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सिवनी कलेक्टर ने सुभाष वार्ड को साईलेन्स जोन किया घोषित, कोलाहल नियंत्रण के लिए आदेश जारी

सिवनी: नगरीय निकाय के उप निर्वाचन-2025 (पूर्वार्द्ध) को दृष्टिगत रखते हुये निर्वाचन के दौरान प्रचार-प्रसार कार्य में लगे लाउड स्पीकर के अनियंत्रित उपयोग व तेज आवाज से आम जन की शांति भंग होती है तथा इस प्रकार होने वाले ध्वनि प्रदूषण से लोक प्रशांति को भंग होने से रोकने के लिए कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी संस्कृति जैन ने मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम-1985 की धारा-18 के अन्तर्गत दिनांक 10 जुलाई 2025 तक की अवधि के लिए सिवनी जिले की नगरपालिका परिषद सिवनी के वार्ड क्रमांक 11 के निर्वाचन क्षेत्र को कोलाहल नियंत्रण क्षेत्र (साईलेन्स जोन) घोषित किया गया है।

उपरोक्त अवधि में सक्षम अधिकारी की लिखित अनुज्ञा के बिना जिले में ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर पूर्णतः प्रतिबन्ध रहेंगा. मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 1985 की धारा-2 (घ) के अन्तर्गत सिवनी जिले में पदस्थ अनुविभागीय दण्डाधिकारी, सिवनी तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार सिवनी को उक्त अधिनियम के तहत सक्षम अधिकारी घोषित किया जाता है।

निर्वाचन प्रयोजनों के लिए आम सभाओं के दौरान किसी भी प्रकार के वाहनों में लगाये गये लाउड स्पीकर या सार्वजनिक अभिभाषण प्रणाली या किसी भी प्रकार के ध्वनि प्रवर्धक का प्रयोग रात्रि में 10.00 बजे से प्रातः 6.00 बजे के मध्य नहीं किया जावेगा। अर्थात् किसी भी प्रकार की ध्वनि विस्तार यंत्र के उपयोग की अनुमत्ति प्रातः 6.00 बजे के पूर्व व रात्रि 10.00 के बाद नहीं दी जा सकेगी।

वाहनों से चुनाव प्रचार की अनुमति आवेदन करने पर ही दी जा सकेंगी। वाहन से प्रचार करते समय अनुमति के साथ वाहन का पंजीयन रखना अनिवार्य होगा तथा बिना अनुमत्ति लाउडस्पीकर / ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग या अनुमति में निर्दिष्ट अवधि व्यतीत हो जाने के पश्चात् लाउडस्पीकर / ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग करते पाये जाने की दशा में ध्वनि विस्तारक यंत्र एवं वाहन जप्त कर लिया जायेंगा तथा दोषी के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही की जायेंगी।

सिवनी में नकली खाद का काला कारोबार: नकली डीएपी खाद से भरा ट्रक जप्त, बरघाट पुलिस ने किया अपराध पंजीबद्ध

सिवनी: बरघाट विकासखंड में नकली डीएपी खाद के कारोबार का भंडाफोड़ करते हुए कृषि विभाग द्वारा बड़ी कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई में नकली डीएपी खाद से भरे एक ट्रक को जप्त कर बरघाट थाने में खड़ा कराया गया, साथ ही देर रात एफआईआर दर्ज कराई गई। इस मामले में पुलिस द्वारा अपराध क्रमांक 331/24 के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी गई है।

आष्टा रोड पर पकड़ा गया नकली खाद से भरा ट्रक

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आष्टा-गगेरूआ मार्ग पर दिन में नकली खाद का ट्रक पीकअप वाहनों के माध्यम से खाली किया जा रहा था। दो पीकअप वाहन नकली व अमानक खाद भरकर पहले ही रवाना हो चुके थे। सूचना पर तत्काल कृषि विभाग की टीम ने दबिश दी, लेकिन मौके पर नकली खाद मंगवाने वाला मुख्य आरोपी तथा पिकअप वाहन चालक फरार हो गया।

मौके पर मौजूद ट्रक चालक तथा अन्य व्यक्तियों की उपस्थिति में कृषि विभाग द्वारा पंचनामा की कार्रवाई करते हुए ट्रक को पुलिस थाने लाया गया। इस पूरे प्रकरण में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

विभिन्न धाराओं में अपराध पंजीबद्ध

कृषि विभाग की शिकायत पर थाना बरघाट में आरोपी सुनील राहंगडाले पिता शिवचरण राहंगडाले, निवासी केकड़ी के विरुद्ध अपराध क्रमांक 331/24 दर्ज किया गया है।
प्रकरण में धारा 19(C) उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 की धारा 3 एवं 7, ईसी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस के अनुसार, जांच उपरांत धाराएं और भी बढ़ सकती हैं। साथ ही, नकली खाद कारोबार में शामिल अन्य व्यक्तियों के नाम भी जांच में सामने आने की संभावना है, जिन पर भी कार्रवाई की जाएगी।

किसानों में आक्रोश, ठोस कार्रवाई की मांग

इस नकली डीएपी खाद के कारोबार का खुलासा होते ही क्षेत्र के किसानों में आक्रोश फैल गया है। किसानों ने पुलिस एवं प्रशासन से मांग की है कि इस प्रकार के फर्जीवाड़े में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में अन्नदाता किसानों के साथ ऐसा छल न हो सके।

बरघाट विकासखंड में लंबे समय से डीएपी के नाम पर नकली खाद बेचे जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं, और अब कृषि विभाग की कार्रवाई के बाद इस गिरोह के कुछ मगरमच्छ सतर्क हो गए हैं और बचाव के रास्ते खोजने में लगे हैं।

ट्रक बालाघाट के लिए हुआ था रवाना, 300 रुपये की खाद 1600 में बेची जा रही थी

बताया जा रहा है कि नकली डीएपी से भरा ट्रक बालाघाट भेजा जा रहा था, और बिल्टी के अनुसार खाद की कीमत मात्र ₹300 प्रति बोरी थी। लेकिन यही खाद डीएपी के नाम पर किसानों को ₹1500-1600 प्रति बोरी बेची जा रही थी

कृषि विभाग की टीम का सराहनीय कार्य

इस बड़ी कार्रवाई में कृषि विभाग के प्रफुल्ल घोडेसवार (सहायक संचालक कृषि), राजेश मेश्राम (सहायक संचालक कृषि), और आर.डी. नायक (कृषि विभाग बरघाट) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
इनकी सक्रियता और तत्परता से किसानों के हित में यह कार्रवाई संभव हो सकी, जिसकी क्षेत्र में सराहना हो रही है।

जांच जारी है और संभावना जताई जा रही है कि नकली खाद के इस गोरखधंधे में और भी कई नाम सामने आ सकते हैं, जिन पर आने वाले दिनों में बड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सिवनी: ज्यारत नाका में निर्माणाधीन पुल के पास मिला अज्ञात शव; पुलिस जांच में जुटी

सिवनी: सिवनी कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ज्यारत नाका इलाके में उस समय सनसनी फैल गई जब स्थानीय लोगों ने निर्माणाधीन पुल के पास एक अज्ञात व्यक्ति का शव देखा। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच में जुट गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह शव ज्यारत नाका क्षेत्र में स्थित उस पुल के समीप मिला है, जिसका निर्माण कार्य वर्तमान में जारी है। शव की स्थिति देखकर प्रथम दृष्टया से यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि इसकी वजह क्या हो सकती है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक शव की पहचान सार्वजनिक नहीं की है।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि सुबह के समय जब वे पुल के पास से गुजर रहे थे, तब उन्होंने पुल में एक संदिग्ध अवस्था में शव देखा। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचित किया गया।

अधिक जानकारी की प्रतीक्षा है….

FASTag Annual Pass: ₹3000 में एक साल काम करेगा FASTag, 15 अगस्त शुरू होगी सुविधा; जानिए पूरी डिटेल

FASTag Annual Pass: देशभर के हाईवे यात्रियों के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव सामने आया है। 15 अगस्त 2025 से राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक नया FASTag आधारित वार्षिक पास शुरू करने की घोषणा की है, जिसकी कीमत ₹3,000 रखी गई है। यह पास केवल गैर-व्यावसायिक निजी वाहनों जैसे कार, जीप और वैन के लिए मान्य होगा। यह नई नीति न केवल टोल प्लाजा पर लगने वाले भीड़ को कम करेगी, बल्कि सफर को और अधिक सहज और सुगम बना देगी।

क्या है ₹3000 वाला FASTag Annual Pass?

यह FASTag आधारित वार्षिक पास एक साल तक मान्य रहेगा या फिर 200 ट्रिप पूरे होने तक, जो भी पहले हो। इस योजना के तहत एक बार भुगतान के बाद, वाहन मालिक देशभर के सभी नेशनल हाईवे पर आसानी से यात्रा कर सकते हैं। अब हर बार टोल पर पैसे देने की झंझट नहीं रहेगी।

किन वाहनों के लिए लागू होगा यह FASTag Annual Pass?

यह पास विशेष रूप से गैर-व्यावसायिक निजी वाहनों के लिए उपलब्ध कराया गया है, जैसे कि:

  • कार
  • जीप
  • वैन

व्यावसायिक वाहनों, ट्रकों, बसों आदि को इस योजना में शामिल नहीं किया गया है।

FASTag Annual Pass की वैधता और उपयोग की सीमा

यह योजना पूरी तरह से समय और ट्रिप आधारित है:

  • 1 वर्ष की वैधता, पास के एक्टिवेशन की तारीख से
  • अधिकतम 200 ट्रिप्स तक की अनुमति
  • जो भी पहले पूरी हो, वही इस पास की समाप्ति की तिथि होगी

इस प्रकार, उपयोगकर्ता जितना अधिक ट्रैवल करेंगे, उतना ही इस योजना का लाभ मिलेगा।

राजमार्ग यात्रा को कैसे बनाएगा यह पास सहज और किफायती?

NHAI और MoRTH का यह कदम उन लाखों वाहन चालकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो नियमित रूप से हाईवे का उपयोग करते हैं। इसके प्रमुख लाभों में शामिल हैं:

  • हर टोल पर रुकने की आवश्यकता नहीं
  • लंबी कतारों से छुटकारा
  • समय की बचत और ईंधन की खपत में कमी
  • सिंगल पेमेंट से पूरे साल का टोल कवर

60 किलोमीटर की सीमा विवादों का समाधान

अब तक टोल प्लाजा के 60 किलोमीटर दायरे में मौजूदगी को लेकर बहुत से विवाद और शिकायतें सामने आती रही हैं। यह वार्षिक पास उन सभी चिंताओं को खत्म करता है क्योंकि इसमें ट्रिप काउंट आधारित प्रणाली लागू की गई है। इसका अर्थ है कि वाहन चालक चाहे किसी भी टोल से यात्रा करें, उसे केवल ट्रिप गिनती में शामिल किया जाएगा, दूरी को लेकर कोई पेचीदगी नहीं होगी।

FASTag और पास एक्टिवेशन की प्रक्रिया

राजमार्ग यात्रा ऐप (Rajmarg Yatra App) और NHAI तथा MoRTH की आधिकारिक वेबसाइटों पर जल्द ही एक डेडिकेटेड लिंक उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे आप अपना पास:

  • खरीद सकते हैं
  • सक्रिय (Activate) कर सकते हैं
  • रिन्यू (Renew) कर सकते हैं

यह प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल और उपयोगकर्ता के अनुकूल होगी।

भविष्य में कैसा रहेगा टोल भुगतान का परिदृश्य?

इस योजना से संकेत मिलता है कि सरकार भविष्य में पूरी तरह से डिजिटल टोल प्रणाली की ओर बढ़ रही है। FASTag आधारित वार्षिक पास का उद्देश्य है:

  • कैशलेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देना
  • डिजिटल इंडिया मिशन को मजबूती देना
  • पर्यावरण संरक्षण द्वारा कार्बन फुटप्रिंट में कटौती

यह योजना किन यात्रियों के लिए सबसे उपयोगी है?

नियमित हाईवे यात्रियों के लिए यह योजना बेहद लाभकारी सिद्ध होगी, जैसे:

  • कार्यालय जाने वाले लोग
  • छोटे व्यवसायी और व्यापारी
  • परिवार के साथ यात्रा करने वाले
  • पर्यटन प्रेमी और लॉन्ग ड्राइव के शौकीन

अगर कोई व्यक्ति महीने में औसतन 15-20 बार हाईवे का उपयोग करता है, तो यह योजना उसकी टोल लागत को 50% तक घटा सकती है

भारत में टोल नीति में बड़ा सुधार

यह वार्षिक पास भारत की टोल नीति में एक ऐतिहासिक सुधार माना जा सकता है। इससे न सिर्फ सड़कों पर ट्रैफिक दबाव कम होगा, बल्कि उपयोगकर्ता अनुभव में भी नाटकीय सुधार होगा।

एक राष्ट्र, एक पास की अवधारणा को साकार करते हुए यह योजना देशभर में टोल यात्रा को अधिक समन्वित और प्रौद्योगिकी-आधारित बनाती है

आपको यह पास क्यों लेना चाहिए?

  • ₹3,000 की एकमुश्त राशि में पूरे साल की हाईवे यात्रा
  • अलग-अलग टोल दरों की उलझनों से मुक्ति
  • तेज, सुगम और विवादरहित यात्रा अनुभव
  • प्रत्येक यात्रा की गिनती ट्रिप से होगी, दूरी से नहीं

FASTag आधारित ₹3,000 वार्षिक पास एक ऐसा कदम है जो भारतीय हाईवे यात्रा को तकनीकी, किफायती और सुविधाजनक बनाता है। यदि आप नियमित रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों का उपयोग करते हैं, तो यह पास आपके समय, पैसे और मानसिक शांति – तीनों की बचत करेगा। आने वाले समय में यह पास हर निजी वाहन के लिए अनिवार्य विकल्प बन सकता है

सिवनी: कुरई घाटी में रासायनिक टैंकर पलटा, NH-44 पर बड़ा हादसा टला

सिवनी । सिवनी जिले के कुरई घाटी क्षेत्र में मंगलवार की शाम एक बड़ा हादसा टल गया, जब एक ज्वलनशील रसायन से भरा टैंकर अनियंत्रित होकर पलट गया। घटना राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर शाम करीब 5:30 बजे की है, जब हरियाणा से हैदराबाद की ओर जा रहा टैंकर (नंबर HR 38 AC 1873) अचानक संतुलन खो बैठा और सड़क किनारे पलट गया।

हादसे के बाद टैंकर से रसायन का रिसाव शुरू हो गया, जिससे तेज गंध और आंखों में जलन की शिकायतें सामने आने लगीं। यह रसायन अत्यंत ज्वलनशील होने के कारण क्षेत्र में खतरे की आशंका बढ़ गई।

घटना की जानकारी मिलते ही कुरई थाना पुलिस मौके पर पहुंची और सावधानीपूर्वक यातायात को एकतरफा (वनवे) कर दिया गया, जिससे किसी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।

थाना प्रभारी कृपाल सिंह तेकाम ने बताया कि टैंकर में मौजूद रसायन को हटाना जोखिम भरा है, इसलिए मामले की जानकारी जिला कलेक्टर को दी गई। कलेक्टर द्वारा विशेषज्ञों की टीम को तत्काल मौके पर भेजने के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा के दृष्टिकोण से विशेषज्ञों की अनुमति मिलने के बाद ही टैंकर हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

हालांकि, टैंकर पलटने के कारण मार्ग पर आंशिक बाधा उत्पन्न हुई, फिर भी प्रशासन की तत्परता से जाम जैसी स्थिति नहीं बनी और यातायात धीरे-धीरे नियंत्रित किया गया।

सिवनी: समितियों के प्रशासक सड़कों पर खड़े खड़े कर देते है वित्तीय दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर

सिवनी, बरघाट: वर्षों से सहकारिता विभाग में चुनाव न होने की स्थिति ने व्यवस्थाओं को बुरी तरह प्रभावित किया है। सहकारी समितियों में चुने हुए प्रतिनिधियों के अभाव ने प्रशासकों को संचालन की बागडोर सौंप दी है। स्थिति यह है कि एक ही प्रशासक के अधीन एकाधिक समितियों का संचालन किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।

धारनाकला, आष्टा, लालपुर और खामी जैसी समितियों का संचालन एक ही प्रशासक दिलीप कुमार डहेरिया के हाथों में है। इन समितियों की कार्यप्रणाली का स्तर इस बात से आंका जा सकता है कि वित्तीय दस्तावेज़ों पर प्रशासक सड़कों पर खड़े होकर हस्ताक्षर कर देते हैं, जबकि नियम के अनुसार समिति कार्यालय में उपस्थित होकर निर्णय लेना चाहिए।

समिति प्रबंधकों पर निर्भर प्रशासक का कार्यशैली

यह भी सामने आया है कि समिति के दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर इस बात पर निर्भर करता है कि प्रबंधक, प्रशासक की सेवा में कितना तत्पर है। जो समिति प्रबंधक प्रशासक की सेवा करता है, उसके दस्तावेज़ों पर तत्काल हस्ताक्षर हो जाता है, चाहे वह सड़क हो, चौराहा हो या वाहन के अंदर। दूसरी ओर, जो प्रबंधक सेवा में अक्षम रहता है, उसे सिवनी बुलाकर कार्य करवाया जाता है

इतना ही नहीं, सिवनी से समिति तक आने-जाने का भत्ता या खर्चा भी प्रशासक समिति प्रबंधक से वसूलने का प्रयास करते हैं, जबकि प्रशासक को सरकारी कर्मचारी होने के नाते यह सुविधा विभाग द्वारा मिलनी चाहिए। यह सब दर्शाता है कि समिति संचालन अब निजी संबंधों पर आधारित हो चला है, न कि नियमों और उत्तरदायित्वों पर।

प्रशासक की वित्तीय कार्यशैली और हस्ताक्षर प्रणाली पर प्रश्न

वर्तमान में समितियों के सभी वित्तीय दस्तावेजों, खाद्यान्न वितरण, बिल भुगतान, परमिट जारी करने आदि सभी प्रक्रियाओं में प्रशासक के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं। लेकिन सवाल यह है कि जब एक प्रशासक चार समितियों का एक साथ संचालन करता है और वह भी एक स्थान धारनाकला से, तो शेष समितियों की पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित होगी?

ऐसे में यह देखा गया है कि कई बार वाजिब बिलों पर तो आपत्ति जताई जाती है, लेकिन लाखों के भुगतान पर हस्ताक्षर कर दिए जाते हैं। यह असंतुलन दर्शाता है कि वित्तीय निर्णयों में भी नियमों की बजाय व्यक्तिगत समीकरणों का असर है।

लालपुर समिति में बारदाना घोटाले की निष्क्रिय जांच

लालपुर समिति में हुए लाखों रुपए के बारदाना घोटाले की जांच भी इसी प्रशासक द्वारा की गई थी। लेकिन जिला कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद वसूली की कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे स्पष्ट होता है कि जांच प्रक्रिया महज औपचारिकता बनकर रह गई है। जनपद सदस्य लेखराम हरिनखेड़े ने भी इस संबंध में विभागीय अधिकारियों से शिकायत की, परंतु आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई

यह भी स्पष्ट करता है कि उप पंजीयक सहकारिता जैसे अधिकारी भी राजनीतिक या पद के दबाव में कार्रवाई करने से बचते हैं। इस मामले में जिला प्रशासन की निष्क्रियता भी सामने आती है।

दैनिक वेतन भोगी को विक्रेता बनाना – नियमों की खुली अवहेलना

एक और गंभीर मामला यह है कि समिति में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को राशन विक्रेता का कार्यभार सौंपा गया है। जबकि वर्ष पूर्व सहकारिता उपपंजीयक सिवनी द्वारा स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि केवल पूर्णकालिक कर्मचारी ही विक्रेता बन सकते हैं।

यह सब तब हो रहा है जब समिति स्तर पर पहले ही 89 दिनी अनियमित नियुक्तियां की गई हैं, जिन पर स्थानीय युवाओं द्वारा गंभीर आरोप लगाए गए थे। यह संपूर्ण प्रक्रिया दर्शाती है कि समिति संचालन में नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं और इसे रोकने वाला कोई नहीं है।

समिति प्रबंधन की स्थिति और किसान हितों की अनदेखी

जहां सहकारी समितियों का गठन किसानों के हित में सस्ती दरों पर खाद, बीज, ऋण, और अनाज वितरण के उद्देश्य से हुआ था, वहीं आज उनकी सुनवाई दूर-दूर तक नहीं होती। समिति संचालन प्रशासक के कार्यालय से दूर, कभी चौराहे पर, कभी सड़क पर, तो कभी सिवनी के किसी निजी ठिकाने से होता है।

प्रशासक को न तो समिति परिसर में नियमित रूप से उपस्थित देखा जाता है, न ही किसानों की समस्याओं को लेकर कोई गंभीरता दिखाई जाती है। परिणामस्वरूप, समितियों पर किसानों का विश्वास कम होता जा रहा है।

जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब यह आवश्यक है कि:

  • सहकारिता विभाग में चुनाव शीघ्र कराए जाएं ताकि प्रतिनिधित्व बहाल हो।
  • एक प्रशासक को एक से अधिक समितियों का प्रभार न दिया जाए
  • प्रशासकों को निर्देशित किया जाए कि वे नियमित रूप से संबंधित समिति कार्यालय में उपस्थित रहें
  • वित्तीय मामलों की निरपेक्ष जांच के लिए स्वतंत्र एजेंसी नियुक्त की जाए
  • समितियों में नियमित, पारदर्शी और योग्यता आधारित नियुक्तियां हों।

वर्तमान समय में सहकारिता विभाग में चल रही प्रशासक आधारित व्यवस्था ने समितियों की स्वायत्तता और पारदर्शिता दोनों को प्रभावित किया है। किसानों के हितों को सुरक्षित रखने और व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि नियम आधारित संचालन, जवाबदेही और जवाबदेहीपूर्ण प्रशासन को तत्काल लागू किया जाए।

यदि सहकारिता को पुनः ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाना है, तो चुनाव, नियम पालन और पारदर्शिता अनिवार्य हैं।

सिवनी में कुएं की सफाई के दौरान 2 मजदूरों की दर्दनाक मौत, ऑक्सीजन की कमी बनी मौत की वजह

सिवनी (मध्य प्रदेश): सिवनी शहर के झूलेलाल कॉलोनी में सोमवार को एक दुखद घटना में दो मजदूरों की जान चली गई। ये हादसा एक घर के भीतर बने गहरे कुएं की सफाई के दौरान हुआ, जब दोनों मजदूर अचानक बेहोश हो गए और बाद में अस्पताल में मृत घोषित किए गए।

25 फीट गहरे कुएं में सफाई के दौरान बेहोश हुए मजदूर

यह घटना कोतवाली थाना क्षेत्र की है। पुलिस के अनुसार, दोनों मजदूर एक मकान की सीढ़ियों के नीचे बने करीब 25 से 30 फीट गहरे कुएं की सफाई कर रहे थे। इसी दौरान संभवतः ऑक्सीजन की कमी की वजह से वे बेहोश हो गए। मौके पर मौजूद अन्य लोगों ने तुरंत पुलिस और आपातकालीन सेवाओं को सूचना दी।

मृतकों की पहचान सोनू उइके और अशोक धुर्वे के रूप में हुई

मृत मजदूरों की पहचान सोनू उइके (30 वर्ष) और अशोक धुर्वे (35 वर्ष) के रूप में हुई है। सोनू सिवनी जिले के लखनादौन तहसील स्थित भानेरी गांव का निवासी था, जबकि अशोक मंडला जिले के नैनपुर थाना अंतर्गत कोकीवाड़ा गांव से था।

एसडीईआरएफ की मदद से रेस्क्यू, अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित

सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस और एसडीईआरएफ (राज्य आपदा मोचन बल) की टीम मौके पर पहुंची और दोनों मजदूरों को कुएं से बाहर निकालकर जिला अस्पताल पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने कानूनी कार्रवाई करते हुए पंचनामा तैयार कर शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है।

ऑक्सीजन की कमी से हुई मौत की आशंका, मकान मालिक बाहर रहते हैं

कोतवाली थाना प्रभारी किशोर वामनकर ने बताया कि जिस कुएं की सफाई की जा रही थी, उसकी ऊपरी सतह पर कंक्रीट का लेंटर डला हुआ था। इसके चलते हवा का आवागमन बाधित हो रहा था, जिससे ऑक्सीजन की कमी हो गई और यह हादसा हुआ। दोनों मृतक एक ठेकेदार के अधीन कार्यरत थे। जिस मकान में यह घटना हुई, उसकी मालकिन अभिलाषा बघेल वर्तमान में बाहर निवास कर रही हैं। सफाई कार्य उनके रिश्तेदारों की देखरेख में किया जा रहा था। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

सिवनी में 7 जुलाई को होगा मतदान: सुभाष वार्ड के पार्षद पद के लिए होगा मतदान

सिवनी: मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा मध्यप्रदेश के 9 नगरीय निकायों में एक-एक पार्षद के उप निर्वाचन का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। जिसमे सिवनी, बैरसिया, सांवेर, गौतमपुरा, ककरहटी, बिछिया, खांड, न्यूटन चिखली और भीकनगाँव शामिल है. ओं सभी 9 नगरीय निकायों में एक एक पार्षद पद के लिए उप निर्वाचन के लिये मतदान 7 जुलाई 2025 को होगा।

मध्यप्रदेश के 9 नगरीय निकायों उप निर्वाचन में 8 हजार 823 मतदाता मताधिकार का उपयोग करेंगे। निर्वाचन आयोग के अनुसार, इन सभी वार्डों में कुल 8,823 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। चुनाव के दौरान लोकतांत्रिक प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से सम्पन्न कराने की पूरी तैयारी की जा रही है।

वार्डवार मतदाता संख्या

राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव अभिषेक सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि उपरोक्त 9 नगरीय निकायों के वार्डों में मतदाता इस प्रकार हैं:

  • बैरसिया (वार्ड-7): 1,486 मतदाता
  • सिवनी (वार्ड-11): 1,946 मतदाता
  • सांवेर (वार्ड-7): 1,386 मतदाता
  • गौतमपुरा (वार्ड-15): 758 मतदाता
  • ककरहटी (वार्ड-13): 389 मतदाता
  • बिछिया (वार्ड-13): 576 मतदाता
  • खांड (वार्ड-8): 375 मतदाता
  • न्यूटन चिखली (वार्ड-4): 512 मतदाता
  • भीकनगांव (वार्ड-5): 1,395 मतदाता

इन सभी वार्डों में पार्षद पद रिक्त होने के कारण उप-चुनाव कराया जा रहा है।

निर्वाचन कार्यक्रम का विवरण

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार:

  • नाम निर्देशन पत्र भरने की तिथि: 16 जून से 23 जून 2025 तक
  • नामांकन पत्रों की जांच: 24 जून 2025
  • नाम वापस लेने की अंतिम तिथि: 26 जून 2025
  • प्रतीक आवंटन की तिथि: 26 जून 2025
  • मतदान की तिथि: 7 जुलाई 2025 (प्रातः 7 बजे से सायं 5 बजे तक)
  • मतगणना एवं परिणाम की घोषणा: 10 जुलाई 2025, प्रातः 9 बजे से