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सिवनी में बड़ी कार्रवाई! 167 CSC सेंटरों की आईडी बंद, पुलिस वेरिफिकेशन नहीं तो तुरंत सेवाएं ठप – सरकार का सख्त आदेश

सिवनी जिले में संचालित कॉमन सर्विस सेंटर (CSC e-Governance Services India Limited) पर प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है। राज्य स्तरीय निरीक्षण के बाद सिवनी में लगभग 167 CSC आईडी को ब्लॉक कर दिया गया, जिससे जिले में हड़कंप मच गया है।

जांच में सामने आया कि कई सेंटर सरकारी नियमों के अनुसार संचालित नहीं हो रहे थे, न तो अधिकृत ब्रांडिंग बोर्ड लगे थे और न ही निर्धारित शुल्क सूची प्रदर्शित थी। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यह कड़ा कदम उठाया।

निरीक्षण में क्या-क्या मिली गड़बड़ियां?

राज्य स्तरीय टीम द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं —

  • सेंटरों पर अधिकृत बोर्ड का अभाव
  • फीस चार्ट प्रदर्शित नहीं
  • दस्तावेजों की अपूर्णता
  • अनधिकृत सेवाओं का संचालन
  • नागरिकों से मनमानी वसूली की शिकायतें

इन खामियों के कारण सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 167 आईडी निष्क्रिय कर दीं, जिससे संबंधित सेंटरों की सभी डिजिटल सेवाएं बंद हो गईं।

अब पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य, नहीं तो सेंटर सील

जिला प्रबंधक शिवांशु जंघेला ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि:

👉 सभी CSC संचालकों को पुलिस चरित्र प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से अपलोड करना होगा।
👉 प्रमाण पत्र अपलोड नहीं करने पर सभी सेवाएं तत्काल बंद कर दी जाएंगी।

यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि जन सेवा केंद्रों के माध्यम से —

  • आधार सेवाएं
  • बैंकिंग लेनदेन
  • सरकारी योजनाओं का डेटा
  • नागरिकों की निजी जानकारी

जैसा संवेदनशील डेटा प्रोसेस होता है

हाल ही में कई जिलों में फर्जी पहचान पत्र और धोखाधड़ी के मामले सामने आने के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है।

बैंकिंग सेवाओं के लिए RBI के नियम सख्त

अधिकांश CSC अब बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट के रूप में भी काम कर रहे हैं, जहां पैसा जमा-निकासी की सुविधा मिलती है। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के अनुसार पुलिस सत्यापन कानूनी रूप से आवश्यक है।

यदि कोई संचालक वेरिफिकेशन नहीं कराता है तो —

  • उसकी आईडी निष्क्रिय
  • बैंकिंग सेवाएं बंद
  • भविष्य में लाइसेंस रद्द

जैसी सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

प्रशासन का क्या कहना है?

अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई जनता का विश्वास बनाए रखने और भ्रष्टाचार रोकने के लिए की गई है।

“CSC जनता और सरकार के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। यहां किसी भी प्रकार की लापरवाही या धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?

सकारात्मक असर:

✔ पारदर्शिता बढ़ेगी
✔ फर्जीवाड़ा रुकेगा
✔ सुरक्षित बैंकिंग
✔ सही शुल्क पर सेवाएं

अस्थायी असर:

❌ कुछ सेंटर बंद होने से सेवाओं में देरी

लेकिन प्रशासन का दावा है कि जल्द ही सभी सेंटर नियमों के तहत दोबारा चालू होंगे।

सिवनी में CSC सेंटरों पर हुई यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है —
“नियमों का पालन करो, वरना सेवाएं बंद।”

सरकार का यह कदम डिजिटल इंडिया मिशन को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा प्रयास माना जा रहा है। अब देखना होगा कि संचालक कितनी जल्दी नियमों का पालन कर सेवाएं बहाल कर पाते हैं।

सिवनी: मंदिरों में लगातार हो रही चोरी का पर्दाफाश! कोतवाली पुलिस ने पकड़े 2 विधि विवादित किशोर, 6.30 लाख का माल बरामद

सिवनी। शहर में पिछले कुछ दिनों से मंदिरों में हो रही चोरी की घटनाओं ने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी थी। लेकिन अब कोतवाली पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए इस मामले का बड़ा खुलासा कर दिया है। पुलिस ने दो विधि विवादित किशोरों को अभिरक्षा में लेकर करीब 6 लाख 30 हजार रुपये का चोरी का माल बरामद किया है।

इस कार्रवाई के बाद इलाके में राहत की सांस ली जा रही है, वहीं पुलिस टीम की सराहना भी हो रही है।

कैसे खुला चोरी का राज?

पुलिस अधीक्षक श्री सुनील मेहता के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री दीपक मिश्रा तथा एसडीओपी श्री संजीव परते के मार्गदर्शन में कोतवाली थाना पुलिस लगातार संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी।

मंदिरों से लगातार मिल रही शिकायतों के बाद एक विशेष टीम गठित की गई। तकनीकी साक्ष्यों, स्थानीय पूछताछ और मुखबिर तंत्र की मदद से पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही।

इन मंदिरों को बनाया गया निशाना

काली मंदिर

  • चांदी की पायल चोरी
  • कीमत लगभग ₹9,000

हनुमान मंदिर (भैंरोगंज-प्रतापुर रोड)

  • चांदी का मुकुट
  • 4 नग चांदी के आभूषण
  • नकदी ₹1,920
  • कुल कीमत करीब ₹6,000

राधाकृष्ण मंदिर परिसर

  • मंदिर का ताला तोड़कर नकदी चोरी
  • ₹12,000 की चोरी

चौंकाने वाला खुलासा – पहले भी कर चुके थे वारदात

पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने 14 जनवरी की रात छपारा क्षेत्र के एक सूने मकान से दो कैमरे भी चोरी किए थे, जिनकी कीमत करीब 6 लाख रुपये बताई गई है।

पुलिस की रणनीति बनी सफलता की कुंजी

  • घटनास्थल के आसपास सघन जांच
  • स्थानीय लोगों से पूछताछ
  • तकनीकी साक्ष्य और मुखबिर सूचना
  • संदिग्धों की पहचान कर हिरासत

पुलिस ने दोनों किशोरों को अभिरक्षा में लेकर किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया है।

इन पुलिसकर्मियों की रही विशेष भूमिका

थाना प्रभारी निरीक्षक सतीश तिवारी सहित पूरी टीम – सर्जन जसवंत ठाकुर, आरक्षक मनोज पाल, लक्ष्मी बागड़े, सिद्धार्थ दुबे, सतीश इवांती, राजेंद्र राजपूत, रविशंकर सोनी और चालक इरफान – की मेहनत से यह सफलता मिली।

शहर में फिर लौटी सुरक्षा की भावना

लगातार हो रही मंदिर चोरी से परेशान श्रद्धालुओं के लिए यह खबर राहत लेकर आई है। पुलिस की तत्परता ने साबित कर दिया कि अपराधी कितने भी शातिर क्यों न हों, कानून की पकड़ से बच नहीं सकते।

सिवनी: नितिन शुक्ला ने छोड़ी कांग्रेस, छात्र नेता धनंजय को बताया ब्लैकमेलर, स्कूलों में दहशत, शिक्षक प्रताड़ित, विधायक रजनीश का पूर्ण समर्थन!

Seoni News: स्थानीय शिक्षा संस्थानों में इन दिनों माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। मामला तब और तूल पकड़ गया जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से इस्तीफ़ा देने वाले नेता नितिन शुक्ला ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि क्षेत्र में एक तथाकथित छात्र नेता लगातार स्कूलों और कॉलेजों को निशाना बना रहा है और शिक्षकों पर दबाव बनाकर ब्लैकमेलिंग कर रहा है।

नितिन शुक्ला के अनुसार, यह छात्र नेता खुद को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने का दावा करता है और सामान्य वर्ग के लोगों को चुन-चुनकर प्रताड़ित कर रहा है।

‘ब्लैकमेलर छात्र नेता’ का नाम आया सामने

जानकारी के मुताबिक, नितिन शुक्ला ने सीधे तौर पर धनंजय सिंह पर आरोप लगाते हुए उन्हें “ब्लैकमेल छात्र नेता” बताया है।
उनका कहना है कि बीते कई महीनों से धनंजय सिंह लगातार शिक्षण संस्थानों में जाकर विवाद खड़ा कर रहे हैं और छोटी-छोटी बातों को सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर वायरल कर रहे हैं।

शुक्ला का आरोप है कि इन वीडियो का इस्तेमाल दबाव बनाने और बदनाम करने के लिए किया जा रहा है।

नेताजी सुभाष चंद्र विद्यालय के शिक्षक परेशान

मामले का सबसे ज्यादा असर नेताजी सुभाष चंद्र बोस विद्यालय में देखने को मिल रहा है।
बताया जा रहा है कि यहां के ब्राह्मण शिक्षकों को पिछले 3–4 महीनों से लगातार टारगेट किया जा रहा है।

शिक्षकों का आरोप है कि:

  • बिना अनुमति स्कूल परिसर में प्रवेश
  • वीडियो रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया पर पोस्ट
  • बेबुनियाद आरोप
  • मानसिक दबाव और बदनामी

इन घटनाओं के कारण स्टाफ में भय और असुरक्षा का माहौल है।

विधायक के समर्थन का भी दावा

नितिन शुक्ला ने यह भी दावा किया कि इस छात्र नेता को स्थानीय विधायक रजनीश का समर्थन प्राप्त है, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हो पा रही।
हालांकि विधायक या संबंधित पक्ष की ओर से अभी तक इस आरोप पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

राजनीतिक गलियारों में मचा हड़कंप

कांग्रेस से इस्तीफा देने के तुरंत बाद इस तरह के आरोपों ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • शिक्षा संस्थानों में राजनीति का दखल खतरनाक है
  • सोशल मीडिया का दुरुपयोग बढ़ रहा है
  • शिक्षक वर्ग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

क्षेत्र के अभिभावकों और शिक्षकों ने कहा है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो शिक्षा का माहौल प्रभावित होगा।
उनका कहना है कि स्कूलों को राजनीति और दबाव की संस्कृति से मुक्त रखना जरूरी है।

यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति या संस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की सुरक्षा और गरिमा से जुड़ा है।
अब सबकी निगाहें प्रशासनिक जांच और आने वाले कदमों पर टिकी हैं।

सिवनी: 42 साल की सेवा, हजारों छात्रों का भविष्य संवारने वाले गुरुजी को सुकतरा ने दी भावुक विदाई — पूरा गांव हुआ नम आंखों से एकजुट

Seoni News : मध्यप्रदेश के छोटे से गांव सुकतरा में आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया, जब विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक अशोक श्रीवास्त्री ने 42 वर्षों की निरंतर, ईमानदार और समर्पित सेवा के बाद सेवानिवृत्ति ली।

इस अवसर पर गांव के हर वर्ग—बुजुर्ग, युवा, छात्र, अभिभावक और विद्यालय परिवार—ने जिस भावुकता और सम्मान के साथ उन्हें विदाई दी, वह किसी उत्सव से कम नहीं था।

42 वर्षों का समर्पण: सिर्फ नौकरी नहीं, एक मिशन

अशोक श्रीवास्त्री जी ने अपने कार्यकाल के दौरान हजारों छात्रों को शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कार भी दिए।

गांव के कई युवा आज सरकारी अधिकारी, शिक्षक, पुलिसकर्मी और इंजीनियर बन चुके हैं—और वे अपनी सफलता का श्रेय अपने “गुरुजी” को देते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि:

“गुरुजी ने कभी समय नहीं देखा, हमेशा बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता दी। बारिश हो या धूप, वे रोज समय पर स्कूल पहुंचे।”

भव्य समारोह में हुआ सम्मान

विद्यालय परिसर में आयोजित विदाई समारोह में:

  • शॉल और श्रीफल से सम्मान
  • माल्यार्पण
  • स्मृति चिन्ह भेंट
  • छात्रों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम
  • भावुक भाषण

जब छात्रों ने उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया, तो माहौल बेहद भावुक हो गया। कई छात्रों और ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं।

गांव बोला – “आप हमारे दिलों में हमेशा रहेंगे”

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में जहां लोग नौकरी को सिर्फ वेतन से जोड़ते हैं, वहीं अशोक श्रीवास्त्री जी ने शिक्षा को सेवा और समाज निर्माण का माध्यम बनाया।

विद्यालय परिवार ने उन्हें “जीवन पर्यंत प्रेरणा स्रोत” की उपाधि दी।

📚  शिक्षक का संदेश

सेवानिवृत्ति के अवसर पर उन्होंने कहा:

“मैंने हमेशा बच्चों को अपने परिवार की तरह माना। अगर मेरे पढ़ाए छात्र आगे बढ़ रहे हैं, तो यही मेरी सबसे बड़ी कमाई है।”

उनके इस संदेश ने सभी के दिलों को छू लिया।

क्यों खास है यह विदाई?

आज के दौर में किसी शिक्षक को ऐसा जनसम्मान मिलना दुर्लभ है।

यह विदाई साबित करती है कि सच्ची निष्ठा और समर्पण का सम्मान समाज हमेशा करता है।

समाज के लिए मिसाल

यह आयोजन केवल एक शिक्षक की रिटायरमेंट नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंत मिसाल बन गया।

सुकतरा गांव ने दिखा दिया कि असली नायक वही हैं जो चुपचाप समाज का भविष्य गढ़ते हैं।

UGC के नए नियमों पर SEONI में बवाल! सकल सवर्ण समाज सड़कों पर, बोले – ‘प्रतिभा के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं

सिवनी में शनिवार को सामान्य वर्ग (सवर्ण समाज) के लोगों का आक्रोश सड़कों पर साफ दिखाई दिया। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा प्रस्तावित ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु विनियम 2026’ के विरोध में कचहरी चौक पर बड़ी संख्या में नागरिक, छात्र, अभिभावक और सामाजिक संगठन एकत्रित हुए।

नारेबाजी, रैली और ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यह नया विनियम ‘समानता’ के नाम पर ‘मेधावी छात्रों के साथ भेदभाव’ करता है और सामान्य वर्ग के छात्रों के अवसरों को सीमित करता है।

क्या है पूरा मामला?

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लाया गया यह प्रस्तावित विनियम 2026 कई ऐसे प्रावधानों से भरा है, जो सामान्य वर्ग (General Category) के छात्रों और शिक्षकों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

ज्ञापन में कहा गया कि:

“समानता और समता के नाम पर प्रतिभा की बलि नहीं दी जा सकती। शिक्षा में अवसर योग्यता के आधार पर मिलने चाहिए, न कि जातिगत वर्गीकरण से।”

कचहरी चौक पर गूंजे नारे

सुबह से ही लोग तख्तियां और बैनर लेकर कचहरी चौक पहुंचे।
काला कानून वापस लो”, “प्रतिभा का सम्मान करो” और “शिक्षा में भेदभाव बंद करो” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।

इसके बाद रैली निकालकर प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई।

प्रमुख आपत्तियां क्या हैं?

सकल सवर्ण समाज ने विनियम के खिलाफ कई गंभीर सवाल उठाए:

  • ‘समता’ की जाति आधारित व्याख्या
  • EWS (आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग) के हितों पर प्रहार
  • शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता का हनन
  • भेदभावपूर्ण दंड प्रक्रिया
  • झूठी शिकायतों पर अन्य वर्गों के खिलाफ कोई दंडात्मक प्रावधान नहीं

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह नियम सामान्य वर्ग के छात्रों को मानसिक और प्रशासनिक रूप से परेशान कर सकता है।

समाज की प्रमुख मांगें

सकल सवर्ण समाज ने सरकार और प्रशासन के सामने स्पष्ट मांगें रखीं:

✅ विनियम 2026 पर तत्काल रोक
✅ सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच समिति
✅ संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) के तहत समीक्षा
✅ जातिगत विभाजन बढ़ाने वाले कानूनों को समाप्त करना

आगे क्या होगा?

समाज के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन जिला स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक ले जाया जाएगा।

एक वक्ता ने कहा:

“हम ऐसा भारत चाहते हैं जहां प्रतिभा को सम्मान मिले। किसी भी छात्र के साथ जाति के आधार पर अन्याय स्वीकार नहीं होगा।”

सिवनी का यह प्रदर्शन सिर्फ एक जिले का विरोध नहीं, बल्कि देशभर में शिक्षा नीति पर बढ़ती असंतोष की भावना को दर्शाता है। अब सबकी निगाहें सरकार और UGC के अगले कदम पर टिकी हैं।

क्या सरकार इस आवाज़ को सुनेगी या आंदोलन और तेज होगा? आने वाले दिन तय करेंगे।

खबर सत्ता का बड़ा असर: 24 घंटे में हिला सिस्टम, हिटलरशाही पर चला डीएम नान का डंडा, धान घोटाले में वेयरहाउस बंद, मचा हड़कंप

सिवनी। “खबर सत्ता” द्वारा 28 जनवरी 2026 को प्रमुखता से प्रकाशित खबर “सर्वेयर साइडलाइन, वेयरहाउस मालिक ऑन ड्यूटी! सिवनी में धान खरीदी का खेल: शासन के नियम ताक पर, गोदाम मालिक बने खुद के जज और जूरी” का असर महज 24 घंटों में दिखाई देने लगा। प्रशासन हरकत में आया और जिले में चल रहे एक बड़े खेल का पर्दाफाश करते हुए सख्त कार्रवाई की गई।

समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को लेकर वैसे तो पहले भी कई अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन खरीदी के अंतिम चरण और गोदामों में धान भंडारण के दौरान सर्वेयर की भूमिका निभा रहे वेयरहाउस संचालकों की मनमानी पहली बार इतने स्पष्ट रूप से उजागर हुई।

जिला प्रबंधक, मध्यप्रदेश सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन लिमिटेड सिवनी सुरेश सनखेरे के संज्ञान में जैसे ही यह मामला आया, उन्होंने बिना किसी देरी के वेयरहाउस का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जो सच्चाई सामने आई, उसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए।

जब वेयरहाउस मालिक ही बन गया सर्वेयर

जांच में सामने आया कि लंबे समय से वेयरहाउस संचालक और उसके परिवार के सदस्य ही सर्वेयर की भूमिका निभा रहे थे। ट्रकों में भरकर आने वाली अच्छी गुणवत्ता की धान को भी मनमाने ढंग से “रिजेक्ट” किया जा रहा था। इससे धान खरीदी केंद्र प्रभारी लगातार परेशान हो रहे थे और असली सर्वेयर भी इस दबाव से त्रस्त थे।

शासन की नीतियों का गलत फायदा उठाकर वेयरहाउस संचालक खुद ही जज और जूरी बन बैठा था। ट्रक ड्राइवरों से लेकर केंद्र प्रभारियों तक, सभी उसकी ‘हिटलरशाही’ का शिकार थे।

ट्रकों की जांच, ड्राइवरों के बयान और मौके पर फटकार

जिला प्रबंधक ने मौके पर पहुंचकर धान से भरे ट्रकों की जांच करवाई। वास्तविक सर्वेयर की मौजूदगी में ट्रकों को खाली कराया गया और ड्राइवरों से भी सीधे बातचीत की गई। जैसे-जैसे परतें खुलती गईं, पूरा खेल सामने आता गया। अनावश्यक रूप से धान रिजेक्ट कर किसानों और केंद्र प्रभारियों को परेशान करने वाले वेयरहाउस संचालक को मौके पर ही कड़ी फटकार लगाई गई।

वेयरहाउस भी किया गया बंद

निरीक्षण के दौरान न सिर्फ सर्वेयर से जुड़ी गड़बड़ियां उजागर हुईं, बल्कि वेयरहाउस में कई गंभीर अनियमितताएं और तकनीकी कमियां भी पाई गईं। इन सबको देखते हुए जिला प्रबंधक ने सख्त रुख अपनाते हुए वेयरहाउस को तत्काल प्रभाव से बंद करने की कार्रवाई कर दी।

यह कदम जिले के उन सभी धान खरीदी केंद्रों के लिए बड़ी राहत साबित हुआ है, जिनका परिवहन अभी शेष है और जो अब तक इस वेयरहाउस संचालक की मनमानी से परेशान थे।

रिजेक्ट धान अब तक गोदाम में क्यों पड़ी है?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन धानों को सर्वेयर द्वारा रिजेक्ट किया गया, वे अब तक गोदाम के बाहर सजाकर क्यों रखी गई हैं?
इसकी जानकारी कई धान खरीदी केंद्रों को तक नहीं दी गई। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि धान की गुणवत्ता जांच प्रक्रिया को भी वेयरहाउस संचालक ने अपने कब्जे में ले रखा था और सर्वेयर की निष्पक्षता पर ग्रहण लगा दिया गया था।

प्रशासन की निष्पक्षता से मिली राहत

जिला प्रबंधक की इस निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई से जिले की समितियों, समूहों और धान खरीदी केंद्र प्रभारियों ने राहत की सांस ली है। यह कार्रवाई न केवल एक वेयरहाउस संचालक की मनमानी पर रोक है, बल्कि पूरे सिस्टम को आईना दिखाने वाली मिसाल भी है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन आगे भी इसी सख्ती से धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी और न्यायसंगत बनाए रख पाता है या नहीं।

सिवनी में FSSAI की जांच या खुला फर्जीवाड़ा? FSO महेंद्र परते के सामने निजी ड्राइवर शशि शंकर सनोडिया ने पैक किए खाद्य सैंपल, VIRAL VIDEO से मचा प्रशासन में भूचाल!

सिवनी: सिवनी जिले की लखनादौन तहसील से सामने आया एक वायरल वीडियो इस वक्त पूरे जिले में सनसनी का कारण बना हुआ है। गणेशगंज स्थित गुप्ता ढाबा में हुई खाद्य सुरक्षा जांच का यह वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि खाद्य पदार्थों के सैंपल पैक करने की जिम्मेदारी किसी अधिकृत कर्मचारी के बजाय खाद्य सुरक्षा अधिकारी (FSO) महेंद्र कुमार परते के निजी वाहन चालक शशि शंकर सनोडिया निभा रहा है, और यह सब अधिकारी की मौजूदगी में हो रहा है।

इस घटना ने खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक ईमानदारी पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग पूछ रहे हैं कि क्या FSSAI की जांच अब कानून के दायरे में नहीं, बल्कि “निजी सुविधा” के आधार पर चल रही है?

नियम क्या कहते हैं, और यहाँ क्या हुआ?

खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 38(1) एवं 38(2) के अनुसार:

  • खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण
  • खाद्य सैंपल लेना
  • सैंपल को सील करना
  • पैकिंग व लेबलिंग करना

ये सभी कार्य केवल अधिकृत खाद्य सुरक्षा अधिकारी (Food Safety Officer) या उनके प्रशिक्षित विभागीय कर्मचारियों द्वारा ही किए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, Food Safety and Standards Rules, 2011 में भी यह स्पष्ट किया गया है कि सैंपलिंग प्रक्रिया किसी भी परिस्थिति में किसी अनधिकृत व्यक्ति से नहीं करवाई जा सकती।

लेकिन लखनादौन के इस वायरल वीडियो में जो दिखाई दे रहा है, वह इन सभी नियमों के ठीक विपरीत है। वीडियो के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया एक निजी व्यक्ति, यानी FSO के निजी चालक शशि शंकर सनोडिया द्वारा की जा रही है।

सवालों के घेरे में पूरी कार्रवाई

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब सैंपलिंग की प्रक्रिया ही नियमों के खिलाफ हो, तो उस पर आधारित कोई भी रिपोर्ट या कार्रवाई कितनी विश्वसनीय मानी जाएगी?

लोगों के मन में कई गंभीर आशंकाएं जन्म ले रही हैं:

  • क्या सैंपल प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है?
  • क्या ढाबा संचालकों पर अनावश्यक दबाव बनाने के लिए ऐसा किया गया?
  • या फिर किसी “सेटिंग” के तहत पूरी प्रक्रिया को मनचाहे ढंग से मोड़ा गया?

यही वजह है कि यह मामला केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि संभावित प्रशासनिक संरक्षण में हुए नियम उल्लंघन का बनता जा रहा है।

वायरल वीडियो बना सबसे बड़ा सबूत

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो इस पूरे मामले का सबसे ठोस प्रमाण बन चुका है। आम लोग खुलकर सवाल कर रहे हैं:

  • क्या FSO को कानून और नियमों की जानकारी नहीं थी?
  • या फिर जानबूझकर एक निजी व्यक्ति से सरकारी कार्य करवाया गया?
  • अगर यह सब नियमों के तहत था, तो वीडियो वायरल होने के बाद अब तक कोई स्पष्टीकरण या कार्रवाई क्यों नहीं?

चुप्पी अब विभाग की सबसे बड़ी कमजोरी बनती जा रही है।

जनस्वास्थ्य से सीधा खिलवाड़

खाद्य सुरक्षा कोई साधारण औपचारिकता नहीं, बल्कि सीधे-सीधे आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है। यदि सैंपलिंग प्रक्रिया में ही गड़बड़ी हो जाए, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं:

  • मिलावटी या खराब खाद्य पदार्थ कानूनी कार्रवाई से बच सकते हैं
  • निर्दोष व्यापारियों को झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है

दोनों ही स्थितियां समाज और प्रशासन, दोनों के लिए बेहद खतरनाक हैं।

कानून की नजर में क्या होगा?

यदि यह सिद्ध होता है कि सैंपल प्रक्रिया नियमों के विपरीत की गई है, तो धारा 42 के अंतर्गत पूरी जांच प्रक्रिया और उस पर आधारित कार्रवाई को न्यायालय में अमान्य भी ठहराया जा सकता है। यानी पूरा केस कानूनी रूप से कमजोर हो जाएगा।

अब जिला प्रशासन की अग्निपरीक्षा

अब सबसे बड़ा सवाल यही है:

  • क्या जिला प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा?
  • क्या जिम्मेदार FSO और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
  • या फिर इसे “तकनीकी गलती” बताकर दबा दिया जाएगा?

अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह मामला सिवनी जिले की प्रशासनिक व्यवस्था पर एक स्थायी कलंक बन सकता है।

क्या कहते है FSO महेंद्र कुमार परते

वायरल वीडियो के मामले में जब FSO महेंद्र कुमार परते से खबर सत्ता द्वारा बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि मेरे निजी वाहन चालाक द्वारा सिर्फ मेरी मदद की गई थी, सभी प्रकार के ऑफिसियल कार्य मेरे द्वारा ही किए जाते है, मेरे वहान चालक द्वारा साथ में रहने पर कभी कभी मदद कर दी जाती है. हमारा विभाग पिछले कई वर्षों से स्टाफ की कमी से जूझ रहा है जिसकी जानकारी हमारे द्वारा लगातार ही वरिश अधिकारीयों को दी जाती रही है किन्तु अभी तक स्टाफ की कोई व्यवस्था नहीं हुई है जिसकी वजह से हमें मदद लेनी पड़ती है.

सिवनी में मामूली विवाद पर जानलेवा हमला! फरार 2 आरोपी चाकू सहित गिरफ्तार, कोतवाली पुलिस की बड़ी कार्रवाई

सिवनी। शहर में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वालों पर अब सख्ती तय है। हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराध में फरार चल रहे दो आरोपियों को कोतवाली पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई न केवल पुलिस की सक्रियता को दर्शाती है, बल्कि अपराधियों के मन में खौफ भी पैदा करती है।

पुलिस अधीक्षक श्री सुनील मेहता के स्पष्ट निर्देश हैं कि जिले में अपराध किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्हीं के मार्गदर्शन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री दीपक मिश्रा एवं अनुविभागीय अधिकारी पुलिस श्री सचिन परते के नेतृत्व में कोतवाली पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले का सफलतापूर्वक खुलासा किया।

क्या है पूरा मामला?

दिनांक 01/01/2026 को प्रार्थी राहुल कश्यप, निवासी दादू मोहल्ला, संजय वार्ड सिवनी ने थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई कि मठ मंदिर के पीछे खुले मैदान में हल्ला करने की बात को लेकर आजाद वार्ड सिवनी निवासी मोनू दुबे और मुन्ना कश्यप से विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों आरोपियों ने राहुल कश्यप पर धारदार चाकू से जान से मारने की नीयत से हमला कर दिया।

हमले में राहुल कश्यप गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस ने तत्काल हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की और फरार आरोपियों की तलाश में विशेष टीम गठित की गई।

ड्रीमलैंड सिटी के पास से हुई गिरफ्तारी

लगातार पतासाजी और मुखबिरों की सूचना पर दिनांक 28 जनवरी 2026 को कोतवाली पुलिस ने ड्रीमलैंड सिटी के पास से दोनों फरार आरोपियों को घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद उन्हें माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जिला जेल सिवनी भेज दिया गया।

गिरफ्तार आरोपी

  1. निलेश कश्यप उर्फ मुन्ना, पिता प्रेमलाल, उम्र 34 वर्ष, निवासी आजाद वार्ड, सिवनी
  2. निलेश दुबे उर्फ मोनू, पिता स्वदेश दुबे, उम्र 26 वर्ष, निवासी आजाद वार्ड, सिवनी

🔪 जप्ती सामग्री

  • 01 धारदार चाकू, जिससे हमला किया गया था

पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका

इस सफल कार्रवाई में थाना प्रभारी कोतवाली श्री सतीश तिवारी, सउनि प्रमोद मालवी, प्र.आर. मनोज पाल, नवीन तिवारी, आर. सतीश इनवाती, सिद्धार्थ दुबे, प्रतीक बघेल, तथा चालक आर. इरफान की विशेष भूमिका रही।

पुलिस टीम की सजगता और तेज़ कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि सिवनी में अपराध करने वालों के लिए अब कोई जगह नहीं है।

शहर में फैली चर्चा

क्रिकेट के मामूली विवाद से शुरू हुआ मामला जानलेवा हमले तक पहुंच गया। इस घटना ने युवाओं में बढ़ती आक्रामकता और कानून के प्रति लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस की इस कार्रवाई से आम जनता में सुरक्षा की भावना और मजबूत हुई है।

सर्वेयर साइडलाइन, वेयरहाउस मालिक ऑन ड्यूटी!” सिवनी में धान खरीदी का खेल: शासन के नियम ताक पर, गोदाम मालिक बने खुद के जज और जूरी

सिवनी में धान खरीदी का खेल: शासन के नियम ताक पर, गोदाम मालिक बने खुद के जज और जूरी | सिवनी जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी अब अपने अंतिम चरण में है, लेकिन इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया पर वेयरहाउस मालिकों की मनमानी भारी पड़ती नजर आ रही है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि शासन द्वारा नियुक्त अधिकृत सर्वेयर की भूमिका लगभग खत्म होती जा रही है और उनकी जगह वेयरहाउस मालिक व उनके परिवार के सदस्य खुद ही “सर्वेयर” बनकर फैसले सुना रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, सर्वेयर द्वारा गुणवत्ता जांच कर “पास” की गई धान की बोरियों को भी वेयरहाउस स्तर पर अलग कर दिया जा रहा है। इससे न केवल धान खरीदी प्रभारी परेशान हो रहे हैं, बल्कि समितियों पर अनावश्यक दबाव और ब्लैकमेलिंग जैसी स्थिति भी बनती जा रही है। यह पूरा मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

जब सर्वेयर की मुहर भी बेअसर हो जाए

शासन के दिशा-निर्देश स्पष्ट हैं कि धान की गुणवत्ता की अंतिम जांच अधिकृत सर्वेयर द्वारा की जाएगी। सर्वेयर की रिपोर्ट के बाद ही धान का भंडारण केंद्रों में किया जाना है। लेकिन सिवनी जिले में हालात उलट हैं।

यहां वेयरहाउस मालिक और उनके परिजन खुद ही गुणवत्ता जांच के नाम पर धान को रिजेक्ट कर रहे हैं, वह भी तब जब अधिकृत सर्वेयर पहले ही उसे मानक के अनुरूप घोषित कर चुका हो। यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि धान खरीदी प्रभारी और समितियों के लिए गंभीर परेशानी का कारण भी बन रहा है।

गोदामों के बाहर “रिजेक्ट धान” की कतार

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिले के कई गोदामों के बाहर सर्वेयर द्वारा रिजेक्ट की गई धान की बोरियां लंबे समय से पड़ी हुई हैं।

हैरानी की बात यह है कि धान खरीदी समितियों को अब तक यह भी आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई कि उनकी बोरियां रिजेक्ट कर दी गई हैं।

इससे साफ संकेत मिलता है कि प्रशासन की नाक के नीचे वेयरहाउस मालिक किस तरह अपने तरीके से सिस्टम चला रहे हैं। अंतिम समय में इसका खामियाजा सीधे धान खरीदी प्रभारी और समितियों को भुगतना पड़ सकता है।

ब्लैकमेलिंग का खतरा, प्रशासन मौन

धान खरीदी प्रभारी अब यह मानने लगे हैं कि उन्हें जानबूझकर मानसिक दबाव में रखा जा रहा है।

कई मामलों में सही और मानक धान को भी गलत साबित करने के प्रयास हो रहे हैं, ताकि केंद्र प्रभारियों को ब्लैकमेल किया जा सके।

जबकि नियम साफ कहते हैं कि वेयरहाउस मालिक या उनके परिवार के सदस्य को परिवहन में आए ट्रकों की परखी लगाकर जांच करने का कोई अधिकार नहीं है। फिर भी सिवनी जिले की उपार्जन समिति की आंखों के सामने यह सब खुलेआम चल रहा है।

कलेक्टर के लिए बड़ी चुनौती

सिवनी जैसे संवेदनशील जिले में इस तरह का खुला खेल जिला प्रशासन और विशेष रूप से जिला कलेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

यदि समय रहते गोदामों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह मामला बड़े घोटाले का रूप भी ले सकता है।

“गोदामों की जांच हो तो काला सच सामने आएगा”

स्थानीय लोगों और धान खरीदी से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अगर सभी गोदामों की जमीनी स्तर पर जांच हो जाए, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।

राजनीतिक प्रभाव से जुड़े कुछ वेयरहाउस मालिकों पर आरोप है कि उन्होंने सर्वेयर की अनदेखी कर अमानक धान का भंडारण भी अपने गोदामों में कर रखा है।

जब इस विषय में एक गोदाम मालिक से बात की गई तो उन्होंने माना कि

“मिलर्स को धान देने के समय गुणवत्ता हमारी जिम्मेदारी होती है। सर्वेयर के अलावा हम भी धान की जांच करते हैं।”

यह बयान ही साबित करता है कि अब सर्वेयर की भूमिका को वेयरहाउस मालिक खुद ही चुनौती दे रहे हैं।

सवाल जो जवाब मांगते हैं

  • क्या शासन द्वारा नियुक्त सर्वेयर सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गए हैं?
  • क्या वेयरहाउस मालिकों को कानून से ऊपर मान लिया गया है?
  • क्या प्रशासन इस मनमानी पर लगाम लगाएगा या फिर आंखें मूंदे रहेगा?

जब तक इन सवालों का जवाब नहीं मिलेगा, तब तक धान खरीदी व्यवस्था पर सवालिया निशान बना रहेगा।

SEONI में सवर्ण समाज सड़कों पर उतरने को तैयार! 29 जनवरी को सिवनी में होगा बड़ा ऐलान, UGC के नए नियमों के खिलाफ निर्णायक जंग

सिवनी। शिक्षा और अधिकारों की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। सकल सवर्ण समाज सिवनी के तत्वाधान में 29 जनवरी 2026 को शाम 6 बजे से अग्रवाल धर्मशाला दुर्गा चौक सिवनी में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया जा रहा है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार करना है, जो UGC (University Grants Commission) के नए नियमों के विरोध में किया जाएगा।

सकल सवर्ण समाज का स्पष्ट और दो टूक संदेश है – “न्याय सवर्णों का अधिकार है, और इससे कोई समझौता नहीं होगा। UGC के नए नियम वापस लेने ही होंगे।”

यह बैठक केवल एक सामान्य सभा नहीं, बल्कि आने वाले बड़े आंदोलन की नींव मानी जा रही है। समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी, युवा कार्यकर्ता, शिक्षाविद और जागरूक नागरिक इस बैठक में शामिल होकर आंदोलन की दिशा और दशा तय करेंगे।

UGC के नए नियमों से क्यों भड़का सवर्ण समाज?

UGC द्वारा लागू किए गए नए नियमों को लेकर सवर्ण समाज में भारी नाराजगी देखी जा रही है। समाज का मानना है कि ये नियम

  • सवर्ण वर्ग के अधिकारों का हनन करते हैं,
  • शिक्षा में समान अवसर की भावना को कमजोर करते हैं,
  • और योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।

इसी कारण अब सवर्ण समाज ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उनका कहना है कि जब तक नियम वापस नहीं लिए जाते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

अग्रवाल धर्मशाळा बनेगा आंदोलन की रणनीति का केंद्र

29 जनवरी 2026 को शाम 6 बजे से अग्रवाल धर्मशाळा दुर्गा चौक में होने वाली बैठक में

  • आंदोलन की तिथि तय की जाएगी,
  • प्रदर्शन की रणनीति बनाई जाएगी,
  • जिम्मेदारियों का बंटवारा होगा,
  • और जन-आंदोलन को व्यापक रूप देने की योजना तैयार की जाएगी।

सकल सवर्ण समाज सिवनी ने जिले के सभी सवर्ण समाज के लोगों से इस बैठक में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की है।

यह केवल बैठक नहीं, अधिकारों की हुंकार है

निवेदक सकल सवर्ण समाज सिवनी के अनुसार, यह बैठक केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सवर्ण समाज की एकजुटता और संघर्ष की शुरुआत है। यह संदेश साफ है कि अब चुप बैठने का समय नहीं है, बल्कि अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर आवाज बुलंद करने का समय है।