Home सिवनी बंसत व रामजीयन सिंह की चुनौती से परेशान रजनीश

बंसत व रामजीयन सिंह की चुनौती से परेशान रजनीश

सिवनी । पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष एवं कांग्रेस के कद्दावर नेता स्व. हरवंश सिंह की राजनैतिक विरासत को संभालने में लगभग नाकाम रहे, रजनीश सिंह को आगामी विधानसभा चुनावों में ना केवल भाजपा और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से चुनौती मिलने की संभावना है। इसके साथ ही वे अपने ही दल के वरिष्ठ कांगे्रसी बसंत तिवारी एवं चाचा राज जियन सिंह की बढ़ती राजनैतिक आंकाक्षाओं को लेकर परेशान नजर आ रहे है।

वर्ष 2013 में विस चुनावों के दौरान स्व. हरवंश सिंह की आकस्मिक मृत्यु के बाद उभरी सहानुभूति की लहर पर सवार होकर रजनीश सिंह विधानसभा चुनाव जीत गये, लेकिन उसके बाद से अभी तक के कार्यकाल के दौरान वे सैंकड़ों कांगे्रसी उनसे दूर हो गये है जो कभी दादा ठाकुर के लिये केवलारी, उगली एवं पलारी जैसे क्षेत्रों में संकट मोचक का कार्य करते चले आये थे।

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जिले की राजनैतिक शतरंज पर नजर डाली जाये तो चार विधानसभाओं में से कांगे्रस एवं भाजपा को देश की आधी आबादी का नेतृत्व कर रही महिला नेत्रियों को एक टिकिट देने का दबाव बना हुआ है, ऐसे में भारतीय जनता पार्टी सिवनी एवं केवलारी में निर्णायक साबित होने वाले ब्राम्हण वोटरों को साधने के लिये केवलारी से श्रीमति पटेरिया पर दाव लगा सकती है। ऐसे में कांगे्रस की ओर से एक मात्र वजनदार ब्राम्हण नेता बसंत तिवारी ही दिखायी दे रहे है, जो वर्षों से केवलारी विस क्षेत्र में कांग्रेस के लिये कार्य कर रहे है।

ऐसे में रजनीश सिंह बसंत तिवारी की दावेदारी को कम करने के लिये आंतरिक रूप से ऐसा प्रचारित कर रहे है कि उन्हें ही परिवार से राम जियन सिंह चुनौती दे रहे, है चुकि 2013 में रजनीश सिंह को कोई राजनैतिक अनुभव नहीं होने के बाद भी कांगे्रस से प्रत्याशी बनाया गया था, उस समय से ही मंडी बोर्ड के अध्यक्ष एवं शैक्षणिक रूप से इंजीनियर के डिग्रीधारी चाचा राम जियन सिंह इस प्रयास में लगे है कि उन्हें भी राजनैतिक अनुभव के आधार पर इस विधानसभा में मौका दिया जाये।

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पल-पल अपना रूप बदलने वाले रजनीश सिंह जनता और कांगे्रस के पदाधिकारियों को इमोशनल तरीके से अपने पक्ष में करने के लिये जाने जाते है, एक बार पुन: वे विगत 15 दिनों से इसी प्रयास में लगे है कि पहले वे परिवार और पार्टी से मिल रही चुनौती को खत्म करें, क्योंकि वे अच्छी तरह जानते है कि यदि चाचा और बसंत तिवारी ने चुनाव के दौरान निष्क्रियता दिखायी तो उनके लिये विधानसभा की राह आसान नहीं होगी।

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