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सिवनी : बोतल या प्लास्टिक केन में नहीं मिलेगा पेट्रोल, डीजल

सिवनी,खबर सत्ता : अपर कलेक्टर श्रीमती रानी बाटड़ ने जिले में कानून व्यवस्था की दृष्टि से म.प्र. मोटर स्पिरिट तथा हाईस्पीड डीजल ऑयल (अनुज्ञापन तथा नियंत्रण) आदेश के तहत जिले के समस्त पेट्रोल पंप एवं डीजल पंप में पेट्रोल 2000 लीटर (दो हजार लीटर) एवं डीजल 3,000 लीटर ( तीन हजार लीटर) रिजर्व स्टॉक रखे जाने के आदेश दिये है। सभी पंप संचालकों को निर्देशित किया गया है कि वे जिले में पेट्रोल एवं डीजल की पंपो पर पर्याप्त आपूर्ति बनाये रखें।

जिले के समस्त पेट्रोल पंप संचालकों को निर्देशित किया गया है कि वे किसी भी उपभोक्ता, को कॉच या प्लास्टिक की बोतल अथवा प्लास्टिक की केन में पेट्रोल का प्रदाय नहीं करेंगे ।

पेट्रोल का प्रदाय केवल वाहन के ईंधन टैंक में ही किया जाना सुनिश्चित करे। यदि किसी भी पंप संचालक के विरूद्ध इस प्रकार की शिकायत प्राप्त होती है या पंप की जांच के समय कॉच अथवा प्लास्टिक की बोतल अथवा केन में पेट्रोल का विक्रय करना पाया जाता है तो संबंधित डीलर के विरूद्ध कार्यवाही की जावेगी ।

दिल्ली: इराकी महिला के गले में था दर्द, दुर्लभ ऑपरेशन से निकाली गई 53 पथरी

health kidney stones

नई दिल्ली: सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों ने एक दुर्लभ ऑपरेशन में इराक की एक 66 वर्षीय महिला के गले में लार नली (थूक की नली) व ग्रंथि में मौजूद 53 पथरी निकाली. अस्पताल के अनुसार, सितंबर के आखिरी सप्ताह में यह ऑपरेशन किया गया. इस दौरान शरीर में बिना किसी कट के बास्केट और फोरसेप्स का उपयोग करके पत्थरों को एक-एक करके हटाया गया. इस पूरी प्रक्रिया में दो घंटे लगे और अंत में 53 पत्थर निकाले गए. महिला भोजन या पेय के बाद पैरोटिड ग्रंथि के बार-बार होने वाले दर्द और सूजन से पीड़ित थी.

अस्पताल की ओर से जारी बयान में कहा गया कि बाद में पता चला कि मरीज के दाएं तरफ पैरोटिड नली में कई पत्थर हैं और सबसे बड़ा पत्थर लगभग 8 मि. मी. आकार का है, जो नली के बीच में अटका हुआ है.

बयान में कहा गया, “अपने देश और आसपास के अधिकांश डॉक्टरों ने पेरोटिड ग्रंथि को हटाने की एक प्रक्रिया का सुझाव दिया जो चेहरे पर एक भद्दा निशान छोड़ देता और उसके चेहरे को लकवाग्रस्त कर देता. वह सियालेंडोस्कोपी नामक एक प्रक्रिया के बारे में सुनकर भारत आई थी, जहां सिर्फ 1.3 मि. मी. माप वाला एक छोटा एंडोस्कोप पैरोटिड ग्रंथि में डाला जाता है और रुकावट का कारण पता किया जाता है.”

सर गंगा राम अस्पताल के ईएनटी सलाहकार वरुण राय के अनुसार, “सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि ग्रंथि या 3 मि. मी. चौड़ी नलिका पर कोई चोट लगे बिना सभी पत्थरों को हटा दिया जाए.”

सर्जरी के बाद मरीज को घर भेज दिया गया है. डॉक्टर दावा कर रहे हैं कि वह पूरी तरह से ठीक हो गई है और उसे अपनी पसंद का भोजन करने की अनुमति भी दी गई है.

Ayodhya Verdict LIVE:सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला- विवादित जगह पर बनेगा राम मंदिर, दूसरी जगह बनेगी मस्जिद

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमीन का बंटवारा नहीं होगा. विवादित जमीन रामलला को दी जाएगी. मुस्लिम पक्ष को अयोध्‍या में किसी अन्‍य खास जगह पर पांच एकड़ जमीन मस्जिद निर्माण के लिए दी जाएगी.

नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्‍या केस (Ayodhya Case) में ऐतिहासिक फैसला सर्वसम्‍मति यानी 5-0 से सुनाया है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्‍व में पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित जमीन पर राम मंदिर बनेगा. विवादित जमीन रामलला को दी जाएगी. मुस्लिम पक्ष अपने साक्ष्यों से यह सिद्ध नहीं कर पाए कि विवादित भूमि पर उनका ही एकाधिकार था. मुस्लिम पक्ष को अयोध्‍या में किसी अन्‍य जगह मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन दी जाएगी. इलाहाबाद हाई कोर्ट के जमीन के बंटवारा का आदेश गलत था.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार 3 महीने के भीतर एक स्‍कीम बनाकर एक ट्रस्ट का गठन करेगी जो मंदिर बनवायेगा. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि इससे जुड़ी जो बाकी याचिकाएं हैं, वो खारिज की जाती हैं. CJI ने रामलला के वकील के पराशरण और सी एस वैद्यनाथन, हरिशंकर जैन की सराहना की.

कोर्ट ने शिया वक्‍फ बोर्ड की याचिका खारिज कर दी. चीफ जस्टिस ने कहा कि मीर बाकी ने बाबर के वक्‍त बाबरी मस्जिद बनवाई थी. 1949 में दो मूर्तियां रखी गईं. बाबरी मस्जिद को गैर-इस्‍लामिक ढांचे पर बनाया गया. बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी. पुरातत्‍व विभाग (ASI) की रिपोर्ट से साबित होता है कि मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनाई गई थी. ASI की रिपोर्ट को खारिज नहीं किया जा सकता. खुदाई में इस्‍लामिक ढांचे के सबूत नहीं मिले. अंग्रेजों के आने से पहले राम चबूतरे की पूजा हिंदू करते थे.

कोर्ट ने कहा कि हिंदुओं की ये आस्था कि श्रीराम का जन्म अयोध्या में हुआ है, इस पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि 1885 से पहले राम चबूतरे पर हिंदुओं का अधिकार था. अहाते और चबूतरे पर हिंदुओं का अधिकार साबित होता है. 18वीं सदी तक नमाज पढ़े जाने के सबूत नहीं हैं. सीता रसोई की भी पूजा अंग्रेजों के आने से पहले हिंदू करते थे.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में विवादित जमीन को तीन हिस्‍सों में बांटने का जो फैसला दिया वो तार्किक नहीं था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्मोही अखाड़े का सूट मेनटेबल नहीं है. यह ‘सेवियत’ राइट के खिलाफ है. उन्हें शेबेट के अधिकार प्राप्त नहीं हैं. देवता न्यायिक व्यक्ति होता है. मूर्ति भी न्यायिक व्यक्ति होती है. मुस्लिम गवाहों ने भी माना कि दोनों पक्ष पूजा करते थे. सुन्नी वक्फ बोर्ड विवादित क्षेत्र पर अपना मालिकाना हक और प्रतिकूल कब्जा साबित करने में नाकाम रहा है.

सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की क्‍या थीं दलीलें:
– मन्दिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई
हिंदू पक्ष ने नक्शों, तस्वीरों और पुरातात्विक सबूतों के जरिये ये साबित करने की कोशिश की थी कि विवादित ढांचा बनने से पहले वहां भव्य मन्दिर था. मन्दिर को ध्वस्त कर मस्जिद का निर्माण कराया गया था. कोर्ट में पेश किए फोटोग्राफ के जरिये कहा गया था कि विवादित इमारत हिंदू मंदिर के 14 खंभों पर बनी थी. इन खंभों में तांडव मुद्रा में शिव, हनुमान कमल और शेरों के साथ बैठे गरुड़ की आकृतियां हैं.

– विवादित जगह पर दो हज़ार साल पहले भी मन्दिर
हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि विवादित स्थान पर आज से 2 हज़ार साल पहले भी भव्य राम मंदिर था. मंदिर के ढांचे के ऊपर ही विवादित इमारत को बनाया गया था. प्राचीन मंदिर के खंभों और दूसरी सामग्री का इस्तेमाल भी विवादित ढांचे के निर्माण में किया गया.

– श्रीराम जन्मस्थान को लेकर अटूट आस्था
हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया था कि जिस जगह का यहां मुकदमा चल रहा है. करोड़ों लोगों की आस्था है कि वही भगवान राम का जन्म स्थान है. सैकड़ों साल से यहां पूजा-परिक्रमा की परंपरा रही है. करोड़ों लोगों की इस आस्था को पहचानना और उसे मान्यता देना कोर्ट की ज़िम्मेदारी है.

– रामलला की मूर्ति रखे जाने से बहुत पहले से श्रीराम की पूजा
विवादित ढांचे के मूर्ति रखे जाने बहुत पहले से ही राम की पूजा होती रही है. किसी जगह को मंदिर के तौर पर मानने के लिए वहां मूर्ति होना ज़रूरी नहीं है. हिन्दू महज किसी एक रूप में ईश्वर की आराधना नहीं करते. केदारनाथ मंदिर में शिला की पूजा होती है. पहाड़ों की भी देवरूप में पूजा होती है. चित्रकूट में होने वाली परिक्रमा का उदाहरण दिया गया था.

– इस्लामिक सिद्धान्तों के मुताबिक भी विवादित ढांचा वैध मस्जिद नहीं
हिंदू पक्ष ने इस्लामिक नियमों का हवाला देकर ये साबित करने की कोशिश की थी कि विवादित ढांचा मस्जिद नहीं हो सकती. कहा गया था कि किसी धार्मिक स्थान के ऊपर जबरन बनाई गई. इमारत शरीयत के हिसाब से भी मस्ज़िद नहीं मानी जा सकती. उस इमारत में मस्ज़िद के लिए ज़रूरी तत्व भी नहीं थे. इस्लामिक विद्वान इमाम अबु हनीफा का कहना था कि अगर किसी जगह पर दिन में कम से कम दो बार नमाज़ पढ़ने के अज़ान नहीं होती तो वो जगह मस्ज़िद नहीं हो सकती. विवादित इमारत में 70 साल से नमाज नहीं पढ़ी गई है. उससे पहले भी वहां सिर्फ शुक्रवार को नमाज हो रही थी.

-रामलला विराजमान और श्रीरामजन्मस्थान को न्यायिक व्यक्ति का दर्ज़ा
हिंदू पक्ष ने श्रीरामजन्मस्थान को भी न्यायिक व्यक्ति होने के समर्थन में दलीलें रखीं थी. कहा था कि पूरा रामजन्मस्थान ही हिंदुओं के लिए देवता की तरह पूजनीय है. किसी जगह को मन्दिर साबित करने के लिए मूर्ति की मौजूदगी ज़रूरी नहीं है, बल्कि लोगों की आस्था, विश्वास ही किसी जगह को मन्दिर बनाते हैं. श्रीरामजन्मस्थान को लेकर तो लोगों की आस्था सदियों से अटूट रही है. मंदिर में विराजमान रामलला कानूनी तौर पर नाबालिग का दर्जा रखते हैं. नाबालिग की संपत्ति किसी को देने या बंटवारा करने का फैसला नहीं हो सकता.

-पुरातत्व सबूतों, धार्मिक ग्रंथों, विदेशी यात्रियों के लेख का हवाला
हिंदू पक्षकारों की ओर मन्दिर की मौजूदगी को साबित करने के लिए पुरातत्व सबूतों, धार्मिक ग्रंथों, विदेशी यात्रियों के लेख और पुरातात्विक सबूतों, राजस्व विभाग के रिकॉर्ड का हवाला दिया गया था. इसके अलावा हिंदू पक्ष ने विवादित जगह पर मन्दिर की मौजूदगी को साबित करने के लिए अयोध्या जाने वाले विदेशी यात्रियों जोसेफ टाइफेनथेलर, मोंटगोमरी मार्टिन के यात्रा संस्मरणों, डच इतिहासकर हंस बेकर और ब्रिटिश टूरिस्ट विलियम फिंच की पुस्तकों का भी हवाला दिया था.

-12वीं सदी का शिलालेख
सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने अहम सबूत के तौर पर 12वीं सदी के शिलालेख का हवाला दिया था. हिन्दू पक्ष की ओर से पेश वकील ने कहा कि पत्थर की जिस पट्टी पर संस्कृत का ये लेख लिखा है. उसे विवादित ढांचा विध्वंस के समय एक पत्रकार ने गिरते हुए देखा था. इसमें साकेत के राजा गोविंद चंद्र का नाम है. साथ ही लिखा है कि ये विष्णु मंदिर में लगी थी.

– आठवीं सदी के ग्रंथ स्कंद पुराण का हवाला
हिंदू पक्ष ने अपनी दलील के समर्थन में आठवीं सदी के ग्रंथ स्कंद पुराण का हवाला दिया था. उन्होंने कहा था कि बाबरी मस्जिद के 1528 में वजूद में आने से बहुत पहले स्कंद पुराण लिखा गया था. इस पुराण में भी अयोध्या का श्रीरामजन्मस्थान के रूप में जिक्र है और हिंदुओं का ये अगाध विश्वास रहा है कि यहां दर्शन से मोक्ष की प्राप्ति होती है.

– विवादित ढांचे के नीचे ईदगाह नहीं
हिंदू पक्ष ने विवादित ढांचे के नीचे ईदगाह होने की मुस्लिम पक्ष की वकील मीनाक्षी अरोड़ा की दलीलों को खारिज कर दिया था. हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया था कि जिसे मुस्लिम पक्ष ईदगाह की दीवार बता रहा है, उसके ऊपर छत होने के भी सबूत मिले है.ईदगाह पर छत नही होती. वहां सिर्फ एक दीवार नहीं, बल्कि हॉलनुमा ढांचा था.

– बाबर जैसे आक्रमणकारी को गौरवशाली इतिहास ख़त्म करने की इजाजत नहीं
बाबर जैसे विदेशी आक्रमणकारी को हिंदुस्तान के गौरवशाली इतिहास को ख़त्म करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती. अयोध्या में राम मंदिर को विध्वंस कर मस्जिद का निर्माण एक ऐतिहासिक ग़लती थी,जिसे सुप्रीम कोर्ट को अब ठीक करना चाहिए.अकेले अयोध्या में ही 50-60 मस्जिद हैं, मुसलमान किसी और मस्जिद में भी इबादत कर सकते हैं, पर हिन्दुओं के लिए तो ये जगह उनके आराध्य श्रीराम का जन्मस्थान है, हम ये जगह नहीं बदल सकते.

– सुन्नी वक्फ बोर्ड को दावा करने का हक़ नहीं
मुस्लिम पक्ष की ओर से दलील दी गई थी कि 1949 में विवादित इमारत में रामलला की मूर्ति पाए जाने के बाद 12 साल तक दूसरा पक्ष निष्क्रिय बैठा रहा. सुन्नी वक्फ बोर्ड ने 1961 में जाकर मुकदमा दायर किया. ऐसे में केस दायर करने की समयसीमा पार करने के चलते उन्हें कानूनन दावा करने का हक नहीं.

– अंग्रेजों के आने के बाद मुस्लिमों को शह मिली
हिंदू महासभा की ओर से विष्णु शंकर जैन ने कहा था कि 1528 से लेकर 1855 तक वहां मस्जिद की मौजूदगी को लेकर कोई मौखिक /दस्तावेजी सबूत नहीं. अंग्रेजों के आने के बाद से विवाद की शुरुआत हुई. हिंदुओं से पूजा का अधिकार छीन गया, मुसलमानों को विवादित ज़मीन पर शह मिली.

– मुस्लिम गवाहों के बयान का हवाला
हिंदू पक्ष ने अपनी दलीलों के समर्थन में इलाहाबाद हाई कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश कई मुस्लिम गवाहों के बयान के हिस्सों का भी हवाला दिया था.रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा था कि इन मुस्लिम गवाहों ने ख़ुद माना है कि जिस जगह को मुस्लिम लोग बाबरी मस्जिद कहते हैं वो हिन्दुओं द्वारा जन्मभूमि के तौर पर जानी जाती है और यहां सदियों से पूजा- परिक्रमा की भी परंपरा रही है.

सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की क्‍या थीं दलीलें:

-मस्जिद का कोई तय डिजाइन ज़रूरी नहीं
मुस्लिम पक्ष के वकील निजाम पाशा ने कहा था कि बाबरी मस्ज़िद की वैधता पर सवाल उठाने वाली हिंदू पक्ष की दलीलें ग़लत हैं. बिना किसी मीनार के या बिना वजूखाने के भी मस्जिद हो सकती है. मस्जिद के डिजाइन का शरिया से सीधा कोई वास्ता नहीं है. क्षेत्र विशेष के वास्तु शिल्प के आधार पर मस्जिद बनाई जाती रही है. ये देखना होगा कि लोग क्या मानते हैं. क्या बाबरी मस्जिद में वजू करने की व्यवस्था थी या नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि इस्लाम में घर से भी वजू करके मस्जिद आने की परम्परा रही है.

-निर्मोही होकर भी सम्पति से मोह
विवादित ज़मीन पर निर्मोही अखाड़े के दावों को लेकर निज़ाम पाशा ने दिलचस्प दलील दी थी. पाशा ने कहा था कि निर्मोही का मतलब है कि जो मोह से परे हो, जिसे सम्पतियों से लगाव न हो, वो निर्मोही कहलाता है. लेकिन अखाड़ा उसी (सम्पति) के लिए क़ानूनी लड़ाई लड़ रहा है.

-श्री रामजन्म स्थान को न्यायिक व्यक्ति का दर्जा नहीं
मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा था कि मैं ये मान लेता हूं कि श्री राम ने वहां जन्म लिया लेकिन क्या इतना भर होने से श्रीराम जन्मस्थान को न्यायिक व्यक्ति का दर्जा (जीवित व्यक्ति मानकर उनकी ओर से मुकदमा दायर) दिया जा सकता है.1989 से पहले किसी ने श्री रामजन्म स्थान को न्यायिक व्यक्ति नहीं माना. राजीव धवन ने अपनी दलीलों के जरिये श्री रामजन्म स्थान को न्यायिक व्यक्ति का दर्जा देने पर सवाल उठाते हुए कई उदाहरण दिये. कहा था कि श्री गुरु ग्रंथ साहब जी को जब तक गुरुद्वारा में प्रतिष्ठित नहीं किया जाता, तब तक उन्हें भी ‘न्यायिक व्यक्ति’ नहीं माना जा सकता. इसी तरह हर मूर्ति को न्यायिक व्यक्ति का दर्जा नहीं दिया जा सकता.

-श्रीराम और अल्लाह दोनों का सम्मान होना चाहिए
राजीव धवन ने कहा था कि श्री राम का सम्मान होना चाहिए, इसमे कोई संदेह नहीं है.लेकिन भारत जैसे महान देश में अल्लाह का भी सम्मान है. अगर दोनों का सम्मान कायम नहीं रहता है, तो विविधिता को समेटे ये देश खत्म हो जाएगा. धवन ने कहा था कि ये साफ है कि राम चबूतरे पर प्रार्थना होती थी, लेकिन पूरे इलाके में कभी पूजा नहीं की गई. राजीव धवन ने हिंदू पक्ष के द्वारा परिक्रमा के संबंध में गवाहों द्वारा दी गई गवाहियों का हवाला दिया था. धवन ने कहा था कि परिक्रमा के बारे में सभी गवाहों ने अलग अलग बात कही है. उनकी गवाही में विरोधाभास है.

-हमारा केस समयसीमा का उल्लंघन नहीं करता
मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा था कि हमने 18 दिसंबर 1961 को केस दायर किया. हिंदू पक्ष के मुताबिक लिमिटेशन के लिहाज से हम दो दिन देरी से थे. लेकिन हमारे केस में लिमिटेशन की समयसीमा 16 दिसंबर से भला क्यों शुरू होगी. ये समय सीमा तो 22-23 दिसंबर से शुरू होनी चाहिए, क्योंकि उसी रात वहां मूर्तियां रखी गई थी. मुझे ये साबित करने की ज़रूरत नहीं कि 17, 18, 19 दिसंबर तक हमारा वहां कब्ज़ा रहा क्योंकि 22 दिसंबर से पहले वहां पर कोई गतिविधि नहीं थी .राजीव धवन ने कहा कि क्या बादशाह (बाबर) ने कुरान/ धर्म का उल्लंघन किया. इसको संविधान की कसौटी पर ही परखा जाएगा.

-क़ाफ़िले बसते गए हिन्दोस्तां बनता गया
राजीव धवन ने जिरह ख़त्म करते हुए कहा था कि भारत विविधता का देश रहा है, लेकिन कुछ लोग इसे एक रंग में रंग देना चाहते है. धवन ने अपनी जिरह का अंत फ़िराक़ गोरखपुरी के इस शेर से किया था-“सर-ज़मीन-ए-हिंद पर अक़्वाम-ए-आलम के ‘फ़िराक़’ क़ाफ़िले बसते गए हिन्दोस्ताँ बनता गया.”

LIVE AYODHYA FAISLA : अयोध्या केस में सुप्रीम कोर्ट का 5-0 से फैसला, जानें पल-पल की UPDATE

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LIVE AYODHYA FAISLA : अयोध्या केस में सुप्रीम कोर्ट का 5-0 से फैसला, जानें पल-पल की UPDATE : LIVE AYODHYA FAISLA | चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस शरद अरविंद बोबडे, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़ और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ मामले पर फैसला सुनाएगी.

9 नवम्बर 2019, 11:18 बजे

Ayodhya verdict: CJI ने कहा, ‘केंद्र सरकार मदिर निर्माण के लिए तीन महीने में एक ट्रस्ट बनाएं’

9 नवम्बर 2019, 11:14 बजे

Ayodhya verdict: CJI ने कहा, ‘मुस्लिम पक्ष को दूसरी जगह 5 एकड़ जमीन मुस्लिम पक्ष को दी जाएगी’

9 नवम्बर 2019, 11:12 बजे

Ayodhya verdict: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘अयोध्या में विवादित जमीन रामलला को दी गई’

9 नवम्बर 2019, 11:10 बजे

Ayodhya verdict: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘मुस्लिम पक्ष को दूसरी जगह जमीन देने का आदेश’

9 नवम्बर 2019, 11:08 बजे

Ayodhya verdict: CJI ने कहा, ‘विवादित जमीन का बंटवारा नहीं किया जा सकता’

9 नवम्बर 2019, 11:04 बजे

Ayodhya Verdict: CJI ने कहा, ‘अंग्रेजों के आने से पहले राम चबूतरे और सीता रसोई की पूजा हिंदू करते थे.’

9 नवम्बर 2019, 11:01 बजे

Ayodhya Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘श्रीराम का जन्म अयोध्या में हुआ था, इसमें शक नहीं.’

9 नवम्बर 2019, 10:53 बजे

Ayodhya Verdict: CJI ने कहा, ‘खुदाई में इस्लामिक ढांचे के सबूत नहीं मिले’

9 नवम्बर 2019, 10:51 बजे

Ayodhya Verdict: CJI ने कहा, ‘ASI की रिपोर्ट खारिज को नहीं कर सकते. ASI की रिपोर्ट में 12वीं सदी के मंदिर के सबूत मिले.’

9 नवम्बर 2019, 10:47 बजे

Ayodhya Verdict: CJI ने कहा, ‘ढांचे के नीच मंदिर के सबूत मिले’

9 नवम्बर 2019, 10:46 बजे

Ayodhya Verdict: CJI ने कहा, ‘बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी’

9 नवम्बर 2019, 10:44 बजे

Ayodhya Verdict: CJI पूरा फैसला सुनाने में 30 मिनट लूंगा.

9 नवम्बर 2019, 10:40 बजे

AyodhyaVerdict: अयोध्या विवाद में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सुना रहे हैं फैसला.

9 नवम्बर 2019, 10:35 बजे

AyodhyaVerdict: अयोध्या विवाद में शिया सेंट्रल बोर्ड वक्फ की याचिका खारिज.

9 नवम्बर 2019, 10:33 बजे

Ayodhya Verdict: सुप्रीम कोर्ट के जजों ने फैसला पढ़ना शुरू किया. लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की.

9 नवम्बर 2019, 10:29 बजे

अयोध्या फैसला: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा, मैं उत्तराखंड के लोगों से अपील करता हूं कि जो भी फैसला सुप्रीम कोर्ट सुनाए उसे वे स्वीकार करें. सोशल मीडिया पर कोई अफवाह या आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं होनी चाहिए जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो.

अयोध्या मामले (Ayodhya Case) में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) आज सुबह 10:30 बजे अपना फैसला सुनाएगा. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस शरद अरविंद बोबडे, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़ और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ मामले पर फैसला सुनाएगी. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 16 अक्टूबर को सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा लिया था.

यह देश का सबसे पुराना मामला है और इस मामले में 40 दिनों तक नियमित सुनवाई हुई थी. यह सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में अब तक की दूसरी सबसे लंबी चली सुनवाई थी. सबसे लंबी सुनवाई का रिकॉर्ड 1973 के केशवानंद भारती केस का है, जिसमें 68 दिनों तक सुनवाई चली थी.

अयोध्या केस: DGP O.P. SINGH बोले, ‘अगर जरुरत पड़ी तो लोगों पर NSA भी लगा सकते हैं’

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डीजीपी ने बताया कि सोशल मीडिया सेल इंटरनेट पर उन 673 लोगों पर लगातार नजर रख रहे हैं, जिनकी पोस्ट या टिप्पणियां परेशानी का सबब बन सकती हैं. हमारे पुलिसकर्मियों ने जिले, पुलिस स्टेशन और स्थानीय स्तर पर संभावित खतरों और हॉटस्पॉट की पहचान की है.

लखनऊ: अयोध्या (Ayodhya verdict) में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) आज (9 नवंबर) सुबह साढ़े दस बजे फैसला सुनाएगा. इसे देखते हुए देश भर में हलचल तेज हो गई है. यूपी में 3 दिन के लिए सभी स्कूल, कॉलेज बंद कर दिए गए हैं. अयोध्या में चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात है. फैसले से पहले यूपी के DGP ओपी सिंह (OP Singh) ने कहा कि यूपी की सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त की गई है.

यूपी के DGP ओपी सिंह ने कहा कि आज बड़ा फैसला आएगा और इस फैसले के लिए यूपी तैयार है. उन्होंने बताया कि यूपी की सुरक्षा को और कड़ी कर दी गई है. अयोध्या को किले में तब्दील कर दिया गया. श्री रामलला मार्ग की गलियों में बैरिकेडिंग लगाकर रास्तों को रोक दिया गया है.  प्रमुख मार्गों पर भी बैरिकेट्स लगाए गए हैं. श्रीराम लीला रामपुर क्षेत्र में गलियों के बाहर पुलिस जवानों को तैनात किया गया है.

उन्होंने बताया कि हमारे सोशल मीडिया सेल इंटरनेट पर उन 673 लोगों पर लगातार नजर रख रहे हैं, जिनकी पोस्ट या टिप्पणियां परेशानी का सबब बन सकती हैं. हमारे पुलिसकर्मियों ने जिले, पुलिस स्टेशन और स्थानीय स्तर पर संभावित खतरों और हॉटस्पॉट की पहचान की है. उन्होंने कहा कि अगर जरुरत पड़ी तो लोगों पर एनएसए भी लगा सकते हैं. उन्होंने बताया कि कई सोशल मीडिया एकाउंट सीज भी किए हैं.

हमने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए 31 संवेदनशील जिलों की पहचान की जैसे-आगरा अलीगढ़, मेरठ, मुरादाबाद, लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर और अन्य है. डीजेपी ने कहा कि राज्य में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई है.

अयोध्‍या केस: जानें 40 दिन की सुनवाई में हिंदू पक्ष की क्या रही दलीलें?

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हिंदू पक्ष ने नक्शों, तस्वीरों और पुरातात्विक सबूतों के जरिये ये साबित करने की कोशिश की थी कि विवादित ढांचा बनने से पहले वहां भव्य मन्दिर था.

नई दिल्‍ली: अयोध्या मामले (Ayodhya Case) में सुप्रीम कोर्ट आज सुबह 10:30 बजे अपना फैसला सुनाएगा. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस शरद अरविंद बोबडे, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ मामले पर फैसला सुनाएगी. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 16 अक्टूबर को सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा लिया था. दरअसल, यह देश का सबसे पुराना मामला है और इस मामले में 40 दिनों तक नियमित सुनवाई हुई थी. यह सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में अब तक की दूसरी सबसे लंबी चली सुनवाई थी. सबसे लंबी सुनवाई का रिकॉर्ड 1973 के केशवानंद भारती केस का है, जिसमें 68 दिनों तक सुनवाई चली थी.

हिंदू पक्ष की दलील

– मन्दिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई
हिंदू पक्ष ने नक्शों, तस्वीरों और पुरातात्विक सबूतों के जरिये ये साबित करने की कोशिश की थी कि विवादित ढांचा बनने से पहले वहां भव्य मन्दिर था. मन्दिर को ध्वस्त कर मस्जिद का निर्माण कराया गया था. कोर्ट में पेश किए फोटोग्राफ के जरिये कहा गया था कि विवादित इमारत हिंदू मंदिर के 14 खंभों पर बनी थी. इन खंभों में तांडव मुद्रा में शिव, हनुमान कमल और शेरों के साथ बैठे गरुड़ की आकृतियां हैं.

– विवादित जगह पर दो हज़ार साल पहले भी मन्दिर
हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि विवादित स्थान पर आज से 2 हज़ार साल पहले भी भव्य राम मंदिर था. मंदिर के ढांचे के ऊपर ही विवादित इमारत को बनाया गया था. प्राचीन मंदिर के खंभों और दूसरी सामग्री का इस्तेमाल भी विवादित ढांचे के निर्माण में किया गया.

– श्रीराम जन्मस्थान को लेकर अटूट आस्था
हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया था कि जिस जगह का यहां मुकदमा चल रहा है. करोड़ों लोगों की आस्था है कि वही भगवान राम का जन्म स्थान है. सैकड़ों साल से यहां पूजा-परिक्रमा की परंपरा रही है. करोड़ों लोगों की इस आस्था को पहचानना और उसे मान्यता देना कोर्ट की ज़िम्मेदारी है.

– रामलला की मूर्ति रखे जाने से बहुत पहले से श्रीराम की पूजा
विवादित ढांचे के मूर्ति रखे जाने बहुत पहले से ही राम की पूजा होती रही है. किसी जगह को मंदिर के तौर पर मानने के लिए वहां मूर्ति होना ज़रूरी नहीं है. हिन्दू महज किसी एक रूप में ईश्वर की आराधना नहीं करते. केदारनाथ मंदिर में शिला की पूजा होती है. पहाड़ों की भी देवरूप में पूजा होती है. चित्रकूट में होने वाली परिक्रमा का उदाहरण दिया गया था.

– इस्लामिक सिद्धान्तों के मुताबिक भी विवादित ढांचा वैध मस्जिद नहीं
हिंदू पक्ष ने इस्लामिक नियमों का हवाला देकर ये साबित करने की कोशिश की थी कि विवादित ढांचा मस्जिद नहीं हो सकती. कहा गया था कि किसी धार्मिक स्थान के ऊपर जबरन बनाई गई. इमारत शरीयत के हिसाब से भी मस्ज़िद नहीं मानी जा सकती. उस इमारत में मस्ज़िद के लिए ज़रूरी तत्व भी नहीं थे. इस्लामिक विद्वान इमाम अबु हनीफा का कहना था कि अगर किसी जगह पर दिन में कम से कम दो बार नमाज़ पढ़ने के अज़ान नहीं होती तो वो जगह मस्ज़िद नहीं हो सकती. विवादित इमारत में 70 साल से नमाज नहीं पढ़ी गई है. उससे पहले भी वहां सिर्फ शुक्रवार को नमाज हो रही थी.

-रामलला विराजमान और श्रीरामजन्मस्थान को न्यायिक व्यक्ति का दर्ज़ा
हिंदू पक्ष ने श्रीरामजन्मस्थान को भी न्यायिक व्यक्ति होने के समर्थन में दलीलें रखीं थी. कहा था कि पूरा रामजन्मस्थान ही हिंदुओं के लिए देवता की तरह पूजनीय है. किसी जगह को मन्दिर साबित करने के लिए मूर्ति की मौजूदगी ज़रूरी नहीं है, बल्कि लोगों की आस्था, विश्वास ही किसी जगह को मन्दिर बनाते हैं. श्रीरामजन्मस्थान को लेकर तो लोगों की आस्था सदियों से अटूट रही है. मंदिर में विराजमान रामलला कानूनी तौर पर नाबालिग का दर्जा रखते हैं. नाबालिग की संपत्ति किसी को देने या बंटवारा करने का फैसला नहीं हो सकता.

-पुरातत्व सबूतों, धार्मिक ग्रंथों, विदेशी यात्रियों के लेख का हवाला
हिंदू पक्षकारों की ओर मन्दिर की मौजूदगी को साबित करने के लिए पुरातत्व सबूतों, धार्मिक ग्रंथों, विदेशी यात्रियों के लेख और पुरातात्विक सबूतों, राजस्व विभाग के रिकॉर्ड का हवाला दिया गया था.इसके अलावा हिंदू पक्ष ने विवादित जगह पर मन्दिर की मौजूदगी को साबित करने के लिए अयोध्या जाने वाले विदेशी यात्रियों जोसेफ टाइफेनथेलर, मोंटगोमरी मार्टिन के यात्रा संस्मरणों, डच इतिहासकर हंस बेकर और ब्रिटिश टूरिस्ट विलियम फिंच की पुस्तकों का भी हवाला दिया था.

-12वीं सदी का शिलालेख
सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने अहम सबूत के तौर पर 12वीं सदी के शिलालेख का हवाला दिया था. हिन्दू पक्ष की ओर से पेश वकील ने कहा कि पत्थर की जिस पट्टी पर संस्कृत का ये लेख लिखा है. उसे विवादित ढांचा विध्वंस के समय एक पत्रकार ने गिरते हुए देखा था. इसमें साकेत के राजा गोविंद चंद्र का नाम है. साथ ही लिखा है कि ये विष्णु मंदिर में लगी थी.

– आठवीं सदी के ग्रंथ स्कंद पुराण का हवाला
हिंदू पक्ष ने अपनी दलील के समर्थन में आठवीं सदी के ग्रंथ स्कंद पुराण का हवाला दिया था. उन्होंने कहा था कि बाबरी मस्जिद के 1528 में वजूद में आने से बहुत पहले स्कंद पुराण लिखा गया था. इस पुराण में भी अयोध्या का श्रीरामजन्मस्थान के रूप में जिक्र है और हिंदुओं का ये अगाध विश्वास रहा है कि यहां दर्शन से मोक्ष की प्राप्ति होती है.

– विवादित ढांचे के नीचे ईदगाह नहीं
हिंदू पक्ष ने विवादित ढांचे के नीचे ईदगाह होने की मुस्लिम पक्ष की वकील मीनाक्षी अरोड़ा की दलीलों को खारिज कर दिया था. हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया था कि जिसे मुस्लिम पक्ष ईदगाह की दीवार बता रहा है, उसके ऊपर छत होने के भी सबूत मिले है.ईदगाह पर छत नही होती. वहाँ सिर्फ एक दीवार नहीं, बल्कि हॉलनुमा ढाँचा था.

– बाबर जैसे आक्रमणकारी को गौरवशाली इतिहास ख़त्म करने की इजाजत नहीं
बाबर जैसे विदेशी आक्रमणकारी को हिंदुस्तान के गौरवशाली इतिहास को ख़त्म करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती. अयोध्या में राम मंदिर को विध्वंस कर मस्जिद का निर्माण एक ऐतिहासिक ग़लती थी,जिसे सुप्रीम कोर्ट को अब ठीक करना चाहिए.अकेले अयोध्या में ही 50-60 मस्जिद है, मुसलमान किसी और मस्जिद में भी इबादत कर सकते है, पर हिन्दुओं के लिए तो ये जगह उनके आराध्य श्रीराम का जन्मस्थान है, हम ये जगह नहीं बदल

– सुन्नी वक्फ बोर्ड को दावा करने का हक़ नहीं
मुस्लिम पक्ष की ओर से दलील दी गई थी कि 1949 में विवादित इमारत में रामलला की मूर्ति पाए जाने के बाद 12 साल तक दूसरा पक्ष निष्क्रिय बैठा रहा. सुन्नी वक्फ बोर्ड ने 1961 में जाकर मुकदमा दायर किया.ऐसे में केस दायर करने की समयसीमा पार करने के चलते उन्हें कानूनन दावा करने का हक नहीं.

– अंग्रेजों के आने के बाद मुस्लिमों को शह मिली
हिंदू महासभा की ओर से विष्णु शंकर जैन ने कहा था कि 1528 से लेकर 1855 तक वहाँ मस्जिद की मौजूदगी को लेकर कोई मौखिक /दस्तावेजी सबूत नहीं.अंग्रेजों के आने के बाद से विवाद की शुरूआत हुई.हिंदुओं से पूजा का अधिकार छीन गया, मुसलमानों को विवादित ज़मीन पर शह मिली.

– मुस्लिम गवाहों के बयान का हवाला
हिंदू पक्ष ने अपनी दलीलों के समर्थन में इलाहाबाद हाई कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश कई मुस्लिम गवाहों के बयान के हिस्सों का भी हवाला दिया था.रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा था कि इन मुस्लिम गवाहों ने ख़ुद माना है कि जिस जगह को मुस्लिम लोग बाबरी मस्जिद कहते हैं वो हिंन्दुओं द्वारा जन्मभूमि के तौर पर जानी जाती है और यहां सदियों से पूजा- परिक्रमा की भी परंपरा रही है. एक गवाह हाशिम ने अपनी गवाही में माना है कि जैसे मक्का मुसलमानों के लिये पवित्र है वैसे ही हिन्दुओं के लिये अयोध्या.

अयोध्या फैसला: UP के इस शहर में इंटरनेट सेवाएं बंद, Social Media सेल की 673 लोगों पर नजर

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पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने बताया कि हमारे सोशल मीडिया सेल इंटरनेट पर उन 673 लोगों पर लगातार नजर रख रहे हैं जिनकी पोस्ट या टिप्पणियां परेशानी का सबब बन सकती हैं. हमारे पुलिसकर्मियों ने जिले, पुलिस स्टेशन और स्थानीय स्तर पर संभावित खतरों और हॉटस्पॉट की पहचान की है.

लखनऊ: अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला (Ayodhya Verdict) आने के पहले ऐहतियात के तौर पर उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के अलीगढ़ (Aligarh) में इंटरनेट सेवाएं (Internet services) बंद कर दी गई हैं. यह सेवा शुक्रवार आधी रात के तुरंत बाद बंद कर दी गई. उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह (OP Singh) ने कहा कि स्थिति सांप्रदायिक व संवेदनशील होने के मद्देनजर और अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए अन्य जिलों में भी इंटरनेट सेवा बंद किया जा सकता है.

673 लोगों पर पुलिस की नजर
उन्होंने कहा कि हमारे सोशल मीडिया सेल इंटरनेट पर उन 673 लोगों पर लगातार नजर रख रहे हैं जिनकी पोस्ट या टिप्पणियां परेशानी का सबब बन सकती हैं. हमारे पुलिसकर्मियों ने जिले, पुलिस स्टेशन और स्थानीय स्तर पर संभावित खतरों और हॉटस्पॉट की पहचान की है. हमने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए 31 संवेदनशील जिलों की पहचान की जैसे-आगरा अलीगढ़, मेरठ, मुरादाबाद, लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर और अन्य है. डीजेपी ने कहा कि राज्य में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई है.

फैसले को लेकर लोगों में सुगबुगाहत शुरू
सुप्रीम कोर्ट के शनिवार को फैसला सुनाए जाने की खबर मिलते ही लखनऊ में लोगों के बीच शुक्रवार को देर रात तक घबराहट देखी गई. लोग पेट्रोल, डीजल, सब्जियां लेने और एटीएम से पैसे निकालने के लिए दौड़ पड़े. पुराने श्हर के हिस्सों में ज्यादा भीड़ देखी गई, जिसमें मुस्लिम आबादी काफी है.

देर रात तक खुली सब्जी मंडियां
चौक में सब्जी मंडी रात 11 बजे के बाद फिर से खोल दी गई और लोगों ने आने वाले दिनों में परेशानी की आशंका में बड़ी मात्रा में सब्जियां खरीदीं. पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें देखी गईं क्योंकि लोग ईंधन भराने के लिए कतार में खड़े थे. राज्य की राजधानी के अधिकांश एटीएम में आधी रात तक कैश खत्म हो गए क्योंकि लोगों ने पैसे निकाल लिए थे. शनिवार अल सुबह से ही लोग दूध और अन्य आवश्यक चीजें खरीदने के लिए कतार में लग गए.

अयोध्या में चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात
अयोध्या में, शुक्रवार की देर रात से सुरक्षा बढ़ा दी गई थी, जिसमें 4,000 अतिरिक्त अर्धसैनिक बल थे. मंदिरों का शहर एक प्रकार के अभेद किले में बदल गया है. शहर के सभी प्रवेश बिंदु आधी रात के बाद पूरी तरह से सील कर दिए गए और दो हेलीकॉप्टरों जो एक लखनऊ और एक अयोध्या में स्टैंडबाय पर रखा गया है. लखनऊ में एक राज्य-स्तरीय नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है, जबकि प्रत्येक जिले का अपना नियंत्रण कक्ष होगा.

सूत्रों ने बताया कि रेलवे पुलिस ने अपने सभी जोनों को सुरक्षा तैयारियों के बारे में निर्देश देने के लिए सात पन्नों की एक एडवाइजरी जारी की. रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने कहा कि उसके सभी कर्मियों की छुट्टी रद्द कर दी गई है और उन्हें एस्कॉटिर्ंग ट्रेनों में लगे रहने का निर्देश दिया गया है.

अयोध्या केस: सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से पहले पढ़ें 2010 का इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला

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उस फैसले में तीन जजों की पीठ ने अयोध्या की विवादित 2.77 एकड़ जमीन को तीन बराबर हिस्सों में बांट दिया था.

नई दिल्ली: देश के संभवत: सर्वाधिक चर्चित और विवादित अयोध्या के रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले (Ayodhya Case) में आज (शनिवार नौ नवंबर) सुबह साढ़े 10 बजे सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुनाने जा रहा है. इस मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. इससे पहले 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अयोध्या मामले पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. हाई कोर्ट के जस्टिस सुधीर अग्रवाल, जस्टिस एस यू खान और जस्टिस डी वी शर्मा की बेंच ने वह फैसला सुनाया था.

उस फैसले में तीन जजों की पीठ ने अयोध्या की विवादित 2.77 एकड़ जमीन को तीन बराबर हिस्सों में बांट दिया था. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि राम लला विराजमान वाला हिस्सा हिंदू महासभा को दिया जाए. दूसरा हिस्सा निर्मोही अखाड़े को और तीसरा हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया जाए.

अयोध्या केस में हाई कोर्ट ने पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट को आधार मानकर अपना फैसला सुनाया था. हाई कोर्ट ने कहा था कि खुदाई के दौरान विवादित स्थल पर मंदिर के प्रमाण मिले थे. इसके अलावा भगवान राम के जन्म होने की मान्यता को भी शामिल किया गया था. हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा था कि साढ़े चार सौ साल से मौजूद एक इमारत के ऐतिहासिक तथ्यों की भी अनदेखी नहीं की जा सकती.

30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ उसी साल दिसंबर में हिंदू महासभा और सुन्नी वक्फ बोर्ड ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी.  9 मई 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने पुरानी स्थिति बरकरार रखने का आदेश दे दिया. उसके बाद अब सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ के सामने 40 दिनों तक बहस के बाद इस मामले में सुनवाई पूरी हो चुकी है. देश की सबसे बड़ी अदालत ने फैसला सुनाने के लिए शनिवार यानी 9 नवंबर का दिन तय किया है.

अयोध्या फैसला :सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा बढ़ी, जामा मस्जिद में भी बढ़ाई गई सिक्योरिटी

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अयोध्या केस (Ayodhya Case) पर आने वाले ऐतिहासिक फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. कोर्ट परिसर के तमाम गेट के बाहर दिल्ली पुलिस की 500 जवानों के साथ साथ अर्धसैनिक बलों की 3 कंपनियां तैनात की गई है.ayodhya case

नई दिल्ली: अयोध्या केस (Ayodhya Case) पर आने वाले ऐतिहासिक फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. कोर्ट परिसर के तमाम गेट के बाहर दिल्ली पुलिस की 500 जवानों के साथ साथ अर्धसैनिक बलों की 3 कंपनियां तैनात की गई है.

वहीं पुरानी दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है. हर आने जाने वालों की गहन तलाशी ली जा रही है. इसके साथ ही दिल्ली पुलिस ने तमाम धार्मिक संस्थानों की सुरक्षा बढ़ा दी है.

सभी देश वासियों से अपील है कि वह सोशल मीडिया पर अपवाहों को ध्यान न दें. अगर कोई अपवाह फैलाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कारवाई की जाएगी.

MP के सभी नागरिकों के लिए अति आवश्यक सूचना | MP NEWS



भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ एवं सभी जिलों के कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक होने आम नागरिकों की अपील जारी की है। कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं कृपया ध्यान पूर्वक नोट कर ले।
    • 09 नवम्बर 2019 को मध्यप्रदेश के समस्त शासकीय एवं अशासकीय विद्यायलयों में एक दिवस का अवकाश  रहेगा।
    • आतिशबाजी ,पटाखें छोड़ने पर प्रतिबंध रहेगा।
    • कलेक्टर और जिला दंडाधिकारी ने जिले में धारा 144 लागू की है। इसका कड़ाई से पालन होगा।
    • 5 या 5 से अधिक की संख्या में समूह बनाकर खड़े हुए लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
    • कृपया आवश्यक ना हो तो अपनी सभी यात्रा रद्द कर दें।
    • किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान ना दें।
    • किसी भी प्रकार की सूचना एवं समाचार को जब तक कि वह आधिकारिक स्तर पर पुष्टि ना हो जाए विश्वास ना करें।
    • आधिकारिक सूचनाओं के लिए व्हाट्सएप के अलावा दूसरे सोर्स पर भी सूचनाओं की विश्वसनीयता की जांच करें।
    • पुलिस एवं प्रशासन को सहयोग प्रदान करें।
    • यदि आप या आपका कोई रिश्तेदार यात्रा में है तो पुलिस दल उन्हें रोककर उनके सामान की जांच कर सकते हैं कृपया उन्हें ऐसा करने दें।
    • किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया या उत्साह का प्रदर्शन ना करें।
    • क्षेत्रीय स्तर पर किसी भी स्थिति के लिए कलेक्टर के आवश्यक संदेश का इंतजार करें।
    • सभी कलेक्टरों के फेसबुक एवं टि्वटर अकाउंट्स है उन पर नजर रखें वहां आपको आधिकारिक सूचनाएं मिलेंगी।
    • संदिग्ध व्यक्ति या लावारिस वस्तुओं को देखते ही डायल 100 पर सूचना करें।
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