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ट्रक को सिनेमा हॉल बना कर 35 रुपये में गांववालों को फ़िल्में दिखाएंगे ये फिल्म अभिनेता . ख़ूबसूरत पहल

पिछले कुछ दशकों में हमारे देश ने काफ़ी तरक्की की है. साइंस से लेकर फ़िल्म जगत तक, कई मामलों में हमें अद्भुत बदलाव देखने को मिले हैं. टेक्नोलॉजी के इस दौर में सबसे बड़ा फ़ायदा ये है कि अगर आपके पास करने के लिए, कुछ न भी है तो भी आप बोर नहीं होगे. अरे हमारा इंटरनेट ज़िंदाबाद. वीडियो गेम खेलना हो या अपने फ़ेवरेट स्टार की मूवी देख कर टाइम पास करना हो, सब कुछ मोबाइल के छोटे से टैब में मौजूद है.

हांलाकि, कभी-कभी मन में ख़्याल आता है कि शहरों में तो लोग जैसे-तैसे टाइम पास कर ही लेते हैं, लेकिन गांव और कस्बों का क्या? अधिकतर गांव में बिजली की कौटती की वजह से, ग्रामीण इलाकों में इंटरटेनमेंट के साधन आज भी लिमिटेड ही हैं. इसी चीज़ को ध्यान में रखते हुए, अभिनेता सतीश कौशिक ने एक बेहद सराहनीय कदम उठाया है.

दरअसल, सतीश कौशिक मोबाइल डिजिटल मूवी थिएटर (MDMT) लॉन्च कर रहे हैं, जिसके चलते वो ट्रक को सिनेमाघरों में परिवर्तित कर रहे हैं. इन ट्रक के ज़रिये, विभिन्न गांवों में लोगों को 35 रुपये से 75 रुपये के बीच फ़िल्में दिखाई जाएंगी. बताया जा रहा है कि इस योजना के लिए सरकार की तरफ़ से धन आवंटित नहीं किया गया है. इसके बावजूद इसका लॉन्च दिल्ली के मुख़्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कर रहे हैं. वहीं हर ट्रक का नाम एक फ़िल्म के नाम पर रखा जाएगा. इनमें मुख्य फ़िल्में ‘मिस्टर इंडिया’, ‘बाहुबली’, ‘डॉन’, और ‘शहंशाह’ है.

वहीं मामले पर सतीश कौशिक का कहना है कि दिन पर दिन प्रॉपर्टी की कीमतों में बढ़ोतरी होती जा रही है. ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को मनोरंजन प्रदान करने के लिए ये एक अच्छी शुरुआत है.

ISRO वैज्ञानिकों की इन 15 तकनीकों ने भारत को दुनिया का पांचवा सबसे शक्तिशाली देश बनाया

सूचना एवं टेक्नोलॉजी के इस दौर में भारत का नाम दुनिया के पांच सबसे शक्तिशाली देशों में लिया जाता है. भारत की गिनती भले ही अब भी विकासशील देशों की श्रेणी में की जाती हो. बावजूद इसके हमारी गिनती परमाणु हथियार संपन्न देशों में भी की जाती है. आज भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) पर दुनियाभर के देशों की नज़रें लगी हुई हैं. भारतीय वैज्ञानिक हर बार नई-नई तकनीक इजात कर दुनिया में भारत का परचम लहरा रहे हैं. भारत ने परमाणु शक्ति बनने का दर्जा 1974 में हासिल किया था. भारत ने अपना पहला भूमिगत परीक्षण 18 मई 1974 को किया था. हालांकि, उस समय भारत सरकार ने घोषणा की थी कि भारत का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यो के लिये होगा और ये परीक्षण भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिये किया गया है. बाद में 11 और 13 मई 1998 को भारत ने पोखरण में पांच भूमिगत परमाणु परीक्षण कर स्वयं को परमाणु शक्ति संपन्न देशों की श्रेणी में ला खड़ा किया.

आइये जानते हैं आज़ादी के बाद भारत ने ख़ुद को एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के लिए कौन-कौन सी ऐसी टेक्नोलॉजी का सफ़ल परीक्षण किया है.

1. Atomic Clock के निर्माण के साथ ही इसरो दुनिया के उन अंतरिक्ष संगठनों में शामिल हो गया है जिनके पास ये बेहद जटिल तकनीक है.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक Atomic Clock विकसित की है जिसका इस्तेमाल नैविगेशन सैटलाइट्स में किया जाता है ताकि सटीक लोकेशन डेटा मिल सके. इससे पहले इसरो को अपने नैविगेशन सैटलाइट्स के लिए यूरोपियन ऐरोस्पेस मैन्युफैक्चरर ऐस्ट्रियम से Atomic Clock ख़रीदनी पड़ती थी.

2. भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की एक टीम ने आकाशगंगाओं का एक बहुत बड़ा समूह खोज निकला.

भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के एक दल ने आकाशगंगाओं का एक बहुत बड़ा समूह (सुपरक्लस्टर) खोजा है, जिसका आकार अरबों सूर्यों के बराबर है. पुणे स्थित ‘इंटर यूनीर्विसटी सेंटर फ़ॉर एस्ट्रोनामी एंड एस्ट्रोफ़िजिक्स’ के मुताबिक़, ये सबसे बड़े ज्ञात ढांचों में से एक है जो पृथ्वी से 400 लाख प्रकाश वर्ष दूर है और करीब 10 अरब वर्ष से अधिक पुराना है. आकाशगंगाओं का ये समूह काफ़ी विशाल और दुर्लभ है. अभी तक ऐसी बहुत ही कम संरचनाओं की खोज की गई है और भारत ने पहली बार इसकी खोज की है.

3. इसरो ने एक रॉकेट से 104 उपग्रह प्रक्षेपित कर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड.

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो द्वारा एक ही रॉकेट के माध्यम से रिकॉर्ड 104 उपग्रहों का सफ़ल प्रक्षेपण करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बन गया है. ध्रुवीय अंतरिक्ष प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-C37 ने सबसे पहले कार्टोसैट-2 श्रेणी के उपग्रह को कक्षा में प्रवेश कराया, इसके बाद शेष 103 नैनो उपग्रहों को 30 मिनट के भीतर प्रवेश कराया गया. इनमें 96 उपग्रह अमेरिका के थे. एक बार में सबसे ज़्यादा उपग्रह प्रक्षेपित करने का श्रेय अब तक रूसी अंतरिक्ष एजेंसी के पास था.

4. इसरो ने सबसे भारी रॉकेट GSLV MK-3 लॉन्च किया.

GSLV MK-3 की लॉन्चिंग स्पेस टेक्नोलॉजी में बड़ा बदलाव लाने वाले मिशन के तौर पर देखा जा रहा है. अब भारत दूसरे देशों पर डिपेंड हुए बिना ही बड़े और भारी सैटेलाइट्स की लॉन्चिंग देश में ही कर सकता है. ये रॉकेट स्पेस में 4 टन तक के वज़न वाले सैटेलाइट्स को ले जा सकता है. इसकी क्षमता मौजूदा GSLV MK-2 की दो टन क्षमता से दोगुनी है. ये धरती की कम ऊंचाई वाली ऑर्बिट तक 8 टन वजन ले जाने की ताकत रखता है.

5. 18 वर्षीय भारतीय लड़के द्वारा बनाया दुनिया का सबसे हल्का सैटेलाइट NASA करेगा लॉन्च.

तमिलनाडु के पल्लापत्ती में रहने वाले 18 वर्षीय रिफ़त शाहरुख ने दुनिया का सबसे छोटा सैटेलाइट बनाया है. 64 ग्राम के इस सैटेलाइट को Kalamsat नाम दिया गया है. इस सैटेलाइट को बनाने में 2 साल लगे और 1 लाख रुपए का ख़र्च आया. इस सैटेलाइट का लक्ष्य 3D प्रिटेंड कार्बन फ़ाइबर की परफ़ॉर्मेंस को प्रदर्शित करना और तापमान व रेडिएशन को रिकॉर्ड करना होगा. इसकी मिशन अवधि 240 मिनट होगी और छोटे उपग्रह अंतरिक्ष के माइक्रो ग्रैविटी वातावरण में 12 मिनट तक काम करेंगे.

6. ‘परम’ भारत का पहला स्वदेशी सुपरकंप्यूटर, आधुनिक भारत के लिए टेक्नोलॉजी क्षेत्र में मील का पत्थर.

परम सी-डैक द्वारा विकसित भारत के स्वदेशी सुपरकंप्यूटर्स की एक श्रृंखला है. श्रृंखला में नवीनतम सुपरकम्प्यूटर परम ईशान हैं. प्रौद्योगिकी प्रतिबंध के परिणामस्वरूप क्रे सुपरकंप्यूटर से वंचित किए जाने के बाद, भारत ने स्वदेशी सुपर कंप्यूटर और सुपर कंप्यूटिंग प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए एक कार्यक्रम शुरू किया. सुपर कंप्यूटर परमाणु हथियारों के विकास के लिए सहायता करने में सक्षम माना जाता था. इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के उद्देश्य से 1988 में सेंटर फ़ॉर डेवलपमेंट ऑफ़ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) की स्थापना की गई. 1990 में, एक प्रोटोटाइप का उत्पादन किया गया और इसका 1990 के ज्यूरिख सुपरकंप्यूटिंग शो में बेंचमार्क किया गया था. इसने ज़्यादातर अन्य प्रणालियों को पीछे छोड़ दिया. जिससे अमेरिका के बाद भारत को दूसरे नंबर पर रखा गया. इन प्रयास के परिणामस्वरूप 1991 में परम 8000 अस्तिव में आया.

7. ‘आर्यभट्ट’ भारत द्वारा निर्मित पहला मानव रहित उपग्रह जो भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक सफ़ल उपलब्धि थी.

19 अप्रैल, 1975 भारत का पहला उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ जिसे सोवियत संघ द्वारा शुरू किया गया था. ये गणितज्ञ आर्यभट्ट के नाम पर रखा गया था. इसने 5 दिन बाद काम करना बंद कर दिया था. लेकिन ये अपने आप में भारत के लिये एक बड़ी उपलब्धि थी. आर्यभट्ट को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा एक्स-रे खगोल विज्ञान, एयरोनॉमिक्स और सौर भौतिकी में प्रयोग करने के लिए बनाया गया था और इसरो के लिए नई संभावनाएं खोली गईं.

8. विश्व की सबसे तेज़ और सबसे भयानक एंटी शिप क्रूज़ मिसाइल.

ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज़ और सबसे भयानक एंटी-शिप क्रूज़ मिसाइल है. इसे पनडुब्बी से, पानी के जहाज से, विमान से या जमीन से भी छोड़ा जा सकता है. ब्रह्मोस (Brahmos) हथियार प्रणाली को संयुक्त रूप से भारत और रूस द्वारा विकसित किया गया है. ब्रह्मोस भारत और रूस के द्वारा विकसित की गई अब तक की सबसे आधुनिक प्रक्षेपास्त्र प्रणाली है और इसने भारत को मिसाइल तकनीक में अग्रणी देश बना दिया है.

9. पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह पर पहुंचने वाला भारत दुनिया का एकमात्र राष्ट्र.

भारत के मार्स ओर्बिटर मिशन (एमओएम) ने पहले ही प्रयास में लाल ग्रह की कक्षा में स्थापित होने का नया इतिहास रचने के दूसरे ही दिन मंगल ग्रह की पहली तस्वीरें भेजी. एमओएम ने मंगल ग्रह तक पहुंचने के लिए नौ महीनों में 6.5 करोड़ किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय की है. मंगल ग्रह पर पहुंचने वाला भारत एशिया का पहला और दुनिया चौथा देश बन गया है.

10. चंद्रयान -1, चांद पर भारत का पहला मिशन.

22 अक्टूबर, 2008 श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से चंद्रयान-1 को रवाना किया गया था. इस तरह भारत चंद्रमा की सतह पर यान भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बना था. चंद्रयान का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा की सतह के विस्तृत नक्शे और पानी के अंश और हीलियम की तलाश करना था. चंद्रयान मिशन को भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की एक बड़ी सफ़लता के रूप में देखा जाता है. भारत ज़ल्द ही चंद्रयान-2 को भी अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी में है.

11. इसरो ने सफ़लतापूर्वक अपने स्क्रैमजेट रॉकेट इंजन का परीक्षण किया.

अमेरिका, रूस और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के बाद भारत अत्याधुनिक ‘स्क्रैमजेट राकेट इंजन’ का सफ़ल परीक्षण करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है. भारत ने वायुमंडल की आॅक्सीजन का इस्तेमाल करते हुए इस इंजन का प्रक्षेपण किया है. इससे प्रक्षेपण की लागत कई गुना कम हो सकती है और हवा से आॅक्सीजन लेने वाले इंजन डिजाइन करने के इसरो के प्रयास में मदद मिल सकती है.

12. ‘इसरो’ द्वारा विकसित ‘स्पेस कैप्सूल रिकवर प्रयोग मिशन’.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा श्रीहरिकोटा से 10 जनवरी, 2007 को स्पेस कैप्सूल रिकवरी एक्सपेरिमेंट या आमतौर पर स्पेस कैप्सूल रिकवरी-1 शुरू किया गया था. इसका प्रक्षेपण तीन अन्य उपग्रहों के साथ ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान C7 रॉकेट द्वारा किया गया था. वो पृथ्वी के वायुमंडल में फिर से प्रवेश करने से पहले 12 दिनों के लिए कक्षा में रहा. 22 जनवरी को बंगाल की खाड़ी में नीचे उतरा.

13. GSLV D-5 रॉकेट स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन टेक्नोलॉजी युक्त.

अंतरिक्ष प्रक्षेपण यान के लिये क्रायोजेनिक टेक्नोलॉजी इंजन के सफ़ल प्रयास के साथ ही भारत अमेरिका, रूस, जापान, चीन और फ़्रांस के बाद दुनिया का छठवां देश बन गया है जिसके पास स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन की व्यवस्था है. ये टेक्नोलॉजी भारी उपग्रहों को भूस्थिर कक्षा में स्थापित करने में मदद करेगी. इसरो ने 5 जनवरी, 2014 के GSLV D-5 द्वारा जीसैट-5 मिशन और 27 सितंबर, 2015 को GSLV D-6 द्वारा जीसैट-6 का सफ़ल प्रक्षेपण, स्वदेशी क्रायोजेनिक चरण के साथ जीएसएलवी का दूसरा सफ़ल प्रक्षेपण था.

14. इनसैट, एशिया-पैसिफ़िक क्षेत्र में सबसे बड़ी घरेलू संचार प्रणाली.

भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह प्रणाली (इन्सैट) का पहला उपग्रह अप्रैल 1982 में छोड़ा गया था. इन्सैट इसरो द्वारा शुरू बहुउद्देशीय भू-स्थिर उपग्रहों की एक श्रृंखला है, जो दूरसंचार, प्रसारण, मौसम विज्ञान और खोज और बचाव कार्य के लिए उपयोग होता है. 1983 में शुरु किया हुआ इनसैट, एशिया-पैसिफ़िक क्षेत्र में सबसे बड़ी देशीय संचार प्रणाली है. ये भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग, दूरसंचार विभाग, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, आकाशवाणी और दूरदर्शन चैनल का एक संयुक्त उद्यम है.

15. इंडियन रीज़नल नैविगेशन सेटेलाइट सिस्टम (आईआरएनएसएस) भारत का ख़ुद का जीपीएस सिस्टम.

भारत ने अब ख़ुद का नेविगेशन सेटेलाइट सिस्टम विकसित कर लिया है. अब भारत को दूसरे देशों के नैविगेशन सेटेलाइट सिस्टम पर निर्भर नहीं होना पड़ता है. इस नैविगेशन प्रणाली से देश की सीमाओं सहित आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी. इस जीपीएस सिस्टम से सुदूरवर्ती क्षेत्रों, पर्वतों, जंगलों आदि में छोटी से छोटी गतिविधियों पर भी नज़र रखी जा सकेगी. इसरो के इस “रडार” पर सब कुछ होगा. खास बात ये कि नक्सल प्रभावित इलाकों की सटीक मॉनीटरिंग में ये कारगर साबित होगा. दावा किया जा रहा है कि ये स्वदेशी प्रणाली अमेरिका की जीपीएस (ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम) प्रणाली से दस गुना बेहतर है.

इसरो के कर्मठ वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत और लगन ने भारत को दुनिया के परमाणु संपन्न देशों की श्रेणी में खड़ा कर दिया है.

जिला भाजपा संघटन में आंरभ हुआ सर्जरी का दौर

सिवनी( राजनेतिक डेस्क) भाजपा में निर्दलीय विधायक मूनमुन रॉय के शामिल होने के बाद से ही जिला भाजपा अध्यक्ष राकेश पाल सिंह द्वारा जिला सघटन में फेरबदल आरभ कर दिया गया है,
मालूम हो कि इससे पूर्व लखनादौन मण्डल अध्यक्ष आशीष गोल्हनी को नियुक्त कर चुके है,जिन्हें पूर्व जिला अध्यक्ष नीता पटेरिया द्वारा नियुक्त मुकेश अग्रवाल की जगह दी गई है,

वही आज सिवनी व केवलारी विस के लिये अत्यंत महत्वपूर्ण छपारा मण्डल में सघटन की सर्जरी करते हुए

बालू राजेश जैन को पदमुक्त कर पूर्व में मण्डल अध्य्चक रहे ठाकुर धर्मेंद्र को पुनः ऊक्त दायित्व सौपा गया है,

सूत्रों की माने तो जल्द ही राकेस पाल सिह सिवनी ग्रामीण मण्डल एवं केवालरी मण्डल में भी बड़े फेरबदल करने की मंशा बना चुके है।

जिले के तीन विद्यार्थी टॉप टेन सूची में

ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थी है सभी

सिवनी – मध्यप्रदेश बोर्ड 10 वीं और 12वीं के नतीजे 14 मई को मुख्यमंत्री निवास पर सुबह 9 से 9.30 बजे के बीच घोषित किए जाएंगे। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की तैयारियां पूर्ण हो चुकी है। जिन विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी वे रिजल्ट घोषित होने पर बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते है।

मालूम हो यह लगातार दूसरा मौका है जब 10 वीं और 12 वीं दोनों परीक्षाओं का रिजल्ट एक साथ जारी हो रहा है।
ज्ञात हो कि पिछले साल मई के दूसरे सप्ताह यानी 12 मई को नतीजे जारी हो गए थे।
इस वर्ष करीब 20 लाख विद्यार्थियों ने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं दी थीं। कक्षा 12वीं के 7, 69, 000 विद्यार्थी और 10वीं के 11, 48,00 विद्यार्थी परीक्षा में बैठे थे। एमपी बोर्ड 12वीं की परीक्षाएं 1 मार्च से 3 अप्रैल तक चली थीं। एमपी बोर्ड 10वीं की परीक्षाएं 5 मार्च से 31 मार्च तक हुई थीं।

जिला शिक्षा अधिकारी एस.पी. लाल ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल के द्वारा बोर्ड परीक्षा में क्रमश: कक्षा 10वीं व 12वीं कक्षा के परिणाम 14 मई 2018 को घोषित होने जा रहे है। इसके पूर्व ही 11 मई को ही मुझे दूरभाष पर सूचित किया गया है कि हमारे सिवनी जिले से दोनों बोर्ड परीक्षाओं में तीन विद्यार्थी टाप टेन सूची में शामिल हुये है।
स्टेट की टाप टेन सूची में शामिल तीन विद्यार्थी
12वीं कक्षा- दीपज्योति हायर सेकेंडरी स्कूल केवलारी- छात्रा सुनन्दा पिता सूर्य नारायण ,
10 वीं- हायर सेकेंडरी स्कूल गोपालगंज की निकिता पिता रामकुमार,10 वीं- मॉडल स्कूल लखनादौन के मोहित पिता गणेश डहेरिया ने अपना स्थान बनाया है।

टाइगर के हमले हुई कृषक की मौत

सिवनी- मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के पेंच टाईगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले कंुभपानी बफर जोन के कोनापिडरई बीट में शेर के हमले से एक कृषक केवल नवरेती की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई।

विभागीय सूत्रों के अनुसार दिनांक 11 मई 2018 की दोपहर 3 बजे लगभग पेंच राष्ट्रीय उद्यान अंतर्गत कंुभपानी बफर जोन के कोनापिडरई बीट में कृषक केवल नवरेती उम्र 45 वर्ष निवासी कोनापिडरई जंगल से लगे अपने खेत में गन्ने की फसल को देखने के लिए गया था तब ही अचानक झांडियों में छिपा टाइगर ने केवल नवरेती के पेट पर हमला कर दिया जिससे वह बुरी तरह घायल हो गया था, जिसे उपचार हेतु छिंदवाड़ा जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र चैरई में भर्ती कराया गया था लेकिन उसकी हालत गंभीर होने के बाद डाॅक्टरों द्वारा जिला चिकित्सालय छिंदवाड़ा रिफर किया गया जहां उसका उपचार किया जा रहा था। जिला चिकित्सालय छिंदवाड़ा के डाॅक्टरों द्वारा गंभीर रूप से घायल होने के कारण उसे नागपुर रिफर किया गया जहां उसका इलाज जारी था। शुक्रवार और शनिवार की देर रात्रि में केवल नवरेती की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। समाचार लिखे जाने तक वन विभाग के अधिकारियों द्वारा मृतक कृषक का शव नागपुर से गृह ग्राम लाया जा रहा है।

इस घटनाक्रम को लेकर फील्ड डायरेक्टर शुभरंजन सेन, सहायक वनसंरक्षक के.के.गुरूवानी, अनुविभागीय अधिकारी भारती ठाकरे, श्री परते वन परिक्षेत्र अधिकारी कुंभपानी सहित अन्य अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया जहां ये अधिकारी इस घटनाक्रम को छिपाते हुए नजर आये।

सड़क दुर्घटना में एक की मौत,कई घायल

सिवनी-घसौर में एक दर्दनाक हादसे में जहां एक शख्स की मौत हो गई वहीं कमसे कम 20 लोग घायल हो गए हैं। जिसमें कई लोगों की हालत नाजुक बताई जा रही है

जिले के घंसौर थाना कें ग्राम रूपदौन कुछ लोग अस्थि विसर्जन के लिए बगदरी नर्मदा तट पर जा रहे थे इसी दौरान अचानक अनियंत्रित होकर ट्राली पलट गई जिसमें एक शख्स जगदीश (42) की मौत हो गई।

नवेद को मिला नगर गौरव अवार्ड

सिवनी- राजनांदगांव के सबसे बड़ी संस्था उदयाचल के 50 साल पूरे हुए इस कार्यक्रम पर नवेद आज़मी को नगरगौरव के अवार्ड से सम्मानित किया गया । वर्तमान में नवेद राजनांदगांव छत्तीसगढ़ में रहते हैं पर वह सिवनी के मूल्य निवासी हैं।
उबैदुल्ला नवेद आज़मी ऑस्टेओगेनेसिस इम्पफॅक्टर (Osteogenesis disease) नाम की बीमारी से ग्रस्त हैं। जिसमे हड्डी बहुत नाजुक होती हे हल्की सी छिक से भी टूट जाती है। यही वजह है की बाल अवस्था से लेकर किशोर अवश्था तक कई हड्डियां फ्रैक्चर हुए हैं लग भग 250 बार से भी ज्यादा बार। इनकी हाइट 3 फ़ीटऔर वजन 18 किलो है। इसके बावजूद बच्चों को फ्री बेसिक कंप्यूटर जानकारी देते हैं। 6-7 धण्टे बच्चों को निस्वार्थ सेवा करते है ।
नवेद आज़मी को नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सिद्दीकी ने नगर गौरव अवार्ड से सम्मानित किया। डॉक्टर बाफना ने नवेद के लिए यह चंद पंक्तियां कहीं
” नगर समाज देश को प्रतिदिन साथ दे रहे
हर पल हर क्षण रोज मौत को मात दे रहे
गौरव तुम नवेद नगर के है अभिनंदन
हिम्मत और हौसलों का है शत शत वंदन”
डॉ बाफना की यह पंक्ति सुनते ही सारा ऑडिटोरियम अभिभूत हो गया ।

भर्ती रैली की व्यवस्था का कलेक्टर ने किया अवलोकन

सिवनी-कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड एवं अनुविभागीय अधिकारी राजस्व हर्ष सिंह द्वारा सैनिक भर्ती रैली स्थल का आज अवलोकन किया गया। इस दौरान रियायती कैंटीन, फोटोकॉपी एवं इंटरनेट कैफे, भर्ती रैली के अभ्यर्थियों के रुकने के स्थान सहित भर्ती रैली ग्राउंड निरीक्षण किया गया ।
साथ मे सेना भर्ती के वरिष्ठ अधिकारी भी साथ में उपस्थित रहे।

जुआ फड़ पर पुलिस की कार्यवाही

सिवनी-आज 10 मई रात्रि 07.30 बजे सब्जी बाजार सिवनी में मुखबिर सूचना पर रेड कर (1) हफ़ीज़ पिता याकूब कुरैशी, 34 वर्ष, भगत सिंह वार्ड, सिवनी, (2) आलम पिता खलील खान, 30 वर्ष, बुधवारी सब्जी मंडी, सिवनी, (3) राशिद पिता मोहम्मद जहीर, 22 वर्ष, टिग्गा मोहल्ला, सिवनी, (4) मुन्ना निसार पिता इसराइल निसार, 53 वर्ष, भगत सिंह वार्ड, सिवनी, (5) अंसार पिता इसराइल खान, 54 वर्ष, भगत सिंह वार्ड, सिवनी, (6) मुन्ना उर्फ इसराइल पिता याकूब, 45 वर्ष, गांधी वार्ड, सिवनी को पकड़ा गया। आरोपियों के पास से 552 ताश पत्ती तथा 20,350/- रुपये नकदी जप्त किये गए है। आरोपियों के विरुद्ध धारा 13 जुआ एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

सेना भर्ती रैली में लापरवाही : सहायक अधीक्षक निलंबित

सिवनी- 10 मई मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में चल रही सेना भर्ती में सौंपे गये दायित्वों पर लापरवाही करने के आरोप में अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी कार्यालय सिवनी में पदस्थ सहायक अधीक्षक कालीचरण बाथम को कलेक्टर गोपाल चंद डाड द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

जानकारी अनुसार सेना भर्ती रैली हेतु 9 मई 2018 की शाम को बैठक में अभ्यार्थियों के आवागमन हेतु कार्य आबंटित किया गया था जिसके अनुसार अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी सिवनी के प्रतिनिधि सहायक अधीक्षक कालीचरण बाथम को अभ्यार्थियों के लिए पर्याप्त वाहन व्यवस्था हेतु निर्देशित किया गया था। सौंपे गये कार्यो को समय अवधि में संपादित नही करने, बैठक में दिये गये निर्देशों का पालन नहीं करने तथा परिवहन कार्य में अभ्यार्थियों को अत्यंत असुविधा होने के कारण किसी भी अनहोनी से इंकार नही किया जा सकता।

सिवनी कलेक्टर गोपालचंद डाड ने आज 10 मई 2018 की शाम आदेश जारी करते हुए शासकीय कार्य में लापरवाही, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अव्हेलना करने पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 9 का उल्लंघन करने पर सहायक अधीक्षक परिवहन विभाग को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है।