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सिवनी : सोशल मीडिया में आपत्तिजनक पोस्ट करना पड़ा भारी 8 व्यक्ति भेजे गए जेल

सिवनी, खबर सत्ता : सिवनी जिले में कानून व्यवस्था के मद्देनजर प्रभावी धारा 144 अवधि में सोशल मीडिया साइट पर आपत्तिजनक पोस्ट करना 8 व्यक्तियों को भारी पड़ा । जिनके विरुद्ध पुलिस और प्रशासन द्वारा तत्काल कार्यवाही करते हुए संबंधित पुलिस थाने में प्रकरण दर्ज कर जेल भेजा गया है।

जिसमें थाना छपारा क्षेत्र में व्हाट्सएप ग्रुप में आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर ग्रुप एडमिन श्री राधे गज्जाम निवासी बिहिरिया एवं आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले शेर दिल रंजीत सिंह निवासी सिवनी के विरुध्द अपराध पंजी बध्य कर जेल भेजा गया है।

इसी तरह थाना कोतवाली सिवनी में राजेश पिता कोमल चंद जैन, उम्र 44 वर्ष निवासी आजाद वार्ड सिवनी , ऐश्वर्य पोतदार पिता कैलाश चंद पोतदार उम्र 30 वर्ष निवासी बुधवारी बाजार सिवनी, विवेक उर्फ छोटू बघेल पिता उमाकांत बघेल निवासी लुघरवाड़ा तथा पंकज पिता किशोर जेठानी उम्र 21 वर्ष निवासी नेहरू रोड हनुमान मंदिर सिवनी तथा थाना केवलारी में राजा राज राजपूत पिता ढोलन सिंह राजपूत उम्र 40 वर्ष निवासी डूंगरिया चौकी छिंदा तथा संतोष जंघेला पिता छत्रपाल जंघेला उम्र 30 वर्ष बजरंग कॉलोनी केवलारी निवासी के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर प्रतिबंधात्मक कार्यवाही करते हुए जेल भेजा गया है।

बच्चों में मनोबल वृद्धि के लिए 52 जिलों की यात्रा पर विक्रांत दि्वेदी : सिवनी में हुआ स्वागत

बच्चों की प्रसन्नता में ही उनका विकास संभव है:विक्रांत

सिवनी, खबर सत्ता : बाल कल्याण समिति रीवां के सदस्य श्री विक्रांत दि्वेदी ने 1 नवम्बर 2019 मध्यप्रदेश स्थापना दिवस से बच्चौ के मनोबल में वृद्धि और उनसे संवाद उद्देश्य को लेकर अपनी बुलेट मोटर साइकिल से 52 ज़िलों की यात्रा के संकल्प के साथ बालाघाट होते हुये दसवें जिला के रूप में आज दिनांक 10 नवम्बर 2019 को दोपहर 12.30 बजे सिवनी पहुंचे.

सिवनी पहुचते ही हुआ स्वागत किया गया : उनके स्वागत में बाल कल्याण समिति सिवनी के सदस्य डाक्टर रामकुमार चतुर्वेदी,समाज कल्याण एवं विधिक जनचेतना समिति NGO सिवनी के पदाधिकारी एडवोकेट अखिलेश यादव,रोहित शर्मा, ब्रजमोहन मरावी,टीम नेकी की दीवार की ओर से कपिल पांडे कप्पू,यादव शक्ति संगठन की ओर से संजय यादव,कैलाश यादव,श्रीराम आदर्श शिक्षा समिति सिवनी की ओर से हर्ष चतुर्वेदी,रजक सर, सामाजिक कार्यकर्ता कुलदीप राय आदि ने पुष्प गुच्छ पुष्प हार से श्री दि्वेदी का स्वागत किया और उनके उद्देश्य को जाना। तत्पश्चात शासकीय सुधारालय में बच्चों के साथ भेंट कर उनसे संवाद किया जहां अधिक्षिका डाक्टर नीलिमा तिवारी जी , सहायक अधिक्षक श्री अरूण प्रताप सिंह जी एवं स्टाफ का सहयोग रहा।

सिवनी नेताजी स्कूल बनेगा अंतर्राष्ट्रीय स्तर का ,अत्याधुनिक सुविधाओं से होगा लैस

अत्याधुनिक स्तर की सुविधाओं से किया जायेगा लैस

सिवनी । कमल नाथ के नेत्तृत्व वाली प्रदेश सरकार के द्वारा प्रदेश के हर जिले में एक शाला को अंर्तराष्ट्रीय स्तर की शाला बनाये जाने की कवायद की जा रही है। इसके तहत जिला मुख्यालय की नेताजी सुभाष चंद्र बोस उच्चतर माध्यमिक शाला का चयन किया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा इस शाला का चयन कर जारी पत्र में कहा गया है कि इस तरह के नवाचार से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में मदद मिलेगी। इस शाला को अटल टिंगरिंग प्रयोगशाला की सौगात मिली है। इसके अलावा इस शाला में कंप्यूटर लैब के साथ ही साथ शाला में उच्च स्तरीय शौचालयों का निर्माण भी कराया जायेगा।

बताया जाता है कि अंर्तराष्ट्रीय स्तर की शाला बनाये जाने को लेकर अनेक बिंदुओं पर गुड़गाँव में शिक्षकों को प्रशिक्षण भी दिया जाना प्रस्तावित है। इस शाला को ओपन शिक्षा की परीक्षा का केंद्र भी बनाया गया है। इस शाला के अंर्तराष्ट्रीय स्तर के मानकों के हिसाब से बनाये जाने के बाद यहाँ का शैक्षणिक स्तर सुधरने की उम्मीद शिक्षकों ने जतायी है।

सिवनी : आज भी बंद रहेंगी शराब दुकाने

सिवनी । शनिवार के बाद रविवार को भी जिले में शराब दुकानें बंद रहेंगी।

प्रशासनिक सूत्रों ने खबर सत्ता को बताया कि अयोध्या मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा दिये गये फैसले के बाद कानून और व्यवस्था की स्थिति को मद्देनज़र रखते हुए प्रभारी कलेक्टर रानी बाटड़ के द्वारा जिले में देशी और विदेशी शराब दुकानों को रविवार 10 नवंबर को भी बंद रखने के लिये आदेश जारी किया है।

अयोध्या पर ‘सुप्रीम’ फैसले को लेकर देखिये आज के अखबारों की कवरेज

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आज अमर उजाला, नवभारत टाइम्स, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर और हिन्दुस्तान ने फ्रंट पेज पर कोई विज्ञापन नहीं लिया है

अयोध्या विवाद आखिरकार सुलझ गया है। लंबे समय से अदालती कार्यवाही में उलझी विवादित जमीन के ‘असली मालिक’ की पहचान सुप्रीम कोर्ट ने कर दी है। खास बात यह है कि इस ऐतिहासिक फैसले को सभी पक्षों द्वारा स्वीकार किया गया है। फैसला सामने आने के बाद जिस तरह का सौहार्दपूर्ण माहौल देश में देखने को मिला, वह अपने आप में अहम है। इस अहम दिन की मीडिया ने भी खास तैयारी की थी, जिसके परिणाम आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले प्रमुख अखबारों में नजर आ रहे हैं। आमतौर पर महत्वपूर्ण अवसरों पर अखबारों के फ्रंट पेज विज्ञापनों से पटे रहते हैं। कंपनियों को भी ऐसे ही मौकों की तलाश रहती है, लेकिन अयोध्या के ऐतिहासिक फैसले को विस्तार से पाठकों तक पहुंचाने के लिए अमर उजाला, नवभारत टाइम्स, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर और हिन्दुस्तान ने फ्रंट पेज पर कोई विज्ञापन नहीं लिया है, जो काबिल-ए-तारीफ है। हालांकि, शेष अहम खबरों के लिए बनाये गए दूसरे फ्रंट पेज पर जरूर कुछ अखबारों में विज्ञापन हैं।

शुरुआत करते हैं हिन्दुस्तान से। लीड को एक तरह से मास्टहेड से ही शुरू कर दिया गया है। यानी अखबार के ‘लोगो’ के बैकग्राउंड में अयोध्या की बड़ी फोटो है, जिसके नीचे ‘राम मंदिर का रास्ता साफ’ शीर्षक तले खबर को लगाया गया है। फैसले से जुड़ी चार प्रमुख बातों को अलग से रेखांकित किया गया है, ताकि एक ही नजर में पाठकों को फैसला समझ आ जाए। हिंदू-मुस्लिम पक्षों की प्रतिक्रिया, पीएम मोदी सहित प्रमुख हस्तियों के बयान के साथ फैसले पर टिकी यूपी सरकार की निगाहों को भी पेज पर रखा गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद कंट्रोल रूम में बैठकर सुरक्षा संबंधी तैयारियों की समीक्षा करते रहे। एंकर में हेमंत श्रीवास्तव और आदर्श शुक्ल की बाईलाइन है, जिन्होंने फैसले के बाद अयोध्या के हालातों पर अपनी कलम चलाई है। इसके अलावा, पांचवें पेज को भी फ्रंट पेज बनाया गया है, जिसकी लीड भी अयोध्या है। ‘मस्जिद के लिए मुनासिब भूमि मिले’ शीर्षक के साथ लीड में मुस्लिम पक्ष से जुड़े फैसले को विस्तार से समझाया गया है। श्रद्धालुओं का पहला जत्था करतारपुर रवाना, इस समाचार को भी पेज पर जगह दी गई है।

अब रुख करते हैं अमर उजाला का। फ्रंट पेज की शुरुआत 30 साल पुराने फोटो से की गई है। हालांकि, इसे मास्टहेड से लगाने के बजाय मास्टहेड को छोटा कर दिया गया है। इस फोटो ने पेज को इसलिए भी खास बना दिया है, क्योंकि 30 वर्ष पूर्व 9 नवंबर को ही रामजन्मभूमि का शिलान्यास हुआ था और 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। लीड का शीर्षक है ‘रामलला विराजमान’ और इसमें सभी महत्वपूर्ण बातों को अलग से रेखांकित किया गया है।

‘अमर उजाला’ ने ‘हिन्दुस्तान’ से इतर लीड में फैसला सुनाने वाले जजों की फोटो को भी जगह दी है। इसके साथ ही दोनों पक्षों सहित प्रमुख हस्तियों की प्रतिक्रियाओं को भी रखा गया है। पांचवें पेज पर बने दूसरे फ्रंट पेज के टॉप बॉक्स पर अयोध्या के फैसले पर पीएम मोदी के बयान को सजाया गया है। जिसका शीर्षक है ‘आज ही बर्लिन की दीवार गिरी थी, यह तारीख साथ बढ़ने की सीख’। इसके साथ ही अयोध्या पर पाकिस्तान की बौखलाहट भी पेज पर है। पाक के विदेशमंत्री कुरैशी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला मोदी सरकार की कट्टरता को झलकाता है। हालांकि, भारत ने भी कुरैशी को करार जवाब दिया है। लीड करतारपुर रवाना हुआ श्रद्धालुओं का पहला जत्था है। इसके अलावा, पेज पर महाराष्ट्र का सियासी संग्राम, फरीदाबाद में परिवार की हत्या और एंकर में दिल्ली के प्रदूषण को लगाया गया है।

नवभारत टाइम्स ने ‘मंदिर वहीं, मस्जिद नई’ शीर्षक के साथ लीड अयोध्या फैसले को लगाया है। लीड में सद्भावना की मिसाल दर्शाती दो तस्वीरें हैं, साथ ही सोशल मीडिया पर फैसले से जुड़ी प्रतिक्रियाओं को भी जगह मिली है। इसके अलावा, फैसले के सियासी और सामाजिक असर को भी समझाने का खूबसूरत प्रयास किया गया है। सबसे नीचे अहम सवालों पर कोर्ट के जवाब हैं।

दूसरे फ्रंट पेज की लीड भी अयोध्या है, जिसे आकर्षक शीर्षक ‘मंदिर निर्माण के वास्ते, कोर्ट ने तय किए रास्ते’ के साथ फोटो सहित रखा गया है। करतारपुर गलियारे के उद्घाटन और अयोध्या पर पाकिस्तानी बौखलाहट को पेज पर बड़ी जगह मिली है। साथ ही फैसले पर मुस्लिम पक्ष की अलग-अलग राय से भी पाठकों को रूबरू कराया गया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जहां फैसले के खिलाफ याचिका दायर करने के संकेत दिए हैं, वहीं, सुन्नी वक्फ बोर्ड ने फैसले को चुनौती देने से इनकार किया है।

वहीं, दैनिक जागरण की बात करें तो खूबसूरत इलस्ट्रेशन के साथ लीड को सजाया गया है। इसमें भगवान राम और प्रस्तावित मंदिर नजर आ रहे हैं। शीर्षक ‘श्रीराम’ तले खबर को विस्तार से पाठकों के समक्ष रखा गया है, लेकिन अच्छी बात यह है कि बड़े-बड़े पैरा के बजाय पॉइंटर को तवज्जो दी गई है। इसी में प्रमुख हस्तियों की प्रतिक्रिया भी शामिल है।

दूसरे फ्रंट पेज पर भी अयोध्या ही लीड है। खबर का शीर्षक ‘मंदिर वहीं बनेगा’ है, जो हिंदू पक्ष की सालों पुरानी इच्छा को दर्शाता है। फैसले पर मुस्लिम पक्ष में मतभेद और वरिष्ठ वकील परासरन की दलीलों को भी पेज पर रखा गया है। परासरन ने अदालत के समक्ष जो दलीलें रखी थीं, उन्हीं के आधार पर कोर्ट ने फैसला सुनाया है। एंकर में करतारपुर गलियारे का उद्घाटन है, जिसे आकर्षक हेडलाइन ’72 साल की अरदास पूरी, करतारपुर साहिब के हुए दर्शन’ के साथ मोदी-मनमोहन की फोटो सहित सजाया गया है।

आखिर में दैनिक भास्कर को देखें तो अखबार ने आज ‘रामलला ही विराजमान’ शीर्षक के साथ लीड को सजाया है। यह शीर्षक ‘अमर उजाला’ से काफी मिलता जुलता है। फैसले की 4 बड़ी बातों को अलग से रेखांकित किया गया है। इसके अलावा, फैसला सुनाने वाले जजों की प्रतिक्रिया को फोटो के साथ रखा गया है।

दैनिक भास्कर ने थोड़ा आगे बढ़ते हुए यह भी बताने का प्रयास किया है कि कितने कारीगर लगाने से कितने वर्षों में मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा। लीड में फोटो के बजाय प्रस्तावित राम मंदिर का इलस्ट्रेशन लगाया गया है। इसके साथ ही एएसआई की उस रिपोर्ट को भी पाठकों के समक्ष रखा गया है, जिसने फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: आज सबसे पहले बात कलात्मक शीर्षक की। प्रयोग सभी अखबारों ने किये हैं, लेकिन ताज ‘नवभारत टाइम्स’ को पहनाया जा सकता है। पहले पेज की हेडलाइन है ‘मंदिर वहीं, मस्जिद नई’ जो दोनों पक्षों का प्रतिनिधित्व करती है। कम शब्दों में पूरी बात कहने का इससे अच्छा उदाहरण नहीं हो सकता। दूसरे पेज की हेडिंग ‘मंदिर निर्माण के वास्ते, कोर्ट ने तय किये रास्ते’ तुकबंदी दर्शाती है।

2: लेआउट के लिहाज से ‘दैनिक भास्कर’ बेहतर नजर आ रहा है। अखबार का फ्रंट पेज काफी खुला-खुला है।

3: खबरों की प्रस्तुति की बात करें तो सभी अखबारों ने बेहतरीन काम किया है, लेकिन ‘अमर उजाला’ थोड़ा आगे है। लीड की प्रस्तुति काफी आकर्षक दिखाई दे रही है।

PUBG 200rs Coupon : PUBG प्लेयर्स के लिए खुशखबरी, Google पर मिलेगा 200 रुपये का कूपन

How To Get 200 Rs Coupon For Pubg

pubg 200rs coupon
PUBG 200rs Coupon : PUBG MOBILE प्लेयर्स को Google Play Store पर 200 रुपये का कूपन दिया जा रहा है जो कि लिमिटेड समय के लिए वैलिड है…

नई दिल्ली, टेक डेस्क। PUBG 200rs Coupon:  PUBG Mobile का नया अपडेट 0.15.5 आज यानि 8 नवंबर को लाइव होने वाला है, जिसके बाद गेमिंग में कई बदलाव देखने को मिलेंगे। इसक अलावा PUBG MOBILE प्लेयर्स के लिए बड़ी खुशखबरी है। Google Play Store पर प्लेयर्स को 200 रुपये का कूपन ऑफर दिया जा रहा है। इस कूपन का लाभ प्लेयर्स गेमिंग के दौरान किसी भी आइटम को खरीदने के लिए कर सकते हैं। प्लेयर्स को इस कूपन के लिए नोटिफिकेशन दिया जा रहा है, अगर आपको अभी नोटिफिकेशन नहीं मिला है तो आप Google Play Store पर जाकर नोटिफिकशन चेक कर सकते हैं। फिलहाल यह ऑफर लिमिटिड समय के लिए ही वैलिड है और इसे Play Store के मेन मेन्यू या रिवार्ड सेक्शन में देख सकते हैं।

Google giving Rs 200 coupon to PUBG MOBILE players for in-game purchase: Here’s how to get it

PUBG MOBILE में क्रेडिट गेम में 200 रुपये का कूपन देखा जा सकता है, लेकिन प्लेयर्स को कूपन का लाभ उठाने के लिए गेम में कम से कम 350 रुपये का कुछ खरीदना होगा। PUBG MOBILE प्लेयर्स को मोटे तौर पर दो ग्रुप में विभाजित किया गया है- एक वह ग्रुप इन-गेम करेंसी पर खर्च करते हैं और दूसरे वे खर्च नहीं करते हैं। जो प्लेयर्स खर्च करते हैं, उनके बेहतर गेमिंग की सुविधा प्रदान के लिए Google इन-गेम आइटम खरीदने के लिए एक्स्ट्रा कैश दे रहा है। लेकिन बता दें कि Google द्वारा PUBG MOBILE प्लेयर्स को दिए जा रहे इस ऑफर के लिए नियम और शर्तें लागू हैं।

Google Play Store Is Giving Rs. 200 Discount Coupon For PUBG Mobile In-game Purchases

बता दें कि कूपन की छूट का लाभ रॉयल पास सीजन 10 या किसी भी इन-गेम आइटम पर लागू है, जिसकी कीमत 350 रुपये है। इसलिए, गेम में आप जो सबसे सस्ता आइटम खरीद सकते हैं, वह 350 रुपये का यूसी होगा और आप इस पर 200 रुपये की छूट का लाभ उठा सकते हैं। जिसके बाद आप 150 रुपये के प्रभावी मूल्य के लिए अतिरिक्त यूसी अंक प्राप्त कर सकते हैं।

इसका लाभ उठाने के लिए सबसे पहले, आपको पता होना चाहिए कि यह इन-गेम आइटम खरीदने के लिए डिस्काउंट कूपन है। इसलिए, PUBG मोबाइल प्लेयर के रूप में, आपको पहले PUBG मोबाइल स्टोर से कुछ खरीदना होगा और उसके बाद आपको 200 रुपये की छूट प्राप्त होगी और यह गेम के सभी आइटम पर लागू होती है जिसे आप PUBG MOBILE मार्केटप्लेस से खरीदते हैं।

Maharashtra: राज्‍यपाल ने सरकार बनाने के लिए भाजपा को किया आमंत्रित

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महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है। …

मुंबई, खबर सत्ता। महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है।

मीडिया की खबरों के अनुसार महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने देवेन्द्र फडणवीस को सरकार बनाने का आमंत्रण दिया है। फडणवीस को 11 नवंबर तक बहुमत साबित करना होगा। इससे पहले शिवसेना ने दावा किया था कि लोकसभा चुनावों से पहले दोनों गठबंधन सहयोगियों ने अगले कार्यकाल में ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद की साझेदारी का फैसला किया था।

शुक्रवार को महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपने-अपने संवाददाता सम्मेलनों में एक बार भी यह नहीं कहा कि भाजपा-शिवसेना गठबंधन की सरकार बनने की संभावनाएं खत्म हो गई हैं। दोनों नेता सिर्फ अपने अहं पर अड़े दिखाई दिए।

विगत 24 अक्टूबर को हुई महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव की मतगणना में कुल 288 सीटों में भाजपा 105 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। इसमें शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली हैं।

सिवनी : बोतल या प्लास्टिक केन में नहीं मिलेगा पेट्रोल, डीजल

सिवनी,खबर सत्ता : अपर कलेक्टर श्रीमती रानी बाटड़ ने जिले में कानून व्यवस्था की दृष्टि से म.प्र. मोटर स्पिरिट तथा हाईस्पीड डीजल ऑयल (अनुज्ञापन तथा नियंत्रण) आदेश के तहत जिले के समस्त पेट्रोल पंप एवं डीजल पंप में पेट्रोल 2000 लीटर (दो हजार लीटर) एवं डीजल 3,000 लीटर ( तीन हजार लीटर) रिजर्व स्टॉक रखे जाने के आदेश दिये है। सभी पंप संचालकों को निर्देशित किया गया है कि वे जिले में पेट्रोल एवं डीजल की पंपो पर पर्याप्त आपूर्ति बनाये रखें।

जिले के समस्त पेट्रोल पंप संचालकों को निर्देशित किया गया है कि वे किसी भी उपभोक्ता, को कॉच या प्लास्टिक की बोतल अथवा प्लास्टिक की केन में पेट्रोल का प्रदाय नहीं करेंगे ।

पेट्रोल का प्रदाय केवल वाहन के ईंधन टैंक में ही किया जाना सुनिश्चित करे। यदि किसी भी पंप संचालक के विरूद्ध इस प्रकार की शिकायत प्राप्त होती है या पंप की जांच के समय कॉच अथवा प्लास्टिक की बोतल अथवा केन में पेट्रोल का विक्रय करना पाया जाता है तो संबंधित डीलर के विरूद्ध कार्यवाही की जावेगी ।

दिल्ली: इराकी महिला के गले में था दर्द, दुर्लभ ऑपरेशन से निकाली गई 53 पथरी

health kidney stones

नई दिल्ली: सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों ने एक दुर्लभ ऑपरेशन में इराक की एक 66 वर्षीय महिला के गले में लार नली (थूक की नली) व ग्रंथि में मौजूद 53 पथरी निकाली. अस्पताल के अनुसार, सितंबर के आखिरी सप्ताह में यह ऑपरेशन किया गया. इस दौरान शरीर में बिना किसी कट के बास्केट और फोरसेप्स का उपयोग करके पत्थरों को एक-एक करके हटाया गया. इस पूरी प्रक्रिया में दो घंटे लगे और अंत में 53 पत्थर निकाले गए. महिला भोजन या पेय के बाद पैरोटिड ग्रंथि के बार-बार होने वाले दर्द और सूजन से पीड़ित थी.

अस्पताल की ओर से जारी बयान में कहा गया कि बाद में पता चला कि मरीज के दाएं तरफ पैरोटिड नली में कई पत्थर हैं और सबसे बड़ा पत्थर लगभग 8 मि. मी. आकार का है, जो नली के बीच में अटका हुआ है.

बयान में कहा गया, “अपने देश और आसपास के अधिकांश डॉक्टरों ने पेरोटिड ग्रंथि को हटाने की एक प्रक्रिया का सुझाव दिया जो चेहरे पर एक भद्दा निशान छोड़ देता और उसके चेहरे को लकवाग्रस्त कर देता. वह सियालेंडोस्कोपी नामक एक प्रक्रिया के बारे में सुनकर भारत आई थी, जहां सिर्फ 1.3 मि. मी. माप वाला एक छोटा एंडोस्कोप पैरोटिड ग्रंथि में डाला जाता है और रुकावट का कारण पता किया जाता है.”

सर गंगा राम अस्पताल के ईएनटी सलाहकार वरुण राय के अनुसार, “सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि ग्रंथि या 3 मि. मी. चौड़ी नलिका पर कोई चोट लगे बिना सभी पत्थरों को हटा दिया जाए.”

सर्जरी के बाद मरीज को घर भेज दिया गया है. डॉक्टर दावा कर रहे हैं कि वह पूरी तरह से ठीक हो गई है और उसे अपनी पसंद का भोजन करने की अनुमति भी दी गई है.

Ayodhya Verdict LIVE:सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला- विवादित जगह पर बनेगा राम मंदिर, दूसरी जगह बनेगी मस्जिद

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमीन का बंटवारा नहीं होगा. विवादित जमीन रामलला को दी जाएगी. मुस्लिम पक्ष को अयोध्‍या में किसी अन्‍य खास जगह पर पांच एकड़ जमीन मस्जिद निर्माण के लिए दी जाएगी.

नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्‍या केस (Ayodhya Case) में ऐतिहासिक फैसला सर्वसम्‍मति यानी 5-0 से सुनाया है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्‍व में पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित जमीन पर राम मंदिर बनेगा. विवादित जमीन रामलला को दी जाएगी. मुस्लिम पक्ष अपने साक्ष्यों से यह सिद्ध नहीं कर पाए कि विवादित भूमि पर उनका ही एकाधिकार था. मुस्लिम पक्ष को अयोध्‍या में किसी अन्‍य जगह मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन दी जाएगी. इलाहाबाद हाई कोर्ट के जमीन के बंटवारा का आदेश गलत था.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार 3 महीने के भीतर एक स्‍कीम बनाकर एक ट्रस्ट का गठन करेगी जो मंदिर बनवायेगा. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि इससे जुड़ी जो बाकी याचिकाएं हैं, वो खारिज की जाती हैं. CJI ने रामलला के वकील के पराशरण और सी एस वैद्यनाथन, हरिशंकर जैन की सराहना की.

कोर्ट ने शिया वक्‍फ बोर्ड की याचिका खारिज कर दी. चीफ जस्टिस ने कहा कि मीर बाकी ने बाबर के वक्‍त बाबरी मस्जिद बनवाई थी. 1949 में दो मूर्तियां रखी गईं. बाबरी मस्जिद को गैर-इस्‍लामिक ढांचे पर बनाया गया. बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी. पुरातत्‍व विभाग (ASI) की रिपोर्ट से साबित होता है कि मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनाई गई थी. ASI की रिपोर्ट को खारिज नहीं किया जा सकता. खुदाई में इस्‍लामिक ढांचे के सबूत नहीं मिले. अंग्रेजों के आने से पहले राम चबूतरे की पूजा हिंदू करते थे.

कोर्ट ने कहा कि हिंदुओं की ये आस्था कि श्रीराम का जन्म अयोध्या में हुआ है, इस पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि 1885 से पहले राम चबूतरे पर हिंदुओं का अधिकार था. अहाते और चबूतरे पर हिंदुओं का अधिकार साबित होता है. 18वीं सदी तक नमाज पढ़े जाने के सबूत नहीं हैं. सीता रसोई की भी पूजा अंग्रेजों के आने से पहले हिंदू करते थे.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में विवादित जमीन को तीन हिस्‍सों में बांटने का जो फैसला दिया वो तार्किक नहीं था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्मोही अखाड़े का सूट मेनटेबल नहीं है. यह ‘सेवियत’ राइट के खिलाफ है. उन्हें शेबेट के अधिकार प्राप्त नहीं हैं. देवता न्यायिक व्यक्ति होता है. मूर्ति भी न्यायिक व्यक्ति होती है. मुस्लिम गवाहों ने भी माना कि दोनों पक्ष पूजा करते थे. सुन्नी वक्फ बोर्ड विवादित क्षेत्र पर अपना मालिकाना हक और प्रतिकूल कब्जा साबित करने में नाकाम रहा है.

सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की क्‍या थीं दलीलें:
– मन्दिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई
हिंदू पक्ष ने नक्शों, तस्वीरों और पुरातात्विक सबूतों के जरिये ये साबित करने की कोशिश की थी कि विवादित ढांचा बनने से पहले वहां भव्य मन्दिर था. मन्दिर को ध्वस्त कर मस्जिद का निर्माण कराया गया था. कोर्ट में पेश किए फोटोग्राफ के जरिये कहा गया था कि विवादित इमारत हिंदू मंदिर के 14 खंभों पर बनी थी. इन खंभों में तांडव मुद्रा में शिव, हनुमान कमल और शेरों के साथ बैठे गरुड़ की आकृतियां हैं.

– विवादित जगह पर दो हज़ार साल पहले भी मन्दिर
हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि विवादित स्थान पर आज से 2 हज़ार साल पहले भी भव्य राम मंदिर था. मंदिर के ढांचे के ऊपर ही विवादित इमारत को बनाया गया था. प्राचीन मंदिर के खंभों और दूसरी सामग्री का इस्तेमाल भी विवादित ढांचे के निर्माण में किया गया.

– श्रीराम जन्मस्थान को लेकर अटूट आस्था
हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया था कि जिस जगह का यहां मुकदमा चल रहा है. करोड़ों लोगों की आस्था है कि वही भगवान राम का जन्म स्थान है. सैकड़ों साल से यहां पूजा-परिक्रमा की परंपरा रही है. करोड़ों लोगों की इस आस्था को पहचानना और उसे मान्यता देना कोर्ट की ज़िम्मेदारी है.

– रामलला की मूर्ति रखे जाने से बहुत पहले से श्रीराम की पूजा
विवादित ढांचे के मूर्ति रखे जाने बहुत पहले से ही राम की पूजा होती रही है. किसी जगह को मंदिर के तौर पर मानने के लिए वहां मूर्ति होना ज़रूरी नहीं है. हिन्दू महज किसी एक रूप में ईश्वर की आराधना नहीं करते. केदारनाथ मंदिर में शिला की पूजा होती है. पहाड़ों की भी देवरूप में पूजा होती है. चित्रकूट में होने वाली परिक्रमा का उदाहरण दिया गया था.

– इस्लामिक सिद्धान्तों के मुताबिक भी विवादित ढांचा वैध मस्जिद नहीं
हिंदू पक्ष ने इस्लामिक नियमों का हवाला देकर ये साबित करने की कोशिश की थी कि विवादित ढांचा मस्जिद नहीं हो सकती. कहा गया था कि किसी धार्मिक स्थान के ऊपर जबरन बनाई गई. इमारत शरीयत के हिसाब से भी मस्ज़िद नहीं मानी जा सकती. उस इमारत में मस्ज़िद के लिए ज़रूरी तत्व भी नहीं थे. इस्लामिक विद्वान इमाम अबु हनीफा का कहना था कि अगर किसी जगह पर दिन में कम से कम दो बार नमाज़ पढ़ने के अज़ान नहीं होती तो वो जगह मस्ज़िद नहीं हो सकती. विवादित इमारत में 70 साल से नमाज नहीं पढ़ी गई है. उससे पहले भी वहां सिर्फ शुक्रवार को नमाज हो रही थी.

-रामलला विराजमान और श्रीरामजन्मस्थान को न्यायिक व्यक्ति का दर्ज़ा
हिंदू पक्ष ने श्रीरामजन्मस्थान को भी न्यायिक व्यक्ति होने के समर्थन में दलीलें रखीं थी. कहा था कि पूरा रामजन्मस्थान ही हिंदुओं के लिए देवता की तरह पूजनीय है. किसी जगह को मन्दिर साबित करने के लिए मूर्ति की मौजूदगी ज़रूरी नहीं है, बल्कि लोगों की आस्था, विश्वास ही किसी जगह को मन्दिर बनाते हैं. श्रीरामजन्मस्थान को लेकर तो लोगों की आस्था सदियों से अटूट रही है. मंदिर में विराजमान रामलला कानूनी तौर पर नाबालिग का दर्जा रखते हैं. नाबालिग की संपत्ति किसी को देने या बंटवारा करने का फैसला नहीं हो सकता.

-पुरातत्व सबूतों, धार्मिक ग्रंथों, विदेशी यात्रियों के लेख का हवाला
हिंदू पक्षकारों की ओर मन्दिर की मौजूदगी को साबित करने के लिए पुरातत्व सबूतों, धार्मिक ग्रंथों, विदेशी यात्रियों के लेख और पुरातात्विक सबूतों, राजस्व विभाग के रिकॉर्ड का हवाला दिया गया था. इसके अलावा हिंदू पक्ष ने विवादित जगह पर मन्दिर की मौजूदगी को साबित करने के लिए अयोध्या जाने वाले विदेशी यात्रियों जोसेफ टाइफेनथेलर, मोंटगोमरी मार्टिन के यात्रा संस्मरणों, डच इतिहासकर हंस बेकर और ब्रिटिश टूरिस्ट विलियम फिंच की पुस्तकों का भी हवाला दिया था.

-12वीं सदी का शिलालेख
सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने अहम सबूत के तौर पर 12वीं सदी के शिलालेख का हवाला दिया था. हिन्दू पक्ष की ओर से पेश वकील ने कहा कि पत्थर की जिस पट्टी पर संस्कृत का ये लेख लिखा है. उसे विवादित ढांचा विध्वंस के समय एक पत्रकार ने गिरते हुए देखा था. इसमें साकेत के राजा गोविंद चंद्र का नाम है. साथ ही लिखा है कि ये विष्णु मंदिर में लगी थी.

– आठवीं सदी के ग्रंथ स्कंद पुराण का हवाला
हिंदू पक्ष ने अपनी दलील के समर्थन में आठवीं सदी के ग्रंथ स्कंद पुराण का हवाला दिया था. उन्होंने कहा था कि बाबरी मस्जिद के 1528 में वजूद में आने से बहुत पहले स्कंद पुराण लिखा गया था. इस पुराण में भी अयोध्या का श्रीरामजन्मस्थान के रूप में जिक्र है और हिंदुओं का ये अगाध विश्वास रहा है कि यहां दर्शन से मोक्ष की प्राप्ति होती है.

– विवादित ढांचे के नीचे ईदगाह नहीं
हिंदू पक्ष ने विवादित ढांचे के नीचे ईदगाह होने की मुस्लिम पक्ष की वकील मीनाक्षी अरोड़ा की दलीलों को खारिज कर दिया था. हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया था कि जिसे मुस्लिम पक्ष ईदगाह की दीवार बता रहा है, उसके ऊपर छत होने के भी सबूत मिले है.ईदगाह पर छत नही होती. वहां सिर्फ एक दीवार नहीं, बल्कि हॉलनुमा ढांचा था.

– बाबर जैसे आक्रमणकारी को गौरवशाली इतिहास ख़त्म करने की इजाजत नहीं
बाबर जैसे विदेशी आक्रमणकारी को हिंदुस्तान के गौरवशाली इतिहास को ख़त्म करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती. अयोध्या में राम मंदिर को विध्वंस कर मस्जिद का निर्माण एक ऐतिहासिक ग़लती थी,जिसे सुप्रीम कोर्ट को अब ठीक करना चाहिए.अकेले अयोध्या में ही 50-60 मस्जिद हैं, मुसलमान किसी और मस्जिद में भी इबादत कर सकते हैं, पर हिन्दुओं के लिए तो ये जगह उनके आराध्य श्रीराम का जन्मस्थान है, हम ये जगह नहीं बदल सकते.

– सुन्नी वक्फ बोर्ड को दावा करने का हक़ नहीं
मुस्लिम पक्ष की ओर से दलील दी गई थी कि 1949 में विवादित इमारत में रामलला की मूर्ति पाए जाने के बाद 12 साल तक दूसरा पक्ष निष्क्रिय बैठा रहा. सुन्नी वक्फ बोर्ड ने 1961 में जाकर मुकदमा दायर किया. ऐसे में केस दायर करने की समयसीमा पार करने के चलते उन्हें कानूनन दावा करने का हक नहीं.

– अंग्रेजों के आने के बाद मुस्लिमों को शह मिली
हिंदू महासभा की ओर से विष्णु शंकर जैन ने कहा था कि 1528 से लेकर 1855 तक वहां मस्जिद की मौजूदगी को लेकर कोई मौखिक /दस्तावेजी सबूत नहीं. अंग्रेजों के आने के बाद से विवाद की शुरुआत हुई. हिंदुओं से पूजा का अधिकार छीन गया, मुसलमानों को विवादित ज़मीन पर शह मिली.

– मुस्लिम गवाहों के बयान का हवाला
हिंदू पक्ष ने अपनी दलीलों के समर्थन में इलाहाबाद हाई कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश कई मुस्लिम गवाहों के बयान के हिस्सों का भी हवाला दिया था.रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा था कि इन मुस्लिम गवाहों ने ख़ुद माना है कि जिस जगह को मुस्लिम लोग बाबरी मस्जिद कहते हैं वो हिन्दुओं द्वारा जन्मभूमि के तौर पर जानी जाती है और यहां सदियों से पूजा- परिक्रमा की भी परंपरा रही है.

सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की क्‍या थीं दलीलें:

-मस्जिद का कोई तय डिजाइन ज़रूरी नहीं
मुस्लिम पक्ष के वकील निजाम पाशा ने कहा था कि बाबरी मस्ज़िद की वैधता पर सवाल उठाने वाली हिंदू पक्ष की दलीलें ग़लत हैं. बिना किसी मीनार के या बिना वजूखाने के भी मस्जिद हो सकती है. मस्जिद के डिजाइन का शरिया से सीधा कोई वास्ता नहीं है. क्षेत्र विशेष के वास्तु शिल्प के आधार पर मस्जिद बनाई जाती रही है. ये देखना होगा कि लोग क्या मानते हैं. क्या बाबरी मस्जिद में वजू करने की व्यवस्था थी या नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि इस्लाम में घर से भी वजू करके मस्जिद आने की परम्परा रही है.

-निर्मोही होकर भी सम्पति से मोह
विवादित ज़मीन पर निर्मोही अखाड़े के दावों को लेकर निज़ाम पाशा ने दिलचस्प दलील दी थी. पाशा ने कहा था कि निर्मोही का मतलब है कि जो मोह से परे हो, जिसे सम्पतियों से लगाव न हो, वो निर्मोही कहलाता है. लेकिन अखाड़ा उसी (सम्पति) के लिए क़ानूनी लड़ाई लड़ रहा है.

-श्री रामजन्म स्थान को न्यायिक व्यक्ति का दर्जा नहीं
मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा था कि मैं ये मान लेता हूं कि श्री राम ने वहां जन्म लिया लेकिन क्या इतना भर होने से श्रीराम जन्मस्थान को न्यायिक व्यक्ति का दर्जा (जीवित व्यक्ति मानकर उनकी ओर से मुकदमा दायर) दिया जा सकता है.1989 से पहले किसी ने श्री रामजन्म स्थान को न्यायिक व्यक्ति नहीं माना. राजीव धवन ने अपनी दलीलों के जरिये श्री रामजन्म स्थान को न्यायिक व्यक्ति का दर्जा देने पर सवाल उठाते हुए कई उदाहरण दिये. कहा था कि श्री गुरु ग्रंथ साहब जी को जब तक गुरुद्वारा में प्रतिष्ठित नहीं किया जाता, तब तक उन्हें भी ‘न्यायिक व्यक्ति’ नहीं माना जा सकता. इसी तरह हर मूर्ति को न्यायिक व्यक्ति का दर्जा नहीं दिया जा सकता.

-श्रीराम और अल्लाह दोनों का सम्मान होना चाहिए
राजीव धवन ने कहा था कि श्री राम का सम्मान होना चाहिए, इसमे कोई संदेह नहीं है.लेकिन भारत जैसे महान देश में अल्लाह का भी सम्मान है. अगर दोनों का सम्मान कायम नहीं रहता है, तो विविधिता को समेटे ये देश खत्म हो जाएगा. धवन ने कहा था कि ये साफ है कि राम चबूतरे पर प्रार्थना होती थी, लेकिन पूरे इलाके में कभी पूजा नहीं की गई. राजीव धवन ने हिंदू पक्ष के द्वारा परिक्रमा के संबंध में गवाहों द्वारा दी गई गवाहियों का हवाला दिया था. धवन ने कहा था कि परिक्रमा के बारे में सभी गवाहों ने अलग अलग बात कही है. उनकी गवाही में विरोधाभास है.

-हमारा केस समयसीमा का उल्लंघन नहीं करता
मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा था कि हमने 18 दिसंबर 1961 को केस दायर किया. हिंदू पक्ष के मुताबिक लिमिटेशन के लिहाज से हम दो दिन देरी से थे. लेकिन हमारे केस में लिमिटेशन की समयसीमा 16 दिसंबर से भला क्यों शुरू होगी. ये समय सीमा तो 22-23 दिसंबर से शुरू होनी चाहिए, क्योंकि उसी रात वहां मूर्तियां रखी गई थी. मुझे ये साबित करने की ज़रूरत नहीं कि 17, 18, 19 दिसंबर तक हमारा वहां कब्ज़ा रहा क्योंकि 22 दिसंबर से पहले वहां पर कोई गतिविधि नहीं थी .राजीव धवन ने कहा कि क्या बादशाह (बाबर) ने कुरान/ धर्म का उल्लंघन किया. इसको संविधान की कसौटी पर ही परखा जाएगा.

-क़ाफ़िले बसते गए हिन्दोस्तां बनता गया
राजीव धवन ने जिरह ख़त्म करते हुए कहा था कि भारत विविधता का देश रहा है, लेकिन कुछ लोग इसे एक रंग में रंग देना चाहते है. धवन ने अपनी जिरह का अंत फ़िराक़ गोरखपुरी के इस शेर से किया था-“सर-ज़मीन-ए-हिंद पर अक़्वाम-ए-आलम के ‘फ़िराक़’ क़ाफ़िले बसते गए हिन्दोस्ताँ बनता गया.”