Ayodhya Ram Mandir News: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव का फैसला लिया है। ट्रस्ट ने तिरुपति मंदिर की तर्ज पर पेशेवर प्रबंधन लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन के लिए तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति गठित की है। यह फैसला हाल के विवादों और प्रबंधन व्यवस्था की समीक्षा के बाद लिया गया।
तिरुपति मॉडल की तर्ज पर बदलेगा राम मंदिर का प्रबंधन
ट्रस्ट की अहम बैठक में निर्णय लिया गया कि मंदिर के प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और व्यवस्थित बनाने के लिए पेशेवर CEO की नियुक्ति की जाएगी। इसके लिए गठित समिति योग्य उम्मीदवारों का चयन कर अपनी सिफारिश ट्रस्ट को सौंपेगी।
समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत और सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सुरेश हावड़े को शामिल किया गया है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार
बैठक के दौरान ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे भी स्वीकार कर लिए। ट्रस्ट ने फिलहाल कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि प्रशासनिक कार्यों और मंदिर से जुड़े अन्य कार्यों में कोई बाधा न आए।
चढ़ावा विवाद के बाद लिया गया फैसला
हाल के दिनों में मंदिर के चढ़ावे को लेकर सामने आए कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद ट्रस्ट ने अपनी व्यवस्थाओं की समीक्षा की। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने स्वीकार किया कि मौजूदा व्यवस्था में कुछ कमियां सामने आई हैं और उन्हें दूर करने के लिए व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भक्तों के विश्वास की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
बैठक में इन प्रमुख मुद्दों पर हुई चर्चा
बैठक में मंदिर प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था, भविष्य की कार्ययोजना और दान प्रबंधन प्रणाली को मजबूत बनाने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। ट्रस्ट का मानना है कि पेशेवर प्रबंधन लागू होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य में ऐसी विवादित स्थितियों की संभावना कम होगी।
बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद?
बैठक की अध्यक्षता ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने की। इसमें कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी, विश्व तीर्थ प्रसन्नाचार्य, स्वामी परमानंद गिरी, जगद्गुरु बासुदेवानंद सरस्वती, महंत दिनेंद्र दास, कृष्ण मोहन, शशांक त्रिपाठी सहित कई सदस्य शामिल हुए। कुछ वरिष्ठ अधिकारी और पदाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक से जुड़े।
मुख्य बातें (Highlights)
राम मंदिर ट्रस्ट ने प्रशासनिक सुधारों का बड़ा फैसला लिया।
तिरुपति मंदिर की तर्ज पर CEO नियुक्त करने की तैयारी।
CEO चयन के लिए तीन सदस्यीय हाई पावर कमेटी गठित।
चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार।
कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी।
ट्रस्ट ने पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर दिया जोर।
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। हाल में चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद के बाद ट्रस्ट ने प्रशासनिक ढांचे की समीक्षा शुरू की थी। इसी प्रक्रिया के तहत अब पेशेवर प्रबंधन प्रणाली लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
यदि नया CEO मॉडल प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो मंदिर के वित्तीय प्रबंधन, दान व्यवस्था, सुरक्षा और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही आने की उम्मीद है। इससे श्रद्धालुओं का भरोसा भी और मजबूत हो सकता है।
राम मंदिर ट्रस्ट का यह फैसला केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि मंदिर प्रबंधन को अधिक संस्थागत और पेशेवर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब निगाहें CEO चयन प्रक्रिया और नई व्यवस्था के क्रियान्वयन पर रहेंगी।


