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जैन स्टोन क्रेशर हुआ सील | सिवनी कलेक्टर के निर्देश पर हुई कार्यवाही

सिवनी- जिला के राजस्व मंडल सिवनी के अंतर्गत आने वाले ग्राम बाकी में सुधीर जैन द्वारा सचालित जैन स्टोन क्रेशर को आज तहसीलदार प्रभात मिश्रा द्वारा सील कर दिया गया है।

जिला कलेक्टर गोपालचन्र्द डाँड़ के निर्देश पर ऊक्त कार्यवाही हुई है,मालूम हो कई दिनों से इस क्रशर में अवैध उत्खनन की शिकायतें मिली थी,जिसके बाद आज 29 मई की दोपहर 2 बजे यह बड़ी कार्यव्ही की गई है।

डीइओ ने बीआरसीसी सिंह और 2 लिपिकों को जारी किया नोटिस

नवोदय प्रवेश परीक्षा मामले में डीइओ ने मांगा जवाब, वेतनवृद्धि रोकने की चेतावनी

सिवनी. जवाहर नवोदय विद्यालय कान्हीवाड़ा द्वारा आयोजित प्रवेश चयन परीक्षा से लखनादौन क्षेत्र के धूमा, मठदेवरी गांव के विद्यार्थी परीक्षा से वंचित हो गए थे। इस मामले में जांच के बाद डीइओ ने बीआरसीसी लखनादौन और दो बाबूओं को नोटिस कर जवाब तलब कर कार्रवाई की चेतावनी दी है।
डीइओ ने बताया कि जवाहर नवोदय विद्यालय कान्हीवाड़ा द्वारा २१ अपै्रल को कक्षा ६वीं में प्रवेश के लिए चयन परीक्षा का आयोजन किया गया था। इस परीक्षा में सरस्वती विद्या मंदिर धूमा एवं मठदेवरी में अध्ययनरत २२ छात्र-छात्राओं के परीक्षा से वंचित होने सम्बंधी शिकायत शिवकुमार साहू एवं मनोज पाठक के द्वारा सीएम हेल्पलाइन में दर्ज कराई गई थी।
इस प्रकरण में कलेक्टर सह जिला मिशन संचालक जिला शिक्षा केन्द्र सिवनी के द्वारा इस शिकायत की जांच डीइओ व दो प्राचार्यों के माध्यम से कराई गई थी। जांच अधिकारी द्वारा द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन में बताया गया कि प्रवेश फार्म का कार्य बीइओ/ बीआरसीसी के नियंत्रण में होना था। इस दौरान बीआरसीसी राहुल प्रताप सिंह प्रभारी विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी (बीइओ) लखनादौन का कार्य कर रहे थे। परीक्षा के नोडल अधिकारी भी इन्हें नियुक्त किया गया था। इन्हें ही परीक्षा आवेदन पत्र वितरण, संकलन एवं संकलन उपरांत जवाहर नवोदय विद्यालय में प्रस्तुत किए जाने की जवाबदारी थी। किंतु कार्य में समीक्षा न किए जाने के कारण २१ अपै्रल को आयोजित परीक्षा से २२ विद्यार्थी प्रवेश परीक्षा से वंचित हो गए थे।
परीक्षा जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य में लापरवाही बरती जाने एवं अपने पदीय कर्तव्यों एवं दायित्वों के निर्वहन में स्वेच्छाचारिता की जाकर कर्तव्यपरायण एवं उत्तरदायित्वों के समुचित निर्वाहन न करने जैसे कृत्य किए जाने पर यह कदाचरण की श्रेणी में माना आता है। इस सम्बंध में प्रमाण सहित जवाब २८ मई को डीइओ के समक्ष में उपस्थित होकर प्रस्तुत करने को कहा गया है। समय पर जवाब न मिलने, संतोषप्रद न होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उक्त आदेश कलेक्टर के निर्देश पर जारी किया गया है।




 

इनको जारी हुआ है नोटिस –
डीइओ एसपी लाल ने शुक्रवार को लखनादौन बीआरसीसी राहुल प्रताप सिंह, विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय लखनादौन में पदस्थ सहायक ग्रेड-२ हरिशंकर उसरेठे एवं इसी कार्यालय के सहायक ग्रेड-३ अजय कुमार उइके के नाम नोटिस जारी कर २८ मई को कार्यालय में उपस्थित होकर प्रमाण सहित जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है। समय अवधि में जवाब न प्राप्त होने अथवा संतोषप्रद जवाब न पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई अंतर्गत बीआरसीसी की एक वेतनवृद्धि एवं सहायक ग्रेड-२ एवं सहायक गे्रड-३ की तीन-तीन वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई की जाएगी।

रजनीश सिहँ को पड़ सकते टिकट के लाले

सिवनी- जिले कभी सभी दलों की राजनीति को सचालित करने में माहिर रहे कांग्रेस के कद्दावर नेता ,पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष स्व. हरवंश सिह के पुत्र वर्तमान में केवलारी विधायक रजनीश सिह की राजनैतिक जमीन पहले खिसक चुकी है।

पिता के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों व उनकी मौत के बाद उपजी सवेंदना लहर पर सवार होकर विस चुनाव जीतने में सफल हुए रजनीश सिह अब प्रदेश कांग्रेस की गुटीय राजनिति में ऐसे फसे है कि उन्हें अब अपनी टिकट पक्की नजर नही आ रही है। दरअसल वे पूर्व मध्यप्रदेश के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अरूण यादव के साथ खड़े रहे वही कमलनाथ को छोड़ वे कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की शरण मे दिखायी दिए।




 

इसी बीच कमलनाथ की ताजपोशी होते ही रजनीश सिह उपरोक्त मामले में अपनी सफाई देने कमलनाथ के पास गए लेकिन वहां से उन्हें निराश होने पडा , सूत्रों की माने तो कमलनाथ ने दो टूक जबाव देते हूए कहा कि वे विस टिकट के लिये उनके भरोसे ना रहे बल्कि वे सिंधिया के पास जाए। वही रजनीश सिह नव नियकुत जिला अध्यक्ष पप्पू खुराना को हटाने के लिये दिल्ली में अपने आकाओ की शरण मे है जहाँ वे पप्पू खुराना के बहाने कमलनाथ पर दवाब बनाने का प्रयास कर रहे है।

मानव अधिकार आयोग के नाम से मिलते-जुलते नाम का दुरूपयोग न किया जाये

सिवनी – राज्य शासन द्वारा जिला कलेक्टर्स को परिपत्र जारी कर निर्देशित किया है कि कतिपय संगठनों के द्वारा राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग एवं राज्य मानव अधिकार आयोग के नामों से मिलते-जुलते नाम एवं लोगो का उपयोग किया जा रहा है। इस पर रोक लगाने के लिये आवश्यक कार्यवाही की जाये एवं इस तरह के प्रकरण संज्ञान में आने पर प्रतिवेदन राष्ट्रीय मानव अधिकार को भेजे जायें।

मध्यप्रदेश में 15 दिसम्बर से होंगे चुनाव

सिवनी-मुख्य चुनाव आयोग ने मध्य प्रदेश ,छत्तीसगढ सहित राजस्थान मे विधान सभा चुनाव कि तारिखो का किया ऐलान १५दिसम्बर से होगा पहले चरण गा मतदान कुल चार चरणो मे होगे मतदान १५दिसम्बर ,५ जनवरी ,७जनवरी २०जनवरी चार चरण में चुनाव होंगे विधानसभा चुनाव है ।।

कर्मचारियों ने कराया मुंडन

सिवनी- वन कर्मचारी संघ सिवनी के तत्वावधान में जारी हड़ताल के दौरान आज अपनी लंबित मागों को पूर्ण कराने को लेकर कर्मियो ने विरोध स्वरूप मुंडन कराया ।

मालूम हो संघ के बैनर तले अधिकारी व कर्मचारि 19 मांगो को लेकर हड़ताल पर आमादा है।

बैन हुए 3 फल और सब्जियां, भारत पर ‘खतरा’ | निपाह वायरस

केरल में निपाह वायरस का खौफ थमने का नाम नहीं ले रहा. हर दिन कोई नई जानकारी सामने आ रही है. एक तरफ जहां अब तक इस वायरस से 14 मौत हो चुकी हैं.

नई दिल्ली: केरल में एक तरफ निपाह वायरस का खतरा टलने का नाम नहीं ले रहा. वहीं, भारत के लिए भी यह सबसे बड़ा खतरा बनता जा रहा है. निपाह वायरस से जहां अब तक 14 मौत हो चुकी हैं. वहीं, केरल से फलों और सब्जियों को भी बैन कर दिया गया है. निपाह वायरस के चलते ही इन फलों को बैन किया गया है. इससे भारत के एक्सपोर्ट पर सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है. WHO का दावा है कि यह वायरस चमगादड़ की लार, यूरीन और मलमूत्र से फैलता है. खासकर उन फलों के जरिए जो चमगादड़ अक्सर पेड़ पर चखते हैं. विशेष रूप से यह ग्रेटर इंडियन फ्रूट बैट हैं, जो दक्षिण एशिया में प्रचुर मात्रा में हैं, जिसमें निपाह वायरस होता है. चेतावनी जारी होने के बाद दूसरे देश भी निपाह वायरस को लेकर अलर्ट हो गए हैं.

किन फलों को किया गया बैन
केरल के स्थानीय अखबारों के मुताबिक, निपाह वायरस के खतरे को देखते हुए यूनाइटेड अरब एमिरेट्स (यूएई) और बेहरीन ने केरल से एक्सपोर्ट होने वाले फलों और सब्जियों को बैन कर दिया है. दोनों देशों ने केंद्र सरकार को इस बाबत सूचना दी है. निपाह वायरस का खतरा बताते हुए जिन फलों को बैन किया गया उनमें केला, आम, अंगूर हैं. इसके अलावा खजूर के एक्सपोर्ट पर भी रोक है. इसके अलावा सब्जियां भी बैन की गई हैं. निपाह वायरस की वजह से एक्सपोर्ट पर होने वाले नुकसान पर वाणिज्य मंत्रालय नजर रख रहा है. वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, अगर हालात नहीं सुधरते तो एजेंसियों को इससे निपटने के लिए कहना होगा.

Nipah Virus: इसकी चपेट में आए तो नहीं हो पाएगा इलाज, जानें बचाव के उपाय

किन फलों को किया गया बैन
केरल के स्थानीय अखबारों के मुताबिक, निपाह वायरस के खतरे को देखते हुए यूनाइटेड अरब एमिरेट्स (यूएई) और बेहरीन ने केरल से एक्सपोर्ट होने वाले फलों और सब्जियों को बैन कर दिया है. दोनों देशों ने केंद्र सरकार को इस बाबत सूचना दी है. निपाह वायरस का खतरा बताते हुए जिन फलों को बैन किया गया उनमें केला, आम, अंगूर हैं. इसके अलावा खजूर के एक्सपोर्ट पर भी रोक है. इसके अलावा सब्जियां भी बैन की गई हैं. निपाह वायरस की वजह से एक्सपोर्ट पर होने वाले नुकसान पर वाणिज्य मंत्रालय नजर रख रहा है. वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, अगर हालात नहीं सुधरते तो एजेंसियों को इससे निपटने के लिए कहना होगा.

कितना होता है फलों का एक्सपोर्ट
एग्रीकल्चर और प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA) के मुताबिक, पिछले साल भारत से कुल 4448.08 करोड़ के फल एक्सपोर्ट किए गए थे. इसमें ज्यादातर आम, अंगूर, केला और अनार शामिल हैं. भारत सबसे बड़ा केले का उत्पादक देश है, यहां 26.04% केला पैदा होता है. वहीं, 44.51% पपीता और 40.75% आम पैदा होता है. कॉर्मस मिनिस्ट्री रीता तेवतिया के मुताबिक, पिछले साल भारत से आम का एक्सपोर्ट 52761 टन पहुंच था.

कहां होता है सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट
APEDA के मुताबिक, भारत से जिन देश में सबसे ज्यादा फल और सब्जियां एक्सपोर्ट होती हैं उनमें UAE, बांग्लादेश, मलेशिया, नीदरलैंड, श्रीलंका, नेपाल, UK, सऊदी अरब, पाकिस्तान और कतर हैं.

तीसरी बार भारत आया निपाह
केरल में निपाह वायरस के चलते हुई मौत कोई पहली घटना नहीं है. इससे पहले भी दो बार पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस का अटैक हो चुका है. 2001 में सिलीगुड़ी में निपाह वायरस का खतरा मंडराया था. वहीं, 2007 में नादिया में निपाह वायरस का अटैक हुआ था. इस बार यह देश के दक्षिण राज्य में पहुंचा है. जहां कोझीकोड़ में एक ही परिवार के लोगों में यह पाया गया.

टॉप 5 फल जो होते हैं एक्सपोर्ट
काजू: 856.85 मिलियन डॉलर यानी 5700 करोड़ रुपए
अंगूर: 230.7 मिलियन डॉलर यानी 1534.78 करोड़ रुपए
आम: 163.22 मिलियन डॉलर यानी 1085.86 करोड़ रुपए
नारियल: 78.54 मिलियन डॉलर यानी 522.50 करोड़ रुपए
अनार: 76.36 मिलियन डॉलर यानी 508 करोड़ रुपए
कुल फल एक्सपोर्ट: 1610 मिलियन डॉलर यानी 10710 करोड़ रुपए



Nipah Virus: इसकी चपेट में आए तो नहीं हो पाएगा इलाज, जानें बचाव के उपाय

Nipah Virus से बचने के हैं ये आसान तरीकें,48 घंटे के भीतर कोमा में जा सकता है मरीज

नई दिल्ली। आजकल पूरा देश ‘निपाह वायरस’ की वजह से दहशत में है, केरल से लेकर दिल्ली तक, तमिलनाडु से लेकर कन्याकुमारी तक लोग इस वायरस के कारण भयभीत हैं लेकिन लोगों को इसकी वजह से डरने की जरूरत नहीं है बल्कि सावधान रहने की आवश्यकता है। क्या है ‘निपाह वायरस’ ‘निपाह वायरस’ एक तरह का पशुजन्य रोग है, मेडिकल टर्म में इसे NIV वायरस भी कहा जाता है। ये वायरस Paramyxoviridae family का सदस्य है, जो कि जानवर से फलों में और फलों के जरिए व्यक्तियों में फैलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक निपाह वायरस (NiV) तेजी से उभरता वायरस है।

मलेशिया के कम्पंग सुंगाई में हुआ पहला केस

NiV के बारे में सबसे पहले 1998 में मलेशिया के कम्पंग सुंगाई निपाह से पता चला था, वहीं से इस वायरस को ये नाम मिला। उस वक्त इस बीमारी के वाहक सूअर थे और आज इस बीमारी के वाहक चमगादड़ हैं। इसके बाद से इन वायरस के केस साउथ एशिया ( भारत, बांग्लादेश, मलेशिया और सिंगापुर) में देखे गए। भारत में ‘निपाह वायरस’ का पहला मामला वर्ष 2001 के जनवरी और फरवरी माह में पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी में दर्ज किया गया था। इस दौरान 66 लोग निपाह वायरस से संक्रमित हुए थे। इनमें से उचित इलाज न मिलने की वजह से 45 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, ‘निपाह वायरस’ का दूसरा हमला वर्ष 2007 में पश्चिम बंगाल के नदिया में दर्ज किया गया, उस वक्त पांच मामले दर्ज किए गए थे, इसमें से पांचों की मौत हो गई थी।

फ्रूट बैट

इसके कुछ वक्त बात इस वायरस का संक्रमण उन लोगों में देखा गया, जिन्होंने खजूर के पेड़ से निकलने वाले तरल को चखा या पेड़ से गिरे हुए खजूर खाए, कहा गया कि ये खजूर चमगादड़ की वजह से संक्रमित थे और इस वजह से इन्हें ‘फ्रूट बैट’ कहा गया, जिसके कारण इस वायरस के चमगादड़ वाहक बने।




एनआईवी वायरस के लक्षण

‘निपाह वायरस’ की चपेट में आने वाले इंसान को तेज बुखार,दिमाग या सिर में तेज जलन,दिमाग में सूजन और दर्द,मानसिक भ्रम, सांस लेने में परेशानी होती है। संक्रमण बढ़ने से मरीज कोमा में भी जा सकता है, इसके बाद इंसान की मौत हो जाती है। ये वायरस एन्सेफलाइटिस सिड्रोंम के जरिए बहुत तेजी से फैलता है। डाक्टरों ने इसे घातक इंसेफ्लाइटिस या दिमागी बुखार कहा है।सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक ‘निपाह वायरस’ काइंसेफ्लाइटिस से जुड़ा है, जिसमें दिमाग को नुकसान पहुंचता है।

इस बीमारी को दूर करने के लिए कोई वैक्सीन नहीं

इस वायरस की चपेट में आने के बाद बहुत से मरीजों को इलाज के दौरान आईसीयू व वेंटीलेटर की जरूरत पड़ती है। 5 से 14 दिन तक इसकी चपेट में आने के बाद ये वायरस तेज बुखार और सिरदर्द की वजह बन सकता है, ये लक्षण 24-48 घंटों में मरीज को कोमा में पहुंचा सकते हैं, संक्रमण के शुरुआती दौर में सांस लेने में समस्या होती है जबकि आधे मरीजों में न्यूरोलॉजिकल दिक्कतें भी हो सकती हैं।

गंभीर दिमागी बीमारी

साल 1998-99 में जब ये बीमारी फैली थी तो इस वायरस की चपेट में 265 लोग आए थे, जिन्हें अस्पतालों में भर्ती किया गया लेकिन इनमें से केवल 20% मरीज ऐसे थे जिन्हें गंभीर दिमागी बीमारी हुई थी और ये बच नहीं पाए थे। इनमें ये संक्रमण चमगादड़ों, सूअरों या फिर दूसरे इंसानों से फैला था। मलेशिया और सिंगापुर में जानवरों के कारण इस रोग के फैलने की जानकारी मिली थी जबकि भारत और बांग्लादेश में इंसान से इंसान का संपर्क होने पर ये रोग फैला है।

डायग्नोसिस

वायरस का डायग्नोसिस आरटी-पीसीआर के द्वारा गले- नाक के सेरेब्रोस्पाइनल तरल पदार्थ, मूत्र और रक्त का टेस्ट करने से किया जाना चाहिए। ईएलआईएसए (आईजीजी और आईजीएम) द्वारा इस वायरस की एंटीबॉडी का पता लगाया जा सकता है। ‘निपाह वायरस’ संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में फैल सकता है। मानव से मानव में संक्रमण के नियंत्रण के लिये बैरियर नर्सिंग तकनीक महत्वपूर्ण है। ‘निपाह वायरस’ की अभी कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन निपाह वायरस के जी ग्लाइकोप्रोटीन के द्वारा बनाने वाले मोनोक्लोनल एंटीबॉडी का उपयोग पैसिव वैक्सीनेशन के रूप में करने के बाद लाभ पाया गया है।

उपचार

‘निपाह वायरस’ का इलाज खोजा नहीं जा सका है, इस रोग से ग्रस्त लोगों का इलाज मात्र रोकथाम है। इस वायरस से बचने के लिए फलों, खासकर खजूर खाने से बचना चाहिए। पेड़ से गिरे फलों को नहीं खाना चाहिए, जब भी बाहर से कोई फल लेकर आए उसे अच्छे से गर्म पानी में धोकर खाएं।

संक्रमित रोगी से दूर रहें

इसे रोकने के लिये संक्रमित रोगी से दूरी बनाए रखने की जरूरत होती है। पीड़ित से यदि मिलना ही पड़े तो बाद में साबुन से अपने हाथों को अच्छी तरह से धो लें। आमतौर पर शौचालय में इस्तेमाल होने वाली चीजें, जैसे बाल्टी और मग को खास तौर पर साफ रखें। ‘निपाह बुखार’ से मरने वाले किसी भी व्यक्ति के मृत शरीर को ले जाते समय चेहरे को ढंकना महत्वपूर्ण है, मृत व्यक्ति को गले लगाने से बचें और उसके अंतिम संस्कार से पहले शरीर को स्नान करते समय सावधानी बरतें। अपने पालतू जानवरों को भी संक्रमित जानवरों, संक्रमित इलाकों या संक्रमित व्यक्ति से दूर रखें। अगर आपको जरा भी बुखार का अनुभव हो या फिर सांस लेने में दिक्कत लगे तो तुरंत डॉक्टर से मिले।



पशुओं के लिये टोल फ्री नं. 1962 | घर पहुच इलाज़ करेंगे डॉक्टर

सिवनी – पशुपालन विभाग मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रथम चरण में प्रदेश के 13 जिलों में 15 मई से नि:शुल्क काल सेन्टर 1962 पशु संजीवनी सेवा केन्द्र की सेवायें प्रारंभ की गई है। इस काँल सेन्टर के माध्यम से पशुपालक द्वारा टोल फ्री नम्बर 1962 पर काल करने पर पशुपालक को घर पर ही समय पर उनके बीमार पशु को नि:शुल्क पशु उपचार सुविधा उपलब्ध कराई जाती है एवं पशुपालक की प्रजनन योग्य मादा गाय अथवा भैस के गर्मी/ऋतु में आने पर पशुपालक की पसंद अनुसार अधिकतम उत्पादकता क्षमता वाले हिमीकृत वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान सुविधा प्रदाय की जाती र्है| साथ ही पशुपालकों को पशुपोषण एवं पशुआहार से संबंधित जानकारी के संबंध में विशेषज्ञों से मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के साथ-साथ पशुपालन विभाग की विभिन्न विभागीय योजनाओं की जानकारी भी दी जाती है। इस प्रकार पशुधन संजीवनी 1962 स्वस्थ पशु, खुशहाल किसान के लक्ष्य को ध्यान में रखकर अपनी अलग पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। जिले के पशुपालकों से अनुरोध है कि टोल फ्री नम्बर 1962 पशु संजीवनी सेवा केन्द्र में काल करके नि:शुल्क सेवा का लाभ उठायें एवं अपने पशुओं को स्वस्थ रखे। उत्पादकता बढ़ायें एवं पशुपालन को लाभ का धन्धा बनायें।

सुविधा जस की तस – बढ़ गया बसो का किराया

सिवनी- केंद्र सरकार द्वारा डीजल के दामों में लगातार हो रहीं व्रद्धि के बाद बस मालिकों ने किराया बढ़ाने की मांग करते हुए हड़ताल की थी।

यात्रियों को हुईं परेशानी के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने फिलहाल किराया में 10 प्रतिशत बढ़ाने का फ़ैसला लिया है।

घोषणा होने के बाद बसो का किराया अवैध रूप से बढ़ाया गया है जबकि नियम अनुसार राजपत्र में बिना प्रकासन के किराया नही बढ़ाया जा सकता।

ये भी सही है कि डीजल के दामों में बढ़ोतरी से बस मालिको को सचालन में दिक्कतें हो रही थी,लेकिन किराया व्रद्धि के बाद भी बस मालिकों ने ओवर लोड बस सचालन बन्द नही किया है।

स्लीपर व डीलक्स बसो में फस्ट ऐड बॉक्स,किरया सूची,परमिट,फिटनेस, सहित अन्य दस्तावेज उपलब्ध नही है,वही यात्रियों से वाहन में नियुक्त चालक परिचालक पहले की तरह ही दुर्व्यवहार कर रहे है।।

नियम अनुसार सभी बसो के चालक परिचालकों को नियत वेश भूषा व नाम की पट्टी लगानि होती थी,पर ये कार्य भी नही हो पा रहा है।