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COVID 19 UPDATE: पिछले 24 घंटो में 11 मौतें, कोविड के एक्टिव केस 7,264

भारत में कोविड-19 की स्थिति में एक बार फिर हल्का सुधार देखने को मिला है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, सोमवार (16 जून) को सक्रिय मामलों की संख्या घटकर 7,264 रह गई है, जो कि पिछले दिन की तुलना में 119 मामलों की गिरावट को दर्शाता है। हालांकि, इसी अवधि में 11 नई मौतों की पुष्टि भी की गई है।

भारत में कोविड-19 की मौजूदा स्थिति: भारत में सक्रिय मामलों की संख्या में गिरावट देखने को मिली है। रविवार को जहां 7,383 सक्रिय मामले थे, वहीं सोमवार को यह आंकड़ा घटकर 7,264 पर आ गया है। इसके साथ ही, पिछले 24 घंटे में 11 मरीजों की मौत हुई है, जिनमें से सबसे ज्यादा 7 मौतें केरल में दर्ज की गईं। इसके अलावा, दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से एक-एक मौत की सूचना मिली है।

मरने वालों की जानकारी: 33 वर्षीय युवक समेत बुज़ुर्ग शामिल

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, मृतकों में एक 33 वर्षीय युवक केरल से था जबकि अन्य सभी बुजुर्ग थे जो पहले से श्वसन तंत्र और पुरानी बीमारियों से पीड़ित थे। यह डेटा दर्शाता है कि कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग अभी भी संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हैं।

नए सबवैरिएंट्स से संक्रमण में हल्की वृद्धि

हाल ही में सामने आए कोविड-19 के नए सबवैरिएंट्स जैसे कि LF.7, XFG, JN.1, और NB.1.8.1 के कारण कुछ राज्यों में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। हालांकि संक्रमण की तीव्रता पहले जैसी नहीं है, फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि निगरानी और सतर्कता बनाए रखना अभी भी आवश्यक है।

राज्यवार रिपोर्ट: केरल में सबसे अधिक सक्रिय मामले

नीचे दी गई तालिका में 16 जून के अनुसार राज्यवार सक्रिय मामलों, नए मामलों और मौतों की संख्या दी गई है:

राज्यसक्रिय मामलेनए मामले (24 घंटे में)मौतें (24 घंटे में)
केरल1,920-877
गुजरात1,433-080
दिल्ली649-331
महाराष्ट्र540-381
कर्नाटक591+180
राजस्थान222+300
तमिलनाडु220-230

यह स्पष्ट है कि केरल और गुजरात जैसे राज्य अभी भी संक्रमण के उच्चतम स्तर पर हैं, हालांकि इनमें भी प्रतिदिन मामलों की संख्या में कमी देखी जा रही है।

विशेषज्ञों की राय: टारगेटेड बूस्टर की सिफारिश

कोविड-19 की हालिया स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि जनरल पब्लिक के लिए बड़े स्तर पर बूस्टर वैक्सीन अभियान चलाने की आवश्यकता नहीं है। इसके बजाय, यह सलाह दी गई है कि बूस्टर डोज़ केवल उन्हीं लोगों को दी जाए जो हाई रिस्क ग्रुप में आते हैं — जैसे कि बुजुर्ग, इम्यूनो-कॉम्प्रोमाइज़्ड व्यक्ति, और क्रॉनिक बीमारियों से ग्रसित लोग

हाइब्रिड इम्युनिटी (जो कि वैक्सीनेशन और पूर्व संक्रमण दोनों से विकसित हुई है) भी इस निर्णय का एक महत्वपूर्ण कारण है।

एहतियाती उपायों पर ज़ोर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक बार फिर ज़ोर दिया है कि चाहे संक्रमण की दर कम हो रही हो, लेकिन मास्क पहनना, हाथों की सफाई और भीड़भाड़ से बचाव जैसे कोविड उपयुक्त व्यवहार अब भी उतने ही जरूरी हैं।

केंद्रीय सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश जारी किए हैं, जिसमें सतर्कता बनाए रखने और स्वास्थ्य सेवाओं को तैयार रखने की सिफारिश की गई है।

समान लक्षणों वाले संक्रमणों से अंतर करना आवश्यक

विशेषज्ञों ने यह भी बताया है कि सीज़नल वायरल संक्रमणों और कोविड-19 के लक्षण काफी हद तक एक जैसे होते हैं — जैसे कि बुखार, थकान, खांसी, आदि। ऐसे में लोगों को किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए और लक्षण दिखने पर जल्द जांच कराना और इलाज शुरू करना जरूरी है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने पुनः लोगों से अपील की है कि वे रोकथाम के उपायों, खासकर मास्किंग और हाथ की सफाई पर विशेष ध्यान दें।

कोविड टेस्टिंग और हेल्पलाइन सेवाएं

यदि किसी व्यक्ति को कोविड-19 के लक्षण महसूस हों, तो वह नज़दीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या निजी अस्पताल में जाकर RT-PCR टेस्ट करवा सकता है। इसके अलावा, राष्ट्रीय कोविड हेल्पलाइन नंबर 1075 पर कॉल करके जरूरी सलाह प्राप्त की जा सकती है।

स्थिति नियंत्रण में लेकिन सतर्कता ज़रूरी

हालांकि वर्तमान आंकड़े राहत देने वाले हैं और संक्रमण की दर में कमी दर्शाते हैं, फिर भी नए वैरिएंट्स के चलते संक्रमण फिर से रफ्तार पकड़ सकता है। इसलिए हमें अपनी सतर्कता को कम नहीं करना चाहिए

स्वास्थ्य मंत्रालय और डॉक्टर्स की सलाह का पालन करते हुए, नियमित जांच, साफ-सफाई, मास्किंग और वैक्सीन अपडेट को बनाए रखना समय की मांग है।

सिवनी में भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा: 37 साल बाद भी नहीं बनी नहर, उल्टा किसानों को थमाए गए नोटिस

सिवनी (मध्यप्रदेश) – मध्यप्रदेश के जल संसाधन विभाग में जारी भ्रष्टाचार की बानगी इन दिनों अपने चरम पर है। सिवनी जिले के लखनादौन तहसील अंतर्गत गणेशगंज सहजपुरी ग्राम के डूंगरिया जलाशय से जुड़ी नहर का निर्माण आज तक नहीं हुआ, फिर भी किसानों को उसे क्षतिग्रस्त करने के नोटिस भेजे जा रहे हैं, जो अपने आप में एक शर्मनाक और चौंकाने वाली घटना है।

डूंगरिया जलाशय: जहां नहर का कोई अस्तित्व ही नहीं

साल 1987-88 में करोड़ों की लागत से बनाए गए डूंगरिया जलाशय का मुख्य उद्देश्य था – क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए नहरों के माध्यम से पानी पहुंचाना। लेकिन, 37 वर्षों के बाद भी एक इंच पक्की नहर का निर्माण नहीं हुआ। ऐसे में सवाल उठता है कि जब नहर बनी ही नहीं, तो किसानों ने उसे क्षतिग्रस्त कैसे किया?

कृषकों के साथ अन्याय की इंतहा

नहरों के नाम पर भ्रष्टाचार का खेल ऐसा खेला गया है, जहां हर साल मेंटेनेंस के नाम पर लाखों रुपए का फर्जीवाड़ा किया गया। मीडिया द्वारा की गई जमीनी हकीकत की पड़ताल में साफ हुआ कि जिस पक्की नहर का ज़िक्र किया जा रहा है, वह कागज़ों में ही मौजूद है। लेकिन किसानों को नोटिस भेज दिए गए कि उन्होंने इस नहर को नुकसान पहुंचाया है।

एसडीओ और सब इंजीनियर की मिलीभगत उजागर

भ्रष्टाचार की इस पूरी कहानी में दो प्रमुख नाम सामने आ रहे हैं – एसडीओ ऋषभ साहू और सब इंजीनियर शंकरलाल त्रिपाठी। दोनों अधिकारियों पर नहर निर्माण न होने के बावजूद मेंटेनेंस की राशि खर्च करने और किसानों पर दोष मढ़ने का आरोप है। यह अधिकारी मीडिया और आमजन से दूरी बनाकर अब जवाबदेही से बचते नजर आ रहे हैं

नहर मरम्मत का बहाना, असल में फर्जीवाड़े की कहानी

हर वर्ष लाखों रुपये नहर मरम्मत के नाम पर स्वीकृत किए गए, लेकिन स्थल पर आज तक कोई पक्की नहर मौजूद नहीं। यह सब स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि विभागीय मिलीभगत से सरकारी धन का गबन हो रहा है। कृषकों को लाभ पहुंचाने के बजाय उन्हें दोषी बनाकर मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है

किसानों की पीड़ा: एक बूंद पानी के लिए तरसते खेत

37 वर्षों में एक बार भी डूंगरिया जलाशय से नहर द्वारा पानी नहीं छोड़ा गया, जिससे सैकड़ों किसान अब तक सिंचाई के लिए वर्षा और टैंकरों पर निर्भर हैं। जब किसानों ने शासन से जवाब मांगा, तब उल्टा उन्हें नहर तोड़ने के झूठे आरोप में नोटिस थमा दिए गए।

“कागज़ों में नहर, जमीनी हकीकत में धोखा”

स्थानीय किसानों का कहना है कि नहर तो कभी बनी ही नहीं, लेकिन फिर भी विभाग की ओर से यह दिखाया जा रहा है कि पक्की नहरें बनी हैं और वे क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। सवाल यह भी उठता है कि यदि नहरें बनी होतीं, तो वे अब तक क्षतिग्रस्त कैसे हो जातीं?

कार्यपालन यंत्री पर ठीकरा फोड़ने की कोशिश

जब इस मामले में संबंधित अधिकारियों से जानकारी मांगी गई, तो एसडीओ और सब इंजीनियर ने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कार्यालय में पदस्थ कार्यपालन यंत्री वीपी चौधरी पर सारा दोष डाल दिया। इससे यह स्पष्ट होता है कि विभागीय समन्वय से भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें जमाई जा रही हैं।

राज्य सरकार और शासन का मौन रहना चिंताजनक

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा भ्रष्टाचार मुक्त शासन के दावे किए जाते हैं, लेकिन इस प्रकार के गंभीर मामले पर शासन की चुप्पी सवाल खड़े करती है। आखिरकार करोड़ों की लागत से बना डूंगरिया जलाशय अब तक उपयोग में क्यों नहीं लाया गया?

सीएम हेल्पलाइन और जनसुनवाई में शिकायतें बेअसर

स्थानीय किसानों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, जनसुनवाई और कलेक्टर कार्यालय तक गुहार लगाई, लेकिन कहीं से कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे यह प्रतीत होता है कि शासन-प्रशासन का भरोसा अब किसानों की नजरों में टूटता जा रहा है

इस भ्रष्टाचार से कौन बचाएगा किसानों को?

सवाल यह है कि जब नहर कभी बनी ही नहीं, तो मरम्मत किस चीज़ की हो रही है और पैसा कहां जा रहा है? आखिर किसानों को नोटिस थमाकर किस अपराध की सजा दी जा रही है?

भ्रष्टाचार पर त्वरित न्याय और कार्रवाई की आवश्यकता

हमारी मांग है कि:

  • इस पूरे मामले की सीबीआई या ईओडब्ल्यू से निष्पक्ष जांच कराई जाए।
  • जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
  • जिन किसानों को झूठे आरोपों में फंसाया गया, उनके खिलाफ नोटिस वापस लेकर उन्हें मानसिक शांति दी जाए।
  • डूंगरिया जलाशय की नहर का वास्तविक निर्माण कार्य कराया जाए, ताकि किसान आगामी वर्षों में सिंचाई से वंचित न रहें।

यह मामला केवल एक नहर या एक गांव का नहीं, बल्कि पूरे राज्य के सिस्टम की विफलता और भ्रष्टाचार का प्रतीक है। यदि समय रहते कार्यवाही नहीं की गई, तो किसान हितैषी कहे जाने वाले प्रशासन की छवि को गहरा आघात पहुंचेगा।

सिवनी के उत्कर्ष अवधिया ने NEET UG 2025 में हासिल की ऑल इंडिया रैंक 2, जानिए उनकी तैयारी की पूरी कहानी

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET UG 2025) में मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के कान्हीवाड़ा के होनहार छात्र उत्कर्ष अवधिया ने 99.9999095 पर्सेंटाइल के साथ ऑल इंडिया रैंक (AIR) 2 प्राप्त कर पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया है। मात्र कुछ अंकों के अंतर से वे टॉपर की रैंक से चूक गए, लेकिन उनकी उपलब्धि अपने आप में एक मिसाल है।

उत्कर्ष अवधिया की पृष्ठभूमि और पारिवारिक सहयोग

उत्कर्ष अवधिया, जो पिछले 10 वर्षों से इंदौर में रह रहे हैं, एक मध्यमवर्गीय सहायक परिवार से आते हैं। उनके पिता आलोक अवधिया, एचडीएफसी बैंक में शाखा प्रबंधक के रूप में कार्यरत हैं, जबकि उनकी माँ आशी अवधिया एक गृहिणी हैं। उनके परिवार में एक छोटा भाई भी है जो अभी स्कूली शिक्षा प्राप्त कर रहा है।

परिवार ने न सिर्फ आर्थिक रूप से, बल्कि भावनात्मक रूप से भी उत्कर्ष को हर मोड़ पर सहयोग प्रदान किया। यही सहयोग उनकी लगातार तैयारी और मानसिक मजबूती का आधार बना।

कक्षा 11 से शुरू हुई NEET की केंद्रित तैयारी

उत्कर्ष ने बताया कि उन्होंने कक्षा 10 में ही कोचिंग क्लास जॉइन कर ली थी, लेकिन उनकी गंभीर और केंद्रित NEET तैयारी वास्तव में कक्षा 11 से शुरू हुई। उन्होंने साफ तौर पर कहा,

“मैंने अपनी तैयारी को NCERT पुस्तकों पर केंद्रित रखा। कोई भी विषय हो, उसका मूल NCERT से समझना मेरे लिए प्राथमिकता थी।”

उनकी यह रणनीति आज के प्रतिस्पर्धी माहौल में बेहद कारगर साबित हुई। जहां कई छात्र ढेर सारी किताबों में उलझ जाते हैं, उत्कर्ष ने सरलता, गहराई और नियमितता को अपनी रणनीति का मूल बनाया।

उत्कृष्ट अनुशासन और दैनिक दिनचर्या का पालन

NEET UG जैसे कठिन परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए अनुशासन अनिवार्य होता है। उत्कर्ष ने अपनी दिनचर्या को सटीकता के साथ निभाया। वे प्रत्येक दिन सुबह 5:30 से 6:00 बजे के बीच उठते थे और दिन की शुरुआत पढ़ाई से करते थे।

उनकी एक दिन की रूटीन इस प्रकार थी:

  • सुबह 5:30 – 6:00 बजे: उठना और 1-2 घंटे पढ़ाई
  • सुबह 8:00 – दोपहर 2:00 बजे: कोचिंग क्लास में गहन अध्ययन
  • दोपहर बाद: नोट्स की समीक्षा और विषयवार रिवीजन
  • शाम: मानसिक ताजगी के लिए वॉलीबॉल या बैडमिंटन खेलना
  • रात: मॉक टेस्ट एनालिसिस और अगले दिन की योजना बनाना

उनकी यह संतुलित जीवनशैली न केवल उन्हें मानसिक रूप से स्थिर बनाती थी, बल्कि तनावमुक्त पढ़ाई में भी मदद करती थी।

पढ़ाई में आनंद और आत्म-प्रेरणा

उत्कर्ष का कहना है कि उन्हें पढ़ाई से असली आनंद आता था। उनका पढ़ाई के प्रति ऐसा प्रवाह और समर्पण था कि उन्हें समय का अहसास ही नहीं होता। उन्होंने कहा,

“मैं अपने लक्ष्य को लेकर इतना समर्पित था कि किसी बाहरी दबाव की आवश्यकता नहीं थी। मेरी आत्म-प्रेरणा ही मेरी सबसे बड़ी ताकत बनी।”

मॉक टेस्ट और पिछले साल के पेपर का महत्व

उत्कर्ष ने अपनी सफलता का बड़ा श्रेय मॉक टेस्ट और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों को दिया। नियमित रूप से मॉक टेस्ट देने से न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ा बल्कि उन्होंने अपनी कमजोरियों को समय रहते पहचान कर उन्हें दूर किया।

वे कहते हैं,

“मैं हर टेस्ट से पहले अपने कमजोर टॉपिक्स को चिन्हित करता था और उन्हें सॉल्व करने के लिए एक शेड्यूल बनाता था। यह नियमितता ही मुझे टॉप रैंक तक लेकर आई।”

रिवीजन की रणनीति और प्लानर की भूमिका

उत्कर्ष ने परीक्षा से पहले 2 से 3 बार सम्पूर्ण पाठ्यक्रम का रिवीजन किया। उन्होंने कहा कि कोचिंग संस्थान द्वारा दिए गए साप्ताहिक प्लानर और स्वयं बनाए गए रिवीजन शेड्यूल ने उन्हें हर विषय पर पकड़ बनाए रखने में मदद की।

उन्होंने NEET के इच्छुक उम्मीदवारों को सुझाव देते हुए कहा,

“यदि आपका संस्थान विस्तृत योजना नहीं देता है, तो खुद का एक रिवीजन प्लान तैयार करें और उसे सख्ती से फॉलो करें। यही आपकी नींव मजबूत करेगा।”

भविष्य के NEET उम्मीदवारों के लिए उत्कर्ष की सलाह

पहली बार परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए:

  • NCERT पर पकड़ मजबूत करें
  • कक्षा के लेक्चर में अधिकतम ध्यान दें
  • टॉपिक वाइज टेस्ट दें
  • समय का मैनेजमेंट सीखें

रीअटेम्प्ट करने वाले छात्रों के लिए:

  • पिछली गलतियों का गहन विश्लेषण करें
  • केवल आवश्यक टॉपिक्स पर फोकस करें
  • मेंटल ब्लॉक्स को दूर करें
  • अभ्यास और मॉक टेस्ट को गंभीरता से लें

उत्कर्ष अवधिया की सफलता की कुंजी

तत्वविवरण
मुख्य संसाधनNCERT पुस्तकें, मॉक टेस्ट, पिछले वर्ष के प्रश्नपत्र
अनुशासननियमित दिनचर्या, संतुलित जीवनशैली
समर्थन प्रणालीपरिवार, कोचिंग, आंतरिक प्रेरणा
टाइम मैनेजमेंटपढ़ाई और मनोरंजन के बीच संतुलन
फोकस क्षेत्ररिवीजन, टेस्ट एनालिसिस, आत्म-अवलोकन

उत्कर्ष अवधिया की सफलता की कहानी हमें यह सिखाती है कि दृढ़ निश्चय, योजना, अनुशासन और आत्म-प्रेरणा के बल पर कोई भी छात्र NEET जैसी कठिन परीक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त कर सकता है। उनके अनुभव और रणनीतियाँ हर उस छात्र के लिए अमूल्य हैं जो NEET UG 2026 या आगामी वर्षों की तैयारी में लगा हुआ है।

सिवनी पुलिस को बड़ी सफलता: 720 ग्राम गांजे के साथ तस्कर वेदप्रकाश झरिया गिरफ्तार

सिवनी: सिवनी जिले में अवैध मादक पदार्थों, सट्टा, जुआ और शराब के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत सिवनी पुलिस को एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हाथ लगी है।

पुलिस अधीक्षक सुनील मेहता के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गुरुदत्त शर्मा व नगर पुलिस अधीक्षक श्रीमती पूजा पांडे के मार्गदर्शन में कोतवाली पुलिस ने एक गांजा तस्कर को रंगे हाथ गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है।

सूचना पर तत्काल कार्रवाई, आरोपी गिरफ्तार

दिनांक 12 जून 2025 को पुलिस को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई थी कि निर्माणाधीन रेलवे स्टेशन ग्राउंड के पास एक संदिग्ध व्यक्ति मादक पदार्थ लेकर घूम रहा है। सूचना की पुष्टि होते ही थाना कोतवाली की टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और आरोपी को पकड़ लिया।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान व बरामद सामग्री

गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान वेदप्रकाश झारिया, पिता दुखीराम झारिया, उम्र 55 वर्ष, निवासी रेलवे स्टेशन रोड, तिलक वार्ड, सिवनी के रूप में की गई। उसकी तलाशी के दौरान सफेद थैले में रखा 720 ग्राम गांजा बरामद किया गया, जिसकी बाजार कीमत लगभग ₹7,000 आँकी गई है।

इसके अलावा आरोपी के पास से:

  • ₹1,510 नगद राशि
  • रेडमी कंपनी का एंड्रॉयड मोबाइल फोन (कीमत लगभग ₹12,000)
    भी जब्त किए गए हैं।

एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज

पूछताछ के दौरान आरोपी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके चलते एनडीपीएस एक्ट की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।

पुराने आपराधिक रेकॉर्ड की भी हो रही जांच

यह उल्लेखनीय है कि आरोपी वेदप्रकाश झारिया पर पूर्व में भी अवैध मादक पदार्थ तस्करी से जुड़े तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस अब उसकी पूर्ववर्ती गतिविधियों की भी बारीकी से जांच कर रही है।

एक्टिव टीम: जिनकी रही विशेष भूमिका

  • थाना प्रभारी: किशोर वामनकर
  • उप निरीक्षक: दयाराम शरणगत, राहुल काकोडिया
  • सहायक उप निरीक्षक: रामअवतार डहेरिया
  • आरक्षक: अमित रघुवंशी, विक्रम देशमुख, शिवम बघेल, सिद्धार्थ दुबे, अजेन्द्र पाल
  • महिला आरक्षक: फरहीन

पुलिस की आमजन से अपील

पुलिस विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि नशे के खिलाफ चल रही मुहिम में सक्रिय भागीदारी निभाएं और यदि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत निकटतम पुलिस थाने में सूचना दें।

सिवनी: मोटरसाइकिल चोर सत्यम और अंशुल गिरफ्तार, कोतवाली पुलिस ने एक्टिवा और स्प्लेंडर प्रो की जप्त

सिवनी: जिले में बढ़ते अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस अधीक्षक श्री सुनील मेहता के कुशल नेतृत्व में लगातार सघन अभियान चलाए जा रहे हैं। उनके दिशा-निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गुरूदत्त शर्मा एवं नगर पुलिस अधीक्षक श्रीमती पूजा पांडे के मार्गदर्शन में कोतवाली पुलिस टीम अपराधियों की धरपकड़ कर आम नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने हेतु सतत प्रयासरत है।

इसी कड़ी में कोतवाली पुलिस को चोरी की दो मोटरसाइकिल बरामद करने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है।

घटना का विवरण:

दिनांक 15/06/2025 को पुलिस को एक महत्वपूर्ण सूचना प्राप्त हुई कि इलाहाबाद बैंक के पीछे कुछ संदिग्ध व्यक्ति चोरी की मोटरसाइकिलों को अपने घर में छिपाकर बेचने की तैयारी कर रहे हैं। सूचना की पुष्टि होते ही पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सत्यम तिवारी पिता राम भरोस तिवारी, उम्र 20 वर्ष, निवासी सोनाडोंगरी, एवं अंशुल तिवारी पिता नंदकिशोर, उम्र 20 वर्ष, निवासी बटवानी थाना लखनवाड़ा, के किराये के मकान पर दबिश दी।

तलाशी के दौरान वहां से दो मोटरसाइकिलें बरामद की गईं –

  1. सफेद रंग की होंडा एक्टिवा (क्रमांक MP22S0783)
  2. हीरो स्प्लेंडर प्रो (क्रमांक MP22MF3494)

आरोपियों ने किया अपराध स्वीकार:

पूछताछ में दोनों आरोपियों ने मिलकर कान्हीवाड़ा एवं बंडोल क्षेत्र से उक्त दोनों मोटरसाइकिलों की चोरी करना स्वीकार किया। आरोपियों से बरामद वाहन की कुल अनुमानित कीमत लगभग ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) आंकी गई है।

कानूनी कार्रवाई:

दोनों चोरी की मोटरसाइकिलें धारा 35(1-5) BNS एवं 303(2) BNS के अंतर्गत जप्त की गई हैं। आगे की जांच जारी है।

गिरफ्तार आरोपी:

  1. सत्यम तिवारी, पिता – राम भरोस तिवारी, उम्र – 20 वर्ष, निवासी – सोनाडोंगरी
  2. अंशुल तिवारी, पिता – नंदकिशोर, उम्र – 20 वर्ष, निवासी – बटवानी, थाना लखनवाड़ा

संचालित कार्रवाई में विशेष भूमिका निभाने वाले पुलिसकर्मी:

  • निरीक्षक किशोर बामनकर
  • सहायक उप निरीक्षक संतोष बैन
  • प्रधान आरक्षक मनोज पाल, विशाल भांगरे
  • आरक्षक विक्रम देशमुख, सिद्धार्थ दुबे, लोकेश सरयाम, अजेन्द्र पाल, दिलीप उइके
  • सैनिक कृष्णकुमार सोनी

सिवनी: राशन दुकानों तक पहुंचने से पहले वेयरहाउस में गीला किया जा रहा गेहूं, अनाज की कालाबाजारी का नया तरीका उजागर

सिवनी, बरघाट: गरीबों को मुफ्त खाद्यान्न योजना के अंतर्गत वितरण किए जा रहे गेहूं में नमी व गीलापन की लगातार शिकायतों ने इस बार एक बड़ा खुलासा कर दिया है। बरघाट तहसील के आखीवाड़ा गांव की राशन दुकान में जब गेहूं की बोरियों को खोला गया, तो उसमें अत्यधिक नमी और गीलापन पाया गया। जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि गोदाम स्तर से ही गेहूं को पानी से भिगोया जा रहा था, जिससे उसका वजन 52 किलो से बढ़कर 54 किलो तक पहुंच गया था।

आखीवाड़ा राशन दुकान में जब परिवहन कर्ता के हम्मालों द्वारा गेहूं की बोरियां खाली की गईं, तब कुछ बोरियों का वजन सामान्य से अधिक पाया गया। 53 से 54 किलो तक के वजन वाली इन बोरियों को जब खोला गया तो पाया गया कि गेहूं में न केवल नमी थी, बल्कि उसे पानी से सींचा गया था। इस कृत्य के पीछे उद्देश्य साफ है — बोरियों का वजन बढ़ाकर अधिक मात्रा में राशन प्रदाय दिखाना और इस प्रक्रिया में अनाज की कालाबाजारी को अंजाम देना

तहसीलदार के आदेश पर पटवारी ने किया पंचनामा

तहसीलदार अमरित लाल धुर्वे ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हल्का पटवारी अंकित मरशकोले को मौके पर भेजा। पटवारी ने महिला स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित राशन दुकान में पहुँचकर, सरपंच, ग्रामीणों और राशन कार्ड धारकों की उपस्थिति में गेहूं का परीक्षण कर विधिवत पंचनामा तैयार किया। इस जांच से साफ हो गया कि गेहूं की नमी प्राकृतिक नहीं थी, बल्कि उसे कृत्रिम रूप से भिगोया गया था।

पूर्व से मिल रही थी गेहूं और चावल में नमी की शिकायतें

यह पहला मामला नहीं है। अतीत में भी राशन में वितरण किए जा रहे गेहूं और चावल में नमी की शिकायतें मिलती रही हैं। लेकिन हर बार गोदाम प्रभारी द्वारा दवा छिड़कने की बात कहकर मामले को टाल दिया जाता था। इस बार जांच में पीपी बोरियों में भरे गेहूं का वजन 52 से 54 किलो तक पाया गया, जो सामान्य वजन से अधिक है, और साथ ही उसमें स्पष्ट गीलापन मौजूद था

प्रधानमंत्री की मुफ्त राशन योजना पर लग रहा कलंक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित मुफ्त खाद्यान्न वितरण योजना देश के करोड़ों गरीब परिवारों के लिए वरदान है। परंतु कुछ लालची गोदाम कर्मचारी और वितरण एजेंसियां इस योजना को बदनाम करने पर तुली हुई हैं। अनाज की कालाबाजारी के इस नए तरीके से न केवल गरीबों को खराब गुणवत्ता वाला राशन मिल रहा है, बल्कि यह योजना की साख को भी नुकसान पहुंचा रहा है।

राशन विक्रेताओं पर गिर रहा जनता का आक्रोश

जब गीला और खराब गेहूं राशन दुकान तक पहुंचता है, तो राशन वितरक को गरीबों के आक्रोश का सामना करना पड़ता है। असल दोषियों की पहचान न होने की स्थिति में राशन विक्रेताओं की छवि भी धूमिल होती है, जबकि वे स्वयं इस अनियमितता का शिकार होते हैं। विभागीय उदासीनता इस स्थिति को और गंभीर बना रही है।

जरूरी है दोषियों पर कड़ी कार्रवाई

ग्रामीणों द्वारा ठोस कार्रवाई की मांग की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर लगाम लग सके। विभाग को चाहिए कि वे ऐसे गोदाम प्रभारियों और संबंधित कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करें, जो बोरी का वजन बढ़ाकर भ्रष्टाचार में लिप्त हैं

तीन माह का राशन वितरण और बढ़ी जिम्मेदारी

सरकार के निर्देशानुसार जून, जुलाई और अगस्त तीनों माह का राशन वितरण एक साथ किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में, बड़ी मात्रा में चावल और गेहूं का परिवहन व वितरण किया जा रहा है। इतनी बड़ी मात्रा में खाद्यान्न का सही तरीके से निरीक्षण करना जरूरी है, लेकिन ऐसी घटनाएं साबित करती हैं कि सतर्कता और निगरानी में भारी लापरवाही बरती जा रही है।

बोरियों में नहीं था कोई मार्का और टैग

जांच में एक और गंभीर लापरवाही सामने आई — राशन दुकान में प्राप्त गेहूं की बोरियों पर न तो कोई मार्का था, न टैग। नियमानुसार, किसी भी खाद्यान्न भंडारण बोरियों में राइस मिल या खरीदी केंद्र का नाम, स्थान, समिति का नाम और वर्ष अंकित होना चाहिए, लेकिन यहां सभी बोरियां बिना टैग और मार्का के मिलीं, जिससे यह स्पष्ट है कि इन बोरियों की सप्लाई में पारदर्शिता नहीं थी

क्या कहता है प्रशासन?

तहसीलदार अमरित लाल धुर्वे ने स्पष्ट किया है कि खाद्यान्न में इस प्रकार की अनियमितता को सहन नहीं किया जाएगा, और जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

क्या होगी अगली कार्रवाई?

यह मामला सिर्फ आखीवाड़ा की राशन दुकान का नहीं है, बल्कि राज्य भर में चल रही एक बड़ी कालाबाजारी प्रणाली का हिस्सा प्रतीत होता है। अब जबकि जांच में स्पष्ट हो गया है कि बोरियों का वजन जानबूझकर बढ़ाया गया था, आवश्यक है कि राज्य स्तर पर व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया जाए, और जो भी अधिकारी या कर्मचारी इस घोटाले में संलिप्त हैं, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए

गरीबों के हक का अनाज अगर गोदामों में ही मिलावट और पानी सींचने जैसी धोखाधड़ी का शिकार होता है, तो यह सिर्फ एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि मानवता के खिलाफ अपराध है।

नैनपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, आमला, भोपाल, इटारसी होकर इंदौर जायेगी पेंचवेली एक्सप्रेस: नैनपुर तक हुआ विस्तार

Penchvalley Express: रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड ने इंदौर से सिवनी तक चलने वाली पेंचवेली एक्सप्रेस (19343/19344) का विस्तार कर नैनपुर तक सीधी ट्रेन सेवा शुरू कर दी है। यह निर्णय मंडला, बालाघाट, सिवनी जैसे जिलों के लाखों नागरिकों के लिए सुविधा, रोजगार और विकास के नए द्वार खोलने वाला है। अब यह ट्रेन इंदौर से नैनपुर तक अपनी यात्रा करेगी और भोपाल, इटारसी, आमला, छिंदवाड़ा और सिवनी जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों से होकर गुजरेगी। हालाँकि अभी तक तारीखों का एलान नहीं किया गया है कि किस दिन से इस ट्रेन का विस्तार होगा.

रेलवे मंत्रालय के इस निर्णय से मध्यप्रदेश के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी जिलों को पहली बार इंदौर जैसे व्यावसायिक महानगर से सीधी रेल सेवा प्राप्त होगी। पहले यह ट्रेन इंदौर से सिवनी तक सीमित थी, लेकिन अब इसे नैनपुर तक विस्तारित किया गया है, जो कि मंडला और बालाघाट जिले के लोगों को सीधे जुड़ाव का लाभ देगा।

नया टाइम टेबल: यात्रियों की सुविधा में बढ़ोतरी

रेलवे द्वारा जारी नए टाइम टेबल के अनुसार:

  • ट्रेन संख्या 19343:
    इंदौर से दोपहर 1:05 बजे रवाना होकर अगले दिन सुबह 6:30 बजे नैनपुर पहुंचेगी। जिसका सिवनी का समय सुबह 05:00 मिनिट रहेगा.
  • ट्रेन संख्या 19344:
    नैनपुर से शाम 7:00 बजे प्रस्थान कर अगले दिन दोपहर 12:45 बजे इंदौर पहुंचेगी। जिसका सिवनी आने का समय रात 08:18 मिनिट रहेगा.

यह टाइमिंग खासकर उन यात्रियों के लिए उपयोगी है जो रात की यात्रा कर दिन में अपने कार्य स्थल या गंतव्य पर पहुंचना चाहते हैं।

पेंचवेली एक्सप्रेस का नया मार्ग और महत्वपूर्ण स्टेशन

पेंचवेली एक्सप्रेस का विस्तारित मार्ग अब निम्नलिखित प्रमुख स्टेशनों को कवर करता है:

  • इंदौर जंक्शन (INDB)
  • उज्जैन (UJN)
  • भोपाल (BPL)
  • इटारसी (ET)
  • आमला (AMLA)
  • छिंदवाड़ा (CWA)
  • सिवनी (SEY)
  • नैनपुर जंक्शन (NIR)

इस मार्ग में पड़ने वाले स्टेशन मध्यप्रदेश के शैक्षणिक, व्यापारिक, धार्मिक और प्राकृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्रों को जोड़ते हैं।

टिकट बुकिंग और ऑनलाइन सुविधा

यात्रियों के लिए IRCTC की वेबसाइट और ऐप के माध्यम से ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त, रेलवे काउंटर पर भी आरक्षण और जनरल टिकट लिए जा सकते हैं। यात्री सुविधा के लिए आने वाले समय में प्लेटफॉर्म टिकट, खानपान, और सुरक्षा संबंधी सेवाओं में भी सुधार की संभावना है।

पेंचवेली एक्सप्रेस का सिवनी होते हुए नैनपुर तक विस्तार, सिर्फ एक ट्रेन मार्ग का विस्तार नहीं, बल्कि यह मध्यप्रदेश के के कई जिलों की प्रगति के मुख्यधारा से जोड़ने का एक ऐतिहासिक कदम है। यह सुविधा पर्यटन, शिक्षा, चिकित्सा और व्यापार के सभी क्षेत्रों में विकास को नई दिशा देगी।

Ahmedabad plane crash: एयर इंडिया का बोइंग विमान अहमदाबाद में क्रेश, 242 यात्रियों की मौत की आशंका

Ahmedabad plane crash: गुरुवार की सुबह अहमदाबाद में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एयर इंडिया का एक बोइंग ड्रीमलाइनर विमान, जो लंदन के लिए रवाना हुआ था, उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में कुल 242 यात्री सवार थे, जिनमें से कई विदेशी नागरिक भी बताए जा रहे हैं।  इस विमान में 242 यात्री सवार थे. सभी की मौत की आशंका जताई जा रही है.

यह ड्रीमलाइनर बोइंग 787 लंदन के लिए उड़ान भर रहा था. अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से टेकऑफ करते समय ही आसपास की इमारत या दीवार से टकराने से प्लेन क्रैश हुआ है. 

घटना की विस्तृत जानकारी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दुर्घटना अहमदाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (सरदार वल्लभभाई पटेल एयरपोर्ट) से विमान के उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों के भीतर घटी। बताया जा रहा है कि विमान ने जैसे ही रनवे छोड़ा, उसके कुछ हिस्से में तकनीकी खराबी की आशंका जताई गई और फिर वह नियंत्रण खो बैठा

विमान का मलबा मेघानी इलाके की एक घनी बस्ती में गिरा, जहां तत्काल धुएं के गुबार आसमान में उठते देखे गए। स्थानीय निवासियों ने बताया कि दुर्घटना के बाद तेज धमाका हुआ, जिससे आसपास की इमारतों की खिड़कियां तक हिल गईं।

राहत और बचाव कार्य में जुटे स्थानीय लोग और प्रशासन

जैसे ही हादसे की सूचना फैली, स्थानीय लोग मदद के लिए दौड़ पड़े। राहत-बचाव कार्य के लिए फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ, और स्थानीय पुलिस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। एम्बुलेंस की कतारें क्षेत्र में दिखाई दीं और घायलों को पास के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया।

242 यात्रियों की स्थिति….

सभी की मौत की आशंका जताई जा रही है.