बरघाट सहकारी बैंक में बड़ा खेल: 5 साल से एक ही शाखा में जमे मैनेजर, 10 हजार से ज्यादा नहीं देंगे… जो करना है कर लो

10 हजार से ज्यादा नहीं देंगे… जो करना है कर लो” — किसानों का फूटा गुस्सा

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Shubham Sharma – Indian Journalist & Media Personality | Shubham Sharma is a renowned Indian journalist and media personality. He is the Director of Khabar Arena...
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बरघाट सहकारी बैंक में बड़ा खेल: 5 साल से एक ही शाखा में जमे मैनेजर, 10 हजार से ज्यादा नहीं देंगे… जो करना है कर लो

सिवनी/धारनाकला। जिले के बरघाट स्थित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शाखा एक बार फिर विवादों में घिर गई है। किसानों से जुड़े इस बैंक में लंबे समय से पदस्थ शाखा प्रबंधक पर मनमानी, अभद्र व्यवहार और किसानों को परेशान करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। अब मामला जिला कलेक्टर तक पहुंच चुका है, जहां पीड़ित किसानों ने शिकायत सौंपकर तत्काल कार्रवाई और शाखा प्रबंधक को हटाने की मांग की है।

किसानों का आरोप है कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंक बरघाट शाखा में शाखा प्रबंधक पिछले पांच वर्षों से अधिक समय से जमे हुए हैं, जबकि नियमों के अनुसार सहकारी बैंक अधिकारियों का स्थानांतरण सामान्यतः तीन वर्ष में किया जाना चाहिए। विशेष परिस्थितियों में यह अवधि अधिकतम पांच वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है, लेकिन इसके बाद भी एक ही शाखा में बने रहना कई सवाल खड़े कर रहा है।

रोटेशन नीति पर उठे सवाल, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी चर्चा

जानकारी के अनुसार जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में शाखा प्रबंधकों और अधिकारियों के लिए 3 वर्ष की रोटेशन नीति लागू है। प्रशासनिक आवश्यकता होने पर इसे 5 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। इसके बावजूद सिवनी जिले की कई शाखाओं में अधिकारी वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं।

अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर नियमों के विपरीत इतने लंबे समय तक एक ही शाखा में अधिकारियों को क्यों बनाए रखा जा रहा है? किसानों और स्थानीय लोगों का कहना है कि राजनीतिक दबाव और प्रभाव के चलते स्थानांतरण नीति पर अमल नहीं किया जा रहा।

किसानों ने लगाए गंभीर आरोप

जिला कलेक्टर को सौंपे गए शिकायत पत्र में किसानों ने आरोप लगाया है कि बरघाट शाखा प्रबंधक किसानों के खातों में मनमाने तरीके से ऋण राशि चढ़ाकर उन्हें परेशान करते हैं। शिकायत में कहा गया है कि मलारा, बरघाट, बोरी और केसला सहकारी समितियों से जुड़े हजारों किसानों का लेन-देन इसी बैंक शाखा से संचालित होता है।

इसी शाखा के माध्यम से किसानों को खाद-बीज ऋण, नकद ऋण और समर्थन मूल्य पर धान-गेहूं बिक्री की राशि प्राप्त होती है। लेकिन किसानों का आरोप है कि बैंक में उनकी सुनवाई नहीं होती और उन्हें बार-बार परेशान किया जाता है।

“लेना है तो लो, वरना वापस जाओ” — बैंक पर अभद्रता के आरोप

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि किसान जब अपनी मेहनत की धान और गेहूं बिक्री की राशि निकालने बैंक पहुंचते हैं, तो उन्हें 10 हजार रुपये से अधिक भुगतान नहीं किया जाता। जरूरत के अनुसार अधिक राशि मांगने पर कथित रूप से बैंक प्रबंधन द्वारा अभद्र भाषा का उपयोग किया जाता है।

किसानों का आरोप है कि उन्हें कहा जाता है—

“लेना है तो लो, वरना वापस जाओ… जो करना है कर लो।”

इतना ही नहीं, शिकायत पत्र में यह भी दावा किया गया है कि शाखा प्रबंधक स्वयं को जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का रिश्तेदार बताकर किसानों पर दबाव बनाते हैं और कार्रवाई की धमकी देते हैं। इस कारण क्षेत्र के कई किसान भय और दबाव में जी रहे हैं।

समिति कर्मचारियों के साथ भी अभद्र व्यवहार के आरोप

शिकायत में यह भी कहा गया है कि शाखा प्रबंधक सहकारी समिति कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार करते हैं। कई बार गलतियों का ठीकरा किसानों और कर्मचारियों पर फोड़ दिया जाता है, जबकि जिम्मेदारी बैंक स्तर की होती है।

स्थानीय किसानों का कहना है कि बैंक में केवल प्रभावशाली लोगों के कार्य आसानी से हो जाते हैं, जबकि गरीब और सामान्य किसान घंटों चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

महाप्रबंधक की भूमिका पर भी उठे सवाल

इस पूरे मामले में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के महाप्रबंधक की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। किसानों और स्थानीय लोगों का कहना है कि महाप्रबंधक के पास स्थानांतरण नीति लागू करने का पूरा अधिकार है, लेकिन इसके बावजूद वर्षों से एक ही शाखा में जमे अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हो रही।

लोगों का आरोप है कि राजनीतिक दबाव और अंदरूनी प्रभाव के चलते नियमों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

किसानों की मांग — तत्काल हटाया जाए शाखा प्रबंधक

पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि बरघाट शाखा में लंबे समय से पदस्थ शाखा प्रबंधक को तत्काल हटाया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

क्षेत्र के किसानों का कहना है कि जिला सहकारी बैंक किसानों की जीवनरेखा है, क्योंकि क्षेत्र के लगभग 90 प्रतिशत किसानों के खाते इसी बैंक में संचालित हैं। ऐसे में यदि बैंक में पारदर्शिता और जिम्मेदारी नहीं होगी, तो किसानों का भरोसा टूटना तय है।

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Shubham Sharma – Indian Journalist & Media Personality | Shubham Sharma is a renowned Indian journalist and media personality. He is the Director of Khabar Arena Media & Network Pvt. Ltd. and the Founder of Khabar Satta, a leading news website established in 2017. With extensive experience in digital journalism, he has made a significant impact in the Indian media industry.
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