Seoni Patwari Arun Sanodiya News: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सिवनी (SEONI) जिले में किसानों और भू-स्वामियों के साथ कथित ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) जबलपुर ने एक तत्कालीन पटवारी के खिलाफ फर्जी चालान बनाकर सरकारी राजस्व में हेराफेरी करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। प्रारंभिक जांच में करीब 6 लाख रुपये के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है।
मुख्य बातें (Highlights)
सिवनी के तत्कालीन पटवारी पर EOW ने दर्ज की एफआईआर।
किसानों और भू-स्वामियों से निजी खाते में ऑनलाइन राशि लेने का आरोप।
सरकारी चालान की जगह कथित तौर पर फर्जी चालान दिए गए।
प्रारंभिक जांच में करीब 6 लाख रुपये के फर्जीवाड़े का खुलासा।
शिकायत के बाद जिला कोषालय में सत्यापन में चालान फर्जी पाए गए।
आरोपी वर्तमान में घंसौर तहसील में पदस्थ, पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
EOW जबलपुर ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की।
किसानों से ऑनलाइन पैसे लेकर निजी खाते में कराए ट्रांसफर
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) के अनुसार आरोपी अरुण कुमार सनोडिया, जो वर्तमान में घंसौर तहसील के हल्का नंबर-25 में पदस्थ हैं, घटना के समय सिवनी तहसील के हल्का नंबर-11 में पटवारी थे।
जांच में सामने आया कि 1 मार्च 2024 से 31 अगस्त 2024 के बीच उन्होंने किसानों और भू-स्वामियों से लगान, डायवर्सन और अन्य राजस्व मदों की राशि अपने निजी बैंक खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर करवाई। इसके बाद संबंधित लोगों को सरकारी चालान की जगह कथित तौर पर फर्जी चालान दे दिए गए, जबकि राशि सरकारी खजाने में जमा नहीं कराई गई।
शिकायत से खुला पूरे फर्जीवाड़े का मामला
इस मामले का खुलासा एकता कॉलोनी निवासी राजकुमार साहू की शिकायत के बाद हुआ। शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने वर्ष 2007 से 2025 तक के संपत्ति कर के रूप में 5,400 रुपये ऑनलाइन जमा किए थे। बदले में मिले चालान की जांच करने पर वह सरकारी पोर्टल पर दर्ज नहीं मिला।
इसी तरह रामकुमार कुशवाहा से 89,550 रुपये लेकर भी कथित रूप से फर्जी चालान जारी किया गया। तत्कालीन एसडीएम के निर्देश पर जिला कोषालय से चालानों का सत्यापन कराया गया, जिसमें दोनों दस्तावेज फर्जी पाए गए।
विभागीय जांच में सामने आए और मामले
प्राथमिक शिकायतों के बाद शुरू हुई विभागीय जांच में अन्य मामलों का भी खुलासा हुआ। जांच के दौरान पाया गया कि:
सुनील नाहर से लगान के नाम पर 44,856 रुपये लेने के बाद दिए गए चालानों में भी अनियमितता मिली।
शीतल चंद भूरा के नाम पर जारी 5.04 लाख रुपये का चालान भी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं मिला और कथित रूप से फर्जी पाया गया।
प्रारंभिक जांच में करीब 6 लाख रुपये के गबन की आशंका जताई गई है।
आरोपी पटवारी निलंबित, EOW ने दर्ज किया मामला
फर्जी चालान की पुष्टि होने के बाद आरोपी पटवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की गई। अब आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ जबलपुर ने अपराध क्रमांक 83/2026 दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है।
EOW ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 316(5), 337, 336(3), 340(2) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(सी) के तहत प्रकरण दर्ज किया है। नोट: मामले की जांच जारी है। आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक और विवेचना प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
राजस्व विभाग में लगान, डायवर्सन और अन्य सरकारी शुल्क निर्धारित प्रक्रिया के तहत सीधे सरकारी खाते में जमा किए जाते हैं। ऐसे मामलों में यदि किसी कर्मचारी द्वारा निजी खाते में राशि लेकर फर्जी दस्तावेज जारी किए जाने के आरोप सामने आते हैं, तो उनकी जांच आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) जैसी एजेंसियां करती हैं।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित किसानों को राहत मिलने के साथ-साथ राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी व्यापक असर पड़ सकता है। यह मामला सरकारी राजस्व वसूली में पारदर्शिता और डिजिटल भुगतान के सत्यापन की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
सिवनी में सामने आया यह मामला सरकारी राजस्व प्रणाली में कथित अनियमितताओं का गंभीर उदाहरण है। फिलहाल EOW ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब आगे की विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि आरोपों की पुष्टि किस हद तक होती है।


