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दो लोगों पर बके से किया हमला

सिवनी । बण्डोल थाना सीमा के सागर गाँव में एक चिकिन दुकान संचालक ने दो लोगों पर माँस काटने के धारदार हथियार से हमला कर दिया। दोनों घायलों को तत्काल जिला अस्पताल में भर्त्ती करवाया गया। यहाँ उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें नागपुर रेफर कर दिया गया है।

पुलिस ने आरोपियों पर धारा 307 का मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल आरोपी फरार है। बण्डोल थाना सूत्रोें ने बताया कि नटकंटिया टोला निवासी रेवाराम सनोडिया अपने भांजे राजेश सनोडिया के साथ सागर गाँव गये थे। इसी दौरान वाहन खराब होने पर उसका सुधार कार्य रेवाराम करवा रहे थे।

सूत्रों ने बताया कि इस बीच राजेश पास ही स्थित चिकन व अण्डे की दुकान पर जा पहुँचे और खरीदी को लेकर महिला दुकानदार से बात करने लगे। इसी बीच महिला का पति मोनू रंगारे वहाँ पहुँच गया और राजेश से कहने लगा कि वह उनकी पत्नि से बात क्यों कर रहे हैं।

सूत्रों ने बताया कि इसी बात को लेकर विवाद बढ़ा और मोनू ने चिकन काटने के हथियार से राजेश पर हमला कर दिया। इस बीच रेवाराम भी वहाँ पहुँच गये और उन पर भी मोनू ने हमला कर दिया। घायलों को जिला अस्पताल लाया गया। पुलिस ने मोनू पर मामला दर्ज किया है।

दुकान में आकर नाबालिग बालिका से छेड़खानी करने वाले आरोपी गिरफ्तार

सिवनी // नगर के एक व्यस्ततम बाजार में कपड़े की दुकान में दिनांक 29 नवंबर 2018 को रात करीब 9 बजे दो लड़कों ने पहुंचकर पूछा कि गले में पहनने की चेन है क्या? दुकानदार ने बोला कि यहां कपड़े मिलते हैं चेन नहीं , तभी उसमें से एक लड़के द्वारा अश्लील इशारा करते हुए दुकानदार की मौजूद नाबालिक लड़की से छेड़खानी की जो दुकानदार द्वारा फटकारे जाने पर दोनों लड़के भाग गए और अगले दिन छेड़खानी वाला लड़का अपने बड़े भाई के साथ आया और दुकानदार को पुलिस में रिपोर्ट करने पर मारने की धमकी देने लगा जो परेशान होकर दुकानदार ने थाना कोतवाली में उक्त अज्ञात लड़कों के विरुद्ध की रिपोर्ट करने पर धारा 354(क) , 452 , 506, 34 एवं 7/8 पाक्सो में प्रकरण दर्ज किया गया।

टीआई कोतवाली अरविंद जैन के नेतृत्व में महिला उपनिरीक्षक नीलू उइके , प्रधान आरक्षक संजय आरक्षक बालमुकुंद एवं नितेश ने लड़कों के हुलिए और सीसीटीवी कैमरों की मदद से तीनों लोगों को गिरफ्तार किया , गिरफ्तार किए गए तीन लड़को ने से दो लड़के नाबालिक हैं एवं तीसरा आरोपी सोहेल खान पिता लतीफ खान उम्र करीब 20 साल घसियारी मोहल्ला सिवनी का रहने वाला है ।

पकड़े गए दोनों नाबालिग लोगों में से एक वारासिवनी जिला बालाघाट का रहने वाला है जिसने पुलिस को पूछताछ में बताया कि उसकी दोस्ती यहां रहने वाला वाले लड़के से किशोर जेल में हुई थी जो घटना वारदात के समय दोनों साथ में बाजार में घूम रहे थे।

सायक्लोन को लेकर आयोजकों ने की तैयारी प्रारंभ

सिवनी । विगत कुछ वर्षों से जिला मुख्यालय सिवनी में दैनिक जीवन में स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण के लिये साइकिल का उपयोग करने के लिये सायक्लोन साइकिल रैली का आयोजन किया जा रहा है।

वर्ष 2019 में भी सायक्लोन साइकिल रैली के लिये आयोजकों द्वारा तैयारियां प्रारंभ कर दी गई है। नगर में सुबह-शाम लोगों को साइकिल से आते-जाते देखा जा सकता है, अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाने के लिये सायक्लोन साइकिल रैली में बच्चे, युवा और बुजुर्ग शामिल होते है।

उक्त साइकिल रैली का मुख्य उद्देश्य साइकिल को अपने दैनिक जीवन में उपयोग करने, स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण, बेटी बचाओ एवं अन्य सामाजिक समस्याओं को लेकर जागरूकता फैलाना है।

मोतीनाला में गिरा आटो

सिवनी- बरघाट रोड मोतीनाला में आटो रिक्शा गिर जाने के कारण आटो रिक्शा क्षतिग्रस्त हो गया जबकि उस आटो में ड्रायवर के अतिरिक्त बोरे भरे हुये थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार मोतीनाला के निकट आटो रिक्शा के आते ही एक अन्य वाहन ने आटो रिक्शे को कट मारा जिसके कारण संतुलन बिगडऩे से आटो नीचे गिर गया।

ज्ञातव्य है कि इसके पूर्व भी यहां पर छोटा हाथी गिर गया था और क्षतिग्रस्त हो गया था इसके बावजूद भी संबंधितों ने कोई प्रयास नही किये क्षेत्र के पार्षद सुरेन्द्र करोसिया ने बताया कि इस नाले का कायाकल्प करने के लिये पूर्व कलेक्टर धनराजू एस ने प्रयास किये थे और नाले से लगे हुये भाग में रैलिंग लगाये जाने का प्रयास भी किया था लेकिन स्थानांतरण के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया है।

गौरतलब है कि यह मार्ग सिंगल मार्ग है और यहां पर मंडला एवं बालाघाट से आने वाले वाहनों की संख्या लगभग 500 से अधिक होती है साथ ही इसी मार्ग से केन्द्रीय विद्यालय एवं कबीर वार्ड एवं आसपास के कस्बो से लोगों का आना,जाना भी बना रहता है। और लगातार चौपहिया एवं बड़े वाहनों की संख्या निरंतर बढ़ रही है इस संबंध में डूंडासिवनी में स्थित पुलिस प्रशासन सख्ती से कार्यवाही नही करते जिसके कारण आये दिन दुर्घटनायें घटती है।

इस क्षेत्र के लोगों ने मांग की है कि इस मार्ग को सिटी रोड घोषित किया जाये एवं हैवी वाहनों को नगर प्रवेश अन्य मार्ग से कराया जाये। जिससे दुर्घटनाओं पर अंकुश लग सके। और इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों को राहत मिल सके।

गगनयान मिशन बना भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन

गगन यान मिशन भारत का पहला मानव युक्त अंतरिक्ष मिशन होगा, इस मिशन में इसरो किसी भारतीय को पहली बार अंतरिक्ष में भेजेगा| सोवियत संघ के स्पेसक्राफ्ट से 1984 में एस्ट्रोनॉट राकेश शर्मा स्पेस में जाने वाले पहले भारतीय बन चुके हैं| इस बार खुद भारत अपनी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर के इस “गगन यान” मिशन के जरिये किसी भारतीय को अंतरिक्ष में सात दिनों तक रखेगा|

भारत के पहले मानव युक्त अंतरिक्ष मिशन के लिए अंतरिक्ष यात्रियों के चयन में 6 महीने से 1 साल का वक्त लग सकता है जिसके बाद उन लोगों की ट्रेनिंग शुरू होगी| सोवियत संघ ने सबसे पहले अप्रैल 1961 में अपने वैज्ञानिक यूरी गागरिन को अंतरिक्ष में भेजा था| इसके बाद मई 1961 में अमेरिका ने भी अंतरिक्ष में इंसान को भेज दिया था| चीन 2003 में अपने ही अंतरिक्ष यान से अपने एस्ट्रोनॉट को अंतरिक्ष में भेजने वाला तीसरा देश बन गया|

In this post you will read about “Gaganyaan Mission in Hindi” language, which is very important current affairs topic for your upcoming competitive examination.Here you will also find previous year question related to Indian Space Research Organization (ISRO).

गगन यान मिशन की शुरुवात जब हम आजादी के 75वें साल का जश्न मना रहे होंगे भारत एक ऐसी उपलब्धि को हासिल कर चुका होगा जिसे फिलहाल सिर्फ तीन देशों अमेरिका रूस और चीन ने ही हासिल किया है| 2022 तक भारत का अंतरिक्ष यान किसी भारतीय को लेकर अंतरिक्ष में जाएगा,यह मिशन पूरा होगा गगन-यान से, इसरो के वैज्ञानिक इस मिशन के लिए जुड़ गए हैं| 72वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 15 अगस्त 2018 को लाल किले से प्रधानमंत्री ने ऐलान किया कि 2022 तक गगन यान के जरिए भारत पहली बार अंतरिक्ष में किसी भारतीय को भेजेगा| ऐसा होने पर भारत मानव को अंतरिक्ष पर पहुंचाने की उपलब्धि हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा|

फिलहाल अमेरिका, रूस और चीन ही मानव यान को अंतरिक्ष में भेजने में समर्थ है| गगन यान, इसरो के सबसे बड़े रॉकेट जीएसएलवी यानी जिओ सिंक्रोनस सेटेलाइट लॉन्च वेहिकल मार्कथ्री के जरिए लॉन्च किया जाएगा| भारत के पहले मानव रहित अंतरिक्ष मिशन को लेकर इसरो के वैज्ञानिक भी काफी उत्साहित हैं| इसरो के चेयरमैन ने कहा कि गगन यान मिशन चुनौतीपूर्ण है, लेकिन इसरो इस लक्ष्य को भी हासिल करने की क्षमता रखता है|

प्रधानमंत्री के ऐलान के बाद उन्होंने कहा कि देश के अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने वाली प्रौद्योगिकी विकसित की जा चुकी है, इस दिशा में मानव मॉड्यूल के साथ ही पर्यावरण नियंत्रण और जान बचाने की प्रणाली जैसी प्रौद्योगिकी विकसित हो चुकी है| इसरो के चेयरमैन ने जानकारी दी कि “गगन-यान” भेजने के पहले इसरो दो मानवरहित मिशन को अंजाम देगा, इस परियोजना के लिए जीएसएलवी का इस्तेमाल किया जाएगा|
gaganyaan

गगन यान मिशन की सम्पूर्ण जानकारी

भारतीय मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम को गगन यान के जरियेअंजाम दिया जाएगा| गगन यान भारतीय चालित कक्षीय अंतरिक्ष यान है|

अंतरिक्ष यान को तीन लोगों को ले जाने के हिसाब से डिजाइन किया जा रहा है| इसके तहत एक नियोजित अपग्रेड किए गए संस्करण को डॉकिंग क्षमता से लैस किया जाएगा|

अपने पहले मानवयुक्त मिशन में गगन यान 3.7 टन के कैप्सूल में 3 लोगों के दल के साथ 7 दिनों के लिए 400 किलोमीटर की ऊंचाई तक पृथ्वी की परिक्रमा करेगा|

अंतरिक्ष कैप्सूल में जीवन नियंत्रण और पर्यावरण नियंत्रण प्रणाली होगी| अंतरिक्ष यान में लिक्विड प्रोपेलेंट युक्त दो इंजन होंगे| इस मिशन पर करीब 9000 करोड़ रुपए की लागत आएगी|

बेंगलुरु के इसरो टेलीमेट्री ट्रैकिंग कमांड सेंटर से अंतरिक्ष यान की 24 घंटे निगरानी की जाएगी| इस कार्यक्रम में मानव को अंतरिक्ष तक पहुंचाने और धरती पर वापस सुरक्षित लाने से जुड़ी सारी तकनीक शामिल होंगी|

इस ड्रीम प्रोजेक्ट की कमान एक महिला के हाथ में होगी| इसरो के इस गगन यान प्रोजेक्ट की अगुवाई वीआर ललिताम्बिका करेंगी| उन्होंने भारत के रॉकेट प्रोग्राम में अहम भूमिका निभाई है| भारत के पहले मानव रहित अंतरिक्ष मिशन की अगुवाई एक महिला के जरिए किया जाना बड़ी उपलब्धि है|

इसरो ने गगन यान मिशन को राष्ट्रीय मिशन करार दिया है| इसरो का कहना है कि इस मिशन के लिए जरूरी अधिकांश महत्वपूर्ण तकनीकों का विकास हो चुका है| इसरो अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षित करने के लिए बेंगलुरु में प्रशिक्षण सुविधा संपन्न केंद्र बनाएगा| इस साल 5 जुलाई को ही इसरो ने देश के पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम की दिशा में सफलता पाई थी|

5 जुलाई 2018 को वैज्ञानिकों ने श्रीहरिकोटा में पहले क्रू एस्केप सिस्टम कैप्सूल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था| क्रू एस्केप सिस्टम कैप्सूल को अंतरिक्ष यात्री अपने साथ ले जा पाएंगे और अंतरिक्ष में उनके साथ कोई दुर्घटना होती है तो वह इस कैप्सूल का इस्तेमाल कर पाएंगे|

संस्कृत में व्योम का मतलब होता है अंतरिक्ष यान को लेकर शुरुआती अध्ययन और तकनीकी विकास का काम ऑर्बिटल व्हीकल के नाम से 2006 में शुरू किया गया था| इसके तहत अंतरिक्ष में एक हफ्ता गुजारने लायक मरक्यूरी क्लास अंतरिक्ष यान के समान कैप्सूल का डिजाइन तैयार किया जाना था| यह दो अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने के लिए और वापस पानी में लैंड किए जाने के लिए बनाया जाना था| मार्च 2008 तक डिजाइन को अंतिम रुप दिया गया और भारत सरकार के पास फंडिंग के लिए पेश किया|

गगन यान मिशन की ट्रेनिंग

भारत के पहले मानव युक्त अंतरिक्ष मिशन के लिए अंतरिक्ष यात्रियों को ट्रेनिंग देना एक बड़ी चुनौती है,इसके लिए इसरो बेंगलुरु में सारी सुविधाओं से संपन्न ट्रेनिंग सेंटर बना रहा है हालांकि कम समय होने की वजह से देश के पहले मानव युक्त अंतरिक्ष मिशन गगन यान पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग रूस या अमेरिका में ही हो पाएगी| बेंगलुरु में बनने वाला यह ट्रेनिंग सेंटर देश के भविष्य के मानव मिशन के लिए काफी कारगर साबित होगा| कागजी तौर पर अंतरिक्ष यात्रियों के लिए प्रशिक्षण सुविधा की योजना 2008-09 से बननी शुरू हो गई थी| मौजूदा योजना के तहत भारत के “गगन-यान” के एस्ट्रोनॉट्स की ट्रेनिंग बेंगलुरु में नहीं होगी|

बेंगलुरु शहर के बाहरी इलाके देवनहल्ली में ट्रेनिंग सेंटर बनाया जाएगा| जोकि केंपेगौडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 8 से 10 किलोमीटर दूर है| इस प्रशिक्षण केंद्र का नाम एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग एंड बायोमेडिकल इंजीनियरिंग सेंटर होगा| जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानि इसरो विकसित करेगा| 40 से 50 एकड़ जमीन में विकसित किया जायेगा| भारत के पूरी तरह से विकसित होने के बाद ही यहां पर अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा| इसरो के चेयरमैन का कहना है कि गगन यान मिशन के लिए बहुत ही कम समय बचा है इसलिए आप इस मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों को देवनहल्ली ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण नहीं दिया जा सकता| अंतरिक्ष यात्रियों के लिए देवनहल्ली में बनने वाला ट्रेनिंग सेंटर भारतीय वायुसेना के सहयोग से से विकसित किया जाएगा| इस ट्रेनिंग सेंटर में भविष्य में मानव सहित अंतरिक्ष यान मिशन के लिए एस्ट्रोनॉट्स को ट्रेनिंग दी जाएगी| इसके अलावा रिकवरी मिशन और रेस्क्यू ऑपरेशन जैसे कामों के लिए प्रशिक्षण केंद्र के रूप में तैयार करने की घोषणा की है| इस ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षित एस्ट्रोनॉट्स के जीरो ग्रेविटी में रहने की व्यवस्था होगी ताकि अंतरिक्ष यात्रियों को धरती पर ही अंतरिक्ष में रहने का माहौल मिल सके| इसके लिए सुविधा देने के उपकरण लगाए जाएंगे| इसमें भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा की ओर से बताए गए अनुभवों की मदद की जाएगी|

अंतरिक्ष में जाने के बाद की चुनौतिया

अंतरिक्ष में इंसान को भेजना काफी जोखिमों से भरा है, इसमें न सर भारी पैसों की जरूरत होती है बल्कि इंसान जान को भी हर वक्त खतरा रहता है| परेशानी यह है कि लॉन्च पैड से जैसे ही यान अंतरिक्ष की ओर जाता है, मशीन से ज्यादा इंसानों की जान को लेकर तरह-तरह की आशंकाएं सिर उठाने लगती है|

एक इंसान को अंतरिक्ष में जाने के लिए शारीरिक और मानसिक दक्षता ही नहीं, बल्कि प्रकृति के विरुद्ध काम कर सकने लायक क्षमताएं विकसित करनी होती है| इसके लिए बेहद खास किस्म का प्रशिक्षण और विशेषज्ञता भी हासिल करनी होती है| धरती की कक्षा से बाहर जाते हुए सबसे पहले एक इंसान गुरुत्वाकर्षण फील्ड में बदलाव की चुनौती का सामना करता है, दरअसल एक गुरुत्वाकर्षण फील्ड से दूसरे गुरुत्वाकर्षण फील्ड में जाने के लिए इंसान को कई शारीरिक और मानसिक चुनौतियां सामने आती है|

इसमें दिमाग हाथ और आंखों का तालमेल गड़बड़ाने लगता है, गुरुत्वाकर्षण के अभाव में हड्डियों से पोषक तत्व खत्म होने लगते हैं| सही व्यायाम और उचित डाइट के अभाव में मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और यहां तक कि आंखों की नजर पर भी बुरा असर पड़ता है|

दूसरी चुनौती है रॉकेट के भीतर यात्रा करना, यह कोई आम यात्रा नहीं होती, अंतरिक्ष में जाते हुए एक आम रॉकेट 0 से 29000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार महज 30 मिनट पर हासिल कर लेता है| रॉकेट अंतरिक्ष में जाने का यह दौर बड़ा ही नाजुक होता है, कई बार रॉकेट चरण में दुर्घटना का शिकार भी हो जाते हैं|

एक बार स्पेस या स्पेस स्टेशन में जाने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों की नई मुश्किलें शुरू होती है अंतरिक्ष में रेडिएशन का खतरा धरती से 10 गुना ज्यादा होता है, रेडिएशन की चपेट में आने से थकान,उल्टियां, तंत्रिका तंत्र से जुड़ी तमाम परेशानियां और यहां तक कि कैंसर तक हो सकता है|

अंतरिक्ष पर बनी कई फिल्मों में आपने देखा होगा कि कैसे स्पेस में कोई वातावरण ही नहीं है, वहां कोई प्रेशर भी नहीं है, जिस से इंसान खून गर्म हो जाता है| अंतरिक्ष यान में एक पृथ्वी जैसा ही वातावरण होना चाहिए, ताकि अंतरिक्ष यात्रियों को पर्याप्त ऑक्सीजन ,उचित तापमान और आर्द्रता का स्तर मिल सके|

इन तमाम चुनोतियों के बाद भी इंसान अंतरिक्ष में कई अनजान चुनौतियों का सामना करता है| इसमें अलगाव के कारण व्यवहार से जुड़ी समस्याएं ,थकान नींद ना आना और दूसरे मनोवैज्ञानिक विकार भी हो सकते है|

भारत के अंतरिक्ष का सफ़र इतिहास

21 नवंबर 1963 को तुंबा में पहला रॉकेट लोच करने के साथ ही बच्चे के पहले कदमों की तरह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत हुई और उसके बाद से भारत ने अपने अंतरिक्ष का सफर में कई मील के पत्थर पार कर लिए हैं| आज हमारा देश अपने लिए दूसरे देशों के लिए उपग्रहों का निर्माण करने के साथ साथ उन का प्रक्षेपण भी कर रहा है| और इतना ही नहीं हमने मंगल ग्रह तक पहुंच बनाने में भी कामयाबी हासिल करनी है |

हमारे देश में अंतरिक्ष अनुसंधान गतिविधियों की शुरुआत 1968 के दौरान हुई| भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई ने देश के सक्षम और उत्कृष्ट वैज्ञानिकों, मनोवैज्ञानिक,योग प्रचारक और समाज विज्ञानियों को मिलाकर भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का नेतृत्व करने के लिए एक दल गठित किया और यहीं से भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का सफर शुरू हो गया|

एड्स ग्रसित व्यक्ति एआरटी इलाज से लम्बे समय तक जी सकता है स्वस्थ जीवन

विश्व एड्स दिवस पर निकाली गई जनजागृति रैली

विश्व एड्स दिवस पर जिला मुख्यालय रायसेन में जनरल नर्सिंग प्रशिक्षण केन्द्र की छात्राओं द्वारा जनजागृति रैली आयोजित की गई। इस रैली को रायसेन एसडीएम श्री संजय उपाध्याय ने जनरल नर्सिंग प्रशिक्षण केन्द्र से हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। यह रैली शहर के मुख्य मार्ग से होते हुए जिला चिकित्सालय में समाप्त हुई। रैली में नर्सिंग प्रशिक्षण केन्द्र की छात्राएं हाथों में एड्स के नियंत्रण, बचाव एवं सावधानियां बरतने वाली नारों की तख्तियां लेकर चल रही थी। रैली के समापन अवसर पर जिला चिकित्सालय में एचआईवी एड्स के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस अवसर पर डॉ बीबी गुप्ता, डॉ एके शर्मा सहित अन्य चिकित्सक एवं स्टॉफ उपस्थित थे।

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एचआईवी एड्स क्या है

एड्स जिस वायरस के कारण होता है, उसका नाम एचआईवी है। यह शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता को धीरे-धीरे कम करता है और जब यह क्षमता क्षीण हो जाती है तो शरीर में विभिन्न रोगों के लक्षण प्राप्त होने लगते हैं। इसी अवस्था को एड्स कहते हैं।

रोग फैलने के कारण

असुरक्षित यौन सम्पर्क करने से, किसी एचआईवी ग्रसित व्यक्ति के सम्पर्क में आने वाले दूसरे स्वस्थ व्यक्ति को एचआईवी वायरस फैलने का खतरा होता है। एचआईवी एड्स फैलने का प्रमुख कारण असुरक्षित यौन सम्पर्क है। संक्रमित रक्त से या कोई व्यक्ति बीमार या दुर्घटनाग्रस्त है और इलाज के दौरान उसे रक्त की आवश्यकता पड़ती है तो रक्त चढ़ाने से पहले उसकी जांच करना चाहिये। यदि एचआईवी संक्रमित रक्त उस व्यक्ति को चढ़ाया जाता है तो उसे भी एचआईवी एड्स का संक्रमण हो सकता है। इसके अलावा संक्रमित सुई व सिरिंज से यदि एचआईवी संक्रमित व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल की गई तो अन्य व्यक्ति इसका इस्तेमाल करता है तो उसे भी एचआईवी संक्रमण होने का खतरा रहता है। इसलिये हमेशा व्यक्ति को डिस्पोजेबल सुई व सीरिंज का ही उपयोग किया जाना चाहिये। एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिला से उसके होने वाले शिशु में भी एचआईवी संक्रमण का खतरा रहता है।

एड्स के रोकथाम के उपाय

एचआईबी एड्स बचाव के लिए असुरक्षित यौन सम्पर्क से बचना चाहिए। यौन सम्पर्क से पूर्व निरोध का इस्तेमाल अवश्य करें। रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ने पर उसकी सम्पूर्ण जांच अवश्य करायें। हमेशा डिस्पोजेबल सुई एवं सीरिंज का उपयोग करें। शासन द्वारा एचआईवी परामर्श एवं जांच केन्द्रों पर एचआईवी ग्रसित व्यक्ति उचित सलाह एवं जांच करवायें। गर्भवती महिलाओं, टीबी के रोगियों, यौन रोगियों एवं जन-सामान्य को निःशुल्क परामर्श एवं जांच सेवा उपलब्ध कराई जाये। जिला अस्पतालों में, चिकित्सा महाविद्यालयों तथा कुछ सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में एकीकृत जांच परामर्श केन्द्र संचालित हैं, उन केन्द्रों पर सम्पर्क कर सकते हैं। एचआईवी पाजिटिव एवं एड्स पीड़ितों के उपचार हेतु एआरटी केन्द्रों का संचालन किया जा रहा है, जहां पर ग्रसित व्यक्ति निरूशुल्क औषधी एवं उपचार करवा सकता है।

एचआईवी एड्स के बारे में जन-जागरूकता लाना आवश्यक

विश्व एड्स दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य आमजन में एचआईवी एड्स के बारे में जागरूकता लाना है कि एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों को छूने से, उनके साथ रहने से, साथ खाना खाने से, मच्छर काटने से, छींकने या खांसने से संक्रमण नहीं फैलता है। एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिये, उनसे भेदभाव नहीं करना चाहिये। एड्स से ग्रसित व्यक्ति एआरटी इलाज के सहारे लम्बे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकता है।

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव: एक मतदान केंद्र पर फिर होगी वोटिंग


चुनाव आयोग ने मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के एक बूथ पर फिर से मतदान की घोषणा कर दी है। यूं तो सतना से भी ईवीएम खराब होने की कई खबरें आई थीं लेकिन यहां किसी मतदान केंद्र पर पुनर्मतदान का कोई निर्देश नहीं दिया गया है। हालांकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस दोनों ने फिर से चुनाव की मांग की थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चेक शीट और ईवीएम के आंकड़ों में 56 वोट का अंतर पाया गया। कहा गया कि ईवीएम की जिम्मेदारी संभाल रहा अधिकारी इस मामले में सक्षम नहीं था। इस बाबत रिपोर्ट मुख्य चुनाव आयोग को भेज दी गई है।

भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने मीडिया को बताया, “हम आगे की कार्रवाई करने से पहले हमारे स्थानीय नेताओं और मतदान एजेंटों के साथ तथ्यों की जांच करेंगे।” जिसके बाद राज्य कांग्रेस की मीडिया प्रभारी शोभा ओजा ने कहा, “अगर विलंब तीन घंटों से अधिक था, तो फिर से मतदान करने के लिए कहा गया है, लेकिन दो घंटे से ज्यादा देरी नहीं हुई है, इसलिए हम इस मामले पर इतना जोर नहीं दे रहे।”

मध्यप्रदेश में इस बार 74.85 फीसदी मतदान हुआ है जो पिछले विधानसभा के मुकाबले करीब 3 फीसदी ज्यादा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चेक शीट और ईवीएम के आंकड़ों में 56 वोट का अंतर पाया गया। कहा गया कि ईवीएम की जिम्मेदारी संभाल रहा अधिकारी इस मामले में सक्षम नहीं था। इस बाबत रिपोर्ट मुख्य चुनाव आयोग को भेज दी गई है।

भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने मीडिया को बताया, “हम आगे की कार्रवाई करने से पहले हमारे स्थानीय नेताओं और मतदान एजेंटों के साथ तथ्यों की जांच करेंगे।” जिसके बाद राज्य कांग्रेस की मीडिया प्रभारी शोभा ओजा ने कहा, “अगर विलंब तीन घंटों से अधिक था, तो फिर से मतदान करने के लिए कहा गया है, लेकिन दो घंटे से ज्यादा देरी नहीं हुई है, इसलिए हम इस मामले पर इतना जोर नहीं दे रहे।”

मध्यप्रदेश में इस बार 74.85 फीसदी मतदान हुआ है जो पिछले विधानसभा के मुकाबले करीब 3 फीसदी ज्यादा है।

वोटर्स को लगाई जाने वाली स्याही बनती है भारत में , विदेशो में भी होता है निर्यात

वोटर्स को लगाई जाने वाली स्याही कर्नाटक में बनती है, 56 साल से हो रहा इस्तेमाल !

नई दिल्ली // वोटिंग के बाद मतदाता की उंगली पर लगाई जाने वाली स्याही का इस्तेमाल फर्जी मतदान को रोकने के लिए किया जाता है। यह निशान करीब एक महीने तक रहता है। इसमें इस्तेमाल की जाने वाली स्याही सबसे पहले मैसूर के महाराजा नालवाडी कृष्णराज वाडियार ने 1937 में स्थापित मैसूर लैक एंड पेंट्स लिमिटेड कंपनी में बनवाई थी। लेकिन निर्वाचन प्रक्रिया में पहली बार इसका इस्तेमाल 56 साल पहले 1962 के चुनाव में हुआ था।

1947 में देश की आजादी के बाद मैसूर लैक एंड पेंट्स लिमिटेड सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बन गई। अब इस कंपनी को मैसूर पेंट्स एंड वाॅर्निश लिमिटेड के नाम से जाना जाता है। कर्नाटक सरकार की यह कंपनी अब भी देश में होने वाले हर चुनाव के लिए स्याही बनाने का काम करती है और इसका निर्यात भी करती है। चुनाव के दौरान मतदाताओं को लगाई जाने वाली स्याही के निर्माण के लिए इस कंपनी का चयन 1962 में किया गया था। इस तरह देश के तीसरे आम चुनावों में पहली बार इसका इस्तेमाल हुआ।

प्रकाश में आते ही रंग बदलता है केमिकल –

स्याही को नेशनल फिजिकल लैबोरेटरी आॅफ इंडिया के रासायनिक फाॅर्मूले का इस्तेमाल कर तैयार किया जाता है। इसका मुख्य रसायन सिल्वर नाइट्रेट है। स्याही में यह 5 से 25 फीसदी तक होता है। मुख्यत: बैंगनी रंग का यह केमिकल प्रकाश में आते ही रंग बदल लेता है और इसे किसी भी तरह से मिटाया नहीं जा सकता।

स्याही का निर्यात इन देशों में –

मैसूर पेंट्स एंड वाॅर्निश कंपनी मालदीव, मलेशिया, कंबोडिया, अफगानिस्तान, मिस्र और दक्षिण अफ्रीका में भी स्याही का निर्यात करती है। भारत में मतदाता के बाएं हाथ के अंगूठे के बाजू वाली उंगली के नाखून पर इसे लगाया जाता है, वहीं, कंबोडिया और मालदीव में इस स्याही में उंगली डुबानी पड़ती है।बुरंडी और बुकीर्ना फासो में इसे हाथ पर ब्रश से लगाया जाता है,अफगानिस्तान में इसे पैन के माध्यम से लगाया जाता है।

इसलिए नहीं छूटती यह स्याही –

अमिट स्याही सिल्वर नाइट्रेट में घुली डाई होती है। सिल्वर नाइट्रेट रंगहीन विलियन है। इसमें डाई मिलाई जाती है। उंगली पर लगने के बाद सिल्वर नाइट्रेट त्वचा से निकलने वाले पसीने में मौजूद सोडियम क्लोराइड (नमक) से क्रिया करके सिल्वर क्लोराइड बनाता है। धूप के संपर्क में आने पर यह सिल्वर क्लोराइड टूटकर धात्विक सिल्वर में बदल जाता है। धात्विक सिल्वर पानी या वाॅर्निश में घुलनशील नहीं होता इसलिए इसे उंगली से आसानी से साफ नहीं किया जा सकता।_

चुनावों में ऐसे होता है स्याही का इस्तेमाल –

अमिट स्याही निर्वाचन आयोग ही भेजता है। इसे लोकसभा, विधानसभा, नगरीय निकाय और पंचायत जैसी संवैधानिक संस्थाओं के चुनावों में मतदान अधिकारियों को सौंपा जाता है।हर मतदान दल के पीठासीन अधिकारी को अमिट स्याही की एक शीशी दी जाती है। इसमें इतनी स्याही होती है जो 700-800 मतदाताओं की उंगली पर लगाई जा सके। जोनल अधिकारी को भी अतिरिक्त स्याही दी जाती है। अतिरिक्त स्याही की जरूरत पड़ने पर जोनल अधिकारी ही इसे उपलब्ध कराता है। इसका भी हिसाब रखा जाता है। बाद में सभी मतदान दल बची हुई स्याही जिला निर्वाचन कार्यालय में जमा कराते हैं। फिर इसे नष्ट कर दिया जाता है।

स्ट्रांग रूम का हुआ निरिक्षण

सिवनी-आगामी 11 दिसम्बर की सुबह से होने वाली मतो की गिनती के पूर्व आज 30 नवंबर को पालीटेक्निक कालेज सिवनी में बने स्टांग रूम का निरीक्षण राजनैतिक दल, अभ्यर्थी, उनके प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया गया।

राहुल गांधी ने मुझे पाकिस्तान भेजा था :नवजोत सिंह सिद्धू

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Image source ANI

हैदराबाद में कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा – राहुल गांधी ने मुझे पाकिस्तान भेजा था| मेरे कैप्टन तो राहुल गांधी हैं, उन्होंने तो भेजा है हर जगह।

हैदराबाद में कांग्रेस के लिए प्रचार करने पहुंचे सिद्धू ने कहा कि जब मैं पाकिस्तान गया था और वहां से लौटकर करतारपुर कॉरिडोर की बात की थी, तब लोगों ने मेरा मजाक बनाया था. अव वही लोग अपने बयान से यूटर्न ले रहे हैं. तेलंगाना के सीएम के. चंद्रशेखर राव की तुलना गिरगिट से करते हुए सिद्धू ने कहा कि चंद्रशेखर राव ने सोनिया जी को धोखा दिया है. वह अपने 300 करोड़ के बंगले में रहते हैं. सचिवालय नहीं जाते हैं. हम राहुल गांधी के सिपाही हैं, मेरा नारा है कि बुरे दिन जाने वाले हैं और राहुल गांधी आने वाले हैं. लाल किला पर झंडा फहराने वाले हैं, कोई रोक सके तो तो रोको.

न्यूज एजेंसी से बात करते हुए सिद्धू ने कहा कि हर रोज करीब 10 हजार लोग मेरे साथ सेल्फी लेते हैं, ऐसे में मैं किसी चावला या चीमा को नहीं जानता हूं. पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के बयान पर उन्होंने कहा कि मैं बल्लेबाज हूं और गुगली खेलना जानता हूं.

बता दें, करतारपुर कॉरिडोर को लेकर पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की अब तक वाह-वाही हो रही थी. लेकिन गुरुवार को खालिस्तानी आतंकी और हाफिज सईद के करीबी गोपाल सिंह चावला ने सिद्धू के साथ खुद की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की. इसके बाद सिद्धू की पाकिस्तान यात्रा विवादों में आ गई है.