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LIVE AYODHYA FAISLA : अयोध्या केस में सुप्रीम कोर्ट का 5-0 से फैसला, जानें पल-पल की UPDATE

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LIVE AYODHYA FAISLA : अयोध्या केस में सुप्रीम कोर्ट का 5-0 से फैसला, जानें पल-पल की UPDATE : LIVE AYODHYA FAISLA | चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस शरद अरविंद बोबडे, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़ और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ मामले पर फैसला सुनाएगी.

9 नवम्बर 2019, 11:18 बजे

Ayodhya verdict: CJI ने कहा, ‘केंद्र सरकार मदिर निर्माण के लिए तीन महीने में एक ट्रस्ट बनाएं’

9 नवम्बर 2019, 11:14 बजे

Ayodhya verdict: CJI ने कहा, ‘मुस्लिम पक्ष को दूसरी जगह 5 एकड़ जमीन मुस्लिम पक्ष को दी जाएगी’

9 नवम्बर 2019, 11:12 बजे

Ayodhya verdict: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘अयोध्या में विवादित जमीन रामलला को दी गई’

9 नवम्बर 2019, 11:10 बजे

Ayodhya verdict: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘मुस्लिम पक्ष को दूसरी जगह जमीन देने का आदेश’

9 नवम्बर 2019, 11:08 बजे

Ayodhya verdict: CJI ने कहा, ‘विवादित जमीन का बंटवारा नहीं किया जा सकता’

9 नवम्बर 2019, 11:04 बजे

Ayodhya Verdict: CJI ने कहा, ‘अंग्रेजों के आने से पहले राम चबूतरे और सीता रसोई की पूजा हिंदू करते थे.’

9 नवम्बर 2019, 11:01 बजे

Ayodhya Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘श्रीराम का जन्म अयोध्या में हुआ था, इसमें शक नहीं.’

9 नवम्बर 2019, 10:53 बजे

Ayodhya Verdict: CJI ने कहा, ‘खुदाई में इस्लामिक ढांचे के सबूत नहीं मिले’

9 नवम्बर 2019, 10:51 बजे

Ayodhya Verdict: CJI ने कहा, ‘ASI की रिपोर्ट खारिज को नहीं कर सकते. ASI की रिपोर्ट में 12वीं सदी के मंदिर के सबूत मिले.’

9 नवम्बर 2019, 10:47 बजे

Ayodhya Verdict: CJI ने कहा, ‘ढांचे के नीच मंदिर के सबूत मिले’

9 नवम्बर 2019, 10:46 बजे

Ayodhya Verdict: CJI ने कहा, ‘बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी’

9 नवम्बर 2019, 10:44 बजे

Ayodhya Verdict: CJI पूरा फैसला सुनाने में 30 मिनट लूंगा.

9 नवम्बर 2019, 10:40 बजे

AyodhyaVerdict: अयोध्या विवाद में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सुना रहे हैं फैसला.

9 नवम्बर 2019, 10:35 बजे

AyodhyaVerdict: अयोध्या विवाद में शिया सेंट्रल बोर्ड वक्फ की याचिका खारिज.

9 नवम्बर 2019, 10:33 बजे

Ayodhya Verdict: सुप्रीम कोर्ट के जजों ने फैसला पढ़ना शुरू किया. लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की.

9 नवम्बर 2019, 10:29 बजे

अयोध्या फैसला: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा, मैं उत्तराखंड के लोगों से अपील करता हूं कि जो भी फैसला सुप्रीम कोर्ट सुनाए उसे वे स्वीकार करें. सोशल मीडिया पर कोई अफवाह या आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं होनी चाहिए जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो.

अयोध्या मामले (Ayodhya Case) में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) आज सुबह 10:30 बजे अपना फैसला सुनाएगा. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस शरद अरविंद बोबडे, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़ और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ मामले पर फैसला सुनाएगी. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 16 अक्टूबर को सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा लिया था.

यह देश का सबसे पुराना मामला है और इस मामले में 40 दिनों तक नियमित सुनवाई हुई थी. यह सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में अब तक की दूसरी सबसे लंबी चली सुनवाई थी. सबसे लंबी सुनवाई का रिकॉर्ड 1973 के केशवानंद भारती केस का है, जिसमें 68 दिनों तक सुनवाई चली थी.

अयोध्या केस: DGP O.P. SINGH बोले, ‘अगर जरुरत पड़ी तो लोगों पर NSA भी लगा सकते हैं’

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डीजीपी ने बताया कि सोशल मीडिया सेल इंटरनेट पर उन 673 लोगों पर लगातार नजर रख रहे हैं, जिनकी पोस्ट या टिप्पणियां परेशानी का सबब बन सकती हैं. हमारे पुलिसकर्मियों ने जिले, पुलिस स्टेशन और स्थानीय स्तर पर संभावित खतरों और हॉटस्पॉट की पहचान की है.

लखनऊ: अयोध्या (Ayodhya verdict) में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) आज (9 नवंबर) सुबह साढ़े दस बजे फैसला सुनाएगा. इसे देखते हुए देश भर में हलचल तेज हो गई है. यूपी में 3 दिन के लिए सभी स्कूल, कॉलेज बंद कर दिए गए हैं. अयोध्या में चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात है. फैसले से पहले यूपी के DGP ओपी सिंह (OP Singh) ने कहा कि यूपी की सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त की गई है.

यूपी के DGP ओपी सिंह ने कहा कि आज बड़ा फैसला आएगा और इस फैसले के लिए यूपी तैयार है. उन्होंने बताया कि यूपी की सुरक्षा को और कड़ी कर दी गई है. अयोध्या को किले में तब्दील कर दिया गया. श्री रामलला मार्ग की गलियों में बैरिकेडिंग लगाकर रास्तों को रोक दिया गया है.  प्रमुख मार्गों पर भी बैरिकेट्स लगाए गए हैं. श्रीराम लीला रामपुर क्षेत्र में गलियों के बाहर पुलिस जवानों को तैनात किया गया है.

उन्होंने बताया कि हमारे सोशल मीडिया सेल इंटरनेट पर उन 673 लोगों पर लगातार नजर रख रहे हैं, जिनकी पोस्ट या टिप्पणियां परेशानी का सबब बन सकती हैं. हमारे पुलिसकर्मियों ने जिले, पुलिस स्टेशन और स्थानीय स्तर पर संभावित खतरों और हॉटस्पॉट की पहचान की है. उन्होंने कहा कि अगर जरुरत पड़ी तो लोगों पर एनएसए भी लगा सकते हैं. उन्होंने बताया कि कई सोशल मीडिया एकाउंट सीज भी किए हैं.

हमने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए 31 संवेदनशील जिलों की पहचान की जैसे-आगरा अलीगढ़, मेरठ, मुरादाबाद, लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर और अन्य है. डीजेपी ने कहा कि राज्य में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई है.

अयोध्‍या केस: जानें 40 दिन की सुनवाई में हिंदू पक्ष की क्या रही दलीलें?

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हिंदू पक्ष ने नक्शों, तस्वीरों और पुरातात्विक सबूतों के जरिये ये साबित करने की कोशिश की थी कि विवादित ढांचा बनने से पहले वहां भव्य मन्दिर था.

नई दिल्‍ली: अयोध्या मामले (Ayodhya Case) में सुप्रीम कोर्ट आज सुबह 10:30 बजे अपना फैसला सुनाएगा. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस शरद अरविंद बोबडे, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ मामले पर फैसला सुनाएगी. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 16 अक्टूबर को सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा लिया था. दरअसल, यह देश का सबसे पुराना मामला है और इस मामले में 40 दिनों तक नियमित सुनवाई हुई थी. यह सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में अब तक की दूसरी सबसे लंबी चली सुनवाई थी. सबसे लंबी सुनवाई का रिकॉर्ड 1973 के केशवानंद भारती केस का है, जिसमें 68 दिनों तक सुनवाई चली थी.

हिंदू पक्ष की दलील

– मन्दिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई
हिंदू पक्ष ने नक्शों, तस्वीरों और पुरातात्विक सबूतों के जरिये ये साबित करने की कोशिश की थी कि विवादित ढांचा बनने से पहले वहां भव्य मन्दिर था. मन्दिर को ध्वस्त कर मस्जिद का निर्माण कराया गया था. कोर्ट में पेश किए फोटोग्राफ के जरिये कहा गया था कि विवादित इमारत हिंदू मंदिर के 14 खंभों पर बनी थी. इन खंभों में तांडव मुद्रा में शिव, हनुमान कमल और शेरों के साथ बैठे गरुड़ की आकृतियां हैं.

– विवादित जगह पर दो हज़ार साल पहले भी मन्दिर
हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि विवादित स्थान पर आज से 2 हज़ार साल पहले भी भव्य राम मंदिर था. मंदिर के ढांचे के ऊपर ही विवादित इमारत को बनाया गया था. प्राचीन मंदिर के खंभों और दूसरी सामग्री का इस्तेमाल भी विवादित ढांचे के निर्माण में किया गया.

– श्रीराम जन्मस्थान को लेकर अटूट आस्था
हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया था कि जिस जगह का यहां मुकदमा चल रहा है. करोड़ों लोगों की आस्था है कि वही भगवान राम का जन्म स्थान है. सैकड़ों साल से यहां पूजा-परिक्रमा की परंपरा रही है. करोड़ों लोगों की इस आस्था को पहचानना और उसे मान्यता देना कोर्ट की ज़िम्मेदारी है.

– रामलला की मूर्ति रखे जाने से बहुत पहले से श्रीराम की पूजा
विवादित ढांचे के मूर्ति रखे जाने बहुत पहले से ही राम की पूजा होती रही है. किसी जगह को मंदिर के तौर पर मानने के लिए वहां मूर्ति होना ज़रूरी नहीं है. हिन्दू महज किसी एक रूप में ईश्वर की आराधना नहीं करते. केदारनाथ मंदिर में शिला की पूजा होती है. पहाड़ों की भी देवरूप में पूजा होती है. चित्रकूट में होने वाली परिक्रमा का उदाहरण दिया गया था.

– इस्लामिक सिद्धान्तों के मुताबिक भी विवादित ढांचा वैध मस्जिद नहीं
हिंदू पक्ष ने इस्लामिक नियमों का हवाला देकर ये साबित करने की कोशिश की थी कि विवादित ढांचा मस्जिद नहीं हो सकती. कहा गया था कि किसी धार्मिक स्थान के ऊपर जबरन बनाई गई. इमारत शरीयत के हिसाब से भी मस्ज़िद नहीं मानी जा सकती. उस इमारत में मस्ज़िद के लिए ज़रूरी तत्व भी नहीं थे. इस्लामिक विद्वान इमाम अबु हनीफा का कहना था कि अगर किसी जगह पर दिन में कम से कम दो बार नमाज़ पढ़ने के अज़ान नहीं होती तो वो जगह मस्ज़िद नहीं हो सकती. विवादित इमारत में 70 साल से नमाज नहीं पढ़ी गई है. उससे पहले भी वहां सिर्फ शुक्रवार को नमाज हो रही थी.

-रामलला विराजमान और श्रीरामजन्मस्थान को न्यायिक व्यक्ति का दर्ज़ा
हिंदू पक्ष ने श्रीरामजन्मस्थान को भी न्यायिक व्यक्ति होने के समर्थन में दलीलें रखीं थी. कहा था कि पूरा रामजन्मस्थान ही हिंदुओं के लिए देवता की तरह पूजनीय है. किसी जगह को मन्दिर साबित करने के लिए मूर्ति की मौजूदगी ज़रूरी नहीं है, बल्कि लोगों की आस्था, विश्वास ही किसी जगह को मन्दिर बनाते हैं. श्रीरामजन्मस्थान को लेकर तो लोगों की आस्था सदियों से अटूट रही है. मंदिर में विराजमान रामलला कानूनी तौर पर नाबालिग का दर्जा रखते हैं. नाबालिग की संपत्ति किसी को देने या बंटवारा करने का फैसला नहीं हो सकता.

-पुरातत्व सबूतों, धार्मिक ग्रंथों, विदेशी यात्रियों के लेख का हवाला
हिंदू पक्षकारों की ओर मन्दिर की मौजूदगी को साबित करने के लिए पुरातत्व सबूतों, धार्मिक ग्रंथों, विदेशी यात्रियों के लेख और पुरातात्विक सबूतों, राजस्व विभाग के रिकॉर्ड का हवाला दिया गया था.इसके अलावा हिंदू पक्ष ने विवादित जगह पर मन्दिर की मौजूदगी को साबित करने के लिए अयोध्या जाने वाले विदेशी यात्रियों जोसेफ टाइफेनथेलर, मोंटगोमरी मार्टिन के यात्रा संस्मरणों, डच इतिहासकर हंस बेकर और ब्रिटिश टूरिस्ट विलियम फिंच की पुस्तकों का भी हवाला दिया था.

-12वीं सदी का शिलालेख
सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने अहम सबूत के तौर पर 12वीं सदी के शिलालेख का हवाला दिया था. हिन्दू पक्ष की ओर से पेश वकील ने कहा कि पत्थर की जिस पट्टी पर संस्कृत का ये लेख लिखा है. उसे विवादित ढांचा विध्वंस के समय एक पत्रकार ने गिरते हुए देखा था. इसमें साकेत के राजा गोविंद चंद्र का नाम है. साथ ही लिखा है कि ये विष्णु मंदिर में लगी थी.

– आठवीं सदी के ग्रंथ स्कंद पुराण का हवाला
हिंदू पक्ष ने अपनी दलील के समर्थन में आठवीं सदी के ग्रंथ स्कंद पुराण का हवाला दिया था. उन्होंने कहा था कि बाबरी मस्जिद के 1528 में वजूद में आने से बहुत पहले स्कंद पुराण लिखा गया था. इस पुराण में भी अयोध्या का श्रीरामजन्मस्थान के रूप में जिक्र है और हिंदुओं का ये अगाध विश्वास रहा है कि यहां दर्शन से मोक्ष की प्राप्ति होती है.

– विवादित ढांचे के नीचे ईदगाह नहीं
हिंदू पक्ष ने विवादित ढांचे के नीचे ईदगाह होने की मुस्लिम पक्ष की वकील मीनाक्षी अरोड़ा की दलीलों को खारिज कर दिया था. हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया था कि जिसे मुस्लिम पक्ष ईदगाह की दीवार बता रहा है, उसके ऊपर छत होने के भी सबूत मिले है.ईदगाह पर छत नही होती. वहाँ सिर्फ एक दीवार नहीं, बल्कि हॉलनुमा ढाँचा था.

– बाबर जैसे आक्रमणकारी को गौरवशाली इतिहास ख़त्म करने की इजाजत नहीं
बाबर जैसे विदेशी आक्रमणकारी को हिंदुस्तान के गौरवशाली इतिहास को ख़त्म करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती. अयोध्या में राम मंदिर को विध्वंस कर मस्जिद का निर्माण एक ऐतिहासिक ग़लती थी,जिसे सुप्रीम कोर्ट को अब ठीक करना चाहिए.अकेले अयोध्या में ही 50-60 मस्जिद है, मुसलमान किसी और मस्जिद में भी इबादत कर सकते है, पर हिन्दुओं के लिए तो ये जगह उनके आराध्य श्रीराम का जन्मस्थान है, हम ये जगह नहीं बदल

– सुन्नी वक्फ बोर्ड को दावा करने का हक़ नहीं
मुस्लिम पक्ष की ओर से दलील दी गई थी कि 1949 में विवादित इमारत में रामलला की मूर्ति पाए जाने के बाद 12 साल तक दूसरा पक्ष निष्क्रिय बैठा रहा. सुन्नी वक्फ बोर्ड ने 1961 में जाकर मुकदमा दायर किया.ऐसे में केस दायर करने की समयसीमा पार करने के चलते उन्हें कानूनन दावा करने का हक नहीं.

– अंग्रेजों के आने के बाद मुस्लिमों को शह मिली
हिंदू महासभा की ओर से विष्णु शंकर जैन ने कहा था कि 1528 से लेकर 1855 तक वहाँ मस्जिद की मौजूदगी को लेकर कोई मौखिक /दस्तावेजी सबूत नहीं.अंग्रेजों के आने के बाद से विवाद की शुरूआत हुई.हिंदुओं से पूजा का अधिकार छीन गया, मुसलमानों को विवादित ज़मीन पर शह मिली.

– मुस्लिम गवाहों के बयान का हवाला
हिंदू पक्ष ने अपनी दलीलों के समर्थन में इलाहाबाद हाई कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश कई मुस्लिम गवाहों के बयान के हिस्सों का भी हवाला दिया था.रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा था कि इन मुस्लिम गवाहों ने ख़ुद माना है कि जिस जगह को मुस्लिम लोग बाबरी मस्जिद कहते हैं वो हिंन्दुओं द्वारा जन्मभूमि के तौर पर जानी जाती है और यहां सदियों से पूजा- परिक्रमा की भी परंपरा रही है. एक गवाह हाशिम ने अपनी गवाही में माना है कि जैसे मक्का मुसलमानों के लिये पवित्र है वैसे ही हिन्दुओं के लिये अयोध्या.

अयोध्या फैसला: UP के इस शहर में इंटरनेट सेवाएं बंद, Social Media सेल की 673 लोगों पर नजर

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पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने बताया कि हमारे सोशल मीडिया सेल इंटरनेट पर उन 673 लोगों पर लगातार नजर रख रहे हैं जिनकी पोस्ट या टिप्पणियां परेशानी का सबब बन सकती हैं. हमारे पुलिसकर्मियों ने जिले, पुलिस स्टेशन और स्थानीय स्तर पर संभावित खतरों और हॉटस्पॉट की पहचान की है.

लखनऊ: अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला (Ayodhya Verdict) आने के पहले ऐहतियात के तौर पर उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के अलीगढ़ (Aligarh) में इंटरनेट सेवाएं (Internet services) बंद कर दी गई हैं. यह सेवा शुक्रवार आधी रात के तुरंत बाद बंद कर दी गई. उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह (OP Singh) ने कहा कि स्थिति सांप्रदायिक व संवेदनशील होने के मद्देनजर और अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए अन्य जिलों में भी इंटरनेट सेवा बंद किया जा सकता है.

673 लोगों पर पुलिस की नजर
उन्होंने कहा कि हमारे सोशल मीडिया सेल इंटरनेट पर उन 673 लोगों पर लगातार नजर रख रहे हैं जिनकी पोस्ट या टिप्पणियां परेशानी का सबब बन सकती हैं. हमारे पुलिसकर्मियों ने जिले, पुलिस स्टेशन और स्थानीय स्तर पर संभावित खतरों और हॉटस्पॉट की पहचान की है. हमने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए 31 संवेदनशील जिलों की पहचान की जैसे-आगरा अलीगढ़, मेरठ, मुरादाबाद, लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर और अन्य है. डीजेपी ने कहा कि राज्य में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई है.

फैसले को लेकर लोगों में सुगबुगाहत शुरू
सुप्रीम कोर्ट के शनिवार को फैसला सुनाए जाने की खबर मिलते ही लखनऊ में लोगों के बीच शुक्रवार को देर रात तक घबराहट देखी गई. लोग पेट्रोल, डीजल, सब्जियां लेने और एटीएम से पैसे निकालने के लिए दौड़ पड़े. पुराने श्हर के हिस्सों में ज्यादा भीड़ देखी गई, जिसमें मुस्लिम आबादी काफी है.

देर रात तक खुली सब्जी मंडियां
चौक में सब्जी मंडी रात 11 बजे के बाद फिर से खोल दी गई और लोगों ने आने वाले दिनों में परेशानी की आशंका में बड़ी मात्रा में सब्जियां खरीदीं. पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें देखी गईं क्योंकि लोग ईंधन भराने के लिए कतार में खड़े थे. राज्य की राजधानी के अधिकांश एटीएम में आधी रात तक कैश खत्म हो गए क्योंकि लोगों ने पैसे निकाल लिए थे. शनिवार अल सुबह से ही लोग दूध और अन्य आवश्यक चीजें खरीदने के लिए कतार में लग गए.

अयोध्या में चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात
अयोध्या में, शुक्रवार की देर रात से सुरक्षा बढ़ा दी गई थी, जिसमें 4,000 अतिरिक्त अर्धसैनिक बल थे. मंदिरों का शहर एक प्रकार के अभेद किले में बदल गया है. शहर के सभी प्रवेश बिंदु आधी रात के बाद पूरी तरह से सील कर दिए गए और दो हेलीकॉप्टरों जो एक लखनऊ और एक अयोध्या में स्टैंडबाय पर रखा गया है. लखनऊ में एक राज्य-स्तरीय नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है, जबकि प्रत्येक जिले का अपना नियंत्रण कक्ष होगा.

सूत्रों ने बताया कि रेलवे पुलिस ने अपने सभी जोनों को सुरक्षा तैयारियों के बारे में निर्देश देने के लिए सात पन्नों की एक एडवाइजरी जारी की. रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने कहा कि उसके सभी कर्मियों की छुट्टी रद्द कर दी गई है और उन्हें एस्कॉटिर्ंग ट्रेनों में लगे रहने का निर्देश दिया गया है.

अयोध्या केस: सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से पहले पढ़ें 2010 का इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला

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उस फैसले में तीन जजों की पीठ ने अयोध्या की विवादित 2.77 एकड़ जमीन को तीन बराबर हिस्सों में बांट दिया था.

नई दिल्ली: देश के संभवत: सर्वाधिक चर्चित और विवादित अयोध्या के रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले (Ayodhya Case) में आज (शनिवार नौ नवंबर) सुबह साढ़े 10 बजे सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुनाने जा रहा है. इस मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. इससे पहले 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अयोध्या मामले पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. हाई कोर्ट के जस्टिस सुधीर अग्रवाल, जस्टिस एस यू खान और जस्टिस डी वी शर्मा की बेंच ने वह फैसला सुनाया था.

उस फैसले में तीन जजों की पीठ ने अयोध्या की विवादित 2.77 एकड़ जमीन को तीन बराबर हिस्सों में बांट दिया था. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि राम लला विराजमान वाला हिस्सा हिंदू महासभा को दिया जाए. दूसरा हिस्सा निर्मोही अखाड़े को और तीसरा हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया जाए.

अयोध्या केस में हाई कोर्ट ने पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट को आधार मानकर अपना फैसला सुनाया था. हाई कोर्ट ने कहा था कि खुदाई के दौरान विवादित स्थल पर मंदिर के प्रमाण मिले थे. इसके अलावा भगवान राम के जन्म होने की मान्यता को भी शामिल किया गया था. हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा था कि साढ़े चार सौ साल से मौजूद एक इमारत के ऐतिहासिक तथ्यों की भी अनदेखी नहीं की जा सकती.

30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ उसी साल दिसंबर में हिंदू महासभा और सुन्नी वक्फ बोर्ड ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी.  9 मई 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने पुरानी स्थिति बरकरार रखने का आदेश दे दिया. उसके बाद अब सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ के सामने 40 दिनों तक बहस के बाद इस मामले में सुनवाई पूरी हो चुकी है. देश की सबसे बड़ी अदालत ने फैसला सुनाने के लिए शनिवार यानी 9 नवंबर का दिन तय किया है.

अयोध्या फैसला :सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा बढ़ी, जामा मस्जिद में भी बढ़ाई गई सिक्योरिटी

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अयोध्या केस (Ayodhya Case) पर आने वाले ऐतिहासिक फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. कोर्ट परिसर के तमाम गेट के बाहर दिल्ली पुलिस की 500 जवानों के साथ साथ अर्धसैनिक बलों की 3 कंपनियां तैनात की गई है.ayodhya case

नई दिल्ली: अयोध्या केस (Ayodhya Case) पर आने वाले ऐतिहासिक फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. कोर्ट परिसर के तमाम गेट के बाहर दिल्ली पुलिस की 500 जवानों के साथ साथ अर्धसैनिक बलों की 3 कंपनियां तैनात की गई है.

वहीं पुरानी दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है. हर आने जाने वालों की गहन तलाशी ली जा रही है. इसके साथ ही दिल्ली पुलिस ने तमाम धार्मिक संस्थानों की सुरक्षा बढ़ा दी है.

सभी देश वासियों से अपील है कि वह सोशल मीडिया पर अपवाहों को ध्यान न दें. अगर कोई अपवाह फैलाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कारवाई की जाएगी.

MP के सभी नागरिकों के लिए अति आवश्यक सूचना | MP NEWS



भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ एवं सभी जिलों के कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक होने आम नागरिकों की अपील जारी की है। कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं कृपया ध्यान पूर्वक नोट कर ले।
    • 09 नवम्बर 2019 को मध्यप्रदेश के समस्त शासकीय एवं अशासकीय विद्यायलयों में एक दिवस का अवकाश  रहेगा।
    • आतिशबाजी ,पटाखें छोड़ने पर प्रतिबंध रहेगा।
    • कलेक्टर और जिला दंडाधिकारी ने जिले में धारा 144 लागू की है। इसका कड़ाई से पालन होगा।
    • 5 या 5 से अधिक की संख्या में समूह बनाकर खड़े हुए लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
    • कृपया आवश्यक ना हो तो अपनी सभी यात्रा रद्द कर दें।
    • किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान ना दें।
    • किसी भी प्रकार की सूचना एवं समाचार को जब तक कि वह आधिकारिक स्तर पर पुष्टि ना हो जाए विश्वास ना करें।
    • आधिकारिक सूचनाओं के लिए व्हाट्सएप के अलावा दूसरे सोर्स पर भी सूचनाओं की विश्वसनीयता की जांच करें।
    • पुलिस एवं प्रशासन को सहयोग प्रदान करें।
    • यदि आप या आपका कोई रिश्तेदार यात्रा में है तो पुलिस दल उन्हें रोककर उनके सामान की जांच कर सकते हैं कृपया उन्हें ऐसा करने दें।
    • किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया या उत्साह का प्रदर्शन ना करें।
    • क्षेत्रीय स्तर पर किसी भी स्थिति के लिए कलेक्टर के आवश्यक संदेश का इंतजार करें।
    • सभी कलेक्टरों के फेसबुक एवं टि्वटर अकाउंट्स है उन पर नजर रखें वहां आपको आधिकारिक सूचनाएं मिलेंगी।
    • संदिग्ध व्यक्ति या लावारिस वस्तुओं को देखते ही डायल 100 पर सूचना करें।
    • कृपया इस सूचना को अधिक से अधिक शेयर करें।



9 नवंबर को स्कूल कॉलेज व शराब दुकाने रहेंगी बन्द | All school holidays declared, order issued

भोपाल, खबर सत्ता : अयोध्या मामले में निर्णय की तारीख तय होने के बाद कलेक्टर के आदेश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी स्कूलों की छुट्टी घोषित कर दी है। इस आदेश के तहत सभी स्कूल यानी सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूल बंद रहेंगे। आदेश का उल्लंघन करने वाले स्कूल संचालकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जा सकते हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी नितिन सक्सेना के हस्ताक्षर से जारी आदेश के अनुसार सभी प्रकार की स्कूल, सरकारी एवं प्राइवेट, फिर वह चाहे किसी भी शिक्षा बोर्ड से एफिलेटेड हो। मदरसे या अनुदान प्राप्त स्कूल। प्राथमिक से लेकर हायर सेकेंडरी स्कूल तक। फिर चाहे वह अनरजिस्टर्ड प्ले स्कूल ही क्यों ना हो। सभी बंद रखे जाएं। कानून और व्यवस्था की स्थिति के लिए पुलिस को हाई अलर्ट पर रख दिया है।
प्रशासन की ओर से पुलिस से आग्रह किया गया है इस बात का ध्यान रखें एवं वाहनों का संचालन ना हो। यदि कोई स्कूल बस स्कूल वाहन बच्चों को लाता ले जाता दिखाई दे तो उसे रोककर वापस भेजें एवं कार्यवाही करें। आरटीओ से आग्रह किया गया है कि वह अपना अमला तैनात करें।
राज्य शासन द्वारा निर्णय लिया गया है कि कल दिनांक 09 नवम्बर 2019 को मध्यप्रदेश के समस्त शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों में एक दिवस का अवकाश रहेगा। इसके साथ सभी कालेज भी बन्द रहेगे वही सभी देशी एवं विदेशी शराब दुकाने भी कल नही खुली रहेगी।



यह भी पढ़े : अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट कल सुबह 10.30 बजे सुनाएगा फैसला
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सिवनी : भाजपा के संघटन चुनाव स्थगित

सिवनी,खबर सत्ता : – सिवनी जिला भाजपा द्वारा आगामी 9 नवंबर को मंडल स्तर पर होने वाली निर्वाचन की प्रक्रिया को आगाँमी निर्देश मिलने तक स्थिगित कर दिया गया है। ऊक्त जानकारी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह द्वारा शोशल मीडिया के माध्यम से दी गई है, मालुम हो की कल 9 नवंबर को ही वर्षो पुराने अयोध्या मसले पर देश की सर्वोच्च अदालत सुबह 10.30 पर अपना फेसला सुनाएगी।

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किसी भी घटना से निपटने के लिए पुलिस का मॉक ड्रिल सम्पन्न

लखनादौन-अयोध्या मामले में आने वाले फैसले के मददेनजर प्रषासन ने अपनी ओर से शांति बनाये रखने के लिए प्रयास शुरू कर दिये हैं। इससे पूर्व गत गुरूवार को जिला प्रषासन में शांति समिति बैठक में पूरे जिले में धारा 144 लगा दी गई हैं।

इसी कड़ी में सिवनी पुलिस कप्तान कुमार प्रतीक के निर्देष और लखनादौन एसडीओपी अरविन्द श्रीवास्तव के मार्ग दर्षन में लखनादौन नगर निरीक्षक एम डी नागोतिया द्वारा पुलिस थाना प्रागंण में समस्त स्टॉफ को किसी भी घटनाक्रम से निपटने के लिए मॉक ड्रिल कराई। साथ ही समस्त थाना क्षेत्रवासियों से सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये जाने वाले सुप्रीम निर्णय का सम्मान करते हुये शांति बनाने की अपील की हैं।