Home Blog Page 460

सिवनी: सबकी योजना सबका विकास अंतर्गत 3 दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न

धारनाकला (एस.शुक्ला.): मध्य प्रदेश शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तहत बरघाट जनपद मै ग्राम पंचायतो के सभा हाल मे सबकी योजना सबका विकास अंतर्गत. ग्राम पंचायत विकास योजना GPDP जनपद पंचायत विकास योजना BPDP जिला पंचायत विकास योजना DPDP एवं सतत विकास लक्ष्यो का स्थानीयकरण LSDDP 2022 के तहत तीन दिनो तक ग्राम पंचायत धारनाकला मे प्रशिक्षण सम्पन्न हुआ.

इस प्रशिक्षण मे सचिव ग्राम रोजगार सहायक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आशा कार्यकर्ता स्वच्छता हितग्राही एवं सक्रीय स्व. सहायता समूह के अध्यक्ष एवं सचिव तथा कोषाध्यक्ष ग्राम पंचायत स्तर के अधिकारी व कर्म चारियो ने सम्मलित होते हुए प्रशिक्षण प्राप्त किया है.

इन विषयो पर हुआ प्रशिक्षण
उल्लेखनीय है की सतत विकास के लक्ष्यो के स्थानीय करण हेतू 9 विषय चिन्हित किये गये थे जिनमे गरीबी मुक्त और आजीविका उन्नत गांव स्वस्थ्य गांव जल की प्रचुरता वाला गाव स्वच्छ और हरित पंचायत आत्म निर्भर बुनियादी ढांचे वाला गांव सामाजिक रूप से सुरक्षित गांव सुशासन तथा महिला हिलेरी पंचायत विषयो पर तीन दिनो तक प्रशिक्षण सम्पन्न हुआ है.

जिसमे महिलाओं ने बढ चढकर इस प्रशिक्षण मे हिस्सा लेते हुए प्रशिक्षण प्राप्त किया है. उपरोक्त प्रशिक्षण को सफल तरीके से सम्पन्न कराने मैं जनपद पंचायत बरघाट के द्वारा सफलता के साथ संचालन करते हुए प्रशिक्षण को सम्पन्न किया है.

प्रशिक्षण मे लगातार तीन दिनो तक सेवकराम मेश्राम पंचायत समन्वयक अधिकारी बरघाट एवं धनीराम ठाकुर मास्टर रिसोर्स पर्सन के द्वारा विस्तृत रूप नौ बिन्दुओ पर प्रशिक्षण दिया गया.

प्रशिक्षण मे उपस्थिति महिलाओ को प्रति दिन चाय नाश्ता के साथ भोजन की व्यवस्था भी मुहैया कराई गई थी प्रशिक्षण मे आसपास के गांवो से भी सैकड़ो महिलाएं यहा प्रशिक्षण लेने के लिये उपस्थित हुई है तथा सफलता पूर्वक तीन दिनो तक प्रशिक्षण प्राप्त किया है.

यहा यह बताना भी लाजिमी है की बरघाट जनपद की दस पंचायतो मै यह प्रशिक्षण सम्पन्न हुआ है जिसमे बरघाट जनपद की 90 ग्राम पंचायत को जोडकर यह प्रशिक्षण सम्पन्न हुआ है और इस योजना का मुख्य आधार सबका साथ सबका विकाश के साथ कार्य करने पर था जो सफलता के साथ बरघाट जनपद मै सम्पन्न हुआ है

भारत और पाकिस्तान बॉर्डर पर तार की फँसिंग पर क्यों लटकी हैं बीयर की बोतलें? भारतीय सेना ने लगाय गजब का दिमाग; पढ़कर आप भी हैरान रह जाएंगे

India-Pakistan Border: सीमा सुरक्षा बल के जवान देश की सुरक्षा के लिए दिन-रात भारत की सीमा पर गश्त कर रहे हैं. जाड़े के दिनों में जब कोहरे की चादर फैलती है तो आसपास का इलाका अदृश्य हो जाता है. लेकिन अगर यही सीमा सुरक्षा क्षेत्र में है तो हम सोच भी नहीं सकते कि स्थिति कितनी गंभीर है.

इसी वजह से भारत-पाकिस्तान सीमा पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है. पाकिस्तानी सेना द्वारा घुसपैठ या किसी भी तरह की मुठभेड़ को रोकने के लिए सीमा पर हाई अलर्ट जारी किया जाता है.

लेकिन अब बॉर्डर पर देसी जुगाड़ खेला जा रहा है. बॉर्डर पर तारों की बाड़ से खाली कांच की बीयर की बोतलें क्यों जुड़ी हुई हैं, इसकी वजह पढ़कर आप भी हैरान रह जाएंगे।

बॉर्डर पर लगी हैं खाली बीयर की बोतलें, पढ़िए इसके पीछे की वजह

बीएसएफ ने खाली कांच की बोतलें राजस्थान से जम्मू तक कुछ दूरी पर तार की बाड़ पर लटका दी हैं। अगर कोई इन तारों को छूने की कोशिश करता है तो तारों से जुड़ी बोतलें आपस में टकराएंगी और अलार्म बजेगा।.

इससे जवानों को दुश्मन की घुसपैठ की जानकारी मिलती है और सीमा पर जवान अलर्ट हो जाते हैं। इस तरह से बोतलों के इस्तेमाल से दुश्मन धुंधले माहौल में भी देश में घुसपैठ की कोशिश नहीं करेंगे।

भारत-पाकिस्तान सीमा पर कितनी दूरी है?

रिपोर्ट के मुताबिक भारत-पाकिस्तान सीमा की कुल लंबाई 3323 किमी है। यदि इन सीमाओं को राज्यों द्वारा विभाजित किया जाए तो जम्मू-कश्मीर पाकिस्तान सीमा की लंबाई 1225 किमी है। राजस्थान-पाकिस्तान सीमा 1037 किमी लंबी है, पंजाब-पाकिस्तान सीमा 553 किमी लंबी है और गुजरात-पाकिस्तान सीमा 508 किमी लंबी है.

देश के जवान इन सभी सीमाओं पर चौकन्ने होकर देश की रक्षा कर रहे हैं। यह भी ज्ञात है कि श्रीगंगानार सीमा पाकिस्तानी दुश्मनों के निशाने पर है। इस सीमा के पास तार की बाड़ के पास किसान खेती करते हैं.

दुश्मन इस इलाके में घुसपैठ की कोशिश करते हैं। इसलिए बीएसएफ के जवान हमेशा सतर्क रहते हैं और सीमा पर आवाजाही पर नजर रखते हैं।

एमपी के किसानों के लिए खबर: समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए किसान पंजीयन 6 फरवरी से होगा शुरू

भोपाल: मध्यप्रदेश के किसानों (MP KISAN) के लिए मध्यप्रदेश सरकार (MP Government) समर्थन मूल्य में गेहूं उपार्जन (Gehu Uparjan 2023) के लिए किसानों का पंजीयन (Kisan Panjiyan) आगामी 06 फरवरी से प्रारंभ होकर 28 फरवरी 2023 तक चलेगा.

किसानों की सुविधा के लिए ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, तहसील कार्यालय स्तर पर स्थित सुविधा केन्द्रों में एवं सहकारी समिति एवं वितरण संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्रों पर सुविधा उपलब्ध होगी.

इसके साथ ही एमपी किसान एप के माध्यम से नि:शुल्क तथा एमपी ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेंटर, लोक सेवा केन्द्र के साथ ही निजि व्यक्ति द्वारा संचालित सायबर कैफे पर सशुल्क पंजीयन की सुविधा रहेगी.

किसान को पंजीयन के लिए भूमि से संबंधित दस्तावेज, बैंक खाता नं. एवं आईएफएससी कोड की जानकारी, आधार एवं अन्य फोटो पहचान पत्र प्रस्तुत करना होगा.

बटाईदार, कोटवार, वन पट्टाधारी, सिकमी किसानों का पंजीयन केवल सहकारी समिति एवं वितरण सहकारी संस्था स्तर पर स्थापित पंजीयन केन्द्र में ही किया जाएगा।

MPPSC 2020 के RESULT में बड़ा अपडेट, रिजल्ट का फार्मूला हुआ फाइनल, रिवाइज होगा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम

Madhya Pradesh Public Service Commission: एमपीपीएससी द्वारा वर्ष 2020 में हुई राज्य सेवा परीक्षा के जारी किये जाने वाले रिजल्ट (MPPSC 2020 Result Update) का फार्मूला तय किया गया है.

अनेको मीटिंग के बाद आखिर में इस परीक्षा देने वाले अभियार्थोयों के लिए खुशखबरी सामने आई है. वर्षों से रिजल्ट का इन्तजार करने वाले छात्र छात्राओं के लिए अब इन्तजार की घडी पूरी तरह कहातम हुई.

कई मीटिंग के बाद नतीजा यही निकला है कि वर्ष 2019 में जिस फार्मूले से रिजल्ट घोषित किया गया था अब वर्ष 2020 का रिजल्ट भी उसी फार्मूले को कॉपी कर घोषित किया जाएगा. इसके बाद फिर हाईकोर्ट में जो भी होगा, देखा जाएगा.

MPPSC 2020 प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट होगा रिवाइज

प्राप्त जानकारी के अनुसार मीटिंग में यही तय हुआ है कि 87-13 फार्मूले के आधार पर राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2020 (MPPSC 2020 Result Update) का रिजल्ट रिवाइज किया जाएगा. इस आधार पर जो भी परीक्षार्थी क्वालीफाई होंगे उनके लिए फिर परीक्षा का आयोजन किया जाएगा लेकिन इसके पहले एमपीपीएससी 2020 की मुख्य परीक्षा का रिजल्ट घोषित कर दिया जाएगा, ताकि शांति बनी रहे। 

MPPSC- संवैधानिक निकाय है या सरकारी विभाग

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग भारत के संविधान द्वारा स्थापित एक संवैधानिक निकाय है परंतु इसकी गतिविधियां एक सरकारी विभाग की तरह नजर आती हैं.

27% ओबीसी आरक्षण के पॉलिटिकल एजेंडे को सेट करने के चक्कर में, एमपीपीएससी इंदौर का पूरा सिस्टम ही गड़बड़ा गया है। एमपीपीएससी तो केवल टाइम टेबल जारी करता है.

ज्यादातर फैसले हाई कोर्ट में ही होते हैं। कोर्ट कचहरी के चक्कर में करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैं, सो अलग। जिन परीक्षाओं के माध्यम से मध्य प्रदेश शासन के राजपत्रित अधिकारियों की भर्ती होती है उसके कैंडिडेट्स को रिजल्ट जारी करवाने के लिए आंदोलन करने पड़ रहे हैं। 

MP के BHIND से होगा विकास यात्रा का शुभारंभ, सीएम शिवराज की बड़ी तैयारी

भोपाल: मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chouhan) ने कहा है कि मुख्यमंत्री जन-सेवा अभियान (CM Jan Seva Abhiyan) मध्यप्रदेश में सुशासन के विस्तार की दिशा में एक प्रभावी कदम है. विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों से पात्र हितग्राहियों को जोड़ने से जरूरतमंद लोगों का जीवन बेहतर होगा. शासन की कल्याणकारी मंशा का विस्तार भी होगा।

संत रविदास जयंती पर हितग्राहियों को मिलेगा बड़ा फायदा

संत रविदास जयंती- 5 फरवरी को भिंड में होने वाले कार्यक्रम में चंबल संभाग के हितग्राहियों को स्वीकृति-पत्र और हितलाभ वितरण किया जाएगा, साथ ही विकास यात्रा का भी शुभारंभ होगा. कार्यक्रम में भिंड, मुरैना और श्योपुर के जन-प्रतिनिधि और अधिक से अधिक व्यक्तियों को जोड़ा जाए। ऐसे कार्यक्रम प्रत्यक्ष संवाद का माध्यम भी बनते हैं।

मुख्यमंत्री चौहान मुख्यमंत्री जन-सेवा अभियान में संभाग स्तरीय स्वीकृति-पत्र एवं हितलाभ वितरण तथा विकास यात्रा के शुभारंभ के लिए 5 फरवरी संत रविदास जयंती पर भिंड में होने वाले कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे.

मुख्यमंत्री निवास परिसर स्थित समत्व भवन से मुख्यमंत्री श्री चौहान ने भिंड में जारी तैयारियों की वर्चुअली जानकारी प्राप्त की। सहकारिता मंत्री श्री अरविंद सिंह भदौरिया तथा नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्री ओ.पी.एस. भदौरिया बैठक में वर्चुअली शामिल हुए।

जानकारी दी गई कि कार्यक्रम भिंड के एम.जे.एस. ग्राउंड पर दोपहर 12.40 बजे कन्या-पूजन, दीप प्रज्ज्वलन और संत रविदास के चित्र पर माल्यार्पण के साथ आरंभ होगा.

मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा 150 करोड़ 98 लाख रूपये की लागत से बने 42 निर्माण कार्यों का लोकार्पण तथा 242 करोड़ 65 लाख रूपये की लागत से शुरू होने वाले 79 कार्यों का भूमि-पूजन किया जाएगा.

मुख्यमंत्री श्री चौहान आयुष्मान योजना, लाड़ली लक्ष्मी योजना के हितग्राहियों सहित अन्य योजनाओं के हितग्राहियों से संवाद भी करेंगे। कार्यक्रम स्थल पर विकास और जन-कल्याण पर केन्द्रित प्रदर्शनी लगाई जायेगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान विकास यात्रा के 5 रथों को हरी झण्डी दिखा कर रवाना करेंगे।

मुख्यमंत्री जन-सेवा अभियान में मुरैना और श्योपुर में प्राप्त आवेदनों में से 95 प्रतिशत से अधिक तथा भिण्ड में 91 प्रतिशत से अधिक आवेदन स्वीकृत किये गये हैं.

भिंड में 661, मुरैना 628 और श्योपुर में 287 शिविर लगाये गये। इन 1571 शिविरों में प्राप्त 4 लाख 386 आवेदन में से 3 लाख 77 हजार 886 आवेदन स्वीकृत किए गए हैं। कार्यक्रम से भिण्ड, मुरैना और श्योपुर के सभी गाँव, कस्बों और नगरों को वर्चुअली जोड़ा जाएगा।

सिवनी: गौरीशंकर बिसेन के प्रयासो से हल हुई किसानो की समस्या, धान खरीदी के लिए फिर खुला पोर्टल

सिवनी: धारना कला (एस.शुक्ला): मध्य प्रदेश पिछड़ा वर्ग के अध्यक्ष केबिनेट दर्जा प्राप्त एवं सभापति सार्वजनिक उपक्रम की समिति तथा विधायक गौरीशंकर बिसेन के प्रयासो से व अथक मेहनत के चलते जिले व क्षेत्र के ऐसे किसान जिनकी धान खरीदी केन्द्र मे पोर्टल समस्या के कारण आनलाइन खरीदी मे नही तुल पाई थी ऐसे किसानो के लिये मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा सीमित अवधि के लिये पोर्टल खोल दिया गया है.

गौरीशंकर बिसेन से मिले थे सैकड़ो किसान

उल्लेखनीय है की धारनाकला मे कार्यक्रम के दौरान छेत्र के सैकड़ो किसान जिनकी धान खरीदी केन्द्र मे पोर्टल समस्या के कारण समर्थन मूल्य पर नही बिक पाई थी उन किसानो ने गौरीशंकर बिसेन से मुलाकात करते हुए अपनी समस्याओ से अवगत कराते हुए निवेदन किया था.

पोर्टल समस्या के कारण उनकी धान अब तक धान खरीदी केन्द्र मे रखी हुई है और आन लाइन धान खरीदी रिकार्ड मे नही चढ पाई है जिससे ऐसी स्थिति निर्मित हो गई है.

उन्हे धान खरीदी केन्द्र से वापस ले जाना पडेगा और खुले बाजार मे औने-पौने दाम पर बेचना पडेगा अन्न दाता किसानो की समस्या को गम्भीर ता से लेते हुए पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन ने तत्काल मौके पर ही जिला कलेक्टर से बात करते हुए छेत्र के किसानो को आश्वासन दिया की किसानो को समर्थन मूल्य पर धान बिक्री के लिये पोर्टल जरूर खोला जायेगा.

सीएम से की मुलाकात

किसानो की समस्या को गम्भीरतापूर्वक ध्यान मे रखते हुए गौरीशंकर बिसेन के द्वारा तत्काल ही प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात करते हुए किसानो की समस्याओ से अवगत कराया गया उसी का परिणाम है की आज सरकार के द्वारा सीमित अवधि के पोर्टल खोला गया है.

जिससे अब किसान अपनी धान समर्थन मूल्य पर बेच पायेगे चूकि शासन के निर्देश के आधार पर 16 जनवरी को ही धान खरीदी समाप्त हो चुकी है और लगभग सभी धान खरीदी केन्द्रो से धान का परिवहन हो चुका है केन्द्रो मे वही धान रखी हुई है जिन किसान की धान पोर्टल की समस्या के कारण समर्थन मूल्य पर नही बिक पाई है

जिले के 813 किसान होगे लाभान्वित

उल्लेखनीय है की जिले के लगभग 813 किसानो की धान समर्थन मूल्य पर धान खरीदी केन्द्र मे नही बिक पाई थी जिनसे पोर्टल खुलने के पश्चात लगभग 51हजार 307 क्विंटल धान की खरीदी खरीफ विपणन वर्ष 2022 >23 मे समर्थन मूल्य पर खरीदी हेतू पोर्टल खोला गया है.

यहा यह बताना भी लाजिमी है की विपणन वर्ष 2022_23 मे समर्थन मूल्य पर धान विक्रय हेतू पोर्टल खोलने मे विसंगती एवं अन्य तकनीकी कारण से धान का तौल नही हो पाया था ऐसे सभी किसानो का भौतिक सत्यापन कर जिला कलेक्टर द्वारा संचालक खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग को किसानो की संख्या वार केन्द्रवार जानकारी भेजी गई थी और उसी आधार पर सरकार द्वारा किसानो के हित पोर्टल खोल दिया गया है जिस सम्बन्ध मै आदेश की कापी भी सम्बन्धितो को भेज दी गई है.

किसानो मे हर्ष
सरकार के द्वारा 6फरवरी तक पोर्टल के खोले जाने से किसानो में उत्साहपूर्ण वातावरण देखने को मिल रहा है तथा किसानो ने पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन के किसानो के हित को ध्यान मे रख काम करने पर अपने नेता की भूरी भूरी प्रसंसा की है तथा आभार भी व्यक्त किया है जिनके अथक प्रयासो से हजारो क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर विक्रय हो पायेगी

धारनाकला सरपंच एवं धान खरीदी प्रभारी केन्द्र कल्याण पुर की धान खरीदी प्रभारी रंजीता बोपचे के द्वारा भी गौरीशंकर बिसेन के प्रयासो से पोर्टल खुलने पर आभार व्यक्त करते हुए शुभकामना प्रेषित की है तथा किसानो को भी जिनकी धान समर्थन मूल्य पर बिक्री नही हो पाई है उनसे आग्रह किया है की वे समय पर शासन के दिशा निर्देश पर अपनी धान पोर्टल पर दर्ज कराने हेतू सारे दस्तावेज़ के साथ तैयार रहे

एमपी के जबलपुर में होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में नहीं मिलेगी तंदूरी रोटी; जिला प्रशासन ने लगाया प्रतिबंध

जबलपुर: जिला प्रशासन एवं खाद्य सुरक्षा विभाग ने मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में प्रदूषण का हवाला देते हुए होटल, रेस्टोरेंट एवं ढाबा में जलने वाले तंदूर बंद करने का आदेश जारी कर दिया है.

जिससे अब आपको जबलपुर के होटल, रेस्टोरेंट एवं ढाबों में तंदूरी रोटी खाने के लिए नहीं मिल पाएगी. जबलपुर जिला प्रशासन ने होटल संचालकों को ढाबे, होटल से तंदूर हटाने के लिए तीन दिन का समय दिया है.

खाद्य सुरक्षा अधिकारी पंकज श्रीवास्तव ने गुरुवार को बताया कि विभाग ने शहर के 50 से अधिक होटलों, रेस्टारेंट और ढाबा मालिकों को नोटिस जारी कर लकड़ी और कोयला आधारित तंदूर का उपयोग बंद कर उन्हें इलेक्ट्रिक या एलपीजी का इस्तेमाल किए जाने के निर्देश दिए हैं।

जिसके बाद कई होटल संचालकों का कहना है कि कोयला और इलेक्ट्रिक यदि तंदूर के लिए उपयोग करेंगे तो वो काफी महंगा पड़ेगा जिसकी वजह से रोटी की कीमत काफी बढ़ जाएगी उससे अच्छा तो हम तंदूरी रोटी हीओ बनाना बंद कर दें.

हालाँकि यह फैसला जिला प्रशासन ने लगातार बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए होटल और रेस्टोरेंट में चलने वाले तंदूर की भट्टियां हैं जिसमें शहर के 50 होटलों को नोटिस जारी कर तंदूर का कम से कम उपयोग करने और उसके बदले एलपीजी आधारित गैस का प्रयोग किए जाने के निर्देश दिए हैं।

जिला प्रशासन की माने तो तंदूर में इस्तेमाल होने वाले कोयला और लकड़ी के धुएं से प्रदूषण तो फैलता ही है। साथ ही, तंदूर की रोटियों मे कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा भी ज्यादा होती है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है।

लिहाजा, तंदूर के बजाय अब इलेक्ट्रिक या एलपीजी आधारित गैस का उपयोग किया जाना जरूरी है। खाद्य सुरक्षा विभाग के मुताबिक नियमों का पालन न करने वाले होटल और रेस्टोरेंट मालिकों पर 5 लाख तक का जुर्माना हो सकता है।

वहीं जिला प्रशासन के आदेश के बाद से स्वाद के शौकीनों के लिए तंदूर की रोटी का स्वाद अब जल्द ही गुजरे जमाने की बात होने वाली है साथ ही होटल, ढाबा और रेस्टारेंट संचालकों के होश उड़ गए हैं।

MP WEATHER: मप्र के उमरिया, जबलपुर, बालाघाट, सागर, भोपाल, राजगढ़ और रतलाम में चलेगी शीतलहर; उज्जैन-रतलाम रहेंगे सबसे ठंडे

MP Weather Update: मध्यप्रदेश में हर एक दिन मौसम अलग अलग सा महसूस हो रहा है और अब कुछ राहत के बाद अचानक फिर तेज ठंड का दौर शुरू हो गया है. मध्यप्रदेश के ज्यादातर जिलों में तापमान में 3 से 5 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गयी है. कई जगहों पर फसल, पेड़-पौधों पर ओस की बूंदें जम गई।

वहीं, हिल स्टेशन पचमढ़ी, नौगांव और खजुराहो में सबसे ज्यादा ठंड दर्ज की गई है. ऑफिस और घरों में लोगों के कंप्यूटर मोविले का उपयोग करते समय हाथ ठंडे पड़ने लगे है. ऐसा मौसम अगले कुछ दिन तक और रहने के आसार है.

मौसम विभाग के भोपाल केंद्र ने जानकारी देते हुए बताया कि शुक्रवार को भोपाल, उमरिया, जबलपुर समेत सात जिलों में कोल्ड वेब चलने और उज्जैन-रतलाम सबसे ठंडे रहने की संभावना जताई है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पहाड़ों पर हुई बर्फबारी के बाद वहां से यहां बर्फीली हवा आ रही है। इस कारण ठंड का असर भी बढ़ गया है. 24 घंटे में उमरिया, जबलपुर, बालाघाट, सागर, भोपाल, राजगढ़ और रतलाम जिलों में शीतलहर चलेगी. उज्जैन और रतलाम में कोल्ड-डे रहने का अनुमान है। कोल्ड-डे की वजह से दिन-रात का तापमान आसपास ही रहता है।

MP WEATHER: नया सिस्टम एक्टिव, बारिश के आसार नहीं

मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ 15 डिग्री उत्तर अक्षांश के उत्तर में 65 डिग्री देशांतर के सहारे मध्य क्षोभमंडल की पछुवा पवनों के बीच एक ट्रफ के रूप में समुद्र तल से 5.8 किमी की ऊंचाई पर धुरी बनाते हुए सक्रिय है.

साथ ही, प्रेरित चक्रवातीय परिसंचरण दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान के ऊपर समुद्र तल से 1.5 किमी की ऊंचाई तक सक्रिय है। यह दो फरवरी से सक्रिय हो गया है, लेकिन मध्यप्रदेश पर इसका प्रभाव नहीं होगा।

MP: 308 साल बाद बदला भोपाल के इस्लाम नगर का नाम, अब जगदीशपुर नाम से जाना जाएगा; आदेश जारी

नई दिल्ली : मध्य प्रदेश सरकार ने भोपाल (Bhopal) स्थित इस्लाम नगर (Islam Nagar) गांव का नाम तत्काल प्रभाव से बदल दिया है. गांव अब जगदीशपुर (Jagdishpur) के नाम से जाना जाएगा. राज्य सरकार ने राजपत्रित आदेश के माध्यम से नाम परिवर्तन को अधिसूचित किया.

आदेश में कहा गया है, “भारत सरकार, गृह मंत्रालय द्वारा दी गई अनापत्ति के अनुपालन में, राज्य सरकार एतद्द्वारा इस्लाम नगर (Islam Nagar) जिला भोपाल (Bhopal) के गाँव का नाम तत्काल प्रभाव से जगदीशपुर (Jagdishpur) के रूप में परिवर्तित करती है।”

इस्लाम नगर भोपाल-बैरसिया राजमार्ग के मध्य में स्थित है। यह भोपाल से लगभग 14 किलोमीटर दूर है। ‘इस्लाम नगर’ कभी भोपाल रियासत की राजधानी थी.

नवाब दोस्त मोहम्मद खान के महलों के अवशेष, जिन्होंने भोपाल की स्थापना की थी, अभी भी यहाँ स्थित हो सकते हैं।

इस्लामनगर को कभी जगदीशपुर के नाम से जाना जाता था, जिसकी स्थापना स्थानीय राजपूत सरदारों ने की थी। 18वीं सदी में भोपाल रियासत के संस्थापक दोस्त मोहम्मद खान ने इसका नाम ‘इस्लाम नगर’ रखा था।

Ayodhya: नेपाल से दुर्लभ ‘शालिग्राम’ शिला पहुंची अयोध्या – जानिए किस वजह से Shaligram Shila रहती है खास

अयोध्या: अयोध्या में भगवान राम (Ram Mandir Ayodhya) की मूर्ति के निर्माण के लिए नेपाल (Nepal) से भेजी गई दो दुर्लभ ‘शालिग्राम’ शिलाएं (Shaligram Shila) श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra) को सौंप दी गई हैं, जो उत्तर प्रदेश के पवित्र शहर में एक भव्य मंदिर के निर्माण की देखरेख कर रहे हैं. 

दो पवित्र चट्टानें – हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के गैर-मानवरूपी प्रतिनिधित्व – नेपाल की काली गंडकी नदी से खोदी गई हैं। इन दो पवित्र शिलाओं के परिवहन की आठ दिनों की यात्रा को ‘शिला यात्रा’ कहा जाता था। 

भगवान राम की जन्मभूमि पर पवित्र पत्थरों का पुजारियों और स्थानीय लोगों द्वारा स्वागत किया गया, जिन्होंने शिलाखंडों को मालाओं से सजाया और उन्हें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपने से पहले अनुष्ठान किया। 

नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री बिमलेंद्र निधि ने दो शिलाओं की खुदाई में अहम भूमिका निभाई थी। समारोह में उन्होंने कहा, “हमें नेपाल से अयोध्या पहुंचने में आठ दिन लगे।” 

क्यों खास हैं ये दो पवित्र ‘शालिग्राम’ शिलाएं? 

6.5 करोड़ साल पहले हिमालय बनने के बाद दक्षिण की ओर बहने वाली गंडकी नदी की चट्टानों को हिंदू “बहुत पवित्र” मानते हैं. यह नदी अपने अमोनाइट जीवाश्मों के लिए प्रसिद्ध है जिसे हिंदू भगवान विष्णु के अवतार शालिग्राम के रूप में पूजते हैं। 

हिंदू पौराणिक कथाओं में, भगवान विष्णु ने राक्षस राजा हयग्रीव को हराने के लिए शालिग्राम पत्थर का रूप धारण किया था। तब से, पत्थर को भगवान विष्णु की शक्ति के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है और इसे दैवीय गुणों से युक्त माना जाता है।

चट्टानों का उपयोग राम लला या भगवान राम की एक बच्चे के रूप में आदमकद प्रतिमा बनाने के लिए किया जाएगा। मंदिर के निर्माण का निर्णय लिए जाने के बाद, इसकी निर्माण आयोजन समिति नेपाल से पवित्र चट्टानों की तलाश कर रही थी और नेपाली नेताओं से संपर्क किया, जिसके बाद उन्हें पवित्र चट्टानें मिलीं।

18 टन वजनी और 16 टन वजन वाले दो पवित्र पत्थरों को मूर्ति बनाने के लिए तकनीकी और वैज्ञानिक दोनों तरह से मंजूरी दी गई है। शिलाखंडों का उपयोग राम और जानकी की मूर्तियों के निर्माण के लिए किए जाने की उम्मीद है, जिन्हें निर्माणाधीन राम मंदिर के मुख्य मंदिर परिसर में रखा जाएगा। 

म्यागडी और मस्तंग जिलों से होकर बहने वाली काली गंडकी नदी के तट पर पाए जाने वाले शालिग्राम सीता की जन्मस्थली नेपाल के जनकपुर से भारी ट्रकों पर अयोध्या पहुंचे। नेपाल में काली गंडकी नाम का जलप्रपात है। यह दामोदर कुंड से निकलती है और गणेश्वर धाम गंडकी से लगभग 85 किमी उत्तर में है। यह स्थान समुद्र तल से 6,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। 

नेपाली नेता ने कहा कि जानकी मंदिर बाद में राम मंदिर ट्रस्ट के विनिर्देश के अनुसार अयोध्या में राम मंदिर को धनुष भेजेगा।