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MP ने रचा इतिहास! एक साथ 12 फसलों को मिला GI Tag, अब दुनियाभर में चमकेगा मध्यप्रदेश का स्वाद, किसानों की होगी तगड़ी कमाई

भोपाल। मध्यप्रदेश ने कृषि और उद्यानिकी के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। पहली बार देश में किसी एक राज्य की 12 उद्यानिकी फसलों और पारंपरिक कृषि उत्पादों को एक साथ जीआई (Geographical Indication) टैग प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि न केवल प्रदेश के किसानों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में मध्यप्रदेश की कृषि पहचान को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।

राज्य सरकार का मानना है कि GI Tag मिलने से इन उत्पादों की ब्रांड वैल्यू, मांग और निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में बड़ी मदद मिलेगी।

2030 तक 30 लाख हेक्टेयर में होगी उद्यानिकी खेती

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों की खेती अपनाने का आह्वान किया है। वर्तमान में प्रदेश में करीब 28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों की खेती की जा रही है, जिसे वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 30 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

सरकार का मानना है कि उद्यानिकी फसलें किसानों को बेहतर लाभ देती हैं और निर्यात की अपार संभावनाएं भी रखती हैं।

इन 12 उत्पादों को मिला GI Tag

मध्यप्रदेश के जिन उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त हुआ है, उनमें शामिल हैं—

  • गुना का कुम्भराज धनिया
  • नरसिंहपुर बरमान घाट का भटा (बैंगन)
  • बैतूल का गजरिया आम
  • खरगोन की लाल मिर्च
  • मांडू की खुरासानी इमली
  • जबलपुर की हरी मटर
  • सिवनी का सीताफल
  • मालवी आलू
  • मालवा का गराडू
  • नरसिंहपुर का गुड़
  • जबलपुर का सिंघाड़ा
  • आलीराजपुर का नूरजहां आम

इन सभी उत्पादों की गुणवत्ता, स्वाद और विशिष्ट भौगोलिक पहचान के कारण इन्हें GI Tag प्रदान किया गया है।

इन उत्पादों के प्रस्ताव भी भेजे गए

सरकार ने भविष्य में और अधिक कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं। जिन उत्पादों के लिए GI Tag का प्रस्ताव भेजा गया है, उनमें शामिल हैं—

  • उज्जैन की इमली
  • आलीराजपुर का अचारी आम
  • मालवा का सफेद प्याज
  • झाबुआ का दाल पानिया
  • मंदसौर का देशी जीरा
  • बुरहानपुर की जलेबी
  • अशोकनगर की खिरनी

कुम्भराज धनिया: पूरे देश के उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत हिस्सेदारी

गुना जिले का कुम्भराज धनिया लगभग 60 वर्षों से अपनी अनूठी गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है। इसकी फसल मात्र 85 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है और प्रति हेक्टेयर 12 से 15 क्विंटल तक उत्पादन देती है।

इस धनिए में 0.40 से 0.50 प्रतिशत वाष्पशील तेल पाया जाता है, जिससे इसकी खुशबू और स्वाद बेहद खास बन जाता है। गुना में हर साल करीब 32 हजार मीट्रिक टन धनिया उत्पादन होता है, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 20 से 25 प्रतिशत है। इसका निर्यात कई देशों में किया जा रहा है।

बरमान घाट का भटा: नर्मदा किनारे की मिट्टी देती है अलग स्वाद

नरसिंहपुर के बरमान घाट में नर्मदा नदी की बालुई मिट्टी में उगाया जाने वाला भटा (बैंगन) अपने विशेष स्वाद के लिए पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है।

विशेषज्ञों के अनुसार यहां का कम तापमान और नदी किनारे की मिट्टी इसकी गुणवत्ता को अन्य क्षेत्रों से अलग बनाती है। यही वजह है कि मंडियों में बरमान के भटे की हमेशा विशेष मांग रहती है।

बैतूल का गजरिया आम: 500 साल पुरानी विरासत से जुड़ा स्वाद

बैतूल जिले का गजरिया आम अपनी मिठास और बेहतरीन गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। इस क्षेत्र का इतिहास 500 वर्ष पुराने गोंड शासन और ऐतिहासिक किलों से जुड़ा हुआ है।

यह आम ताजा खाने के अलावा अचार, अमचूर, जूस, जैम, स्क्वैश और अन्य खाद्य उत्पादों में भी व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।

खरगोन की लाल मिर्च की विदेशों में भी जबरदस्त मांग

निमाड़ क्षेत्र की खरगोन लाल मिर्च देश की सबसे लोकप्रिय मिर्चों में शामिल है। यहां स्थित बेदिया मिर्च मंडी देश की प्रमुख मंडियों में गिनी जाती है।

इस क्षेत्र की मिर्च का निर्यात चीन, पाकिस्तान, मलेशिया और सऊदी अरब सहित कई देशों में किया जाता है।

मांडू की खुरासानी इमली: 600 साल पुराना इतिहास

मांडू की प्रसिद्ध खुरासानी इमली, जिसे बाओबाब भी कहा जाता है, लगभग 14वीं शताब्दी में यहां लाई गई थी।

इस विशाल वृक्ष की बनावट और स्वाद इसे देश के अन्य इमली वृक्षों से पूरी तरह अलग पहचान दिलाते हैं।

सिवनी का जंबो सीताफल बना पहचान

सिवनी जिले में लगभग 656 हेक्टेयर क्षेत्र में सीताफल की खेती होती है और यहां से हर वर्ष 6500 मीट्रिक टन से अधिक उत्पादन प्राप्त होता है।

यहां का सीताफल अपने बड़े आकार के कारण जंबो सीताफल के नाम से प्रसिद्ध है। इसका वजन 600 से 700 ग्राम तक पहुंच जाता है और इसके स्वाद की मांग प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में लगातार बढ़ रही है।

मालवी आलू और गराडू को मिली नई पहचान

मालवा क्षेत्र का आलू गुणवत्ता, आकार और रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरता है।

वहीं गराडू, जिसे बैंगनी रतालू भी कहा जाता है, मालवा की पारंपरिक पहचान है और सर्दियों के मौसम में इसकी भारी मांग रहती है।

जबलपुर की हरी मटर और सिंघाड़ा भी अब वैश्विक पहचान के साथ

जबलपुर की हरी मटर प्रदेश की प्रमुख रबी फसल है। वर्ष 2018-19 में यहां लगभग 31,360 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती हुई थी और 52,500 टन उत्पादन दर्ज किया गया।

वहीं जबलपुर का सिंघाड़ा भी अपनी उच्च गुणवत्ता, स्टार्च, जल मात्रा और पोषण तत्वों के कारण विशेष पहचान रखता है। इसके उत्पादन से हजारों किसान जुड़े हुए हैं।

नरसिंहपुर का गुड़: मध्यप्रदेश का ‘शुगर बाउल’

नरसिंहपुर जिला गन्ना उत्पादन और गुड़ निर्माण के लिए प्रदेशभर में प्रसिद्ध है। इसे मध्यप्रदेश का शुगर बाउल भी कहा जाता है।

यहां की काली कपास मिट्टी और अधिक जलधारण क्षमता गन्ने की खेती के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है। GI Tag मिलने से यहां के गुड़ को भी नई बाजार पहचान मिलने की उम्मीद है।

नूरजहां आम: 3 किलो से ज्यादा वजन वाला अनोखा आम

आलीराजपुर के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र का प्रसिद्ध नूरजहां आम दुनिया के सबसे बड़े आमों में गिना जाता है।

एक आम का वजन 3 से 3.5 किलोग्राम तक होता है और इसकी लंबाई लगभग एक फुट तक पहुंच सकती है। यही वजह है कि यह आम देश-विदेश में लोगों का ध्यान आकर्षित करता है।

GI Tag से किसानों को क्या होगा फायदा?

GI Tag मिलने के बाद इन उत्पादों की नकली बिक्री पर रोक लगेगी और इन्हें कानूनी संरक्षण मिलेगा। साथ ही—

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में अलग पहचान बनेगी।
  • किसानों को उत्पाद का बेहतर मूल्य मिलेगा।
  • निर्यात के नए अवसर खुलेंगे।
  • स्थानीय रोजगार और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।
  • प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

मध्यप्रदेश द्वारा एक साथ 12 उद्यानिकी उत्पादों को GI Tag दिलाना कृषि क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह कदम प्रदेश के किसानों की आय बढ़ाने, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने और कृषि निर्यात को नई दिशा देने में अहम साबित हो सकता है। यदि सरकार की 2030 तक उद्यानिकी क्षेत्र विस्तार की योजना सफल होती है, तो मध्यप्रदेश देश का अग्रणी उद्यानिकी राज्य बनने की दिशा में और तेजी से आगे बढ़ेगा।

सिवनी: 3 महीने के लिए बंद होगा पेंच टाइगर रिजर्व का कोर एरिया, जानिए क्यों लिया गया बड़ा फैसला, पर्यटकों के लिए क्या रहेगा खुला?

Pench Tiger Reserve News: 1 जुलाई से बंद होगा पेंच टाइगर रिजर्व का कोर एरिया, मानसून में 3 महीने रहेगा प्रतिबंध, बफर में जारी रहेगी सफारी

सिवनी। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध पेंच टाइगर रिजर्व (Pench Tiger Reserve) में घूमने की योजना बना रहे पर्यटकों के लिए अहम खबर है। 1 जुलाई से 30 सितंबर 2026 तक पेंच टाइगर रिजर्व का कोर एरिया पर्यटकों के लिए पूरी तरह बंद रहेगा। मंगलवार (30 जून) को कोर क्षेत्र में सफारी का अंतिम दिन होगा। इसके बाद पूरे मानसून सीजन के दौरान केवल बफर क्षेत्र में निर्धारित मार्गों पर पर्यटन गतिविधियां जारी रहेंगी।

वन विभाग के अनुसार हर वर्ष बारिश के मौसम में वन्यजीवों के प्रजनन, उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा और जंगलों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए कोर एरिया को तीन महीने के लिए बंद किया जाता है।

मानसून में वन्यजीवों की सुरक्षा रहेगी प्राथमिकता

पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने मानसून सत्र के लिए व्यापक सुरक्षा तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस दौरान जंगल में वन्यजीवों की सुरक्षा, अवैध शिकार और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए विशेष निगरानी अभियान चलाया जाएगा।

वन विभाग के अधिकारी लगातार गश्त करेंगे, वहीं सीमावर्ती जंगलों में कोर और बफर क्षेत्र का वन अमला संयुक्त रूप से पेट्रोलिंग करेगा ताकि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

दुर्गम इलाकों में हाथियों से होगी पेट्रोलिंग

मानसून के दौरान कई वन क्षेत्र वाहन से पहुंचने योग्य नहीं रहते। ऐसे में दुर्गम इलाकों में हाथियों की सहायता से पेट्रोलिंग की जाएगी। इसके साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष निगरानी रखने की रणनीति बनाई गई है।

वन अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से वन्यजीवों की सुरक्षा और जंगलों की निगरानी पहले से अधिक प्रभावी होगी।

150 कैमरा ट्रैप रखेंगे जंगल पर नजर

इस बार वन विभाग आधुनिक तकनीक का भी व्यापक उपयोग करेगा। रिजर्व के विभिन्न संवेदनशील स्थानों पर करीब 150 कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं। इन कैमरों की मदद से बाघों सहित अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी।

हाल ही में इन्हीं कैमरा ट्रैप की सहायता से गोरखपुर वन क्षेत्र में मिले बाघ के शावक का सफल रेस्क्यू किया गया था। वहीं बरघाट परियोजना क्षेत्र के मऊ जंगल में महिला पर हुए बाघ के हमले के बाद संबंधित बाघ की निगरानी भी कैमरा ट्रैप के जरिए लगातार की जा रही है।

पर्यटन से रिकॉर्ड राजस्व, लगातार बढ़ रही पर्यटकों की संख्या

पर्यटन के लिहाज से भी पेंच टाइगर रिजर्व का बीता सत्र बेहद सफल रहा। पिछले पर्यटन सीजन में 1.80 लाख से अधिक पर्यटक पेंच पहुंचे थे, जिससे 7.72 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।

वहीं इस वर्ष मई 2026 तक ही लगभग 1.90 लाख पर्यटक पेंच टाइगर रिजर्व का भ्रमण कर चुके हैं और 10.55 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित हो चुका है। अधिकारियों को उम्मीद है कि अगले पर्यटन सत्र में यह आंकड़ा नया रिकॉर्ड बना सकता है।

बफर क्षेत्र में जारी रहेगी सफारी

पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर पुनीत गोयल ने बताया कि 1 जुलाई से 30 सितंबर तक कोर एरिया पूरी तरह बंद रहेगा। हालांकि पर्यटक इस दौरान बफर क्षेत्र में निर्धारित मार्गों पर जंगल सफारी का आनंद पहले की तरह ले सकेंगे।

उन्होंने बताया कि मानसून समाप्त होने के बाद मौसम अनुकूल होने पर 1 अक्टूबर से कोर एरिया दोबारा पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा।

मुख्य बातें (Highlights)

  • 1 जुलाई से 30 सितंबर तक पेंच टाइगर रिजर्व का कोर एरिया रहेगा बंद।
  • मानसून में केवल बफर क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां जारी रहें-गी।
  • वन्यजीवों के प्रजनन और जंगल संरक्षण के लिए हर वर्ष लिया जाता है निर्णय।
  • दुर्गम इलाकों में हाथियों से होगी पेट्रोलिंग।
  • करीब 150 कैमरा ट्रैप से होगी बाघों और अन्य वन्यजीवों की निगरानी।
  • इस वर्ष मई तक 1.90 लाख पर्यटक पहुंचे, 10.55 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिला।

मुख्यमंत्री CM MOHAN YADAV के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर तैयारियां तेज, कलेक्टर नेहा मीना पहुंची कार्यक्रम स्थल

सिवनी: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 01 जुलाई को प्रस्तावित सिवनी प्रवास को लेकर जिला प्रशासन द्वारा तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना ने कार्यक्रम स्थल पॉलिटेक्निक मैदान, हेलीपैड सहित विभिन्न स्थलों का विस्तृत निरीक्षण कर तैयारियों एवं व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम के प्रत्येक पहलू की बारीकी से समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्रीमती मीना ने मंच व्यवस्था, बैठक व्यवस्था, हितग्राहियों के बैठने की व्यवस्था, पेयजल, विद्युत, स्वच्छता, शौचालय, बैरिकेडिंग, सुरक्षा व्यवस्था, वाहन पार्किंग, यातायात प्रबंधन, चिकित्सा सुविधा, प्रदर्शनी स्थल तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी व्यवस्थाएं समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण की जाएं तथा कार्यक्रम में शामिल होने वाले नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

कलेक्टर श्रीमती मीना ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए प्रत्येक व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की गरिमा के अनुरूप सभी व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित, सुरक्षित एवं व्यवस्थित ढंग से सुनिश्चित की जाएं।

मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण, हितलाभ वितरण तथा विभिन्न विभागों द्वारा विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं पर आधारित प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी, जो कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण होगी

सिवनी से 3,941 किसानों को CM मोहन यादव 2.82 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि

विभिन्न विकास कार्यो मुख्यमंत्री डॉ यादव के हस्ते होगा लोकार्पण- भूमिपूजन. मुख्यमंत्री डॉ यादव धान महोत्सव कार्यक्रम में होंगे शामिल

सिवनी: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का 01 जुलाई को सिवनी आगमन प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री डॉ यादव जिले में आयोजित धान महोत्सव कार्यक्रम में शामिल होंगे। यह आयोजन कृषि, श्रीअन्न (मिलेट्स) संवर्धन और विकास कार्यों को समर्पित होगा, जिसमें बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि एवं आमजन शामिल होंगे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ यादव द्वारा सिंगल क्लिक के माध्यम से कोदो एवं कुटकी उत्पादक प्रदेश के 3,941 किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 2 करोड़ 82 लाख 99 हजार 300 की प्रोत्साहन राशि भी अंतरित की जाएगी। यह राशि ₹1,000 प्रति क्विंटल की दर से प्रदान की जा रही है, जिससे श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों को आर्थिक संबल मिलेगा।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ यादव जिले के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करेंगे। साथ ही विभिन्न हितग्राहीमूलक योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण भी किया जाएगा।

कार्यक्रम का आकर्षण विभिन्न विभागों द्वारा लगाई जाने वाली थीम आधारित विकास प्रदर्शनी भी रहेगी। प्रदर्शनी में धान बुवाई के कृषि यंत्र, प्राकृतिक बीजों की प्रदर्शनी, कस्टम हायरिंग सेंटर, प्राकृतिक एवं नैचुरल फार्मिंग मॉडल, जीआई टैग प्राप्त सीताफल एवं मिलेट्स उत्पाद, पीएमएफएमई उत्पाद, आम की विभिन्न किस्में, स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प एवं मिट्टी कला उत्पाद, लघु वनोपज, स्थानीय उद्यमियों के उत्पाद तथा पोषण आहार का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके साथ ही कृषिका एप की जानकारी भी किसानों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होंगे। प्रदर्शनी के माध्यम से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं, नवाचारों और उपलब्धियों की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के प्रस्तावित आगमन को लेकर जिला प्रशासन द्वारा कार्यक्रम स्थल, हेलीपैड, सुरक्षा, बैठक व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, विद्युत, यातायात तथा अन्य सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि कार्यक्रम का आयोजन भव्य, सुव्यवस्थित एवं गरिमापूर्ण ढंग से संपन्न हो सके

जियोफाइबर और जियोएयरफाइबर से ब्रॉडबैंड में जियो को नई रफ्तार

• 5G फिक्स्ड वायरलेस ब्रॉडबैंड में जियो की मजबूत पकड़
• मई में FWA सेगमेंट में जियो ने करीब 4 लाख ग्राहक जोड़े
• एक्टिव मोबाइल यूजर्स के मामले में भी जियो आगे

नई दिल्ली, 30 जून, 2026: ब्रॉडबैंड बाजार में रिलायंस जियो को जियोफाइबर और जियोएयरफाइबर जैसी सेवाओं से नई रफ्तार मिल रही है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी TRAI की मई 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक फिक्स्ड वायर्ड ब्रॉडबैंड में जियोफाइबर 1.44 करोड़ ग्राहकों के साथ आगे है। वहीं 5G फिक्स्ड वायरलेस ब्रॉडबैंड में भी जियोएयरफाइबर की पकड़ मजबूत बनी हुई है।

5G फिक्स्ड वायरलेस ब्रॉडबैंड यानी 5G FWA उन ग्राहकों के लिए अहम साबित हो रहा है, जिन्हें बिना पारंपरिक वायरिंग के तेज ब्रॉडबैंड कनेक्शन चाहिए। इसका इस्तेमाल घरों के साथ-साथ दफ्तरों, दुकानों, स्कूलों और छोटे कारोबार में भी किया जा सकता है। मई 2026 के अंत में जियो के 5G FWA ग्राहकों यानी जियोएयरफाइबर की संख्या करीब 89.68 लाख पहुंच गई।

जियोएयरफाइबर ने फिक्स्ड वायरलेस ब्रॉडबैंड सेगमेंट में कंपनी की बढ़त को और मजबूत किया है। ट्राई के मुताबिक मई में जियो ने FWA सेगमेंट में करीब 4 लाख ग्राहक जोड़े, जबकि निकटतम प्रतिस्पर्धी एयरटेल की बढ़त करीब 10 हजार रही। कुल FWA बाजार में जियो की हिस्सेदारी करीब 78.4 प्रतिशत बताई गई है।

फिक्स्ड वायर्ड ब्रॉडबैंड में भी जियो की स्थिति लगातार मजबूत बनी हुई है। ट्राई रिपोर्ट के अनुसार मई 2026 के अंत में जियो के फिक्स्ड वायर्ड ब्रॉडबैंड ग्राहक 1.44 करोड़ रहे, जबकि एयरटेल के 1.09 करोड़ ग्राहक थे। यह सेगमेंट जियोफाइबर जैसी सेवाओं से जुड़ा है, जहां ग्राहक स्थिर और हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शन चाहते हैं।

देश में ब्रॉडबैंड का कुल आधार भी लगातार बढ़ रहा है। ट्राई के मुताबिक मई 2026 के अंत में कुल ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 108.01 करोड़ पहुंच गई है। इनमें जियो 52.96 करोड़ ग्राहकों के साथ पहले स्थान पर है। दूसरे स्थान पर एयरटे 37.61 करोड़ ब्रॉडबैंड ग्राहकों के साथ दूसरे नंबर पर है। हालांकि मई माह में एयरटेल ने करीब 29.2 लाख तो जियो ने 21.5 लाख सब्सक्राइबर जोड़े।

मोबाइल सेवाओं में भी जियो की सक्रिय ग्राहक हिस्सेदारी मजबूत रही। मई में जियो 44.2 प्रतिशत एक्टिव यूजर शेयर के साथ आगे रहा। एक्टिव यूजर वे ग्राहक माने जाते हैं जो नेटवर्क पर वास्तव में सक्रिय रहते हैं। इस आधार पर भी जियो की पकड़ मजबूत बनी हुई है।

MP Transfer Policy: सिवनी सहकारिता विभाग में आखिर क्यों नहीं हो रहे तबादले? वर्षों से एक ही शाखा में जमे प्रबंधकों पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश की स्थानांतरण नीति लागू होने के बावजूद सिवनी के सहकारिता विभाग और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में वर्षों से एक ही शाखा में पदस्थ शाखा प्रबंधकों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जानिए पूरा मामला।

सिवनी। मध्य प्रदेश शासन द्वारा घोषित स्थानांतरण नीति के तहत प्रदेश के अधिकांश सरकारी विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले पूरे हो चुके हैं। कई विभागों ने अपनी स्थानांतरण सूची भी जारी कर दी है, लेकिन सिवनी जिले का सहकारिता विभाग और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अब तक इस प्रक्रिया से लगभग अछूता दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि अब सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि जब अन्य विभाग शासन की नीति का पालन कर चुके हैं, तब सहकारिता विभाग में स्थानांतरण प्रक्रिया लागू नहीं होना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है। लोगों का कहना है कि यदि शासन ने स्पष्ट स्थानांतरण नीति बनाई है तो उसका पालन सभी विभागों में समान रूप से होना चाहिए।

रोटेशन नीति के बावजूद वर्षों से एक ही शाखा में पदस्थ शाखा प्रबंधक

सूत्रों के अनुसार जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की कई शाखाओं में शाखा प्रबंधक पिछले पांच से छह वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं। बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सामान्यतः रोटेशन नीति के तहत समय-समय पर अधिकारियों का स्थानांतरण किया जाता है, लेकिन जिले की कई शाखाओं में यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू होती नजर नहीं आ रही है।

बताया जा रहा है कि कुछ शाखा प्रबंधकों के विरुद्ध कार्यशैली को लेकर शिकायतें भी जिला प्रशासन तक पहुंच चुकी हैं। हालांकि इन शिकायतों पर आधिकारिक रूप से क्या कार्रवाई हुई है, इसकी कोई सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है।

किसानों के हितों से जुड़ा है पूरा मामला

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक केवल बैंकिंग संस्था ही नहीं, बल्कि हजारों किसानों की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र भी है। किसानों के खाते, फसल भुगतान और सहकारी समितियों का अधिकांश वित्तीय लेन-देन इसी बैंक के माध्यम से संचालित होता है।

ऐसे में बैंक शाखाओं में लंबे समय तक एक ही अधिकारी की पदस्थापना को लेकर पारदर्शिता और प्रशासनिक निष्पक्षता के प्रश्न उठना स्वाभाविक माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि धान भुगतान सहित कई बैंकिंग कार्यों को लेकर समय-समय पर किसानों ने असंतोष भी जताया है।

‘राजनीतिक संरक्षण’ की चर्चाएं, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं

स्थानीय चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि कुछ अधिकारी राजनीतिक प्रभाव के कारण लंबे समय से एक ही शाखा में बने हुए हैं। हालांकि इस संबंध में किसी सक्षम प्राधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

कुछ कर्मचारियों ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर यह भी दावा किया कि लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारी सहकारी समितियों के प्रबंधकों के लिए भी प्रशासनिक चुनौती बने हुए हैं।

जिला कलेक्टर की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल

सहकारी संस्थाओं में लंबे समय से संचालक मंडल के चुनाव नहीं होने के कारण वर्तमान में प्रशासनिक जिम्मेदारी जिला प्रशासन के माध्यम से संचालित हो रही है। ऐसे में लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि जब जिला प्रशासन के पास सहकारिता व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी है, तब स्थानांतरण और रोटेशन नीति का पालन सुनिश्चित क्यों नहीं कराया जा रहा।

स्थानीय नागरिकों और किसानों का मानना है कि यदि रोटेशन नीति समय पर लागू होती है तो बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों मजबूत हो सकती हैं।

जनहित में कार्रवाई की मांग

जिले के कई नागरिकों और किसान संगठनों का मानना है कि सहकारिता विभाग एवं जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में शासन की स्थानांतरण एवं रोटेशन नीति का निष्पक्ष पालन कराया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों का नियमानुसार स्थानांतरण किया जाए तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी और किसानों का विश्वास भी मजबूत होगा।

फिलहाल जिला सहकारी केंद्रीय बैंक या सहकारिता विभाग की ओर से इस विषय में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि संबंधित विभाग अपना पक्ष जारी करता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

मानसून अवधि में SEONI जिले में रेत उत्खनन पर 30 जून की मध्यरात्रि से प्रतिबंध

सिवनी/ कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना ने मानसून अवधि को दृष्टिगत रखते हुए जिले में रेत उत्खनन पर प्रतिबंध संबंधी आदेश जारी किए हैं। यह आदेश भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी सतत रेत खनन प्रबंधन दिशा-निर्देश, 2016, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, नागपुर तथा संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म, भोपाल द्वारा जारी निर्देशों के परिपालन में जारी किया गया है।

जारी आदेश के अनुसार जिले में मानसून की सक्रियता को देखते हुए 30 जून 2026 की मध्यरात्रि से 1 अक्टूबर 2026 तक जिले की सभी रेत खदानों, नदियों एवं नालों से रेत उत्खनन पर पूर्णतः प्रतिबंध रहेगा। इस अवधि में किसी भी स्थान से रेत का उत्खनन नहीं किया जा सकेगा।

कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना द्वारा जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। उन्होंने संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को प्रतिबंध अवधि में आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने तथा अवैध रेत उत्खनन पर प्रभावी निगरानी रखते हुए नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

CM Mohan Yadav Seoni Visit: 1 जुलाई को सिवनी आएंगे मुख्यमंत्री, कलेक्टर नेहा मीना ने संभाली कमान, कार्यक्रम स्थल और हेलीपैड का किया बारीकी से निरीक्षण

CM Mohan Yadav Seoni Visit: सिवनी। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रस्तावित 1 जुलाई 2026 के सिवनी दौरे को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री के आगमन को ऐतिहासिक और सुव्यवस्थित बनाने के लिए तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं। इसी क्रम में रविवार को कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना ने पॉलिटेक्निक मैदान स्थित कार्यक्रम स्थल एवं हेलीपैड का विस्तृत निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान विधायक दिनेश राय भी मौजूद रहे।

कार्यक्रम स्थल पर हर व्यवस्था की हुई गहन समीक्षा

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने कार्यक्रम स्थल की सभी महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने मंच निर्माण, वीआईपी एवं आम नागरिकों की बैठक व्यवस्था, प्रवेश और निकास मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, स्वच्छता, बैरिकेडिंग, मीडिया गैलरी तथा नियंत्रण कक्ष सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की प्रगति का जायजा लिया।

कलेक्टर ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी तैयारियां निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूरी की जाएं और प्रत्येक विभाग आपसी समन्वय बनाकर कार्य करे।

बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना, अधिकारियों को दिए विशेष निर्देश

कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना ने कहा कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों एवं आम नागरिकों के शामिल होने की संभावना है। ऐसे में प्रत्येक विभाग अपनी जिम्मेदारी पूरी गंभीरता के साथ निभाए।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कार्यक्रम स्थल पर आने वाले लोगों के लिए सुगम आवागमन, पर्याप्त सुरक्षा, पेयजल, स्वच्छता और अन्य मूलभूत सुविधाओं की किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए।

हेलीपैड पर भी सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्थाओं पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर आगमन को देखते हुए कलेक्टर ने हेलीपैड का भी निरीक्षण किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी तकनीकी एवं सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं शासन द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप समय पर पूरी कर ली जाएं ताकि किसी प्रकार की असुविधा या जोखिम की स्थिति उत्पन्न न हो।

अधिकारियों ने दी तैयारियों की जानकारी

निरीक्षण के दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने अपनी-अपनी तैयारियों की विस्तृत जानकारी कलेक्टर को दी। इस अवसर पर सीईओ जिला पंचायत श्रीमती अंजली शाह, अपर कलेक्टर श्री सी.एल. चनाप, एसडीएम श्रीमती पूर्वी तिवारी सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

प्रशासन की तैयारियों पर टिकी लोगों की नजर

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का प्रस्तावित सिवनी दौरा जिले के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशासन की कोशिश है कि कार्यक्रम पूरी तरह व्यवस्थित, सुरक्षित और सफल रहे। इसके लिए जिला प्रशासन लगातार तैयारियों की मॉनिटरिंग कर रहा है और सभी विभागों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।