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SEONI: धान की ढुलाई में बड़ा घोटाला! सरकारी नियमों की धज्जियां, परिवहनकर्ता की मनमानी से सरकार को लाखों का चूना

SEONI DHAN GHOTALA। जिले में इन दिनों सरकारी नीतियों के तहत धान उपार्जन का कार्य जोरों पर है। किसान अपनी मेहनत की फसल को समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए उपार्जन केंद्रों तक पहुंच रहे हैं, लेकिन इसी बीच धान परिवहन में बड़ा खेल सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, परिवहनकर्ता शासकीय आदेशों और नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए अपनी मर्जी से धान का परिवहन कर रहे हैं। जबकि शासकीय अमले द्वारा न्यूनतम दूरी और न्यूनतम परिवहन व्यय के आधार पर गोदामों की विधिवत मैपिंग की गई है, इसके बावजूद नियमों का पालन नहीं किया जा रहा।

मैपिंग के बावजूद लंबी दूरी तक ढुलाई, मुनाफे की साजिश?

खवासा, पीपरवानी और पाटन खरीदी केंद्रों से पर्व वेयरहाउस कोदाझिरी (कुरई) की मैपिंग न्यूनतम दूरी के आधार पर की गई थी। लेकिन परिवहनकर्ता जानबूझकर इन गोदामों में धान खाली नहीं कर रहे, बल्कि उसे लंबी दूरी तय कर सिवनी के निजी गोदामों—जैन वेयरहाउस सोनादोंगरी और KKR वेयरहाउस—में पहुंचाया जा रहा है

सूत्रों की मानें तो इसका मकसद अधिक परिवहन व्यय दिखाकर ज्यादा मुनाफा कमाना और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाना है। यही नहीं, गोपालगंज और शिवगंगा वेयरहाउस हरहरपुर जैसे शासकीय गोदाम खाली पड़े हुए हैं, फिर भी वहां माल नहीं भेजा जा रहा।

दस्तावेजी सबूत मिले, आरोपों की हुई पुष्टि

उपार्जन समिति माँ दुर्गा स्वसहायता समूह, भंडारपुर केंद्र (दरासीकला) द्वारा शिवगंगा वेयरहाउस हरहरपुर के धर्मकांटे से तौल कर धान सौंपा जा रहा है, लेकिन इसके बाद भी परिवहनकर्ता वहां माल खाली नहीं कर रहे और अनावश्यक रूप से लंबी दूरी तय कर रहे हैं

इस पूरे मामले की पड़ताल में महत्वपूर्ण दस्तावेज हाथ लगे हैं, जिनसे नियमों के उल्लंघन और मनमानी परिवहन की पुष्टि होती है।

अब सवाल—कब होगी कार्रवाई?

यह मामला केवल नियमों की अनदेखी का नहीं, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग और सुनियोजित गड़बड़ी का संकेत देता है। अब देखना यह है कि प्रशासन और संबंधित विभाग कब तक इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हैं और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई कब होती है।

यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह धान उपार्जन व्यवस्था पर भरोसे को गहरा झटका दे सकता है और किसानों के हितों को भी नुकसान पहुंच सकता है।

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सिवनी के बबरिया तालाब का गिरने लगा जल स्तर: तालाब का पानी खेतों में गया तो होगी सीधी कार्रवाई! मोटर लगाने पर सख्त प्रतिबंध

सिवनी: नगर के प्रमुख जलस्रोत बबरिया तालाब को लेकर नगरपालिका परिषद सिवनी ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। लगातार घटते जलस्तर और बीते वर्ष ग्रीष्म ऋतु में उत्पन्न हुए गंभीर जल संकट को देखते हुए अब तालाब से मोटर लगाकर पानी लेने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह फैसला सीधे तौर पर किसानों और आम नागरिकों से जुड़ा है।

नगरपालिका द्वारा जारी अपील में स्पष्ट किया गया है कि बबरिया तालाब नगरपालिका की संपत्ति है और इसका प्राथमिक उद्देश्य पेयजल आपूर्ति है, न कि फसल सिंचाई। बावजूद इसके कुछ किसानों द्वारा मोटर लगाकर लगातार पानी निकाले जाने से तालाब का जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है, जो आने वाले समय में पूरे शहर के लिए खतरे की घंटी बन सकता है।

पिछले अनुभव से लिया गया सबक

नगरपालिका अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्ष गर्मी के मौसम में जलस्तर अत्यधिक गिर जाने के कारण नगर में पेयजल संकट जैसी स्थिति बन गई थी। कई वार्डों में पानी की आपूर्ति बाधित रही और नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार पहले से ही सख्ती बरतने का निर्णय लिया गया है।

अब नहीं चलेगी मनमानी

नगरपालिका ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि कोई भी किसान या व्यक्ति बबरिया तालाब में अवैध रूप से मोटर लगाकर पानी लेते हुए पाया गया, तो उसकी मोटर तत्काल जब्त की जाएगी और संबंधित व्यक्ति पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई की पूरी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की स्वयं की होगी।

जनहित में सहयोग की अपील

नगरपालिका परिषद ने किसानों और नगरवासियों से अपील की है कि वे इस निर्णय को सहयोग की भावना से स्वीकार करें और जल संरक्षण में सहभागी बनें। तालाब का पानी सुरक्षित रहेगा तभी आने वाली भीषण गर्मी में शहर को पर्याप्त पेयजल मिल सकेगा।

जल है तो कल है

बबरिया तालाब केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि पूरे नगर की जीवनरेखा है। आज यदि इसे बचाया गया, तभी कल प्यासे शहर से बचा जा सकेगा। नगरपालिका का यह कदम भविष्य की जरूरतों को देखते हुए उठाया गया एक जरूरी और साहसिक निर्णय माना जा रहा है।

2 दिन प्यासा रहेगा सिवनी? जानिए 8 एवं 9 जनवरी को क्यों ठप रहेगी शहर की जलापूर्ति

सिवनी। अगर आप सिवनी शहर में रहते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। 8 जनवरी 2026 (गुरुवार) को शहर की जलापूर्ति व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित रहने वाली है। मुख्य नगरपालिका अधिकारी, सिवनी द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार पुरानी–नवीन जलावर्धन योजना के अंतर्गत बबरिया प्लांट में सी.एल.एफ. (CLF) की सफाई का महत्वपूर्ण कार्य किया जाएगा, जिसके चलते सुबह से शाम तक नलों में पानी नहीं पहुंचेगा।

कितने बजे से कितने बजे तक बंद रहेगी पानी सप्लाई?

नगरपालिका प्रशासन के अनुसार 8 जनवरी को सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक शहर में

  • डायरेक्ट जलापूर्ति
  • पानी टंकियों से होने वाली सप्लाई

दोनों ही पूरी तरह प्रभावित रहेंगी। इस दौरान नगर की सभी पानी टंकियों में भराव कार्य भी बंद रहेगा, जिससे पूरे शहर में पेयजल संकट जैसी स्थिति बन सकती है।

9 जनवरी को भी पूरी तरह राहत नहीं

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि 9 जनवरी 2026 को भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं होंगे। इस दिन डायरेक्ट एवं टंकी से जुड़े क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति आंशिक रूप से की जाएगी। यानी कुछ इलाकों में पानी आएगा, जबकि कई क्षेत्रों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

नगरपालिका की अपील – अभी से कर लें तैयारी

आने वाली असुविधा को देखते हुए नगरपालिका प्रशासन ने शहरवासियों से अपील की है कि कम से कम एक दिन का पानी पहले से संग्रहित कर लें, ताकि पेयजल, खाना बनाने और दैनिक जरूरतों में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

लापरवाही पड़ी भारी तो बढ़ सकती है दिक्कत

हर बार की तरह इस बार भी जलापूर्ति बाधित होने की सूचना पहले ही जारी कर दी गई है। ऐसे में यदि लोग समय रहते पानी संग्रहित नहीं करते हैं, तो उन्हें गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

नगरवासियों से अनुरोध है कि इस सूचना को अपने मोहल्ले, रिश्तेदारों और पड़ोसियों तक जरूर पहुंचाएं, ताकि सभी लोग समय रहते सतर्क हो सकें।

सिवनी में डिजिटल अरेस्ट से लेकर OTP फ्रॉड तक-गांव में खुली साइबर ठगी की पोल! साइबर फ्रॉड से बचाने चला CSC का बड़ा जागरूकता अभियान

सिवनी। तेजी से डिजिटल हो रहे ग्रामीण भारत में जहां ऑनलाइन सेवाएं लोगों की जिंदगी आसान बना रही हैं, वहीं साइबर ठग भी नए-नए हथकंडे अपनाकर भोले-भाले ग्रामीणों को निशाना बना रहे हैं। इन्हीं बढ़ती साइबर ठगी की घटनाओं पर लगाम लगाने के उद्देश्य से सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) के माध्यम से सिवनी जिले की ग्राम पंचायत आष्ठा में एक महत्वपूर्ण साइबर जागरूकता एवं प्रशिक्षण अभियान चलाया गया।

इस अभियान का आयोजन सीएससी द्वारा संचालित वीज़ा सीएसआर कार्यक्रम के अंतर्गत किया गया, जिसमें सीएससी वीएलई अनमोल बिसेन द्वारा ग्रामीणों को साइबर फ्रॉड से बचाव की व्यावहारिक और जरूरी जानकारी दी गई।

OTP कॉल, फर्जी डिजिटल अरेस्ट और आधार लिंक ठगी पर खास फोकस

प्रशिक्षण के दौरान ग्रामीणों को बताया गया कि—

  • यदि कोई अनजान कॉलर बैंक, केवाईसी या ओटीपी मांगे तो तुरंत सतर्क हो जाएं
  • किसी भी स्थिति में OTP, ATM पिन या बैंक डिटेल साझा न करें
  • ठग “डिजिटल अरेस्ट” जैसे शब्दों का डर दिखाकर लोगों को फंसाते हैं
  • आधार से जुड़े बैंक खातों की जानकारी को कैसे सुरक्षित रखा जाए
  • फिशिंग लिंक, फर्जी मैसेज और नकली कॉल से कैसे बचें

ग्रामीणों को वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया कि कैसे एक छोटी सी लापरवाही बड़ी आर्थिक ठगी में बदल सकती है।

एससी का उद्देश्य: ग्रामीणों को बनाना डिजिटल रूप से सुरक्षितसीएससी जिला प्रबंधक शिवांशु जंघेला

इस अवसर पर सीएससी जिला प्रबंधक शिवांशु जंघेला ने बताया कि

“सीएससी वीज़ा के सहयोग से जिलेभर में यह जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के लोग ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट और अन्य साइबर खतरों से सुरक्षित रह सकें। जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।”

महिलाएं, युवा और ग्रामीणों की रही सक्रिय भागीदारी

प्रशिक्षण शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और युवा शामिल हुए। सभी ने साइबर सुरक्षा से जुड़े सवाल पूछे और प्रशिक्षण को उपयोगी बताया।
सीएससी वीएलई द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं ताकि ग्रामीण डिजिटल सेवाओं का लाभ लेते हुए सतर्क, जागरूक और सुरक्षित रह सकें।

जागरूकता ही सुरक्षा की पहली दीवार

बढ़ते साइबर अपराधों के बीच इस तरह के अभियान ग्रामीण समाज के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच बन रहे हैं। समय रहते मिली जानकारी न सिर्फ पैसे की बचत करती है, बल्कि डिजिटल भरोसे को भी मजबूत करती है।

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Seoni School Timing Change: सिवनी में बदला स्कूलों का समय, कलेक्टर का बड़ा आदेश जारी; कड़ाके की ठंड का असर

Seoni School Timing Change: लगातार गिरते तापमान और बढ़ती ठंड को देखते हुए सिवनी जिला प्रशासन ने बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए स्कूल समय में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। कलेक्टर शीतला पटले द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब जिले के सभी स्कूलों में नर्सरी से कक्षा 8वीं तक की कक्षाएँ सुबह 9:30 बजे से पहले संचालित नहीं होंगी।

यह आदेश दिनांक 05 जनवरी 2026 को जारी किया गया है और इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। प्रशासन का मानना है कि अत्यधिक ठंड के कारण छोटे बच्चों को सुबह-सुबह स्कूल भेजना उनके स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

किन स्कूलों पर लागू होगा आदेश?

यह आदेश सिवनी जिले के अंतर्गत आने वाले सभी प्रकार के स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा, जिनमें शामिल हैं—

  • शासकीय विद्यालय
  • अशासकीय विद्यालय
  • सीबीएसई (CBSE)
  • आईसीएसई (ICSE)
  • अनुदान प्राप्त विद्यालय
  • मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय

यानि जिले में संचालित कोई भी स्कूल इस आदेश से बाहर नहीं रहेगा।

क्यों लिया गया यह फैसला?

जिले में लगातार तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। सुबह के समय अत्यधिक ठंड, कोहरा और ठंडी हवाओं के कारण बच्चों के बीमार पड़ने की आशंका बढ़ गई है। विशेषकर छोटे बच्चों में सर्दी, खांसी, बुखार जैसी समस्याओं का खतरा अधिक रहता है।

इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने यह एहतियाती कदम उठाया है।

परीक्षाओं को लेकर क्या कहा गया?

कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि—

  • ✔ परीक्षाएँ पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही संचालित होंगी
  • ✔ अन्य आवश्यक शैक्षणिक गतिविधियाँ यथावत जारी रहेंगी
  • ✔ केवल कक्षा संचालन के समय में ही बदलाव किया गया है

अभिभावकों और शिक्षकों ने ली राहत की सांस

स्कूल समय में बदलाव के फैसले से अभिभावकों और शिक्षकों में संतोष देखा जा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि इससे बच्चों को ठंड से राहत मिलेगी और उनकी सेहत सुरक्षित रहेगी।

खबर का असर: सिवनी में अमानक धान पर बड़ा एक्शन, उपार्जन केंद्र को कारण बताओ नोटिस-गुणवत्ता से खिलवाड़ उजागर!

सिवनी। जिले में धान खरीदी को लेकर उठे गंभीर सवालों पर खबर सत्ता में प्रकाशित रिपोर्ट का बड़ा असर सामने आया है। “सिवनी में धान खरीदी पर बड़ा खेल? अमानक धान थोपने के आरोप, सर्वेयर हटाए गए—गुणवत्ता पर संकट” शीर्षक से 31 दिसंबर को प्रकाशित खबर के बाद प्रशासन हरकत में आया है।

खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के लिए संचालित समृद्धि वेयरहाउस साजपानी (केंद्र कोड: 59337267) का कलेक्टर के निर्देश पर विकासखंड स्तरीय उपार्जन समिति द्वारा सघन निरीक्षण किया गया। निरीक्षण टीम ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की उपस्थिति में केंद्र का बारीकी से परीक्षण किया, जिसमें कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं। इसके बाद केंद्र प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस की तामील कर दी गई है।

निरीक्षण में सामने आईं चौंकाने वाली अनियमितताएं

निरीक्षण के दौरान जो तथ्य सामने आए, वे धान खरीदी व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं—

  • केंद्र पर स्व-सहायता समूह की श्रीमती प्रेमलता सोनिया उपस्थित पाई गईं, लेकिन खरीदी कार्य का लेखा-जोखा रजिस्टर समय पर प्रस्तुत नहीं किया गया।
  • तौल के समय 38.80 किलोग्राम वजनी धान की बोरियां सिलकर रखी पाई गईं, जो नियमों के विपरीत है।
  • जिन बोरियों को सर्वेयर द्वारा FAQ (मानक) बताया गया था, उन्हें खोलकर सैंपलिंग कराई गई तो वे नॉन-FAQ निकलीं।
  • कई बोरियों पर किसान कोड टैग अंकित नहीं था, इसके बावजूद उनकी सिलाई कर दी गई
  • बिना चालान जारी किए ही बोरियों को गोदाम के भीतर स्टैकिंग किया गया।
  • स्टैक नंबर 09, जिसे पहले FAQ बताया गया था, जांच में फेल पाया गया; पंचनामा तैयार कर स्टैक फेल घोषित किया गया।
  • किसानों के लिए बैठने और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं थीं।

इन कृत्यों को उपार्जन नीति की कंडिका 8.1, 10 एवं 11.3 का स्पष्ट उल्लंघन माना गया है।

48 घंटे की मोहलत, नहीं दिया जवाब तो एकपक्षीय कार्रवाई

प्रशासन ने केंद्र को निर्देशित किया है कि वह 02 दिवस (48 घंटे) के भीतर लिखित जवाब के साथ उपस्थित होकर अपना पक्ष रखे। अनुपस्थिति या असंतोषजनक जवाब की स्थिति में एकपक्षीय कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी—जिसमें केंद्र की मान्यता, जिम्मेदारों पर दंडात्मक कार्रवाई और आगे की खरीदी पर रोक तक शामिल हो सकती है।

आखिर क्यों बन रही है यह स्थिति?

जानकारों के अनुसार इस सत्र में किसानों का उत्पादन अपेक्षाकृत कम रहा है। ऐसे में पंजीयन पूरा कराने के लिए कुछ व्यापारी बाहर से अमानक धान मंगाकर खपाने की कोशिश कर रहे हैं। यही धान परिवहन के दौरान भंडारण केंद्रों तक पहुंच रहा है और रिजेक्ट श्रेणी में आ रहा है। हालांकि सर्वेयर और सुपरवाइजर की नियुक्ति का उद्देश्य गुणवत्ता सुनिश्चित करना है, लेकिन राजनीतिक दबाव के आरोपों के बीच अमानक धान को भी मानक दिखाकर जमा कराने के प्रयास सामने आ रहे हैं।

आगे क्या होगा? मिलिंग के वक्त खुलेगा ‘अमानक’ का सच

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सख्ती नहीं हुई, तो मिलर्स द्वारा मिलिंग के लिए धान उठाव के दौरान अमानक धान की सच्चाई उजागर होगी—जिसका आर्थिक नुकसान, सरकारी व्यवस्था की साख और किसानों के हित—तीनों पर भारी असर पड़ेगा।

खबर के बाद हुई कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि निगरानी और जवाबदेही ही व्यवस्था को पटरी पर ला सकती है। अब सबकी नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी, या फिर मामला दब जाएगा?

सिवनी के प्रतापगढ़ में भक्ति का महाकुंभ! श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन मनाया गया भव्य श्रीकृष्ण जन्म उत्सव, “नंद के आनंद भयो” से गूंज उठा पंडाल

सिवनी। सिवनी जिले के प्रतापगढ़ गांव में नागेश परिवार के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ इन दिनों श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अनुपम संगम बना हुआ है। कथा वाचन पंडित उमाकांत शास्त्री द्वारा किया जा रहा है। कथा के चौथे दिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (कृष्ण जन्म उत्सव) का अत्यंत भावपूर्ण और जीवंत वर्णन किया गया, जिसे सुनकर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

कथा के दौरान पंडित उमाकांत शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण प्रसंग का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं। उन्होंने मथुरा की कारागार में वासुदेव-देवकी के यहां भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि श्रीकृष्ण का अवतार केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि मानव जीवन को प्रेम, करुणा, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की दिव्य प्रेरणा है

जैसे ही कथा में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग आया, पूरा पंडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से तालियां बजाईं और वातावरण पूरी तरह कृष्णमय हो गया। इस पावन अवसर पर प्रसाद वितरण किया गया, जिससे उत्सव का आनंद और अधिक बढ़ गया।

आकर्षण का केंद्र बने नन्हे राधा-कृष्ण

कथा के दौरान बाल गोपाल और राधा के रूप में सजे नन्हे बच्चों ने सभी का मन मोह लिया। बच्चों की मनमोहक वेशभूषा और मासूम अदाओं ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। कई श्रद्धालु इस अविस्मरणीय पल को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते नजर आए। यह दृश्य कथा स्थल पर विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।

प्रतापगढ़ सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की सक्रिय सहभागिता से पूरा क्षेत्र भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत दिखाई दे रहा है। श्रद्धालुओं ने नागेश परिवार द्वारा की गई व्यवस्थाओं की मुक्तकंठ से सराहना की।

आयोजकों ने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन आगामी दिनों तक जारी रहेगा, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायी प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। कथा श्रवण से क्षेत्र में धार्मिक एवं सकारात्मक वातावरण बना हुआ है और श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति व आत्मिक आनंद की अनुभूति हो रही है।

सिवनी में धान खरीदी पर बड़ा खेल? अमानक धान थोपने के आरोप, सर्वेयर हटाए गए-गुणवत्ता पर संकट

Seoni Dhan Kharidi News: सिवनी। खरीफ उपार्जन 2025-26 के बीच सिवनी जिले में धान की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भंडारण केंद्रों पर अमानक (नॉन-FAq) धान के पहुंचने और उसे जबरन स्वीकार कराने के आरोप सामने आने लगे हैं। नियमों के तहत रिजेक्ट की जा रही धान की बोरियों को लेकर न सिर्फ विवाद गहराया है, बल्कि राजनीतिक दबाव और भारी हस्तक्षेप के चलते कुछ भंडारण केंद्रों में कार्यरत सर्वेयरों पर कार्रवाई तक हो चुकी है।

सूत्रों के अनुसार, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा खरीफ उपार्जन के लिए सर्वेयर और उनके मार्गदर्शन हेतु सुपरवाइजर नियुक्त किए गए थे, ताकि खरीदी केंद्रों पर केवल पूरी तरह सूखी, FAq गुणवत्ता वाली धान ही स्वीकार हो।

नियमों के मुताबिक धान में नमी, मिट्टी, कुस्सी, सिकुड़े, टूटे, बदरंग और क्षतिग्रस्त दानों की मात्रा निर्धारित सीमा से कम होना अनिवार्य है। बावजूद इसके, अमानक धान को दबाव बनाकर भंडारण केंद्रों में थोपने के प्रयासों की शिकायतें बढ़ रही हैं।

सर्वेयर हटे, निष्पक्षता पर सवाल

विवाद के बीच कुछ सर्वेयरों को भंडारण केंद्रों से हटाया गया है। हटाए गए सर्वेयरों ने सुपरवाइजर को आवेदन देकर अपना पक्ष भी रखा, लेकिन निष्पक्ष कार्रवाई को लेकर जिला स्तर पर हस्तक्षेप के आरोप सामने आए हैं। ज़मीनी सच्चाई यह भी बताई जा रही है कि कुछ केंद्रों पर बाहर से लाई गई अमानक धान को स्वीकार कराने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे गुणवत्ता नियंत्रण की पूरी प्रक्रिया सवालों में है।

उत्पादन कम, पंजीयन पूरा करने बाहर से धान

इस वर्ष किसानों के धान उत्पादन में पिछले सत्र की तुलना में भारी कमी दर्ज की गई है। ऐसे में पंजीयन लक्ष्य पूरे करने के लिए व्यापारी वर्ग द्वारा बाहर से पुरानी/अमानक धान मंगाकर खरीदी केंद्रों में डाली जा रही है। यही वजह है कि यह धान जांच में रिजेक्ट श्रेणी में आ रही है।

कई खरीदी केंद्रों से यह भी सामने आया है कि धान की बोरियां घर से भरकर लाई जा रही हैं, और केंद्रों पर बिना विधिवत भराई-तुलाई के सिलाई तक की जा रही है। ऐसी प्रक्रियाओं में FAq मानकों का पालन होना लगभग असंभव है—जिसका सीधा असर गुणवत्ता पर पड़ता है।

कमीशन की दौड़ में गुणवत्ता से समझौता?

आरोप यह भी हैं कि कमीशन राशि बढ़ाने के चक्कर में कुछ खरीदी प्रभारी, धान व्यापार से जुड़े लोगों को अनुचित सुविधाएं देकर उन्हें आकर्षित कर रहे हैं। इसका खामियाजा मजदूर हम्मालों के अधिकारों पर पड़ रहा है, वहीं शासन से मिलने वाली प्रशासनिक राशि के दुरुपयोग की आशंका भी जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी सुविधाएं अमानक धान को बढ़ावा देती हैं—जिस पर तत्काल ध्यान और सख्त कार्रवाई जरूरी है।

यदि गुणवत्ता नियंत्रण में ढील और दबाव की राजनीति पर रोक नहीं लगी, तो न केवल सरकारी भंडारण की साख पर असर पड़ेगा, बल्कि किसानों और उपभोक्ताओं—दोनों का नुकसान तय है। जिले में पारदर्शी जांच, निष्पक्ष कार्रवाई और FAq मानकों का सख्त पालन ही इस संकट का समाधान है।