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छिंदवाड़ा: माचागोरा बांध के गेट खोले गए, भीमगढ़ डैम पहुचेगा पानी; सिवनी को जलसंकट से मिलेगी राहत

Seoni/Chhindwara: छिंदवाड़ा जिले में जल संसाधनों के कुशल प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पेंच व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत माचागोरा बांध के मुख्य द्वार खोल दिए गए हैं, जिससे पेंच नदी के माध्यम से भीमगढ़ बांध तक पानी पहुंचेगा। यह निर्णय गर्मियों के मौसम में पेयजल संकट की समस्या से जूझ रही चौरई, चांद और ग्रामीण क्षेत्रों की जनता और मवेशियों को राहत प्रदान करने हेतु लिया गया है।

इस योजना के अंतर्गत माचागोरा बांध से पेंच नदी के रास्ते पानी को भीमगढ़ जलाशय तक पहुँचाया जा रहा है, जिससे सिवनी जिले को जल की आपूर्ति की जा सके। लेकिन सिवनी के भीमगढ़ तक पानी पहुँचने में कम से कम अभी 7 दिनों का समय लगेगा और सिवनी को पूरी तरह जलसंकट से छुटकारा लगभग 10 दिनों बाद मिल पायेगा.

पेंच व्यपवर्तन परियोजना का महत्व

पेंच व्यपवर्तन परियोजना, मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की एक महत्त्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल और निस्तारण की आवश्यकताओं को पूरा करना है। इस योजना के अंतर्गत माचागोरा बांध से पेंच नदी के रास्ते पानी को भीमगढ़ जलाशय तक पहुँचाया जाता है, जिससे सिवनी जिले को जल की आपूर्ति की जा सके।

छिंदवाडा सांसद विवेक बंटी साहू की पहल

सांसद श्री विवेक बंटी साहू ने इस संदर्भ में जल संसाधन विभाग को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि चौरई, चांद एवं आसपास के क्षेत्रों में लोगों और पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उनकी पहल पर कार्यवाही करते हुए कार्यपालन यंत्री एस.के. सिरसाम के निर्देशन में 19 अप्रैल 2025 को माचागोरा बांध के रेडियल गेट खोले गए।

17 क्यूमेक्स पानी छोड़ा गया

जल संसाधन विभाग द्वारा जानकारी दी गई कि लगभग 17 क्यूमेक्स पानी छोड़ा गया है, जो पेंच नदी के जल स्तर में वृद्धि करेगा और नदी के बहाव को सुचारु बनाएगा। इसका सीधा लाभ उन ग्रामीणों को मिलेगा, जो नदी किनारे बसे हुए हैं और कृषि तथा पशुपालन पर निर्भर हैं।

ग्रामीणों के लिए सावधानियां और अपील

बांध के द्वार खोलने के साथ-साथ विभाग ने नदी तटीय क्षेत्रों में बसे ग्रामवासियों से आग्रह किया है कि वे नदी किनारे न जाएं। नदी का जलस्तर बढ़ने से डूब क्षेत्र में आने वाली संपत्ति और जान की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

जल संकट से निपटने में मददगार साबित होगा यह निर्णय

गर्मियों के इस कठिन समय में जल संकट एक आम समस्या बनकर उभरी है। ऐसे में माचागोरा बांध से जल प्रवाह शुरू करना एक बड़ी राहत मानी जा रही है। इससे पीने के पानी, घरेलू उपयोग, और पशुपालन की आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।

भीमगढ़ बांध तक पहुंचेगा पानी

माचागोरा से छोड़ा गया पानी पेंच नदी के माध्यम से भीमगढ़ बांध तक पहुंचेगा। इससे भीमगढ़ जलाशय में भी जलस्तर में बढ़ोतरी होगी, जो सिवनी जिले में चल रहे जलसंकट के बीच राहत मिलेगी और जलापूर्ति के लिए सहायक सिद्ध होगा।

जल संसाधन विभाग की सक्रियता

जल संसाधन संभाग क्रमांक-1 चौरई की टीम पूरी तरह से सक्रिय है। अधिकारी नियमित रूप से जल प्रवाह की निगरानी कर रहे हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन दल भी तैयार रखा गया है। यह सुनिश्चित किया गया है कि पानी का सदुपयोग हो और किसी भी प्रकार की क्षति न हो।

MP WEATHER: 44 डिग्री सेल्सियस के पार हुआ तापमान; 22 अप्रैल के बाद गर्मी और बढ़ेगी

भोपाल (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश में अप्रैल माह में तापमान धीरे-धीरे बढ़ रहा है और अब तक का सर्वाधिक तापमान 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।  शुक्रवार को खजुराहो, गुना और नौगांव में अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर सहित कुल 28 शहरों में भीषण गर्मी रही, जो इस मौसम का अब तक का सबसे गर्म दिन रहा।

शनिवार को मौसम का पूर्वानुमान 

भोपाल, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर जैसे शहरों में गर्मी बनी रहेगी। मौसम विभाग के अनुसार, तापमान में यह बढ़ोतरी राज्य भर में चल रही गर्म हवाओं के कारण हुई है। सुबह से ही सूरज की तपिश महसूस की जा सकती है और दोपहर तक गर्मी चरम पर होती है। रातें भी गर्म हो रही हैं।

हालांकि, मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि 22 अप्रैल के बाद तापमान में मामूली गिरावट आ सकती है। छतरपुर जिला सबसे गर्म रहा, जबकि खजुराहो 44.6 डिग्री सेल्सियस और नौगांव 44 डिग्री सेल्सियस पर रहा।

मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अप्रैल से मई तक गर्मी के दिन और बढ़ेंगे, संभवतः अकेले मई में 15 से 20 दिन। इस अवधि के दौरान विभिन्न जिलों में लगभग 30 से 35 दिन गर्म हवाएँ चलने की उम्मीद है।

अगले दो दिनों में मौसम का पूर्वानुमान

20 अप्रैल: प्रमुख शहरों में दिन का तापमान 40°C से अधिक हो सकता है, तथा रात्रि का तापमान 25°C के आसपास रहेगा।
21 अप्रैल: तेज गर्म हवाएं चल सकती हैं, जिसका असर विशेषकर राजस्थान के आसपास के जिलों पर पड़ेगा।

तापमान रिकॉर्ड

शुक्रवार को गुना में 44.3 डिग्री सेल्सियस, रतलाम, सागर और सीधी में 43.8 डिग्री सेल्सियस, भोपाल में 42.2 डिग्री सेल्सियस, इंदौर में 41.7 डिग्री सेल्सियस, ग्वालियर में 43 डिग्री सेल्सियस, उज्जैन में 42.8 डिग्री सेल्सियस और जबलपुर में 42.1 डिग्री सेल्सियस तापमान
दर्ज किया गया। 28 से ज़्यादा शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे ज़्यादा रहा।

सिवनी: जल संकट पर कांग्रेसी अध्यक्ष शफीक खान की भाजपा विधायक की तारीफ बनी कांग्रेस के लिए सिरदर्द

Seoni News: मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में इन दिनों जल संकट गंभीर समस्या बनकर उभरा है। भीषण गर्मी और भीमगढ़ बांध से जल आपूर्ति में कटौती के कारण स्थानीय जनता को पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। इस जल संकट के बीच नगरपालिका अध्यक्ष शफीक खान और जलकर्म सभापति चंदनसिंह खताबिया द्वारा भाजपा विधायक दिनेश राय मुनमुन की सराहना किए जाने पर सियासी भूचाल आ गया है।

कांग्रेस नेताओं की बयानबाज़ी से बढ़ी पार्टी की मुश्किलें

कांग्रेस पार्टी की जिला इकाई ने शफीक खान और चंदनसिंह खताबिया के बयान को अनुशासनहीनता की श्रेणी में मानते हुए, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस बयान में दोनों नेताओं ने भाजपा विधायक की झूठी तारीफ की, जिससे कांग्रेस की छवि को नुकसान पहुँचा।

झूठी तारीफ के पीछे की सच्चाई

बातचीत के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि शफीक खान और चंदनसिंह ने जिन कार्यों के लिए भाजपा विधायक की प्रशंसा की, वे कांग्रेस के अनुसार तथ्यात्मक रूप से गलत साबित हुए हैं। दरअसल, मार्च के अंतिम सप्ताह में भीमगढ़ बांध से 1000 क्यूसेक पानी बालाघाट भेजा गया था, जो कि बालाघाट सांसद और सिवनी विधायक के कहने पर किया गया था।

इस निर्णय के कारण सिवनी शहर में जल संकट और गहरा गया, जिससे जनता में आक्रोश की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में कांग्रेस नेताओं द्वारा भाजपा विधायक की प्रशंसा किया जाना न केवल अनुचित था, बल्कि यह कांग्रेस की जनहितकारी छवि के खिलाफ भी गया।

जिला कांग्रेस अध्यक्ष की सख्ती

जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष राजकुमार खुराना ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी की नीति और सिद्धांतों के खिलाफ जाकर किसी विपक्षी दल की निंदा या प्रशंसा करना अनुशासन का उल्लंघन है।

इस संबंध में तीन दिवस के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए शफीक खान और चंदनसिंह खताबिया को नोटिस जारी किया गया है। साथ ही, यह मामला जिला कांग्रेस अनुशासन समिति को सौंप दिया गया है ताकि उचित कार्रवाई की जा सके।

जनता का सवाल: कौन है असली जिम्मेदार?

जल संकट से परेशान सिवनी की जनता का सवाल है कि जब भीमगढ़ बांध से पानी बालाघाट भेजा गया, तब सिवनी की आवश्यकता को क्यों नज़रअंदाज किया गया? लोगों का मानना है कि यह निर्णय राजनीतिक प्रभाव में लिया गया, जिसकी सजा अब आम नागरिक भुगत रहे हैं।

नगरपालिका अध्यक्ष और जलकर्म सभापति, जिनका कर्तव्य जनता की सेवा करना है, वे विपक्षी विधायक की झूठी प्रशंसा कर रहे हैं, जिससे जनता में रोष और विश्वास की कमी देखी जा रही है।

कांग्रेस की आंतरिक राजनीति में हलचल

इस प्रकरण ने कांग्रेस पार्टी के अंदरूनी ताने-बाने को भी उजागर कर दिया है। पार्टी में अनुशासन और एकता की बात करने वाले नेता खुद विरोधाभासी बयान दे रहे हैं। इससे यह संकेत भी मिलता है कि पार्टी के भीतर आंतरिक संवाद और समन्वय की कमी है। कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस प्रकार की घटनाएं पार्टी की छवि को दीर्घकालीन नुकसान पहुँचा सकती हैं.

भाजपा की प्रतिक्रिया और सियासी लाभ

इस पूरे मामले में भाजपा खेमे ने चुप्पी साध रखी है, लेकिन अंदरखाने भाजपा कार्यकर्ता इस घटना को राजनीतिक लाभ में बदलने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं की तारीफ को वे सत्य की पुष्टि बताकर प्रचारित कर रहे हैं कि उनकी नीतियां और कार्य सही दिशा में हैं।

भाजपा इसे कांग्रेस की आंतरिक कमजोरी और विकास कार्यों की स्वीकृति के रूप में जनता के बीच रख रही है, जिससे आने वाले चुनावों में उन्हें लाभ मिल सकता है।

कांग्रेस के लिए सबक: संगठनात्मक अनुशासन सर्वोपरि

यह घटना कांग्रेस के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि संगठनात्मक अनुशासन और संवेदनशील मुद्दों पर एकजुटता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। जल संकट जैसे मामलों में जनता के प्रति जवाबदेही ही नेता की असली पहचान होती है, न कि किसी विरोधी नेता की बेमतलब तारीफ।

पार्टी नेतृत्व को चाहिए कि वह ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाकर कार्यकर्ताओं में जिम्मेदारी की भावना उत्पन्न करे और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

जल संकट और बयानबाज़ी ने खोली पोल

सिवनी का जल संकट न केवल एक प्राकृतिक आपदा की चेतावनी है, बल्कि यह भी बताता है कि राजनीतिक नेतृत्व की समझदारी और संगठनात्मक अनुशासन कितना महत्वपूर्ण होता है। शफीक खान और चंदनसिंह खताबिया जैसे वरिष्ठ पदाधिकारी यदि पार्टी लाइन से हटकर बयान देंगे, तो इसका असर न केवल उनकी छवि पर बल्कि पूरी पार्टी पर पड़ता है।

जल संकट से जूझती जनता आज सिर्फ राहत चाहती है, न कि राजनीतिक दिखावा। कांग्रेस पार्टी को इस बात को समझते हुए आगे की रणनीति तय करनी होगी।

सिवनी में 19 अप्रैल को होगा जोरदार धरना प्रदर्शन: पश्चिम बंगाल में हो रही हिंदुओं की हत्याओं का विरोध

सिवनी : 19 अप्रैल 2025, दिन शनिवार, समय दोपहर 2 बजे, स्थान कचहरी चौक, सिवनी (मध्यप्रदेश)—यह तारीख और स्थान अब सिर्फ एक सूचना नहीं, बल्कि हिंदू समाज की एकजुटता और जागरूकता का प्रतीक बन चुके हैं। पश्चिम बंगाल में लगातार हो रही हिंदू समाज के लोगों की निर्मम हत्याओं से आक्रोशित जनमानस अब खामोश बैठने को तैयार नहीं है। इसी के विरोध में सिवनी नगर में एक बड़े स्तर पर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया है, जिसमें सभी हिंदू संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से सहभागी होने की अपील की गई है।

पश्चिम बंगाल में हिंदुओं पर अत्याचार: एक गंभीर राष्ट्रीय चिंता

पश्चिम बंगाल में बीते कुछ वर्षों से लगातार हिंदू समाज के लोगों पर हमलों, हत्याओं, धार्मिक अपमान और असहिष्णुता की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। चाहे वह दुर्गा पूजा विसर्जन पर रोक हो, रामनवमी के जुलूसों पर पथराव, या सांप्रदायिक हिंसा के मामले हों—हिंदू समाज को निरंतर टारगेट किया जा रहा है। कई मामलों में तो स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता ने पीड़ितों को न्याय तक नहीं दिलाया।

सिवनी में होगा शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन: धर्म और न्याय की आवाज़

सिवनी नगर के हिंदू संगठनों द्वारा आयोजित यह धरना प्रदर्शन पूर्णतः शांतिपूर्ण और संवैधानिक होगा। इसका उद्देश्य देशभर में हिंदू समाज के विरुद्ध हो रहे अन्याय के प्रति जनजागरण और सामूहिक एकता का प्रदर्शन करना है।

📍 स्थान: कचहरी चौक, सिवनी
🗓️ तारीख: 19 अप्रैल 2025
समय: दोपहर 02:00 बजे

प्रदर्शन के प्रमुख उद्देश्य

  • पश्चिम बंगाल में हो रही हिंदू हत्याओं का विरोध करना
  • सरकार और प्रशासन से दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की मांग करना
  • देशभर के हिंदुओं को एकजुटता का संदेश देना
  • धर्मनिरपेक्षता की आड़ में हो रहे धार्मिक अत्याचारों का पर्दाफाश करना

सभी हिंदू संगठनों, समाजसेवियों और नागरिकों से भागीदारी की अपील

इस धरना प्रदर्शन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, सनातन संस्था, आर्य समाज, गौसेवा संगठनों के साथ-साथ स्थानीय सामाजिक संगठनों की भी सक्रिय भागीदारी होगी। साथ ही, हिंदू युवाओं, महिलाओं, छात्रों, पत्रकारों और अधिवक्ताओं से भी अपील की गई है कि वे अपना समर्थन और उपस्थिति दर्ज कराएं

प्रदर्शन में उठाई जाएंगी ये प्रमुख मांगें

  • पश्चिम बंगाल सरकार से जवाबदेही तय की जाए
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग इस मामले की जांच करे
  • केंद्र सरकार मामले में हस्तक्षेप कर दोषियों को सजा दिलवाए
  • हिंदू समाज को सुरक्षा देने हेतु विशेष नीति बनाई जाए
  • धार्मिक आधार पर हो रहे भेदभाव को तुरंत रोका जाए

धर्म की रक्षा हेतु सामाजिक जागरूकता ज़रूरी

आज जब हिंदू समाज अपने ही देश में असुरक्षित महसूस कर रहा है, तो यह सिर्फ एक राज्य या समुदाय की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की चिंता बन जाती है। हमारा संविधान सभी को धर्म पालन की स्वतंत्रता देता है, परंतु जब किसी एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया जाता है, तो यह लोकतंत्र पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।

धरना प्रदर्शन के दौरान होंगी ये मुख्य गतिविधियाँ

  • प्रार्थना सभा और शांति मार्च
  • धर्माचार्यों के वक्तव्य और प्रेरणादायक भाषण
  • हिंसा के शिकार पीड़ित परिवारों के प्रतिनिधियों द्वारा अनुभव साझा
  • मौन धारण के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पण
  • ज्ञापन सौंपा जाएगा स्थानीय प्रशासन को

हमारी एकता ही हमारी ताकत है

आज समय आ गया है कि हम सभी राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर केवल धर्म, न्याय और आत्मसम्मान के लिए एकजुट हों। यह प्रदर्शन किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि हिंदू समाज के साथ हो रहे अत्याचारों के खिलाफ एक आवाज़ है। हम सभी नागरिकों से नम्र निवेदन करते हैं कि इस धरना प्रदर्शन में संपूर्ण उत्साह और शांति के साथ सम्मिलित हों। यह हमारी संस्कृति, हमारी अस्मिता और हमारे धर्म की रक्षा के लिए आवश्यक है

सिवनी में भीषण जल संकट : कलेक्टर के आदेशों की अनदेखी, रेलवे निर्माण पर धारा 163 क्यों नहीं प्रभावी?

SEONI JAL SANKAT: सिवनी नगर इन दिनों भीषण जल संकट से गुजर रहा है। हर गली, हर मोहल्ले में पेयजल की भारी किल्लत ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसी संकट को देखते हुए जिला प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के अंतर्गत नगर पालिका क्षेत्र में सभी निर्माण कार्यों पर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। इसके बावजूद नगर के बीचोबीच बरघाट नाका रेलवे रैक पॉइंट पर दो बड़े निर्माण कार्य तेजी से जारी हैं। यह स्थिति न केवल प्रशासन के आदेशों की अवहेलना है, बल्कि न्याय व्यवस्था और समानता पर भी सवाल खड़े करती है।

जल संकट की भयावहता: नागरिक त्राहिमाम

सिवनी शहर में बीते एक सप्ताह से पेयजल की आपूर्ति चरमरा गई है। नगर पालिका के समस्त वार्डों में नलों में पानी आना बंद हो गया है, और टैंकर व्यवस्था भी अपर्याप्त साबित हो रही है। नागरिकों को दिन भर पानी के एक-एक बूँद के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। महिलाओं को कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है, जिससे शारीरिक और मानसिक थकावट दोनों बढ़ रही है।

कलेक्टर के आदेशों की धारा 163 : क्या सभी पर लागू नहीं होती?

जिला कलेक्टर द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत जारी प्रतिबंधात्मक आदेशों में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि नगर पालिका क्षेत्र और मास्टर प्लान क्षेत्र में सभी निर्माण कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाती है। इसके अंतर्गत जल स्रोतों के उपयोग पर सख्त पाबंदी लगाई गई थी। बावजूद इसके बरघाट नाका रेलवे रैक पॉइंट पर निर्माण कार्य दिन-रात जारी हैं

प्रश्न यह उठता है कि क्या यह धारा रेलवे परियोजनाओं पर लागू नहीं होती? क्या ठेकेदारों को विशेष छूट दी गई है? जब एक तरफ किसान, आम नागरिक, छोटे व्यापारी जल संकट से जूझ रहे हैं, तो दूसरी तरफ ठेकेदार खुलेआम पानी का उपयोग कर निर्माण कार्य में लगे हैं

किसानों पर कार्रवाई, ठेकेदारों को छूट : दोहरी नीति क्यों?

उक्त आदेशों के तहत संजय सरोवर डूब क्षेत्र के किसानों की बिजली सप्लाई काट दी गई है, जिससे उनकी खेतों की फसलें सूखने लगी हैंबिजली विभाग की टीम सुबह से ही सक्रिय रही और किसानों के विद्युत कनेक्शन काटे गए। इससे नाराज सैकड़ों किसान छपारा तहसील कार्यालय पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए ज्ञापन सौंपा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि या तो बिजली की सप्लाई बहाल की जाए, अन्यथा प्रशासन सूखती फसलों का मुआवजा दे

इसी समय रेलवे परियोजना में पानी और बिजली दोनों का भरपूर उपयोग हो रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन द्वारा दोहरी नीति अपनाई जा रही है

रेलवे निर्माण कार्यों में जल दोहन : आदेशों की अवहेलना की साक्ष्य

बरघाट नाका पर रेलवे द्वारा दो प्रमुख निर्माण कार्य तेजी से संचालित हो रहे हैं, जिनमें बड़े-बड़े टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति हो रही है। इस क्षेत्र में भूजल स्रोतों का अनियंत्रित दोहन हो रहा है, जिससे आसपास के इलाकों में पानी का स्तर और गिरता जा रहा है

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने कई बार प्रशासन को अवगत कराया है कि इन निर्माण कार्यों में धारा 163 का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। इसके बावजूद अब तक किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की गई है, जो यह दर्शाता है कि नियम केवल आम नागरिकों के लिए हैं, ठेकेदारों पर उनका कोई प्रभाव नहीं।

राजनीतिक और प्रशासनिक चुप्पी : क्यों हो रहा है मौन समर्थन?

इतनी गंभीर स्थिति में भी प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी संदेहजनक है। किसी भी स्थानीय विधायक, सांसद या नगर पालिका के निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा जनता की समस्याओं पर कोई बयान नहीं आया। ना ही किसी अधिकारी ने रेलवे निर्माण कार्य की जांच की या उसे अस्थाई रूप से रोकने की पहल की।

यह मौन समर्थन इस ओर संकेत करता है कि ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत के कारण ही आदेशों का उल्लंघन हो रहा है। यदि यही स्थिति रही, तो आने वाले समय में सिवनी की जल समस्या और अधिक गंभीर रूप ले सकती है

प्रशासन से सवाल : धारा 163 की विश्वसनीयता पर सवाल

जब प्रशासन ने अपने ही आदेश के तहत किसानों और छोटे नागरिकों पर तत्काल कार्रवाई की, तो फिर बड़े निर्माण कार्यों पर मौन क्यों? क्या नियम केवल आम जनता पर लागू होते हैं?

प्रशासन को चाहिए कि वह जल्द से जल्द रेलवे रैक पॉइंट पर हो रहे निर्माण कार्यों की जांच कर यह सुनिश्चित करे कि आदेशों का पालन हो रहा है या नहीं। यदि नहीं, तो ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए

यदि जिला प्रशासन को वाकई में जल संकट की गंभीरता का एहसास है, तो उसे हर नागरिक और संस्था पर एक समान नियम लागू करना चाहिए। केवल किसानों या आम नागरिकों पर आदेशों की मार न गिरे, बल्कि बड़ी कंपनियों और ठेकेदारों पर भी वही सख्ती दिखाई जाए। तभी जाकर सिवनी में जल संकट पर काबू पाया जा सकेगा और प्रशासन पर जनता का विश्वास बहाल होगा

सिवनी जल संकट: सिवनी कलेक्टर ने कंट्रोल रूम स्थापित किया, जारी हुआ हेल्पलाइन नंबर

गर्मी के मौसम में नगरीय क्षेत्रों में बढ़ती जल समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन ने कदम उठाते हुए पेयजल आपूर्ति से संबंधित शिकायतों व मांगों के समाधान हेतु कंट्रोल रूम की स्थापना की है। यह कंट्रोल रूम आम नागरिकों की पानी की समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल करने हेतु पूरी तरह सक्रिय रहेगा।

07692-225866 पर करें संपर्क, मिलेगा तत्काल समाधान

जिला प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यदि किसी नागरिक को पानी की आपूर्ति में रुकावट, जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं, तो वे अब सीधे कंट्रोल रूम के नंबर 07692-225866 पर कॉल कर सकते हैं। यहां प्रशिक्षित कर्मचारी मौजूद रहेंगे, जो आपकी शिकायत को दर्ज कर संबंधित विभाग तक भेजेंगे और समस्या का त्वरित समाधान सुनिश्चित करेंगे।

प्रशासन ने यह भी बताया कि इस नंबर पर नागरिक अपनी जल आपूर्ति से जुड़ी शिकायतें, सुझाव और आवश्यकताओं की जानकारी दे सकते हैं। संबंधित विभाग के कर्मचारी कंट्रोल रूम में मौजूद रहेंगे और प्राप्त शिकायतों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करेंगे।

गर्मी के इस भीषण मौसम में जल संकट की संभावनाओं को देखते हुए यह कदम नगरीय क्षेत्रों में जल वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

सिवनी में जल संकट के बीच बबरिया तालाब में लगा दी मोटर: SDM मेघा शर्मा ने की कार्रवाई; मोटर हुई जब्त

सिवनी जिले में जल संकट की विकट स्थिति के चलते प्रशासन द्वारा लगातार कठोर कदम उठाए जा रहे हैं। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सिवनी, मेघा शर्मा के निर्देशन में बबरिया तालाब से अवैध रूप से पानी लेकर फसलों की सिंचाई कर रहे व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। यह कार्रवाई उन लोगों के विरुद्ध थी, जो प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना करते हुए सार्वजनिक जल संसाधनों का दुरुपयोग कर रहे थे।

कलेक्टर संस्कृति जैन द्वारा जल संरक्षण हेतु प्रतिबंधात्मक आदेश

जिला कलेक्टर एवं दंडाधिकारी संस्कृति जैन ने जिले में व्याप्त भीषण जल संकट के मद्देनज़र नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के अंतर्गत प्रत्येक जल स्रोत की सुरक्षा एवं उचित उपयोग हेतु प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। इस आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि कोई भी व्यक्ति अनुमति के बिना सार्वजनिक जलस्रोतों जैसे तालाबों, नहरों, या जलाशयों से सिंचाई या अन्य निजी उपयोग हेतु पानी नहीं ले सकता

बबरिया तालाब से अवैध सिंचाई का मामला उजागर

उक्त आदेश के बावजूद हेमराज बघेल, हेमकरण सनोड़िया एवं रक्षित विश्वकर्मा नामक व्यक्तियों द्वारा बबरिया तालाब में मोटर पंप लगाकर अवैध रूप से पानी निकालकर खेतों की सिंचाई की जा रही थी। यह कार्यवाही स्थानीय प्रशासन की विशेष टीम द्वारा स्थल पर जाकर तत्काल मोटर पंप जप्त कर की गई।

सख्ती के साथ जनजागरूकता अभियान भी जरूरी

प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ, जनजागरूकता अभियान भी अनिवार्य है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह संदेश जाए कि पानी की हर बूंद अमूल्य है। स्कूलों, पंचायतों और सामुदायिक केंद्रों के माध्यम से जल संरक्षण के प्रति शिक्षा और समझ विकसित करना आवश्यक है।

विधिक पक्ष: नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के अंतर्गत कार्रवाई

धारा 163 के तहत कलेक्टर को यह अधिकार प्राप्त है कि वह किसी भी आपात स्थिति में नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर सके। जल संकट जैसी स्थिति में जब पेयजल की आपूर्ति बाधित होने की संभावना हो, तब यह प्रावधान और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। इस धारा के अंतर्गत यदि कोई आदेश की अवहेलना करता है, तो उसके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें जुर्माना एवं कानूनी सजा भी शामिल है।

जल संकट के समय जागरूकता और कार्रवाई दोनों ज़रूरी

सिवनी जिले में बबरिया तालाब से पानी चोरी की घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कानून की सख्ती और प्रशासन की सतर्कता ही ऐसे मामलों को रोक सकती है। साथ ही, जनता का सहयोग और जिम्मेदारी भरा व्यवहार ही इस जल संकट से उबार सकता है। जल की हर बूंद हमारे भविष्य की नींव है – इसे सुरक्षित रखना हम सभी का कर्तव्य है।

सिवनी में जलसंकट: मठ मंदिर का बोरवेल बना जीवनदायिनी आशा की किरण, क्षेत्रवासियों के लिए भरपूर पानी की व्यवस्था

सिवनी, मध्यप्रदेश का एक महत्वपूर्ण जिला, इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रहा है। ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत के साथ ही जिले में पेयजल की समस्या गहराने लगी है, और कई ग्रामीण तथा शहरी इलाकों में पानी के लिए हाहाकार मच गया है। इसी संकट के समय मठ मंदिर समिति, सिवनी ने मानवता और सेवा का एक प्रेरणादायक कार्य करते हुए सिद्धपीठ के बोरवेल को आमजन के लिए खोल दिया है

सिद्धपीठ मठ मंदिर का बोरवेल बना जीवनदायिनी आशा की किरण

मठ मंदिर समिति ने यह ऐलान किया है कि मंदिर परिसर में स्थित गहरे बोरवेल से हर जरूरतमंद नागरिक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक पानी प्राप्त कर सकता है। इस बोरवेल से न केवल मंदिर परिसर की आवश्यकता पूरी होती थी, बल्कि अब यह हजारों नागरिकों के लिए भी एक पेयजल स्रोत बन गया है।

यह निर्णय विशेष रूप से उस समय आया है जब जिले के कई इलाकों में सरकारी नल जल योजनाएं ठप पड़ी हैं, हैंडपंप सूख चुके हैं और टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई है।

मानव सेवा की प्रेरणा बनी मठ मंदिर समिति

मठ मंदिर समिति के अध्यक्ष श्रीमान पंडित रामकृष्ण तिवारी जी ने बताया, “हमारे लिए धर्म का अर्थ सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंद की सहायता करना ही सच्ची पूजा है। जल संकट की इस घड़ी में हम जिलेवासियों के साथ हैं और हमारा बोरवेल हर किसी के लिए खुला रहेगा।”

समिति द्वारा यह भी सुनिश्चित किया गया है कि बोरवेल से पानी भरते समय किसी प्रकार की अव्यवस्था या भीड़भाड़ न हो, इसके लिए स्वयंसेवकों की टीम तैनात की गई है।

जल संकट की भयावहता और सरकारी प्रयासों की असफलता

इस वर्ष सिवनी में बारिश की मात्रा औसत से काफी अधिक रही, जिससे बाद भी राजनेताओं और अधिकारीयों की लापरवाही की वजह से जिले समेत 210 ग्राम वासियों को पानी की किलात हो रही है.

बिना भेदभाव के सभी नागरिकों के लिए सेवा

मठ मंदिर समिति ने यह स्पष्ट किया है कि धर्म, जाति, वर्ग, या समुदाय के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाएगाहर व्यक्ति जो पानी की आवश्यकता रखता है, मंदिर परिसर में आकर सम्मानपूर्वक पानी प्राप्त कर सकता है। यह कदम इस बात का प्रमाण है कि जब शासन तंत्र असफल हो जाए, तब समाज की संस्थाएं और धार्मिक संगठन आगे बढ़कर समाज की सेवा कर सकते हैं।

स्थानीय नागरिकों ने जताया आभार

स्थानीय नागरिकों और मोहल्लेवासियों ने मठ मंदिर समिति के इस कार्य की खुले दिल से सराहना की है।

श्रीमती कुसुम बाई, जो मंदिर के समीप की बस्ती में रहती हैं, कहती हैं –
“जब हमारे मोहल्ले में कई दिनों से नल नहीं आए है नहीं पता था पानी कहाँ से लाएं। मठ मंदिर का बोरवेल ही अब हमारा सहारा बन गया है। हम सभी समिति का आभार व्यक्त करते हैं।”

अन्य संस्थाओं के लिए उदाहरण बन सकती है यह पहल

मठ मंदिर समिति की यह पहल केवल सिवनी तक सीमित न रहकर पूरे राज्य और देश के लिए प्रेरणा बन सकती है। आज देशभर में हजारों धार्मिक स्थल, गुरुद्वारे, मस्जिदें, चर्च, आश्रम आदि हैं जहां स्वच्छ जल स्रोत मौजूद हैं। यदि इन संसाधनों का सदुपयोग किया जाए, तो जल संकट की मार झेल रही जनता को बड़ी राहत मिल सकती है।

जल ही जीवन है – इस विचार को सार्थक किया

जल ही जीवन है” – यह वाक्य भले ही हम सभी ने बचपन से पढ़ा हो, परंतु मठ मंदिर समिति, सिवनी ने इसे व्यवहार में लाकर दिखा दिया है। उन्होंने यह सिद्ध किया कि धार्मिक आस्था और सामाजिक सेवा एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। जब समाज में कहीं संकट आए, तो धर्मस्थल न केवल अध्यात्म का केंद्र बनें, बल्कि सेवा और सहयोग का माध्यम भी बनें।

स्थानीय प्रशासन और सरकार को लेना चाहिए सबक

जहां एक ओर धार्मिक संस्थाएं अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं, वहीं प्रशासन और स्थानीय निकायों को भी चाहिए कि वे इस कार्य से प्रेरणा लें। केवल योजनाओं की घोषणा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीन पर काम करना जरूरी है।

सामाजिक एकता और सेवा का अद्भुत उदाहरण

मठ मंदिर समिति, सिवनी ने जो कार्य किया है, वह वास्तव में भारतीय संस्कृति में निहित ‘सेवा परमो धर्मः’ के सिद्धांत का सजीव उदाहरण है। ऐसे प्रयास ही समाज में सकारात्मकता लाते हैं और मानवता को एक नई दिशा प्रदान करते हैं।

आज जब हर ओर संसाधनों की कमी और व्यक्तिगत हितों की होड़ है, मठ मंदिर समिति द्वारा उठाया गया यह कदम हमें एकजुटता, सेवा और सद्भाव की याद दिलाता है।