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सिवनी: 42 साल की सेवा, हजारों छात्रों का भविष्य संवारने वाले गुरुजी को सुकतरा ने दी भावुक विदाई — पूरा गांव हुआ नम आंखों से एकजुट

Seoni News : मध्यप्रदेश के छोटे से गांव सुकतरा में आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया, जब विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक अशोक श्रीवास्त्री ने 42 वर्षों की निरंतर, ईमानदार और समर्पित सेवा के बाद सेवानिवृत्ति ली।

इस अवसर पर गांव के हर वर्ग—बुजुर्ग, युवा, छात्र, अभिभावक और विद्यालय परिवार—ने जिस भावुकता और सम्मान के साथ उन्हें विदाई दी, वह किसी उत्सव से कम नहीं था।

42 वर्षों का समर्पण: सिर्फ नौकरी नहीं, एक मिशन

अशोक श्रीवास्त्री जी ने अपने कार्यकाल के दौरान हजारों छात्रों को शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कार भी दिए।

गांव के कई युवा आज सरकारी अधिकारी, शिक्षक, पुलिसकर्मी और इंजीनियर बन चुके हैं—और वे अपनी सफलता का श्रेय अपने “गुरुजी” को देते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि:

“गुरुजी ने कभी समय नहीं देखा, हमेशा बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता दी। बारिश हो या धूप, वे रोज समय पर स्कूल पहुंचे।”

भव्य समारोह में हुआ सम्मान

विद्यालय परिसर में आयोजित विदाई समारोह में:

  • शॉल और श्रीफल से सम्मान
  • माल्यार्पण
  • स्मृति चिन्ह भेंट
  • छात्रों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम
  • भावुक भाषण

जब छात्रों ने उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया, तो माहौल बेहद भावुक हो गया। कई छात्रों और ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं।

गांव बोला – “आप हमारे दिलों में हमेशा रहेंगे”

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में जहां लोग नौकरी को सिर्फ वेतन से जोड़ते हैं, वहीं अशोक श्रीवास्त्री जी ने शिक्षा को सेवा और समाज निर्माण का माध्यम बनाया।

विद्यालय परिवार ने उन्हें “जीवन पर्यंत प्रेरणा स्रोत” की उपाधि दी।

📚  शिक्षक का संदेश

सेवानिवृत्ति के अवसर पर उन्होंने कहा:

“मैंने हमेशा बच्चों को अपने परिवार की तरह माना। अगर मेरे पढ़ाए छात्र आगे बढ़ रहे हैं, तो यही मेरी सबसे बड़ी कमाई है।”

उनके इस संदेश ने सभी के दिलों को छू लिया।

क्यों खास है यह विदाई?

आज के दौर में किसी शिक्षक को ऐसा जनसम्मान मिलना दुर्लभ है।

यह विदाई साबित करती है कि सच्ची निष्ठा और समर्पण का सम्मान समाज हमेशा करता है।

समाज के लिए मिसाल

यह आयोजन केवल एक शिक्षक की रिटायरमेंट नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंत मिसाल बन गया।

सुकतरा गांव ने दिखा दिया कि असली नायक वही हैं जो चुपचाप समाज का भविष्य गढ़ते हैं।

UGC के नए नियमों पर SEONI में बवाल! सकल सवर्ण समाज सड़कों पर, बोले – ‘प्रतिभा के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं

सिवनी में शनिवार को सामान्य वर्ग (सवर्ण समाज) के लोगों का आक्रोश सड़कों पर साफ दिखाई दिया। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा प्रस्तावित ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु विनियम 2026’ के विरोध में कचहरी चौक पर बड़ी संख्या में नागरिक, छात्र, अभिभावक और सामाजिक संगठन एकत्रित हुए।

नारेबाजी, रैली और ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यह नया विनियम ‘समानता’ के नाम पर ‘मेधावी छात्रों के साथ भेदभाव’ करता है और सामान्य वर्ग के छात्रों के अवसरों को सीमित करता है।

क्या है पूरा मामला?

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लाया गया यह प्रस्तावित विनियम 2026 कई ऐसे प्रावधानों से भरा है, जो सामान्य वर्ग (General Category) के छात्रों और शिक्षकों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

ज्ञापन में कहा गया कि:

“समानता और समता के नाम पर प्रतिभा की बलि नहीं दी जा सकती। शिक्षा में अवसर योग्यता के आधार पर मिलने चाहिए, न कि जातिगत वर्गीकरण से।”

कचहरी चौक पर गूंजे नारे

सुबह से ही लोग तख्तियां और बैनर लेकर कचहरी चौक पहुंचे।
काला कानून वापस लो”, “प्रतिभा का सम्मान करो” और “शिक्षा में भेदभाव बंद करो” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।

इसके बाद रैली निकालकर प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई।

प्रमुख आपत्तियां क्या हैं?

सकल सवर्ण समाज ने विनियम के खिलाफ कई गंभीर सवाल उठाए:

  • ‘समता’ की जाति आधारित व्याख्या
  • EWS (आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग) के हितों पर प्रहार
  • शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता का हनन
  • भेदभावपूर्ण दंड प्रक्रिया
  • झूठी शिकायतों पर अन्य वर्गों के खिलाफ कोई दंडात्मक प्रावधान नहीं

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह नियम सामान्य वर्ग के छात्रों को मानसिक और प्रशासनिक रूप से परेशान कर सकता है।

समाज की प्रमुख मांगें

सकल सवर्ण समाज ने सरकार और प्रशासन के सामने स्पष्ट मांगें रखीं:

✅ विनियम 2026 पर तत्काल रोक
✅ सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच समिति
✅ संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) के तहत समीक्षा
✅ जातिगत विभाजन बढ़ाने वाले कानूनों को समाप्त करना

आगे क्या होगा?

समाज के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन जिला स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक ले जाया जाएगा।

एक वक्ता ने कहा:

“हम ऐसा भारत चाहते हैं जहां प्रतिभा को सम्मान मिले। किसी भी छात्र के साथ जाति के आधार पर अन्याय स्वीकार नहीं होगा।”

सिवनी का यह प्रदर्शन सिर्फ एक जिले का विरोध नहीं, बल्कि देशभर में शिक्षा नीति पर बढ़ती असंतोष की भावना को दर्शाता है। अब सबकी निगाहें सरकार और UGC के अगले कदम पर टिकी हैं।

क्या सरकार इस आवाज़ को सुनेगी या आंदोलन और तेज होगा? आने वाले दिन तय करेंगे।

खबर सत्ता का बड़ा असर: 24 घंटे में हिला सिस्टम, हिटलरशाही पर चला डीएम नान का डंडा, धान घोटाले में वेयरहाउस बंद, मचा हड़कंप

सिवनी। “खबर सत्ता” द्वारा 28 जनवरी 2026 को प्रमुखता से प्रकाशित खबर “सर्वेयर साइडलाइन, वेयरहाउस मालिक ऑन ड्यूटी! सिवनी में धान खरीदी का खेल: शासन के नियम ताक पर, गोदाम मालिक बने खुद के जज और जूरी” का असर महज 24 घंटों में दिखाई देने लगा। प्रशासन हरकत में आया और जिले में चल रहे एक बड़े खेल का पर्दाफाश करते हुए सख्त कार्रवाई की गई।

समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को लेकर वैसे तो पहले भी कई अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन खरीदी के अंतिम चरण और गोदामों में धान भंडारण के दौरान सर्वेयर की भूमिका निभा रहे वेयरहाउस संचालकों की मनमानी पहली बार इतने स्पष्ट रूप से उजागर हुई।

जिला प्रबंधक, मध्यप्रदेश सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन लिमिटेड सिवनी सुरेश सनखेरे के संज्ञान में जैसे ही यह मामला आया, उन्होंने बिना किसी देरी के वेयरहाउस का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जो सच्चाई सामने आई, उसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए।

जब वेयरहाउस मालिक ही बन गया सर्वेयर

जांच में सामने आया कि लंबे समय से वेयरहाउस संचालक और उसके परिवार के सदस्य ही सर्वेयर की भूमिका निभा रहे थे। ट्रकों में भरकर आने वाली अच्छी गुणवत्ता की धान को भी मनमाने ढंग से “रिजेक्ट” किया जा रहा था। इससे धान खरीदी केंद्र प्रभारी लगातार परेशान हो रहे थे और असली सर्वेयर भी इस दबाव से त्रस्त थे।

शासन की नीतियों का गलत फायदा उठाकर वेयरहाउस संचालक खुद ही जज और जूरी बन बैठा था। ट्रक ड्राइवरों से लेकर केंद्र प्रभारियों तक, सभी उसकी ‘हिटलरशाही’ का शिकार थे।

ट्रकों की जांच, ड्राइवरों के बयान और मौके पर फटकार

जिला प्रबंधक ने मौके पर पहुंचकर धान से भरे ट्रकों की जांच करवाई। वास्तविक सर्वेयर की मौजूदगी में ट्रकों को खाली कराया गया और ड्राइवरों से भी सीधे बातचीत की गई। जैसे-जैसे परतें खुलती गईं, पूरा खेल सामने आता गया। अनावश्यक रूप से धान रिजेक्ट कर किसानों और केंद्र प्रभारियों को परेशान करने वाले वेयरहाउस संचालक को मौके पर ही कड़ी फटकार लगाई गई।

वेयरहाउस भी किया गया बंद

निरीक्षण के दौरान न सिर्फ सर्वेयर से जुड़ी गड़बड़ियां उजागर हुईं, बल्कि वेयरहाउस में कई गंभीर अनियमितताएं और तकनीकी कमियां भी पाई गईं। इन सबको देखते हुए जिला प्रबंधक ने सख्त रुख अपनाते हुए वेयरहाउस को तत्काल प्रभाव से बंद करने की कार्रवाई कर दी।

यह कदम जिले के उन सभी धान खरीदी केंद्रों के लिए बड़ी राहत साबित हुआ है, जिनका परिवहन अभी शेष है और जो अब तक इस वेयरहाउस संचालक की मनमानी से परेशान थे।

रिजेक्ट धान अब तक गोदाम में क्यों पड़ी है?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन धानों को सर्वेयर द्वारा रिजेक्ट किया गया, वे अब तक गोदाम के बाहर सजाकर क्यों रखी गई हैं?
इसकी जानकारी कई धान खरीदी केंद्रों को तक नहीं दी गई। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि धान की गुणवत्ता जांच प्रक्रिया को भी वेयरहाउस संचालक ने अपने कब्जे में ले रखा था और सर्वेयर की निष्पक्षता पर ग्रहण लगा दिया गया था।

प्रशासन की निष्पक्षता से मिली राहत

जिला प्रबंधक की इस निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई से जिले की समितियों, समूहों और धान खरीदी केंद्र प्रभारियों ने राहत की सांस ली है। यह कार्रवाई न केवल एक वेयरहाउस संचालक की मनमानी पर रोक है, बल्कि पूरे सिस्टम को आईना दिखाने वाली मिसाल भी है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन आगे भी इसी सख्ती से धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी और न्यायसंगत बनाए रख पाता है या नहीं।

सिवनी में FSSAI की जांच या खुला फर्जीवाड़ा? FSO महेंद्र परते के सामने निजी ड्राइवर शशि शंकर सनोडिया ने पैक किए खाद्य सैंपल, VIRAL VIDEO से मचा प्रशासन में भूचाल!

सिवनी: सिवनी जिले की लखनादौन तहसील से सामने आया एक वायरल वीडियो इस वक्त पूरे जिले में सनसनी का कारण बना हुआ है। गणेशगंज स्थित गुप्ता ढाबा में हुई खाद्य सुरक्षा जांच का यह वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि खाद्य पदार्थों के सैंपल पैक करने की जिम्मेदारी किसी अधिकृत कर्मचारी के बजाय खाद्य सुरक्षा अधिकारी (FSO) महेंद्र कुमार परते के निजी वाहन चालक शशि शंकर सनोडिया निभा रहा है, और यह सब अधिकारी की मौजूदगी में हो रहा है।

इस घटना ने खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक ईमानदारी पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग पूछ रहे हैं कि क्या FSSAI की जांच अब कानून के दायरे में नहीं, बल्कि “निजी सुविधा” के आधार पर चल रही है?

नियम क्या कहते हैं, और यहाँ क्या हुआ?

खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 38(1) एवं 38(2) के अनुसार:

  • खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण
  • खाद्य सैंपल लेना
  • सैंपल को सील करना
  • पैकिंग व लेबलिंग करना

ये सभी कार्य केवल अधिकृत खाद्य सुरक्षा अधिकारी (Food Safety Officer) या उनके प्रशिक्षित विभागीय कर्मचारियों द्वारा ही किए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, Food Safety and Standards Rules, 2011 में भी यह स्पष्ट किया गया है कि सैंपलिंग प्रक्रिया किसी भी परिस्थिति में किसी अनधिकृत व्यक्ति से नहीं करवाई जा सकती।

लेकिन लखनादौन के इस वायरल वीडियो में जो दिखाई दे रहा है, वह इन सभी नियमों के ठीक विपरीत है। वीडियो के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया एक निजी व्यक्ति, यानी FSO के निजी चालक शशि शंकर सनोडिया द्वारा की जा रही है।

सवालों के घेरे में पूरी कार्रवाई

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब सैंपलिंग की प्रक्रिया ही नियमों के खिलाफ हो, तो उस पर आधारित कोई भी रिपोर्ट या कार्रवाई कितनी विश्वसनीय मानी जाएगी?

लोगों के मन में कई गंभीर आशंकाएं जन्म ले रही हैं:

  • क्या सैंपल प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है?
  • क्या ढाबा संचालकों पर अनावश्यक दबाव बनाने के लिए ऐसा किया गया?
  • या फिर किसी “सेटिंग” के तहत पूरी प्रक्रिया को मनचाहे ढंग से मोड़ा गया?

यही वजह है कि यह मामला केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि संभावित प्रशासनिक संरक्षण में हुए नियम उल्लंघन का बनता जा रहा है।

वायरल वीडियो बना सबसे बड़ा सबूत

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो इस पूरे मामले का सबसे ठोस प्रमाण बन चुका है। आम लोग खुलकर सवाल कर रहे हैं:

  • क्या FSO को कानून और नियमों की जानकारी नहीं थी?
  • या फिर जानबूझकर एक निजी व्यक्ति से सरकारी कार्य करवाया गया?
  • अगर यह सब नियमों के तहत था, तो वीडियो वायरल होने के बाद अब तक कोई स्पष्टीकरण या कार्रवाई क्यों नहीं?

चुप्पी अब विभाग की सबसे बड़ी कमजोरी बनती जा रही है।

जनस्वास्थ्य से सीधा खिलवाड़

खाद्य सुरक्षा कोई साधारण औपचारिकता नहीं, बल्कि सीधे-सीधे आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है। यदि सैंपलिंग प्रक्रिया में ही गड़बड़ी हो जाए, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं:

  • मिलावटी या खराब खाद्य पदार्थ कानूनी कार्रवाई से बच सकते हैं
  • निर्दोष व्यापारियों को झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है

दोनों ही स्थितियां समाज और प्रशासन, दोनों के लिए बेहद खतरनाक हैं।

कानून की नजर में क्या होगा?

यदि यह सिद्ध होता है कि सैंपल प्रक्रिया नियमों के विपरीत की गई है, तो धारा 42 के अंतर्गत पूरी जांच प्रक्रिया और उस पर आधारित कार्रवाई को न्यायालय में अमान्य भी ठहराया जा सकता है। यानी पूरा केस कानूनी रूप से कमजोर हो जाएगा।

अब जिला प्रशासन की अग्निपरीक्षा

अब सबसे बड़ा सवाल यही है:

  • क्या जिला प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा?
  • क्या जिम्मेदार FSO और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
  • या फिर इसे “तकनीकी गलती” बताकर दबा दिया जाएगा?

अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह मामला सिवनी जिले की प्रशासनिक व्यवस्था पर एक स्थायी कलंक बन सकता है।

क्या कहते है FSO महेंद्र कुमार परते

वायरल वीडियो के मामले में जब FSO महेंद्र कुमार परते से खबर सत्ता द्वारा बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि मेरे निजी वाहन चालाक द्वारा सिर्फ मेरी मदद की गई थी, सभी प्रकार के ऑफिसियल कार्य मेरे द्वारा ही किए जाते है, मेरे वहान चालक द्वारा साथ में रहने पर कभी कभी मदद कर दी जाती है. हमारा विभाग पिछले कई वर्षों से स्टाफ की कमी से जूझ रहा है जिसकी जानकारी हमारे द्वारा लगातार ही वरिश अधिकारीयों को दी जाती रही है किन्तु अभी तक स्टाफ की कोई व्यवस्था नहीं हुई है जिसकी वजह से हमें मदद लेनी पड़ती है.

सिवनी में मामूली विवाद पर जानलेवा हमला! फरार 2 आरोपी चाकू सहित गिरफ्तार, कोतवाली पुलिस की बड़ी कार्रवाई

सिवनी। शहर में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वालों पर अब सख्ती तय है। हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराध में फरार चल रहे दो आरोपियों को कोतवाली पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई न केवल पुलिस की सक्रियता को दर्शाती है, बल्कि अपराधियों के मन में खौफ भी पैदा करती है।

पुलिस अधीक्षक श्री सुनील मेहता के स्पष्ट निर्देश हैं कि जिले में अपराध किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्हीं के मार्गदर्शन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री दीपक मिश्रा एवं अनुविभागीय अधिकारी पुलिस श्री सचिन परते के नेतृत्व में कोतवाली पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले का सफलतापूर्वक खुलासा किया।

क्या है पूरा मामला?

दिनांक 01/01/2026 को प्रार्थी राहुल कश्यप, निवासी दादू मोहल्ला, संजय वार्ड सिवनी ने थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई कि मठ मंदिर के पीछे खुले मैदान में हल्ला करने की बात को लेकर आजाद वार्ड सिवनी निवासी मोनू दुबे और मुन्ना कश्यप से विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों आरोपियों ने राहुल कश्यप पर धारदार चाकू से जान से मारने की नीयत से हमला कर दिया।

हमले में राहुल कश्यप गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस ने तत्काल हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की और फरार आरोपियों की तलाश में विशेष टीम गठित की गई।

ड्रीमलैंड सिटी के पास से हुई गिरफ्तारी

लगातार पतासाजी और मुखबिरों की सूचना पर दिनांक 28 जनवरी 2026 को कोतवाली पुलिस ने ड्रीमलैंड सिटी के पास से दोनों फरार आरोपियों को घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद उन्हें माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जिला जेल सिवनी भेज दिया गया।

गिरफ्तार आरोपी

  1. निलेश कश्यप उर्फ मुन्ना, पिता प्रेमलाल, उम्र 34 वर्ष, निवासी आजाद वार्ड, सिवनी
  2. निलेश दुबे उर्फ मोनू, पिता स्वदेश दुबे, उम्र 26 वर्ष, निवासी आजाद वार्ड, सिवनी

🔪 जप्ती सामग्री

  • 01 धारदार चाकू, जिससे हमला किया गया था

पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका

इस सफल कार्रवाई में थाना प्रभारी कोतवाली श्री सतीश तिवारी, सउनि प्रमोद मालवी, प्र.आर. मनोज पाल, नवीन तिवारी, आर. सतीश इनवाती, सिद्धार्थ दुबे, प्रतीक बघेल, तथा चालक आर. इरफान की विशेष भूमिका रही।

पुलिस टीम की सजगता और तेज़ कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि सिवनी में अपराध करने वालों के लिए अब कोई जगह नहीं है।

शहर में फैली चर्चा

क्रिकेट के मामूली विवाद से शुरू हुआ मामला जानलेवा हमले तक पहुंच गया। इस घटना ने युवाओं में बढ़ती आक्रामकता और कानून के प्रति लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस की इस कार्रवाई से आम जनता में सुरक्षा की भावना और मजबूत हुई है।

सर्वेयर साइडलाइन, वेयरहाउस मालिक ऑन ड्यूटी!” सिवनी में धान खरीदी का खेल: शासन के नियम ताक पर, गोदाम मालिक बने खुद के जज और जूरी

सिवनी में धान खरीदी का खेल: शासन के नियम ताक पर, गोदाम मालिक बने खुद के जज और जूरी | सिवनी जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी अब अपने अंतिम चरण में है, लेकिन इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया पर वेयरहाउस मालिकों की मनमानी भारी पड़ती नजर आ रही है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि शासन द्वारा नियुक्त अधिकृत सर्वेयर की भूमिका लगभग खत्म होती जा रही है और उनकी जगह वेयरहाउस मालिक व उनके परिवार के सदस्य खुद ही “सर्वेयर” बनकर फैसले सुना रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, सर्वेयर द्वारा गुणवत्ता जांच कर “पास” की गई धान की बोरियों को भी वेयरहाउस स्तर पर अलग कर दिया जा रहा है। इससे न केवल धान खरीदी प्रभारी परेशान हो रहे हैं, बल्कि समितियों पर अनावश्यक दबाव और ब्लैकमेलिंग जैसी स्थिति भी बनती जा रही है। यह पूरा मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

जब सर्वेयर की मुहर भी बेअसर हो जाए

शासन के दिशा-निर्देश स्पष्ट हैं कि धान की गुणवत्ता की अंतिम जांच अधिकृत सर्वेयर द्वारा की जाएगी। सर्वेयर की रिपोर्ट के बाद ही धान का भंडारण केंद्रों में किया जाना है। लेकिन सिवनी जिले में हालात उलट हैं।

यहां वेयरहाउस मालिक और उनके परिजन खुद ही गुणवत्ता जांच के नाम पर धान को रिजेक्ट कर रहे हैं, वह भी तब जब अधिकृत सर्वेयर पहले ही उसे मानक के अनुरूप घोषित कर चुका हो। यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि धान खरीदी प्रभारी और समितियों के लिए गंभीर परेशानी का कारण भी बन रहा है।

गोदामों के बाहर “रिजेक्ट धान” की कतार

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिले के कई गोदामों के बाहर सर्वेयर द्वारा रिजेक्ट की गई धान की बोरियां लंबे समय से पड़ी हुई हैं।

हैरानी की बात यह है कि धान खरीदी समितियों को अब तक यह भी आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई कि उनकी बोरियां रिजेक्ट कर दी गई हैं।

इससे साफ संकेत मिलता है कि प्रशासन की नाक के नीचे वेयरहाउस मालिक किस तरह अपने तरीके से सिस्टम चला रहे हैं। अंतिम समय में इसका खामियाजा सीधे धान खरीदी प्रभारी और समितियों को भुगतना पड़ सकता है।

ब्लैकमेलिंग का खतरा, प्रशासन मौन

धान खरीदी प्रभारी अब यह मानने लगे हैं कि उन्हें जानबूझकर मानसिक दबाव में रखा जा रहा है।

कई मामलों में सही और मानक धान को भी गलत साबित करने के प्रयास हो रहे हैं, ताकि केंद्र प्रभारियों को ब्लैकमेल किया जा सके।

जबकि नियम साफ कहते हैं कि वेयरहाउस मालिक या उनके परिवार के सदस्य को परिवहन में आए ट्रकों की परखी लगाकर जांच करने का कोई अधिकार नहीं है। फिर भी सिवनी जिले की उपार्जन समिति की आंखों के सामने यह सब खुलेआम चल रहा है।

कलेक्टर के लिए बड़ी चुनौती

सिवनी जैसे संवेदनशील जिले में इस तरह का खुला खेल जिला प्रशासन और विशेष रूप से जिला कलेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

यदि समय रहते गोदामों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह मामला बड़े घोटाले का रूप भी ले सकता है।

“गोदामों की जांच हो तो काला सच सामने आएगा”

स्थानीय लोगों और धान खरीदी से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अगर सभी गोदामों की जमीनी स्तर पर जांच हो जाए, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।

राजनीतिक प्रभाव से जुड़े कुछ वेयरहाउस मालिकों पर आरोप है कि उन्होंने सर्वेयर की अनदेखी कर अमानक धान का भंडारण भी अपने गोदामों में कर रखा है।

जब इस विषय में एक गोदाम मालिक से बात की गई तो उन्होंने माना कि

“मिलर्स को धान देने के समय गुणवत्ता हमारी जिम्मेदारी होती है। सर्वेयर के अलावा हम भी धान की जांच करते हैं।”

यह बयान ही साबित करता है कि अब सर्वेयर की भूमिका को वेयरहाउस मालिक खुद ही चुनौती दे रहे हैं।

सवाल जो जवाब मांगते हैं

  • क्या शासन द्वारा नियुक्त सर्वेयर सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गए हैं?
  • क्या वेयरहाउस मालिकों को कानून से ऊपर मान लिया गया है?
  • क्या प्रशासन इस मनमानी पर लगाम लगाएगा या फिर आंखें मूंदे रहेगा?

जब तक इन सवालों का जवाब नहीं मिलेगा, तब तक धान खरीदी व्यवस्था पर सवालिया निशान बना रहेगा।

SEONI में सवर्ण समाज सड़कों पर उतरने को तैयार! 29 जनवरी को सिवनी में होगा बड़ा ऐलान, UGC के नए नियमों के खिलाफ निर्णायक जंग

सिवनी। शिक्षा और अधिकारों की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। सकल सवर्ण समाज सिवनी के तत्वाधान में 29 जनवरी 2026 को शाम 6 बजे से अग्रवाल धर्मशाला दुर्गा चौक सिवनी में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया जा रहा है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार करना है, जो UGC (University Grants Commission) के नए नियमों के विरोध में किया जाएगा।

सकल सवर्ण समाज का स्पष्ट और दो टूक संदेश है – “न्याय सवर्णों का अधिकार है, और इससे कोई समझौता नहीं होगा। UGC के नए नियम वापस लेने ही होंगे।”

यह बैठक केवल एक सामान्य सभा नहीं, बल्कि आने वाले बड़े आंदोलन की नींव मानी जा रही है। समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी, युवा कार्यकर्ता, शिक्षाविद और जागरूक नागरिक इस बैठक में शामिल होकर आंदोलन की दिशा और दशा तय करेंगे।

UGC के नए नियमों से क्यों भड़का सवर्ण समाज?

UGC द्वारा लागू किए गए नए नियमों को लेकर सवर्ण समाज में भारी नाराजगी देखी जा रही है। समाज का मानना है कि ये नियम

  • सवर्ण वर्ग के अधिकारों का हनन करते हैं,
  • शिक्षा में समान अवसर की भावना को कमजोर करते हैं,
  • और योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।

इसी कारण अब सवर्ण समाज ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उनका कहना है कि जब तक नियम वापस नहीं लिए जाते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

अग्रवाल धर्मशाळा बनेगा आंदोलन की रणनीति का केंद्र

29 जनवरी 2026 को शाम 6 बजे से अग्रवाल धर्मशाळा दुर्गा चौक में होने वाली बैठक में

  • आंदोलन की तिथि तय की जाएगी,
  • प्रदर्शन की रणनीति बनाई जाएगी,
  • जिम्मेदारियों का बंटवारा होगा,
  • और जन-आंदोलन को व्यापक रूप देने की योजना तैयार की जाएगी।

सकल सवर्ण समाज सिवनी ने जिले के सभी सवर्ण समाज के लोगों से इस बैठक में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की है।

यह केवल बैठक नहीं, अधिकारों की हुंकार है

निवेदक सकल सवर्ण समाज सिवनी के अनुसार, यह बैठक केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सवर्ण समाज की एकजुटता और संघर्ष की शुरुआत है। यह संदेश साफ है कि अब चुप बैठने का समय नहीं है, बल्कि अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर आवाज बुलंद करने का समय है।

सिवनी: 5 साल की मासूम से दरिंदगी! सिवनी कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, 20 साल का कठोर कारावास सुनते ही कांप उठा दरिंदा

सिवनी। न्याय की जीत और मासूमों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा संदेश देते हुए सिवनी की माननीय विशेष न्यायालय (पॉक्सो अधिनियम) ने एक जघन्य अपराध के आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला समाज के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है कि बच्चों के साथ अपराध करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

यह मामला वर्ष 2024 का है, जब थाना उगली अंतर्गत एक ग्राम में रहने वाली 5 वर्षीय मासूम बच्ची को आरोपी राजेन्द्र उर्फ बोरा ने उसके घर में अकेला पाकर डरा-धमकाकर उसके साथ घिनौना अपराध किया। घटना के बाद बच्ची के परिजनों ने तत्काल थाना उगली में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने बिना देरी किए मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की।

जांच के दौरान पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया। साथ ही आरोपी का भी चिकित्सकीय परीक्षण कर उसका रक्त नमूना लिया गया और डीएनए जांच करवाई गई। फॉरेंसिक रिपोर्ट, वैज्ञानिक साक्ष्य और पीड़िता व उसके परिजनों के बयान ने आरोपी के खिलाफ मजबूत आधार तैयार किया। पुलिस ने पूरे मामले को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ हैंडल किया।

इस केस की विवेचना उपनिरीक्षक सदानंद गोदेवर द्वारा की गई, जिन्होंने निर्धारित समय सीमा में संपूर्ण साक्ष्यों के साथ अभियोग पत्र माननीय विशेष न्यायालय में प्रस्तुत किया। न्यायालय में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक / सहायक जिला अभियोजन अधिकारी श्री नवल किशोर सिंह ने पूरे मामले को मजबूती से रखा। उन्होंने सभी गवाहों के कथन प्रभावी ढंग से कराए और ठोस प्रमाण प्रस्तुत किए, जिससे आरोपी का अपराध संदेह से परे सिद्ध हुआ।

सभी गवाहों, फॉरेंसिक रिपोर्ट, डीएनए साक्ष्य, अभियोजन एवं बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद माननीय विशेष न्यायाधीश ने आरोपी राजेन्द्र उर्फ बोरा को दोषी करार देते हुए कड़ा फैसला सुनाया।

न्यायालय ने आरोपी को –

  • धारा 65(2) बीएनएस के अंतर्गत 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹1000 अर्थदंड,
  • तथा धारा 5(एम)/6 पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹1000 जुर्माना
    से दंडित किया।

यह फैसला यह साबित करता है कि न्याय व्यवस्था मासूम बच्चों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर है। इस निर्णय से न केवल पीड़िता को न्याय मिला है, बल्कि समाज में यह भरोसा भी मजबूत हुआ है कि कानून अपराधियों के खिलाफ सख्ती से खड़ा है।

इस तरह के फैसले अपराधियों के लिए डर और आम जनता के लिए सुरक्षा का भरोसा बनते हैं। यह निर्णय आने वाले समय में ऐसे अपराधों को रोकने में एक मजबूत उदाहरण के रूप में देखा जाएगा।

सिवनी की अदालत का यह ऐतिहासिक फैसला पूरे जिले ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में एक सख्त संदेश देता है कि मासूमों की जिंदगी से खेलने वालों का अंजाम सिर्फ और सिर्फ जेल है।

अब वकील आएंगे आपके घर! सिवनी में टेली लॉ सर्विस से मिलेगी घर बैठे निःशुल्क कानूनी सलाह, CSC VLE की ऐतिहासिक कार्यशाला संपन्न

सिवनी : सिवनी जिले में आमजन को न्याय से जोड़ने की दिशा में एक बड़ी और सराहनीय पहल सामने आई है। अब कानूनी सलाह के लिए लोगों को बार-बार वकीलों के चक्कर नहीं लगाने होंगे, बल्कि टेली लॉ सर्विस के माध्यम से घर बैठे ही उन्हें निःशुल्क कानूनी परामर्श मिल सकेगा। इसी उद्देश्य को लेकर सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) कार्यालय में सीएससी वीएलई की एकदिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया, जिसमें जिलेभर के वीएलई संचालकों ने भाग लिया।

इस कार्यशाला में उपस्थित वीएलई को सीएससी के माध्यम से संचालित सभी सेवाओं की विस्तार से जानकारी दी गई। खास तौर पर न्याय विभाग, भारत सरकार द्वारा संचालित टेली लॉ सर्विस की उपयोगिता, प्रक्रिया और इसके सामाजिक महत्व पर विशेष प्रकाश डाला गया।

🏛️ क्या है टेली लॉ सर्विस?

टेली लॉ एक ऐसी सरकारी पहल है, जिसके तहत कोई भी नागरिक अपने कानूनी विवादों का समाधान पाने के लिए निःशुल्क कानूनी सलाह प्राप्त कर सकता है। इसके लिए लाभार्थी को केवल अपने नजदीकी सीएससी सेंटर जाकर अपनी समस्या का रजिस्ट्रेशन करवाना होता है। इसके बाद अनुभवी वकील स्वयं लाभार्थी को कॉल कर उसकी समस्या को समझते हैं और उचित कानूनी सलाह प्रदान करते हैं।

टेली लॉ के माध्यम से निम्नलिखित मामलों में सलाह ली जा सकती है –

  • आपराधिक (Criminal) मामले
  • सिविल विवाद
  • जमीन-जायदाद से जुड़े विवाद
  • बैंकिंग और वित्तीय मामले
  • उपभोक्ता शिकायतें
  • बीमा से संबंधित समस्याएं
  • पारिवारिक विवाद
  • अन्य सभी प्रकार के कानूनी परामर्श

12 लाख से ज्यादा लोगों को मिल चुकी है निःशुल्क कानूनी मदद

भोपाल से पधारे टेली लॉ सर्विस के स्टेट कोऑर्डिनेटर श्री आशीष द्विवेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि मध्यप्रदेश में अब तक लगभग 12 लाख हितग्राहियों को टेली लॉ के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सलाह दी जा चुकी है। यह आंकड़ा इस योजना की सफलता और जनहित में इसकी उपयोगिता को साफ तौर पर दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि आम नागरिक सीएससी केंद्रों के माध्यम से या स्वयं टेली लॉ मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए भी अपनी शिकायत दर्ज कर कानूनी सलाह प्राप्त कर सकते हैं।

CSC: सिर्फ सुविधा केंद्र नहीं, बल्कि जनता का सहारा

कार्यशाला में यह भी बताया गया कि सीएससी केवल सरकारी फॉर्म भरने का केंद्र नहीं है, बल्कि यह आज ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जनसेवा का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म बन चुका है। सीएससी के माध्यम से मिलने वाली प्रमुख सेवाएं हैं –

  • आधार से जुड़ी सेवाएं
  • बैंकिंग और डिजिटल भुगतान सेवाएं
  • राज्य सरकार की विभिन्न ऑनलाइन सेवाएं
  • बीमा सेवाएं
  • ई-स्टोर सुविधा
  • पेंशन, प्रमाण पत्र और अन्य जनकल्याणकारी योजनाएं

वरिष्ठ अधिकारियों ने किया मार्गदर्शन

इस कार्यशाला में सीएससी के वरिष्ठ प्रबंधक श्री अनुराग सिंह भोपाल से विशेष रूप से पधारे और उन्होंने वीएलई संचालकों को सीएससी सेवाओं को और अधिक प्रभावी ढंग से आमजन तक पहुंचाने का मार्गदर्शन दिया।
वहीं, सीएससी जिला सिवनी के जिला प्रबंधक श्री शिवांशु जांघेला ने सभी संचालकों को टेली लॉ सहित अन्य सेवाओं की विस्तृत जानकारी दी और उन्हें अधिक से अधिक लोगों तक इन सेवाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रेरित किया।

न्याय अब सिर्फ कोर्ट में नहीं, आपके मोबाइल तक

यह कार्यशाला सिवनी जिले के लिए एक नई शुरुआत मानी जा रही है, जहां कानून की पहुंच अब आम आदमी के दरवाजे तक सुनिश्चित की जा रही है। टेली लॉ जैसी योजनाएं यह साबित करती हैं कि सरकार अब न्याय को आसान, सुलभ और हर नागरिक के लिए उपलब्ध बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

अब चाहे गांव हो या शहर, गरीब हो या मध्यम वर्ग, हर व्यक्ति को न्याय पाने का अधिकार है और टेली लॉ इस अधिकार को मजबूत करने का सबसे सशक्त माध्यम बनता जा रहा है।

सिवनी में धान खरीदी का काला सच: रात के अंधेरे में धान की बोरियों में ‘पानी की सिंचाई’, बढ़ाया जा रहा धान का वजन

(Seoni News | Paddy Purchase Scam Exposed) सिवनी। जिले में चल रही धान खरीदी प्रक्रिया अब सवालों के घेरे में आ चुकी है। जिस व्यवस्था को किसानों की मेहनत की सही कीमत दिलाने के लिए बनाया गया था, वहीं अब कुछ खरीदी केंद्रों में धान का वजन बढ़ाने के लिए पानी डालने का खेल खुलेआम खेला जा रहा है। यह पूरा काला कारनामा रात के अंधेरे में, पूरी प्लानिंग के साथ अंजाम दिया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, कई धान खरीदी केंद्रों में धान की बोरियों में मोटर लगाकर पानी डाला जा रहा है, ताकि वजन बढ़ाकर सरकारी रिकॉर्ड में अधिक मात्रा दर्शाई जा सके। चौंकाने वाली बात यह है कि इस दौरान खरीदी केंद्रों की लाइटिंग तक बंद कर दी जाती है, ताकि कोई इस गोरखधंधे को न देख सके।

ट्रक लगने से पहले होता है खेल

विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही भंडारण केंद्र के ट्रक आने का समय नजदीक होता है, उससे कुछ घंटे पहले ही धान की बोरियों में पानी डालने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है।
यह भी सामने आया है कि वेयरहाउस से जुड़े कुछ जिम्मेदार अधिकारी भी इस खेल से अनजान नहीं हैं, बल्कि परोक्ष रूप से इस पूरे फर्जीवाड़े को संरक्षण मिल रहा है।

कई मामलों में ट्रकों के बीच की बोरियां अत्यधिक गीली पाई गईं, जिस पर वेयरहाउस में तैनात सर्वेयर ने आपत्ति दर्ज की और धान की पूरी खेप वापस खरीदी केंद्र भेज दी गई। यह साफ संकेत है कि मामला सिर्फ अफवाह नहीं, बल्कि वास्तविक और गंभीर है।

आष्टा खरीदी केंद्र बना गड़बड़ी का बड़ा उदाहरण

मामला ग्राम आष्टा के धान खरीदी केंद्र का है, जहां महिला स्व सहायता समूह द्वारा संचालित केंद्र में रात के अंधेरे में खड़ी और सिली बोरियों में पानी डालते हुए वीडियो और फोटो बनाए गए।
ग्राम के जागरूक नागरिक ने यह सबूत तत्काल अधिकारियों को सौंपे, लेकिन उस समय कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।

अगले दिन जब कृषि विभाग और नायब तहसीलदार ने जांच की तो पाया गया कि:

  • बोरियां नीचे से गीली थीं
  • कई बोरियों का वजन 42 किलो तक पाया गया, जबकि मानक वजन इससे कम होता है

यह सीधे-सीधे सरकारी धन की हेराफेरी और धान खरीदी में घोटाले की ओर इशारा करता है।

शिकायतकर्ता पर ही आरोप!

हैरानी की बात यह रही कि मामले को दबाने के प्रयास में धान खरीदी प्रभारी ने शिकायतकर्ता पर ही झूठी शिकायत और ब्लैकमेलिंग का आरोप मढ़ दिया।
जबकि सच्चाई जांच टीम के सामने मौजूद थी। सवाल यह है कि यदि शिकायत गलत थी तो:

  • बोरियां गीली कैसे मिलीं?
  • वजन 42 किलो तक कैसे पहुंचा?
  • ट्रक वापस क्यों भेजे गए?

महिला स्व सहायता समूहों की साख पर बट्टा

जहां एक ओर सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए महिला स्व सहायता समूहों को धान उपार्जन से जोड़ रही है, वहीं कुछ समूहों की गतिविधियां पूरी योजना को बदनाम कर रही हैं।
क्या इन्हें किसी का संरक्षण प्राप्त है?
क्या दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है?

अब सभी की निगाहें जिले की संवेदनशील कलेक्टर शीतला पटले जी पर टिकी हैं कि क्या इस गंभीर मामले में सख्त कार्रवाई होगी या फाइलों में ही सिमट कर रह जाएगा यह घोटाला।

इनका कहना

एम.डी. परते, कृषि विभाग:
“हमारे द्वारा जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई है। कार्रवाई करना विभाग का काम है।”

नायब तहसीलदार, बरघाट:
“जांच कर प्रतिवेदन एसडीएम साहब को सौंप दिया गया है। आगे की कार्रवाई की जानी है।”

सिवनी जिले में धान खरीदी केंद्रों पर सामने आ रहा यह मामला सिर्फ अनियमितता नहीं, बल्कि सरकारी धन की लूट, किसानों के साथ धोखा और सिस्टम में गहरी मिलीभगत की ओर इशारा करता है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह घोटाला पूरे जिले की धान खरीदी व्यवस्था को सवालों के कटघरे में खड़ा कर देगा।