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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को यूनिसेफ इंडिया यूथ कंटेंट क्रिएटर गौरंगी शर्मा ने भेंट की अनोखी पेंटिंग

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को यूनिसेफ इंडिया की यूथ कंटेंट क्रिएटर गौरंगी शर्मा ने उनके निवास कार्यालय में एक अनोखी पेंटिंग भेंट की। यह पेंटिंग मुख्यमंत्री यादव की उस पहल पर केंद्रित थी, जो उन्होंने किशोरी बालिकाओं के माहवारी स्वास्थ्य और स्वच्छता प्रबंधन के लिए चलाई है। मुख्यमंत्री यादव की यह पहल विशेष रूप से माहवारी के समय स्वच्छता और सुविधाजनक व्यवस्थाओं को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित है।

मुख्यमंत्री की अनूठी पहल पर आधारित पेंटिंग

गौरंगी शर्मा द्वारा बनाई गई पेंटिंग में मुख्यमंत्री यादव के द्वारा प्रदेश में किशोरी बालिकाओं के माहवारी स्वास्थ्य और स्वच्छता प्रबंधन के लिए किए जा रहे अभूतपूर्व कार्यों को दर्शाया गया है। इस पेंटिंग में सफाई और स्वच्छता के महत्व को प्रमुखता से उभारा गया है, जो मुख्यमंत्री द्वारा चलाए गए अभियान की प्रमुख विशेषताओं में से एक है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही में प्रदेश की 19 लाख स्कूली छात्राओं के खातों में 57 करोड़ 58 लाख रुपए की राशि अंतरित की थी। यह राशि माहवारी स्वच्छता प्रबंधन के तहत सेनिटेशन हाईजीन सुविधाओं के लिए प्रदान की गई है। इस कदम से प्रदेश की स्कूली बालिकाओं को माहवारी के दौरान स्वच्छता संबंधी समस्याओं से निपटने में बड़ी सहायता मिली है।

महिलाओं और किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य पर मुख्यमंत्री का विशेष ध्यान

मुख्यमंत्री मोहन यादव का ध्यान हमेशा से महिलाओं और किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य पर केंद्रित रहा है। उन्होंने कई योजनाओं के तहत माहवारी से जुड़ी समस्याओं के समाधान हेतु विभिन्न कदम उठाए हैं। माहवारी स्वास्थ्य और स्वच्छता प्रबंधन से जुड़ी उनकी पहल प्रदेश में लाखों बालिकाओं के जीवन को आसान बनाने में कारगर साबित हुई है।

उन्होंने इस दिशा में जागरूकता बढ़ाने और संसाधनों की उपलब्धता के लिए माहवारी प्रबंधन अभियान की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य प्रदेश के दूरदराज के क्षेत्रों में भी बालिकाओं को स्वच्छता संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

माहवारी स्वच्छता प्रबंधन के तहत किए गए प्रमुख कार्य

मुख्यमंत्री यादव ने माहवारी स्वच्छता प्रबंधन के अंतर्गत कई योजनाओं की शुरुआत की है, जो निम्नलिखित हैं:

  1. स्कूलों में सेनिटेशन सुविधाओं का विस्तार: स्कूली बालिकाओं के लिए स्वच्छता के उपयुक्त साधन उपलब्ध कराना, ताकि उन्हें माहवारी के समय असुविधा का सामना न करना पड़े।
  2. बालिकाओं के खातों में सीधी सहायता: स्कूली बालिकाओं के बैंक खातों में सीधी धनराशि स्थानांतरित करना, जिससे वे स्वयं सेनिटेशन उत्पाद खरीद सकें और अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकें।
  3. स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन: प्रदेश भर में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन, जिनके माध्यम से बालिकाओं को माहवारी स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी सही जानकारी दी जाती है।
  4. नि:शुल्क सेनिटरी पैड्स का वितरण: मुख्यमंत्री की योजना के तहत कई स्कूलों में नि:शुल्क सेनिटरी पैड्स का वितरण भी किया गया, जिससे बालिकाओं को सुविधाएं प्राप्त हो सकें।

माहवारी स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए सरकार का बड़ा कदम

यह कदम सरकार की ओर से बालिकाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है। माहवारी के दौरान स्वच्छता बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है, और सरकार इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री यादव ने यह सुनिश्चित किया है कि प्रदेश की हर बालिका को इस समय स्वच्छता के सभी साधन उपलब्ध हों, ताकि उन्हें किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

सरकार के इस प्रयास से समाज में माहवारी को लेकर व्याप्त मिथकों और भ्रांतियों को दूर करने में भी सहायता मिल रही है। बालिकाओं को उनके स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के साथ ही, उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिल रहा है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव का योगदान: महिलाओं के लिए एक सशक्त कदम

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने कार्यकाल में महिलाओं के लिए कई सशक्त कदम उठाए हैं। उनकी सोच और योजनाएं समाज के उन तबकों तक पहुंची हैं, जो पहले स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित थे। मुख्यमंत्री द्वारा चलाए गए माहवारी स्वच्छता अभियान ने समाज में एक सकारात्मक संदेश दिया है, जो यह बताता है कि माहवारी कोई शर्म की बात नहीं है, बल्कि इसके प्रति स्वच्छता और जागरूकता आवश्यक है।

गौरंगी शर्मा की कला का महत्व

यूनिसेफ इंडिया की यूथ कंटेंट क्रिएटर गौरंगी शर्मा द्वारा बनाई गई पेंटिंग मुख्यमंत्री यादव की सोच और योजनाओं को समर्थन देती है। यह पेंटिंग उनके अभियान को और भी प्रेरणादायक बनाती है। गौरंगी ने अपनी कला के माध्यम से एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि समाज में माहवारी स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता जरूरी है।

यह पेंटिंग सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि एक प्रेरक प्रतीक है, जो बालिकाओं के स्वास्थ्य और उनके अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को दर्शाती है। मुख्यमंत्री यादव ने इसे अपने निवास कार्यालय में सहेज कर रखने की घोषणा की है, जो इस पेंटिंग के महत्व को और भी बढ़ाता है।

MIDAS CLASSES SEONI: सिवनी में मिडास क्लासेज सरकार के आदेशों की उड़ा रही धज्जियां, शिक्षा विभाग के अधिकारी हमेशा की तरह नींद में

MIDAS CLASSES SEONI: सिवनी जिले में कोचिंग संस्थानों द्वारा सरकार के दिशा निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। कई कोचिंग सेंटर बिना पंजीयन के संचालित हो रहे हैं, और सबसे गंभीर बात यह है कि इन संस्थानों में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को भी पढ़ाया जा रहा है, जबकि 2024 में केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस के अनुसार, 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कोचिंग संस्थानों में पढ़ाना सख्त मना है। शिक्षा विभाग के अधिकारी इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे जिले में इन नियमों की अवहेलना हो रही है।

2024 में केंद्र सरकार ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कोचिंग संस्थानों में पढ़ाने पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बावजूद, सिवनी जिले के कई कोचिंग संस्थान इस नियम की अवहेलना कर रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ प्रतिष्ठित संस्थान जैसे मिडास क्लासेज सिवनी (MIDAS CLASSES SEONI) भी इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। वे खुलेआम 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कोचिंग दे रहे हैं और इसका प्रचार-प्रसार भी कर रहे हैं। यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि सरकार के दिशा निर्देशों के बावजूद ऐसे संस्थानों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो रही है।

MIDAS CLASSES SEONI पर शिक्षा विभाग की निष्क्रियता

सिवनी जिले में शिक्षा विभाग की लापरवाही साफ दिखाई दे रही है। शिक्षा विभाग के अधिकारी इन संस्थानों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। कलेक्टर के आदेश के बिना ये अधिकारी सक्रिय नहीं हो रहे हैं, जिससे जिले में नियमों की खुलेआम अवहेलना हो रही है। शिक्षा विभाग का यह रवैया न केवल सरकारी नियमों के उल्लंघन को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि छात्रों और उनके माता-पिता को भी गलत संदेश दे रहा है।

MIDAS SEONI की वजह से बच्चों के विकास पर नकारात्मक प्रभाव

कोचिंग संस्थानों में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को पढ़ाना सरकार के दिशा निर्देशों के खिलाफ है। यह उम्र बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस उम्र में उन्हें एकेडमिक दबाव से बचाना चाहिए, जबकि कोचिंग संस्थान उन्हें पहले से ही प्रतिस्पर्धा की दौड़ में धकेल रहे हैं।

सरकार के नियमों का उल्लंघन करके इन बच्चों को कोचिंग में पढ़ाना न केवल उनके मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डालता है, बल्कि उन्हें अनुचित शिक्षा पद्धतियों में धकेलता है।

MIDAS SEONI मिडास क्लासेज सिवनी की भूमिका

सिवनी जिले के मिडास क्लासेज (MIDAS CLASSES SEONI) द्वारा 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को पढ़ाने की खबर ने शिक्षा जगत में हलचल मचा दी है। संस्थान न केवल इन बच्चों को कोचिंग दे रहा है, बल्कि इसके प्रचार-प्रसार में भी कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। बैनर और पोस्टर के माध्यम से इस बात का प्रचार किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर सरकार के दिशा निर्देशों का उल्लंघन है।

सरकारी कार्रवाई की आवश्यकता

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यह आवश्यक है कि शिक्षा विभाग और प्रशासन इस मामले में जल्द से जल्द सख्त कदम उठाएं। सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना और उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कठोर कार्रवाई करना अत्यंत आवश्यक है।

शिक्षा विभाग को सक्रिय होकर जिले में सभी कोचिंग संस्थानों की जांच करनी चाहिए और जो भी संस्थान नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से बंद करना चाहिए।

बिना पंजीयन संचालित हो रही कोचिंग संस्थान

सिवनी जिले में कई कोचिंग संस्थान बिना पंजीयन के चलाए जा रहे हैं। यहां बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे कोचिंग के लिए आ रहे हैं, लेकिन इन संस्थानों के पास कोई वैध पंजीयन नहीं है। जीएसटी की चोरी भी एक बड़ी समस्या है, क्योंकि इन कोचिंग संचालकों द्वारा जीएसटी का भुगतान नहीं किया जा रहा है, और इसका सीधा नुकसान सरकार को हो रहा है। सरकार ने जब से नई गाइडलाइंस जारी की हैं, सभी कोचिंग संचालकों को निर्देश दिए गए थे कि वे अपने संस्थानों का पंजीयन कराएं, परंतु इस निर्देश का पालन नहीं हो रहा है।

छात्र आत्महत्या की घटनाएं

पिछले कुछ वर्षों में कोचिंग संस्थानों से संबंधित आत्महत्याओं के मामलों में भारी वृद्धि हुई है। 2023 में 26 आत्महत्याओं के मामले सामने आए, जिनमें अधिकांश घटनाएं कोटा जैसे कोचिंग हब से रिपोर्ट की गई थीं। छात्रों पर बढ़ते मानसिक तनाव और दबाव के कारण ये घटनाएं बढ़ी हैं। इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई थी, जिसमें छात्रों की मानसिक भलाई के लिए दिशा निर्देश जारी करने की मांग की गई थी।

मानसिक स्वास्थ्य पर जोर

गाइडलाइंस में यह स्पष्ट किया गया है कि कोचिंग संस्थानों को छात्रों की मानसिक भलाई का ध्यान रखना चाहिए। छात्रों को मानसिक तनाव से बचाने के लिए संस्थानों में साइकोलॉजिस्ट की नियुक्ति करने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा, कोचिंग सेंटरों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि छात्र पर कोई अनावश्यक दबाव न डाला जाए। इन उपायों से छात्रों की मानसिक स्थिति में सुधार लाने की कोशिश की जा रही है।

कोचिंग संस्थानों के लिए अनिवार्य नियम

सरकार ने कोचिंग संस्थानों के लिए कुछ सख्त नियम बनाए हैं। इनमें से एक प्रमुख नियम यह है कि किसी भी कोचिंग संस्थान में तलघर में संचालन नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, कोचिंग संस्थान को दो दरवाजों की व्यवस्था करनी होगी, ताकि आपातकालीन स्थिति में बच्चे सुरक्षित बाहर निकल सकें। अग्निशमन उपकरणों का भी होना अनिवार्य है। भ्रामक विज्ञापनों से बचने के लिए कोचिंग संस्थानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे छात्रों को अच्छे नंबर या रैंक की गारंटी नहीं दें। शिक्षकों की योग्यता और फीस संरचना को स्पष्ट रूप से वेबसाइट पर प्रकाशित करना आवश्यक है।

कोचिंग में छात्रों की सुरक्षा

छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सभी कोचिंग संस्थानों को निर्देश दिए हैं कि वे सुरक्षा मानकों का पालन करें। इसके तहत संस्थानों को अपनी इमारतों की जांच करवानी होगी, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनकी इमारतें सुरक्षित हैं। इसके अलावा, छात्रों को समय-समय पर सुरक्षा प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए।

पंजीयन और गुणवत्ता

कोचिंग संस्थानों के लिए पंजीयन अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि उनकी गुणवत्ता को मापा जा सके। सरकार ने कोचिंग संस्थानों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कई मापदंड तय किए हैं। इनमें शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता, कोचिंग की संरचना, और पाठ्यक्रम की समयसीमा शामिल हैं। इसके साथ ही, कोचिंग संस्थानों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे छात्रों को सही जानकारी प्रदान करें और फर्जी विज्ञापन के माध्यम से छात्रों को गुमराह न करें।

नियमों की अनदेखी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई

सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जो कोचिंग संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इन संस्थानों के खिलाफ वित्तीय दंड के साथ-साथ उन्हें बंद करने का आदेश भी जारी किया जा सकता है। कोचिंग संचालकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे सरकार के सभी दिशा निर्देशों का पालन करें, ताकि छात्रों की सुरक्षा और उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जा सके।

छात्रों की मानसिक और शारीरिक भलाई का ध्यान रखना जरूरी

कोचिंग संस्थानों को छात्रों की मानसिक और शारीरिक भलाई पर भी ध्यान देना होगा। छात्रों को मानसिक तनाव से दूर रखने के लिए कोचिंग संस्थानों में परामर्श सेवाएं उपलब्ध करानी होंगी। इसके अलावा, छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए समय-समय पर चिकित्सा जांच भी कराई जानी चाहिए।

नियमित निरीक्षण की जरूरत

शिक्षा विभाग और प्रशासन को जिले के कोचिंग संस्थानों का नियमित निरीक्षण करना होगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी कोचिंग संस्थान सरकार के दिशा निर्देशों का पालन कर रहे हैं। इसके लिए एक विशेष निरीक्षण दल का गठन किया जाना चाहिए, जो समय-समय पर कोचिंग संस्थानों की जांच करे और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करे।

सिवनी में मिडास क्लासेज और अन्य कोचिंग संस्थानों द्वारा सरकार के नियमों की अनदेखी हो रही है। यह अनदेखी छात्रों की सुरक्षा और मानसिक भलाई के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। सरकार और शिक्षा विभाग को जल्द से जल्द इस मामले पर संज्ञान लेना चाहिए और कोचिंग संस्थानों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे।

सिवनी: सामुदायिक स्वच्छता परिसर बना शोपीस, शासन द्वारा उपलब्ध राशि का दुरुपयोग

SEONI NEWS: सिवनी जिले में सार्वजनिक स्वच्छता का सवाल गंभीर होता जा रहा है, खासकर ग्राम धारना कला के बस स्टैंड के पास स्थित स्वच्छता परिसर, जो अब शोपीस बनकर रह गया है। इस स्वच्छता परिसर का निर्माण जनपद सभा सिवनी की भूमि पर किया गया था, लेकिन इसका उपयोग आज तक नहीं हो पाया है। यह एक स्पष्ट उदाहरण है कि शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई राशि का किस प्रकार दुरुपयोग हो रहा है।

स्वच्छता परिसर का निर्माण और उसका दुर्दशा

धारना कला में स्थित स्वच्छता परिसर का निर्माण यात्री और स्थानीय निवासियों की सुविधा के लिए किया गया था। इसे सिवनी-बालाघाट रोड पर जनपद सभा सिवनी के नाम पर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज भूमि पर बनाया गया था। परिसर का उद्देश्य क्षेत्र की स्वच्छता बनाए रखना और यात्रियों को बेहतर सुविधा प्रदान करना था, लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इसका उद्घाटन नहीं हो पाया है। इसके चारों ओर गंदगी का साम्राज्य फैल चुका है, जो परिसर के निर्माण की विफलता और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता को दर्शाता है।

जनपद पंचायत और ग्रामीण यांत्रिकी विभाग की दोहरी भूमिका

इस परियोजना की असफलता के पीछे जनपद पंचायत और ग्रामीण यांत्रिकी विभाग की दोहरी भूमिका भी प्रमुख कारण है। जनपद सभा सिवनी की भूमि पर बिना अनुमति के स्वच्छता परिसर और पानी की टंकी का निर्माण कर दिया गया था। इस पर करोड़ों रुपए का काम हो चुका है, लेकिन जब वर्तमान सरपंच ने सीमेंट-कांक्रीट रोड के निर्माण के लिए आवेदन भेजा, तो जनपद सभा से अनुमति पत्र लाने की शर्त रखी गई। यह स्थिति विडंबनापूर्ण है क्योंकि पूर्व सरपंच द्वारा लगभग आठ लाख रुपये की लागत से स्वच्छता परिसर का निर्माण कराया गया था, तब ग्रामीण यांत्रिकी विभाग को अनुमति की आवश्यकता क्यों नहीं पड़ी?

स्वच्छता के नाम पर फैल रही गंदगी

स्वच्छता परिसर के निर्माण के बावजूद, इसके आस-पास गंदगी का साम्राज्य फैला हुआ है। जहां एक ओर शासन द्वारा लाखों रुपये खर्च कर स्वच्छता परिसर का निर्माण किया गया, वहीं दूसरी ओर परिसर के आसपास स्वच्छता का नामोनिशान तक नहीं है। यह परिसर अब गंदगी का अड्डा बन गया है और स्वच्छता के उद्देश्यों की पूर्ति में पूरी तरह विफल हो चुका है।

यह स्पष्ट है कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य सिर्फ निर्माण करना नहीं, बल्कि उनकी सही तरीके से शुरुआत करना और उनके रखरखाव पर ध्यान देना भी आवश्यक है। लेकिन इस मामले में स्वच्छता परिसर का निर्माण सिर्फ शोपीस बनकर रह गया है, जिसका उद्घाटन तक नहीं हो पाया है। यह सरकार की योजनाओं की असफलता और धन के दुरुपयोग का एक गंभीर उदाहरण है।

सरकारी राशि का दुरुपयोग

धारनाकला के इस स्वच्छता परिसर का निर्माण सरकारी फंड से किया गया था, लेकिन इसका सही उपयोग अब तक नहीं हो पाया है। इस परिसर को शुरू करने के लिए न तो कोई ठोस कदम उठाए गए और न ही इसकी देखरेख पर ध्यान दिया गया। परिसर के चारों ओर फैली गंदगी इस बात का प्रमाण है कि सरकारी योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन न होने के कारण जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।

समाज के प्रति उत्तरदायित्व

यह स्थिति न केवल प्रशासन की लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि समाज के प्रति उनकी असंवेदनशीलता को भी उजागर करती है। स्वच्छता परिसर का उद्देश्य क्षेत्र की जनता और यात्रियों को स्वच्छ और स्वास्थ्यप्रद वातावरण प्रदान करना था, लेकिन यह उद्देश्य विफल हो चुका है। अगर समय पर इस परिसर का उद्घाटन और रखरखाव किया जाता, तो यह शोपीस बनने के बजाय जनता के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन होता।

समाधान के उपाय

  1. प्रशासनिक हस्तक्षेप : इस मामले में प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए और इस स्वच्छता परिसर का उपयोग शुरू करना चाहिए ताकि जनता को इसका लाभ मिल सके।
  2. जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी : जनप्रतिनिधियों को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी परियोजनाएं सफलतापूर्वक संचालित हों।
  3. सामुदायिक सहभागिता : इस परिसर की देखभाल के लिए स्थानीय समुदाय को भी जिम्मेदार बनाना चाहिए, ताकि स्वच्छता बनाए रखने में उनकी भी भागीदारी हो।

धारना कला का स्वच्छता परिसर एक उदाहरण है कि किस प्रकार शासन की राशि का दुरुपयोग हो रहा है और जनहित की योजनाएं केवल शोपीस बनकर रह जाती हैं। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही के कारण यह परियोजना असफल हो चुकी है। अब समय आ गया है कि इस पर ध्यान दिया जाए और इसे शुरू किया जाए, ताकि जनता को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।

सिवनी: विश्व हिंदू परिषद के साथ मातृशक्तियों ने दशहरा पर किया शस्त्र पूजन

Seoni News: 🏹 विजयादशमी पर्व की बधाईयाँ 🏹असत्य पर सत्य की, बुराई पर अच्छाई की, अंधेरे पर प्रकाश की, असुरी शक्तियों पर सुरों (देवताओं और भगवन) और मातृशक्ति के सम्मान के प्रतीक विजयादशमी के पावन पर्व के अवसर पर विहिप द्वारा संचालित तक्ष एकेडमी मे इस पावन पर्व को बड़े उल्लास से मनाया गया.

कार्यक्रम का शुभारंभ श्री राम प्रभु जी के के चित्र के संमुख दीप प्रज्ज्वलित कर की गई, शक्ति के प्रतीक माता जी की आरती तत्पश्चात उपस्थित मातृशक्ति द्वारा शस्त्रों का पूजन किया गया.

सुश्री संध्या बहनजी ने शास्त्रों के ज्ञान के महत्व के साथ ही विपरीत परिस्तिथियों मे परिवार, समाज, धर्म और देश की रक्षा के लिये शस्त्रों के ज्ञान और आवश्यकता पड़ने पर उपयोग का महत्व बताया

मातृशक्ति से सुश्री संध्या जैन जी, श्रीमति सरिता ओझा जी (अध्यक्ष – महिला पतांजलि योग समिति) , श्रीमति ऊषा बहन जी,चित्रा बहन जी, अनुराधा जी,किरण सक्सेना जी, राधा साहू जी, वंदना गुप्ता जी,वीणा राठौर जी,माया जी, तरुणलता बहन जी, शोभा बहन जी, इंदिरा गुप्ता जी, सीमा बहन जी,श्रीमति माधवी जी,रिचा अग्रवाल जी, सरस्वती बघेल जी,विहिप से श्रीमति राखी ठाकुर जी, श्रीमति खुशबू कटरे जी ,श्री मायाराम जी भाई साहब,तरश्वी उपाध्याय जी, तरुण जैन जी,अंकित मालू जी,देवेंद्र सेन जी, माधव दुबे जी,जितेंद्र बघेल जी, सर्वेश कश्यप जी, तरुण पटेल जी, राजकुमार कश्यप जी, दीपांशु सनोडिया जी,हरिओम जी, मर्सकोले जी ,श्याम अग्रवाल जी, सुभाष बघेल जी की उपस्तिथि रही।

सुश्री संध्या जैन बहन जी (वरिष्ठ संरक्षिका महिला पतंजलि – वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष – विहिप जिला सिवनी) द्वारा कार्यक्रम का आयोजन ,सानंद समापन, स्वल्पाहार कराकर किया गया।

सिवनी: भीमगढ़ बांध के खुले गेट, 10,000 घन फीट प्रति सेकंड से छोड़ा जा रहा पानी; प्रतिमा विसर्जन में बरतें सावधानी!

Seoni News: संजय सरोवर जलाशय, जिसे भीमगढ़ बांध के नाम से भी जाना जाता है, मध्य प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण जलाशयों में से एक है। इस जलाशय का मुख्य उद्देश्य सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और बिजली उत्पादन है। वर्तमान में तिलवारा बायीं तट नहर जल संसाधन विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जलाशय के जल संग्रहण क्षेत्र में भारी वर्षा के चलते जल स्तर में वृद्धि दर्ज की गई है। जल स्तर नियंत्रण और जल निकासी की प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए कुछ आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे निचले क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।

भीमगढ़ बांध की विशेषताएं और इसके महत्व

भीमगढ़ बांध, जिसे संजय सरोवर जलाशय के नाम से जाना जाता है, मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में स्थित है। इस बांध की निर्माण क्षमता 500 मिलियन क्यूबिक मीटर से अधिक है, जो इसे राज्य के सबसे बड़े जलाशयों में से एक बनाती है। भीमगढ़ बांध न केवल सिंचाई के लिए बल्कि जल विद्युत उत्पादन और पेयजल आपूर्ति के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, इस बांध का उपयोग बाढ़ नियंत्रण और निचले क्षेत्रों में जल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भी किया जाता है।

वर्तमान स्थिति: जल स्तर और जल निकासी की आवश्यकता

12 अक्टूबर 2024 को प्रातः 10:30 बजे से तिलवारा बांध के जल द्वार खोले जाने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय भीमगढ़ जलाशय के जल स्तर को स्थिर बनाए रखने के लिए लिया गया है। हाल की बारिश के कारण बांध में जल की आवक में काफी बढ़ोत्तरी हुई है, जिसके चलते जल द्वार (Gate) खोलकर 10,000 घन फीट प्रति सेकंड (283 क्यूमेक्स) जल की निकासी की जा रही है। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी जब तक जल स्तर नियंत्रित नहीं हो जाता।

जल निकासी का प्रभाव और सुरक्षा उपाय

भीमगढ़ जलाशय से जल निकासी के दौरान निचले इलाके के निवासियों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। जल द्वार खुलने के बाद जल स्तर में अचानक वृद्धि हो सकती है, जिससे नदियों में जल बहाव तेज हो सकता है। ऐसे में लोगों से निवेदन किया गया है कि वे नदियों और जल निकासी वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें। यह कदम स्थानीय प्रशासन और जल संसाधन विभाग द्वारा नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

बांध के निचले इलाके के नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश

  • नदी किनारे न जाएं: जल द्वार खुलने के बाद नदियों में जल प्रवाह की तीव्रता में बढ़ोत्तरी होगी, जिससे खतरे की संभावना बनी रहती है।
  • सतर्कता बनाए रखें: जल निकासी के दौरान प्रशासन द्वारा जारी की गई चेतावनियों और निर्देशों का पालन करें।
  • अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें: किसी भी अनावश्यक गतिविधि से बचें जो आपकी सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है।

भीमगढ़ बांध: जल निकासी की प्रक्रिया और तकनीकी जानकारी

भीमगढ़ बांध से जल निकासी की प्रक्रिया पूरी तरह से स्वचालित प्रणाली के तहत होती है। बांध में लगे जल द्वारों को नियंत्रित करने के लिए उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाता है, जिससे जल स्तर को नियंत्रित किया जा सके। जल संसाधन विभाग द्वारा प्रदान की गई जानकारी के अनुसार, जल द्वार खुलने के बाद प्रति सेकंड 10,000 घन फीट जल की निकासी की जा रही है, जो कि जलाशय के क्षमता और निचले क्षेत्रों में जल प्रवाह की स्थिति को ध्यान में रखते हुए तय की गई है।

जल निकासी की प्रक्रिया का महत्व

  • सिंचाई: जल निकासी से तटीय क्षेत्रों में सिंचाई के लिए जल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है।
  • पेयजल आपूर्ति: जलाशय से निकाला गया जल विभिन्न क्षेत्रों में पेयजल के रूप में भी वितरित किया जाता है।
  • बाढ़ नियंत्रण: जल स्तर को नियंत्रित करने और बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए जल निकासी आवश्यक होती है।

जल संसाधन विभाग की तैयारी और सुरक्षा प्रबंध

जल संसाधन विभाग ने बांध के आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। बांध के निचले इलाके में बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए विभिन्न कदम उठाए गए हैं। स्थानीय प्रशासन द्वारा बाढ़ से प्रभावित हो सकने वाले क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की गई है। साथ ही, जल संसाधन विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम उठाने के लिए तैयार है।

बाढ़ प्रबंधन और आपदा प्रबंधन टीम की भूमिका

जल निकासी के दौरान आपदा प्रबंधन की टीम पूरी तरह से सक्रिय है। किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम को तैनात किया गया है। नागरिकों से अपील की जा रही है कि वे प्रशासन द्वारा जारी किए गए निर्देशों का सख्ती से पालन करें और किसी भी अफवाह या गलत जानकारी से बचें।

संजय सरोवर जलाशय (भीमगढ़ बांध) से जल निकासी की प्रक्रिया एक नियमित और आवश्यक कदम है, जो न केवल जल स्तर को नियंत्रित करने के लिए बल्कि निचले क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक है। जल संसाधन विभाग द्वारा दिए गए निर्देशों और सुरक्षा उपायों का पालन करना सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य है। यह कदम न केवल आपकी सुरक्षा के लिए बल्कि पर्यावरण और जल संसाधन के प्रबंधन के लिए भी आवश्यक है।

सिवनी: पूजा के समय आसमानी बिजली गिरी, 16 वर्षीय बेटी की मौत, मां गंभीर रूप से झुलसी

सिवनी। सिवनी जिले के बंडोल थाना क्षेत्र के अंतर्गत अलोनिया गांव में शुक्रवार दोपहर एक दर्दनाक घटना घटी, जब अवस्थी परिवार के सदस्य पूजा करने के लिए खेत में स्थित मातादाई मंदिर गए हुए थे। यह घटना उस समय हुई जब मौसम अचानक बदल गया और आसमान में काले बादल छा गए। इसके बाद हल्की बारिश और गरज-चमक के साथ तेज बिजली कड़कने लगी। इस दौरान आसमानी बिजली गिरने से माँ-बेटी गंभीर रूप से झुलस गए, जिसमें 16 वर्षीय पुत्री गायत्री अवस्थी की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उसकी माँ माया अवस्थी गंभीर रूप से घायल हो गईं।

माँ-बेटी पर गिरा आसमानी कहर

मौसम के बदलाव के कारण अचानक बिजली गिरने की इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया। अवस्थी परिवार के लोग उस समय अपने खेत में स्थित मातादाई मंदिर में पूजा करने गए थे, लेकिन प्रकृति ने उनके साथ क्रूर मजाक किया। गायत्री अवस्थी, जो केवल 16 साल की थी, इस घटना में अपनी जान गंवा बैठी, जबकि उसकी माँ माया अवस्थी अभी भी गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं।

घटना के बाद अस्पताल में मची अफरातफरी

घटना के तुरंत बाद, आस-पास के लोगों ने गायत्री और उसकी माँ माया को गंभीर हालत में जिला अस्पताल सिवनी पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने गायत्री अवस्थी को मृत घोषित कर दिया, जिससे पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। माया अवस्थी की हालत गंभीर है और उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें गंभीर झुलसने की वजह से खास देखभाल की जरूरत है।

गांव में छाया मातम का माहौल

इस प्रकार की अप्रत्याशित घटनाएं न केवल प्रभावित परिवार बल्कि पूरे समाज पर गहरा प्रभाव छोड़ती हैं। अलोनिया गांव में इस घटना के बाद से मातम का माहौल है। अवस्थी परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है। पूरे गांव के लोग शोकग्रस्त हैं और किसी के लिए भी इस दर्दनाक हादसे को भुला पाना मुश्किल हो रहा है। सभी गांववासी इस दुख की घड़ी में अवस्थी परिवार के साथ खड़े हैं और उनकी मदद कर रहे हैं।

प्रकृति की क्रूरता या संयोग?

ऐसी घटनाएं बार-बार यह सवाल उठाती हैं कि क्या यह महज संयोग है, या फिर प्रकृति की क्रूरता? मौसम विभाग समय-समय पर लोगों को बिजली गिरने की घटनाओं से बचने के उपाय बताता है, लेकिन फिर भी हर साल ऐसी घटनाओं में कई लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं। यह घटना भी हमें याद दिलाती है कि हमें मौसम के पूर्वानुमानों पर विशेष ध्यान देना चाहिए और बिजली के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचना चाहिए।

पुलिस द्वारा पंचनामा और पोस्टमार्टम की कार्रवाई

घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। शनिवार को गायत्री अवस्थी का पुलिस ने पंचनामा कर पोस्टमार्टम करवाया और शव को परिजनों को सौंप दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से घटना के कारणों की पूरी जानकारी सामने आएगी, लेकिन प्रारंभिक रूप से यह माना जा रहा है कि आसमानी बिजली गिरने से ही उनकी मौत हुई है।

बिजली गिरने से बचाव के उपाय

इस प्रकार की घटनाओं से बचने के लिए कुछ सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है। जब भी मौसम में परिवर्तन हो और बिजली चमकने लगे, तो लोगों को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • खुले मैदान या खेतों में जाने से बचें।
  • ऊँची जगहों से दूर रहें, क्योंकि बिजली अक्सर ऊँचाई वाली जगहों पर गिरती है।
  • पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें।
  • किसी धातु या विद्युत उपकरण के संपर्क में न आएं।
  • घर के अंदर रहें और खिड़कियों से दूर रहें।

समाज के लिए संदेश

इस घटना ने सभी को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि हमें आपदा के समय कैसे सतर्क रहना चाहिए। यह आवश्यक है कि हम सभी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सुरक्षित रहने के उपायों को अपनाएं। ऐसी घटनाओं से न केवल प्रभावित परिवार बल्कि समाज भी सीख सकता है, और लोगों को इसके प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी हम सबकी है।

अलोनिया गांव में घटी इस दुखद घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। गायत्री अवस्थी की मौत ने सभी को हिला दिया है, जबकि माया अवस्थी अभी भी जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही हैं। यह घटना एक दुखद अनुस्मारक है कि प्राकृतिक आपदाओं से खुद को और अपने परिवार को कैसे सुरक्षित रखना है। इस कठिन समय में हम सभी को अवस्थी परिवार के प्रति संवेदनाएं प्रकट करनी चाहिए और इस प्रकार की घटनाओं से बचने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।

MP के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अमिताभ बच्चन को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन को उनके जन्मदिन पर हार्दिक बधाई दी है। मुख्यमंत्री यादव ने अमिताभ बच्चन के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया, साथ ही बाबा श्रीमहाकाल से उनकी दीर्घायु, स्वस्थ और मंगलमय जीवन की कामना भी की है।

अमिताभ बच्चन के अद्वितीय योगदान पर मुख्यमंत्री की प्रशंसा

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि अमिताभ बच्चन ने भारतीय सिनेमा में जो योगदान दिया है, वह अतुलनीय है। उनका करियर, जो पांच दशकों से भी अधिक समय से चल रहा है, कई पीढ़ियों के लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि अमिताभ बच्चन न केवल अपनी अद्भुत अभिनय क्षमता के लिए प्रसिद्ध हैं, बल्कि उनकी समाजसेवा और व्यक्तित्व भी उनके चाहने वालों के बीच अत्यधिक सराहे जाते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, “अमिताभ जी ने सिनेमा के माध्यम से समाज में जो संदेश दिया है, वह अनुकरणीय है। उनकी फिल्में सामाजिक मुद्दों को जागरूक करने के साथ-साथ मनोरंजन का उत्कृष्ट स्रोत रही हैं।”

दादा साहेब फाल्के और पद्म विभूषण से सम्मानित अभिनेता

अमिताभ बच्चन को भारत सरकार ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया है। उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार और पद्म विभूषण जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया है। ये पुरस्कार अमिताभ बच्चन के भारतीय सिनेमा के प्रति योगदान को मान्यता देते हैं, और वे भारतीय फिल्म जगत के सबसे महान सितारों में से एक माने जाते हैं।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि “दादा साहेब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान में से एक है, और अमिताभ जी को यह सम्मान मिलना उनके अद्वितीय करियर और सिनेमा जगत में किए गए योगदान का साक्षी है।”

मुख्यमंत्री की बाबा श्रीमहाकाल से प्रार्थना

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अमिताभ बच्चन के लिए बाबा श्रीमहाकाल से उनके स्वस्थ, दीर्घायु और मंगलमय जीवन की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि “बाबा महाकाल की कृपा से अमिताभ जी का जीवन सदैव स्वस्थ, सुदीर्घ और सफल बना रहे।” मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में मुख्यमंत्री यादव द्वारा की गई यह प्रार्थना अमिताभ बच्चन के प्रति उनके सम्मान और प्रशंसा का प्रतीक है।

अमिताभ बच्चन का सामाजिक योगदान

अमिताभ बच्चन ने अपने करियर में न केवल फिल्मों के माध्यम से बल्कि समाजसेवा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने पल्स पोलियो अभियान और अन्य स्वास्थ्य संबंधित अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लिया है। इसके अलावा, वे कई चैरिटेबल और सामाजिक संगठनों के भी साथ जुड़े हुए हैं, जो उनकी समाज के प्रति जिम्मेदारी और समर्पण को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अमिताभ बच्चन के इन सामाजिक कार्यों की भी सराहना की और कहा कि “अमिताभ जी ने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए जो काम किया है, वह हर व्यक्ति के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके सामाजिक योगदान ने लाखों लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में मदद की है।”

मुख्यमंत्री की विशेष बधाई

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संदेश में कहा कि “अमिताभ जी के जन्मदिन पर मैं उन्हें ढेर सारी शुभकामनाएं देता हूं और उनकी दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं। वे सदैव हमारे दिलों में बसे रहेंगे और उनके द्वारा किए गए कार्यों का प्रकाश सदैव हमें मार्गदर्शन करता रहेगा।”

मुख्यमंत्री ने अमिताभ बच्चन के प्रति अपनी शुभकामनाओं के साथ एक संदेश भी भेजा, जिसमें उन्होंने कहा कि “अमिताभ जी के लिए हमारा स्नेह और सम्मान सदैव अटूट रहेगा। उनके अद्वितीय करियर और समाज सेवा के कार्यों ने उन्हें सच्चा महानायक बनाया है।”

अमिताभ बच्चन का जन्मदिन: एक विशेष अवसर

अमिताभ बच्चन का जन्मदिन उनके लाखों प्रशंसकों के लिए एक विशेष अवसर होता है। इस दिन पर, देशभर में उनके चाहने वाले उन्हें शुभकामनाएं और बधाइयां भेजते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी उनके जन्मदिन की धूम मचती है, और हर कोई उनके प्रति अपने प्यार और सम्मान को व्यक्त करता है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव के संदेश ने इस अवसर को और भी खास बना दिया है, क्योंकि यह न केवल एक अभिनेता के प्रति, बल्कि एक समाजसेवी और प्रेरक व्यक्ति के प्रति भी आदर का प्रतीक है।

सिवनी में दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण प्रदान करने के लिए जनपदवार मूल्यांकन शिविर 14 अक्टूबर से

Seoni News: उपसंचालक सामाजिक न्याय से प्राप्त जानकारी अनुसार भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण जबलपुर के माध्यम से एडिप योजना अंतर्गत जिले के सभी जनपदों एवं नगरीय निकायों में दिव्यांगजनों को शिविर आयोजित कर सहायक उपकरण, कैलीपर्स एवं कृत्रिम अंग प्रदाय हेतु मूल्यांकन, परीक्षण शिविरों का आयोजन किया जाना है।

जारी कार्यक्रमानुसार 14 अक्टूबर को जनपद पंचायत घंसौर में जनपद घंसौर एवं धनौरा के लिए शिविर का आयोजन किया जाएगा। इसी तरह 15 अक्टूबर को जनपद पंचायत बरघाट में, 16 अक्टूबर को जनपद पंचायत लखनादौन में छपारा एवं लखनादौन के लिए शिविर आयोजित होगा। इसी तरह 17 अक्टूबर को जनपद पंचायत कुरई में, 18 अक्टूबर को जनपद पंचायत केवलारी में तथा 19 अक्टूबर को जनपद पंचायत सिवनी में शिविर का आयोजन किया जाएगा।

आयोजित शिविर में एडिप योजना का लाभ लेने हेतु दिव्यांगजनों को दिव्यांग प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र जिसमें उनकी आय 22 हजार 500 मासिक आय या इससे कम मासिक आय प्रमाणित हो अथवा बीपीएल राशन कार्ड,मूल निवास प्रमाण पत्र, समग्र आईडी एवं आधार कार्ड, 06 पासपोर्ट फोटो दिव्यांगता दर्शाते हुए साथ लाना अनिवार्य होगा। कलेक्टर संस्कृति जैन द्वारा संबंधित अधिकारियों को परीक्षण शिविर के व्यवस्थित आयोजन को लेकर सभी जरूरी व्यवस्थाऐं सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया गया है

सिवनी: बरघाट के धारनाकला में गौ माता की अद्भुत झांकी: आंसुओं में बही श्रद्धा, गौ हत्या पर उठी आवाज़

सिवनी, बरघाट, धारनाकला: धारनाकला बस स्टैंड में आयोजित दुर्गा उत्सव में गौ माता की विशेष पूजन के अवसर पर प्रस्तुत झांकी ने जनमानस के हृदय को छू लिया। सैकड़ों महिलाओं और पुरुषों की आँखों में आंसू थे, और पूरे प्रांगण में “गौ माता की जय” के नारों से गूंज उठी। नवरात्रि पर्व के इस विशेष अवसर पर विभिन्न झांकियों और कार्यक्रमों के बीच, गौ माता की पूजा का यह दृश्य विशेष रूप से दिल को छू लेने वाला था।

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सिवनी: बरघाट के धारनाकला में गौ माता की अद्भुत झांकी: आंसुओं में बही श्रद्धा, गौ हत्या पर उठी आवाज़

धारनाकला बस स्टैंड पर विशेष झांकी: गौ माता की महिमा

भारत में हिन्दू धर्म में गौ माता को एक विशेष स्थान दिया गया है। गाय को “गौ माता” इसलिए कहा जाता है क्योंकि वह हमें अपना दूध देकर पोषण करती है और हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा मानी जाती है। शास्त्रों में कहा गया है कि गौ माता के शरीर में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास है, और उसकी सेवा और पूजा से उन सभी देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।

धारनाकला में दुर्गा उत्सव के दौरान प्रस्तुत की गई झांकी का मुख्य संदेश यही था – गौ माता का संरक्षण और सम्मान। प्रत्येक वर्ष यहाँ इस विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है, और यह परंपरा जनमानस को जागरूक करने का एक महत्वपूर्ण साधन बन गई है।

गोकशी पर विराम का संदेश

इस वर्ष की झांकी में समिति ने गौ माता पर हो रहे अत्याचारों पर फोकस किया। झांकी ने दर्शाया कि जिस गौ माता को हम पूजनीय मानते हैं, वही गाय आज लोभ और लालच के कारण कसाईखानों में बेची जा रही है। यह झांकी एक स्पष्ट संदेश दे रही थी कि गौ हत्या न केवल हमारी धार्मिक आस्थाओं पर हमला है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर पर भी प्रहार है।

समिति के इस प्रयास ने लोगों का ध्यान इस ज्वलंत समस्या की ओर आकर्षित किया। यह झांकी दर्शकों के लिए एक आत्मनिरीक्षण का विषय बन गई, जिससे लोग भावुक हो गए और उनकी आँखों से आंसू झलक पड़े। यह दृश्य केवल एक कहानी नहीं, बल्कि गौमाता की वास्तविक स्थिति की एक झलक थी।

गौ माता के संरक्षण के लिए ठोस कदम जरूरी

दुर्गा उत्सव समिति के वरिष्ठ सदस्य कमल किशोर बघेल ने इस मौके पर कहा कि गौ माता की सुरक्षा एक राष्ट्रीय चेतावनी का संकेत है। आज के समय में गौ हत्या हमारी नैतिकता और एकता को तोड़ने का कार्य कर रही है। हमारे संविधान में भी राज्यों को यह निर्देश दिया गया है कि गौ हत्या पर रोक लगाई जाए, लेकिन इसके बावजूद इस पर सख्ती से अमल नहीं किया जा रहा है।

कमल बघेल ने इस मुद्दे पर जोर देते हुए कहा कि गौ माता का महत्व हमारे लिए सर्वोपरि है। उनके अनुसार, गौ माता की पूजा का महत्व किसी भी देवी-देवता या तीर्थ से कम नहीं है। समिति ने झांकी के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया कि जब तक गौ माता का संरक्षण नहीं किया जाता, तब तक हमारी संस्कृति और आस्थाएं सुरक्षित नहीं रह सकतीं।

गौमाता की पूजा का महत्व और हमारी जिम्मेदारी

गौ माता की पूजा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का भी अभिन्न हिस्सा है। आज के आधुनिक युग में, जब समाज पशुधन और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों से दूर होता जा रहा है, ऐसे में गौ माता का संरक्षण और उनकी सेवा अत्यधिक आवश्यक हो गया है।

धारनाकला की झांकी ने इस मुद्दे को व्यापक रूप से उठाया। झांकी के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया गया कि किस प्रकार लोभ, लालच और व्यक्तिगत स्वार्थों के कारण गौ हत्या जैसे अमानवीय कृत्य हो रहे हैं। समिति ने इस अवसर का उपयोग जनमानस को जागरूक करने के लिए किया, ताकि लोग गौ माता के महत्व को समझें और उनके संरक्षण के लिए आगे आएं।

समाज और सरकार की भूमिका

गौमाता की सुरक्षा और संरक्षण के लिए सिर्फ धार्मिक संगठनों या व्यक्तिगत प्रयासों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। सरकार और समाज को भी इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है। संविधान में उल्लेखित निर्देशों के अनुसार, राज्य सरकारों को गौ वध पर रोक लगाने के लिए कठोर कानून लागू करने चाहिए।

साथ ही, सामाजिक जागरूकता और शिक्षा के माध्यम से लोगों को यह समझाने की जरूरत है कि गौ माता का संरक्षण केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।

गौमाता के बिना कुछ भी नहीं

समिति के सदस्य कमल बघेल ने अपने भाषण में कहा कि यदि हम गौ माता का सम्मान और सुरक्षा नहीं करेंगे, तो हमारी आस्थाएं और सांस्कृतिक धरोहर भी खतरे में पड़ जाएंगी। गौ माता की पूजा और सेवा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं हैं, बल्कि यह हमारे अस्तित्व का आधार हैं।

गौ माता का संरक्षण हमारी संस्कृति, परंपराओं और भविष्य की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। इसके बिना हमारा समाज और राष्ट्र एकता और प्रगति के मार्ग पर आगे नहीं बढ़ सकता।

6 अक्टूबर को होने वाले India Vs Bangladesh टी-20 मैच के लिए टीम इंडिया तैयार

ग्वालियर (मध्य प्रदेश): ग्वालियर शहर में उत्साह का माहौल है क्योंकि श्रीमंत माधवराव सिंधिया स्टेडियम इस रविवार को अपना पहला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच आयोजित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह आयोजन ग्वालियर के खेल परिदृश्य में एक बड़ा मोड़ है, जो 14 वर्षों से अपने लौटने का इंतजार कर रहे शहर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के रोमांच को वापस लाएगा।

मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एमपीसीए) ने एक छोटे से मैदान में अंतरराष्ट्रीय मैच आयोजित करने की चुनौतियों का सामना किया है, जिससे यह सुनिश्चित हुआ है कि सफल आयोजन के लिए सभी चीजें सही जगह पर हैं। लॉजिस्टिक संबंधी बाधाएँ मामूली नहीं रही हैं; हाल ही में भारी बारिश के कारण पिछले महीने स्टेडियम की एक दीवार ढह गई थी, जिससे आयोजकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा। फिर भी, तेजी से और प्रभावी मरम्मत की गई है, जिससे यह पुष्टि होती है कि अब यह मैदान खेलने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

ऐतिहासिक रूप से, ग्वालियर ने आखिरी बार 2010 में कैप्टन रूप सिंह स्टेडियम में एक अंतरराष्ट्रीय मैच की मेजबानी की थी। वह खेल क्रिकेट प्रशंसकों की यादों में बसा हुआ है, खासकर महान सचिन तेंदुलकर द्वारा बनाए गए शानदार दोहरे शतक के लिए, जिसने इस क्षेत्र में खेल के प्रति प्रेम को और बढ़ा दिया। यह आगामी मैच न केवल उस उत्साह को फिर से जगाता है बल्कि प्रशंसकों की एक नई पीढ़ी को लाइव अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के रोमांच से भी परिचित कराता है।

स्थानीय अधिकारियों और क्रिकेट प्रेमियों ने इस महत्वपूर्ण अवसर के लिए अपना उत्साह व्यक्त किया है। अंतर्राष्ट्रीय मैचों की वापसी से समुदाय में उत्साह की भावना पैदा होने की उम्मीद है, जिससे ग्वालियर और आसपास के इलाकों से क्रिकेट प्रशंसक इस ऐतिहासिक घटना को देखने के लिए आकर्षित होंगे। हवा में उत्साह साफ झलक रहा है, इस मैच के लिए उम्मीदें बहुत अधिक हैं, जो न केवल शीर्ष स्तरीय क्रिकेट का प्रदर्शन करेगा बल्कि ग्वालियर की अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में वापसी की तत्परता को भी उजागर करेगा।

जैसे-जैसे मैच की उल्टी गिनती जारी है, स्थानीय व्यवसाय आगंतुकों की अनुमानित आमद से लाभ उठाने के लिए तत्पर हो रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि यह आयोजन स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी महत्वपूर्ण बढ़ावा दे सकता है।

क्रिकेट की वापसी के साथ, ग्वालियर खेलों के एक जीवंत केंद्र के रूप में अपनी प्रतिष्ठा पुनः प्राप्त करने के लिए तैयार है, और सामुदायिक नेताओं को आशा है कि यह एक वार्षिक उत्सव बन जाएगा, जिससे शहर की संस्कृति में क्रिकेट के प्रति प्रेम और अधिक बढ़ जाएगा।