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सिवनी में धान खरीदी पर बड़ा खेल? अमानक धान थोपने के आरोप, सर्वेयर हटाए गए-गुणवत्ता पर संकट

Seoni Dhan Kharidi News: सिवनी। खरीफ उपार्जन 2025-26 के बीच सिवनी जिले में धान की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भंडारण केंद्रों पर अमानक (नॉन-FAq) धान के पहुंचने और उसे जबरन स्वीकार कराने के आरोप सामने आने लगे हैं। नियमों के तहत रिजेक्ट की जा रही धान की बोरियों को लेकर न सिर्फ विवाद गहराया है, बल्कि राजनीतिक दबाव और भारी हस्तक्षेप के चलते कुछ भंडारण केंद्रों में कार्यरत सर्वेयरों पर कार्रवाई तक हो चुकी है।

सूत्रों के अनुसार, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा खरीफ उपार्जन के लिए सर्वेयर और उनके मार्गदर्शन हेतु सुपरवाइजर नियुक्त किए गए थे, ताकि खरीदी केंद्रों पर केवल पूरी तरह सूखी, FAq गुणवत्ता वाली धान ही स्वीकार हो।

नियमों के मुताबिक धान में नमी, मिट्टी, कुस्सी, सिकुड़े, टूटे, बदरंग और क्षतिग्रस्त दानों की मात्रा निर्धारित सीमा से कम होना अनिवार्य है। बावजूद इसके, अमानक धान को दबाव बनाकर भंडारण केंद्रों में थोपने के प्रयासों की शिकायतें बढ़ रही हैं।

सर्वेयर हटे, निष्पक्षता पर सवाल

विवाद के बीच कुछ सर्वेयरों को भंडारण केंद्रों से हटाया गया है। हटाए गए सर्वेयरों ने सुपरवाइजर को आवेदन देकर अपना पक्ष भी रखा, लेकिन निष्पक्ष कार्रवाई को लेकर जिला स्तर पर हस्तक्षेप के आरोप सामने आए हैं। ज़मीनी सच्चाई यह भी बताई जा रही है कि कुछ केंद्रों पर बाहर से लाई गई अमानक धान को स्वीकार कराने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे गुणवत्ता नियंत्रण की पूरी प्रक्रिया सवालों में है।

उत्पादन कम, पंजीयन पूरा करने बाहर से धान

इस वर्ष किसानों के धान उत्पादन में पिछले सत्र की तुलना में भारी कमी दर्ज की गई है। ऐसे में पंजीयन लक्ष्य पूरे करने के लिए व्यापारी वर्ग द्वारा बाहर से पुरानी/अमानक धान मंगाकर खरीदी केंद्रों में डाली जा रही है। यही वजह है कि यह धान जांच में रिजेक्ट श्रेणी में आ रही है।

कई खरीदी केंद्रों से यह भी सामने आया है कि धान की बोरियां घर से भरकर लाई जा रही हैं, और केंद्रों पर बिना विधिवत भराई-तुलाई के सिलाई तक की जा रही है। ऐसी प्रक्रियाओं में FAq मानकों का पालन होना लगभग असंभव है—जिसका सीधा असर गुणवत्ता पर पड़ता है।

कमीशन की दौड़ में गुणवत्ता से समझौता?

आरोप यह भी हैं कि कमीशन राशि बढ़ाने के चक्कर में कुछ खरीदी प्रभारी, धान व्यापार से जुड़े लोगों को अनुचित सुविधाएं देकर उन्हें आकर्षित कर रहे हैं। इसका खामियाजा मजदूर हम्मालों के अधिकारों पर पड़ रहा है, वहीं शासन से मिलने वाली प्रशासनिक राशि के दुरुपयोग की आशंका भी जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी सुविधाएं अमानक धान को बढ़ावा देती हैं—जिस पर तत्काल ध्यान और सख्त कार्रवाई जरूरी है।

यदि गुणवत्ता नियंत्रण में ढील और दबाव की राजनीति पर रोक नहीं लगी, तो न केवल सरकारी भंडारण की साख पर असर पड़ेगा, बल्कि किसानों और उपभोक्ताओं—दोनों का नुकसान तय है। जिले में पारदर्शी जांच, निष्पक्ष कार्रवाई और FAq मानकों का सख्त पालन ही इस संकट का समाधान है।

अब भी खामोशी! Relipay – FINO ने नहीं दिया जवाब, BC पॉइंट बंद कराने को एजेंट मजबूर-ग्राहक सेवाएं ठप

RELIPAY AND FINO BANK: डिजिटल बैंकिंग सेवाओं में काम कर रही Relipay और FINO की लापरवाही को लेकर उठे सवाल अब और गहरे होते जा रहे हैं। पहले सामने आए मामले के बाद भी, कई दिन बीत जाने के बावजूद संबंधित एजेंट को अब तक कोई आधिकारिक जवाब या समाधान नहीं मिला है, जिससे यह मामला एक गंभीर प्रशासनिक उदासीनता की ओर इशारा करता है।

फॉलो-अप के बाद भी सन्नाटा

Relipay एजेंट शुभम शर्मा द्वारा बार-बार ईमेल, कॉल और लिखित अनुरोध भेजने के बावजूद न तो Relipay और न ही FINO की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया दी गई है। पहले Relipay द्वारा यह कहा गया था कि FINO का BC पॉइंट डीएक्टिवेट कर दिया गया है, लेकिन BC Registry पोर्टल पर वही BC अब भी “Active” स्थिति में दर्ज है। जिनका कस्टमर आईडी 116994908 एवं RELIPAY ID – r001327946 है.

यह विरोधाभास न केवल एजेंट को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान कर रहा है, बल्कि ग्राहकों के बीच भी भ्रम की स्थिति पैदा कर रहा है।

ग्राहक सेवाओं पर सीधा असर

BC पॉइंट की स्थिति स्पष्ट न होने के कारण—

  • ग्राहक ट्रांजेक्शन फेल होने की शिकायत कर रहे हैं
  • माइक्रो-ATM सेवाएं प्रभावित हो रही हैं
  • नकद निकासी और DBT से जुड़े काम रुक रहे हैं

स्थानीय स्तर पर इसका असर यह हुआ है कि ग्राहकों का भरोसा डिजिटल बैंकिंग सिस्टम से उठता जा रहा है

जिम्मेदारी से बचती कंपनियां?

सबसे गंभीर सवाल यह है कि—

  • यदि BC पॉइंट बंद है, तो Registry में Active क्यों?
  • यदि Active है, तो आधिकारिक रूप से बंद क्यों नहीं किया जा रहा?
  • एजेंट के भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा?

FINO की ओर से अब तक कोई PR स्टेटमेंट या स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है, वहीं Relipay भी इस मुद्दे पर गेंद FINO के पाले में डालता नजर आ रहा है।

एजेंट की मांग बिल्कुल स्पष्ट

एजेंट की मांग बेहद साधारण और नियमसम्मत है—

  • या तो BC पॉइंट को तुरंत पूरी तरह डीएक्टिवेट किया जाए
  • या फिर BC Registry से सभी विवरण हटाकर स्थिति स्पष्ट की जाए

लेकिन इस जायज़ मांग पर भी कंपनियों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।

क्या नियामक संस्थाएं लेंगी संज्ञान?

यदि यह मामला इसी तरह लंबित रहा, तो आने वाले समय में एजेंट द्वारा बैंकिंग ओम्बड्समैन, RBI से संबद्ध विभागों या उपभोक्ता मंच पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। यह प्रकरण अब सिर्फ एक एजेंट का नहीं, बल्कि पूरे BC सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल बनता जा रहा है।

सिवनी में बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक का भव्य स्वागत, लव जिहाद–लैंड जिहाद पर दिया सख़्त संदेश

सिवनी। महाकौशल प्रांत के सिवनी विभाग में बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक आदरणीय श्री किशन प्रजापत जी भाईसाहब तथा क्षेत्रीय संयोजक आदरणीय श्री विश्ववर्धन भट्ट जी भाईसाहब (राजस्थान–पाली / ग्वालियर) का आगमन बजरंगियों के लिए अत्यंत गौरव एवं हर्ष का विषय रहा। इस अवसर पर लखनादौन जिले के धूमा नगर, लखनादौन, छपारा एवं सिवनी नगर में कार्यकर्ताओं द्वारा उनका भव्य, जोशीला और अनुशासित स्वागत किया गया।

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय संयोजक श्री किशन प्रजापत जी ने संगठनात्मक मजबूती पर विशेष जोर देते हुए बजरंग दल की भूमिका, कार्यशैली और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने अपने संबोधन में लव जिहाद, लैंड जिहाद तथा हिंदुत्व से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर खुलकर चर्चा की और कार्यकर्ताओं से समाज में जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र और समाज की सुरक्षा केवल कानून से नहीं, बल्कि संगठित, जागरूक और सजग समाज से संभव है। बजरंग दल का प्रत्येक कार्यकर्ता समाज में संस्कार, सुरक्षा और सेवा का संदेश लेकर कार्य करे—यही संगठन की वास्तविक शक्ति है।

इस दौरान क्षेत्रीय संयोजक श्री विश्ववर्धन भट्ट जी ने भी संगठन के विस्तार, अनुशासन और समन्वय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर कार्य करने और जमीनी स्तर पर संगठन को और अधिक सशक्त बनाने का संदेश दिया।

राष्ट्रीय संयोजक का रात्रि विश्राम सिवनी स्थित रेस्टहाउस में रहा। स्वागत–वंदन कार्यक्रम में संगठनात्मक दृष्टि से जिला लखनादौन एवं सिवनी विभाग की दोनों ही जिलों की टीमों की सक्रिय उपस्थिति रही। बड़ी संख्या में बजरंग दल के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिससे आयोजन पूरी तरह सफल और प्रभावशाली रहा।

यह आयोजन न केवल संगठनात्मक मजबूती का प्रतीक बना, बल्कि कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा, उत्साह और प्रेरणा का संचार भी कर गया।

सिवनी के MOUNT LITERA ZEE SCHOOL में देखने मिला संस्कृति, शक्ति और समृद्धि का भव्य संगम, MLZS SEONI के वार्षिक समारोह ने जीता सभी का दिल

MOUNT LITERA ZEE SCHOOL SEONI: सिवनी। जिले के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान माउंट लिट्रा ज़ी स्कूल, सिवनी का वार्षिक समारोह “संस्कृति, शक्ति एवं समृद्धि” दिनांक 29 दिसंबर 2025 (सोमवार) को अत्यंत गरिमामय, भावनात्मक और प्रेरणादायक वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम था, बल्कि भारतीय परंपराओं, राष्ट्रप्रेम और विद्यार्थियों की प्रतिभा का जीवंत उत्सव बनकर उभरा।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के विधिवत पूजन के साथ हुआ, जिसे मुख्य अतिथि सुनील मेहता (पुलिस अधीक्षक, सिवनी) द्वारा संपन्न कराया गया। इस अवसर पर विद्यालय के निदेशक श्री अंकित मालू, श्री अनिकेत मालू, श्रीमती प्रमिला मालू, श्रीमती मोनिका मालू, श्रीमती विनिता मालू तथा प्राचार्या श्रीमती कविता कौर की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया।

भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं का जीवंत मंचन

वार्षिक समारोह में भारतीय संस्कृति को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। गौ-पूजन जैसी सनातन परंपराओं के मंचन ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। निदेशक श्री अंकित मालू द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति से ओत-प्रोत श्लोकों ने पूरे पंडाल को राष्ट्रप्रेम की भावना से सराबोर कर दिया।

MOUNT LITERA ZEE SCHOOL SEONI में विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने बटोरी तालियां

कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत किसान आधारित नाट्य प्रस्तुति, भारतीय सेना की शौर्यगाथा और मनमोहक सांस्कृतिक नृत्य “रंगीला मारो ढोलना” विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इन प्रस्तुतियों ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि समाज, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति सकारात्मक संदेश भी दिया।

प्रेरणादायक उद्बोधन बना समारोह की आत्मा

प्राचार्या श्रीमती कविता कौर ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए विद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों और मूल्यों पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात मुख्य अतिथि माननीय आईपीएस श्री सुनील मेहता जी ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में विद्यार्थियों को अनुशासन, आत्मविश्वास, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा के मूल मंत्र दिए। उनका उद्बोधन विद्यार्थियों के लिए न केवल प्रेरणास्रोत रहा, बल्कि जीवन भर स्मरणीय भी बन गया।

MOUNT LITERA ZEE SCHOOL SEONI के प्रबंधन और स्टाफ के समर्पण की सराहना

निदेशक श्री अनिकेत मालू ने विद्यालय के समस्त शिक्षकों, स्टाफ और प्रबंधन टीम के समर्पित प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना की और कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आभार और समापन

कार्यक्रम के समापन अवसर पर विद्यालय की समन्वयक सुश्री मंजू ने मुख्य अतिथि का बहुमूल्य समय और मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया। साथ ही विद्यालय प्रबंधन, प्राचार्या, शिक्षकों, स्टाफ, विद्यार्थियों तथा उपस्थित सभी अभिभावकों, संरक्षकों और दादा-दादी/नाना-नानी का भी हार्दिक धन्यवाद प्रकट किया गया।

एक अविस्मरणीय आयोजन

सम्पूर्ण वार्षिक समारोह “संस्कृति, शक्ति एवं समृद्धि” की भावना को साकार करता हुआ विद्यालय के इतिहास में एक स्वर्णिम और अविस्मरणीय आयोजन सिद्ध हुआ, जिसने शिक्षा के साथ संस्कार और राष्ट्रप्रेम का सशक्त संदेश दिया।

RELIPAY और FINO BANK की ID बिल्कुल भी ना लें ! BC पॉइंट बंद कराने को एजेंट दर-दर भटकने पर मजबूर, सिस्टम में दिख रही दोहरी सच्चाई

सिवनी: डिजिटल बैंकिंग और माइक्रो-ATM सेवाओं के क्षेत्र में काम कर रही कंपनियों Relipay और FINO की कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। दोनों कंपनियों की आपसी साझेदारी का खामियाजा सीधे तौर पर फील्ड में काम करने वाले BC (बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट) एजेंटों को भुगतना पड़ रहा है।

ताज़ा मामला मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के RELIPAY के एजेंट शुभम शर्मा से जुड़ा है, जिन्होंने Relipay के माध्यम से FINO का BC पॉइंट लिया था। शुरुआत में यह BC पॉइंट Relipay द्वारा विधिवत रूप से एक्टिव कराया गया, लेकिन अब जब एजेंट ने सर्वर समस्याओं और लगातार आ रही तकनीकी दिक्कतों के कारण BC पॉइंट छोड़ने का निर्णय लिया, तो मामला उलझता चला गया।

सर्वर की समस्या बनी बड़ी वजह

एजेंट का आरोप है कि FINO के सर्वर में लगातार अत्यधिक समस्याएं आ रही हैं, जिससे ग्राहकों के ट्रांजेक्शन फेल हो रहे हैं और रोज़मर्रा का काम प्रभावित हो रहा है। इन परेशानियों से तंग आकर जब BC पॉइंट बंद कराने की प्रक्रिया शुरू की गई, तो Relipay और FINO एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आए।

BC बंद या चालू? सिस्टम में विरोधाभास

Relipay की ओर से एजेंट को यह बताया गया कि FINO का BC पॉइंट डीएक्टिवेट कर दिया गया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि BC Registry की आधिकारिक वेबसाइट पर वही BC पॉइंट अब भी “Active” दिख रहा है।

लगातार ईमेल और फॉलोअप के बावजूद न तो Relipay और न ही FINO की ओर से कोई ठोस समाधान या आधिकारिक स्पष्टीकरण दिया गया। FINO की पीआर या सपोर्ट टीम की ओर से भी अब तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

एजेंट द्वारा भेजा गया आधिकारिक मेल

एजेंट शुभम शर्मा ने Relipay और FINO टीम को स्पष्ट शब्दों में ईमेल के माध्यम से लिखा कि—

यदि BC वास्तव में बंद कर दिया गया है, तो BC Registry से उसका नाम और विवरण तत्काल हटाया जाए।

और यदि BC अब भी एक्टिव है, तो उसे तुरंत डीएक्टिवेट किया जाए।

इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

मामले से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

  • Relipay ID: R001327946
  • FINO BC नंबर: 9685157979

ग्राहकों और एजेंटों के हितों से खिलवाड़?

यह पूरा मामला न केवल एजेंट की परेशानी को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे बड़ी डिजिटल फाइनेंशियल कंपनियों की आपसी तालमेल की कमी का सीधा असर छोटे एजेंटों और आम ग्राहकों पर पड़ रहा है।

अब सवाल यह है कि—

  • आखिर BC पॉइंट की वास्तविक स्थिति क्या है?
  • जिम्मेदारी किसकी है—Relipay की या FINO की?
  • और सबसे अहम, इस लापरवाही का जवाबदेह कौन होगा?

यदि समय रहते इस मामले का समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले समय में यह विवाद और भी बड़ा रूप ले सकता है।

SEONI: पत्रकार को कमरे में बंद करके ज़हर वाला इंजेक्शन दो, जिंदल हॉस्पिटल में मौत कक्ष!

सिवनी जिले में पत्रकारिता पर सीधा हमला सामने आया है। जिंदल हॉस्पिटल भैरोगंज में कवरेज करने पहुंचे एक वरिष्ठ पत्रकार के साथ हॉस्पिटल संचालक और कर्मचारियों द्वारा मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह घटना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करती है।

क्या है पूरा मामला?

पीड़ित पत्रकार, जो जानी मोहल्ला, कबीर वार्ड, थाना डूंडासिवनी के निवासी हैं और वर्तमान में “संवाददूत” समाचार पत्र के प्रधान संपादक हैं, ने पुलिस को दी गई FIR में बताया कि 28 दिसंबर 2025, सुबह करीब 10 बजे जिंदल हॉस्पिटल भैरोगंज में एक मरीज की मृत्यु हो गई थी। मृतक का शव परिजनों को सौंपे जाने को लेकर विवाद की स्थिति बन गई थी।

घटना की जानकारी मिलने पर पत्रकार कवरेज के लिए हॉस्पिटल गेट पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि मृतक के परिजन, विशेषकर एक महिला, गेट के सामने रो-रोकर अपनी पीड़ा व्यक्त कर रही थी। पत्रकार ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए पहले महिला से घटना की जानकारी लेनी चाही।

“कैमरा बंद कर लो” से शुरू हुआ विवाद

इसी दौरान जिंदल हॉस्पिटल का कर्मचारी विशाल दुबे पत्रकार के पास पहुंचा और दबाव बनाते हुए कहा – “कैमरा बंद कर लो, पहले अग्रवाल साहब से बात कर लो।” पत्रकार ने स्पष्ट कहा कि वे पहले परिजनों की बात सुनेंगे, फिर हॉस्पिटल प्रबंधन का पक्ष भी लेंगे। इसी बात पर विवाद बढ़ गया।

हॉस्पिटल संचालक पर गंभीर आरोप

FIR के अनुसार, जिंदल हॉस्पिटल के संचालक सुनील अग्रवाल मौके पर पहुंचे और पत्रकार पर शराब पीकर ब्लैकमेल करने जैसे झूठे आरोप लगाते हुए मां-बहन की अश्लील गालियां देने लगे। जब पत्रकार ने गाली देने से मना किया, तो आरोप है कि:

  • पत्रकार का गला पकड़कर दीवार से धक्का दिया गया
  • थप्पड़ों और घूंसों से मारपीट की गई
  • माइक और कैमरा स्टैंड फेंक दिया गया, जिससे उपकरण क्षतिग्रस्त हो गए
  • गले में पहनी चांदी की चैन टूट गई
  • शर्ट के बटन का काज फट गया, जिससे आर्थिक नुकसान हुआ

“जहर का इंजेक्शन दे दो” – रोंगटे खड़े करने वाला बयान

इतना ही नहीं, FIR में यह भी उल्लेख है कि मौके पर मौजूद यशवंत उपाध्याय और विशाल दुबे ने लात-घूंसों से मारपीट की और कथित रूप से कहा कि: “इसे कमरे में बंद कर दो… जहर का इंजेक्शन दे दो, वीडियो सबूत मिट जाएगा।” यह कथन पूरे मामले को अत्यंत गंभीर और आपराधिक बनाता है।

जान से मारने की धमकी

पीड़ित पत्रकार का आरोप है कि हॉस्पिटल संचालक सुनील अग्रवाल ने खुलेआम धमकी दी कि: “दोबारा मेरे हॉस्पिटल के आसपास दिखा तो तुझे जान से खत्म कर देंगे।” इस धमकी के बाद पत्रकार अपने साथियों के साथ थाने पहुंचे और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की।

पत्रकारों में आक्रोश, सुरक्षा पर सवाल

इस घटना के बाद सिवनी के पत्रकारों में भारी आक्रोश है। सवाल उठ रहे हैं कि जब हॉस्पिटल जैसे संवेदनशील स्थानों पर पत्रकार सुरक्षित नहीं, तो आम नागरिकों की स्थिति क्या होगी?

पत्रकार संगठनों ने दोषियों के खिलाफ तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी धाराओं में मामला दर्ज करने की मांग की है।

पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग

पीड़ित पत्रकार ने स्पष्ट कहा है कि यह हमला सिर्फ उन पर नहीं, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता पर हमला है। अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी तत्परता और निष्पक्षता से कार्रवाई करता है।

सिवनी: जिंदल हॉस्पिटल संचालक सुनील अग्रवाल ने किया पत्रकार पर जानलेवा हमला, पत्रकारों का डेलिगेशन पहुँचा एसपी के पास

सिवनी, मध्यप्रदेश: सिवनी से एक बेहद सनसनीखेज और चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने पूरे पत्रकार जगत को झकझोर कर रख दिया है। जिले के वरिष्ठ पत्रकार सतीश मिश्रा पर जिंदल हॉस्पिटल के संचालक सुनील अग्रवाल एवं उसके कर्मचारियों द्वारा जानलेवा हमला किया गया। इस घटना के बाद न सिर्फ पत्रकारों में आक्रोश है बल्कि आम जनता भी आक्रोशित है.

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पत्रकार सतीश मिश्रा आज सुबह एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद परिजनों को शव ना देने के मामले की रिपोर्टिंग के सिलसिले में जिंदल हॉस्पिटल से जुड़े विषय पर जानकारी जुटा रहे थे। इसी दौरान हॉस्पिटल संचालक एवं कर्मचारियों द्वारा उन पर हमला किया गया। आरोप है कि यह हमला पूरी तरह सुनियोजित था और इसका उद्देश्य पत्रकार को डराना-धमकाना एवं चुप कराना था।

हमले के बाद पत्रकार सतीश मिश्रा तत्काल कोतवाली थाना पहुंचे और एफआईआर दर्ज कराने की मांग की। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि सुबह से शाम तक थाने के चक्कर काटने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

एफआईआर में देरी से बढ़ा आक्रोश

एफआईआर दर्ज न होने से पत्रकार समुदाय में भारी नाराजगी फैल गई। इसे न्याय में देरी और प्रभावशाली लोगों को संरक्षण देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पत्रकारों का कहना है कि जब एक पत्रकार सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक की सुरक्षा की कल्पना कैसे की जा सकती है?

पत्रकारों का डेलीगेशन पहुंचा एसपी कार्यालय

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रेस एसोसिएशन ऑफ सिवनी के अध्यक्ष अयोध्या विश्वकर्मा के नेतृत्व में पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल सुनील कुमार मेहता से मिला। डेलीगेशन ने पूरे घटनाक्रम से एसपी को अवगत कराते हुए निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई की मांग की।

एसपी से मुलाकात के बाद यह आश्वासन दिया गया कि एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी।

प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला?

यह घटना सिर्फ एक पत्रकार पर हमला नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा प्रहार मानी जा रही है। पत्रकार संगठनों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह भविष्य में और भी खतरनाक मिसाल बन सकती है।

पत्रकारों की मांग

  • दोषियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए
  • हमले में शामिल सभी आरोपियों की गिरफ्तारी हो
  • पत्रकार सतीश मिश्रा को सुरक्षा प्रदान की जाए
  • मामले की निष्पक्ष व समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए

सिवनी की यह घटना प्रशासन, पुलिस और समाज—तीनों के लिए एक कड़ी चेतावनी है। यदि पत्रकारों की आवाज को दबाने की कोशिशों पर समय रहते रोक नहीं लगी, तो इसका असर लोकतंत्र और जनहित दोनों पर पड़ेगा। अब देखना यह होगा कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में कितनी संवेदनशीलता और सख्ती दिखाते हैं।

सिवनी: धान खरीदी का काला सच! घर-घर बंट रहीं बोरियां, केन्द्रों पर मजदूर बेरोज़गार-प्रशासन की नाक के नीचे बड़ा खेल

विशेष रिपोर्ट | सिवनी, बरघाट, धारनाकला (एस.शुक्ला)- धान खरीदी व्यवस्था, जो किसानों और मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए बनाई गई थी, आज उसी व्यवस्था में खुलेआम मनमानी, भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का खेल खेला जा रहा है। धारणाकला क्षेत्र के धान खरीदी केन्द्रों पर जो हालात सामने आ रहे हैं, वे न सिर्फ चौंकाने वाले हैं बल्कि शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े करते हैं।

घर से ही तैयार होकर आ रही धान की बोरियां

धान खरीदी केन्द्रों पर नियमों को ताक पर रखकर ऐसा तंत्र खड़ा कर दिया गया है, जिसमें खरीदी केन्द्रों से खाली बारदाने सीधे किसानों के घरों तक पहुंचाए जा रहे हैं। वहीं, किसान घर से ही धान भरकर बोरियां तैयार कर रहे हैं और वही बोरियां सीधे खरीदी प्रांगण में लाकर खड़ी कर दी जा रही हैं।

इस पूरे खेल में न तो धान खरीदी केन्द्र के प्रांगण में गिराई जा रही है और न ही वहां मौजूद हम्माल व मजदूरों से तौल और भराई का काम कराया जा रहा है। परिणामस्वरूप, पूरा खरीदी तंत्र केवल कागजों और पोर्टल पर सिमटकर रह गया है।

धान खरीदी पोर्टल पर आंकड़े बढ़ाने की होड़

जानकारों के अनुसार यह पूरा खेल धान खरीदी पोर्टल पर खरीदी की मात्रा और कमीशन राशि बढ़ाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। प्रशासन की आंखों के सामने, दिनदहाड़े धान का यह काला बाजार फल-फूल रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह गोरखधंधा न तो रात के अंधेरे में हो रहा है और न ही चोरी-छिपे, बल्कि खुलेआम संचालित किया जा रहा है।

महिला स्व सहायता समूह भी विवादों में

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सहकारी समितियों के साथ-साथ महिला स्व सहायता समूहों को भी धान उपार्जन कार्य से जोड़ा गया था। बीते तीन-चार वर्षों से ये समूह इस व्यवस्था का हिस्सा हैं।

लेकिन कमीशन बढ़ाने की लालच में कुछ महिला स्व सहायता समूहों से जुड़े दलाल और ठेकेदार ही धान खरीदी में काला बाजारी को बढ़ावा दे रहे हैं। यह कोई नई बात नहीं है—पिछले सत्र में भी घर-घर बोरियां बांटने का खेल जमकर चला था, जो इस सत्र में और भी बेखौफ तरीके से जारी है।

हम्माल मजदूरों के हक पर खुला डाका

धान खरीदी केन्द्रों पर आमतौर पर 50 के करीब मजदूर, हम्माल और महिलाएं कार्यरत रहती हैं, जिन्हें धान की तुलाई और भराई का काम मिलता है। लेकिन जब धान पहले से भरी बोरियों में सीधे केन्द्रों तक पहुंचाई जाती है, तो इन मजदूरों को काम ही नहीं मिलता।

इतना ही नहीं, धान खरीदी के नाम पर मिलने वाली प्रशासनिक व्यय राशि भी कथित तौर पर हजम की जा रही है। यानी एक ओर मजदूरों का रोजगार छीना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकारी धन का भी दुरुपयोग हो रहा है।

स्लॉट बुकिंग बना भ्रष्टाचार का नया हथियार

किसानों की सुविधा के लिए शासन द्वारा स्लॉट बुकिंग प्रणाली लागू की गई थी, ताकि किसान आसानी से नजदीकी धान खरीदी केन्द्र में अपनी उपज बेच सकें। लेकिन अब यही व्यवस्था व्यापारियों और दलालों के लिए हथियार बन गई है।

कई मामलों में किसानों के नाम से पंजीकृत धान समीपी केन्द्रों के बजाय दूर-दराज के केन्द्रों में बेची जा रही है। वजह साफ है—वहीं केन्द्र ज्यादा चुने जा रहे हैं, जहां घर-घर खाली बारदाने देने की सुविधा उपलब्ध है। इसका सीधा असर आसपास के ईमानदार खरीदी केन्द्रों पर पड़ रहा है।

आंकड़ों का खेल और नियमों की अनदेखी

यही वजह है कि जिन धान खरीदी केन्द्रों पर कभी 40–50 हजार क्विंटल से ज्यादा खरीदी नहीं हुई, वे अब 80 हजार से 1 लाख क्विंटल तक के आंकड़े पार कर रहे हैं। नियमों की खुलेआम अनदेखी कर औसत और कमीशन बढ़ाने का खेल खेला जा रहा है, जो पूरे सिस्टम को खोखला कर रहा है।

प्रशासन का पक्ष

इस पूरे मामले पर प्रशासनिक अधिकारियों ने सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

“यदि इस तरह की गतिविधियां धान खरीदी केन्द्रों पर हो रही हैं, तो जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।” — अंजली शाह, जिला पंचायत सीईओ

“अगर ऐसी अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो जांच के बाद एफआईआर की कार्रवाई भी की जाएगी।” — मनोज पुरबिया, जिला खाद्य अधिकारी, सिवनी

अब सवाल यह है…

क्या धान खरीदी केन्द्रों में चल रहे इस खुले खेल पर वाकई लगाम लगेगी? या फिर मजदूरों, किसानों और शासन—तीनों की आंखों में धूल झोंककर यह काला कारोबार यूं ही चलता रहेगा?