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फायर बिग्रेड के चालक के साथ मारपीट करने वाले आरोपी गिरफ्तार

सिवनी // कल दिनांक 25 दिसंबर 2018 को शाम करीब 7:30 बजे छिंदवाड़ा चौक के पास अपनी जीप से जा रहे फायर बिग्रेड के चालक मनोज चौरसिया को रोककर बेसबाल के डंडे और चाकू से मारपीट करने वाले आरोपी सत्यम चौरसिया और उसके साथियों को कोतवाली पुलिस के द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया । सत्यम चौरसिया पिता लक्ष्मी प्रसाद चौरसिया उम्र 22 साल निवासी मंगली पेठ फायर बिग्रेड सिवनी में उसी फायर गाड़ी में हेल्पर का काम करता है जिसमें मनोज चौरसिया ड्राइवरी करता है ।

पुलिस द्वारा पूछताछ पर सत्यम चौरसिया ने बताया कि विगत 3 माह से मनोज चौरसिया से प्रताड़ित चल रहा था जो बार बार उसकी ड्यूटी बदल देता था, और गैरहाजिरी भी डलवा देता था, इसी बात से परेशान होकर उसने अपने साथियों करण भलावी पिता मारुति लाल गुलाबी उम्र 23 साल निवासी मंगली पेठ एवं छोटू उर्फ मुकेश मरकाम पिता राजकुमार मरकाम उम्र 20 साल निवासी मंगलीपेठ के साथ मिलकर कल छिंदवाड़ा चौक के पास मनोज चौरसिया के साथ मारपीट की। आरोपियों को धारा 324 , 323 , 341 , 294, 506 , 34 भारतीय दंड विधान और 25 आर्म्स एक्ट में तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

सिवनी कलेक्टर बने प्रवीण सिंह

खबर सत्ता// सिवनी कलेक्टर गोपाल चंद डाँड के खरगोन स्थानांतरण के बाद अब सिवनी कलेक्टर प्रवीण सिंग होंगे । प्रवीण सिंग नगर निगम आयुक्क्त सतना से स्थान्तरित होकर सिवनी कलेक्टर के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे ।

TRAI के नए डीटीएच नियम एवं विवरण 29 दिसंबर 2018 से टीवी चैनलों की अधिकतम कीमत (एमआरपी) – टीवी चैनल मूल्य सूची

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI): नया नियामक ढांचा सुनिश्चित करता है कि वास्तविक और सूचित विकल्प उपभोक्ता को उपलब्ध कराया जाए। नए ढांचे के अनुसार उपभोक्ता को उसकी पसंद के चैनल चुनने होंगे। पसंद की स्वतंत्रता का मतलब टेलीविजन सेवाओं के लिए उपभोक्ता के अपने मासिक बिल पर सीधा नियंत्रण होगा।

नई ट्रेन डीटीएच और केबल टीवी के नियमों की व्याख्या की गई .. ट्राई ने नए नियमों और विनियमों को डीटीएच और केबल टीवी ऑपरेटरों के लिए लागू करने जा रहा है .. जो कि भारत में कम कीमत वाले चैनलों की ओर ले जाएगा, क्योंकि पुराने ट्राई नियमों की तुलना में नए ढांचे 2018 बेहतर और प्रभावी है।

डीटीएच और केबल टीवी पर ट्राई का नया नियम है कि सब्सक्राइबर को 130 रुपये का भुगतान करना होगा। डीटीएच हैंडलिंग और सेवा शुल्क के लिए प्रति माह, सब्सक्राइबर को एयर चैनल पर 100 मुफ्त मिलेंगे, अगर ग्राहक को किसी अन्य चैनल को देखने की जरूरत है, जो वह ए-ला-कार्टे पैकेज का खर्च उठा सकता है .. और TRAI ने घोषणा की कि प्रति चैनल कीमत अधिकतम है 19 रु। ताकि टेलीविजन चैनल ब्रॉडकास्टर अपने चैनल की कीमत 19 रुपये से कम कर सके। इस नए नियमों और विनियमन में पुराने बंडल पैकेजों की तुलना में मासिक सदस्यता शुल्क कम हो सकते हैं।

नए नियमों के अनुसार टीवी चैनल मूल्य सूची नीचे दी गई है।

चैनलों की 29 दिसंबर 2019 को केबल टीवी सेवा मूल्य सूची की नई रूपरेखा (जीएसटी शामिल नहीं)

अटल विहारी वाजपेयी का 50 साल का राजनैतिक जीवन, फर्श से अर्श तक सफर …


अटल बिहारी वाजपेयी (फाइल फोटो)

भारत के राजनीतिक इतिहास में अटल बिहार वाजपेयी को अजात शत्रु के रूप में देखा जाता था. उनका संपूर्ण व्यक्तिव एक शिखर पुरुष के रूप में दर्ज है. उनकी पहचान एक बेहतर व्यक्ति, संजीदा इंसान, पत्रकार, कवि, लेखक, भाषाविद के साथ-साथ एक कुशल राजनीतिज्ञ के तौर पर थी. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में रहते हुए भी उन्होंने विचारधार के खूटों से खुद को नहीं बांधा. लगभग 50 साल के राजनीतिक जीवन में जवाहर लाल नेहरू के बाद वह इकलौते शख्स थे जो तीन बार देश के प्रधानमंत्री बने. संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए हिंदी में भाषण देने वाले वह पहले भारतीय राजनीतिज्ञ थे. 16 अगस्त 2018 को उनका निधन हो गया. उनके निधन के बाद 25 दिसंबर को उनकी पहली जयंती मनाई जाएगी.

स्कूल के टीचर थे
25 दिसंबर 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर में जन्म अटल बिहारी वाजपेयी के पिता एक कवि और स्कूल में टीचर थे. ग्वालियर में ही सरस्वती शिशु मंदिर में उनकी पढ़ाई शुरू हुई. ग्वालियर विक्टोरिया कॉलेज (अब लक्ष्मी बाई कॉलेज) से हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत में ग्रेजुएशन किया. इसके बाद डीएवी कॉलेज कानपुर से उन्होंने राजनीतिक विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएट किया.

आरएसएस से जुड़ाव
साल 1944 में ग्वालियर में आर्य समाज की युवा इकाई आर्य कुमार सभा से उन्होंने सामाजिक जीवन शुरू किया. यहां वह महासचिव थे. हालांकि, इससे पहले 1939 में वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ चुके थे. बताया जाता है कि इनके जीवन में बाबासाहेब आप्टे का काफी प्रभाव रहा है. 1947 में वह संघ के पूर्णकालिक सदस्य (प्रचारक) बन गए.

भारतीय जनसंघ की आधारशीला रखी
साल 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद आरएसएस पर बैन लगा दिया. साल 1951 में दीन दयाल उपाध्याय के साथ मिलकर अटल ने एक राजनितिक पार्टी ‘भारतीय जनसंघ’ की आधारशीला सखी. इन्हें पार्टी का राष्ट्रीय सचिव बनाया. साल 1955 में उन्होंने पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. साल 1957 में उन्हें यूपी के गोंडा की बलरामपुर सीट से जीत मिली और वह लोकसभा पहुंचे. इस दौरान उन्हें मथुरा और लखनऊ से भी लड़ाया गया था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. इस साल देश की संसद में जनसंघ के सिर्फ चार सदस्य थे, जिसमें अटल भी एक थे. अटल जब लोकसभा में पहुंचे तो उनकी भाषण शैली से प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू काफी प्रभावित हुए थे.

जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष
दीन दयाल उपाध्याय की मृत्यु के बाद जनसंघ की जिम्मेदारी अटल बिहारी वाजपेयी के कंधे पर आ गई. अटल ने अपनी भाषण शैली और सांगठिक छमता से पार्टी का लगातार विस्तार किया. 1968 में वह जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने. साल 1975 में लगे इमरजेंसी में अटल जेल गए.

विदेश मंत्री बने
साल 1977 में जब जयप्रकाश नारायण ने सभी विपक्षी पार्टियों को कांग्रेस के खिलाफ एकजुट होने को कहा तो वाजपेयी ने जनसंघ का जनता पार्टी में विलय कर दिया. इस साल हुए चुनाव में जनता पार्टी की सरकार बनी. मोरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री बने और अटल उनकी कैबिनेट में विदेश मंत्री बने. 1979 में जनता पार्टी के टूटने तक वाजपेयी खुद को स्थापित कर चुके थे.

बीजेपी की स्थापना
जनता पार्टी के टूटने के बाद वाजपेयी ने 1980 में लाल कृष्ण आडवाणी, भैरो सिंह सेखावत और दूसरे नेताओं के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की. वह बीजेपी के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बने. 1984 के चुनाव में बीजेपी को सिर्फ 2 सीटें मिली.

पहली बार प्रधानमंत्री
राम मंदिर आंदोलन के बाद गुजरात और महाराष्ट्र में हुए चुनाव में बीजेपी को सफलता मिली और कर्नाटक में भी उसने बेहत प्रदर्शन किया. 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने. हालांकि, उनका कार्यकाल सिर्फ 13 दिन का था.

दूसरी बार प्रधानमंत्री
साल 1998 के चुनाव में बीजेपी को फिर से सफलता मिली और वह सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी. ऐसे में दूसरे दलों के साथ मिलकर नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस बना और अटल एक बार फिर देश के प्रधानमंत्री बने.

पहली बार गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री
साल 1999 के चुनाव में एक बार फिर बीजेपी को बड़ी सफलता मिली और अटल एक बार फिर देश के प्रधानमंत्री. इस दौरान एनडीए को 303 सीटें मिली. अटल पहले गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री रहे जिन्होंने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया. साल 2004 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद धीरे-धीरे अटल की तबीयत बिगड़ती गई और वह बेड पर चले गए.

मंत्रीमंडल गठन के बाद नाथ की बढ़ी मुश्किल

भोपाल(Khabar Satta) // पिछले कुछ दिनों से लगातार भाजपा की ओर से जल्द ही मध्यप्रदेश में अपनी सरकार बनाए जाने की बातों के बीच आज मंगलवार को भोपाल में एक ओर नई बात देखने को मिली। जिसके चलते क्षेत्र का राजनैतिक माहौल गरमा गया है। वहीं कई लोग ऐसे में कांग्रेस सरकार के बनते ही गिरने की बात भी करते देखे जा रहे हैं।

दरअसल मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 114 सीटें मिली थी वहीं यहां भाजपा को 109 सीटों के साथ संतोष करना पड़ा। जबकि अन्य निर्दलीय व छोटे दलों को मिली। ऐसे में कांग्रेस को बहुमत के लिए इन अन्य से सहयोग लेना पड़ा।

वहीं सरकार के मंत्रिमंडल की घोषणा के साथ ही आज मंगलवार को सभी निर्दलीय व छोटे दलों के सदस्यों ने एक साथ मीटिंग की। जो तकरीब 1 घंटे तक चली, इसके बाद सभी एक साथ होटल से निकल गए।

सूत्रों का कहना है कि सरकार के लिए सहयोग देने वाले इन सदस्यों की गुपचुप तरीके से हुई इस मीटिंग के चलते हर कोई सकते में आ गया है। वहीं लोग इसे भाजपा के पूराने बयानों से जोड़ते हुए देख रहे है। ऐसे में माना जा रहा है कि यदि इन सदस्यों ने कोई कड़ा फैसला लिया है तो कांग्रेस को सरकार से हटना पड़ सकता है।

चक्काजाम व प्रदर्शन के बीच उमा भारती बोलीं हो सकता है सत्ता के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े…

ये है मामला…

जानकारी के अनुसर मंगलवार को शपथग्रहण समारोह से ठीक पहले तीन निर्दलीय, बसपा के दो, एक सपा और डॉ. हीरालाल अलावा एकजुट हो गए है। ऐसे में वे सब करीब 1 बजे पलाश होटल से साथ निकले, जिसके चलते राजधानी मे राजनीतिक सरगरमी तेज हो गई हैं।

ये बताया जा रहा है कारण…

दरअसल इस मामले में राजनीति के जानकार डीके शर्मा का कहना है कि आज सरकार की ओर से मंत्रियों को शपथ दिलाई जानी है, जिसके लिए नामों की सूची भी आ गई है। जिसमें केवल वारासिवनी के प्रदीप जायसवाल का ही नाम शामिल है।

क्या आप जानते है शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद क्या कर है

एक सपना

दिसंबर 2018 मध्य प्रदेश के भोपाल का 74 बंगले इलाका. बी-8 में एक नेता एक सपना देख रहा है. माहिष्मती के राज्य से महेंद्र बाहुबली को निकाल दिया गया है और वो प्रजा के बीच जा चुका है, भल्लाल देव राज्य पर राज कर रहा है, पदच्युत बाहुबली को जनता हाथोंहाथ स्वीकार करती है, वो अपनी समानांतर सत्ता स्थापित करता है, सबका भला करता है, कामगारों के बीच शिला पर बैठे पंचायत करते महेंद्र को देख जलने वाले कहते हैं. ‘ये जहां भी रहेगा महाराज बनकर रहेगा.’ सपना टूट जाता है, एक नए सपने की शुरुआत होती है.

यात्रा 

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, मध्य प्रदेश में आभार यात्रा निकालना चाहते हैं. प्रदेश के पूरे 52 जिलों में, शिवराज अपनी यात्राओं के लिए चर्चित रहे हैं, नर्मदा यात्रा, जनआशीर्वाद यात्रा, जनादेश यात्रा. किस भी शब्द के आगे यात्रा लगा दीजिए, शिवराज उस पर निकल जाते थे. लेकिन अभी की यात्रा मध्य प्रदेश के नागरिकों और अपने समर्थकों का आभार प्रकट करने के लिए है. दिखाना चाहते हैं कि सीएम की कुर्सी गई तो क्या? मामा तो अब भी हैं. लेकिन इस यात्रा का विरोध हो रहा है, वैसा विरोध नहीं जैसा अमित शाह की रथयात्रा का पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी कर रही हैं, ये विरोध भाजपा के अंदर से हो रहा है. कहा जा रहा है कि जब चुनाव जीते ही नहीं तो काहे का आभार. काहे की यात्रा. जवाब शिवराज के पास है. यात्रा चाहे जब शुरू हो, शिवराज पहले ही अलग रास्ते पर बढ़ चुके हैं.

कहावत

इंग्लिश में एक बड़ी बुरी चीज होती है. Buyer’s remorse, इसका मतलब ख़रीदार का पछतावा, इंसान जिस चीज को खरीदने के लिए पगलाया रहता है, एक बार खरीद ले तो उसे पछतावा होने लगता है. ये सोच हावी हो जाती है कि सही चीज खरीदी है या नहीं. इससे सस्ती या इससे बेहतर चीज मिल जाती, कई बार ये ख़याल तक आता है कि जो चीज खरीदी, वो लेनी भी चाहिए थी या नहीं? कई बार ये चुनाव के बाद भी होता है. हम इसकी बात क्यों कर रहे हैं, ये जानने से पहले बघेली की एक उखान जान लें. ‘ दादू के मरे के नहीं, शनीचर के लहटे के दुक्ख है’. ये दादू शिवराज सिंह चौहान की सरकार थी. दादू मर चुके हैं, लहट कर कांग्रेस सरकार आई है. ये तथ्य नहीं है, ये वही Remorse है जो शिवराज सिंह चौहान पैदा करना चाहते हैं.

वो दिखाना चाहते हैं, मुख्यमंत्री कोई हों. ‘मामा’ वही हैं. वो हार के बाद थक नहीं गए हैं, गुम नहीं गए हैं. हाशिए पर नहीं चले गए हैं. वो एमपी में हैं और भरपूर चर्चा में हैं. आम सोच ये है कि चुनावों में हारने वाला दुखी होता है, सच ये है कि असल मज़े वही करता है. जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाता है, चार-छ: महीने तो नज़र ही नहीं आता. शिवराज ऐसा कुछ नहीं कर रहे. कांग्रेस की 114 के मुकाबले भाजपा की 5 सीटें ही कम आई हैं. वो जताना चाहते हैं, माई के लाल मामा से नाराज़ नहीं थे. उनका हारना बस विधायकों के प्रति गुस्सा था, उनकी हार कांग्रेस का तुक्का है, उसी कांग्रेस के लिए वो 52 जिलों के दिलों में गिल्ट पैदा करना चाहते हैं.

बयान 

अब चौकीदारी करने की ज़िम्मेदारी हमारी है, और हम चुप बैठने वालों में से नहीं हैं कि हार गए तो एकाध महीना आराम कर लें. ये तो सीखा ही नहीं है. आज से शुरू. नेता प्रतिपक्ष तो पार्टी तय करेगी, लेकिन फिर भी हम नेता तो रहेंगे भाई.


शिवराज सिंह चौहान, 12 दिसंबर 2018, भोपाल

13 दिसंबर – बीजेपी कार्यालय, भोपाल – शिवराज सिंह चौहान बीजेपी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच बैठे थे.
14 दिसंबर – बीजेपी कार्यालय, भोपाल – शिवराज सिंह चौहान, उसी बीजेपी कार्यालय में पत्रकारों के बीच बैठे थे. थोड़ी ही देर बाद वो रफ़ाल डील पर अए फ़ैसले के बाद राहुल गांधी को घेरते नज़र आए.
17 दिसंबर – शिवराज सिंह चौहान की तस्वीरें आती हैं. नई सरकार का शपथ ग्रहण हो रहा है, शिवराज सिंह ने दाईं ओर ज्योतिरादित्य सिंधिया और बाईं ओर कमल नाथ का हाथ लिए हवा में बाहें उठा रखी हैं.
19 दिसंबर – शिवराज सिंह चौहान बुधनी में हैं.
20 दिसंबर – शिवराज भोपाल में हैं, शहडोल और रीवा के विधायकों के साथ. थोड़ी देर बाद जबलपुर के विधायकों से मिलते हैं, फिर पता लगता है शिवराज बीना जा रहे हैं, सोशल मीडिया पर लोगों के अकाउंट पर शिवराज सिंह चौहान की तस्वीरें भरी जा रही हैं. पता चला शिवराज सिंह चौहान ट्रेन से बीना जा रहे हैं. शाम तक बीना से तस्वीरें आने लगती हैं, शिवराज सिंह चौहान एक दोस्त की बेटी की शादी में जा पहुंचे हैं. रात को वापस ट्रेन से भोपाल लौटते हैं.
21 दिसंबर – शिवराज मंडीदीप में नज़र आते हैं. फिर होशंगाबाद में मातमपुर्सी में पहुंच जाते हैं. थोड़े समय में सिवनी-मालवा और फिर हरदा में नजर आते हैं.
22 दिसंबर – शिवराज भोपाल के रैनबसेरे में रहने वालों से मिलते हैं.
23 दिसंबर – शिवराज नज़र आते हैं, सीहोर में. सुरई गांव में मोटरसाइकिल की सवारी करते गांववालों से मिल रहे होते हैं. एक गांव पर नहीं रुक जाते एक के बाद एक कई गांव खजुरी, आमडोह, ढाबा, आमझीर, बिलपाटी, बनियागांव, अमीरगंज, सिराली, बीलाखेड़ी आप नाम लेते जाओ शिवराज सिंह चौहान हर गांव में पहुंच रहे हैं. रास्ते में कहीं मिल गए तो बच्चों के जन्मदिन का केक खा रहे हैं.

मुख्यमंत्री से ज़्यादा एक्टिव हैं शिवराज सिंह चौहान
आंकड़ों में देखिए, बात समझ आएगी. हार के बाद शिवराज सिंह चौहान ये पंक्तियां लिखे जाने तक कुल 148 ट्वीट-रिट्वीट कर चुके हैं. इसकी तुलना अगर कमल नाथ के ट्विटर अकाउंट से करें तो वहां नतीजों के साफ़ होने के बाद महज़ 30 ट्वीट-रिट्वीट किए गए हैं. इतने ट्वीट तो शिवराज सिंह ने अकेले 12 दिसंबर को कर डाले थे. जबकि उसके पहले उनका ट्विटर अकाउंट इतना सक्रिय नहीं था, काउंटिंग के दिन यानी 11 दिसंबर को वहां सिर्फ एक ट्वीट नज़र आया था. 13 तारीख को शिवराज सिंह चौहान की तरफ से आए ट्वीट्स की संख्या 14 थी. इन आंकड़ों को अगर आप रमन सिंह या वसुंधरा राजे सिंधिया के ट्वीट्स की संख्या से कंपेयर करें तो बात और साफ़ हो जाती है. हार के बाद जहां रमन सिंह ने अब तक सिर्फ 36 ट्वीट किए हैं, वहीं वसुंधरा के ट्वीट्स की संख्या भी महज़ 54 है.

ये शिवराज खतरनाक लगते हैं

बीजेपी को भी और कांग्रेस को भी. कमल नाथ भले आज मुख्यमंत्री हैं, लेकिन बड़े ताल की तरह गहरा सच ये भी है कि शिवराज आज भी मध्य प्रदेश के सबसे बड़े नेता हैं. कमल नाथ हमेशा शिवराज सिंह चौहान के बाद आए मुख्यमंत्री की तरह देखे जाएंगे. उनकी तुलना होगी और जब नहीं होगी तब शिवराज सारे प्रयास कर डालेंगे कि ऐसी तुलना हो. इस हार के साथ शिवराज पर लगा ‘माई के लाल’ वाला दाग धुला मानिए. जनता इससे ज़्यादा गुस्सा नहीं पालती. शिवराज की वापसी दिग्विजय सिंह जैसे नहीं हुई है. अगर सत्ता से जाने को वनवास की संज्ञा दी जाए तो शिवराज का ये वनवास पॉजिटिव अर्थ लिए होगा न कि दिग्विजय सिंह के राजनैतिक वनवास की तरह. हारे हुए शिवराज ज़्यादा खतरनाक हैं. वो सबसे ज़्यादा समय तक मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री रहे. ये इकलौता तथ्य ही उनके फेवर में जाता है. शिवराज मध्य प्रदेश में तब आए थे. जब मध्य प्रदेश दिग्विजय सिंह के दो शासनकाल और बीजेपी के दो मुख्यमंत्री देख चुका था. अब वो हिसाब मांगने वाले मूड में हैं.

इस सक्रियता से बीजेपी का एक धड़ा भी डरा है. डर भी जायज़ है. क्या हो अगर विधानसभा चुनाव के नतीज़ों का असर 2019 में नज़र आए? क्या हो अगर दौर गठबंधन का आए? क्या हो अगर नरेंद्र मोदी की एक्सेप्टेंस पर सवाल उठें और क्या हो अगर शिवराज सिंह चौहान की प्रेस कांफ्रेंस की बात सही निकल जाए. चौकीदार की ज़िम्मेदारी वो खुद लेना चाहें तो?

शाइनिंग स्टार एवं ग्रीन सिटी क्लब ने हासिल की लीग मुकाबलों में जीत

सिवनी। मुख्यालय के बड़े मिशन स्कूल ग्राउंड में 23 दिसंबर से आरंभ हुई एसपीएल सीजन-2 प्रतियोगिता के वेटरन मुकाबलों में आज 25 दिसंबर की सुबह 8 बजे से पहला मुकाबला शाइनिंग स्टार एवं सिंघम क्लब के मध्य खेला गया, जहां पहले बल्लेबाजी करते हुये शाइनिंग स्टार ने गोंची नगलकर की 23 गेंदों में 73 रन की आतिशी पारी की मदद से 10 ओवरों में 124 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया।

लक्ष्य का पीछा करते हुये सिंघम स्टार 7 विकेट खोकर 10 ओवरों में मात्र 87 रन ही बना पायी गेंदबाजी में भी गोंची नागलकर ने बढिय़ा प्रदर्शन करते हुये तीन विकेट लिये और उन्हें आज का मैन ऑफ द मैच का पुरूस्कार समिति की ओर से प्रदान किया गया।

आयोजन समिति के अध्यक्ष नरेंद्र ठाकुर गुड्डू ने बताया कि वेटरन का दूसरा मैच पृथ्वी टाईम्स एवं ग्रीन सिटी के मध्य हुआ, जहां पृथ्वी टाईम्स ने सुनील यादव के 45 रनों की मदद से 10 ओवरों में 89 रन बटोरे। लक्ष्य का पीछा करने उतरी ग्रीन सिटी की टीम निर्धारित ओवरों में 79 रन ही बना पायी और इस तरह यह मैच पृथ्वी टाईम्स ने जीत लिया।

इससे पूर्व कल 24 दिसंबर को हुये ओपन मैचों में डीएससी एवं सांई फास्ट फूड के मध्य खेला गया, जिसमें डीएससी ने विजय हासिल की थी, दोपहर 1:30 बजे हुये दूसरे मुकाबले में बाबा-11 ने मुंगवानी क्लब को एक तरफा मुकाबले में परास्त कर दिया। मैन ऑफ द मैच टूर्नामेंट का पहला शतक आदिल खान को दिया गया। तीसरे मैच में डीएससी और बाबा-11 के बीच खेला गया, जहां बाबा-11 ने पुन: जीत हासिल कर अपना स्थान अगले चक्र के लिये सुरक्षित किया।

वही दोपहर 11 बजे ओपन वर्ग का पहला मैच यलगार एवं नगर पालिका सिवनी के बीच खेला गया जिसमे यलगार ने जीत दर्ज की , वही 1 बजे से आरभ हुए दूसरे मैच मे सिवनी स्पोर्ट्स क्लब ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 10 ओवर मे 76 रन बनाये ,जवाब में बैटिंग करते हुए सायनिग स्टार ने मात्र 5 ओवर में 78 रन बनाकर मैच में जीत हासिल कर ली है।

सिवनी । शहीदों का सम्मान देख पाएँगे गांधी चौक शुक्रवारी से लाइव

सिवनी- जिले की संस्था मातृशक्ति संघटन द्वारा इस वर्ष भी देश की रक्षा करते शहीद हुए वीर जवानों के परिवार के सदस्यों का सम्मान किया जा रहा है। 26 दिसम्बर की शाम यह आयोजन नगर के गांधी चौक में शाम 7 बजे से होगा आप शुक्रवारी पहुँचकर और खबर सत्ता एंड्राइड एप्प में यूट्यूब चैनल में भी लाइव देख पाएंगे

एंड्राइड एप्प लिंक डाउनलोड यहाँ क्लिक कर करे ख़बरसत्ता यूट्यूब चैनल यहाँ क्लिक कर सब्सक्राइब करे

भाजपा विधायक दिनेश राय मुनमुन के कांग्रेस पार्टी में शामिल होने वाले सन्देश का विश्लेषण

अस्तित्वहीन लोग फैला रहे है मुनमुन के खिलाफ अफवाह

dinesh rai munmun

सिवनी- विधानसभा सिवनी से नव निवार्चित भाजपा विधायक मुनमुन राय के काग्रेस के शामिल होने की खबरें इन दिनों सोशल व प्रिंट मीडिया में सुर्खियां बटोर रही है

इस मामले पर आज सोशल मीडिया के माध्यम से विधायक के सोशल मीडिया प्रभारी रोहित जैन ने अपनी बात रखी है, उन्होंने बताया कि क्षेत्र की सम्मानीय जनता जनार्दन के द्वारा पुनः ऐतिहासिक जनादेश देकर विधायक श्री दिनेश राय मुनमुन को निर्वाचित कर विधायक चुना गया । वर्तमान समय मे दिनेश राय मुनमुन के खिलाफ कुछ ऐसे लोग जिनका कोई अस्तित्व नही है ऐसे अस्तित्वहीन लोगों के द्वारा श्री राय पर सिवनी विधानसभा सीट का त्याग करने जैसे अनर्गल बातें कर सोशल मीडिया एवं समाचार के माध्यम से अपमानित करने का प्रयास किया जा रहा है।

सिवनी विधानसभा क्षेत्र की जनता ने राय पर विश्वास कर विधायक बनाया है और जिसका सम्मान करते हुए आगामी 5 वर्षों तक वे विधायक के रूप मे आमजनों के लिए सक्रिय रूप से कार्य करते रहेंगे। परंतु अभी हाल में कुछ दिनों से राय के विरूद्ध कुछ विघ्नसंतोषी जयचंदों द्वारा आम जनता के बीच राय के प्रति विश्वास कम करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसा प्रयास पिछले 5 वर्षो मे भी हमेशा मुंह की खाने वाले तथा हमेशा लोगों को चिमटने का प्रयास करने वाले चिमटुओं के द्वारा अनेकों बार किया जा चुका है। परंतु राय को बदनाम करने वालों को हमेशा मात खानी पडी है।


विधानसभा की सम्मानीय जनता जनार्दन से अपील की जाती है कि ये सिर्फ कोरी अफवाह है जिसके कोई सिर- पैर नही है। ऐसी अफवाहों से सावधान रहे। विधायक श्री दिनेश राय मुनमुन को सिवनी विधानसभा क्षेत्र की जनता जनार्दन ने जो ऐतिहासिक जनादेश देकर जो विश्वास जताया है उसका सम्मान करते हैं