सिवनी (मध्यप्रदेश): देशभर में गाय को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। इस बीच मध्यप्रदेश मुस्लिम विकास परिषद, सिवनी ने एक बड़ा कदम उठाते हुए गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने और सख्त गौ संरक्षण कानून लागू करने की मांग की है। परिषद ने यह महत्वपूर्ण ज्ञापन जिला कलेक्टर सिवनी के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन के नाम सौंपा।
गाय सिर्फ पशु नहीं, भारतीय संस्कृति की आत्मा
परिषद के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट मोहम्मद माहिर खान के निर्देश पर, प्रदेश महामंत्री शोएब राजा खान और जिलाध्यक्ष साजिद खान (सज्जू) के नेतृत्व में यह ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में कहा गया कि भारत विविधता, सहअस्तित्व और पारंपरिक मूल्यों का देश है, जहां गाय का स्थान सिर्फ एक पशु के रूप में नहीं, बल्कि “माता” के रूप में माना जाता है।
परिषद ने यह भी बताया कि गाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है और इसका योगदान कृषि, पर्यावरण और जैविक जीवनशैली में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
गौ तस्करी और अवैध वध पर चिंता
ज्ञापन में परिषद ने देश में बढ़ रही गौ तस्करी, अवैध वध और बूचड़खानों के विस्तार पर गहरी चिंता व्यक्त की।
परिषद का कहना है कि ये गतिविधियां न केवल सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को भी नुकसान पहुंचा रही हैं।
👉 परिषद ने मांग रखी कि:
- गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए
- गौमांस के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए
- गौवंश को संवैधानिक संरक्षण मिले
ये हैं प्रमुख मांगें जो सरकार के सामने रखी गईं
परिषद ने अपने ज्ञापन में कई अहम सुझाव दिए, जिनमें शामिल हैं:
- 🐄 कमजोर और बूढ़ी गायों की खरीदी-बिक्री पर रोक
- 🕊️ गौवंश की मृत्यु पर सम्मानजनक अंतिम संस्कार की व्यवस्था
- ⚖️ देशभर में एक समान सख्त गौ संरक्षण कानून लागू करना
- 🏡 गौशालाओं को विशेष आर्थिक सहायता देना
- 🌱 गौ आधारित उत्पाद और जैविक खेती को बढ़ावा देना
- 🚔 अवैध गौ तस्करी रोकने के लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन
कार्यक्रम में रही बड़ी भागीदारी
इस अवसर पर परिषद के कई पदाधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से:
शब्बीर वारसी, असलम मिर्जा, जावेद खान, लाइक पटेल, रहीम खान, फैजान खान, सिराजुद्दौला, एडवोकेट मतीन खान, एडवोकेट सलमान खान, सोहेल पटेल, हसीब खान सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे।
इसके साथ ही भीम आर्मी के पदाधिकारी संतोष महेरा और अन्य नागरिकों ने भी इस पहल में अपनी भागीदारी निभाई।
सामाजिक सौहार्द और भाईचारे के लिए उठाया कदम
परिषद के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह पहल सामाजिक सौहार्द, आपसी भाईचारे और देश की सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस विषय को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही ठोस कदम उठाएगी।

