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UGC के नए नियमों पर SEONI में बवाल! सकल सवर्ण समाज सड़कों पर, बोले – ‘प्रतिभा के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं

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सिवनी में शनिवार को सामान्य वर्ग (सवर्ण समाज) के लोगों का आक्रोश सड़कों पर साफ दिखाई दिया। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा प्रस्तावित ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु विनियम 2026’ के विरोध में कचहरी चौक पर बड़ी संख्या में नागरिक, छात्र, अभिभावक और सामाजिक संगठन एकत्रित हुए।

नारेबाजी, रैली और ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यह नया विनियम ‘समानता’ के नाम पर ‘मेधावी छात्रों के साथ भेदभाव’ करता है और सामान्य वर्ग के छात्रों के अवसरों को सीमित करता है।

क्या है पूरा मामला?

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लाया गया यह प्रस्तावित विनियम 2026 कई ऐसे प्रावधानों से भरा है, जो सामान्य वर्ग (General Category) के छात्रों और शिक्षकों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

ज्ञापन में कहा गया कि:

“समानता और समता के नाम पर प्रतिभा की बलि नहीं दी जा सकती। शिक्षा में अवसर योग्यता के आधार पर मिलने चाहिए, न कि जातिगत वर्गीकरण से।”

कचहरी चौक पर गूंजे नारे

सुबह से ही लोग तख्तियां और बैनर लेकर कचहरी चौक पहुंचे।
काला कानून वापस लो”, “प्रतिभा का सम्मान करो” और “शिक्षा में भेदभाव बंद करो” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।

इसके बाद रैली निकालकर प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई।

प्रमुख आपत्तियां क्या हैं?

सकल सवर्ण समाज ने विनियम के खिलाफ कई गंभीर सवाल उठाए:

  • ‘समता’ की जाति आधारित व्याख्या
  • EWS (आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग) के हितों पर प्रहार
  • शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता का हनन
  • भेदभावपूर्ण दंड प्रक्रिया
  • झूठी शिकायतों पर अन्य वर्गों के खिलाफ कोई दंडात्मक प्रावधान नहीं

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह नियम सामान्य वर्ग के छात्रों को मानसिक और प्रशासनिक रूप से परेशान कर सकता है।

समाज की प्रमुख मांगें

सकल सवर्ण समाज ने सरकार और प्रशासन के सामने स्पष्ट मांगें रखीं:

✅ विनियम 2026 पर तत्काल रोक
✅ सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच समिति
✅ संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) के तहत समीक्षा
✅ जातिगत विभाजन बढ़ाने वाले कानूनों को समाप्त करना

आगे क्या होगा?

समाज के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन जिला स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक ले जाया जाएगा।

एक वक्ता ने कहा:

“हम ऐसा भारत चाहते हैं जहां प्रतिभा को सम्मान मिले। किसी भी छात्र के साथ जाति के आधार पर अन्याय स्वीकार नहीं होगा।”

सिवनी का यह प्रदर्शन सिर्फ एक जिले का विरोध नहीं, बल्कि देशभर में शिक्षा नीति पर बढ़ती असंतोष की भावना को दर्शाता है। अब सबकी निगाहें सरकार और UGC के अगले कदम पर टिकी हैं।

क्या सरकार इस आवाज़ को सुनेगी या आंदोलन और तेज होगा? आने वाले दिन तय करेंगे।

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