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45 सालों से जारी अटूट आस्था! सिवनी के मां खैरापति मंदिर में 65 कलश स्थापना के साथ गूंजा भक्ति का महासागर

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सिवनी | विशेष रिपोर्ट: मध्यप्रदेश के सिवनी नगर का मंगलीपेठ क्षेत्र इन दिनों भक्ति, आस्था और धार्मिक उत्साह का केंद्र बना हुआ है। कस्तूरबा वार्ड स्थित मां खैरापति मंदिर में पिछले 45 वर्षों से चली आ रही अखंड परंपरा इस बार भी पूरे श्रद्धा भाव के साथ निभाई जा रही है।

21 मार्च को मंदिर परिसर में 65 कलश और एक विशेष थप्पर कलश की स्थापना विधि-विधान, मंत्रोच्चार और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ की गई, जिसके साथ ही पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब गया।

कलश स्थापना के साथ शुरू हुआ भक्ति का महापर्व

कलश स्थापना के बाद से मंदिर परिसर में रोजाना सुबह-शाम पूजा-अर्चना, आरती, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान लगातार जारी हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मां खैरापति के दर्शन के लिए उमड़ रही है। हर तरफ “जय माता दी” के जयकारों से वातावरण गूंज रहा है। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक ऊर्जा को बढ़ाया है बल्कि पूरे क्षेत्र में सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश भी मजबूत किया है।

28 मार्च को होगा विशेष हवन, जुटेंगे सैकड़ों श्रद्धालु

आयोजन के अंतर्गत 28 मार्च को विशेष हवन कार्यक्रम रखा गया है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर यज्ञ में आहुति देंगे। यह हवन क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना के लिए आयोजित किया जाएगा और इसे पूरे आयोजन का आध्यात्मिक केंद्र माना जा रहा है।

29 मार्च को भव्य कलश यात्रा और विसर्जन

29 मार्च को इस धार्मिक आयोजन का भव्य समापन होगा। इस अवसर पर एक विशाल और आकर्षक कलश यात्रा निकाली जाएगी।

  • रंग-बिरंगी लाइटिंग
  • आधुनिक डिस्को लाइट सजावट
  • ढोल-नगाड़ों की गूंज
  • भक्ति गीत और जयकारे

इन सबके बीच पूरा सिवनी नगर उत्सव में तब्दील हो जाएगा।

भंडारे में उमड़ेगा जनसैलाब

कलश विसर्जन के बाद हर वर्ष की तरह इस बार भी विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस भंडारे में न सिर्फ सिवनी शहर बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। सभी के लिए प्रसाद की व्यवस्था सेवा और श्रद्धा भाव से की जाएगी।

सामूहिक प्रयास से जीवित है परंपरा

इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में कस्तूरबा वार्ड के महिला-पुरुष, युवा और मंदिर समिति की अहम भूमिका है।

  • सभी लोग तन-मन-धन से सहयोग कर रहे हैं
  • समाज के हर वर्ग की भागीदारी देखने को मिल रही है
  • नगर के गणमान्य नागरिक भी सक्रिय सहयोग दे रहे हैं

यही सामूहिक प्रयास इस आयोजन को हर साल और भी भव्य बनाता है।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनी परंपरा

लगातार 45 वर्षों से आयोजित यह धार्मिक आयोजन सिवनी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को मजबूत कर रहा है।

यह परंपरा न केवल आस्था को जीवित रखे हुए है बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का भी काम कर रही है, जो इसे और भी खास बनाता है।

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