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MP के CM मोहन यादव ने की एकात्म धाम, ओंकारेश्वर के विकास पर बैठक: सिंहस्थ 2028 तक ओंकारेश्वर बने प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल

भोपाल | मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एकात्म धाम, ओंकारेश्वर के समग्र विकास को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस दौरान उन्होंने ओंकारेश्वर में स्थापित आदि शंकराचार्य की विशाल प्रतिमा और सम्पूर्ण क्षेत्र के विकास को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

समाज को एकता के सूत्र में बांधने का केंद्र बने ओंकारेश्वर

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ओंकारेश्वर में स्थित आदि शंकराचार्य की प्रतिमा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सम्पूर्ण समाज को एकता के सूत्र में बांधने का कार्य करती है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रतिमा स्थल सहित सम्पूर्ण ओंकारेश्वर के विकास से जुड़े सभी आवश्यक कार्य शीघ्र पूर्ण किए जाएं, ताकि यह स्थान और अधिक भव्य और सुव्यवस्थित रूप ले सके।

सिंहस्थ 2028 तक ओंकारेश्वर बने प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल

मुख्यमंत्री ने 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए कहा कि ओंकारेश्वर को भी उज्जैन की तरह श्रद्धालुओं और पर्यटकों के विशेष आकर्षण का केंद्र बनाया जाए। इसके लिए सभी आवश्यक प्रयास किए जाएं, जिससे आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के एक महत्वपूर्ण स्थल के रूप में उभरे।

यात्रियों की सुविधा के लिए रोप-वे और मार्गों का होगा विस्तार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एकात्म धाम और आसपास के क्षेत्रों में आने-जाने के मार्गों को सुविधाजनक बनाने के लिए तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित रोप-वे परियोजना को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुगम यात्रा का अनुभव मिल सके।

इस बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी और संबंधित विभागों के प्रमुख उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ओंकारेश्वर के विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी न हो और सभी योजनाएं समय पर पूरी की जाएं।

सिवनी: पेंच टाइगर रिजर्व में वन्यजीव प्रबंधन के लिए राज्य स्तरीय दो दिवसीय कार्यशाला 07 एवं 08 मार्च को

Seoni News। वन्यजीव प्रबंधन को सुदृढ़ करने और भविष्य की रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश सरकार के निर्देशानुसार राज्य स्तरीय दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन 07 एवं 08 मार्च 2025 को पेंच टाइगर रिजर्व, सिवनी (खवासा) में किया जा रहा है।

वन्यजीव संरक्षण पर होगा गहन मंथन

पेंच टाइगर रिजर्व सिवनी के उपसंचालक ने जानकारी दी कि इस कार्यशाला में मध्यप्रदेश वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक सहित वरिष्ठ अधिकारी, टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक, वन्यजीव बाहुल्य वन वृत्तों के मुख्य वन संरक्षक, वनमंडल अधिकारी, वैज्ञानिक एवं सेवानिवृत्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक सम्मिलित होंगे। इसके अलावा, महाराष्ट्र, कर्नाटक जैसे अन्य राज्यों के मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक, एनटीसीए एवं एनजीओ के पदाधिकारी, टाइगर रिजर्व के फील्ड बायोलॉजिस्ट सहित 80 से अधिक विशेषज्ञ एवं अधिकारी इस कार्यशाला में भाग लेंगे।

कार्यशाला में इन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर होगी चर्चा

इस कार्यशाला में वन्यजीव प्रबंधन के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित विषय शामिल होंगे—

✔️ मानव-वन्यजीव द्वंद की परिस्थितियां एवं समाधान

✔️ स्थानीय समुदायों की सहभागिता से वन्यजीव संरक्षण

✔️ पर्यावास प्रबंधन हेतु भौगोलिक परिदृश्य का विश्लेषण

✔️ वन्यजीव कॉरिडोर की वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजना

मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण को मिलेगी नई दिशा

कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई रणनीति से मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण को एक नई दिशा मिलेगी। इस कार्यशाला का आयोजन पेंच टाइगर रिजर्व में होना और राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों की उपस्थिति, मध्यप्रदेश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को और सशक्त बनाएगी।

MP के विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में होगा अनोखा सुधार: राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन तेज

मध्यप्रदेश के विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिये राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का क्रियान्वयन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रभावी तरीके से किया जा रहा है। नीति के क्रियान्वयन के लिये राज्य शासन द्वारा आयुक्त और संचालक स्तर की अध्यक्षता में वरिष्ठ अधिकारियों की 14 समितियाँ गठित की गयी हैं। यह समितियाँ राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न ग्रुप और क्षेत्रों से संबंधित हैं। राज्य शासन ने स्कूल शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में टॉस्क फोर्स का गठन किया है। इसमें स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी पदेन सदस्य हैं। समिति में शासकीय एवं अशासकीय शिक्षाविदों को भी शामिल किया गया है।

सदस्यों के बीच परिचर्चा

राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं क्रियान्वयन के लिये सदस्यों के बीच परिचर्चा भी करायी गयी है। इसमें अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन के साथ समन्वय में विशेषज्ञ के उद्बोधन कराये गये हैं। उन्मुखीकरण के दौरान एनसीईआरटी के विभागाध्यक्ष द्वारा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या फाउण्डेशनल (एनसीएफ) स्टेज विकास प्रक्रिया और राज्य पाठ्यचर्या फाउण्डेशनल (एससीएफ) स्टेज के बारे में भी जानकारी दी गयी है। केन्द्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के दिशा-निर्देश अनुसार न्यू एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी) ट्रैकर को नियमित रूप से अपडेट किया जा रहा है।

समतामूलक और समावेशी शिक्षा

राज्य में विशेष आवश्यकता वाले चिल्ड्रन विथ स्पेशल नीड्स (सीडब्ल्यूएसएन) 9550 नये बच्चों की पहचान एवं उनका कक्षा-9 से 12 में नामांकन सुनिश्चित किया गया है। इसी के साथ विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के शिक्षण के लिये प्रदेश में 8500 शिक्षकों को वर्ष 2024 में 2 सत्रों में विशेष प्रशिक्षण भी दिलाया गया है। सभी विकासखण्डों में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संसाधन केन्द्र विकसित किये गये हैं।

व्यावसायिक शिक्षा पर जोर

नई शिक्षा नीति में विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा देने पर जोर दिया गया है। प्रदेश में 2383 विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा संचालित की जा रही है। इनमें करीब 4 लाख विद्यार्थियों का इनरोलमेंट किया गया है और उन्हें 14 ट्रेड में व्यावसायिक शिक्षा देने की व्यवस्था की गयी है। प्रदेश के 798 हायर सेकेण्डरी विद्यालयों में कृषि संकाय और 465 हायर सेकेण्डरी स्कूलों में कृषि ट्रेड संचालित किये जा रहे हैं। स्टार्स प्रोजेक्ट के अंतर्गत 100 विद्यालयों में नियमित छात्रों के साथ-साथ ड्रॉपआउट विद्यार्थियों की भी व्यावसायिक शिक्षा प्रारंभ की गयी है। प्रदेश के प्रत्येक सीएम राइज विद्यालय में 2 वोकेशनल ट्रेड्स के लिये लैब निर्मित की जा रही है। विभाग के 52 सीएम राइज विद्यालयों में रोबोटिक्स लैब की स्थापना भी करायी गयी है। वर्तमान में संचालित आईटी कोर्सेस के अलावा पं. सुंदरलाल शर्मा इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल एजुकेशन के सहयोग से एआई कोडिंग जैसे नवीन पाठ्यक्रम तैयार किये जा रहे हैं। ट्यूनिंग ऑफ स्कूल के अंतर्गत 520 विद्यालयों की ट्यूनिंग की गई है, जिसके अंतर्गत यह विद्यालय आपस में बेस्ट प्रैक्टिस का आदान-प्रदान करते हैं।

एमपी और राजस्थान सरकार मिलकर भगवान श्रीकृष्ण पाथेय के विकास के लिए करेंगे काम – MP CM MOHAN YADAV

Shri Krishna Patheya: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भगवान श्रीकृष्ण पाथेय के संदर्भ में मध्यप्रदेश और राजस्थान सरकार पूरी तरह एकमत हैं। दोनों राज्यों की सरकारें मिलकर इस पावन पथ के विकास हेतु ठोस कार्ययोजना बनाएंगी। इसके साथ ही, गुजरात सरकार से भी सहयोग लेकर भगवान श्रीकृष्ण के गुजरात गमन पथ को संरक्षित और विकसित किया जाएगा।

भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंग होंगे उजागर

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का ईश्वरीय स्वरूप तो स्तुत्य है ही, लेकिन इसके अलावा भी उनके जीवन के अनेक महत्वपूर्ण पहलू हैं, जिन्हें समाज के समक्ष प्रकाश में लाने की आवश्यकता है। इनमें उज्जैन में शिक्षा ग्रहण करना, सुदामा से मित्रता निभाना, वनवासी समाज से प्रेम और गुरू-शिष्य परंपरा की मिसाल स्थापित करना शामिल हैं। इन पहलुओं को उजागर कर समाज में भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

विशेषज्ञ समिति की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को समत्व भवन, मुख्यमंत्री निवास में श्रीकृष्ण पाथेय से संबंधित विषय विशेषज्ञ समिति की बैठक में उपस्थित थे। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीकृष्ण पाथेय के विकास के लिए पुरातत्वविदों, धर्माचार्यों एवं श्रीकृष्ण साहित्य के विद्वानों को भी समिति में जोड़ा जाएगा। इसके अलावा, भोपाल में आयोजित बैठक के साथ-साथ उज्जैन, जयपुर, भरतपुर, ब्रज एवं चौरासी कोस जैसे महत्वपूर्ण स्थलों पर भी बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिससे इस पवित्र परियोजना को गति मिल सके।

भगवान श्रीकृष्ण के गमन स्थलों का होगा अभिलेखीकरण

मुख्यमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि भगवान श्रीकृष्ण के गमन स्थलों का सटीक अभिलेखीकरण किया जाए। प्राचीन शास्त्रों, ऐतिहासिक दस्तावेजों एवं पुरातात्विक प्रमाणों के आधार पर भगवान श्रीकृष्ण के भ्रमण स्थलों की विस्तृत सूची तैयार की जाएगी। विशेष रूप से, उज्जैन के सांदीपनि आश्रम को श्रीकृष्ण पाथेय के विकास केंद्र के रूप में स्थापित किया जाएगा।

श्रीकृष्ण पाथेय का ऐतिहासिक महत्व और इसके विस्तार की योजना

विशेषज्ञों ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा लोक कल्याण के उद्देश्य से मथुरा, उज्जैन, द्वारका, ब्रज मंडल, मेवात, हाड़ौती, मालवा, निमाड़, गुजरात, राजस्थान, विदर्भ और महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में यात्राएं की गई थीं। किंतु उनका प्रमुख केंद्र उज्जैन ही था। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए उज्जैन को इस परियोजना के मुख्य केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

धार्मिक संस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में बड़ा कदम

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने धार्मिक पर्वों एवं सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी सहभागिता बढ़ाई है। उन्होंने बताया कि दशहरे पर शस्त्र पूजा, दीपावली पर गोवर्धन पूजा और हाल ही में गीता जयंती का आयोजन कर प्रदेश में सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा दिया गया है। इसी कड़ी में प्रदेश के 17 पवित्र धार्मिक स्थलों में शराबबंदी लागू करने का निर्णय लिया गया, जिससे समाज में सकारात्मक संदेश गया है।

श्रीकृष्ण पाथेय के विकास के लिए सरकार का प्रतिबद्ध रुख

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार श्रीकृष्ण पाथेय के विकास के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। भविष्य में भगवान श्रीकृष्ण की अन्य लीलाओं को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा ताकि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सके और सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार हो।

बैठक में उपस्थित प्रमुख सदस्य

इस बैठक में राजस्थान सरकार में राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त श्री ओंकार सिंह लखावत, महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के पूर्व निदेशक पद्मश्री डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित, मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार डॉ. श्रीराम तिवारी, उज्जैन के डॉ. शैलेन्द्र शर्मा, डॉ. रमन सोलंकी, मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन, अपर मुख्य सचिव श्री संजय शुक्ला, प्रमुख सचिव संस्कृति एवं पर्यटन श्री शिवशेखर शुक्ला सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं समिति के सदस्यगण उपस्थित थे। उज्जैन के कमिश्नर एवं कलेक्टर ने भी वर्चुअली बैठक में सहभागिता की।

इस बैठक में लिए गए निर्णयों से स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश सरकार भगवान श्रीकृष्ण पाथेय के विकास के लिए सक्रियता से कार्य कर रही है और अन्य राज्यों के साथ समन्वय बनाकर इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके माध्यम से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को उजागर किया जाएगा। यह पहल न केवल संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण में सहायक होगी, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी।

MP के रतलाम में ‘कोमा’ मरीज ICU से भागा: मरीज को आईसीयू में बंधक बनाकर मेडिकल बिल के नाम पर ₹1 लाख ऐंठे!

Ratlam Coma Patient News: मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक निजी अस्पताल पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि अस्पताल के कर्मचारियों ने एक मरीज को आईसीयू में बंद कर दिया और उसके परिवार से जबरन 1 लाख रुपये की मांग की। यह घटना निजी अस्पतालों में हो रही अनियमितताओं और लापरवाहियों की पोल खोलती है।

कैसे हुआ मामले का खुलासा?

यह पूरा मामला तब सामने आया जब पीड़ित मरीज बंटी निनामा, जो दीनदयाल नगर का निवासी है, खुद आईसीयू से बाहर आया और उसने अपने साथ हुई धोखाधड़ी के बारे में खुलासा किया। मरीज के मुताबिक, अस्पताल प्रशासन ने उसके परिवार को बताया कि वह कोमा में चला गया है, जबकि वास्तविकता कुछ और ही थी।

बंटी निनामा ने बताया कि अस्पताल कर्मचारियों ने झूठे मेडिकल दस्तावेज दिखाकर उसकी पत्नी से 1 लाख रुपये की मांग की। जब उसकी पत्नी ने पैसे देने में असमर्थता जताई, तो उसे तरह-तरह से डराया गया। फिर परिवार वालों ने रिश्तेदारों से मदद मांगकर 1 लाख रुपए इखट्टे किए. लेकिन सच्चाई तब सामने आई जब बंटी खुद आईसीयू से बाहर निकला और पूरी घटना का पर्दाफाश किया।

वीडियो वायरल, अस्पताल प्रशासन सवालों के घेरे में

यह मामला तब और गरमाया जब घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में बंटी निनामा स्वस्थ अवस्था में चलता हुआ दिख रहा है। उसके हाथ और सीने पर आईवी ड्रिप के लिए लगाए गए मेडिकल टेप थे और उसके हाथ में पेशाब की बोतल थी।

इस वीडियो में मरीज की पत्नी और मां को अस्पताल के कर्मचारियों पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए साफ सुना जा सकता है। “उन्होंने हमें बताया कि उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई है और वह कोमा में चला गया है। उन्होंने हमें दवाइयों और इंजेक्शन के लिए कई नुस्खे दिए और फिर इलाज के लिए 1 लाख रुपये मांगे।”

कैसे किया गया मरीज को बंधक?

पीड़ित की पत्नी ने बताया कि जब बंटी चिल्लाने लगा तो अस्पताल का स्टाफ भड़क उठा। उसकी पत्नी घबराकर आईसीयू की छोटी सी खिड़की से झांकी और अंदर का नज़ारा देखकर चौंक गई। उसने देखा कि पांच लोग उसे पकड़कर जबरदस्ती रोक रहे थे

स्थिति बिगड़ती देख बंटी ने कैंची उठा ली और कर्मचारियों पर हमला करने की धमकी दी, तब जाकर उसे छोड़ दिया गया।

अस्पतालों की मनमानी और चिकित्सा माफिया का पर्दाफाश

यह कोई पहली घटना नहीं है जब किसी निजी अस्पताल ने मरीजों के साथ धोखाधड़ी की हो। कई मामलों में देखा गया है कि अस्पताल गलत रिपोर्ट दिखाकर मरीजों से ज़बरन पैसे वसूलते हैं।

निजी अस्पतालों में बढ़ते फर्जीवाड़े के मुख्य कारण:

  1. मुनाफे के लिए अनावश्यक इलाज: कई निजी अस्पताल छोटे-मोटे मामलों को भी गंभीर बताकर मोटी फीस वसूलते हैं।
  2. गलत मेडिकल रिपोर्ट बनाना: झूठी रिपोर्ट बनाकर मरीज और उसके परिवार को मानसिक रूप से परेशान किया जाता है।
  3. अस्पतालों पर प्रशासनिक नियंत्रण की कमी: सरकारी एजेंसियों की लापरवाही के कारण निजी अस्पताल मनमानी करते हैं।
  4. आम जनता की जागरूकता की कमी: अधिकतर मरीज और उनके परिवार कानूनों की जानकारी नहीं रखते, जिससे अस्पतालों की धोखाधड़ी चलती रहती है।

प्रशासन की चुप्पी और कानूनी कार्रवाई की मांग

इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिस और प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। कई बार शिकायतों के बावजूद, प्रशासन की ओर से किसी ठोस कार्रवाई का अभाव रहता है।

मरीजों और परिवारों को क्या करना चाहिए?

निजी अस्पतालों में इस तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए मरीजों और उनके परिवारों को निम्नलिखित बचाव के तरीके अपनाने चाहिए:

  1. दूसरी राय जरूर लें: किसी भी गंभीर बीमारी की स्थिति में किसी अन्य डॉक्टर से दूसरी राय लेना ज़रूरी है।
  2. सभी मेडिकल रिपोर्ट खुद जांचें: डॉक्टर या अस्पताल द्वारा दी गई रिपोर्ट की विश्वसनीयता को स्वयं जांचें।
  3. रिकॉर्डिंग और दस्तावेज़ रखें: अस्पताल में होने वाली बातचीत को रिकॉर्ड करें और सभी कागजात सुरक्षित रखें।
  4. हेल्थ डिपार्टमेंट में शिकायत करें: किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी होने पर स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन को तत्काल सूचना दें।

रतलाम की इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की मनमानी और भ्रष्टाचार को उजागर किया है। यह ज़रूरी है कि सरकार ऐसे अस्पतालों के खिलाफ सख्त कानून बनाए और सख्ती से लागू करे। अगर हम इस तरह की घटनाओं को रोकना चाहते हैं, तो जागरूकता और सतर्कता बेहद आवश्यक है। आम जनता को अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए और ज़रूरत पड़ने पर कानून का सहारा लेना चाहिए।

बेटा और बहू चप्पल से मारेंगे तो जीने से अच्छा मरना है: 67 वर्षीय बुजुर्ग ने 5वीं मंजिल से कूदकर जान दे दी

फरीदाबाद के सेक्टर-88 स्थित एसआरएस हिल्स सोसायटी में एक 67 वर्षीय बुजुर्ग द्वारा आत्महत्या करने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि बुजुर्ग को उनके बेटे और बहू द्वारा चप्पलों से पीटा जाता था, जिससे तंग आकर उन्होंने यह कठोर कदम उठाया। पुलिस ने सुसाइड नोट बरामद कर लिया है और मामला दर्ज कर लिया गया है।

यह दर्दनाक घटना 22 फरवरी को हुई, जब कुबेर नाथ शर्मा नामक व्यक्ति ने अपनी सोसायटी की पांचवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। घटना की जानकारी मिलते ही भूपानी पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की।

सुसाइड नोट में बेटे-बहू पर गंभीर आरोप

पुलिस को बुजुर्ग की जेब से एक सुसाइड नोट मिला, जिसमें उन्होंने लिखा:

आत्महत्या मैं अपनी मर्जी से कर रहा हूँ, किसी ने मुझे धक्का नहीं दिया है। मेरा बेटा और बहू मुझ पर चप्पलों से वार करते हैं, जिससे तंग आकर मैं यह कदम उठा रहा हूँ। इसमें किसी का दोष नहीं है, सब कुछ ऊपर वाले की मर्जी से हो रहा है।

इस सुसाइड नोट के सामने आने के बाद भूपानी पुलिस ने बेटे और बहू के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर लिया है।

कुबेर नाथ शर्मा एक निजी कंपनी से सेवानिवृत्त फोरमैन थे और पिछले तीन वर्षों से अपने बेटे और बहू के साथ फरीदाबाद की एसआरएस हिल्स सोसायटी में रह रहे थे। इससे पहले वह गाजियाबाद में अपने बड़े बेटे के घर पर रहते थे, लेकिन कुछ कारणों से उन्हें वहां से निकलना पड़ा। शर्मा पिछले तीन वर्षों से बीमार भी थे, जिसके कारण वह मानसिक रूप से भी परेशान चल रहे थे।

उनका बेटा एक आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर डिजाइनर के रूप में कार्यरत है, जबकि बहू एक स्कूल शिक्षिका है

घटना के समय क्या हुआ?

पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में, शर्मा के बेटे ने बयान दिया कि उसके पिता सुबह नाश्ता करने के बाद टहलने के लिए निकले थे। जब वह दोपहर के भोजन के लिए वापस नहीं लौटे, तो बेटे ने सोसायटी के गार्ड से मदद मांगी। तभी एक तेज आवाज सुनाई दी और देखा कि बुजुर्ग सोसायटी के प्रांगण में गिरे पड़े थे। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया

एसआरएस हिल्स सोसायटी का विवरण

मैजिक ब्रिक्स के अनुसार, एसआरएस हिल्स सोसायटी 48 एकड़ भूमि पर फैली हुई है और इसमें कुल 12 टावर हैं। यह एक उच्च-वर्गीय सोसायटी मानी जाती है, लेकिन इस घटना के बाद से यहाँ सुरक्षा और पारिवारिक विवादों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

घरेलू हिंसा का एंगल

शुरुआती जांच में इस मामले को सिर्फ आत्महत्या का केस माना जा रहा था। लेकिन सुसाइड नोट मिलने के बाद घरेलू हिंसा के आरोप भी सामने आए। पुलिस के अनुसार, घटना के समय शर्मा की पत्नी अपने गांव में थी, जिससे यह संदेह पैदा हुआ कि कहीं बुजुर्ग घर में अकेले तो नहीं पड़ गए थे।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बुजुर्ग के बेटे और बहू से भी गहन पूछताछ की जाएगी और यह भी देखा जाएगा कि उनके साथ पहले भी घरेलू हिंसा की घटनाएँ हुई थीं या नहीं

फोरेंसिक जांच में क्या सामने आएगा?

एसएचओ संग्राम दहिया ने बताया कि पुलिस ने क्राइम सीन को रीक्रिएट किया है और सुसाइड नोट को हैंडराइटिंग वेरिफिकेशन के लिए फोरेंसिक लैब भेज दिया गया है

फोरेंसिक रिपोर्ट के आने के बाद:

  • अगर सुसाइड नोट बुजुर्ग का ही पाया गया, तो मामला आत्महत्या और घरेलू हिंसा के तौर पर आगे बढ़ाया जाएगा।
  • अगर कोई बाहरी दबाव या झगड़े के सबूत मिलते हैं, तो बेटे और बहू पर गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

बुजुर्गों के लिए न्याय की मांग

यह घटना सिर्फ एक आत्महत्या का मामला नहीं है, बल्कि यह बुजुर्गों के प्रति समाज के बदलते व्यवहार को भी दर्शाती हैआए दिन ऐसे मामले सामने आते हैं, जहां बुजुर्गों को उनके ही घर में प्रताड़ित किया जाता है

जरूरी कदम जो उठाए जाने चाहिए:

  • बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए कड़े कानूनों का पालन किया जाए।
  • बुजुर्गों को हेल्पलाइन नंबर और कानूनी सहायता की जानकारी दी जाए।
  • सोसायटी में ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जाए और पुलिस को तत्काल सूचना दी जाए।

फरीदाबाद की इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है – क्या बुजुर्ग अपने ही घर में सुरक्षित हैं? अगर सुसाइड नोट के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह समाज के लिए एक चेतावनी है कि हमें अपने माता-पिता और बुजुर्गों की सुरक्षा और देखभाल को प्राथमिकता देनी होगी

UCEED 2025 Results: आईआईटी बॉम्बे 7 मार्च 2025 को UCEED 2025 का रिजल्ट करेगा घोषित, जानें पूरी जानकारी

UCEED 2025 Results: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) बॉम्बे 7 मार्च, 2025 को अंडरग्रेजुएट कॉमन एंट्रेंस एग्जामिनेशन फॉर डिज़ाइन (UCEED) 2025 के नतीजे जारी करने जा रहा है। यह परीक्षा भारत के प्रमुख डिजाइन संस्थानों में बैचलर ऑफ डिज़ाइन (BDes) में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है। इस साल UCEED 2025 परीक्षा 19 जनवरी, 2025 को आयोजित की गई थी और अब लाखों उम्मीदवार अपने परिणामों का इंतजार कर रहे हैं।

परिणाम IIT बॉम्बे की आधिकारिक वेबसाइट uceed.iitb.ac.in पर उपलब्ध होंगे। उम्मीदवार अपना स्कोरकार्ड वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं और आगे की प्रवेश प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

महत्वपूर्ण तिथियां और जानकारी

नीचे UCEED 2025 से संबंधित सभी महत्वपूर्ण तिथियां दी गई हैं:

  • एडमिट कार्ड जारी होने की तिथि: 3 जनवरी, 2025
  • एडमिट कार्ड सुधार की अंतिम तिथि: 9 जनवरी, 2025
  • UCEED 2025 परीक्षा तिथि: 19 जनवरी, 2025
  • परीक्षा समय: सुबह 9:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक
  • परिणाम घोषणा की तिथि: 7 मार्च, 2025
  • स्कोरकार्ड डाउनलोड करने की तिथि: 11 मार्च, 2025 से

UCEED 2025 परिणाम कैसे जांचें?

परिणाम देखने के लिए उम्मीदवार निम्नलिखित चरणों का पालन कर सकते हैं:

  1. आधिकारिक वेबसाइट पर जाएंuceed.iitb.ac.in
  2. “UCEED 2025 परिणाम” लिंक पर क्लिक करें।
  3. पंजीकृत ईमेल आईडी और पासवर्ड दर्ज करें।
  4. जानकारी भरने के बाद, “सबमिट” पर क्लिक करें।
  5. स्क्रीन पर आपका परिणाम प्रदर्शित होगा, जिसे डाउनलोड करके भविष्य के लिए सहेज सकते हैं।

UCEED 2025 परीक्षा संरचना

UCEED परीक्षा दो भागों में आयोजित की जाती है:

पार्ट A (CBT आधारित टेस्ट)

  • टेस्ट फॉर्मेट: कंप्यूटर आधारित
  • प्रश्नों के प्रकार:
    • मल्टीपल-चॉइस प्रश्न (MCQ)
    • मल्टीपल-सिलेक्ट प्रश्न (MSQ)
    • न्यूमेरिकल आंसर टाइप (NAT) प्रश्न
  • समय अवधि: 3 घंटे (सुबह 9:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक)

पार्ट B (स्केचिंग टेस्ट)

  • फॉर्मेट: ऑफलाइन ड्रॉइंग टेस्ट
  • मूल्यांकन: डिज़ाइन और ड्रॉइंग स्किल्स का परीक्षण
  • समय: परीक्षा के दौरान ही पूरा करना होगा

UCEED 2025 कटऑफ और मेरिट लिस्ट

IIT बॉम्बे द्वारा परीक्षा के कटऑफ और मेरिट लिस्ट जारी की जाएगी। कटऑफ अंकों का निर्धारण विभिन्न कारकों के आधार पर किया जाएगा, जैसे कि परीक्षा की कठिनाई, कुल उपस्थित उम्मीदवारों की संख्या, और पिछले वर्षों के कटऑफ स्कोर।

पिछले वर्षों के कटऑफ ट्रेंड:

  • जनरल कैटेगरी: 75-85 प्रतिशताइल
  • OBC-NCL: 65-75 प्रतिशताइल
  • SC/ST/PWD: 50-60 प्रतिशताइल

UCEED स्कोरकार्ड का महत्व

UCEED स्कोरकार्ड भारत के शीर्ष संस्थानों में प्रवेश के लिए मान्य होता है। UCEED 2025 के अंकों के आधार पर छात्र निम्नलिखित संस्थानों में बैचलर ऑफ डिज़ाइन (BDes) कार्यक्रम में प्रवेश ले सकते हैं:

  1. IIT बॉम्बे
  2. IIT दिल्ली
  3. IIT गुवाहाटी
  4. IIT हैदराबाद
  5. IIT रुड़की
  6. IIITDM जबलपुर

इसके अलावा, कई निजी और राज्य विश्वविद्यालय भी UCEED स्कोर को मान्यता देते हैं और अपने BDes कार्यक्रमों में दाखिले के लिए इस परीक्षा के अंकों को स्वीकार करते हैं।

UCEED 2025 काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया

UCEED 2025 के परिणाम घोषित होने के बाद, प्रवेश प्रक्रिया शुरू होगी। इच्छुक उम्मीदवारों को निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन करना होगा:

  1. पंजीकरण: योग्य उम्मीदवारों को IIT बॉम्बे की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर काउंसलिंग के लिए पंजीकरण करना होगा।
  2. कॉलेज और कोर्स वरीयता भरना: उम्मीदवार अपनी पसंद के कॉलेज और कोर्स की वरीयता सूची में भर सकते हैं।
  3. सीट अलॉटमेंट: योग्यता, कटऑफ और भरी गई प्राथमिकताओं के आधार पर सीटें आवंटित की जाएंगी।
  4. डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन: उम्मीदवारों को अपने सभी आवश्यक दस्तावेज़ों को सत्यापित कराना होगा।
  5. फाइनल एडमिशन: चयनित उम्मीदवारों को निर्धारित समय में कॉलेज की फीस जमा करनी होगी।

UCEED 2025 परीक्षा में सफलता पाने के लिए टिप्स

UCEED परीक्षा में सफल होने के लिए निम्नलिखित टिप्स अपनाई जा सकती हैं:

  • पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र हल करें और परीक्षा पैटर्न को समझें।
  • डिज़ाइन स्किल्स और ड्रॉइंग प्रैक्टिस पर विशेष ध्यान दें।
  • MCQ, MSQ और NAT प्रश्नों का अभ्यास करें।
  • समय प्रबंधन का ध्यान रखें और सभी प्रश्नों को व्यवस्थित रूप से हल करने का प्रयास करें।
  • मॉक टेस्ट और ऑनलाइन टेस्ट सीरीज़ से अपनी तैयारी को मजबूत करें।

UCEED 2025 भारत के प्रमुख डिज़ाइन संस्थानों में प्रवेश पाने के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा है। जो छात्र डिज़ाइन के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह परीक्षा बेहद अहम है। 7 मार्च, 2025 को IIT बॉम्बे द्वारा UCEED 2025 के परिणाम जारी किए जाएंगे। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपने स्कोरकार्ड को डाउनलोड करें और आगे की प्रवेश प्रक्रिया में भाग लें।

Marathi Is Mumbai’s Language: आरएसएस नेता के ‘मराठी जानना जरूरी नहीं’ वाले बयान पर सीएम फडणवीस ने विधानसभा में कहा

आरएसएस नेता भैयाजी जोशी के मराठी भाषा पर दिए गए बयान ने महाराष्ट्र में नया विवाद खड़ा कर दिया है। मुंबई के घाटकोपर में एक कार्यक्रम में बोलते हुए आरएसएस नेता ने कहा कि मुंबई में रहने के लिए मराठी भाषा का अच्छा ज्ञान होना जरूरी नहीं है।

मराठी भाषा पर भैयाजी जोशी की टिप्पणी ने राज्य के विपक्षी नेताओं को नाराज कर दिया है। यहां तक ​​कि सत्तारूढ़ भाजपा को भी जोशी की टिप्पणी का समर्थन करना मुश्किल लग रहा है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने राज्य विधानसभा में आरएसएस नेता की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त की और स्पष्ट किया कि “मराठी मुंबई, महाराष्ट्र और राज्य सरकार की भाषा है।”

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने कहा, “मराठी भाषा राज्य की संस्कृति और पहचान का हिस्सा है और इसे सीखना हर नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए। मराठी भाषा का महाराष्ट्र में सम्मान और संरक्षण किया जाएगा और यह हमारी सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग है।”

घाटकोपर में एक कार्यक्रम में बोलते हुए भैयाजी जोशी ने कहा, “मुंबई में एक भी भाषा नहीं है। मुंबई के हर हिस्से की एक अलग भाषा है। घाटकोपर इलाके की भाषा गुजराती है। इसलिए अगर आप मुंबई में रहते हैं, तो यह ज़रूरी नहीं है कि आपको मराठी सीखनी ही पड़े।”

दिलचस्प बात यह है कि जोशी के भाषण के दौरान भाजपा नेता और मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा मंच पर मौजूद थे।

उल्लेखनीय है कि एक प्रमुख नीतिगत निर्णय के तहत महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में आईसीएसई और सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में मराठी भाषा को अनिवार्य कर दिया है।

आरएसएस नेता के बयान की कांग्रेस और शिवसेना नेताओं ने आलोचना की।

ठाणे में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए शिवसेना सांसद संजय राउत ने सवाल किया कि क्या कोलकाता में बंगाली और चेन्नई में तमिल के बारे में यही बात कही जा सकती है।

कांग्रेस नेता नाना पटोले ने भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों और बेरोजगारी जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए भाषा पर बहस छेड़ी जा रही है।