में भाग लेंगे। ऐसे में ये देखना बेहद अहम होगा कि:

  • क्या वे नितिन शुक्ला की वापसी पर कोई खुला बयान देंगे?
  • या कांग्रेस पार्टी एक बार फिर चुप्पी साधे रहेगी?
  • क्या यह दौर गुटबाजी की नई शुरुआत करेगा?

कांग्रेस की स्थानीय राजनीति में अब उबाल

सिवनी कांग्रेस अब दो स्पष्ट गुटों में बंटी दिख रही है। एक तरफ हैं वे नेता जो मानते हैं कि नितिन शुक्ला की वापसी ने संगठन की गरिमा को ठेस पहुंचाई है, वहीं दूसरी तरफ उनके समर्थकों का कहना है कि शुक्ला की वापसी से यह साबित होता है कि वे पार्टी के लिए अब भी अहम चेहरा हैं।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इस फैसले पर मौन नाराजगी भी जताई है, लेकिन दिल्ली से आए आदेश के आगे किसी की हिम्मत नहीं हो रही कि वो खुलकर विरोध करे।

क्या कांग्रेस नेतृत्व खुद के फैसलों पर कायम नहीं रह पा रहा?

यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि कांग्रेस पार्टी के निर्णय अब टिकाऊ नहीं रहे। स्थानीय नेतृत्व का कोई फैसला दिल्ली की राजनीति में चंद फोन कॉल्स और राजनीतिक जोड़तोड़ से उलट दिया जाता है।

इससे कार्यकर्ताओं के मन में यह संदेश जा रहा है कि:

  • पार्टी में निष्ठा और अनुशासन से ज़्यादा जुड़ाव और संपर्क मायने रखते हैं।
  • किसी भी नेता का राजनीतिक प्रभाव, संगठनात्मक नियमों पर भारी पड़ सकता है।
  • पार्टी में अब आंतरिक अनुशासन की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं

नितिन शुक्ला की वापसी – जीत या संगठन की हार?

नितिन शुक्ला की वापसी को उनके समर्थक एक बड़ी राजनीतिक जीत मानते हैं, लेकिन वस्तुस्थिति यह है कि यह पूरी घटना कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी, रणनीतिक असफलता और नेतृत्व की कमजोरी को उजागर करती है।

एक निष्कासित नेता की इतनी जल्दी वापसी से अन्य नेताओं के लिए भी यह संदेश जा रहा है कि वे भी चाहे कुछ भी कर लें, अगर दिल्ली में पकड़ मजबूत हो तो सब माफ है।

नितिन शुक्ला की दोबारा वापसी न सिर्फ एक व्यक्तिगत जीत है, बल्कि यह कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी, अस्थिर निर्णय प्रक्रिया और नेतृत्व की कमजोरी को भी उजागर करती है। अब सबकी निगाहें 30 मई पर टिकी हैं — जब जीतू पटवारी सिवनी पहुंचेंगे। क्या वे कोई बड़ा बयान देंगे? या पार्टी फिर चुप्पी साधे बैठेगी?

सिवनी: बरघाट में शासकीय जमीन की आड़ में भूमाफिया का गहरा षड्यंत्र, प्रशासनिक उदासीनता बनी बड़ा कारण

Seoni News: सिवनी जिले के बरघाट विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम धारनाकला में शासकीय जमीन का सुनियोजित दोहन किया जा रहा है। यहां एक प्रभावशाली भूमाफिया गिरोह द्वारा शासकीय जमीन से सटी खेतिहर निजी जमीन की खरीद-फरोख्त कर, राजस्व विभाग को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। यह न केवल प्रशासनिक चूक का जीता-जागता उदाहरण है, बल्कि क्षेत्रीय किसानों के लिए भी भविष्य की बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।

भूमाफिया का “लंबा खेल” और राजस्व की चपत

ग्राम धारनाकला में भूमाफिया ने चार करोड़ रुपये प्रति एकड़ की दर से जमीन खरीदने का सौदा किया है। ये सौदे ऐसी निजी जमीनों के हैं जो शासकीय भूमि से सटी हुई हैं। भूमाफिया इन जमीनों को खरीदकर ऐसा भ्रम फैला रहे हैं मानो ये पूरी तरह वैध हों, जबकि सच्चाई यह है कि इन जमीनों की सीमा और स्वामित्व को लेकर अभी तक स्पष्ट सीमांकन नहीं हुआ है।

यही नहीं, इस प्रक्रिया में स्टांप ड्यूटी की चोरी भी बड़े स्तर पर की जा रही है, जिससे सरकार को लाखों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है। राजस्व विभाग की लापरवाही और स्थानीय प्रशासन की अनदेखी ने भूमाफिया को इस काले खेल में खुली छूट दे दी है।

किसानों के लिए बढ़ती जमीन की कीमतें बनी सिरदर्द

धारनाकला क्षेत्र में भूमाफिया द्वारा शासकीय जमीन से सटी भूमि को ऊंचे दामों पर खरीदने से पूरे क्षेत्र की भूमि दरों में असामान्य वृद्धि देखी जा रही है। अब जब किसी किसान को आवश्यकतानुसार भूमि खरीदनी होती है, तो जमीन के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय किसान भूमिहीनता की कगार पर पहुंच गए हैं।

ग्राम पंचायत घीसी में भी भूमाफिया का गहरा जाल

धारनाकला की ही तरह ग्राम पंचायत घीसी में भी शासकीय जमीन को लेकर भूमाफिया ने सक्रियता बढ़ा दी है। यहां शासकीय भूमि से सटी खेतिहर जमीन को करोड़ों में बेचा जा रहा है, और फिर उस जमीन के आसपास की सरकारी भूमि को निजी दिखाकर बिक्री का प्रयास हो रहा है।

हालांकि ग्राम पंचायत घीसी की सरपंच की सजगता से इस खेल पर कुछ हद तक नकेल कसी गई है, और बरघाट तहसीलदार के आदेश पर सीमांकन की प्रक्रिया शुरू की गई है। लेकिन यह भी सामने आ रहा है कि भूमाफिया सीमांकन को रोकने के लिए दबाव tactics अपना रहे हैं ताकि शासकीय जमीन को निजी रूप में उपयोग किया जा सके।

शासकीय जमीन पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स निर्माण की योजना

ग्राम पंचायत घीसी की सरपंच ने शासकीय भूमि के सीमांकन के बाद, वहां शॉपिंग कॉम्प्लेक्स निर्माण का प्रस्ताव रखा है। यह निर्णय न केवल गांव के विकास में सहायक होगा बल्कि भूमाफिया की साजिशों पर भी पानी फेरने वाला कदम साबित हो सकता है।

चूंकि यह जमीन भी सिवनी-बालाघाट मुख्य मार्ग से सटी हुई है, इसका व्यावसायिक उपयोग किए जाने की योजना पूरी तरह से जनहित में है, लेकिन भूमाफिया लगातार इसमें विघ्न डालने के प्रयास कर रहे हैं।

प्रशासनिक ढील बनी अवैध कब्जों की जननी

ध्यान देने योग्य बात यह है कि यदि प्रशासन समय रहते सख्त कार्रवाई करता, तो आज शासकीय जमीन की यह दुर्दशा न होती। सीमांकन, रजिस्ट्री पर निगरानी, भूमिगत सौदों की जांच जैसे उपायों के अभाव में ही भूमाफिया अपने मकसद में सफल हो रहे हैं।

पंचायत प्रतिनिधियों, राजस्व अधिकारियों, स्थानीय पुलिस व जनप्रतिनिधियों को इस ओर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। शासन की संपत्ति का निजी उपयोग न केवल अपराध है बल्कि यह सामाजिक व आर्थिक असमानता को भी जन्म देता है।

क्या कहता है कानून?

भारत में शासकीय जमीन का निजी उपयोग पूरी तरह से अवैध है। भूमि सुधार अधिनियम, राजस्व संहिता और भू-अर्जन अधिनियम के तहत ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। फिर भी स्थानीय प्रशासन की ढिलाई, इन कानूनों को कागज़ों तक सीमित कर रही है।

आम जनता और मीडिया की भूमिका

इस पूरे मामले में स्थानीय जनता और मीडिया की सक्रिय भूमिका ही इस भूमाफिया जाल को उजागर कर सकती है। RTI (सूचना का अधिकार) का प्रयोग कर भूमि की वास्तविक स्थिति जानना, प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत दर्ज कराना और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाना—ये कुछ ऐसे उपाय हैं जिनसे हम शासकीय जमीन को भूमाफियाओं से बचा सकते हैं।

धारनाकला और घीसी पंचायत के उदाहरण यह दिखाते हैं कि यदि प्रशासनिक निगरानी ढीली पड़े, तो शासकीय जमीन का व्यवस्थित दोहन कैसे किया जाता है। अब समय आ गया है कि शासन-प्रशासन मिलकर, स्थानीय स्तर पर निगरानी तंत्र को मजबूत करें और शासकीय संपत्ति की रक्षा के लिए सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें।

शासकीय जमीनें जनता की धरोहर हैं, और इनका उपयोग सार्वजनिक कल्याण हेतु होना चाहिए, न कि भूमाफियाओं की काली कमाई के लिए।

Earthquake In Manipur: भूकंप के तीन झटकों से दहला मणिपुर, किसी के हताहत होने की खबर नहीं

मणिपुर भूकंप: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार, बुधवार को मणिपुर में तीन कम तीव्रता वाले भूकंप आए। हालांकि, झटकों के बाद किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है।

पूर्वोत्तर राज्य में आए तीन भूकंपों में से दो चूड़ाचांदपुर में और एक नोनी में महसूस किया गया। पहले दो झटके बुधवार को तड़के महसूस किए गए, जबकि तीसरा सुबह 10 बजे के आसपास महसूस किया गया।

एनसीएस ने एक्स पर पोस्ट की एक श्रृंखला में भूकंप के बारे में जानकारी दी। “एम का ईक्यू: 3.9, दिनांक: 28/05/2025 10:23:55 IST, अक्षांश: 24.55 एन, देशांतर: 93.70 ई, गहराई: 36 किमी, स्थान: चुराचांदपुर, मणिपुर,” एनसीएस ने कहा।

इससे पहले, एनसीएस ने दो पोस्ट में एक घंटे के भीतर आए पहले दो भूकंपों के बारे में जानकारी दी थी। एनसीएस ने एक पोस्ट में कहा, “ईक्यू ऑफ एम: 5.2, दिनांक: 28/05/2025 01:54:29 IST, अक्षांश: 24.46 एन, देशांतर: 93.70 ई, गहराई: 40 किलोमीटर, स्थान: चुराचांदपुर, मणिपुर।”

एजेंसी ने दूसरे में कहा, “EQ of M: 2.5, On: 28/05/2025 02:26:10 IST, अक्षांश: 24.53 N, देशांतर: 93.50 E, गहराई: 25 किमी, स्थान: नोनी, मणिपुर।” इससे पहले मंगलवार को, नेशनल सेंटर ऑफ़ सीस्मोलॉजी (NCS) ने कहा कि रिक्टर स्केल पर 4.2 तीव्रता का भूकंप मंगलवार को पाकिस्तान में आया। 

डूंडा सिवनी: सड़क दुर्घटना में युवक की दर्दनाक मौत, एक गंभीर रूप से घायल

सिवनी, 27 मई 2025 – डूंडा सिवनी थाना क्षेत्र अंतर्गत मंडला रोड बरेलीपार पुलिया के पास आज शाम करीब 5:00 बजे एक मोटरसाइकिल को अज्ञात वाहन ने जोरदार टक्कर मार दी।

इस हादसे में मोटरसाइकिल चालक धर्मेंद्र परते (उम्र 19 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पीछे बैठे कुंवरलाल उइके (उम्र 65 वर्ष) को गंभीर हालत में जिला चिकित्सालय सिवनी में भर्ती कराया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक धर्मेंद्र परते, पिता केशलाल परते, निवासी मांधवपुर थाना मंडला जिला मंडला का रहने वाला था। वही घायल कुंवर लाल उइके, पिता जेठूलाल उइके, निवासी मनजी टोला मुक्की, बैहर, जिला बालाघाट का रहने वाला है।

दोनो व्यक्ति बैतूल जिले से एक शादी समारोह में शामिल होकर मोटरसाइकिल से अपने घर लौट रहे थे, तभी रास्ते में बरेलीपार पुलिया के पास यह दर्दनाक हादसा हो गया।

टक्कर इतनी भीषण थी कि धर्मेंद्र परते को मौके पर ही गंभीर चोटें आईं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कुंवर लाल उइके गंभीर रूप से घायल हो गए जिन्हें तुरंत जिला अस्पताल सिवनी लाया गया।

हादसे के बाद अज्ञात वाहन मौके से फरार हो गया। पुलिस द्वारा अज्ञात वाहन की तलाश की जा रही है और मामला पंजीबद्ध कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

सुजीत गोदरे हुए हिंदू सेवा परिषद में शामिल, मिला जिला महामंत्री का दायित्व

सिवनी: बीते शुक्रवारी को श्रीराम मंदिर परिसर में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में अखिल भारतीय वाल्मीकि महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष सुजीत गोदरे ने हिंदू सेवा परिषद की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर उन्हें संगठन का जिला महामंत्री नियुक्त किया गया।

यह बैठक शाम 7:00 बजे से शुरू हुई, जिसमें हिंदू सेवा परिषद के कई प्रमुख पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे। सभी ने सुजीत गोदरे का संगठन में स्वागत करते हुए उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।

बैठक की अध्यक्षता कर रहे प्रदेश सह सचिव धनराज माना ठाकुर जी ने कहा कि “सुजीत गोदरे जी का संगठन में आना न सिर्फ संगठन को मज़बूती देगा, बल्कि समाज सेवा की दिशा में भी यह एक अहम कदम होगा।”

इस अवसर पर संगठन के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी भी उपस्थित रहे:

  • जिला अध्यक्ष शुभम मेहरा
  • जिला उपाध्यक्ष अंकित लाहौरी
  • जिला कोषाध्यक्ष आशीष अग्रवाल
  • जिला महासचिव पिंकेश विश्वकर्मा
  • जिला गौ रक्षा प्रमुख गुरु श्रीवाश
  • नगर उपाध्यक्ष अभिषेक (राजा) साहू
  • नगर मंत्री अंश लाला
  • नगर महासचिव क्रिश करोसिया
  • जिला गौ सेवा सह प्रमुख दीपक रजक
  • जिला मंदिर प्रमुख राहुल ताम्रकार
  • भैरोगंज प्रखण्ड अध्यक्ष मयंक चौहान
  • गौ रक्षक सह प्रमुख सुमित
  • नगर सह मंत्री इशान्त ठाकुर
  • सक्रिय कार्यकर्ता अंशुल एवं अन्य पदाधिकारीगण

बैठक के दौरान सभी सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि संगठन को और अधिक सक्रिय, मजबूत और समाजहितकारी बनाने के लिए सभी मिलकर कार्य करेंगे।

हिंदू सेवा परिषद सामाजिक, धार्मिक और राष्ट्रसेवा के कार्यों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, और अब सुजीत गोदरे जैसे अनुभवी व्यक्ति का जुड़ना निश्चित रूप से संगठन को और ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

सिवनी-बालाघाट मुख्य मार्ग पर अतिक्रमण बना हादसों का कारण, होटल व्यवसायी की टूटी पैर की हड्डी

सिवनी-बालाघाट मुख्य मार्ग पर अवैध अतिक्रमण की समस्या अब केवल ट्रैफिक जाम तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह जानलेवा हादसों का कारण बनती जा रही है। हाल ही में घटी दर्दनाक दुर्घटना ने इस सच्चाई को फिर से उजागर कर दिया है। होटल व्यवसायी संतोष सोनी, जो बालाघाट में अपना होटल चलाते हैं, अतिक्रमण के कारण हुई दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। उनके पैर की हड्डी बुरी तरह टूट गई और सिर पर भी गहरी चोट आई है। वर्तमान में वे बालाघाट के एक निजी अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं

दुर्घटना कैसे घटी – जानिए पूरा घटनाक्रम

जानकारी के अनुसार, संतोष सोनी बस स्टैंड पर स्थित चौधरी किराना दुकान से अपने होटल के लिए सामग्री खरीदने गए थे। जब वे वापस लौट रहे थे, तभी एक तेज रफ्तार बाइक सवार ने उन्हें टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि संतोष सोनी जमीन पर गिर पड़े और उनके पैर की हड्डी टूट गई, वहीं सिर में भी गहरी चोट आई। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें उठाया और परिजनों ने तत्काल अस्पताल पहुँचाकर इलाज शुरू करवाया

डॉक्टरों ने पैर की सर्जरी कर उसमें रॉड डाली है। वर्तमान में उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।

बस स्टैंड क्षेत्र: अतिक्रमण का अड्डा बन चुका है

बस स्टैंड से कैला माता चौक तक फैला अतिक्रमण आज स्थानीय प्रशासन की लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। इस क्षेत्र में फुटपाथ, सड़कों के किनारे, शासकीय भूमि तक को दुकानदारों और ठेले वालों ने कब्जा कर रखा है। रोज़ाना यहां हजारों वाहन और पैदल यात्री गुजरते हैं, जिससे ट्रैफिक अव्यवस्थित हो गया है और दुर्घटनाएं आम हो गई हैं।

पहले भी हो चुकी हैं कई गंभीर घटनाएं

यह कोई पहली घटना नहीं है, इससे पहले भी इसी मार्ग पर कई गंभीर सड़क हादसे हो चुके हैं। लेकिन प्रशासन की निष्क्रियता और राजनीतिक संरक्षण के चलते अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अधूरी ही रह जाती है। MPRDC और तहसील प्रशासन द्वारा सीमांकन तो जरूर किया गया, लेकिन वास्तविक कार्रवाई नदारद है

जनपद पंचायत की कीमती जमीन भी अतिक्रमण की चपेट में

सिवनी-बालाघाट मार्ग से सटी जनपद पंचायत बरघाट की बेशकीमती जमीन भी अब भू-माफियाओं और ठेलेवालों के कब्जे में आ चुकी है। कई बार इस भूमि का सीमांकन और मुआयना किया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रशासन ने केवल कागज़ी औपचारिकताएं पूरी कीं, लेकिन जमीन को अतिक्रमण से मुक्त नहीं कराया गया

जनता के अधूरे सपने: नहीं बन सका सुगम कॉम्प्लेक्स

उक्त शासकीय भूमि पर सुगम कॉम्प्लेक्स के निर्माण की योजना बनाई गई थी। इससे स्थानीय जनता को कई सुविधाएं मिलती, लेकिन जनपद पंचायत की निष्क्रियता ने इस सपने को अधूरा छोड़ दिया। आवश्यक फाइलें, सीमांकन, प्रस्ताव सब कुछ तैयार था, पर आज तक एक ईंट भी नहीं रखी गई

गंदगी का अम्बार: स्वच्छ भारत मिशन की उड़ रही धज्जियां

जहां एक ओर सरकार स्वच्छ भारत मिशन पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर जनपद की शासकीय भूमि पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। यहाँ स्थित पानी टंकी, सामुदायिक भवन, और सुलभ शौचालय चारों ओर से गंदगी और अतिक्रमण से घिरे हुए हैं। हालात यह हैं कि ग्राम पंचायत धारनाकला, जिसकी सीमा में यह भूमि आती है, भी इस ओर ध्यान नहीं दे रही

प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

जिला कलेक्टर, तहसीलदार, और जनपद अध्यक्ष सभी को इस स्थिति की जानकारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। क्या प्रशासन किसी और बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है? आम जनता और व्यापारी वर्ग बार-बार शिकायतें कर चुके हैं, लेकिन सरकारी मशीनरी बेखबर बनी हुई है

क्या कोई जिम्मेदार जागेगा?

होटल व्यवसायी संतोष सोनी की हालत ने इस पूरे मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। यह घटना केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि समाज की चुप्पी और प्रशासन की निष्क्रियता का नतीजा है। अगर अब भी समय रहते अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में और भी बड़ी दुर्घटनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता

सिवनी-बालाघाट मार्ग केवल एक सड़क नहीं, बल्कि सैकड़ों लोगों की आजीविका और जान की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। यदि प्रशासन, राजस्व विभाग और जनपद पंचायत मिलकर काम करें, तो यह क्षेत्र न केवल दुर्घटना मुक्त बन सकता है बल्कि सुव्यवस्थित और स्वच्छ क्षेत्र के रूप में विकसित हो सकता है।

आवश्यक है कि हम सभी नागरिक मिलकर प्रशासन पर दबाव बनाएं और इस अतिक्रमण की समस्या का स्थायी समाधान निकालें।

सिवनी के बरघाट में शासकीय कमरों का हो रहा था दुरुपयोग, SDM के आदेश पर पटवारी ने बनाया पंचनामा

ग्राम पंचायत धारनाकला में खसरा नंबर 949/1 में बने शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के शासकीय कमरों का दुरुपयोग सामने आने के बाद अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (एसडीएम बरघाट) के आदेश पर पटवारी हल्का नंबर 39 द्वारा मौके पर जाकर जांच कर पंचनामा तैयार किया गया है। यह कार्रवाई ग्राम पंचायत के सरपंच द्वारा की गई शिकायत के आधार पर की गई, जिसमें यह आरोप था कि इन शासकीय कमरों का उपयोग व्यवसायिक गतिविधियों की बजाय निजी भंडारण कार्यों के लिए किया जा रहा है।

जांच में कमरों में मिला सीमेंट: शासकीय उपयोग की जगह बना निजी गोदाम

जांच के दौरान यह पाया गया कि जिन कमरों को दुकानों के संचालन के लिए वर्ष 2018-19 में किराये पर दिया गया था, उनमें दुकानें नहीं खोली गईं, बल्कि उनमें सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री को संग्रहित किया जा रहा है। पटवारी की रिपोर्ट के अनुसार, तीन कमरों में सीमेंट भरा हुआ मिला, जबकि हाई स्कूल की बाउंड्री से सटे क्षेत्र में सीमेंट शीट्स व अन्य सामान भी पाया गया

एसडीएम के निर्देशानुसार, सरपंच, सचिव एवं पंचों की उपस्थिति में पंचनामा तैयार कर संबंधित व्यक्तियों को तीन दिवस के भीतर कमरे खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि निर्धारित समयावधि में कमरे खाली नहीं किए गए, तो पंचायत द्वारा ताला बंदी की कार्रवाई की जाएगी।

किन व्यक्तियों को आवंटित थे कमरे?

वर्ष 2018-19 में ग्राम पंचायत धारनाकला ने जिन व्यक्तियों को ये दुकानें संचालन हेतु किराये पर दी थीं, उनके नाम इस प्रकार हैं:

  • दुलम सिंह टेकाम
  • कुशमन मेश्राम
  • खेलेंद्र राहंगडाले
  • गीता बोपचे

हालांकि, इन व्यक्तियों ने न तो अपनी दुकानें प्रारंभ कीं और न ही कमरे वापस पंचायत को लौटाए। इसके विपरीत, इन कमरों को अन्य व्यक्तियों को उपयोग के लिए दे दिया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि शासकीय संपत्ति का निजी लाभ के लिए उपयोग किया गया।

पांच वर्षों से किराया जमा नहीं: पंचायत को आर्थिक हानि

यह अत्यंत चिंताजनक है कि गत पांच वर्षों से इन कमरों का किराया पंचायत को प्राप्त नहीं हुआ है। इसका मतलब है कि पंचायत को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा लाखों रुपये की लागत से निर्मित शासकीय संपत्ति का गलत उपयोग होता रहा है, जो कि प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।

पंचायत द्वारा आवंटित शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का उद्देश्य था कि स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले, परंतु इसका गोदाम के रूप में उपयोग गंभीर अनुशासनहीनता और भ्रष्ट प्रशासनिक रवैये की ओर इशारा करता है।

शासकीय यंत्रणा की निष्क्रियता और जिम्मेदारी

यह पूरा मामला शासकीय तंत्र की निष्क्रियता का प्रतीक है। पटवारी की जांच में यह तथ्य स्पष्ट हो गया कि कमरों का वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं हो सका, और स्थानीय प्रशासन द्वारा नियमित निगरानी नहीं की गईयदि समय-समय पर निरीक्षण होता, तो शायद यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

अब जबकि एसडीएम के आदेश पर जांच और पंचनामा हो चुका है, उम्मीद की जा रही है कि संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी और शासकीय परिसंपत्तियों की रक्षा के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे

यात्री प्रतीक्षालय का भी हो रहा है दुरुपयोग

पंचनामा के दौरान यह भी उल्लेखित हुआ कि कॉम्प्लेक्स परिसर में निर्मित यात्री प्रतीक्षालय का भी लंबे समय से कोई उपयोग नहीं किया जा रहा है। वहां न तो यात्रियों के लिए कोई सुविधा है और न ही स्वच्छता की व्यवस्था। यह प्रतीक्षालय अब अनाधिकृत रूप से उपयोग में लिया जा रहा है, जो कि शासकीय सम्पत्ति का सीधा दुरुपयोग है।

पंचायत द्वारा आगे की कार्रवाई की तैयारी

ग्राम पंचायत धारनाकला अब इस पूरे प्रकरण में सख्त कार्रवाई की दिशा में कदम उठा रही है। कमरों को खाली कराने, किराया वसूलने, और अनाधिकृत उपयोग करने वालों के विरुद्ध नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। साथ ही, यह भी कहा गया है कि यदि निर्देशों का पालन नहीं हुआ, तो पंचायत ताला बंदी कर सकती है और विधिक कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल

इस पूरे प्रकरण ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, विशेष रूप से पूर्व के सरपंचों और सचिवों की भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं। यदि पंचायत द्वारा दिए गए कमरों की निगरानी समय पर होती और किराया वसूली की प्रक्रिया ठीक से चलती, तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। इससे यह स्पष्ट होता है कि पूर्व पंचायती कार्यकाल में गंभीर लापरवाही बरती गई।

भविष्य की नीति: पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक

इस प्रकरण से यह सीख मिलती है कि शासकीय संपत्ति के उपयोग और किराये पर दिए जाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं निगरानी अत्यंत आवश्यक है। पंचायतों को चाहिए कि वे सभी आवंटन सार्वजनिक सूचना बोर्ड पर प्रदर्शित करें, किरायेदारों से वार्षिक अनुबंध पर हस्ताक्षर कराएं तथा समय-समय पर निरीक्षण दलों द्वारा जांच कराएं

यह भी आवश्यक है कि भविष्य में शासकीय परिसंपत्तियों का व्यावसायिक उपयोग सुनिश्चित किया जाए ताकि पंचायत को आर्थिक लाभ हो और स्थानीय नागरिकों को रोजगार के अवसर प्राप्त हों।

ऑपरेशन सिंदूर: केवल सैन्य मिशन नहीं, बल्कि आतंक के खिलाफ भारत की एकजुट हुंकार

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 122वें एपिसोड में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की वीरगाथा का उल्लेख करते हुए यह स्पष्ट किया कि यह केवल एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की एकता, साहस और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ की शुरुआत: बहादुरी की नई परिभाषा

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना द्वारा प्रारंभ किया गया ऑपरेशन सिंदूर एक त्वरित और सटीक कार्रवाई थी, जिसमें सीमा पार आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि यह ऑपरेशन न केवल भारत की सैन्य क्षमता को दर्शाता है, बल्कि यह दुनिया को यह संदेश देता है कि भारत अब चुप नहीं बैठेगा

आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट भारत

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, “आज पूरा देश आतंकवाद के खिलाफ एकजुट है, क्रोधित है और संकल्पबद्ध है। यह हर भारतीय का प्रण बन गया है कि आतंकवाद को जड़ से समाप्त करना है।” यह संदेश देशभर में गूंज रहा है, और हर नागरिक, चाहे वह किसी भी कोने में हो, इस भावना से ओतप्रोत है।

भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का आधार

भारतीय सेना, वायु सेना और नौसेना के अदम्य साहस ने यह साबित कर दिया कि हमारा देश ना केवल जवाब देने में सक्षम है, बल्कि कार्रवाई में भी अग्रणी है। इस ऑपरेशन में मेड इन इंडिया तकनीक और हथियारों का प्रभावी इस्तेमाल किया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा, “यह केवल सैनिकों की वीरता नहीं थी, बल्कि उसमें हमारे इंजीनियरों, तकनीशियनों और वैज्ञानिकों की मेहनत भी शामिल थी।” यह अभियान ‘आत्मनिर्भर भारत’ की नींव को और मजबूत करता है।

ऑपरेशन सिंदूर: भारत के बदलते दृष्टिकोण का प्रतीक

प्रधानमंत्री मोदी ने यह स्पष्ट किया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ केवल सैन्य प्रतिक्रिया नहीं है, यह भारत के बदलते स्वरूप, उसकी दृढ़ता और नए आत्मविश्वास का प्रमाण है।

“यह ऑपरेशन केवल एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि एक तस्वीर है नए भारत की, जो अब आतंकवाद के खिलाफ चुप नहीं बैठता, बल्कि करारा जवाब देता है।”

देशभर में फैली देशभक्ति की लहर

ऑपरेशन सिंदूर के बाद देशभक्ति की लहर ने समूचे देश को अपने रंग में रंग दिया। ‘तिरंगा यात्रा’ का आयोजन शहरों से लेकर गांवों तक हुआ, जिसमें हजारों लोग हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर सेना के प्रति सम्मान जताने सड़कों पर उतरे।

“चंडीगढ़, वाराणसी, पुणे, जयपुर और भोपाल जैसे शहरों में युवाओं ने नागरिक रक्षा अभियानों में बढ़-चढ़कर भाग लिया।” यह दर्शाता है कि यह केवल एक मिशन नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन बन गया है।

‘सिंदूर’ बना नया राष्ट्रभक्ति का प्रतीक नाम

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में एक भावनात्मक पहलू की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। बिहार के कटिहार जिले में एक परिवार ने अपनी नवजात बच्ची का नाम ‘सिंदूर’ रखा, वहीं उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में 17 नवजात कन्याओं को ‘सिंदूर’ नाम दिया गया।

यह केवल एक नाम नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम की भावना और भारतीयता की आत्मा को अभिव्यक्त करता है।

‘मेड इन इंडिया’ हथियार: आत्मनिर्भरता की जीत

प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि इस अभियान में जिन हथियारों का उपयोग किया गया, वे भारत में विकसित किए गए थे। यह आत्मनिर्भर भारत की ओर एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम है।

“भारत अब केवल रक्षा सामग्री आयात करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि अब हम खुद रक्षा उपकरण बना रहे हैं। हमारी तकनीक, हमारी सोच और हमारा आत्मविश्वास हमें सशक्त बना रहा है।”

विश्व समुदाय में भारत की छवि को मिला नया आयाम

इस ऑपरेशन के बाद केवल भारत में ही नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भी भारत की छवि मजबूत हुई है। आतंकवाद के खिलाफ हमारी नीति अब और अधिक ठोस और निर्णायक बन चुकी है।

“ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को यह दिखा दिया कि भारत आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने के लिए कोई भी कदम उठा सकता है।”

‘वोकल फॉर लोकल’ को नई ऊर्जा

प्रधानमंत्री ने इस अभियान के बाद देश में आई नई चेतना का उल्लेख करते हुए कहा कि लोग स्थानीय उत्पादों को अपनाने और प्रचारित करने के लिए और अधिक प्रेरित हुए हैं।

“आज गांव से शहर तक, हर व्यक्ति ‘वोकल फॉर लोकल’ को अपनाने का संकल्प ले रहा है, क्योंकि अब हम जानते हैं कि हमारे अपने देश में बनी चीजें ही हमारी असली ताकत हैं।”

भारत की नई रणनीति: संतुलित पराक्रम

प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति में संतुलन स्थापित किया है।

“हमारी कार्रवाई मापी-तौली होती है, लेकिन उसका प्रभाव तीव्र और दूरगामी होता है। हम उकसावे में नहीं आते, परंतु जब समय आता है, तो संपूर्ण पराक्रम से प्रहार करते हैं।”

एक भारत, अजेय भारत

ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल आतंकवाद को करारा जवाब दिया, बल्कि देश को एकजुट कर एक नया संदेश दिया कि भारत अब किसी भी चुनौती से पीछे नहीं हटता।

यह अभियान हमारे भविष्य की दिशा तय करता है — एक ऐसा भारत जो आत्मनिर्भर, साहसी, तकनीकी रूप से सक्षम और अटूट राष्ट्रभक्ति से भरा हुआ है।