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जहरीला पानी पीने से 3 महिलाओं की मौत

रतलाम। मध्यप्रदेश के रतलाम स्थित रावटी कस्बे में आने वाले सेलज-देवदा गांव में जहरीला पानी पीने से तीन महिलाओं की मौत हो गई है। तीनों महिलाएं एक ही परिवार की हैं। इन सभी ने घर में रखे मटके का पानी पीया था। जिसके बाद तीनों की तबियत बिगड़ गई। रावटी में प्राथमिक इलाज के बाद परिजन इन्हें जिला अस्पताल ले गए, जहां इलाज के बाद इनकी मौत हो गई।

मटके का पानी पीने के बाद सबसे पहले परिवार की 65 वर्षीय देवली बाई की तबियत बिगड़ी। जिन्होंने जिला अस्पताल में देर रात दम तोड़ दिया। उसके बाद उसी मटके से परिवार की 32 वर्षीय माया और 16 साल की सीमा ने भी पानी पीया, बाद में उन्हें भी घबराहट होने लगी। सोमवार सुबह दोनों ने जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया।




 

पुलिस ने तीनों महिलाओं के शव का पोस्टमार्टम करवाया और वीसरा को प्रिजर्व कर जांच के लिए भेजा गया है। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर भी जहरीले पानी से मौत की बात कह रहे हैं। वहीं रावटी थाना पुलिस ने परिजनों के बयान दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। इस गांव में एक सरकारी हैंडपंप से पानी लाया जाता है। अन्य ग्रामीणों के साथ महिलाओं ने भी वही पानी पिया लेकिन किसी दूसर परिवार में ऐसा हादसा नहीं हुआ। माना जा रहा है कि मटके में जहर डाला गया था।

आप बताइए, क्या मैं नालायक हूं: शिवराज सिंह ने जनता से पूछा

भोपाल। पंचायत चलो अभियान के तहत आज भोपाल की हुजूर विधानसभा के पिपलिया जाहरपीर गांव में आयोजित कार्यक्रम में सीएम ने कहा कि पिछले 13 सालों में प्रदेश में विकास की नई इबारत लिखी गई है। उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि मैंने लाड़ली लक्ष्मी योजना, सीएम तीर्थदर्शन योजना समेत कई योजनाएं जनता के हित में चलाई तो क्या मैं नालायक हूं। उन्होंने कहा कि खुद को लायक कहने वाली इस पार्टी के नेताओं ने देश को बर्बाद कर दिया। उन्होंने लोगों से कहा कि देश को बर्बाद करने वाली कांग्रेस को छोड़ दें ?

 




 

कांग्रेस योजनाओं पर बात करें: शिवराज सिंह

उन्होंने कहा कि मुझे नालायक कहने वाली कांग्रेस मेरी योजनाओं पर बात करे। सीएम ने कहा कि 14 साल पहले प्रदेश किस हाल में था यह आज भी प्रदेश के लोग नहीं भूले हैं। सीएम ने कहा कि पंचायतों को और अत्याधुनिक बनाया जा रहा है। प्रदेश की सभी 23 हजार पंचायतों के विकास का खाका हमने तैयार किया है। सीएम ने इस अवसर पर पिपरिया में मंगल भवन बनाने का भी ऐलान किया। कार्यक्रम को क्षेत्रीय विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी संबोधित किया।

स्पेशल टीम 11 को दी पंचायत की जिम्मेदारी

सीएम ने इस अवसर पर भारतीय जनता युवा मोर्चा द्वारा गठित टीम- 11 की टीम का स्वागत किया और उसे पंचायत के विकास की जिम्मेदारी दी। इससे पूर्व युवा मोर्चा के अध्यक्ष अभिलाष पांडे ने कहा कि युवा मोर्चा ने हर पंचायत में टीम-11 का गठन किया है। उन्होंने बताया कि 23 हजार पंचायतों में 3 लाख अधिक कार्यकर्ताओं को इस टीम में जोड़ा गया है।

23 हजार पंचायतों में भाजपा का झंडा फहराया

पंचायत चलो अभियान के जरिए भाजपा ने आज पूरे प्रदेश की सभी 23 हजार पंचायतों में अपने चुनाव अभियान का शंखनाद कर दिया। आज के अभियान के जरिए भाजपा ने हर पंचायत में पार्टी का झंडा फहरा कर ग्रामीणों से सीधी बात की। भाजपा के केन्द्रीय मंत्री से लेकर प्रदेश सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक समेत पार्टी पदाधिकारी और अनय जनप्रतिनिधियों ने आज गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों को सरकार की योजनाओं से अवगत कराया। कार्यक्रम में हितग्राहियों का सम्मान भी किया गया। केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने आज बैरसिया क्षेत्र के दिल्लोद में पंचायत भवन एवं स्वास्थ्य केन्द्र का शुभारंभ किया।

कल से एक महीने तक गांवों में रहेगी सरकार: शिवराज सिंह

भोपाल। प्रदेश में कल से विकास यात्राओं का आयोजन किया जा रहा है। शिवराज सरकार के सभी मंत्री कल से अपने प्रभार के जिलों में विकास यात्रा पर निकलेंगे। इसके अलावा विधायक भी अपने क्षेत्र में विकास यात्राओं का आयोजन करेंगे। विकास यात्रा पर निकलने वाले प्रभारी मंत्रियों को जिले की हर विधानसभा में एक रात गुजारनी होगी।

प्रशांत खरे होंगे नए पुलिस अधीक्षक

भोपाल। मध्यप्रदेश में पुलिस अधिकारियों के तबादलों का दौर जारी है। पुलिस मुख्यालय ने आज 23 आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए। मध्यप्रदेश शासन गृह विभाग के उपसचिव अजीजा सरशार ने तबादला आदेश जारी किया। आईपीएस ट्रांसफर लिस्ट इस प्रकार है जिसमे जिला पुलिस अधीक्षक तरुण नायक सीधी पुलिस अधीक्षक होंगे । वही भिंड में पदस्थ प्रशांत खरे एस पी सिवनी होंगे।





पिछले वर्ष से बेहतर रहे परीक्षा परिणाम

कलेक्टर ने कहा सयुक्त प्रयास का है नतीजा

सिवनी। माध्यमिक शिक्षा मंडल म.प्र. भोपाल द्वारा हाईस्कूल परीक्षा वर्ष 2018 परिणाम दिनांक 14 मई को प्रात: 11:15 बजे घोषित किया गया है, प्रदेश का हाईस्कूल परीक्षा का कुल परीक्षा परिणाम 66.84 प्रतिशत रहा है, जबलपुर संभाग में हाईस्कूल परीक्षा परिणाम में सिवनी जिले की स्थिति क्रमश: द्वितीय स्थान पर रही है, जबकि विगत वर्ष यह जिला जबलपुर संभाग में छटवें स्थान पर था, विगत वर्ष की अपेक्षा वर्ष 2018 के हाईस्कूल परीक्षा परिणाम में इस जिले में 20.64 प्रतिशत की वृद्धि हुई हैं।

हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणाम के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार सिवनी जिले में कुल 11322 विद्यार्थी दर्ज थे, जहां 11271 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुये। आज घोषित हुये परीक्षा परिणामों में प्रथम श्रेणी में 5312, द्वितीय श्रेणी में 3603, तृतीय श्रेणी में 226 विद्यार्थी आये हैं। इस तरह हायर सेकेंडरी परीक्षा में कुल 9141 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुये तथा 1305 को पूरक आई है, इस तरह कक्षा बारहवीं का कुल 81.12 प्रतिशत परीक्षा परिणाम रहा है।

मंडल द्वारा जारी प्रदेशस्तरीय टॉप-10 सूची में शास. उ. मा. वि. की कु . निकिता पिता रामप्रसाद के द्वारा 600 में से 487 अंक प्राप्त करने के कारण नवमा स्थान प्राप्त करने एवं मॉडल उ.मा.वि. लखनादौन के मोहित पिता गणेशला डेहरिया ने 600 में से 486 अंक प्राप्त कर दसवा स्थान प्राप्त किया है, जिन्हें माननीय मुख्यमंत्री महोदय म.प्र. भोपाल के द्वारा दिनांक 14 मई को प्रात: 8:30 बजे मुख्यमंत्री निवास पर सम्मानित किया गया है।

मंडल मुख्यालय भोपाल से जारी हाईस्कूल की जिला स्तरीय टॉप-3 सूची में क्रमश: कु. प्रियांशी पिता नरेश, शा.हाई स्कूल क. उगली, कु. राशि पिता राजेंद्र कुमार, शास. हाईस्कूल घूरवाड़ा केवलारी प्रियांशु पिता मनोज सनोडिया, शास. हाईस्कूल चावड़ी कु. स्वाती संतोष बघेल एवं कु. खुशी पिता संतोष विश्वकर्मा, शास. उत्कृष्ट विद्यालय सिवनी एवं कु. भावना पिता सतेंद्र, शा. उ.मा.वि.पांडिया छपारा तथा पुनीत कुमार पिता झामसिंह, शा.उ.मा.वि. खैररांजी, जिला सिवनी ने सम्मिलित इस जिले को गौरांवित किया है।

जिला शिक्षा अधिकारी एस.पी. लाल ने जानकारी दी कि हाई स्कूल परीक्षा में कुल 15795 विद्यार्थी दर्ज थे जिसमें से 15677 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी और आज आये परीक्षा परिणाम में प्रथम श्रेणी में 5354, द्वितीय श्रेणी में 4814 तथा तृतीय श्रेणी में 994 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुये है। इस तरह कुल सिवनी जिले से 11162 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुये जो कि जिले के परीक्षा परिणाम का प्रतिशत 71.25 रहा है।

हाईस्कूल, हायरसेकेंडरी कक्षा के परीक्षा परिणाम पर गोपालचंद्र डाड कलेक्टर द्वारा सभी छात्र-छाक्षओं को शुभकामनायें प्रेषित की गई है, उन्होंने कहा कि मैं आशा करता हूं की सभी ने अपने-अपने प्रयास अनुसार परीक्षा परिणाम प्राप्त किया है। परीक्षा परिणाम में यदि कोई विद्यार्थी अनुत्तीर्ण हो जाये या उसे अपेक्षा अनुसार कम अंक प्राप्त हुये हो तो उन्हें हताश नहीं होना चाहिये बल्कि भविष्य में उत्कृष्ट परिणाम लाने के लिये सतत प्रयास जारी रखने चाहिये।

सिवनी में महिलाओं ने किया निरोध का विरोध : VIDEO

सिवनी में महिलाओं ने किया निरोध का विरोध

सिवनी-समाज में कई बार ऐसे मसले खड़े हो जाते हैं जिसमे नाम होते होते बदनामी सिर चढ़ने लगती है।
मुन्नी बदनाम हुई डार्लिंग तेरे लिये दबंग फिल्म का यह आइटम सोंग जब आया तो मुन्नी नाम की लड़कियों को घर से बाहर निकलते ही छींटाकशियों का सामना करना पड़ता रहा। शीला की जवानी में शीला नाम वालियां निशाने पर रही। ये तो खैर पुरानी बात हो चुकी हैं नोटबंदी के दौरान ही देखलें। सोनम गुप्ता के नाम से क्या क्या खेल न हुए कितने प्रलाप न हुए। हाल ही में मध्यप्रदेश के सिवनी नगर में इसी तरह का लेकिन बहुत ही अलग मामला सामने आया है जिसमे महिलाओं ने निरोध का विरोध किया है ।

एक ही कलर की साड़ियों में ये अनेक महिलाएं अपने हाथों में निरोध लिए जब सिवनी के अतिव्यस्तम चौराहे में आंदोलन करती दिखी तो हर राहगीर का ध्यान उनकी तरफ दिखा जी हाँ ये सभी महिलाए आशा कार्यकर्ता है और ये निरोध का विरोध कर रही हैं और विरोध का कारण है निरोध का नाम जो कि पहले का नाम डीलक्स से बदलकर आशा निरोध हो गया है, गौरतलब है कि सरकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में परिवार नियोजन के लिये वितरीत की जाने वाली कंडोम जो कि पहले डीलक्स निरोध के नाम से दी जाती थी उसका नाम बदलकर अब आशा निरोध रख दिया गया है। उस पर जुल्म की बात ये कि इनका वितरण भी आशा वर्करों द्वारा किया जाता है जो कि महिलाएं ही ह मध्यप्रदेश के सिवनी मुख्यालय की आशा वर्करों ने इस पर आपत्ति जताई है। आशा वर्करों का कहना है कि कंडोम का नाम आशा निरोध होने से उनके साथ छेड़खानी की जाती है। उन्हें टोंट मारे जाते हैं। एक आशा देना कहकर उनका मजाक उड़ाते हैं। यह सब बहुत ही असभ्य और भद्दे तरीके से होता है जिससे उन्हें शर्मसार होना पड़ता है। इतना ही नहीं सरकारी हिदायतें हैं कि निरोध जिसे भी दी जाये उससे एक रूपया भी कीमत के रूप में लिया जाये लेकिन शर्म के मारे वह यह भी नहीं ले पाती और इसका भुगतान अपनी जेब से करना पड़ता है।

निरोध का नाम आशा निरोध रखने से एक ओर जहां आशा वर्कस विरोध कर रही हैं वहीं इन्हें महिला विरोधी नज़रिये के तौर पर भी देखा जा रहा है। निशाना सीधा केंद्र सरकार की ओर है। कुछ महिला संगठनों का कहना है कि इससे केंद्र की बीजेपी सरकार का महिला विरोधी नज़रिया साफ झलकता है।

इस मामले में एक चीज़ तो साफ है कि लोगों के दिमाग में गंदगी अभी भी भरी पड़ी है। सामाजिक सोच का स्तर अभी तक निम्न है। निरोध के पैकेट से आशा नाम हो सकता है हटा भी लिया जाये लेकिन भद्दा मज़ाक करने वालों पर क्या इससे रोक लग जायेगी क्या उनके दिमागों की गंदगी दूर हो जायेगी। क्या उनकी कुंठाएं शांत हो जायेंगी। या फिर कुछ और रास्ते निकाल लिये जायेंगें। बेहतर हो कि इस मसले पर लोगों को सामाजिक रूप से जागरूक किया जाये। आशा वर्कर्स भी इसी समाज का हिस्सा हैं। निरोध का इस्तेमाल यौन शिक्षा का ही भाग है। लेकिन जहां महिलाओं की माहवारी पर अभी खुलकर बात नहीं होती वहां पर यौन संबंधों पर बात करना तो अश्लील ही माना जायेगा। और अगर कोई इस पर बात करना चाहेगा तो उसे या तो चरित्रहीन समझा जायेगा या फिर उसके साथ भद्दे मज़ाक किये जायेंगें।

शादी के पहले शिक्षा का उदाहरण देते हुए इस लड़की ने पहले परीक्षा दी और फिर शादी की अग्नि परीक्षा

कुछ लोग इस बात को बेहतर समझते हैं कि उनकी ज़िंदगी में किस चीज़ की अहमियत कितनी है. कर्नाटक की AY Kavya भी उन्हीं लोगों में से है. Kavya की शादी और परीक्षा एक ही दिन होने वाली थी. इन हालातों में सामान्यतः लोग परीक्षा छोड़ देंगे या शादी की तारीख आगे बढ़ा देंगे. लेकिन Kavya ने ऐसा कुछ नहीं किया.

कर्नाटक के KR Pete Town में स्थित कलपत्रु डिग्री कॉलेज में पढ़ने वाली Kavya B.Com द्वितीय वर्ष की छात्रा है.इससे पहले B.Com की सभी परीक्षाओं में Kavya ने 90 प्रतिशत से ज़्यादा अंक अर्जित किए थे. ऐसी होनहार छात्रा के लिए परीक्षा छोड़ना कोई विकल्प ही नहीं था. लेकिन परीक्षा की तारीख घोषित होने से पहले ही उसकी शादी की तारीख तय हो गई थी. Kavya अपनी शादी के कार्यक्रम को भी नहीं टालना चाहती थी. ऐसा भी नहीं था कि परीक्षा दिन में थी और शादी रात में. शादी का मुहूर्त सुबह 11 बजे का था और परीक्षा का समय सुबह 9.15 से 12.30 तक का.

Kavya ने जब परीक्षा हॉल में दुल्हन की वेशभूषा में प्रवेश किया तो सब उसे देखते ही रह गए. उसने अपना Business Tax का पेपर 10.48 AM तक ख़त्म कर के परीक्षा निरक्षक को सौंप दिया और अपनी शादी के लिए चली गई. Kavya का होने वाला पति लोहित भी उसके फ़ैसले से खुश था. उसके सगे संबंधियों और दोस्तों ने भी काव्या के इस कदम को सराहा. इसीलिए ज़रूरी है कि शादी के पहले शिक्षा पूरी हो.

जूस पिलाकर किया गया अनशन समाप्त

मामला दिवारी तालाब का

सिवनी -जिले का सबसे बड़ा तालाब ,विकासखंड घंसौर के ग्राम पंचायत दिवारी 62 एकड़ की गहरीकरण एवं सौंदर्यकरण की मांग को लेकर समूचे क्षेत्र वासी लगभग 15 गांव के 500 महिला पुरुष अनशन एवं भूख हड़ताल पर विगत 12 दिन से लगातार जारी थी जिसका आज मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते एवं राज्यसभा सांसद श्रीमती संपतिया उइके एवं क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि एवं जिला कलेक्टर गोपालचन्र्द डाँड़ सहित जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण मांगे मान कर अनशनकारियों को नर्मदा जल पिलाकर अनशन समाप्त कराया।
मिली जानकारी के अनुसार मांग पूर्ण करने के लिये प्रशासन के द्वारा कुछ समय मांगा गया है।
वही महत्वपूर्ण मांग सड़क निर्माण कार्य तत्काल चालू करावाकर तालाब गहरीकरण के कार्य का भूमि पूजन किया गया.

ट्रक को सिनेमा हॉल बना कर 35 रुपये में गांववालों को फ़िल्में दिखाएंगे ये फिल्म अभिनेता . ख़ूबसूरत पहल

पिछले कुछ दशकों में हमारे देश ने काफ़ी तरक्की की है. साइंस से लेकर फ़िल्म जगत तक, कई मामलों में हमें अद्भुत बदलाव देखने को मिले हैं. टेक्नोलॉजी के इस दौर में सबसे बड़ा फ़ायदा ये है कि अगर आपके पास करने के लिए, कुछ न भी है तो भी आप बोर नहीं होगे. अरे हमारा इंटरनेट ज़िंदाबाद. वीडियो गेम खेलना हो या अपने फ़ेवरेट स्टार की मूवी देख कर टाइम पास करना हो, सब कुछ मोबाइल के छोटे से टैब में मौजूद है.

हांलाकि, कभी-कभी मन में ख़्याल आता है कि शहरों में तो लोग जैसे-तैसे टाइम पास कर ही लेते हैं, लेकिन गांव और कस्बों का क्या? अधिकतर गांव में बिजली की कौटती की वजह से, ग्रामीण इलाकों में इंटरटेनमेंट के साधन आज भी लिमिटेड ही हैं. इसी चीज़ को ध्यान में रखते हुए, अभिनेता सतीश कौशिक ने एक बेहद सराहनीय कदम उठाया है.

दरअसल, सतीश कौशिक मोबाइल डिजिटल मूवी थिएटर (MDMT) लॉन्च कर रहे हैं, जिसके चलते वो ट्रक को सिनेमाघरों में परिवर्तित कर रहे हैं. इन ट्रक के ज़रिये, विभिन्न गांवों में लोगों को 35 रुपये से 75 रुपये के बीच फ़िल्में दिखाई जाएंगी. बताया जा रहा है कि इस योजना के लिए सरकार की तरफ़ से धन आवंटित नहीं किया गया है. इसके बावजूद इसका लॉन्च दिल्ली के मुख़्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कर रहे हैं. वहीं हर ट्रक का नाम एक फ़िल्म के नाम पर रखा जाएगा. इनमें मुख्य फ़िल्में ‘मिस्टर इंडिया’, ‘बाहुबली’, ‘डॉन’, और ‘शहंशाह’ है.

वहीं मामले पर सतीश कौशिक का कहना है कि दिन पर दिन प्रॉपर्टी की कीमतों में बढ़ोतरी होती जा रही है. ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को मनोरंजन प्रदान करने के लिए ये एक अच्छी शुरुआत है.

ISRO वैज्ञानिकों की इन 15 तकनीकों ने भारत को दुनिया का पांचवा सबसे शक्तिशाली देश बनाया

सूचना एवं टेक्नोलॉजी के इस दौर में भारत का नाम दुनिया के पांच सबसे शक्तिशाली देशों में लिया जाता है. भारत की गिनती भले ही अब भी विकासशील देशों की श्रेणी में की जाती हो. बावजूद इसके हमारी गिनती परमाणु हथियार संपन्न देशों में भी की जाती है. आज भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) पर दुनियाभर के देशों की नज़रें लगी हुई हैं. भारतीय वैज्ञानिक हर बार नई-नई तकनीक इजात कर दुनिया में भारत का परचम लहरा रहे हैं. भारत ने परमाणु शक्ति बनने का दर्जा 1974 में हासिल किया था. भारत ने अपना पहला भूमिगत परीक्षण 18 मई 1974 को किया था. हालांकि, उस समय भारत सरकार ने घोषणा की थी कि भारत का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यो के लिये होगा और ये परीक्षण भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिये किया गया है. बाद में 11 और 13 मई 1998 को भारत ने पोखरण में पांच भूमिगत परमाणु परीक्षण कर स्वयं को परमाणु शक्ति संपन्न देशों की श्रेणी में ला खड़ा किया.

आइये जानते हैं आज़ादी के बाद भारत ने ख़ुद को एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के लिए कौन-कौन सी ऐसी टेक्नोलॉजी का सफ़ल परीक्षण किया है.

1. Atomic Clock के निर्माण के साथ ही इसरो दुनिया के उन अंतरिक्ष संगठनों में शामिल हो गया है जिनके पास ये बेहद जटिल तकनीक है.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक Atomic Clock विकसित की है जिसका इस्तेमाल नैविगेशन सैटलाइट्स में किया जाता है ताकि सटीक लोकेशन डेटा मिल सके. इससे पहले इसरो को अपने नैविगेशन सैटलाइट्स के लिए यूरोपियन ऐरोस्पेस मैन्युफैक्चरर ऐस्ट्रियम से Atomic Clock ख़रीदनी पड़ती थी.

2. भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की एक टीम ने आकाशगंगाओं का एक बहुत बड़ा समूह खोज निकला.

भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के एक दल ने आकाशगंगाओं का एक बहुत बड़ा समूह (सुपरक्लस्टर) खोजा है, जिसका आकार अरबों सूर्यों के बराबर है. पुणे स्थित ‘इंटर यूनीर्विसटी सेंटर फ़ॉर एस्ट्रोनामी एंड एस्ट्रोफ़िजिक्स’ के मुताबिक़, ये सबसे बड़े ज्ञात ढांचों में से एक है जो पृथ्वी से 400 लाख प्रकाश वर्ष दूर है और करीब 10 अरब वर्ष से अधिक पुराना है. आकाशगंगाओं का ये समूह काफ़ी विशाल और दुर्लभ है. अभी तक ऐसी बहुत ही कम संरचनाओं की खोज की गई है और भारत ने पहली बार इसकी खोज की है.

3. इसरो ने एक रॉकेट से 104 उपग्रह प्रक्षेपित कर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड.

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो द्वारा एक ही रॉकेट के माध्यम से रिकॉर्ड 104 उपग्रहों का सफ़ल प्रक्षेपण करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बन गया है. ध्रुवीय अंतरिक्ष प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-C37 ने सबसे पहले कार्टोसैट-2 श्रेणी के उपग्रह को कक्षा में प्रवेश कराया, इसके बाद शेष 103 नैनो उपग्रहों को 30 मिनट के भीतर प्रवेश कराया गया. इनमें 96 उपग्रह अमेरिका के थे. एक बार में सबसे ज़्यादा उपग्रह प्रक्षेपित करने का श्रेय अब तक रूसी अंतरिक्ष एजेंसी के पास था.

4. इसरो ने सबसे भारी रॉकेट GSLV MK-3 लॉन्च किया.

GSLV MK-3 की लॉन्चिंग स्पेस टेक्नोलॉजी में बड़ा बदलाव लाने वाले मिशन के तौर पर देखा जा रहा है. अब भारत दूसरे देशों पर डिपेंड हुए बिना ही बड़े और भारी सैटेलाइट्स की लॉन्चिंग देश में ही कर सकता है. ये रॉकेट स्पेस में 4 टन तक के वज़न वाले सैटेलाइट्स को ले जा सकता है. इसकी क्षमता मौजूदा GSLV MK-2 की दो टन क्षमता से दोगुनी है. ये धरती की कम ऊंचाई वाली ऑर्बिट तक 8 टन वजन ले जाने की ताकत रखता है.

5. 18 वर्षीय भारतीय लड़के द्वारा बनाया दुनिया का सबसे हल्का सैटेलाइट NASA करेगा लॉन्च.

तमिलनाडु के पल्लापत्ती में रहने वाले 18 वर्षीय रिफ़त शाहरुख ने दुनिया का सबसे छोटा सैटेलाइट बनाया है. 64 ग्राम के इस सैटेलाइट को Kalamsat नाम दिया गया है. इस सैटेलाइट को बनाने में 2 साल लगे और 1 लाख रुपए का ख़र्च आया. इस सैटेलाइट का लक्ष्य 3D प्रिटेंड कार्बन फ़ाइबर की परफ़ॉर्मेंस को प्रदर्शित करना और तापमान व रेडिएशन को रिकॉर्ड करना होगा. इसकी मिशन अवधि 240 मिनट होगी और छोटे उपग्रह अंतरिक्ष के माइक्रो ग्रैविटी वातावरण में 12 मिनट तक काम करेंगे.

6. ‘परम’ भारत का पहला स्वदेशी सुपरकंप्यूटर, आधुनिक भारत के लिए टेक्नोलॉजी क्षेत्र में मील का पत्थर.

परम सी-डैक द्वारा विकसित भारत के स्वदेशी सुपरकंप्यूटर्स की एक श्रृंखला है. श्रृंखला में नवीनतम सुपरकम्प्यूटर परम ईशान हैं. प्रौद्योगिकी प्रतिबंध के परिणामस्वरूप क्रे सुपरकंप्यूटर से वंचित किए जाने के बाद, भारत ने स्वदेशी सुपर कंप्यूटर और सुपर कंप्यूटिंग प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए एक कार्यक्रम शुरू किया. सुपर कंप्यूटर परमाणु हथियारों के विकास के लिए सहायता करने में सक्षम माना जाता था. इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के उद्देश्य से 1988 में सेंटर फ़ॉर डेवलपमेंट ऑफ़ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) की स्थापना की गई. 1990 में, एक प्रोटोटाइप का उत्पादन किया गया और इसका 1990 के ज्यूरिख सुपरकंप्यूटिंग शो में बेंचमार्क किया गया था. इसने ज़्यादातर अन्य प्रणालियों को पीछे छोड़ दिया. जिससे अमेरिका के बाद भारत को दूसरे नंबर पर रखा गया. इन प्रयास के परिणामस्वरूप 1991 में परम 8000 अस्तिव में आया.

7. ‘आर्यभट्ट’ भारत द्वारा निर्मित पहला मानव रहित उपग्रह जो भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक सफ़ल उपलब्धि थी.

19 अप्रैल, 1975 भारत का पहला उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ जिसे सोवियत संघ द्वारा शुरू किया गया था. ये गणितज्ञ आर्यभट्ट के नाम पर रखा गया था. इसने 5 दिन बाद काम करना बंद कर दिया था. लेकिन ये अपने आप में भारत के लिये एक बड़ी उपलब्धि थी. आर्यभट्ट को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा एक्स-रे खगोल विज्ञान, एयरोनॉमिक्स और सौर भौतिकी में प्रयोग करने के लिए बनाया गया था और इसरो के लिए नई संभावनाएं खोली गईं.

8. विश्व की सबसे तेज़ और सबसे भयानक एंटी शिप क्रूज़ मिसाइल.

ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज़ और सबसे भयानक एंटी-शिप क्रूज़ मिसाइल है. इसे पनडुब्बी से, पानी के जहाज से, विमान से या जमीन से भी छोड़ा जा सकता है. ब्रह्मोस (Brahmos) हथियार प्रणाली को संयुक्त रूप से भारत और रूस द्वारा विकसित किया गया है. ब्रह्मोस भारत और रूस के द्वारा विकसित की गई अब तक की सबसे आधुनिक प्रक्षेपास्त्र प्रणाली है और इसने भारत को मिसाइल तकनीक में अग्रणी देश बना दिया है.

9. पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह पर पहुंचने वाला भारत दुनिया का एकमात्र राष्ट्र.

भारत के मार्स ओर्बिटर मिशन (एमओएम) ने पहले ही प्रयास में लाल ग्रह की कक्षा में स्थापित होने का नया इतिहास रचने के दूसरे ही दिन मंगल ग्रह की पहली तस्वीरें भेजी. एमओएम ने मंगल ग्रह तक पहुंचने के लिए नौ महीनों में 6.5 करोड़ किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय की है. मंगल ग्रह पर पहुंचने वाला भारत एशिया का पहला और दुनिया चौथा देश बन गया है.

10. चंद्रयान -1, चांद पर भारत का पहला मिशन.

22 अक्टूबर, 2008 श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से चंद्रयान-1 को रवाना किया गया था. इस तरह भारत चंद्रमा की सतह पर यान भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बना था. चंद्रयान का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा की सतह के विस्तृत नक्शे और पानी के अंश और हीलियम की तलाश करना था. चंद्रयान मिशन को भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की एक बड़ी सफ़लता के रूप में देखा जाता है. भारत ज़ल्द ही चंद्रयान-2 को भी अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी में है.

11. इसरो ने सफ़लतापूर्वक अपने स्क्रैमजेट रॉकेट इंजन का परीक्षण किया.

अमेरिका, रूस और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के बाद भारत अत्याधुनिक ‘स्क्रैमजेट राकेट इंजन’ का सफ़ल परीक्षण करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है. भारत ने वायुमंडल की आॅक्सीजन का इस्तेमाल करते हुए इस इंजन का प्रक्षेपण किया है. इससे प्रक्षेपण की लागत कई गुना कम हो सकती है और हवा से आॅक्सीजन लेने वाले इंजन डिजाइन करने के इसरो के प्रयास में मदद मिल सकती है.

12. ‘इसरो’ द्वारा विकसित ‘स्पेस कैप्सूल रिकवर प्रयोग मिशन’.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा श्रीहरिकोटा से 10 जनवरी, 2007 को स्पेस कैप्सूल रिकवरी एक्सपेरिमेंट या आमतौर पर स्पेस कैप्सूल रिकवरी-1 शुरू किया गया था. इसका प्रक्षेपण तीन अन्य उपग्रहों के साथ ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान C7 रॉकेट द्वारा किया गया था. वो पृथ्वी के वायुमंडल में फिर से प्रवेश करने से पहले 12 दिनों के लिए कक्षा में रहा. 22 जनवरी को बंगाल की खाड़ी में नीचे उतरा.

13. GSLV D-5 रॉकेट स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन टेक्नोलॉजी युक्त.

अंतरिक्ष प्रक्षेपण यान के लिये क्रायोजेनिक टेक्नोलॉजी इंजन के सफ़ल प्रयास के साथ ही भारत अमेरिका, रूस, जापान, चीन और फ़्रांस के बाद दुनिया का छठवां देश बन गया है जिसके पास स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन की व्यवस्था है. ये टेक्नोलॉजी भारी उपग्रहों को भूस्थिर कक्षा में स्थापित करने में मदद करेगी. इसरो ने 5 जनवरी, 2014 के GSLV D-5 द्वारा जीसैट-5 मिशन और 27 सितंबर, 2015 को GSLV D-6 द्वारा जीसैट-6 का सफ़ल प्रक्षेपण, स्वदेशी क्रायोजेनिक चरण के साथ जीएसएलवी का दूसरा सफ़ल प्रक्षेपण था.

14. इनसैट, एशिया-पैसिफ़िक क्षेत्र में सबसे बड़ी घरेलू संचार प्रणाली.

भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह प्रणाली (इन्सैट) का पहला उपग्रह अप्रैल 1982 में छोड़ा गया था. इन्सैट इसरो द्वारा शुरू बहुउद्देशीय भू-स्थिर उपग्रहों की एक श्रृंखला है, जो दूरसंचार, प्रसारण, मौसम विज्ञान और खोज और बचाव कार्य के लिए उपयोग होता है. 1983 में शुरु किया हुआ इनसैट, एशिया-पैसिफ़िक क्षेत्र में सबसे बड़ी देशीय संचार प्रणाली है. ये भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग, दूरसंचार विभाग, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, आकाशवाणी और दूरदर्शन चैनल का एक संयुक्त उद्यम है.

15. इंडियन रीज़नल नैविगेशन सेटेलाइट सिस्टम (आईआरएनएसएस) भारत का ख़ुद का जीपीएस सिस्टम.

भारत ने अब ख़ुद का नेविगेशन सेटेलाइट सिस्टम विकसित कर लिया है. अब भारत को दूसरे देशों के नैविगेशन सेटेलाइट सिस्टम पर निर्भर नहीं होना पड़ता है. इस नैविगेशन प्रणाली से देश की सीमाओं सहित आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी. इस जीपीएस सिस्टम से सुदूरवर्ती क्षेत्रों, पर्वतों, जंगलों आदि में छोटी से छोटी गतिविधियों पर भी नज़र रखी जा सकेगी. इसरो के इस “रडार” पर सब कुछ होगा. खास बात ये कि नक्सल प्रभावित इलाकों की सटीक मॉनीटरिंग में ये कारगर साबित होगा. दावा किया जा रहा है कि ये स्वदेशी प्रणाली अमेरिका की जीपीएस (ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम) प्रणाली से दस गुना बेहतर है.

इसरो के कर्मठ वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत और लगन ने भारत को दुनिया के परमाणु संपन्न देशों की श्रेणी में खड़ा कर दिया है.

जिला भाजपा संघटन में आंरभ हुआ सर्जरी का दौर

सिवनी( राजनेतिक डेस्क) भाजपा में निर्दलीय विधायक मूनमुन रॉय के शामिल होने के बाद से ही जिला भाजपा अध्यक्ष राकेश पाल सिंह द्वारा जिला सघटन में फेरबदल आरभ कर दिया गया है,
मालूम हो कि इससे पूर्व लखनादौन मण्डल अध्यक्ष आशीष गोल्हनी को नियुक्त कर चुके है,जिन्हें पूर्व जिला अध्यक्ष नीता पटेरिया द्वारा नियुक्त मुकेश अग्रवाल की जगह दी गई है,

वही आज सिवनी व केवलारी विस के लिये अत्यंत महत्वपूर्ण छपारा मण्डल में सघटन की सर्जरी करते हुए

बालू राजेश जैन को पदमुक्त कर पूर्व में मण्डल अध्य्चक रहे ठाकुर धर्मेंद्र को पुनः ऊक्त दायित्व सौपा गया है,

सूत्रों की माने तो जल्द ही राकेस पाल सिह सिवनी ग्रामीण मण्डल एवं केवालरी मण्डल में भी बड़े फेरबदल करने की मंशा बना चुके है।