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सिवनी बालाघाट राज्य मार्ग (NH-72) का निर्माण शीघ्र होगा प्रारंभ

सिवनी-बालाघाट राज्य मार्ग क्रमांक 72 का सपना अब जल्द ही हकीकत बनने जा रहा है। मध्यप्रदेश के लोगों के लिए यह एक बड़ी सौगात साबित होगी, जो आवागमन को सुगम बनाने के साथ-साथ भविष्य की दुर्घटनाओं को रोकने में भी कारगर साबित होगी। शासन द्वारा संबंधित विभागों को स्पष्ट आदेश दिए गए हैं और निर्माण कार्य की पूर्व तैयारी में तेजी लाई जा रही है।

राज्य मार्ग निर्माण के लिए प्रारंभिक प्रक्रिया में तेजी

राज्य मार्ग क्रमांक 72, जो सिवनी से बालाघाट तक जुड़ेगा, उसके निर्माण की प्रक्रिया को अब औपचारिक रूप से आरंभ कर दिया गया है। एमपीआरडीसी (MP Rural Road Development Corporation) से प्राप्त आदेशों के बाद एसडीएम एवं तहसीलदारों के माध्यम से प्रभावित ग्रामों के राजस्व नक्शे तैयार करने की प्रक्रिया जारी है। यह नक्शे मार्ग के निर्माण से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान में सहायक होंगे।

फिजिबिलिटी रिपोर्ट और डीपीआर निर्माण में प्रगति

मेसर्स एल.एन. मालवीय इंफ्रा प्रोजेक्ट्स, भोपाल को इस महत्वाकांक्षी परियोजना की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तथा डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। यह कंपनी भू-अर्जन योजना पर भी कार्य कर रही है, जिससे कि निर्माण प्रक्रिया में किसी प्रकार की कानूनी बाधा उत्पन्न न हो।

प्रस्तावित मार्ग पर जिन ग्रामों की भूमि अर्जित की जानी है, उनके राजस्व रिकॉर्ड एवं नक्शों (बंटांकन सहित) की आवश्यकता को देखते हुए संबंधित ग्रामों की सूची तैयार की गई है और जिला प्रशासन को भेज दी गई है।

प्रशासन ने शुरू की कवायद, नक्शे तैयार करने के निर्देश

जिला कलेक्टर को जैसे ही संभागीय प्रबंधक, एमपीआरडीसी से पत्र प्राप्त हुआ, उन्होंने त्वरित रूप से राजस्व विभाग को नक्शे तैयार करने के निर्देश दे दिए। इसके पश्चात बरघाट तहसीलदार एवं एसडीएम द्वारा इस विषय में आवश्यक कदम उठाए जा चुके हैं। कार्य में किसी प्रकार की देरी न हो, इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

राजमार्ग से मिलेगा बेहतर आवागमन, दुर्घटनाओं से राहत

सिवनी-बालाघाट मार्ग की हालत वर्षों से जर्जर बनी हुई है। आए दिन होने वाली भीषण सड़क दुर्घटनाएं जनमानस के लिए चिंता का विषय बनी हुई थीं। राज्य मार्ग क्रमांक 72 के निर्माण से यह मार्ग न केवल सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करेगा, बल्कि आर्थिक विकास को भी नई दिशा देगा।

स्थानीय लोग वर्षों से इस सड़क के निर्माण की मांग कर रहे थे। कई बार आंदोलन और सत्याग्रह भी हुए। अब जबकि शासन ने इस ओर गंभीरता दिखाई है, तो यह कहा जा सकता है कि जल्द ही इस मार्ग पर आवागमन निर्बाध होगा और जनता को सुरक्षा और सुविधा दोनों मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने की थी निर्माण की घोषणा

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव ने बरघाट विकासखंड में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में इस मार्ग के निर्माण की घोषणा की थी। इस घोषणा को अब जमीनी अमल में लाया जा रहा है। यह घोषणा अब एक विकास यात्रा का रूप ले रही है, जिसमें प्रशासन, इंजीनियरिंग विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधि सभी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

भविष्य में कैसे बदलेगा परिदृश्य

राज्य मार्ग का निर्माण पूर्ण होने के बाद, इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिलेंगे:

  • सिवनी से बालाघाट की दूरी कम समय में तय होगी।
  • परिवहन व्यवस्था में सुधार होगा, जिससे व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
  • स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं तक पहुंच में सुविधा होगी।
  • ग्रामीण क्षेत्रों का समग्र विकास होगा और नौकरी के नए अवसर उत्पन्न होंगे।

जन-जीवन की मांग और सरकार का उत्तरदायित्व

सिवनी और बालाघाट जिले की जनता पिछले कई वर्षों से इस महत्वपूर्ण सड़क के निर्माण की मांग कर रही थी। प्रशासनिक निष्क्रियता, नक्शों की अनुपलब्धता और योजनागत बाधाओं के चलते यह मार्ग अभी तक अधूरा पड़ा था। लेकिन अब जब सरकारी स्तर पर गंभीरता दिखाई दे रही है, तो जनता को भरोसा हो गया है कि उनका सपना शीघ्र साकार होगा।

भविष्य की संभावनाएं और रणनीति

यह मार्ग मध्यप्रदेश के दो महत्वपूर्ण जिलों को जोड़ने के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्यों के लिए भी एक वैकल्पिक कनेक्टिविटी रूट साबित हो सकता है। भविष्य में इसे नेशनल हाईवे में अपग्रेड करने की संभावना भी जताई जा रही है। यह मार्ग इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की दृष्टि से भी एक मील का पत्थर साबित होगा।

सिवनी-बालाघाट राज्य मार्ग क्रमांक 72 का शीघ्र निर्माण न केवल एक सड़क का निर्माण है, बल्कि यह आवागमन, सुरक्षा, आर्थिक विकास और जनसुविधा का एक संयुक्त उपक्रम है। इस मार्ग के निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया अब तीव्र गति से आगे बढ़ रही है, और उम्मीद की जा रही है कि बहुत जल्द इसका निर्माण कार्य धरातल पर नजर आएगा।

SEONI SATTA QUEEN: सिवनी की सट्टा क्वीन लता बाई के अड्डे पर पुलिस की छापेमारी

SEONI SATTA QUEEN: सिवनी शहर में वर्षों से अवैध सट्टा कारोबार चला रही “सट्टा क्वीन लता बाई” के अड्डे पर पुलिस ने देर रात छापा मारकर सट्टा पर्चियां, मोबाइल फोन और नगद राशि बरामद की है। यह कार्रवाई अचानक और गोपनीय तरीके से की गई, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।

सिवनी में सट्टा क्वीन के नाम से मशहूर लता बाई के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई की योजना बनी थी, लेकिन अचानक इसे रोक दिया गया। यह सवाल उठाता है कि आख़िर कौन प्रभावशाली व्यक्ति है, जिसने इस कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डलवा दिया?

लता बाई का सट्टा साम्राज्य: सिवनी का सबसे बड़ा अवैध खेल

सिवनी में लता बाई का नाम अवैध सट्टा कारोबार से वर्षों से जुड़ा रहा है। केवल सट्टा ही नहीं, बल्कि “तीन पत्ती” और “कट” जैसे जुए के खेल भी यहां खुलेआम खेले जा रहे थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि लता बाई का यह अड्डा युवाओं को जुए की दलदल में धकेल रहा था।

पुलिस की कार्रवाई: एक योजनाबद्ध और चौंकाने वाली रेड

गोपनीय जानकारी के आधार पर स्थानीय पुलिस ने देर रात छापेमारी की, जिसमें:

  • दर्जनों सट्टा पर्चियां
  • कई मोबाइल फोन
  • बड़ी मात्रा में नकदी
  • तीन पत्ती और कट से जुड़ी सामग्री बरामद हुई।

यह छापा इतनी तेजी से हुआ कि मोहल्ले में लोग कुछ समझ ही नहीं पाए और देखते ही देखते भीड़ जुट गई।

राजनीतिक संरक्षण या प्रशासनिक उदासीनता?

हालांकि लता बाई के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई की योजना बनी थी, लेकिन अचानक इसे रोक दिया गया। यह सवाल उठाता है कि आख़िर कौन प्रभावशाली व्यक्ति है, जिसने इस कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डलवा दिया?

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि राजनीतिक प्रभाव और प्रशासनिक लापरवाही के चलते लता बाई पर लंबे समय से कोई कठोर कार्रवाई नहीं हो पा रही थी। अब जनता में यह मुद्दा गर्माया हुआ है।

युवाओं पर सट्टे का कहर: एक सामाजिक संकट

सिवनी के दर्जनों परिवारों ने अपने युवाओं को जुए की गिरफ्त में जाते देखा है। पढ़ाई, नौकरी और भविष्य से भटके युवा लता बाई के इस जुए के अड्डे पर फंसते जा रहे थे। नशे, कर्ज और अपराध की दुनिया में धकेले गए इन युवाओं की कहानियाँ अब आम हो चुकी हैं।

इसके बावजूद, प्रशासनिक निष्क्रियता ने इस अवैध साम्राज्य को फलने-फूलने दिया, जिससे कई परिवार तबाह हो चुके हैं।

कैसे चल रहा था सट्टा रैकेट: लता बाई का मॉड्यूल

सूत्रों के अनुसार, लता बाई बहुत सुनियोजित ढंग से अपने कारोबार को चला रही थी:

  • डिजिटल लेन-देन का इस्तेमाल
  • कोडवर्ड और फेक नंबर से बातचीत
  • स्थानीय एजेंटों द्वारा रोज की कलेक्शन
  • किराए के मकानों में अड्डे

इन अड्डों पर केवल जुआ ही नहीं, बल्कि अवैध कर्ज और धमकियों का भी खेल चलता था, जिससे लोग फंसते ही चले जाते थे।

जनता का आक्रोश: अब चाहिए कार्रवाई, ना कि सिर्फ बयानबाज़ी

छापेमारी के बाद स्थानीय नागरिकों ने पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन करते हुए मांग की:

  • लता बाई और उसके पूरे नेटवर्क की गिरफ्तारी हो
  • प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की जांच हो
  • जिले से तत्काल बदर की कार्रवाई लागू हो
  • जुए में फंसे युवाओं के लिए पुनर्वास कार्यक्रम चलाया जाए

अब सिवनी की जनता इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठना चाहती और कार्रवाई की मांग हर तरफ से तेज हो गई है।

पुलिस और प्रशासन की अगली जिम्मेदारी

हालांकि यह छापेमारी एक साहसी कदम था, लेकिन असली लड़ाई अब शुरू हुई है। लता बाई के नेटवर्क को तोड़ने के लिए जरूरी है कि:

  • संपूर्ण नेटवर्क की जांच और गिरफ्तारी की जाए
  • जप्त संपत्ति और अवैध धन की जांच हो
  • राजनीतिक संरक्षण पर सवाल उठाए जाएं
  • स्थाई टास्क फोर्स बनाकर सट्टे पर लगाम लगाई जाए

जब तक यह अभियान लगातार और प्रभावशाली नहीं चलेगा, तब तक सिवनी का युवा सट्टे की दलदल से नहीं निकल पाएगा।

सिवनी को चाहिए न्याय, कार्रवाई और साफ़-सुथरा भविष्य

सट्टा क्वीन लता बाई पर पुलिस की यह कार्रवाई एक शुरुआत भर है। वर्षों से चल रहे इस गंदे खेल ने न केवल क़ानून की धज्जियाँ उड़ाई हैं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी को अंधेरे में धकेल दिया है। अब वक्त है कि प्रशासन और नागरिक मिलकर इस गुनाह के साम्राज्य को जड़ से खत्म करें

SEONI में IPL SATTA गिरोह का भंडाफोड़: 45 लाख रुपये के बैंक ट्रांजेक्शन राशि का किया खुलासा, अभय, पियूष और दिनेश गिरफ्तार

सिवनी, 27 मई 2025 – जिले में आईपीएल सट्टा और अवैध गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए पुलिस अधीक्षक सुनील मेहता ने सभी थाना प्रभारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जी.डी. शर्मा के निर्देशन में एवं सीएसपी श्रीमति पूजा पांडे के मार्गदर्शन में कोतवाली थाना प्रभारी किशोर बावनकर ने अपनी टीम के साथ बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया।

मुखबिर की सूचना पर, दिनांक 27 मई 2025 की शाम करीब 07.30 से 08.30 बजे के बीच, कोतवाली पुलिस ने ज्यारत नाका स्थित स्मार्ट किराना दुकान के सामने से एक संदिग्ध अभय वंशकार को पकड़ा, जो अपने मोबाइल से ऑनलाइन आईपीएल सट्टा खेलते हुए पाया गया। प्रारंभिक पूछताछ में उसने बताया कि वह लखनऊ और बेंगलोर की टीमों पर सट्टा लगा रहा था।

ऑनलाइन सट्टा गिरोह की परतें खुलीं

मामले की गंभीरता को देखते हुए सायबर सेल की सहायता से आरोपी द्वारा बताए गए सट्टा लाइन संचालक पियूष उदासी, निवासी सिवनी (वर्तमान में रायपुर) की तलाश शुरू की गई। कोतवाली टीम ने लगातार दो दिन दुर्ग भिलाई और रायपुर में छापेमारी की और पियूष उदासी को पकड़ने में सफलता हासिल की।

पूछताछ में पियूष ने खुलासा किया कि वह अपने चचेरे भाई दिनेश उर्फ दीनू बाधवानी, निवासी सिवनी (वर्तमान में रायपुर), के साथ मिलकर ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा चलाता है और लोगों को हार-जीत का खेल खिलाकर अवैध लाभ कमा रहा है। दोनों ने पुलिस से बचने के लिए रायपुर में किराए पर मकान लेकर यह काम शुरू किया था।

बैंक खातों में करोड़ों का लेन-देन

पुलिस जांच में सामने आया कि:

  • एचडीएफसी बैंक (शंकर नगर, रायपुर) में दिनेश बाधवानी के नाम से खाता मिला, जिसमें जनवरी 2025 से अब तक ₹5,11,000 का लेनदेन हुआ।
  • सेंट्रल बैंक (सिवनी) से जुड़े खाते से ₹25,35,000 का ट्रांजैक्शन दर्ज हुआ।
  • पियूष उदासी के बंधन बैंक (सिवनी) खाते से ₹14,38,000 का लेनदेन हुआ।

तीनों आरोपियों के खातों से संबंधित ₹44,84,000 की सट्टा राशि सामने आई है। पुलिस ने संबंधित बैंकों को पत्र लिखकर आरोपियों के बैंक खाते फ्रीज कराने की कार्यवाही शुरू कर दी है।

गिरफ्तार आरोपी

  1. अभय वंशकार – निवासी ज्यारत नाका, सिवनी
  2. पियूष उदासी – निवासी झूलेलाल कॉलोनी, सिवनी (हाल निवासी शंकर नगर, रायपुर)
  3. दिनेश उर्फ दीनू बाधवानी – निवासी झूलेलाल कॉलोनी, सिवनी (हाल निवासी शंकर नगर, रायपुर)

जब्ती की गई सामग्री

  • 02 वीवो मोबाइल फोन – कीमत ₹25,000
  • 01 वन प्लस मोबाइल फोन – कीमत ₹18,000
  • नकद राशि ₹6,200
  • बैंक खातों से कुल लेनदेन राशि – ₹44,84,000

कुल जब्ती की राशि: ₹45,33,200

सराहनीय कार्य

इस सफल कार्रवाई में कोतवाली थाना प्रभारी किशोर बावनकर, उप निरीक्षक डी.आर. शरणागत, सउनि संजय यादव, सायबर सेल से सउनि देवेंद्र जायसवाल, प्रआर योगेश राजपूत, मनोज पाल, आरक्षक अमित रघुवंशी, प्रतीक बघेल, अभिषेक डहेरिया, शिवम बघेल और हेमराज बघेले की महत्वपूर्ण एवं सराहनीय भूमिका रही।

सिवनी पुलिस द्वारा इस प्रकार की कार्रवाई से स्पष्ट संकेत गया है कि जिले में अवैध सट्टेबाजी और जुए की गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

SEONI का Jio Office बना ग्राहकों की परेशानी की वजह, SIM Replacement के लिए भटक रहे जिओ के ग्राहक

Jio Office Seoni: सिवनी जिले का Jio ऑफिस, जो कि दलसागर तालाब के पीछे स्थित है, आजकल ग्राहकों की समस्याओं का मुख्य केंद्र बनता जा रहा है। जहां एक ओर Jio कंपनी देशभर में अपनी तेज और भरोसेमंद सेवाओं के लिए जानी जाती है, वहीं सिवनी स्थित यह कार्यालय कंपनी की साख को मिट्टी में मिलाने का काम कर रहा है। विशेषकर SIM Replacement की प्रक्रिया को लेकर ग्राहकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

Reliance Jio, जो अपनी तेज गति, बेहतर नेटवर्क और डिजिटल इंडिया के सपनों को पूरा करने के लिए जाना जाता है, वह सिवनी में अपनी साख खोता जा रहा है। यहां के कर्मचारी और व्यवस्था Jio के नाम पर बदनामी का कारण बनते जा रहे हैं। Jio जैसी कंपनी से ग्राहक उच्च स्तरीय सेवा और सहायता की उम्मीद करते हैं, लेकिन सिवनी में उन्हें उल्टा टालमटोल और असहयोग झेलना पड़ रहा है। इससे ग्राहकों में आक्रोश भी बढ़ रहा है।

ग्राहकों को ऑफिस से भेजा जा रहा है बाहर की दुकानों पर

जब कोई ग्राहक Jio सिम रिप्लेसमेंट के लिए सीधे सिवनी के जिओ ऑफिस पहुंचता है, तो वहां उन्हें मोबाइल वर्ल्ड नामक दुकान पर जाने के लिए कहा जाता है। यह दुकान जिओ ऑफिस से बाहर स्थित है, और दावा किया जाता है कि सभी रिप्लेसमेंट वहीं से होंगे

लेकिन जब ग्राहक उस दुकान पर पहुंचते हैं, तो वहां नई समस्या शुरू हो जाती है – वहां कहा जाता है कि प्रतिदिन केवल 20 सिम ही रिप्लेस हो सकते हैं, और बाकी ग्राहकों को अगले दिन आने के लिए कह दिया जाता है। इस तरह की प्रक्रिया ग्राहकों के समय और धैर्य दोनों की परीक्षा लेती है।

हर दिन नया बहाना – “आज लड़का नहीं है, कल आना”

यह देखा गया है कि मोबाइल वर्ल्ड दुकान पर जब ग्राहक अगली बार वापस जाते हैं, तो वहां से भी उन्हें निराशा ही हाथ लगती है। स्टाफ का जवाब होता है – “आज लड़का नहीं आया, कल आना“। यह स्थिति यह दर्शाती है कि Jio की सेवाओं को स्थानीय स्तर पर बेहद लापरवाही से संचालित किया जा रहा है।

ग्राहक जिन्हें तत्काल सिम की आवश्यकता है – जैसे OTP प्राप्त करने, बैंकिंग सेवाओं के उपयोग, या आधार वेरिफिकेशन के लिए – वे दिनों तक असहाय और परेशान रहते हैं

हंगामा करने पर ही होता है काम, शांत ग्राहक को मिलती है प्रताड़ना

एक ग्राहक ने जब बार-बार दुकान और ऑफिस के चक्कर काटने के बाद थककर Jio ऑफिस में हंगामा किया, तभी वहां के JCM (Jio Center Manager) ने तुरंत सिम रिप्लेसमेंट करके दे दी। इससे स्पष्ट है कि Jio ऑफिस में काम करवाने के लिए शोर मचाना और हंगामा करना जरूरी बन चुका है।

जो ग्राहक शांति से अपना काम करवाना चाहते हैं, वे प्रताड़ना और टालमटोल का शिकार बनते हैं, जबकि हंगामा करने पर त्वरित सेवा दी जाती है। यह व्यवहार कंपनी की सेवा नीति के बिल्कुल विपरीत है।

Jio की इज्जत को सिवनी ऑफिस कर रहा धूमिल

Jio, जो अपनी तेज गति, बेहतर नेटवर्क और डिजिटल इंडिया के सपनों को पूरा करने के लिए जाना जाता है, वह सिवनी में अपनी साख खोता जा रहा है। यहां के कर्मचारी और व्यवस्था Jio के नाम पर बदनामी का कारण बनते जा रहे हैं

Jio जैसी कंपनी से ग्राहक उच्च स्तरीय सेवा और सहायता की उम्मीद करते हैं, लेकिन सिवनी में उन्हें उल्टा टालमटोल और असहयोग झेलना पड़ रहा है। इससे ग्राहकों में आक्रोश भी बढ़ रहा है।

डिजिटल इंडिया को लग रहा है झटका

सिम रिप्लेसमेंट जैसे जरूरी कार्य में देरी का सीधा असर डिजिटल इंडिया अभियान पर भी पड़ रहा है। जब किसी नागरिक की सिम काम नहीं कर रही हो, और उसे कई दिनों तक बदला ना जाए, तो वह डिजिटल सेवाओं से पूरी तरह कट जाता है।

यूपीआई ट्रांजैक्शन, बैंकिंग सेवाएं, ओटीपी आधारित लॉगिन, आधार लिंकिंग – ये सभी सेवाएं ठप हो जाती हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि सिवनी का Jio ऑफिस डिजिटल इंडिया को मज़ाक बना रहा है

मोबाइल वर्ल्ड दुकान पर घंटों इंतजार, कोई जवाबदेही नहीं

Jio ऑफिस ने अगर सभी सिम रिप्लेसमेंट का कार्य मोबाइल वर्ल्ड को सौंप दिया है, तो यह उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वहां पर पर्याप्त स्टाफ और संसाधन हों। लेकिन स्थिति इसके उलट है। दुकान के सामने ग्राहक घंटों तक इंतजार करते हैं, लेकिन ना कोई सूचना दी जाती है और ना ही सेवा मिलती है।

कई बार ग्राहक सुबह से लाइन में लगते हैं, लेकिन 20 सिम लिमिट के कारण वे शाम को खाली हाथ लौटते हैं। इससे लोगों का विश्वास टूटता जा रहा है

Jio को लेनी चाहिए कड़ी कार्रवाई

यह पूरी स्थिति दर्शाती है कि सिवनी Jio ऑफिस में लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैया हावी है। यदि Jio को अपने ब्रांड की प्रतिष्ठा बचानी है, तो उन्हें:

  • तत्काल जांच बैठानी चाहिए
  • सीधे ऑफिस से ही SIM Replacement की सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए
  • ग्राहकों के लिए हेल्पलाइन नंबर और शिकायत समाधान तंत्र विकसित करना चाहिए
  • जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए

सिवनी में Jio सेवाओं को चाहिए तात्कालिक सुधार

सिवनी Jio ऑफिस, जो कि कभी कंपनी की सेवा का केंद्र माना जाता था, अब एक प्रताड़ना केंद्र बन चुका है। अगर Jio को अपने ग्राहकों का विश्वास जीतना है, तो उसे तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने होंगे।

SIM Replacement जैसी मूलभूत सेवा में देरी और दुव्यवस्था से न केवल कंपनी की छवि खराब हो रही है, बल्कि यह ग्राहकों के जीवन को भी कठिन बना रही है।

सिवनी में 11 करोड़ 26 लाख का घोटाला: 19 बार सांप के डसने से हो चुकी संतकुमार की मौत; जिन्दा मिले!

मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के केवलारी तहसील से सामने आया सर्पदंश घोटाला न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह हमारे सिस्टम में गहराई तक फैले भ्रष्टाचार की गंभीर तस्वीर भी प्रस्तुत करता है। 2019 से 2022 के बीच घटित इस घोटाले में कागज़ों में 279 बार फर्जी मृत्यु दिखाकर 11 करोड़ 26 लाख रुपए की हेराफेरी की गई।

मध्य प्रदेश में पहले चम्मच घोटाला, फिर डामर घोटाला, नगर निगम का कचरा घोटाला और अब सिवनी जिले की केवलारी तहसील से एक नया मामला सामने आया है, जिसे ‘सर्पदंश घोटाला’ कहा जा रहा है। इसमें भ्रष्ट अधिकारियों ने जिंदा लोगों को कागजों पर मृत घोषित कर दिया और सरकार से मिलने वाली सहायता राशि को खुद हड़प लिया।

फर्जी मौतों की चौंकाने वाली हकीकत

सिवनी जिले के मलारी गांव के 70 वर्षीय किसान संत कुमार बघेल के नाम पर 19 बार सर्पदंश से मृत्यु दिखाकर ₹76 लाख की मुआवजा राशि निकाल ली गई, जबकि वे आज भी जिंदा और स्वस्थ हैं।

संत कुमार बघेल ने खुद बताया,

”मुझे चार दिन पहले पता चला कि मेरे नाम पर सांप काटने से मृत्यु दिखाकर राशि निकाली गई है। मुझे कभी सांप ने नहीं काटा। गांव में 60-70 साल में एक-दो मामले ही सर्पदंश से मौत के हुए हैं।”

समाज में प्रतिष्ठा को लगा धक्का

संत कुमार ने इस फर्जीवाड़े से अपने मानसिक और सामाजिक आघात की बात कही।

”कुछ लोग मान रहे हैं कि मैंने पैसे लिए होंगे, जबकि मुझे कोई राशि नहीं मिली।”

वे इस मानहानि के मामले में न्याय की मांग कर रहे हैं।

“मैं दोषियों पर मानहानि का दावा ठोकूंगा और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करूंगा।”

घोटाले की जड़ में कौन?

इस पूरे प्रकरण का मुख्य आरोपी केवलारी तहसील कार्यालय का क्लर्क सचिन दहायत है। उसने तत्कालीन एसडीएम और चार तहसीलदारों के लॉगिन पासवर्ड का दुरुपयोग कर मुआवजा योजना को अपनी लूट की योजना बना डाला।

फर्जी पात्र और काल्पनिक लोग

  • द्वारकाबाई (बिछुआ रयत गांव) – जो वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं है, उसे 29 बार मृत दिखाकर 1 करोड़ 16 लाख रुपए की निकासी हुई।
  • श्रीराम – नामक व्यक्ति को 28 बार मृत दिखाकर लाखों रुपए हड़पे गए, जबकि गांव में ऐसे किसी व्यक्ति का कोई अस्तित्व नहीं मिला

सांप के काटने पर मिलने वाला मुआवजा बना घोटाले का ज़रिया

मध्य प्रदेश शासन की योजना के तहत सांप के काटने, डूबने या बिजली गिरने से मृत्यु होने पर परिजनों को 4 लाख रुपए तक का मुआवजा मिलता है। लेकिन केवलारी तहसील में इस योजना को धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का साधन बना लिया गया।

मलारी गांव की दूरी मात्र 3 किलोमीटर, फिर भी पुष्टि नहीं!

सबसे हैरानी की बात यह है कि मलारी गांव केवलारी तहसील से मात्र 3 किलोमीटर दूर है, फिर भी किसी अधिकारी ने जाकर पुष्टि नहीं की कि जिनका नाम मुआवजे में दर्ज है वे वास्तव में मृत हैं या जीवित

संत कुमार कहते हैं,

”मैं 1994 से 1998 तक मलारी गांव का सरपंच रहा हूं, लेकिन उसके बाद तहसील कार्यालय से कोई संबंध नहीं रहा। न मुझे कोई पत्र मिला, न कोई अधिकारी मुझसे मिला।”

2022 में दर्ज हुआ मामला, अभी तक एक भी पैसा वापस नहीं

इस घोटाले की पुलिस जांच 2022 में शुरू हुई थी, और 37 लोगों को आरोपी बनाया गया, जिनमें से 21 गिरफ्तार हुए और 20 को जमानत मिल गई

कोष एवं लेखा विभाग की रिपोर्ट

कोष एवं लेखा विभाग की जांच में पाया गया कि:

  • सचिन दहायत ने उच्च अधिकारियों के लॉगिन पासवर्ड से एंट्री की।
  • रिपोर्ट में तत्कालीन एसडीएम और चार तहसीलदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
  • कलेक्टर ने कहा कि रिपोर्ट का अध्ययन कर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी

क्या सिस्टम इतना असंवेदनशील हो चुका है?

यह घोटाला एक गंभीर प्रशासनिक विफलता को उजागर करता है। अगर संबंधित अधिकारी स्थानीय स्तर पर जांच करते, तो 279 फर्जी मौतों का पर्दाफाश पहले ही हो जाता।

कब मिलेगी न्याय की आशा?

अब प्रश्न यह उठता है कि:

  • क्या संत कुमार जैसे निर्दोषों की प्रतिष्ठा लौटाई जाएगी?
  • क्या लूटे गए करोड़ों की वसूली होगी?
  • क्या दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी?

सिवनी जिले के सर्पदंश घोटाले ने शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। फर्जीवाड़े, नकली पात्रों, और मृत दिखाए गए जीवित लोगों की यह कहानी देश भर में न्याय व्यवस्था और जवाबदेही की मांग को और तेज़ करती है।

अब समय आ गया है कि इस जैसे मामलों में सख्त जांच, सार्वजनिक पारदर्शिता और दोषियों को कठोर सज़ा दी जाए, ताकि भविष्य में कोई सरकारी योजना भ्रष्टाचारियों की जेब में न जाए।

Delhivery Courier में पार्सल टेम्परिंग: iPhone 14 की जगह निकला साबुन, CLAIM में दिए 2000 रुपए

नई दिल्ली। अगर आप Delhivery कूरियर सर्विस के माध्यम से अपने कीमती सामान की डिलीवरी कर रहे हैं, तो ज़रा संभल जाएं। एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसमें ग्राहक के पार्सल में iPhone 14 की जगह साबुन भेज दिया गया। इस घटना ने Delhivery जैसी नामी कूरियर कंपनी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्राहक के साथ हुआ धोखा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक ग्राहक ने iPhone 14 मंगवाया था, लेकिन जब पार्सल डिलीवर हुआ तो उसमें कीमती मोबाइल फोन की जगह एक साधारण साबुन निकला। ग्राहक ने तुरंत इसकी शिकायत Delhivery टीम से की, लेकिन 15 दिन तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला। अंततः कंपनी ने इस गंभीर लापरवाही की भरपाई के नाम पर मात्र ₹2000 ग्राहक के Delhivery वॉलेट में डाल दिए। सोचने वाली बात यह है कि जिस iPhone की कीमत ₹70,000 से ₹1,00,000 तक होती है, उसकी भरपाई केवल ₹2000 में कैसे संभव है?

Delhivery में पार्सल टेम्परिंग के मामले बढ़े

यह पहली बार नहीं है जब Delhivery के खिलाफ ऐसी शिकायतें सामने आई हों। पिछले कुछ महीनों में कई ग्राहकों ने शिकायत की है कि उनके पार्सल से कीमती सामान चोरी हुआ है या उन्हें खोलकर कुछ और ही सामान भेजा गया है। इससे यह साफ़ जाहिर होता है कि Delhivery में पार्सल टेम्परिंग (Parcel Tampering) और चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

ग्राहकों में बढ़ रहा है अविश्वास

Delhivery जैसी बड़ी और तकनीकी रूप से उन्नत कंपनी से इस तरह की लापरवाही की उम्मीद किसी ने नहीं की थी। लेकिन इन घटनाओं से ग्राहकों का विश्वास टूट रहा है। यदि यही स्थिति रही, तो ग्राहक जल्द ही अन्य भरोसेमंद कूरियर कंपनियों की ओर रुख करेंगे।

कौन है जिम्मेदार?

सवाल यह है कि यदि कोई व्यक्ति लाखों रुपए का सामान Delhivery जैसी कंपनी के भरोसे भेजता है और उसके साथ इस प्रकार की धोखाधड़ी होती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या कंपनी केवल ₹2000 देकर अपना पल्ला झाड़ सकती है?

कानूनी कार्रवाई बनती है

इस मामले में ग्राहक कानूनी कार्रवाई भी कर सकता है। भारतीय उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (Consumer Protection Act) के तहत किसी भी प्रकार की लापरवाही या धोखाधड़ी पर पीड़ित ग्राहक उपभोक्ता फोरम में केस दर्ज कर सकता है।

सोचिए… सौंपने से पहले

Delhivery जैसी कूरियर सेवा का उपयोग करने से पहले 10 बार सोचिए। क्या आप अपने महंगे मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक सामान या अन्य कीमती वस्तुएं उस सेवा के भरोसे छोड़ सकते हैं जो iPhone को साबुन बनाकर आपके हाथ में थमा दे?

सिवनी में विमान हादसा: लैंडिंग के दौरान हवाई पट्टी पर फिसलने से पलटा विमान, प्रशिक्षण व्यवस्था पर उठे सवाल

सिवनी (मध्यप्रदेश) के सुकतरा गांव स्थित मेस्को एरोस्पेस कंपनी की हवाई पट्टी पर शुक्रवार सुबह 8 से 9 बजे के बीच एक ट्रेनी विमान के फिसलने और पलटने की गंभीर घटना सामने आई। इस दुर्घटना में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ, परंतु इससे संबंधित कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जो न केवल एविएशन सुरक्षा व्यवस्था बल्कि प्रशिक्षण गुणवत्ता पर भी संदेह पैदा करते हैं।

हादसे का पूरा विवरण: कैसे हुआ विमान हादसा?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना उस वक्त हुई जब एक ट्रेनी पायलट प्रशिक्षण के तहत हवाई पट्टी पर विमान की लैंडिंग अभ्यास कर रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि विमान लैंडिंग के दौरान पहले बाईं ओर झुका और फिर संतुलन खोते हुए पलट गया। हादसा इतना तेज था कि विमान क्षतिग्रस्त हो गया, लेकिन पायलट की जान बच गई, जिसे एक सावधानीपूर्वक ट्रेनिंग की उपलब्धि माना जा सकता है।

प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही: हादसे के वक्त क्या देखा गया?

घटना के बाद कुछ स्थानीय नागरिक और हवाई पट्टी पर कार्यरत लोग मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि विमान हवा में संतुलन खोते ही तेजी से नीचे गिरा और पट्टी पर फिसलते हुए पलट गया। कुछ लोगों ने दावा किया कि विमान में तकनीकी खराबी या रनवे की सतह पर गड़बड़ी इसकी वजह हो सकती है।

हादसे के बाद की संदिग्ध गतिविधियां: विमान को ढंका गया तिरपाल से

इस दुर्घटना के तुरंत बाद रेड बर्ड एविएशन कंपनी के कर्मचारियों द्वारा विमान को तिरपाल से ढंक दिया गया, जिससे संदेह और बढ़ गया। यह प्रक्रिया लापरवाही को छिपाने का प्रयास मानी जा रही है। एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, “हमने जैसे ही विमान को पलटा देखा, कुछ ही मिनटों में कंपनी के कर्मचारी आ गए और बिना किसी अधिकारी के मौजूदगी के विमान को ढक दिया।”

रेड बर्ड एविएशन की भूमिका पर सवाल

रेड बर्ड एविएशन, जो कि विमानन प्रशिक्षण संस्थान के रूप में कार्यरत है, की भूमिका इस हादसे में गंभीर जांच की मांग करती है। यह संस्था प्रशिक्षण विमान का संचालन करती है और इस प्रकार की लापरवाहीपूर्ण गतिविधियां न केवल छात्रों की जान को खतरे में डालती हैं, बल्कि पूरे एविएशन सिस्टम की साख पर भी असर डालती हैं।

सुरक्षा और प्रशिक्षण प्रणाली की खामियां उजागर

इस घटना ने एविएशन प्रशिक्षण संस्थानों की सुरक्षा मानकों और ट्रेनी पायलट्स की तैयारी पर गहरी चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संस्थानों को डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) द्वारा नियमित निगरानी और निरीक्षण की आवश्यकता है, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

क्या यह हादसा संस्थागत लापरवाही का परिणाम है?

इस बात की गंभीर जांच की आवश्यकता है कि क्या यह हादसा केवल एक दुर्घटना थी या इसके पीछे प्रशिक्षण की गुणवत्ता में कमी, विमान की तकनीकी खराबी या संस्थागत लापरवाही भी कारण रही है। विमान को जल्दी से ढंक देना, बिना किसी जांच टीम या मीडिया को बुलाए, इस संभावना को और भी प्रबल करता है कि कंपनी कुछ छिपाने की कोशिश में थी।

स्थानीय प्रशासन और DGCA की भूमिका

हादसे के बाद अब निगाहें स्थानीय प्रशासन और DGCA (नागर विमानन महानिदेशालय) पर टिकी हैं। क्या प्रशासन ने इस हादसे को गंभीरता से लिया? क्या कोई औपचारिक जांच शुरू की गई है? क्या DGCA ने इस पर नोटिस जारी किया या निरीक्षण भेजा?

जब तक इन सवालों के जवाब सार्वजनिक नहीं होते, सभी ट्रेनी पायलट्स और उनके परिवारों की सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह लगा रहेगा।

विमानन विशेषज्ञों की राय: क्यों आवश्यक है पारदर्शिता?

विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाओं को पारदर्शिता से निपटाना अनिवार्य है। यदि संस्थान अपनी गलती छिपाते हैं तो इससे ना केवल भविष्य में बड़ी घटनाओं की संभावना बढ़ती है, बल्कि इससे आम जनता का विश्वास भी टूटता है। प्रशिक्षण संस्थानों को चाहिए कि वे हर दुर्घटना की निष्पक्ष जांच कराएं, रिपोर्ट सार्वजनिक करें और सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करें।

यह आवश्यक है कि इस दुर्घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों पर कार्रवाई हो और रेड बर्ड एविएशन जैसे संस्थानों की सुरक्षा नीतियों की समीक्षा की जाए। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि एक प्रशिक्षु की जान केवल एक गलती से जा सकती है, और इस प्रकार की घटनाएं हमारे एविएशन भविष्य पर काले धब्बे की तरह हैं।

Seoni में Sex Racket! लड़ैया मोहल्ला विवेकानंद वार्ड में पुलिस को मिली सूचना पर एक घर में रेड; 5 हिरासत में

सीधी और सटीक कार्रवाई से सनसनी, सिवनी जिले के लड़ैया मोहल्ला स्थित विवेकानंद वार्ड में देह व्यापार के एक बड़े रैकेट की सूचना पर सिवनी कोतवाली पुलिस ने कार्यवाही की। यह घटना शहरवासियों के लिए चौंकाने वाली रही, क्योंकि जहां एक रिहायशी इलाके में इस प्रकार का अनैतिक धंधा यदि संचालित हो रहा है तो ये बेहद शर्मनाक है।

पुलिस को कैसे मिली जानकारी?

सिवनी पुलिस को कई दिनों से सूचना मिल रही थी कि लड़ैया मोहल्ला में एक घर में संदिग्ध गतिविधियाँ चल रही हैं। मोहल्ले के कुछ जागरूक नागरिकों ने भी शिकायत दर्ज करवाई थी कि उक्त घर में अक्सर बाहर से आने वाले युवक-युवतियों की आवाजाही बनी रहती है। खुफिया तंत्र ने मामले की बारीकी से निगरानी शुरू की और मोहल्ले वासियों से मिली सटीक सूचना मिलने पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई का निर्णय लिया।

यह वीडियो पुलिस की कार्यवाही के समय का है…

रेड की कार्रवाई और पकड़े गए आरोपी

पुलिस ने विवेकानंद वार्ड के जिस मकान में रेड डाली, वहां से दो महिलाएं और तीन पुरुष हिरासत में लिए गए।

यह वीडियो पुलिस की कार्यवाही के समय का है…

SEX Racket से पुलिस का इंकार ?

पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है यहाँ किसी प्रकार का कोई सेक्स रैकेट नहीं चल रहा था ना ही किसी प्रकार की कोई आपत्तिजनक चीजें बरामद हुई है प्रारंभिक जांच के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी

समाज पर पड़ रहा नकारात्मक असर

शहर के मुख्य रिहायशी क्षेत्र में यदि इस प्रकार का रैकेट चलता है तो समाज के लिए अत्यंत चिंताजनक है। विवेकानंद वार्ड में रहने ईले लोगो तो अभी भी अपनी बात में अडिग है कि उक्त घर में सेक्स रैकेट चलता है आस पड़ोस में रहने वाले लोगों को गतिविधियों से साफ़ समझ आता है. मोहल्ले वासियों की माने तो फिर ऐसे रिहायशी इलाके में यदि ऐसी गतिविधियाँ चलती हैं, तो इसका सीधा प्रभाव वहाँ के बच्चों, महिलाओं और सामान्य नागरिकों की मानसिकता पर पड़ता है। इस घटना ने यह भी दर्शाया है कि गृह नगरों में अपराध के नए रूप कैसे पनप रहे हैं।

जनता की जागरूकता है अहम

स्थानीय नागरिक सतर्क और जागरूक रहें, तो ऐसे अपराधों को समय रहते पकड़ा जा सकता है। लेकिन इस मामले में स्थानीय जनता की जागरूकता की काम ना आ सकी