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छत्तीसगढ़ सरकार के ‘न्याय’ पर केंद्र को ‘अन्याय’ का संदेह, रोकी चावल की अनुमति

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की ‘न्याय’ योजना में केंद्र सरकार को ‘अन्याय’ दिख रहा है। यह बात मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और केंद्रीय खाद्य मंत्री पीयूष गोयल के बीच टेलीफोन पर हुई चर्चा में निकलकर सामने आई है। इसी संदेह के कारण केंद्र सरकार ने चावल जमा करने की अनुमति रोक दी है। इससे धान खरीदी केंद्रों से लेकर राइस मिलों तक अब धान और चावल रखने के लिए जगह की कमी होने लगी है। बारदाने की कमी तो पहले से ही है। इससे प्रदेश में धान की खरीदी प्रभावित हो रही है। तीन दर्जन केंद्रों में खरीदी रोक दी गई है, जबकि बस्तर संभाग को छोड़कर बाकी सभी संभागों में अगले सप्ताह धान की खरीदी रोकनी पड़ जाएगी।

अब तक नहीं मिली एफसीआइ में चावल जमा करने की अनुमति 

इस वर्ष करीब साढ़े 21 लाख किसानों ने धान बेचने के लिए पंजीयन कराया है। केंद्र सरकार की तरफ से 60 लाख टन चावल लेने की सैद्धांतिक सहमति को देखते हुए राज्य सरकार ने 90 लाख टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा है। धान बेचने वाले किसानों की संख्या और बढ़े हुए लक्ष्य को देखते हुए इस वर्ष 2300 से ज्यादा केंद्रों में धान की खरीदी की जा रही है।

केंद्र आशंकित कि धान पर बोनस दे रहा राज्य

दरअसल, केंद्र सरकार को संदेह है कि राज्य सरकार राजीव गांधी किसान न्याय योजना के माध्यम से बोनस (प्रोत्साहन राशि) दे रही है। यह केंद्र सरकार द्वारा किए गए अंतरराष्ट्रीय समझौते के प्रतिकूल है। इसे देखते हुए राज्य के अफसर न्याय योजना की पूरी रिपोर्ट लेकर दिल्ली जाने की तैयारी में हैं, ताकि स्थिति स्पष्ट की जा सके।

बोनस पर रोक के बाद लाई योजना

कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र में धान 2500 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर खरीदने का वादा किया था। 2018 में सत्ता में आते ही किसानों को 2500 रपये के हिसाब से भुगतान भी किया गया। 2019 में केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को दो टूक कह दिया कि यदि वह बोनस देगी तो केंद्रीय कोटे में चावल नहीं लिया जाएगा। इसके बाद राज्य सरकार ने समर्थन मूल्य पर खरीदी की, लेकिन चुनावी वादे को पूरा करने के लिए राजीव गांधी न्याय योजना शुरू की।

खेती के रकबे पर प्रोत्साहन राशि

राजीव गांधी न्याय योजना के तहत राज्य सरकार धान के साथ ही मक्का और गन्ना की खेती करने वाले किसानों को भी प्रोत्साहन राशि दे रही है। इस वर्ष से दलहन-तिलहन को भी योजना में शामिल किया है। योजना के तहत उत्पाद के स्थान पर खेती के रकबे के आधार पर प्रोत्साहन राशि दी जाती है। पिछले खरीफ में धान के लिए 10 हजार रपये प्रति एकड़ तय किया गया था।

खरीदी केंद्र से लेकर राइस मिलों तक में स्थान का भाव

छत्तीसगढ़ में चालू खरीफ सीजन में एक दिसंबर से धान की खरीदी शुरू हुई है। महीनेभर में करीब 50 लाख टन धान की खरीदी हो गई है। करीब आठ लाख टन से ज्यादा चावल भी तैयार हो गया है। दोनों प्रक्रिया चल रही है। इससे खरीदी केंद्रों के साथ ही राइस मिलों में भी अब धान-चावल रखने के लिए स्थान की कमी होने लगी है।

बारदाने की भी कमी

राज्य सरकार ने करीब साढ़े तीन लाख बारदाने की मांग जूट कमिशनर से की थी, लेकिन 1.45 लाख ही मिल पाएगा। पीडीएस और राइस मिलर्स से पुराने बारदाने लेकर काम चल रहा है। ऐसे में केंद्र के चावल नहीं लेने से बारदाने की भी कमी होने लगी है।

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खबर सत्ता डेस्क, कार्यालय संवाददाता

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