Home Blog Page 23

RELIPAY और FINO BANK की ID बिल्कुल भी ना लें ! BC पॉइंट बंद कराने को एजेंट दर-दर भटकने पर मजबूर, सिस्टम में दिख रही दोहरी सच्चाई

सिवनी: डिजिटल बैंकिंग और माइक्रो-ATM सेवाओं के क्षेत्र में काम कर रही कंपनियों Relipay और FINO की कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। दोनों कंपनियों की आपसी साझेदारी का खामियाजा सीधे तौर पर फील्ड में काम करने वाले BC (बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट) एजेंटों को भुगतना पड़ रहा है।

ताज़ा मामला मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के RELIPAY के एजेंट शुभम शर्मा से जुड़ा है, जिन्होंने Relipay के माध्यम से FINO का BC पॉइंट लिया था। शुरुआत में यह BC पॉइंट Relipay द्वारा विधिवत रूप से एक्टिव कराया गया, लेकिन अब जब एजेंट ने सर्वर समस्याओं और लगातार आ रही तकनीकी दिक्कतों के कारण BC पॉइंट छोड़ने का निर्णय लिया, तो मामला उलझता चला गया।

सर्वर की समस्या बनी बड़ी वजह

एजेंट का आरोप है कि FINO के सर्वर में लगातार अत्यधिक समस्याएं आ रही हैं, जिससे ग्राहकों के ट्रांजेक्शन फेल हो रहे हैं और रोज़मर्रा का काम प्रभावित हो रहा है। इन परेशानियों से तंग आकर जब BC पॉइंट बंद कराने की प्रक्रिया शुरू की गई, तो Relipay और FINO एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आए।

BC बंद या चालू? सिस्टम में विरोधाभास

Relipay की ओर से एजेंट को यह बताया गया कि FINO का BC पॉइंट डीएक्टिवेट कर दिया गया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि BC Registry की आधिकारिक वेबसाइट पर वही BC पॉइंट अब भी “Active” दिख रहा है।

लगातार ईमेल और फॉलोअप के बावजूद न तो Relipay और न ही FINO की ओर से कोई ठोस समाधान या आधिकारिक स्पष्टीकरण दिया गया। FINO की पीआर या सपोर्ट टीम की ओर से भी अब तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

एजेंट द्वारा भेजा गया आधिकारिक मेल

एजेंट शुभम शर्मा ने Relipay और FINO टीम को स्पष्ट शब्दों में ईमेल के माध्यम से लिखा कि—

यदि BC वास्तव में बंद कर दिया गया है, तो BC Registry से उसका नाम और विवरण तत्काल हटाया जाए।

और यदि BC अब भी एक्टिव है, तो उसे तुरंत डीएक्टिवेट किया जाए।

इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

मामले से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

  • Relipay ID: R001327946
  • FINO BC नंबर: 9685157979

ग्राहकों और एजेंटों के हितों से खिलवाड़?

यह पूरा मामला न केवल एजेंट की परेशानी को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे बड़ी डिजिटल फाइनेंशियल कंपनियों की आपसी तालमेल की कमी का सीधा असर छोटे एजेंटों और आम ग्राहकों पर पड़ रहा है।

अब सवाल यह है कि—

  • आखिर BC पॉइंट की वास्तविक स्थिति क्या है?
  • जिम्मेदारी किसकी है—Relipay की या FINO की?
  • और सबसे अहम, इस लापरवाही का जवाबदेह कौन होगा?

यदि समय रहते इस मामले का समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले समय में यह विवाद और भी बड़ा रूप ले सकता है।

SEONI: पत्रकार को कमरे में बंद करके ज़हर वाला इंजेक्शन दो, जिंदल हॉस्पिटल में मौत कक्ष!

सिवनी जिले में पत्रकारिता पर सीधा हमला सामने आया है। जिंदल हॉस्पिटल भैरोगंज में कवरेज करने पहुंचे एक वरिष्ठ पत्रकार के साथ हॉस्पिटल संचालक और कर्मचारियों द्वारा मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह घटना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करती है।

क्या है पूरा मामला?

पीड़ित पत्रकार, जो जानी मोहल्ला, कबीर वार्ड, थाना डूंडासिवनी के निवासी हैं और वर्तमान में “संवाददूत” समाचार पत्र के प्रधान संपादक हैं, ने पुलिस को दी गई FIR में बताया कि 28 दिसंबर 2025, सुबह करीब 10 बजे जिंदल हॉस्पिटल भैरोगंज में एक मरीज की मृत्यु हो गई थी। मृतक का शव परिजनों को सौंपे जाने को लेकर विवाद की स्थिति बन गई थी।

घटना की जानकारी मिलने पर पत्रकार कवरेज के लिए हॉस्पिटल गेट पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि मृतक के परिजन, विशेषकर एक महिला, गेट के सामने रो-रोकर अपनी पीड़ा व्यक्त कर रही थी। पत्रकार ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए पहले महिला से घटना की जानकारी लेनी चाही।

“कैमरा बंद कर लो” से शुरू हुआ विवाद

इसी दौरान जिंदल हॉस्पिटल का कर्मचारी विशाल दुबे पत्रकार के पास पहुंचा और दबाव बनाते हुए कहा – “कैमरा बंद कर लो, पहले अग्रवाल साहब से बात कर लो।” पत्रकार ने स्पष्ट कहा कि वे पहले परिजनों की बात सुनेंगे, फिर हॉस्पिटल प्रबंधन का पक्ष भी लेंगे। इसी बात पर विवाद बढ़ गया।

हॉस्पिटल संचालक पर गंभीर आरोप

FIR के अनुसार, जिंदल हॉस्पिटल के संचालक सुनील अग्रवाल मौके पर पहुंचे और पत्रकार पर शराब पीकर ब्लैकमेल करने जैसे झूठे आरोप लगाते हुए मां-बहन की अश्लील गालियां देने लगे। जब पत्रकार ने गाली देने से मना किया, तो आरोप है कि:

  • पत्रकार का गला पकड़कर दीवार से धक्का दिया गया
  • थप्पड़ों और घूंसों से मारपीट की गई
  • माइक और कैमरा स्टैंड फेंक दिया गया, जिससे उपकरण क्षतिग्रस्त हो गए
  • गले में पहनी चांदी की चैन टूट गई
  • शर्ट के बटन का काज फट गया, जिससे आर्थिक नुकसान हुआ

“जहर का इंजेक्शन दे दो” – रोंगटे खड़े करने वाला बयान

इतना ही नहीं, FIR में यह भी उल्लेख है कि मौके पर मौजूद यशवंत उपाध्याय और विशाल दुबे ने लात-घूंसों से मारपीट की और कथित रूप से कहा कि: “इसे कमरे में बंद कर दो… जहर का इंजेक्शन दे दो, वीडियो सबूत मिट जाएगा।” यह कथन पूरे मामले को अत्यंत गंभीर और आपराधिक बनाता है।

जान से मारने की धमकी

पीड़ित पत्रकार का आरोप है कि हॉस्पिटल संचालक सुनील अग्रवाल ने खुलेआम धमकी दी कि: “दोबारा मेरे हॉस्पिटल के आसपास दिखा तो तुझे जान से खत्म कर देंगे।” इस धमकी के बाद पत्रकार अपने साथियों के साथ थाने पहुंचे और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की।

पत्रकारों में आक्रोश, सुरक्षा पर सवाल

इस घटना के बाद सिवनी के पत्रकारों में भारी आक्रोश है। सवाल उठ रहे हैं कि जब हॉस्पिटल जैसे संवेदनशील स्थानों पर पत्रकार सुरक्षित नहीं, तो आम नागरिकों की स्थिति क्या होगी?

पत्रकार संगठनों ने दोषियों के खिलाफ तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी धाराओं में मामला दर्ज करने की मांग की है।

पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग

पीड़ित पत्रकार ने स्पष्ट कहा है कि यह हमला सिर्फ उन पर नहीं, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता पर हमला है। अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी तत्परता और निष्पक्षता से कार्रवाई करता है।

सिवनी: जिंदल हॉस्पिटल संचालक सुनील अग्रवाल ने किया पत्रकार पर जानलेवा हमला, पत्रकारों का डेलिगेशन पहुँचा एसपी के पास

सिवनी, मध्यप्रदेश: सिवनी से एक बेहद सनसनीखेज और चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने पूरे पत्रकार जगत को झकझोर कर रख दिया है। जिले के वरिष्ठ पत्रकार सतीश मिश्रा पर जिंदल हॉस्पिटल के संचालक सुनील अग्रवाल एवं उसके कर्मचारियों द्वारा जानलेवा हमला किया गया। इस घटना के बाद न सिर्फ पत्रकारों में आक्रोश है बल्कि आम जनता भी आक्रोशित है.

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पत्रकार सतीश मिश्रा आज सुबह एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद परिजनों को शव ना देने के मामले की रिपोर्टिंग के सिलसिले में जिंदल हॉस्पिटल से जुड़े विषय पर जानकारी जुटा रहे थे। इसी दौरान हॉस्पिटल संचालक एवं कर्मचारियों द्वारा उन पर हमला किया गया। आरोप है कि यह हमला पूरी तरह सुनियोजित था और इसका उद्देश्य पत्रकार को डराना-धमकाना एवं चुप कराना था।

हमले के बाद पत्रकार सतीश मिश्रा तत्काल कोतवाली थाना पहुंचे और एफआईआर दर्ज कराने की मांग की। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि सुबह से शाम तक थाने के चक्कर काटने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

एफआईआर में देरी से बढ़ा आक्रोश

एफआईआर दर्ज न होने से पत्रकार समुदाय में भारी नाराजगी फैल गई। इसे न्याय में देरी और प्रभावशाली लोगों को संरक्षण देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पत्रकारों का कहना है कि जब एक पत्रकार सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक की सुरक्षा की कल्पना कैसे की जा सकती है?

पत्रकारों का डेलीगेशन पहुंचा एसपी कार्यालय

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रेस एसोसिएशन ऑफ सिवनी के अध्यक्ष अयोध्या विश्वकर्मा के नेतृत्व में पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल सुनील कुमार मेहता से मिला। डेलीगेशन ने पूरे घटनाक्रम से एसपी को अवगत कराते हुए निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई की मांग की।

एसपी से मुलाकात के बाद यह आश्वासन दिया गया कि एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी।

प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला?

यह घटना सिर्फ एक पत्रकार पर हमला नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा प्रहार मानी जा रही है। पत्रकार संगठनों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह भविष्य में और भी खतरनाक मिसाल बन सकती है।

पत्रकारों की मांग

  • दोषियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए
  • हमले में शामिल सभी आरोपियों की गिरफ्तारी हो
  • पत्रकार सतीश मिश्रा को सुरक्षा प्रदान की जाए
  • मामले की निष्पक्ष व समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए

सिवनी की यह घटना प्रशासन, पुलिस और समाज—तीनों के लिए एक कड़ी चेतावनी है। यदि पत्रकारों की आवाज को दबाने की कोशिशों पर समय रहते रोक नहीं लगी, तो इसका असर लोकतंत्र और जनहित दोनों पर पड़ेगा। अब देखना यह होगा कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में कितनी संवेदनशीलता और सख्ती दिखाते हैं।

सिवनी: धान खरीदी का काला सच! घर-घर बंट रहीं बोरियां, केन्द्रों पर मजदूर बेरोज़गार-प्रशासन की नाक के नीचे बड़ा खेल

विशेष रिपोर्ट | सिवनी, बरघाट, धारनाकला (एस.शुक्ला)- धान खरीदी व्यवस्था, जो किसानों और मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए बनाई गई थी, आज उसी व्यवस्था में खुलेआम मनमानी, भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का खेल खेला जा रहा है। धारणाकला क्षेत्र के धान खरीदी केन्द्रों पर जो हालात सामने आ रहे हैं, वे न सिर्फ चौंकाने वाले हैं बल्कि शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े करते हैं।

घर से ही तैयार होकर आ रही धान की बोरियां

धान खरीदी केन्द्रों पर नियमों को ताक पर रखकर ऐसा तंत्र खड़ा कर दिया गया है, जिसमें खरीदी केन्द्रों से खाली बारदाने सीधे किसानों के घरों तक पहुंचाए जा रहे हैं। वहीं, किसान घर से ही धान भरकर बोरियां तैयार कर रहे हैं और वही बोरियां सीधे खरीदी प्रांगण में लाकर खड़ी कर दी जा रही हैं।

इस पूरे खेल में न तो धान खरीदी केन्द्र के प्रांगण में गिराई जा रही है और न ही वहां मौजूद हम्माल व मजदूरों से तौल और भराई का काम कराया जा रहा है। परिणामस्वरूप, पूरा खरीदी तंत्र केवल कागजों और पोर्टल पर सिमटकर रह गया है।

धान खरीदी पोर्टल पर आंकड़े बढ़ाने की होड़

जानकारों के अनुसार यह पूरा खेल धान खरीदी पोर्टल पर खरीदी की मात्रा और कमीशन राशि बढ़ाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। प्रशासन की आंखों के सामने, दिनदहाड़े धान का यह काला बाजार फल-फूल रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह गोरखधंधा न तो रात के अंधेरे में हो रहा है और न ही चोरी-छिपे, बल्कि खुलेआम संचालित किया जा रहा है।

महिला स्व सहायता समूह भी विवादों में

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सहकारी समितियों के साथ-साथ महिला स्व सहायता समूहों को भी धान उपार्जन कार्य से जोड़ा गया था। बीते तीन-चार वर्षों से ये समूह इस व्यवस्था का हिस्सा हैं।

लेकिन कमीशन बढ़ाने की लालच में कुछ महिला स्व सहायता समूहों से जुड़े दलाल और ठेकेदार ही धान खरीदी में काला बाजारी को बढ़ावा दे रहे हैं। यह कोई नई बात नहीं है—पिछले सत्र में भी घर-घर बोरियां बांटने का खेल जमकर चला था, जो इस सत्र में और भी बेखौफ तरीके से जारी है।

हम्माल मजदूरों के हक पर खुला डाका

धान खरीदी केन्द्रों पर आमतौर पर 50 के करीब मजदूर, हम्माल और महिलाएं कार्यरत रहती हैं, जिन्हें धान की तुलाई और भराई का काम मिलता है। लेकिन जब धान पहले से भरी बोरियों में सीधे केन्द्रों तक पहुंचाई जाती है, तो इन मजदूरों को काम ही नहीं मिलता।

इतना ही नहीं, धान खरीदी के नाम पर मिलने वाली प्रशासनिक व्यय राशि भी कथित तौर पर हजम की जा रही है। यानी एक ओर मजदूरों का रोजगार छीना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकारी धन का भी दुरुपयोग हो रहा है।

स्लॉट बुकिंग बना भ्रष्टाचार का नया हथियार

किसानों की सुविधा के लिए शासन द्वारा स्लॉट बुकिंग प्रणाली लागू की गई थी, ताकि किसान आसानी से नजदीकी धान खरीदी केन्द्र में अपनी उपज बेच सकें। लेकिन अब यही व्यवस्था व्यापारियों और दलालों के लिए हथियार बन गई है।

कई मामलों में किसानों के नाम से पंजीकृत धान समीपी केन्द्रों के बजाय दूर-दराज के केन्द्रों में बेची जा रही है। वजह साफ है—वहीं केन्द्र ज्यादा चुने जा रहे हैं, जहां घर-घर खाली बारदाने देने की सुविधा उपलब्ध है। इसका सीधा असर आसपास के ईमानदार खरीदी केन्द्रों पर पड़ रहा है।

आंकड़ों का खेल और नियमों की अनदेखी

यही वजह है कि जिन धान खरीदी केन्द्रों पर कभी 40–50 हजार क्विंटल से ज्यादा खरीदी नहीं हुई, वे अब 80 हजार से 1 लाख क्विंटल तक के आंकड़े पार कर रहे हैं। नियमों की खुलेआम अनदेखी कर औसत और कमीशन बढ़ाने का खेल खेला जा रहा है, जो पूरे सिस्टम को खोखला कर रहा है।

प्रशासन का पक्ष

इस पूरे मामले पर प्रशासनिक अधिकारियों ने सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

“यदि इस तरह की गतिविधियां धान खरीदी केन्द्रों पर हो रही हैं, तो जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।” — अंजली शाह, जिला पंचायत सीईओ

“अगर ऐसी अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो जांच के बाद एफआईआर की कार्रवाई भी की जाएगी।” — मनोज पुरबिया, जिला खाद्य अधिकारी, सिवनी

अब सवाल यह है…

क्या धान खरीदी केन्द्रों में चल रहे इस खुले खेल पर वाकई लगाम लगेगी? या फिर मजदूरों, किसानों और शासन—तीनों की आंखों में धूल झोंककर यह काला कारोबार यूं ही चलता रहेगा?

सिवनी: क्रिकेट सट्टे की लत बनी मौत की वजह! 4,500 रुपये के विवाद में दोस्त राहुल ठाकुर और कमलेश ने ही कर दी पंकज ठाकुर की निर्मम हत्या

सिवनी: मध्यप्रदेश के सिवनी जिले से एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहाँ क्रिकेट सट्टे की लत ने एक युवक की जान ले ली। 4,500 रुपये के मामूली लेन-देन ने ऐसा खौफनाक मोड़ लिया कि दोस्ती का रिश्ता ही मौत का कारण बन गया। लेकिन काबिल-ए-तारीफ है सिवनी पुलिस, जिसने इस अंधी हत्या की गुत्थी को महज 8 दिनों में सुलझाकर दोनों शातिर आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया।

निर्माणाधीन मकान में मिला था शव, इलाके में फैली सनसनी

दिनांक 18 दिसंबर 2025 की सुबह सिवनी के मुंगवानी रोड स्थित एक निर्माणाधीन मकान में एक युवक का शव मिलने से हड़कंप मच गया। मौके पर पहुँची पुलिस ने मृतक की पहचान पंकज ठाकुर, निवासी महाराज बाग, सिवनी के रूप में की। प्रारंभिक जांच के बाद देहाती मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयान से चौंकाने वाला खुलासा हुआ—

पंकज ठाकुर की रस्सी से गला घोंटकर हत्या की गई थी।

इसके बाद थाना कोतवाली में अपराध क्रमांक 1001/2025, धारा 103(1) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

एसपी सुनील मेहता के नेतृत्व में बनी विशेष टीम

इस जघन्य हत्याकांड को सुलझाने के लिए पुलिस अधीक्षक श्री सुनील मेहता के नेतृत्व में, एएसपी श्री दीपक मिश्रा एवं एसडीओपी श्रीमती श्रृध्दा सोनकर के मार्गदर्शन में विशेष टीम गठित की गई।

तकनीकी साक्ष्य, कॉल डिटेल्स और मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया गया।

मोबाइल बंद, अंतिम संस्कार से दूरी—यहीं से खुली पोल

जांच के दौरान पुलिस को अहम सुराग मिला। राहुल ठाकुर, जो घटना से एक दिन पहले मृतक के साथ आखिरी बार देखा गया था—

  • घटना के बाद से मोबाइल बंद
  • अंतिम संस्कार में भी नहीं हुआ शामिल
  • लगातार लोकेशन छिपाता रहा

इन संदेहों के आधार पर पुलिस ने 25 दिसंबर 2025 को राहुल ठाकुर को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसके साथ मौजूद कमलेश बंदेवार भी संदेह के घेरे में आ गया।

क्रिकेट सट्टा, कर्ज और फिर हत्या की खौफनाक कहानी

सख्ती से पूछताछ में दोनों आरोपियों ने जुर्म कबूल कर लिया।

उन्होंने बताया कि—

  • दोनों मोबाइल एप के जरिए क्रिकेट सट्टे के आदी थे
  • 16 दिसंबर को सट्टा खेलने के लिए कमलेश की चांदी की चेन गिरवी रखकर पंकज से 1,500 रुपये उधार लिए
  • रकम सट्टे में हार गए और वापस नहीं कर सके

अगले दिन यानी 17 दिसंबर 2025 को फुटबॉल स्टेडियम के पास फिर मुलाकात हुई।

दोबारा सट्टे के लिए पंकज से 2,500 रुपये मांगे और जीत के बाद 3,000 रुपये लौटाने व शराब पिलाने का लालच दिया।

पंकज ने—

  • PhonePe से 1,700 रुपये ट्रांसफर
  • 800 रुपये नकद शराब के लिए दिए

शराब के नशे में लिया मौत का फैसला

तीनों आरोपी मंगवानी रोड स्थित एक निर्माणाधीन भवन में बैठकर शराब पीने लगे।

नशा उतरते ही जब पंकज ने अपने कुल 4,500 रुपये वापस मांगे, तो आरोपियों ने इंकार कर दिया।

पंकज ने धमकी दी—

👉 “अगर पैसे नहीं दिए तो कोर्ट-कचहरी कर दूँगा।”

बस इसी बात पर राहुल और कमलेश बेकाबू हो गए और

👉 रस्सी से गला घोंटकर पंकज की हत्या कर दी।

हत्या के बाद आरोपियों ने—

  • मृतक की सोने की अंगूठी
  • जेब में रखे 4,500 रुपये भी निकाल लिए

इसके बाद मामले में धारा 315(3)(5) बीएनएस भी जोड़ी गई।

गिरफ्तारी, बरामदगी और पुलिस रिमांड

दिनांक 26 दिसंबर 2025 को दोनों आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर लिया गया।

फिलहाल आरोपियों से—

  • लूटी गई संपत्ति की बरामदगी
  • घटना से जुड़े अन्य तथ्यों के खुलासे

के लिए माननीय न्यायालय से पुलिस रिमांड लिया जा रहा है।

गिरफ्तार आरोपी

  • 1. राहुल ठाकुर
  • पिता – राजेश ठाकुर | उम्र – 36 वर्ष
  • निवासी – ग्राम गाडरवाडा, थाना बंडोल
  • हाल पता – भैरोगंज, सिवनी
  • 2. कमलेश बंदेवार
  • पिता – भरत बंदेवार | उम्र – 32 वर्ष
  • निवासी – ग्राम पटपड़ा, थाना उमरेठ, जिला छिंदवाड़ा
  • हाल पता – डी.पी. चतुर्वेदी कॉलेज के पीछे, सिवनी

इनकी रही अहम भूमिका

थाना प्रभारी श्री सतीश तिवारी सहित कोतवाली थाना स्टाफ, सायबर टीम और परासिया थाना पुलिस की सराहनीय भूमिका रही, जिनकी सतर्कता से यह अंधा हत्याकांड सुलझ सका।

सिवनी: बरघाट में घर के अंदर चल रहा था गोमांस का काला कारोबार! बजरंग दल की सतर्कता से 150 किलो मांस के साथ वशी खान गिरफ्तार

सिवनी (मध्यप्रदेश): सिवनी जिले से एक चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। बरघाट थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बोरी कला में एक युवक अपने ही घर के भीतर गौ माता का वध कर गोमांस बेचने की तैयारी कर रहा था। लेकिन इससे पहले कि वह अपने मंसूबों में कामयाब हो पाता, बजरंग दल की सतर्कता और पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया।

घर में छिपाकर रखा था करीब 150 किलो गोमांस

प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपी वशी खान पिता जब्बार खान, उम्र करीब 23 वर्ष, निवासी बोरी कला, गुरुवार 25 दिसंबर 2025 को अपने घर में गौ माता को काटकर लगभग 150 किलो गोमांस इकट्ठा कर चुका था। बताया जा रहा है कि आरोपी इस गोमांस को विक्रय (बेचने) के लिए बाहर ले जाने की तैयारी कर रहा था।

बजरंग दल की सूचना पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

इस अवैध गतिविधि की भनक लगते ही बजरंग दल प्रखंड संयोजक रंजीत धुर्वे ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही बरघाट थाना प्रभारी मोहनीश सिंह बेस और बोरी चौकी प्रभारी ए.एस.आई. सुबोध मालवी अपनी पूरी टीम के साथ मौके पर पहुंचे।

पुलिस और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की संयुक्त कार्रवाई में आरोपी को रंगे हाथों पकड़ लिया गया। घर की तलाशी लेने पर भारी मात्रा में गोमांस बरामद हुआ, जिसे मौके पर ही नष्ट (नष्टीकरण) किया गया।

आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ गौवंश संरक्षण अधिनियम सहित अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि जिले में गौ तस्करी या गोवध जैसे अपराध किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे

इलाके में आक्रोश, प्रशासन की सख्ती

इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय ग्रामीणों और हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश देखा गया। लोगों ने प्रशासन से ऐसी गतिविधियों पर और कड़ी निगरानी की मांग की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिले में संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

👉 इस पूरी कार्रवाई के बाद इलाके में कानून व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है।

SEONI में SATTA माफिया पर बड़ी कार्रवाई! कोतवाली पुलिस की ताबड़तोड़ रेड, सट्टा क्वीन लता बाई समेत 5 धराए

सिवनी (मध्यप्रदेश): जिले में जुआ-सट्टा जैसी अवैध गतिविधियों के खिलाफ सिवनी पुलिस ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत कर्वे कॉलोनी दसलागर के पास पुलिस ने घेराबंदी कर सट्टा पट्टी लिख रहे 05 सटोरियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मौके से 4100 रुपये नकद और सट्टा पट्टी भी जप्त की है।

🚨 पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर चला अभियान

पुलिस अधीक्षक श्री सुनील मेहता के स्पष्ट निर्देश हैं कि जिले में जुआ-सट्टा और अन्य अवैध गतिविधियों को किसी भी कीमत पर पनपने नहीं दिया जाएगा। इसी दिशा में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री दीपक मिश्रा एवं अनुविभागीय अधिकारी पुलिस श्रीमती श्रृध्दा सोनकर के मार्गदर्शन में कोतवाली पुलिस लगातार प्रभावी कार्रवाई कर रही है।

🕵️‍♂️ मुखबिर सूचना पर त्वरित रेड

दिनांक 24/12/2025 को कोतवाली पुलिस को मुखबिर से पुख्ता सूचना मिली कि कर्वे कॉलोनी दसलागर के पास कुछ लोग सट्टा पट्टी लिखकर रुपये-पैसों का दांव लगाते हुए हार-जीत का खेल खेल रहे हैं। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई और तत्काल घेराबंदी कर दबिश दी गई।

पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से मौके पर मौजूद 05 सटोरियों को पकड़ने में सफलता मिली, जिनके पास से नकद राशि और सट्टा से संबंधित सामग्री बरामद की गई।

📌 गिरफ्तार सटोरियों के नाम

  1. लता कुल्हाडे, पति धनीराम कुल्हाडे, उम्र 45 वर्ष, निवासी भैरोगंज, सिवनी
  2. धनीराम कुल्हाडे, पिता टेकचंद कुल्हाडे, उम्र 52 वर्ष, निवासी कर्वे कॉलोनी, सिवनी
  3. अनखलाल कुमरे, पिता बारेलाल कुमरे, उम्र 64 वर्ष, निवासी कन्हान पिपरिया, थाना कान्हीवाड़ा
  4. संतोष पंचेश्वर, पिता रामेलाल पंचेश्वर, उम्र 28 वर्ष, निवासी परतापुर रोड बायपास, सिवनी
  5. सुखराम परते, पिता विष्णु परते, उम्र 25 वर्ष, निवासी ग्राम भोमाखेड़ा, थाना बंडोल

💰 जप्त सामग्री

  • नकद राशि: 4100 रुपये
  • सट्टा पट्टी: 01

सभी आरोपियों के खिलाफ सट्टा एक्ट के तहत 05 अलग-अलग प्रकरण पंजीबद्ध कर विधिवत कानूनी कार्रवाई की गई है।

👮‍♂️ सिवनी पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका

इस सफल कार्रवाई में थाना प्रभारी कोतवाली श्री सतीश तिवारी सहित

प्र. आर. मुकेश गोंडाने, मनोज मरावी, प्रशांत राठौर, कृष्णकुमार वानखेड़े, मनोज पाल, आर. प्रतीक बघेल, रत्नेश कुशवाहा, सिद्धार्थ दुबे, विसराम धुर्वे, प्रदीप चौधरी, लोकेश सरयाम, इरफानुद्दीन खान, प्रियंका साहू एवं सैनिक मोहम्मद वकील की महत्वपूर्ण और सराहनीय भूमिका रही।

⚠️ सिवनी पुलिस का सख्त संदेश

सिवनी कोतवाली थाना प्रभारी सतीश तिवारी ने साफ संदेश दिया है कि जुआ-सट्टा और अवैध गतिविधियों में लिप्त लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले दिनों में भी इस तरह की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

Instagram Influencer Aarti Sahu का REEL के लिए हाईवे पर खतरनाक बाइक स्टंट; कट गया लम्बा चालान, माफी मांगने का वीडियो वायरल

Instagram Influencer Aarti Sahu – छतरपुर (मध्य प्रदेश): इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर आरती साहू को सोशल मीडिया पर उनके बाइक स्टंट रील के वायरल होने के बाद चालान जारी किया गया। वीडियो में उन्हें छतरपुर राजमार्ग पर स्पोर्ट्स बाइक चलाते हुए देखा गया था, जिसमें उन्होंने सिर्फ एक ‘कूल’ रील बनाने के लिए हैंडल से हाथ हटा रखे थे।

पुलिस कार्रवाई के बाद, साहू ने अपना माफीनामा वीडियो भी पोस्ट किया। उन्होंने अपने 40 लाख फॉलोअर्स से यातायात नियमों का पालन करने और ऐसे खतरनाक स्टंट से बचने का अनुरोध किया।

सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में आरती साहू को हाईवे पर चलती बाइक चलाते हुए खतरनाक स्टंट करते देखा जा सकता है। कई बार वह हैंडल से हाथ हटाकर चलती बाइक पर चढ़ जाती हैं और आगे सड़क देखे बिना अपने चश्मे को ठीक करती हैं।

वीडियो के दौरान, उनकी बाइक कुछ देर के लिए संतुलन खोती हुई दिखाई देती है, क्योंकि ऐसा लगता है कि वह ट्रैफिक पर ध्यान देने के बजाय रील रिकॉर्ड करने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही हैं। सड़क पर अन्य वाहन भी दिखाई दे रहे हैं, जिससे स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है।

यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर यातायात पुलिस द्वारा चालान जारी किए जाने के बाद, आरती साहू ने चालान पकड़े हुए एक और वीडियो पोस्ट किया। वीडियो में वह कहती हैं, “मेरा चालान काटा है यातयात नियमों का उल्लंघन करने पर। अगर आप भी ऐसे स्टंट करते हो, तो आपका भी चालान काट सकता है।”

पुलिस ने चेतावनी दी है कि राजमार्गों का इस्तेमाल इस तरह के स्टंट, जन्मदिन समारोह या किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि सार्वजनिक सड़कों पर खतरनाक या अवैध गतिविधियों को दर्शाने वाले वीडियो पोस्ट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस तरह के स्टंट न केवल राइडर के लिए बल्कि सड़क का इस्तेमाल करने वाले आम लोगों के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करते हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो पोस्ट करने से अन्य लोग, विशेषकर युवा, इन खतरनाक कृत्यों की नकल करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।

Instagram Influencer Aarti Sahu – आरती साहू के बारे में

इंस्टाग्राम पर “इट्स आरती साहू” के नाम से मशहूर आरती साहू के 41 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं और उनके अकाउंट पर 5,000 से अधिक पोस्ट हैं। उनकी हालिया रील वायरल हो गई और उसे लाखों लाइक्स मिले।

जबलपुर: झाड़ियों में मिला पति का अर्धनग्न शव; पत्नी के नाम के टैटू से हुई पहचान

मंडला (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के जबलपुर में मंगलवार को संदिग्ध परिस्थितियों में 26 वर्षीय एक युवक का अर्धनग्न शव मिला। मृतक की पहचान मंडला जिले के बामहानी निवासी अजय बार्या के रूप में हुई है। पुलिस द्वारा सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीर साझा करने के बाद अजय की पहचान संभव हो पाई।

मृतक ने अपने हाथ पर अपनी पत्नी का नाम गुदवाया था। उसके टैटू की तस्वीर वायरल हो गई, जिससे अधिकारियों को उसके परिवार से संपर्क करने और टैटू की मदद से उसकी पहचान की पुष्टि करने में मदद मिली। अजय बार्या का शव शाहपुरा पुलिस थाना क्षेत्र के पौड़ी गांव के पास अर्धनग्न अवस्था में मिला, जिस पर गंभीर चोटों के स्पष्ट निशान थे, जिससे किसी साजिश की आशंका पैदा होती है।

पुलिस के अनुसार, अजय अपनी पत्नी के इलाज के लिए 18 दिसंबर को जबलपुर के मेडिकल अस्पताल में आया था, जिससे इस क्रूर हत्या की परिस्थितियों को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।

शाहपुरा पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर आरोपी को पकड़ने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी है। पुलिस फिलहाल सबूत जुटाने के लिए आसपास के निवासियों से पूछताछ कर रही है। आसपास के सीसीटीवी फुटेज की गहन समीक्षा की जा रही है।

Itarsi Ordnance Factory: आयुध कारखाने इटारसी को बम से उड़ाने की धमकी!

भोपाल (मध्य प्रदेश): रक्षा मंत्रालय की एक इकाई, इटारसी स्थित आयुध कारखाने को मंगलवार को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल प्राप्त हुआ। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और बम निरोधक दल जल्द ही वहां पहुंचेगा। फोरेंसिक शोधकर्ताओं की एक टीम भी घटनास्थल पर पहुंच चुकी है। पुलिस फिलहाल ईमेल के स्रोत की जांच कर रही है।

पिछले आठ महीनों में यह इस तरह की दूसरी धमकी है, जिससे सुविधा की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं। इससे पहले, 17 अप्रैल को भी इसी तरह का एक ईमेल प्राप्त हुआ था, जो बाद में फर्जी निकला।

जानकारी के अनुसार, नवीनतम धमकी भरा ईमेल सोमवार रात को फैक्ट्री के आधिकारिक ईमेल खाते पर प्राप्त हुआ था।मंगलवार को ईमेल का पता चलने के बाद, फैक्ट्री प्रबंधन ने तुरंत जिला पुलिस को सूचित किया। इसके बाद, सुरक्षा एजेंसियां ​​हरकत में आ गईं। पुलिस अधीक्षक साई कृष्णा थोता ने ईमेल प्राप्त होने की पुष्टि की और कहा कि मामले की गहन जांच की जा रही है।

आयुध कारखाना एक अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है क्योंकि यहाँ भारतीय सेना के लिए उन्नत हथियार बनाए जाते हैं। खतरे की गंभीरता को देखते हुए रामपुर, पथराउता, इटारसी और आसपास के पुलिस थानों से पुलिस टीमों को मौके पर भेजा गया।

तलाशी अभियान का नेतृत्व अतिरिक्त एसपी अभिषेक राजन कर रहे हैं। कारखाने के अधिकारी सुरक्षाकर्मियों के साथ परिसर के हर कोने की जाँच कर रहे हैं। विस्तृत तलाशी अभियान चलाने के लिए बम निरोधक दस्ते का भी इंतजार किया जा रहा है।

इस दस्ते की एक टीम मुख्यमंत्री के दौरे के लिए तैनात है, जबकि अन्य टीमें ग्वालियर और बुरहानपुर में तैनात हैं। स्थिति को देखते हुए छिंदवाड़ा जिले से बम निरोधक दल को बुलाया गया है।