सुनिए कलेक्टर साहब…! Seoni Madhya Pradesh

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धडल्ले से बिक रही पीओपी की प्रतिमाएं. क्या पीओपी की प्रतिमा के प्रतिबंध का आदेश जारी करना भूला प्रशासन!

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सिवनी । आने वाले दिनों में विध्नहर्ता भगवान गणेश की स्थापना की जाएगी। हर साल की तरह इस साल भी बाजारों में मिट्टी के साथ ही साथ प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की प्रतिमाएं धड़ल्ले से बिक रही हैं। इस साल अब तक पीओपी की प्रतिमाओं के संबंध में सरकारी स्तर पर आदेश जारी करना प्रशासन शायद भूल गया है।

जानकारों का कहना है कि भले ही रस्म अदायगी के लिए ही सही हर साल गणेश चतुर्थी और दुर्गा उत्सव के पूर्व प्रशासन के द्वारा पीओपी की प्रतिमाओं के निर्माण न करने के आदेश जारी किए जाते थे, इससे कम से कम कुछ लोगों में भय व्याप्त होता था और लोग खुलकर इन प्रतिमाओं का विक्रय नहीं कर पाते थे।

ज्ञातव्य है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के द्वारा स्पष्ट रूप से आदेश जारी किया गया है कि पीओपी की प्रतिमाएं पानी में नहीं घुलतीं और इनमें उपयोग में आने वाले हानिकारक रंग लोगों की सेहत पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं, इसलिए पीओपी की प्रतिमाओं का निर्माण न कराया जाए।

जिला प्रशासन के सूत्रों ने बताया कि सिवनी में आसपास के जिलों सहित अन्य राज्यों से POP की प्रतिमाएं बुलाई गई हैं। ये प्रतिमाएं मिट्टी की प्रतिमाओं की तुलना में बहुत ही हल्की और सस्ती होती हैं। इनका निर्माण सांचों से कराया जाता है इसलिए इनमें ज्यादा मेहनत भी नहीं लगती है।

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हो सकते हैं जलस्त्रोत दूषित :

सूत्रों ने कहा कि अगर POP की प्रतिमाओं को लोगों के द्वारा स्थापित कर उनका विसर्जन किया जाता है तो जल स्त्रोतों के दूषित होने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है। जिले भर के जल स्त्रोतों में इन प्रतिमाओं को विसर्जित किया जाता है।

जानकारों का कहना है कि मिट्टी की प्रतिमाओं में सिंथेटिक रंगों का उपयोग कम ही किया जाता है, जबकि पीओपी की प्रतिमाओं में सिंथेटिक रंगों का उपयोग जमकर होता है। ये प्रतिमाएं इन रंगों से रंगी जाने के बाद जल्द ही सूख भी जाती हैं। मिट्टी की प्रतिमाएं पानी में जल्द ही घुल जाती हैं, पर पीओपी की प्रतिमाओं का लंबे समय तक पानी में पड़े रहने के बाद भी कोई असर नहीं होता है।

हर साल घुल रहे सिंथेटिक रंग :

जानकारों की मानें तो जिले भर में प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद जल स्त्रोतों में बड़ी मात्रा में घातक रसायन घुल रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि अनेक जल स्त्रोतों का पानी भीमगढ़ जलाशय में जाकर मिलता है जिससे भीमगढ़ के पानी के दूषित होने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है।

गणेश चतुर्थी में अब महज छः दिन शेष :

बाजारों में विध्न विनाशक भगवान गणेश की प्रतिमाएं मिलना आरंभ हो गई हैं। अब तक प्रशासनिक स्तर पर इन प्रतिमाओं की विशेषकर पीओपी की प्रतिमाओं की जांच नहीं किए जाने से इनका विक्रय धड़ल्ले से किया जा रहा है, जिसके चलते इस बार भी जिले के जल स्त्रोतों के प्रदूषित होने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है।

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