सिवनी जिले के केवलारी विकासखंड में करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क पहली ही तेज बारिश में क्षतिग्रस्त हो गई। मोहबर्रा से सारसडोल के बीच करीब 3.93 करोड़ रुपये की लागत से तैयार डामरीकृत सड़क का बड़ा हिस्सा पुलिया सहित बह जाने के बाद प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
मुख्य बातें (Highlights)
● केवलारी के मोहबर्रा-सारसडोल मार्ग का मामला
● करीब 3.93 करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क बारिश में क्षतिग्रस्त
● पुलिया सहित सड़क का हिस्सा बहने से कई गांवों का संपर्क प्रभावित
● कलेक्टर नेहा मीना ने स्वतंत्र एजेंसी से जांच के दिए निर्देश
● जिला पंचायत सीईओ अंजली शाह को सौंपी गई जांच की जिम्मेदारी
● समयबद्ध जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश
पहली ही बारिश में बह गई करोड़ों की सड़क
सिवनी जिले के केवलारी विकासखंड में मोहबर्रा से सारसडोल के बीच निर्मित डामरीकृत सड़क तेज बारिश की मार नहीं झेल सकी। 2 जुलाई को हुई मूसलाधार बारिश के दौरान पानी निकासी की पुलिया के साथ सड़क का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर बह गया।
इस घटना के बाद क्षेत्र के कई गांवों के बीच सड़क संपर्क प्रभावित हो गया है, जिससे स्थानीय लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
एक माह पहले पूरा हुआ था सड़क निर्माण
जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा स्वीकृत लगभग 3 किलोमीटर लंबी इस सड़क की लागत करीब 3 करोड़ 93 लाख रुपये है।
सड़क निर्माण का ठेका बालाघाट जिले के लामता निवासी ठेकेदार आशीष जायसवाल को दिया गया था। बताया जा रहा है कि सड़क का निर्माण कार्य बारिश शुरू होने से लगभग एक माह पहले पूरा किया गया था।
पुल निर्माण अभी भी जारी
इसी मार्ग पर स्थित नदी पर लगभग 1 करोड़ रुपये की लागत से 4 मीटर ऊंचे पुल का निर्माण कार्य अभी प्रगति पर है। जबकि सड़क का शेष भाग पहले ही तैयार कर उपयोग के लिए खोल दिया गया था।
कलेक्टर ने स्वतंत्र जांच के दिए आदेश
सड़क क्षतिग्रस्त होने की घटना को गंभीरता से लेते हुए सिवनी कलेक्टर नेहा मीना ने स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर ने बताया कि जांच की जिम्मेदारी जिला पंचायत सिवनी की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) अंजली शाह को सौंपी गई है। गठित जांच दल को मामले की विस्तृत जांच कर समयबद्ध जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच में किन बिंदुओं पर रहेगा फोकस?
प्रशासन की जांच में निम्न पहलुओं की पड़ताल की जा सकती है—
निर्माण कार्य की गुणवत्ता
तकनीकी मानकों का पालन
पुलिया और जल निकासी व्यवस्था की स्थिति
निर्माण एजेंसी एवं संबंधित अधिकारियों की भूमिका
क्षति के वास्तविक कारण
हालांकि, निर्माण में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या नहीं, इसका निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
मानसून के दौरान मध्यप्रदेश के कई जिलों में सड़क और पुल-पुलियों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे मामलों में निर्माण गुणवत्ता और जल निकासी व्यवस्था को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं। प्रशासनिक जांच का उद्देश्य क्षति के कारणों का पता लगाना और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करना होता है।
यदि जांच में निर्माण कार्य में लापरवाही या तकनीकी अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। साथ ही प्रभावित सड़क के पुनर्निर्माण और ग्रामीणों की आवाजाही बहाल करने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे।
केवलारी की यह घटना सार्वजनिक निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच पर हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि सड़क प्राकृतिक कारणों से क्षतिग्रस्त हुई या निर्माण प्रक्रिया में कहीं कोई कमी रही।


