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तहसीलदार और थाना प्रभारी ने हटवाई फटाखा दुकानें — बदला फटाखा बाजार का स्थान

धारनाकला (बरघाट)। दिवाली के मद्देनज़र जहां चारों ओर रौनक देखने को मिल रही है, वहीं धारनाकला गांव में एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। तहसीलदार बरघाट और थाना प्रभारी बरघाट की संयुक्त टीम ने शुक्रवार को ग्राम पंचायत धारनाकला के समीप शासकीय जमीन पर लगी फटाखा दुकानों को तत्काल हटाने की कार्रवाई की। यह कदम सुरक्षा कारणों और संभावित हादसे को रोकने के लिए उठाया गया। बताया जा रहा है कि एक किराना व्यवसायी के हस्तक्षेप और शिकायत के बाद यह कार्यवाही की गई, क्योंकि दुकानें पंचायत भवन के बहुत नजदीक लगाई गई थीं, जिससे आगजनी का खतरा था।

फटाखा दुकानों को किया गया स्थानांतरित, नया बाजार गांव के बाहर

प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर फटाखा दुकानों के पंडाल हटवाए और दुकानदारों को गांव से बाहर शासकीय भूमि पर निर्धारित स्थान पर दुकान लगाने के निर्देश दिए।

गांव में पर्याप्त सरकारी जमीन न होने के कारण, सरपंच ने पहले पंचायत के पास की खाली जगह दुकानदारों को आवंटित की थी। लेकिन सुरक्षा मानकों और नियमों का उल्लंघन देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की।

फटाखा व्यवसायियों ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग

प्रशासन के आदेश का पालन करते हुए फटाखा व्यवसायियों ने तुरंत अपने पंडाल हटाए और नए स्थान पर दुकानें लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि गांव की कुछ किराना दुकानों में बिना लाइसेंस के थोक में फटाखा कारोबार हो रहा है, जबकि वैध लाइसेंसधारी दुकानदारों को एक दिन का सीमित व्यापार करने की अनुमति है।

व्यवसायियों ने मांग की कि बिना लाइसेंस कारोबार करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। इस पर तहसीलदार और थाना प्रभारी ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया।

सख्त नियमों के बीच मुश्किल हुआ फटाखा व्यवसाय

फटाखा कारोबार अब पहले की तरह आसान नहीं रह गया है। शासन की गाइडलाइन के अनुसार, हर फटाखा व्यापारी को ‘स्वघोषणा पत्र’ (Self Declaration Form) भरकर देना होगा, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि वह केवल ‘ग्रीन क्रैकर्स (Green Crackers)’ का ही निर्माण, भंडारण और विक्रय कर रहा है।

यह नियम माननीय उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली द्वारा रिट पिटीशन क्र. 728/2015 पर दिनांक 29 अक्टूबर 2021 को दिए गए आदेश के तहत लागू किया गया है।

इस आदेश के अनुसार, प्रतिबंधित और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक फटाखों के निर्माण, भंडारण और विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।

इसी के चलते प्रशासन ने निर्देश दिया है कि बाजार में बेचे जाने वाले सभी फटाखों के सेम्पल मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, विजय नगर जबलपुर को जांच हेतु भेजे जाएंगे।

जनता ने की प्रशासन के फैसले की सराहना

धारनाकला के ग्रामीणों ने इस कार्रवाई को “साहसिक और समयोचित निर्णय” बताया। उनका कहना है कि दिवाली जैसे पर्व पर सुरक्षा सर्वोपरि है।

गांव के एक बुजुर्ग निवासी ने कहा — “अगर यह कार्रवाई समय पर नहीं होती तो गांव के बीच लगी फटाखा दुकानों से बड़ा हादसा हो सकता था।”

धारनाकला में की गई यह कार्रवाई प्रशासन की सजगता और जनता की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी को दर्शाती है।

जहां एक ओर फटाखा व्यवसायी नए नियमों के चलते मुश्किलें झेल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन का ध्यान सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित है।

अब देखना होगा कि आगामी दिनों में बिना लाइसेंस कारोबार करने वालों पर क्या सख्त कदम उठाए जाते हैं।

सिवनी हवाला मनी लूट मामले में SDOP पूजा पांडे, थाना प्रभारी अर्पित भैरम समेत 5 गिरफ्तार; 11 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज

मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में हवाला मनी लूट कांड ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। इस मामले में अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा कदम उठाया है। सीएम ने साफ कहा है कि “प्रदेश में कानून सबके लिए समान है, और अपराधी चाहे वर्दी में ही क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।”

सीएम के आदेश के बाद सिवनी एसडीओपी पूजा पांडे सहित कुल 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें से 5 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। यह मामला प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है, लेकिन सरकार का यह सख्त एक्शन पुलिस विभाग में जवाबदेही की नई मिसाल बन गया है।

सीएम डॉ. यादव ने दिए सख्त निर्देश — “कर्तव्य से हटकर काम करने वालों के लिए जगह नहीं”

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि,

“राज्य सरकार का पहला दायित्व है नागरिकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना। यदि पुलिस अधिकारी या कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग करते हैं, तो ऐसे लोगों को सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी।”

सीएम ने यह भी कहा कि सिवनी कांड में दोषियों पर न केवल अनुशासनात्मक बल्कि कानूनी कार्रवाई भी होगी। उन्होंने साफ किया कि “प्रदेश में सुशासन स्थापित करने की दिशा में किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

ये पुलिसकर्मी आए जांच के घेरे में — FIR और गिरफ्तारियां

जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि हवाला मनी लूट कांड में शामिल अधिकारी और कर्मचारी स्वयं कानून की रखवाली करने वाले हैं।

FIR में शामिल पुलिसकर्मियों के नाम:

  1. एसडीओपी पूजा पांडे
  2. एसआई अर्पित भैरम
  3. कॉन्सटेबल योगेंद्र
  4. कॉन्सटेबल नीरज
  5. कॉन्सटेबल जगदीश

इन पांचों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

वहीं जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, उनमें शामिल हैं:

  • प्रधान आरक्षक माखन
  • प्रधान आरक्षक राजेश जंघेला
  • आरक्षक रविंद्र उईके
  • आरक्षक चालक रितेश
  • गनमैन केदार
  • गनमैन सदाफल

कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई — अब होगी सख्त जांच

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है —

  • धारा 310(2) – डकैती
  • धारा 126(2) – गलत तरीके से रोकना
  • धारा 140(3) – अपहरण
  • धारा 61(2) – आपराधिक षडयंत्र

इन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, जांच में कुछ और नाम सामने आने की संभावना है।

प्रदेश में सुशासन की मिसाल – सीएम का संदेश साफ

मुख्यमंत्री मोहन यादव की इस कार्रवाई से पूरे प्रदेश के पुलिस महकमे में चेतावनी का संदेश गया है। यह कदम यह दर्शाता है कि सरकार “शून्य सहिष्णुता नीति” पर काम कर रही है
अब सवाल यह है कि क्या इस कार्रवाई से पुलिस विभाग में सुधार आएगा या फिर यह मामला सिर्फ “एक उदाहरण” बनकर रह जाएगा?

जनता की प्रतिक्रिया — “ऐसे कदमों से ही आएगा बदलाव”

सोशल मीडिया पर इस खबर को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं तेज हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि “अब जनता को भरोसा हुआ कि कानून सबके लिए बराबर है।” वहीं कुछ ने कहा कि “वर्दी में अपराध करने वालों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।”

सिवनी हवाला मनी लूट कांड अब केवल एक जिला स्तर का मामला नहीं रहा, बल्कि यह प्रदेश में कानून और ईमानदारी की कसौटी बन गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के इस निर्णायक कदम से यह संदेश स्पष्ट है कि “न्याय से ऊपर कोई नहीं, चाहे वो किसी भी कुर्सी पर क्यों न बैठा हो।”

सिवनी: जबलपुर क्राइम ब्रांच करेगी सिवनी हवाला कांड की जांच, खुलासों ने हिला दिया पूरा महकमा!

सिवनी: मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में सामने आए हवाला कांड ने पूरे पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया है। अब इस मामले की जांच का जिम्मा जबलपुर क्राइम ब्रांच को सौंपा गया है। जांच के दौरान कई नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं, जिससे यह मामला और भी पेचीदा होता जा रहा है।

आईजी प्रमोद वर्मा पहुंचे सिवनी, अधिकारियों से की गहन चर्चा

सोमवार को जबलपुर पुलिस महानिरीक्षक (IG) प्रमोद वर्मा खुद सिवनी पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी अधिकारियों से ली। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे जबलपुर क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर करने का फैसला लिया। अब इस मामले की जांच एएसपी दीपेन्द्र सिंह के नेतृत्व में होगी।

अब तक 11 पुलिसकर्मी सस्पेंड, DSP पूजा पांडे और TI अर्पित भैरम पर भी गाज

8 अक्टूबर 2025 की रात हुई इस घटना ने पुलिस विभाग की नींव हिला दी है। जांच के दौरान डीएसपी पूजा पांडे और बंडोल थाना प्रभारी अर्पित भैरम सहित कुल 11 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है। इसके बावजूद इस कांड के कई रहस्य अब भी परदे में हैं।

2.96 करोड़ में से सिर्फ 1.45 करोड़ जमा, उठे गंभीर सवाल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि कुल 2.96 करोड़ रुपये में से सिर्फ 1.45 करोड़ रुपये ही जमा क्यों हुए? और इतनी बड़ी रकम बरामद होने के बावजूद इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों तक देर से क्यों पहुंची?

लखनवाड़ा थाना पुलिस ने इस हवाला कांड में सोहन परमार, इरफान पठान, और शेख मुख्तियार नामक तीन आरोपियों के खिलाफ संगठित अपराध की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है।

विभाग की छवि पर सवाल, जनता में बढ़ी नाराजगी

सिवनी के इस हवाला कांड के बाद पुलिस विभाग की छवि पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आम जनता में तरह-तरह की चर्चाएं हैं—क्या यह मामला सिर्फ हवाला का है या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश भी छिपी है?

आईजी प्रमोद वर्मा ने मीडिया से कहा कि, “लखनवाड़ा थाना अंतर्गत दर्ज प्रकरण में प्रारंभिक जांच के दौरान कई त्रुटियां मिली हैं। इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच अब जबलपुर क्राइम ब्रांच करेगी।”

⚖️ जांच के बाद खुलेगा असली सच

पूरे मामले की गुत्थी अब जबलपुर क्राइम ब्रांच सुलझाएगी। फिलहाल इस घटना ने मध्यप्रदेश पुलिस प्रशासन को हिला कर रख दिया है। आने वाले दिनों में इस जांच से कई बड़े चेहरों के बेनकाब होने की संभावना भी जताई जा रही है।

सिवनी का यह हवाला कांड अब सिर्फ एक जिले का मामला नहीं रहा, बल्कि यह मध्यप्रदेश पुलिस की साख और पारदर्शिता पर सवालिया निशान बन चुका है। अब सबकी निगाहें जबलपुर क्राइम ब्रांच की जांच पर टिकी हैं कि आखिर असली सच कब और कैसे सामने आता है।

सिवनी पुलिस विभाग में मचा बड़ा हड़कंप! एसपी सुनील मेहता ने रातों-रात बदल डाले कई थानों के प्रभारी, देखें पूरी तबादला सूची!

सिवनी। जिले की कानून व्यवस्था को और अधिक सशक्त एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक सुनील मेहता ने रविवार को पुलिस विभाग में निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों के तबादलों की एक नई सूची जारी की है। इन तबादलों को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है और यह अगले आदेश तक अस्थायी रूप से प्रभावी रहेंगे।

जानिए किसे मिली नई जिम्मेदारी

नए आदेश के अनुसार कई अनुभवी निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों को जिले के विभिन्न थानों में नई जिम्मेदारी दी गई है। यह कदम प्रशासनिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय से कुछ थानों में एक ही अधिकारी पदस्थ थे।

  • निरीक्षक खेमेंद्र जैतवार- पहले थाना प्रभारी छपारा के पद पर तैनात थे, अब उन्हें थाना प्रभारी घंसौर की कमान सौंपी गई है।
  • निरीक्षक प्रीतम सिंह तिलागाम – रक्षित केन्द्र सिवनी से स्थानांतरित होकर अब थाना प्रभारी छपारा के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे।
  • निरीक्षक चैनसिंह उईके – रक्षित केन्द्र सिवनी से ट्रांसफर होकर अब वे थाना प्रभारी लखनवाड़ा के पद पर कार्यभार ग्रहण करेंगे।
  • निरीक्षक लक्ष्मण सिंह झारिया – पहले थाना प्रभारी घंसौर थे, अब उन्हें प्रभारी डीएसबी (जिला विशेष शाखा) सिवनी की जिम्मेदारी दी गई है।
  • उपनिरीक्षक मनोज जंघेला – थाना डूंडासिवनी से स्थानांतरित होकर अब थाना प्रभारी बंडोल नियुक्त किए गए हैं।

👮‍♂️ एसपी सुनील मेहता का बयान

एसपी सुनील मेहता ने कहा कि—

“इन तबादलों का उद्देश्य जिले की पुलिस व्यवस्था को और अधिक गतिशील बनाना है। इससे प्रशासनिक दक्षता में सुधार होगा और आम नागरिकों को बेहतर पुलिस सेवा मिलेगी।”

उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि नए पदस्थ अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा और पारदर्शिता के साथ निभाएंगे।

क्यों महत्वपूर्ण है यह तबादला सूची?

सिवनी जिले में पिछले कुछ समय से कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण को लेकर कई अहम कदम उठाए जा रहे हैं। ऐसे में यह फेरबदल जिला पुलिस की कार्यप्रणाली में नई ऊर्जा भरने वाला साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए थाना प्रभारियों की नियुक्ति से थाना स्तर पर जवाबदेही और जनसंपर्क में सुधार होगा।

स्थानीय राजनीति पर भी पड़ सकता है असर

पुलिस प्रशासन में ऐसे फेरबदल अक्सर स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक संतुलन पर भी असर डालते हैं। कई क्षेत्रों में नए थाना प्रभारी की नियुक्ति को लेकर जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

एसपी सुनील मेहता का यह निर्णय न केवल पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। आने वाले दिनों में इन तबादलों के परिणाम जिले की कानून व्यवस्था में स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे।

सिवनी की एसडीओपी पूजा पांडेय निलंबित: NH-44 पर पकड़ी गई करोड़ों की रकम से जुड़ा मामला!

सिवनी: मध्य प्रदेश के सिवनी ज़िले से एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। पुलिस महानिरीक्षक (IG) जबलपुर ज़ोन से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर सिवनी की अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओपी ) श्रीमती पूजा पांडेय को गंभीर कदाचार और संदिग्ध आचरण के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

🕵️‍♀️ क्या है पूरा मामला?

मामला दिनांक 8 अक्टूबर 2025 की रात का बताया जा रहा है, जब एनएच-44 शीलादेही बायपास सिवनी में पुलिस द्वारा की जा रही चेकिंग के दौरान एक बड़ी रकम बरामद की गई थी। प्रारंभिक जांच में इस राशि को लेकर कई संदेहास्पद परिस्थितियाँ सामने आईं, जिसके बाद पूरा मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचा।

📑 IG जबलपुर ज़ोन की रिपोर्ट पर तत्काल कार्रवाई

पुलिस महानिरीक्षक, जबलपुर ज़ोन द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन में यह स्पष्ट किया गया कि इस पूरे प्रकरण में एसडीएम पूजा पांडेय का आचरण प्रथम दृष्टया गंभीर और संदिग्ध प्रतीत होता है। इसके आधार पर शासन ने उन्हें मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9(1)(क) के अंतर्गत 10 अक्टूबर 2025 से निलंबित कर दिया है।

🏢 भोपाल में रहेगा मुख्यालय

निलंबन के बाद श्रीमती पूजा पांडेय का मुख्यालय पुलिस मुख्यालय, भोपाल निर्धारित किया गया है। आदेश में यह भी उल्लेख है कि निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमों के अनुसार जीवन निर्वहन भत्ता (subsistence allowance) प्राप्त होगा।

⚖️ जांच के बाद तय होगी अगली कार्रवाई

स्रोतों के मुताबिक, इस पूरे मामले की विस्तृत जांच के लिए एक विशेष समिति बनाई जा सकती है। यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं तो कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। वहीं, विभागीय सूत्रों का कहना है कि शासन इस मामले को लेकर बेहद सख्त रुख में है।

📣 सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

पूरे प्रकरण की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर इस घटना की चर्चा तेज हो गई है। कई यूजर्स प्रशासन की कार्रवाई को सही ठहरा रहे हैं, तो कुछ लोग मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

सिवनी: ब्लैकलिस्टेड समितियों को मिला धान खरीदी का जिम्मा, ईमानदार महिला समूहों को किया जा रहा है दरकिनार

सिवनी, मध्यप्रदेश — जिले में इस बार की धान खरीदी नीति पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जहां एक ओर सरकार महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर विभागीय अमले के कुछ अफसर अपने निजी स्वार्थ और कमीशन के खेल में इन समूहों को धान खरीदी से दूर करने की साजिश रच रहे हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ब्लैकलिस्टेड सहकारी समितियां, जिन पर लाखों रुपये की धान और बारदाना शार्टेज वसूली लंबित है, उन्हें न सिर्फ एक, बल्कि दो से तीन खरीदी केंद्रों का आवंटन देने की तैयारी की जा रही गया है। यह वही समितियां हैं, जिनका रिकॉर्ड मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन, सिवनी में स्पष्ट रूप से ब्लैकलिस्ट दर्ज है।

लाखों की वसूली बाकी, फिर भी अफसर मेहरबान!

जिले की अधिकांश समितियों पर धान शार्टेज की लाखों रुपये की राशि वसूली योग्य है। उपार्जन नीति के अनुसार, वसूली की कार्रवाई धान खरीदी प्रभारी से होनी चाहिए, लेकिन विभागीय अमले ने आज तक एक भी प्रभारी से पूर्ण वसूली नहीं की

इसके उलट, जिन समितियों से वसूली होनी थी, उन्हीं को फिर से जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी की जा रही है। इससे यह साफ झलकता है कि विभागीय अधिकारी कमीशन की राजनीति में उलझे हुए हैं और शासन की नीतियों को ठेंगा दिखा रहे हैं

कमीशन और भ्रष्टाचार का खेल

धान खरीदी के दौरान समितियों को मिलने वाला कमीशन, अब शार्टेज राशि में समायोजित कर लिया जाता है। इस वजह से कई समितियां आर्थिक संकट में हैं और कर्मचारियों को वेतन तक के लाले पड़ गए हैं।
विभागीय जांच और नोटिस की प्रक्रिया भी कागजों तक सीमित रह गई है। जिन अफसरों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी थी, वही लाभ उठाने वालों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं

कलेक्टर के आदेश भी ठंडे बस्ते में

कलेक्टर द्वारा कई बार वसूली के आदेश जारी किए गए, लेकिन विभागीय अधिकारी अब तक निष्क्रिय बने हुए हैं। हजारों क्विंटल धान शार्टेज की राशि अब तक नहीं वसूली जा सकी है।

यह स्थिति केवल शासन की छवि को धूमिल नहीं कर रही, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करती है —

क्या वाकई सिवनी जिले में अफसरों से ऊपर कोई जवाबदेही बची है?

महिला समूहों पर सख्ती, समितियों पर नरमी — दोहरा मापदंड क्यों?

महिला स्व-सहायता समूहों को धान खरीदी केंद्र आवंटित करने से पहले उनसे 10 लाख रुपये की एफडीआर और खाते में न्यूनतम 2 लाख रुपये जमा करवाए जाते हैं।
इतना ही नहीं, परिवहन शार्टेज की राशि तक उनसे वसूली जाती है — भले ही उन्होंने पूर्ण वजन वाला धान ट्रक में भरवाया हो और धर्मकांटे की पर्चियां सबूत के रूप में जमा की हों।

इसके बावजूद इन समूहों को धान खरीदी से बाहर करना, जबकि ब्लैकलिस्टेड समितियों को मौका देना, समझ से परे है।

अब सवाल सरकार और कलेक्टर से

  • क्या विभागीय अधिकारी सरकार की नीति को चुनौती दे रहे हैं?
  • क्यों ब्लैकलिस्टेड समितियों पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई?
  • कब तक ईमानदार महिला समूहों को उनके अधिकार से वंचित रखा जाएगा?

सिवनी जिले की यह स्थिति बताती है कि जहां शासन पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करता है, वहीं जमीनी स्तर पर कमीशनखोरी और सियासी संरक्षण ने पूरी व्यवस्था को खोखला कर दिया है।
अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन और राज्य सरकार इस गंभीर मामले में कोई ठोस कदम उठाती है या फिर यह मुद्दा भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

सिवनी पुलिस पर करोड़ों की हवाला राशि में “झोल” करने का आरोप! थाना प्रभारी समेत 9 पुलिसकर्मी सस्पेंड, CM ऑफिस तक पहुँचा मामला

सिवनी: मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे पुलिस महकमे की नींद उड़ा दी है। तीन करोड़ रुपये के हवाला कांड में अब पुलिस खुद कठघरे में है। मामला इतना गंभीर है कि 9 पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया है, वहीं SDOP पूजा पांडेय पर भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है। बताया जा रहा है कि कटनी से जालना जा रही हवाला रकम में से करीब 80 लाख रुपये गायब हैं — और अब सवाल यह है कि यह रकम आखिर गई कहाँ?

मामला शुरू हुआ एक गुप्त सूचना से…

8 और 9 अक्टूबर की दरमियानी रात, बंडोल थाना पुलिस को सूचना मिली कि एक गाड़ी (एमएच13ईके3430) कटनी से महाराष्ट्र के जालना जा रही है जिसमें भारी मात्रा में हवाला रकम ले जाई जा रही है।

पुलिस ने जब गाड़ी को शीलादेही क्षेत्र में रोका तो उसमें 1.45 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए। गाड़ी में जालना निवासी सोहन परमार सहित चार लोग सवार थे, जिन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।

हवाला या वैध लेन-देन?

पुलिस के अनुसार यह रकम हवाला से जुड़ी थी, लेकिन आरोपियों का कहना था कि यह उनके वैध व्यापार की रकम थी। यही से मामला उलझ गया। पहले 2.25 करोड़ रुपये की जब्ती की बात कही गई, पर बाद में पुलिस ने कहा कि रकम सिर्फ 1.45 करोड़ है। यानी लगभग 80 लाख रुपये का अंतर, जो अब पूरे विवाद की जड़ बन गया है।

पुलिस पर ही रकम “खुर्द-बुर्द” करने का आरोप

पुलिस सूत्रों का दावा है कि रकम जब्त करने के बाद कुछ अधिकारियों ने रकम कम दिखाने या हेराफेरी करने की कोशिश की। आरोप है कि आरोपियों से रकम जब्त करने के बाद उन्हें छोड़ भी दिया गया। जब आरोपी अपनी पूरी रकम की जब्ती की रिपोर्ट दर्ज कराने पहुँचे, तब जाकर पूरा मामला उजागर हुआ

सबूत नागपुर कैसे पहुँचे?

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि आरोपियों के मोबाइल फोन, जो पुलिस कस्टडी में थे, नागपुर तक पहुँच गए। अब यह सवाल उठ रहा है कि कस्टडी में रखे सबूत जिले से बाहर कैसे पहुँचे?

मुख्यमंत्री कार्यालय का एक्शन

मामला मीडिया में आने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने खुद हस्तक्षेप किया। जबलपुर IG प्रमोद वर्मा ने तत्काल जांच शुरू की और SDOP सिवनी कार्यालय व बंडोल थाना के 9 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया।

निलंबित पुलिसकर्मियों की सूची

  1. उप निरीक्षक अर्पित भैरम, थाना प्रभारी बण्डोल, सिवनी,
  2. प्रधान आरक्षक 203 माखन, एसडीओपी कार्यालय सिवनी,
  3. प्रधान आरक्षक 447 रविन्द्र उईके, रीडर-एसडीओपी कार्यालय सिवनी,
  4. आरक्षक 803 जगदीश यादव, एसडीओपी कार्यालय सिवनी,
  5. आरक्षक 306 योगेन्द्र चौरसिया, एसडीओपी कार्यालय सिवनी,
  6. आरक्षक चालक 582 रितेश, ड्राइवर एसडीओपी कार्यालय सिवनी,
  7. आरक्षक 750 नीरज राजपूत, थाना बण्डोल, सिवनी,
  8. आरक्षक 610 केदार, गनमैन-एसडीओपी सिवनी, 8वीं वाहिनी विसबल छिन्दवाड़ा,
  9. आरक्षक 85 सदाफल, गनमैन-एसडीओपी सिवनी, 8वीं वाहिनी विसबल छिन्दवाड़ा।

    सिवनी में पुलिस तंत्र पर सवाल

    स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना जिले में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहराई को उजागर करती है।
    पिछले कई वर्षों से जिले में बिना “सेवा शुल्क” के कोई कार्रवाई नहीं होती। शराब, नशा और अवैध कारोबार खुलेआम चल रहे हैं, जबकि पुलिस “मौन दर्शक” बनी रहती है।

    विपक्ष का हमला और जनता की नाराज़गी

    विपक्षी दलों ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर हमला बोला है। उनका कहना है कि पुलिस विभाग में “मिलिभगत की संस्कृति” ने जड़ें जमा ली हैं।
    सोशल मीडिया पर लोग सिवनी पुलिस की ईमानदारी पर तंज कस रहे हैं, वहीं कई सामाजिक संगठन CBI जांच की मांग कर रहे हैं।

    कानूनी विशेषज्ञों की राय

    विशेषज्ञों के अनुसार, अगर यह साबित होता है कि रकम में हेराफेरी की गई है तो यह भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, IPC की धारा 409 (विश्वासघात) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत गंभीर अपराध है।
    ऐसे मामलों में कठोर सजा और विभागीय निष्कासन दोनों संभव हैं।

    जनता का भरोसा और पुलिस की चुनौती

    इस घटना ने जनता का पुलिस पर भरोसा डगमगा दिया है। जहाँ पुलिस को न्याय का प्रतीक माना जाता है, वहीं जब वही पुलिस भ्रष्टाचार में फंसती दिखे, तो जनता का आक्रोश स्वाभाविक है।
    विशेषज्ञों का सुझाव है कि —

    • हर थाने में CCTV निगरानी व्यवस्था अनिवार्य की जाए,
    • लोकायुक्त जांच को प्राथमिकता मिले,
    • और आंतरिक सतर्कता इकाई को मजबूत किया जाए।

    “हवाला” क्या है और क्यों खतरनाक है?

    हवाला एक अवैध वित्तीय तंत्र है जिसमें बिना बैंकिंग माध्यम के पैसा देश-विदेश में भेजा जाता है।
    यह तरीका आतंकवाद, कर चोरी और ड्रग तस्करी से जुड़ा होता है। भारत में यह FEMA और PMLA कानूनों के तहत गंभीर अपराध है।

    सिवनी में पकड़ी गई करोड़ों की रकम इस बात का संकेत है कि हवाला नेटवर्क अब छोटे जिलों तक पहुँच चुका है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा है।

    यह पूरा मामला सिर्फ पुलिस पर नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। अब सबकी निगाहें सरकार और जांच एजेंसियों पर हैं कि क्या वे इस “हवाला-भ्रष्टाचार” कांड की तह तक पहुँच पाएंगी या यह भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

    सिवनी और छिंदवाडा पुलिस में हड़कंप! 9 पुलिसकर्मी एक साथ निलंबित

    सिवनी: मध्यप्रदेश के सिवनी जिले से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ जिला पुलिस बल सिवनी और 8वीं वाहिनी विसबल छिंदवाड़ा में पदस्थ कुल 9 पुलिसकर्मियों को संदिग्ध आचरण के चलते तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई से पूरे पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।

    जानकारी के अनुसार, निलंबित किए गए सभी अधिकारी और कर्मचारी अपने कार्यकाल के दौरान अनुशासनहीनता और संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्त पाए गए थे। जिला पुलिस अधीक्षक ने तत्काल प्रभाव से इन्हें पुलिस लाइन सिवनी में सम्बद्ध करने के आदेश जारी किए हैं।

    निलंबन अवधि के दौरान सभी को नियमों के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा और इस दौरान उन्हें तीनों गणनाओं में पुलिस लाइन सिवनी में उपस्थित रहना अनिवार्य होगा।

    निलंबित पुलिसकर्मियों की सूची:

    1. उप निरीक्षक अर्पित भैरम, थाना प्रभारी बंडोल, सिवनी
    2. प्रधान आरक्षक 203 माखन, एसडीओपी कार्यालय सिवनी
    3. प्रधान आरक्षक 447 रविंद्र उईके, रीडर – एसडीओपी कार्यालय सिवनी
    4. आरक्षक 803 जगदीश यादव, एसडीओपी कार्यालय सिवनी
    5. आरक्षक 306 योगेंद्र चौरसिया, एसडीओपी कार्यालय सिवनी
    6. आरक्षक चालक 582 रितेश, ड्राइवर, एसडीओपी कार्यालय सिवनी
    7. आरक्षक 750 नीरज राजपूत, थाना बंडोल, सिवनी
    8. आरक्षक 610 केदार, गनमैन, एसडीओपी सिवनी, 8वीं वाहिनी विसबल छिंदवाड़ा
    9. आरक्षक 85 सदाफल, गनमैन, एसडीओपी सिवनी, 8वीं वाहिनी विसबल छिंदवाड़ा

    विभागीय जांच के आदेश

    सूत्रों के अनुसार, इन सभी पुलिसकर्मियों पर विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं। बताया जा रहा है कि लंबे समय से इन अधिकारियों के संदिग्ध कार्य व्यवहार को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। उच्च अधिकारियों द्वारा की गई आंतरिक जांच में प्रारंभिक तौर पर आरोपों की पुष्टि होने के बाद यह बड़ी कार्रवाई की गई है।

    जनता में चर्चा का विषय

    यह मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। आम नागरिकों का कहना है कि यदि पुलिस विभाग के भीतर ही अनुशासन का अभाव रहेगा तो जनता का विश्वास कैसे कायम रहेगा। वहीं, जिला पुलिस प्रशासन ने साफ कहा है कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को नियमों से ऊपर नहीं माना जाएगा और यदि कोई गलती करता है तो सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

    🔍 आगे क्या?

    अब देखना यह होगा कि जांच पूरी होने के बाद इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ अगली कार्रवाई क्या होती है। क्या इन्हें बर्खास्त किया जाएगा या केवल निलंबन की अवधि में ही चेतावनी देकर वापस सेवा में बहाल किया जाएगा, यह आने वाला समय बताएगा।