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सफ़र, चायवाला से प्रधानमंत्री तक

भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनका जीवन स्वयं एक प्रेरक कथा बन जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जीवन भी संघर्ष, संकल्प, सेवा और नेतृत्व की ऐसी ही कहानी है। प्रस्तुत कविता उसी जीवन-यात्रा को काव्यात्मक रूप में अभिव्यक्त करने का प्रयास है।

सफ़र: चायवाले से प्रधानमंत्री तक

छोटा-सा गांव वो वडनगर का,
जहां जीते थे लोग रईसी मे।
इसमें दोष कहां था मोदी का,
जो जनम लिया ग़रीबी मे।

मां की ममता का आंचल था,
था पिता-भाई का प्यार मिला।
एक प्यार हीं था जो मिल भी पाया,
बाकी सूख छीना गरीबी ने।

बचपन से ही आदत पड़ गई,
काम मे हाथ बंटाने का।
सेवा घर-घर की मां के साथ,
झाड़ू-पोछा लगाने का।

पिता रहते परेशान बहुत,
जंक्शन पे चाय बनाने मे।
लगे लोगों को चाय पिलाने,
लोगों की कसक मिटाने मे।

अपना जीवन वो भूल चुके,
दुनिया से महरूम थे वो।
क्या होते हैं सपने अपने,
इन सब से भी दूर थे वो।

परिवार ने शादी की जंजीरों से बांधा उनको,
दिल मे थी आवाज़ इक आयी,
करना है कुछ और उनको।

हो विरक्त इस दुनिया से,
निकल गये अंजान सफ़र मे।
हिमालयी उस उपवन मे,
ख़ुद से मिलना था, जो उनको।

घाटी वो बड़ा सुहाना था,
बालक वो व्यस्क थे बन चले।
पहचान कर ख़ुद की शक्ति,
उन्हे वापस दुनिया मे आना था।

मर्यादित कामों मे थे,
कुछ करने की फ़िर से ठानी।
बाटे-साटे बैनर-पोस्टर
शुरू हुई एक नई कहानी।

संघ का तब मिला सहारा,
तनमन से था काम किया।
अटल से ले आडवाणी तक,
कार्यों का पैगाम गया।

आ गए तब राजनीति मे,
आदत थी सेवा करने की।
मां भारती की भी चाहत थी,
उनके कुछ कर गुजरने की।

सफ़र राजनीति का भी,
था इतना आसान नही।
भूकंप पीड़ित गुजरात मे तब,
फूंक दी फिर से जान नई।

प्रगति-पथ पर अग्रसर था तब,
बाकी राज्यो मे निराशा थी।
हताश देश की जनता को बस,
मोदी से इक आशा थी।

सन् चौदह का वो दिन,
जब संसद में प्रवेश किया।
गंगाजल के साथ मे गीता,
देश के नाम भेंट किया।

लगें हैं तब से लगातार,
देश का मान बढ़ाने मे।
US,UK, विश्व लगे हैं,
भारत के गुण गाने मे।

आत्मनिर्भर हो, आयुष्मान हो, चाहे हो तीन तलाक़।
चंद्रयान हो, गगनयान हो,
या तीन सौ सत्तर पर हो बात।

वो सब कर के दिखा दिए,
जिसकी थी देश को आश।
करने से पहले जगा दिए थे,
लोगों का विश्वास।

कसक अभी भी सीने मे था,
दिल से आती आवाज़।
रामलला का कार्य करने को,
थी जनता की फरियाद।

जनता के आदेशों को,
थे सर-आंखों पर ले लिया।
निमित्त कार्य का बनकर वो,
पल-पल समय को जी लिया।

कसक दबा है दिलो के अंदर,
करना बहुत कुछ बाकी है।
तन-मन-जीवन सब समर्पित,
मोदी की यही कहानी है।
सुधांशु शेखर,घेजन,जहानाबाद,बिहार।

संपादकीय टिप्पणी

यह रचना एक काव्यात्मक और वैचारिक प्रस्तुति है। इसमें व्यक्त विचार एवं भाव लेखक के निजी हैं। इसे किसी राजनीतिक प्रचार के बजाय एक साहित्यिक अभिव्यक्ति के रूप में प्रकाशित करना अधिक उपयुक्त रहेगा।

लेखक: सुधांशु शेखर, ग्राम+पोस्ट: घेजन, जिला: जहानाबाद, बिहार

सिद्धपीठ ज्वाला देवी मंदिर सिवनी में 148वां संगीतमय सुंदरकांड पाठ सम्पन्न, धार्मिक आयोजन के साथ दिया गया स्वच्छता और स्वास्थ्य का संदेश

Jwala Devi Sidhhpeeth Mandir Seoni: सिवनी के सिद्धपीठ ज्वाला देवी मंदिर, भैरोगंज में 148वां साप्ताहिक संगीतमय सुंदरकांड एवं श्री हनुमान चालीसा पाठ श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में सम्पन्न हुआ। धार्मिक आयोजन के साथ-साथ श्रद्धालुओं को स्वच्छता, वर्षा ऋतु में स्वास्थ्य सुरक्षा और अंधविश्वास से दूर रहने का संदेश भी दिया गया।

मुख्य बातें (Highlights)
● सिद्धपीठ ज्वाला देवी मंदिर में हुआ 148वां संगीतमय सुंदरकांड पाठ
● बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने की सहभागिता
● भजन-कीर्तन, सुंदरकांड पाठ और महाआरती का हुआ आयोजन
● वर्षा ऋतु में स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा का दिया गया संदेश
● सर्पदंश की स्थिति में अंधविश्वास छोड़ तत्काल अस्पताल जाने की अपील
● जन्मदिवस पर श्रीमती रोशनी अमित शक्रवार रहीं विशेष यजमान

भक्ति और श्रद्धा के बीच सम्पन्न हुआ सुंदरकांड पाठ

सिवनी के सिद्धपीठ ज्वाला देवी मंदिर, भैरोगंज में माँ ज्वाला देवी और श्रीराम भक्त हनुमान जी महाराज की कृपा से 148वां साप्ताहिक संगीतमय सुंदरकांड एवं श्री हनुमान चालीसा पाठ श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ।

मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद, भजन-कीर्तन और सुंदरकांड पाठ से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर पूजा-अर्चना की और भगवान श्री हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त किया।

धार्मिक आयोजन के साथ दिया गया जनजागरूकता का संदेश

कार्यक्रम के दौरान मंदिर समिति ने वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं से घर और आसपास स्वच्छता बनाए रखने की अपील की।

समिति ने नागरिकों से कहा कि जलभराव रोकें, वर्षा जल की उचित निकासी सुनिश्चित करें तथा कूलर और अन्य स्थानों पर जमा पानी को नियमित रूप से खाली करें, ताकि मच्छरों के प्रजनन को रोका जा सके और मौसमी बीमारियों से बचाव हो सके।

स्वास्थ्य और वैज्ञानिक सोच अपनाने की अपील

मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से वर्षा ऋतु में हल्का एवं सुपाच्य भोजन करने, स्वच्छ पेयजल का उपयोग करने और स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या में चिकित्सकीय सलाह लेने का आग्रह किया।

विशेष रूप से सर्पदंश जैसी आपात स्थिति में झाड़-फूंक या अंधविश्वास का सहारा लेने के बजाय तत्काल अस्पताल जाकर वैज्ञानिक उपचार कराने का संदेश भी दिया गया। समिति ने लोगों से इन बातों को अपने परिवार और समाज तक पहुंचाने का आह्वान किया।

जन्मदिवस पर परिवार सहित बने विशेष यजमान

इस अवसर पर चौरई (जिला छिंदवाड़ा) निवासी श्रीमती रोशनी अमित शक्रवार ने अपने जन्मदिवस के अवसर पर परिवार सहित विधि-विधान से पूजा-अर्चना कराई और कार्यक्रम की विशेष यजमान रहीं।

महाआरती और महाप्रसाद के साथ हुआ समापन

पूजन-अर्चन के बाद संगीतमय सुंदरकांड पाठ, श्रीहनुमान चालीसा एवं भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। इसके पश्चात सभी श्रद्धालुओं को महाप्रसाद वितरित किया गया। कार्यक्रम के समापन पर माँ ज्वाला देवी और श्रीहनुमान जी महाराज से सभी श्रद्धालुओं के सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की प्रार्थना की गई।

सिद्धपीठ ज्वाला देवी मंदिर में प्रत्येक सप्ताह संगीतमय सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया जाता है। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और जनजागरूकता से जुड़े संदेशों के प्रसार का भी माध्यम बनता जा रहा है।

धार्मिक आयोजनों के माध्यम से स्वच्छता, स्वास्थ्य और वैज्ञानिक सोच का संदेश समाज तक पहुंचाना जनजागरूकता की प्रभावी पहल है। इससे लोगों में सामाजिक जिम्मेदारी और स्वास्थ्य के प्रति सजगता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

सिद्धपीठ ज्वाला देवी मंदिर में आयोजित 148वां संगीतमय सुंदरकांड पाठ श्रद्धा और सेवा का सुंदर संगम बना। धार्मिक आयोजन के साथ समाजहित के संदेशों ने इस कार्यक्रम को केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बना दिया।

सिवनी: 3.93 करोड़ की सड़क पहली ही बारिश में बही, सिवनी कलेक्टर नेहा मीना ने दिए स्वतंत्र जांच के आदेश, जांच दल गठित

सिवनी जिले के केवलारी विकासखंड में करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क पहली ही तेज बारिश में क्षतिग्रस्त हो गई। मोहबर्रा से सारसडोल के बीच करीब 3.93 करोड़ रुपये की लागत से तैयार डामरीकृत सड़क का बड़ा हिस्सा पुलिया सहित बह जाने के बाद प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

मुख्य बातें (Highlights)
● केवलारी के मोहबर्रा-सारसडोल मार्ग का मामला
● करीब 3.93 करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क बारिश में क्षतिग्रस्त
● पुलिया सहित सड़क का हिस्सा बहने से कई गांवों का संपर्क प्रभावित
● कलेक्टर नेहा मीना ने स्वतंत्र एजेंसी से जांच के दिए निर्देश
● जिला पंचायत सीईओ अंजली शाह को सौंपी गई जांच की जिम्मेदारी
● समयबद्ध जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश

पहली ही बारिश में बह गई करोड़ों की सड़क

सिवनी जिले के केवलारी विकासखंड में मोहबर्रा से सारसडोल के बीच निर्मित डामरीकृत सड़क तेज बारिश की मार नहीं झेल सकी। 2 जुलाई को हुई मूसलाधार बारिश के दौरान पानी निकासी की पुलिया के साथ सड़क का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर बह गया।

इस घटना के बाद क्षेत्र के कई गांवों के बीच सड़क संपर्क प्रभावित हो गया है, जिससे स्थानीय लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

एक माह पहले पूरा हुआ था सड़क निर्माण

जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा स्वीकृत लगभग 3 किलोमीटर लंबी इस सड़क की लागत करीब 3 करोड़ 93 लाख रुपये है।

सड़क निर्माण का ठेका बालाघाट जिले के लामता निवासी ठेकेदार आशीष जायसवाल को दिया गया था। बताया जा रहा है कि सड़क का निर्माण कार्य बारिश शुरू होने से लगभग एक माह पहले पूरा किया गया था।

पुल निर्माण अभी भी जारी

इसी मार्ग पर स्थित नदी पर लगभग 1 करोड़ रुपये की लागत से 4 मीटर ऊंचे पुल का निर्माण कार्य अभी प्रगति पर है। जबकि सड़क का शेष भाग पहले ही तैयार कर उपयोग के लिए खोल दिया गया था।

कलेक्टर ने स्वतंत्र जांच के दिए आदेश

सड़क क्षतिग्रस्त होने की घटना को गंभीरता से लेते हुए सिवनी कलेक्टर नेहा मीना ने स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

कलेक्टर ने बताया कि जांच की जिम्मेदारी जिला पंचायत सिवनी की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) अंजली शाह को सौंपी गई है। गठित जांच दल को मामले की विस्तृत जांच कर समयबद्ध जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

जांच में किन बिंदुओं पर रहेगा फोकस?

प्रशासन की जांच में निम्न पहलुओं की पड़ताल की जा सकती है—

निर्माण कार्य की गुणवत्ता
तकनीकी मानकों का पालन
पुलिया और जल निकासी व्यवस्था की स्थिति
निर्माण एजेंसी एवं संबंधित अधिकारियों की भूमिका
क्षति के वास्तविक कारण

हालांकि, निर्माण में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या नहीं, इसका निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

मानसून के दौरान मध्यप्रदेश के कई जिलों में सड़क और पुल-पुलियों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे मामलों में निर्माण गुणवत्ता और जल निकासी व्यवस्था को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं। प्रशासनिक जांच का उद्देश्य क्षति के कारणों का पता लगाना और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करना होता है।

यदि जांच में निर्माण कार्य में लापरवाही या तकनीकी अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। साथ ही प्रभावित सड़क के पुनर्निर्माण और ग्रामीणों की आवाजाही बहाल करने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे।

केवलारी की यह घटना सार्वजनिक निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच पर हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि सड़क प्राकृतिक कारणों से क्षतिग्रस्त हुई या निर्माण प्रक्रिया में कहीं कोई कमी रही।

MP बना देश का पहला राज्य, नए वक्फ अधिनियम के तहत गठित किया नया वक्फ बोर्ड; 2 हिंदू सदस्य भी शामिल

Reconstitution of the new Waqf Board: मध्यप्रदेश सरकार ने नए वक्फ अधिनियम के तहत वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन कर देश में नई पहल की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्णय के बाद राज्य सरकार ने नया वक्फ बोर्ड गठित कर दिया है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश नए कानून के तहत वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

मुख्य बातें (Highlights)
● मध्यप्रदेश में नए वक्फ बोर्ड का गठन
● नए अधिनियम के तहत पुनर्गठन करने वाला पहला राज्य बना एमपी
● सनवर पटेल बनाए गए वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष
● बोर्ड में कुल 10 सदस्य शामिल
● दो हिंदू सदस्य मनोज मालपानी और अनिमेश भार्गव को भी मिली जगह
● राज्य सरकार ने राजपत्र में अधिसूचना जारी की

नए वक्फ बोर्ड का गठन, राजपत्र में जारी हुई अधिसूचना

मध्यप्रदेश सरकार ने वक्फ अधिनियम, 1995 (संशोधित-2025) के प्रावधानों के तहत राज्य वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन कर दिया है। इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना जारी कर दी गई है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर गठित नए बोर्ड के अध्यक्ष सनवर पटेल होंगे।

देश का पहला राज्य बना मध्यप्रदेश

राज्य सरकार के अनुसार, नए वक्फ अधिनियम के लागू होने के बाद उसके प्रावधानों के अनुरूप वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है।

सरकार ने यह कार्रवाई वक्फ अधिनियम-1995 (संशोधित-2025) की धारा 13(1) और धारा 14 में दिए गए प्रावधानों के तहत की है।

बोर्ड में कुल 10 सदस्य, दो हिंदू सदस्य भी शामिल

नवगठित वक्फ बोर्ड में कुल 10 सदस्य शामिल किए गए हैं। इनमें विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है।

वक्फ बोर्ड के प्रमुख सदस्य
अध्यक्ष – सनवर पटेल
नजमा हेपतुल्ला
आतिफ अकील (विधायक, भोपाल उत्तर)
फैजान खान (उज्जैन)
फातेमा चौधरी (इंदौर)
शाइस्ता सुल्तान (पार्षद, बैरसिया)
शबाना खान (पार्षद, रतलाम)
मनोज मालपानी (इंदौर)
अनिमेश भार्गव (राघौगढ़, गुना)
आयुक्त, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग

नजमा हेपतुल्ला का कार्यकाल रहेगा जारी

सरकार ने स्पष्ट किया है कि नजमा हेपतुल्ला का चयन पूर्व अधिसूचना के तहत निर्वाचित श्रेणी में हुआ था। उनका कार्यकाल 18 अप्रैल 2028 तक प्रभावी है, इसलिए उन्हें शेष कार्यकाल के लिए नए बोर्ड में भी शामिल किया गया है।

सरकार का उद्देश्य

राज्य सरकार का कहना है कि नए अधिनियम के अनुरूप वक्फ बोर्ड का गठन कर प्रशासनिक व्यवस्था को अद्यतन किया गया है। बोर्ड वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन, संरक्षण और अधिनियम के तहत निर्धारित दायित्वों का निर्वहन करेगा।

हाल ही में वक्फ अधिनियम में संशोधन के बाद राज्यों को नए प्रावधानों के अनुरूप अपने-अपने वक्फ बोर्डों का पुनर्गठन करना था। मध्यप्रदेश सरकार ने इस प्रक्रिया को पूरा करते हुए नया बोर्ड गठित कर दिया है।

नए वक्फ बोर्ड के गठन से राज्य में वक्फ संपत्तियों के प्रशासनिक प्रबंधन और अधिनियम के नए प्रावधानों के क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। साथ ही, सरकार का दावा है कि मध्यप्रदेश इस दिशा में पहल करने वाला पहला राज्य बन गया है।

मध्यप्रदेश में नए वक्फ बोर्ड का गठन राज्य सरकार का महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय माना जा रहा है। नए अधिनियम के तहत गठित इस बोर्ड में विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। आने वाले समय में बोर्ड की कार्यप्रणाली और नए प्रावधानों का प्रभाव राज्य में वक्फ प्रशासन की दिशा तय करेगा।

Safe Click 2.0 अभियान के तहत मध्यप्रदेश पुलिस ने स्कूल, गांव, रेलवे स्टेशन और सोशल मीडिया के जरिए लाखों लोगों को किया साइबर जागरूक

Safe Click 2.0: मध्यप्रदेश पुलिस का ‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान अब केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा को लेकर जनभागीदारी का बड़ा आंदोलन बनता जा रहा है। प्रदेशभर में स्कूलों, कॉलेजों, गांवों, रेलवे स्टेशनों, बाजारों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिकों को ऑनलाइन ठगी से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है।

मुख्य बातें (Highlights)
● प्रदेशभर में ‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान के तहत नवाचारपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम।
● स्कूलों, कॉलेजों, पंचायतों, रेलवे स्टेशनों और बाजारों में चलाए गए अभियान।
● सोशल मीडिया पर रील, वीडियो और पोस्ट के जरिए साइबर सुरक्षा का संदेश।
● इंदौर में 6 हजार लोगों की साइबर जागरूकता मैराथन।
● भोपाल, उज्जैन, विदिशा, खंडवा, टीकमगढ़, सिंगरौली, कटनी, ग्वालियर समेत सभी जिलों में विशेष कार्यक्रम।
● साइबर ठगी होने पर 1930 हेल्पलाइन और Cyber Crime Portal पर शिकायत की अपील।

जनभागीदारी से जनआंदोलन बन रहा है ‘सेफ क्लिक 2.0’

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 24 जून से 8 जुलाई 2026 तक संचालित राज्यव्यापी ‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान के तहत प्रदेश की सभी पुलिस इकाइयां लगातार साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं।

अभियान का उद्देश्य नागरिकों में सुरक्षित डिजिटल व्यवहार विकसित करना और ऑनलाइन ठगी, फिशिंग, फर्जी निवेश, डिजिटल अरेस्ट, सोशल मीडिया फ्रॉड एवं अन्य साइबर अपराधों के प्रति सतर्कता बढ़ाना है।

स्कूलों, कॉलेजों और गांवों तक पहुंचा साइबर सुरक्षा का संदेश

अभियान के तहत विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्राम पंचायतों, शासकीय कार्यालयों, धार्मिक स्थलों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

पुलिस अधिकारी नागरिकों को डिजिटल सुरक्षा, सुरक्षित ऑनलाइन लेनदेन, फर्जी लिंक से बचाव और साइबर हेल्पलाइन 1930 के उपयोग की जानकारी दे रहे हैं।

इंदौर में 6 हजार लोगों ने दौड़कर दिया साइबर सुरक्षा का संदेश

इंदौर पुलिस कमिश्नरेट ने अभियान के तहत 6 हजार से अधिक नागरिकों की भागीदारी के साथ विशाल साइबर जागरूकता मैराथन आयोजित की।

“सेफ क्लिक, सुरक्षित जीवन” थीम पर आयोजित इस मैराथन में बच्चों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और पुलिस अधिकारियों ने भाग लेकर साइबर सुरक्षा को जनआंदोलन का स्वरूप दिया।

भोपाल में मेडिकल छात्रों को बताया साइबर फ्रॉड से बचने का तरीका

भोपाल कमिश्नरेट के थाना रातीबड़ ने आरडी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में करीब 1,500 छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग, विशिंग, स्मिशिंग, फर्जी निवेश, यूपीआई और QR कोड फ्रॉड से बचाव के व्यावहारिक उपाय बताए।

कार्यक्रम में प्रतिभागियों को साइबर सुरक्षा की शपथ भी दिलाई गई और किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 पर कॉल करने एवं राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी गई।

रेलवे स्टेशन, पंचायत और धार्मिक स्थलों पर भी चला अभियान

अभियान के तहत—

जीआरपी भोपाल ने रेलवे स्टेशन खंडवा पर ध्वनि प्रसारण के माध्यम से यात्रियों को जागरूक किया।
जीआरपी जबलपुर और जीआरपी इंदौर ने रेलवे स्टेशनों पर साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी दी।
कटनी पुलिस ने धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर एवं पंपलेट वितरित किए।
टीकमगढ़, भोपाल ग्रामीण, खंडवा, राजगढ़, अनूपपुर सहित कई जिलों में पंचायतों और शासकीय कार्यालयों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए।

स्थानीय नवाचारों से अभियान को मिली नई पहचान

प्रदेश के विभिन्न जिलों ने स्थानीय स्तर पर अनूठे प्रयोग भी किए।

सिवनी के 981 गांवों में गूंजी साइबर सुरक्षा की मुनादी, 7.94 लाख ग्रामीणों तक पहुंचा ‘Safe Click 2.0’ अभियान
विदिशा में साइबर जागरूकता के साथ मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान किया गया।
सिंगरौली में विद्यार्थियों के साथ संवादात्मक सत्र आयोजित हुए।
सीधी में लोक कलाकारों के माध्यम से साइबर सुरक्षा का संदेश दिया गया।
ग्वालियर में रन क्लब के प्रतिभागियों को जागरूक किया गया।
छिंदवाड़ा में सामाजिक सम्मान समारोह के साथ साइबर जागरूकता कार्यक्रम जोड़ा गया।

सोशल मीडिया बना जागरूकता का बड़ा माध्यम

प्रदेश की सभी पुलिस इकाइयां फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिदिन रील, वीडियो, पोस्टर और जनहित संदेश साझा कर रही हैं।

छतरपुर पुलिस स्थानीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और स्थानीय भाषा में तैयार वीडियो के माध्यम से लोगों तक पहुंच रही है, जबकि गुना पुलिस निजी फोटो और वीडियो साझा करने से जुड़े साइबर जोखिमों पर जागरूकता रील तैयार कर रही है।

मध्यप्रदेश पुलिस की अपील

मध्यप्रदेश पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि—

किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
OTP, UPI PIN और बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।
www.cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं।
स्वयं जागरूक रहें और दूसरों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करें।

देशभर में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए मध्यप्रदेश पुलिस ने सेफ क्लिक 2.0 अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य तकनीकी जागरूकता बढ़ाकर नागरिकों को डिजिटल धोखाधड़ी से बचाना और साइबर सुरक्षा को सामाजिक अभियान का स्वरूप देना है।

स्कूलों, कॉलेजों, पंचायतों और सोशल मीडिया के माध्यम से चल रहा यह अभियान डिजिटल साक्षरता बढ़ाने और साइबर अपराधों के मामलों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। जनभागीदारी बढ़ने से साइबर सुरक्षा को लेकर समाज में स्थायी जागरूकता विकसित होने की उम्मीद है।

‘सेफ क्लिक 2.0’ अब केवल पुलिस का अभियान नहीं, बल्कि सुरक्षित डिजिटल समाज बनाने की व्यापक पहल बन चुका है। यदि नागरिक पुलिस द्वारा बताए गए सुरक्षा उपायों का पालन करें और साइबर अपराध की स्थिति में तुरंत शिकायत दर्ज कराएं, तो ऑनलाइन ठगी के मामलों में काफी कमी लाई जा सकती है।

सिवनी के 981 गांवों में गूंजी साइबर सुरक्षा की मुनादी, 7.94 लाख ग्रामीणों तक पहुंचा ‘Safe Click 2.0’ अभियान

साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे के बीच सिवनी पुलिस का ‘सेफ क्लिक अभियान 2.0’ लगातार लोगों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक कर रहा है। अभियान के 12वें दिन जिले के 981 गांवों में कोटवारों की मुनादी के माध्यम से साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया, जबकि कान्हीवाड़ा स्थित पीएम श्री नवोदय विद्यालय में 550 छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन ठगी से बचाव का प्रशिक्षण दिया गया।

मुख्य बातें (Highlights)

  • ● Safe Click 2.0 अभियान के 12वें दिन ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष फोकस
  • ● जिले के 981 गांवों में साइबर सुरक्षा की मुनादी
  • ● करीब 7.94 लाख ग्रामीणों तक पहुंचा जागरूकता अभियान
  • ● पीएम श्री नवोदय विद्यालय, कान्हीवाड़ा में 550 विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण
  • ● एसपी कृष्ण लालचंदानी ने जागरूकता को साइबर अपराधों से बचाव का सबसे बड़ा हथियार बताया

गांव-गांव पहुंचा साइबर सुरक्षा का संदेश

पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देशन में 24 जून से 8 जुलाई 2026 तक पूरे मध्यप्रदेश में संचालित ‘सेफ क्लिक अभियान 2.0’ के तहत सिवनी पुलिस ने 5 जुलाई को ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया।

पुलिस अधीक्षक कृष्ण लालचंदानी के निर्देशन में जिले के सभी 981 गांवों में ग्राम कोटवारों के माध्यम से मुनादी कराई गई। इस दौरान ग्रामीणों को साइबर ठगी, फिशिंग, फर्जी कॉल, ऑनलाइन धोखाधड़ी और डिजिटल सुरक्षा के उपायों की जानकारी दी गई।

पुलिस के अनुसार इस अभियान के माध्यम से लगभग 7,94,870 ग्रामीण नागरिकों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचा।

कोटवारों को पहले दिया गया विशेष प्रशिक्षण

मुनादी अभियान से पहले जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में ग्राम कोटवारों की बैठक आयोजित की गई। इसमें उन्हें साइबर फ्रॉड के नए तरीकों, फर्जी निवेश योजनाओं, बैंकिंग धोखाधड़ी, फिशिंग और बचाव के उपायों की जानकारी दी गई, ताकि वे ग्रामीणों तक सही और प्रभावी संदेश पहुंचा सकें।

साथ ही ग्रामीणों को साइबर हेल्पलाइन 1930 और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) की जानकारी भी दी गई।

नवोदय विद्यालय में 550 विद्यार्थियों को मिला साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण

अभियान के तहत पीएम श्री नवोदय विद्यालय, कान्हीवाड़ा में साइबर जागरूकता कार्यक्रम और साइबर क्विज का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में एसडीओपी केवलारी आशीष भराड़े मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी, साइबर सेल, विद्यालय प्रबंधन और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर 550 छात्र-छात्राओं को सोशल मीडिया फ्रॉड, फर्जी निवेश, ऑनलाइन ठगी, डेटा सुरक्षा और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।

गांवों में पुलिस ने किया सीधा जनसंवाद

सिवनी पुलिस की टीमों ने गांव-गांव पहुंचकर लोगों से सीधे संवाद किया। ग्रामीणों को समझाया गया कि—

  • किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
  • OTP, UPI PIN और बैंक संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
  • संदिग्ध कॉल और संदेशों से सतर्क रहें।
  • ऑनलाइन लेनदेन से पहले जानकारी की पुष्टि अवश्य करें।

सरल उदाहरणों के माध्यम से लोगों को साइबर अपराधियों के नए तरीकों से भी अवगत कराया गया।

एसपी कृष्ण लालचंदानी की अपील

पुलिस अधीक्षक कृष्ण लालचंदानी ने कहा कि साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता है।

उन्होंने नागरिकों से अपील की कि यदि किसी के साथ साइबर ठगी होती है तो घबराने के बजाय तुरंत 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही उन्होंने प्रत्येक नागरिक से अपने आसपास कम से कम 10 लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया।

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा ‘सेफ क्लिक अभियान 2.0’ का उद्देश्य डिजिटल माध्यमों से होने वाली ठगी, फिशिंग, फर्जी निवेश, सोशल मीडिया फ्रॉड और बैंकिंग धोखाधड़ी के प्रति लोगों को जागरूक करना है। अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों, ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी इलाकों में लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में साइबर जागरूकता का विस्तार डिजिटल ठगी के मामलों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कोटवारों और विद्यार्थियों को जोड़कर चलाया गया यह अभियान समाज के हर वर्ग तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन रहा है।

सिवनी पुलिस का ‘सेफ क्लिक अभियान 2.0’ केवल जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि डिजिटल रूप से सुरक्षित समाज बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यदि नागरिक सतर्क रहें और पुलिस द्वारा बताए गए सुरक्षा उपाय अपनाएं, तो साइबर ठगी के अधिकांश मामलों से बचा जा सकता है।

WhatsApp Cyber Fraud Alert: फर्जी जॉब, OTP और KYC Scam से कैसे बचें? जानिए बैंक अकाउंट सुरक्षित रखने के जरूरी टिप्स

WhatsApp Cyber Fraud Alert: WhatsApp पर ये 5 गलतियां खाली कर सकती हैं आपका बैंक अकाउंट, जानिए बचाव के आसान तरीके. भारत में करोड़ों लोग रोजाना WhatsApp का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अब यही ऐप साइबर ठगों का बड़ा हथियार बनता जा रहा है। फर्जी नौकरी, इनाम, KYC अपडेट और रिश्तेदार बनकर पैसे मांगने जैसे नए-नए तरीकों से लोगों के बैंक खाते खाली किए जा रहे हैं। कुछ आसान सावधानियां अपनाकर आप ऐसे साइबर फ्रॉड से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।

मुख्य बातें (Highlights)
● अनजान नंबरों से आने वाले ऑफर और संदेशों से रहें सतर्क।
● किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी जांच जरूर करें।
● OTP, बैंकिंग जानकारी या मोबाइल स्क्रीन किसी के साथ साझा न करें।
● परिवार के नाम पर पैसे मांगने वाले संदेशों की पहले पुष्टि करें।
● WhatsApp की सुरक्षा सेटिंग्स और टू-स्टेप वेरिफिकेशन जरूर चालू रखें।

WhatsApp Cyber Fraud Alert: WhatsApp पर बढ़ रहे हैं साइबर फ्रॉड के मामले

WhatsApp आज मैसेजिंग, वीडियो कॉल और दस्तावेज़ साझा करने का सबसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म बन चुका है। इसके बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधियों ने भी लोगों को ठगने के नए तरीके खोज लिए हैं। आजकल फर्जी नौकरी, लॉटरी, निवेश योजना, बैंक KYC अपडेट और कैशबैक जैसे झूठे ऑफर देकर लोगों से बैंकिंग जानकारी और पैसे ठगे जा रहे हैं।

अनजान नंबरों से आए संदेशों पर भरोसा न करें

अगर किसी अज्ञात नंबर से अचानक नौकरी, इनाम, निवेश या किसी आकर्षक ऑफर का संदेश मिले, तो बिना जांच किए उस पर भरोसा न करें। vसाइबर ठग पहले सामान्य बातचीत करके विश्वास जीतने की कोशिश करते हैं और बाद में पैसे या निजी जानकारी मांगते हैं। ऐसे नंबरों को तुरंत ब्लॉक और रिपोर्ट करना बेहतर विकल्प है।

किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले जांच करें

WhatsApp पर भेजे जाने वाले कई फर्जी लिंक देखने में बैंक, सरकारी वेबसाइट, कूरियर कंपनी या अन्य प्रसिद्ध प्लेटफॉर्म जैसे लगते हैं। यदि कोई लिंक KYC अपडेट, लॉगिन या बैंक संबंधी जानकारी भरने के लिए कहे, तो पहले उसकी सत्यता की पुष्टि करें। गलत लिंक पर क्लिक करने से आपकी निजी जानकारी चोरी हो सकती है और बैंक अकाउंट भी खतरे में पड़ सकता है।

OTP और स्क्रीन शेयर करना पड़ सकता है भारी

किसी भी परिस्थिति में अपना OTP, CVV, UPI PIN, बैंक पासवर्ड या मोबाइल स्क्रीन किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।

बैंक, सरकारी विभाग या कोई भी विश्वसनीय संस्था WhatsApp के जरिए OTP नहीं मांगती। स्क्रीन शेयर करने पर साइबर ठग आपके मोबाइल में मौजूद बैंकिंग ऐप और अन्य संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बना सकते हैं।

रिश्तेदार बनकर पैसे मांगने वाले मैसेज से रहें सावधान

साइबर अपराधी अब परिवार के सदस्य बनकर भी लोगों को निशाना बना रहे हैं। वे नया नंबर लेकर खुद को बेटा, बेटी, भाई या रिश्तेदार बताते हैं और किसी आपात स्थिति का हवाला देकर तुरंत पैसे मांगते हैं।

ऐसे मामलों में पैसे भेजने से पहले उस व्यक्ति के पुराने और सत्यापित नंबर पर कॉल करके जानकारी की पुष्टि अवश्य करें।

WhatsApp Cyber Fraud Alert के लिए सुरक्षा सेटिंग्स जरूर करें अपडेट

अपने WhatsApp अकाउंट को सुरक्षित रखने के लिए इन सुरक्षा फीचर्स का उपयोग करें—

  • प्रोफाइल फोटो, स्टेटस और लास्ट सीन केवल Contacts तक सीमित रखें।
  • Two-Step Verification चालू करें।
  • Silence Unknown Callers फीचर सक्रिय रखें।
  • समय-समय पर ऐप को अपडेट करते रहें।
  • किसी भी डिवाइस पर WhatsApp Web लॉगिन की नियमित जांच करें।

संदिग्ध संदेशों की तुरंत करें रिपोर्ट

यदि कोई संदिग्ध संदेश, लिंक या कॉल प्राप्त होती है, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय WhatsApp पर Report and Block विकल्प का उपयोग करें। इससे ऐसे फर्जी अकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई में मदद मिलती है और अन्य उपयोगकर्ताओं को भी साइबर धोखाधड़ी से बचाया जा सकता है।

साइबर फ्रॉड से बचने के लिए रखें ये बातें याद

किसी भी ऑफर पर तुरंत भरोसा न करें।
जल्दबाजी में पैसे ट्रांसफर न करें।
बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
केवल आधिकारिक वेबसाइट और ऐप का ही उपयोग करें।
किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करें।

डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर धोखाधड़ी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। साइबर अपराधी सोशल इंजीनियरिंग, फिशिंग और फर्जी पहचान के जरिए लोगों को निशाना बनाते हैं। ऐसे में डिजिटल जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

यदि लोग इन सावधानियों का पालन करते हैं, तो WhatsApp के माध्यम से होने वाले अधिकांश साइबर फ्रॉड से बचा जा सकता है। थोड़ी सतर्कता न केवल आपकी व्यक्तिगत जानकारी बल्कि आपके बैंक खाते और डिजिटल पहचान को भी सुरक्षित रख सकती है।

WhatsApp आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा है, लेकिन इसका सुरक्षित उपयोग भी उतना ही जरूरी है। किसी भी अनजान मैसेज, लिंक या ऑफर पर बिना जांच भरोसा न करें और अपनी बैंकिंग जानकारी हमेशा गोपनीय रखें। यही सतर्कता आपको बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है।

Seoni News: बारिश में तिरपाल के नीचे हुआ अंतिम संस्कार, केवलारी के इस गांव ने खोली विकास के दावों की पोल

मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के केवलारी विकासखंड से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने ग्रामीण विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम पंचायत चौरापाठा में श्मशान घाट पर टीन शेड नहीं होने के कारण मूसलाधार बारिश के बीच परिजनों को तिरपाल तानकर अंतिम संस्कार करना पड़ा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

मुख्य बातें (Highlights)

  • ● मामला केवलारी जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत चौरापाठा का
  • ● श्मशान घाट पर टीन शेड नहीं होने से बारिश में हुई परेशानी
  • ● परिजनों ने तिरपाल के नीचे किया अंतिम संस्कार
  • ● घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
  • ● ग्रामीणों ने मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाई

बारिश ने उजागर की श्मशान घाट की बदहाल व्यवस्था

केवलारी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत चौरापाठा में एक अंतिम संस्कार के दौरान श्मशान घाट की अव्यवस्था सामने आई। लगातार हो रही बारिश के बीच श्मशान स्थल पर टीन शेड नहीं होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों को तिरपाल लगाकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी।

इस दौरान मौजूद लोगों ने घटना का वीडियो भी बनाया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

ग्रामीणों ने लगाए उपेक्षा के आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान घाट पर टीन शेड और अन्य आवश्यक सुविधाओं की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

उनका आरोप है कि कई बार मांग रखने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिले। पहली ही तेज बारिश में व्यवस्थाओं की कमी साफ दिखाई दे गई।

वायरल वीडियो के बाद उठे सवाल

घटना का वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीण क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि अंतिम संस्कार जैसी मूलभूत सुविधा भी यदि सम्मानजनक तरीके से उपलब्ध नहीं हो पा रही है, तो ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

हालांकि, इस मामले में संबंधित पंचायत या प्रशासन की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि श्मशान घाट पर जल्द से जल्द टीन शेड, बैठने की व्यवस्था और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को अंतिम संस्कार के दौरान ऐसी कठिन परिस्थिति का सामना न करना पड़े।

ग्रामीण क्षेत्रों में श्मशान घाटों के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत टीन शेड, पहुंच मार्ग, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है। हालांकि कई गांवों में अब भी ऐसी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है, जिससे बारिश या अन्य मौसम की परिस्थितियों में लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।

यदि वायरल वीडियो के बाद प्रशासन संज्ञान लेता है, तो ग्राम पंचायत चौरापाठा के श्मशान घाट पर आवश्यक सुविधाओं के विकास का रास्ता खुल सकता है। साथ ही अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के श्मशान घाटों की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा होने की संभावना है।

चौरापाठा की यह घटना केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को भी सामने लाती है। अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील व्यवस्था के लिए सम्मानजनक और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना स्थानीय प्रशासन और पंचायतों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

MP सरकार का बड़ा तोहफा: दिव्यांग विद्यार्थियों को मिलेंगे लैपटॉप और मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, 31 अगस्त तक करें आवेदन

भोपाल: मध्यप्रदेश सरकार ने दिव्यांग विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। योजना के अंतर्गत पात्र छात्र-छात्राओं को लैपटॉप और मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जाएगी। आवेदन की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है।

मुख्य बातें (Highlights)
● 31 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन किए जा सकते हैं।
● पात्र दिव्यांग विद्यार्थियों को मिलेगा लैपटॉप या मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल।
● आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी।
● 15 सितंबर तक आवेदनों का परीक्षण और स्वीकृति।
● 3 दिसंबर, विश्व दिव्यांग दिवस पर होगा वितरण।
● योजना का उद्देश्य दिव्यांग विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है।

मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना के लिए आवेदन शुरू

सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। पात्र विद्यार्थी 31 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

योजना का उद्देश्य दिव्यांग विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी संसाधनों से जोड़ते हुए उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में सहयोग देना है।

पात्र विद्यार्थियों को क्या मिलेगा?

योजना के तहत पात्र एवं चयनित विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकता और पात्रता के अनुसार— लैपटॉप, मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल प्रदान की जाएगी, ताकि वे शिक्षा और दैनिक आवागमन दोनों में सुविधा प्राप्त कर सकें।

मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने क्या कहा?

सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार दिव्यांगजनों को शिक्षा, तकनीक और गतिशीलता से जोड़ने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि यह योजना दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ बनाएगी। साथ ही पात्र विद्यार्थियों से समय-सीमा के भीतर आवेदन करने और जिला अधिकारियों से योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन

सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के आयुक्त कृष्ण गोपाल तिवारी ने बताया कि योजना का पूरा संचालन ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। इससे आवेदन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध होगी।

उन्होंने संयुक्त एवं उप संचालकों को निर्देश दिए हैं कि सभी पात्र विद्यार्थियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर योजना का लाभ सुनिश्चित कराया जाए।

आवेदन से वितरण तक का पूरा शेड्यूल

आवेदन से वितरण तक का पूरा शेड्यूल

प्रक्रियातिथि
ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि31 अगस्त 2026
आवेदन परीक्षण एवं स्वीकृति15 सितंबर 2026 तक
लैपटॉप/मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल की खरीद प्रक्रिया15 अक्टूबर 2026 तक
वितरण3 दिसंबर 2026 (विश्व दिव्यांग दिवस)
वितरण की रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड5 दिसंबर 2026 तक

कैसे करें आवेदन?

योजना के पात्र छात्र-छात्राएं स्वयं ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्राप्त होने के बाद जिला कार्यालय पात्रता की जांच करेंगे और नियमों के अनुसार स्वीकृति प्रदान करेंगे।

विभाग ने विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से अपील की है कि अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन पूरा करें।

मध्यप्रदेश सरकार समय-समय पर दिव्यांगजनों के लिए शिक्षा, कौशल विकास और सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाएं संचालित करती है। मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना का उद्देश्य तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाकर दिव्यांग विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में बेहतर अवसर प्रदान करना है।

यह योजना आर्थिक रूप से जरूरतमंद दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। लैपटॉप से पढ़ाई में तकनीकी सहायता मिलेगी, जबकि मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल से उनकी आवाजाही आसान होगी, जिससे शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना दिव्यांग विद्यार्थियों को शिक्षा और तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। पात्र छात्र-छात्राओं को 31 अगस्त 2026 से पहले ऑनलाइन आवेदन कर इस योजना का लाभ अवश्य लेना चाहिए।

MP Pulse Polio Campaign: 3 दिन में 1.06 करोड़ से ज्यादा बच्चों को पिलाई गई पोलियो की खुराक, अभियान रहा सफल

भोपाल: मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान ने एक बार फिर बच्चों को पोलियो से सुरक्षित रखने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 28 से 30 जून तक चले राज्यव्यापी अभियान के दौरान 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के 1 करोड़ 6 लाख 51 हजार 737 बच्चों को पोलियो वैक्सीन की खुराक पिलाई गई।

मुख्य बातें (Highlights)
● 28 से 30 जून तक चला राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान
● प्रदेशभर में 1,06,51,737 बच्चों को पिलाई गई पोलियो की खुराक
● बूथों के साथ घर-घर जाकर भी बच्चों को दी गई वैक्सीन
● छूटे हुए बच्चों की पहचान कर उन्हें भी कराया गया टीकाकरण
● उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने अभियान की सफलता पर जताई खुशी

मध्यप्रदेश में सफल रहा राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान

मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का सफल संचालन 28 से 30 जून तक किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अभियान के दौरान 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के कुल 1 करोड़ 6 लाख 51 हजार 737 बच्चों को पोलियो वैक्सीन की खुराक पिलाई गई।

अभियान के सफल संचालन में प्रदेश के सभी जिलों ने बेहतर समन्वय, प्रभावी सूक्ष्म योजना, मजबूत मॉनिटरिंग और व्यापक जनजागरूकता के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बूथ से लेकर घर-घर तक पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीमें

स्वास्थ्य विभाग ने प्रत्येक पात्र बच्चे तक पोलियो की खुराक पहुंचाने के लिए व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं कीं। पोलियो बूथों के संचालन के साथ-साथ स्वास्थ्य कर्मियों ने घर-घर जाकर भी बच्चों को वैक्सीन पिलाई।

इसके अलावा अभियान के दौरान जिन बच्चों को किसी कारणवश पहले खुराक नहीं मिल सकी थी, उन्हें चिन्हित कर विशेष प्रयासों के माध्यम से टीकाकरण कराया गया।

दुर्गम क्षेत्रों में भी पहुंची स्वास्थ्य सेवाएं

अभियान के दौरान दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक विशेष टीमें भेजी गईं ताकि कोई भी पात्र बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे। इस उद्देश्य से स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने समन्वित रूप से कार्य किया।

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने जताई संतुष्टि

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान की सफलता पोलियो उन्मूलन के प्रति प्रदेश की प्रतिबद्धता, स्वास्थ्य कर्मियों की मेहनत और आम जनता के सहयोग का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भविष्य में भी बच्चों को पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास करती रहेगी।

जनप्रतिनिधियों और समुदाय की रही सक्रिय भागीदारी

अभियान की शुरुआत विभिन्न स्थानों पर जनप्रतिनिधियों द्वारा पोलियो बूथों का उद्घाटन कर की गई। अभियान के सफल संचालन में स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी रही।

राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का उद्देश्य जन्म से 5 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को पोलियो की खुराक उपलब्ध कराकर इस गंभीर बीमारी से बचाव सुनिश्चित करना है। भारत को वर्ष 2014 में पोलियो मुक्त घोषित किया गया था, लेकिन इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए समय-समय पर ऐसे अभियान चलाए जाते हैं, ताकि किसी भी संभावित संक्रमण को रोका जा सके।

इस खबर का असर

प्रदेशभर में बड़े पैमाने पर चलाया गया यह अभियान बच्चों के स्वास्थ्य सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। व्यापक टीकाकरण से पोलियो मुक्त भारत की उपलब्धि को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का सफल संचालन स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय प्रशासन और नागरिकों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। प्रत्येक पात्र बच्चे तक वैक्सीन पहुंचाने की यह पहल भविष्य में भी बच्चों को पोलियो से सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाएगी।