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Safe Click 2.0 अभियान के तहत मध्यप्रदेश पुलिस ने स्कूल, गांव, रेलवे स्टेशन और सोशल मीडिया के जरिए लाखों लोगों को किया साइबर जागरूक

Safe Click 2.0: मध्यप्रदेश पुलिस का ‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान अब केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा को लेकर जनभागीदारी का बड़ा आंदोलन बनता जा रहा है। प्रदेशभर में स्कूलों, कॉलेजों, गांवों, रेलवे स्टेशनों, बाजारों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिकों को ऑनलाइन ठगी से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है।

मुख्य बातें (Highlights)
● प्रदेशभर में ‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान के तहत नवाचारपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम।
● स्कूलों, कॉलेजों, पंचायतों, रेलवे स्टेशनों और बाजारों में चलाए गए अभियान।
● सोशल मीडिया पर रील, वीडियो और पोस्ट के जरिए साइबर सुरक्षा का संदेश।
● इंदौर में 6 हजार लोगों की साइबर जागरूकता मैराथन।
● भोपाल, उज्जैन, विदिशा, खंडवा, टीकमगढ़, सिंगरौली, कटनी, ग्वालियर समेत सभी जिलों में विशेष कार्यक्रम।
● साइबर ठगी होने पर 1930 हेल्पलाइन और Cyber Crime Portal पर शिकायत की अपील।

जनभागीदारी से जनआंदोलन बन रहा है ‘सेफ क्लिक 2.0’

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 24 जून से 8 जुलाई 2026 तक संचालित राज्यव्यापी ‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान के तहत प्रदेश की सभी पुलिस इकाइयां लगातार साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं।

अभियान का उद्देश्य नागरिकों में सुरक्षित डिजिटल व्यवहार विकसित करना और ऑनलाइन ठगी, फिशिंग, फर्जी निवेश, डिजिटल अरेस्ट, सोशल मीडिया फ्रॉड एवं अन्य साइबर अपराधों के प्रति सतर्कता बढ़ाना है।

स्कूलों, कॉलेजों और गांवों तक पहुंचा साइबर सुरक्षा का संदेश

अभियान के तहत विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्राम पंचायतों, शासकीय कार्यालयों, धार्मिक स्थलों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

पुलिस अधिकारी नागरिकों को डिजिटल सुरक्षा, सुरक्षित ऑनलाइन लेनदेन, फर्जी लिंक से बचाव और साइबर हेल्पलाइन 1930 के उपयोग की जानकारी दे रहे हैं।

इंदौर में 6 हजार लोगों ने दौड़कर दिया साइबर सुरक्षा का संदेश

इंदौर पुलिस कमिश्नरेट ने अभियान के तहत 6 हजार से अधिक नागरिकों की भागीदारी के साथ विशाल साइबर जागरूकता मैराथन आयोजित की।

“सेफ क्लिक, सुरक्षित जीवन” थीम पर आयोजित इस मैराथन में बच्चों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और पुलिस अधिकारियों ने भाग लेकर साइबर सुरक्षा को जनआंदोलन का स्वरूप दिया।

भोपाल में मेडिकल छात्रों को बताया साइबर फ्रॉड से बचने का तरीका

भोपाल कमिश्नरेट के थाना रातीबड़ ने आरडी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में करीब 1,500 छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग, विशिंग, स्मिशिंग, फर्जी निवेश, यूपीआई और QR कोड फ्रॉड से बचाव के व्यावहारिक उपाय बताए।

कार्यक्रम में प्रतिभागियों को साइबर सुरक्षा की शपथ भी दिलाई गई और किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 पर कॉल करने एवं राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी गई।

रेलवे स्टेशन, पंचायत और धार्मिक स्थलों पर भी चला अभियान

अभियान के तहत—

जीआरपी भोपाल ने रेलवे स्टेशन खंडवा पर ध्वनि प्रसारण के माध्यम से यात्रियों को जागरूक किया।
जीआरपी जबलपुर और जीआरपी इंदौर ने रेलवे स्टेशनों पर साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी दी।
कटनी पुलिस ने धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर एवं पंपलेट वितरित किए।
टीकमगढ़, भोपाल ग्रामीण, खंडवा, राजगढ़, अनूपपुर सहित कई जिलों में पंचायतों और शासकीय कार्यालयों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए।

स्थानीय नवाचारों से अभियान को मिली नई पहचान

प्रदेश के विभिन्न जिलों ने स्थानीय स्तर पर अनूठे प्रयोग भी किए।

सिवनी के 981 गांवों में गूंजी साइबर सुरक्षा की मुनादी, 7.94 लाख ग्रामीणों तक पहुंचा ‘Safe Click 2.0’ अभियान
विदिशा में साइबर जागरूकता के साथ मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान किया गया।
सिंगरौली में विद्यार्थियों के साथ संवादात्मक सत्र आयोजित हुए।
सीधी में लोक कलाकारों के माध्यम से साइबर सुरक्षा का संदेश दिया गया।
ग्वालियर में रन क्लब के प्रतिभागियों को जागरूक किया गया।
छिंदवाड़ा में सामाजिक सम्मान समारोह के साथ साइबर जागरूकता कार्यक्रम जोड़ा गया।

सोशल मीडिया बना जागरूकता का बड़ा माध्यम

प्रदेश की सभी पुलिस इकाइयां फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिदिन रील, वीडियो, पोस्टर और जनहित संदेश साझा कर रही हैं।

छतरपुर पुलिस स्थानीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और स्थानीय भाषा में तैयार वीडियो के माध्यम से लोगों तक पहुंच रही है, जबकि गुना पुलिस निजी फोटो और वीडियो साझा करने से जुड़े साइबर जोखिमों पर जागरूकता रील तैयार कर रही है।

मध्यप्रदेश पुलिस की अपील

मध्यप्रदेश पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि—

किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
OTP, UPI PIN और बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।
www.cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं।
स्वयं जागरूक रहें और दूसरों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करें।

देशभर में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए मध्यप्रदेश पुलिस ने सेफ क्लिक 2.0 अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य तकनीकी जागरूकता बढ़ाकर नागरिकों को डिजिटल धोखाधड़ी से बचाना और साइबर सुरक्षा को सामाजिक अभियान का स्वरूप देना है।

स्कूलों, कॉलेजों, पंचायतों और सोशल मीडिया के माध्यम से चल रहा यह अभियान डिजिटल साक्षरता बढ़ाने और साइबर अपराधों के मामलों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। जनभागीदारी बढ़ने से साइबर सुरक्षा को लेकर समाज में स्थायी जागरूकता विकसित होने की उम्मीद है।

‘सेफ क्लिक 2.0’ अब केवल पुलिस का अभियान नहीं, बल्कि सुरक्षित डिजिटल समाज बनाने की व्यापक पहल बन चुका है। यदि नागरिक पुलिस द्वारा बताए गए सुरक्षा उपायों का पालन करें और साइबर अपराध की स्थिति में तुरंत शिकायत दर्ज कराएं, तो ऑनलाइन ठगी के मामलों में काफी कमी लाई जा सकती है।

सिवनी के 981 गांवों में गूंजी साइबर सुरक्षा की मुनादी, 7.94 लाख ग्रामीणों तक पहुंचा ‘Safe Click 2.0’ अभियान

साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे के बीच सिवनी पुलिस का ‘सेफ क्लिक अभियान 2.0’ लगातार लोगों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक कर रहा है। अभियान के 12वें दिन जिले के 981 गांवों में कोटवारों की मुनादी के माध्यम से साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया, जबकि कान्हीवाड़ा स्थित पीएम श्री नवोदय विद्यालय में 550 छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन ठगी से बचाव का प्रशिक्षण दिया गया।

मुख्य बातें (Highlights)

  • ● Safe Click 2.0 अभियान के 12वें दिन ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष फोकस
  • ● जिले के 981 गांवों में साइबर सुरक्षा की मुनादी
  • ● करीब 7.94 लाख ग्रामीणों तक पहुंचा जागरूकता अभियान
  • ● पीएम श्री नवोदय विद्यालय, कान्हीवाड़ा में 550 विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण
  • ● एसपी कृष्ण लालचंदानी ने जागरूकता को साइबर अपराधों से बचाव का सबसे बड़ा हथियार बताया

गांव-गांव पहुंचा साइबर सुरक्षा का संदेश

पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देशन में 24 जून से 8 जुलाई 2026 तक पूरे मध्यप्रदेश में संचालित ‘सेफ क्लिक अभियान 2.0’ के तहत सिवनी पुलिस ने 5 जुलाई को ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया।

पुलिस अधीक्षक कृष्ण लालचंदानी के निर्देशन में जिले के सभी 981 गांवों में ग्राम कोटवारों के माध्यम से मुनादी कराई गई। इस दौरान ग्रामीणों को साइबर ठगी, फिशिंग, फर्जी कॉल, ऑनलाइन धोखाधड़ी और डिजिटल सुरक्षा के उपायों की जानकारी दी गई।

पुलिस के अनुसार इस अभियान के माध्यम से लगभग 7,94,870 ग्रामीण नागरिकों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचा।

कोटवारों को पहले दिया गया विशेष प्रशिक्षण

मुनादी अभियान से पहले जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में ग्राम कोटवारों की बैठक आयोजित की गई। इसमें उन्हें साइबर फ्रॉड के नए तरीकों, फर्जी निवेश योजनाओं, बैंकिंग धोखाधड़ी, फिशिंग और बचाव के उपायों की जानकारी दी गई, ताकि वे ग्रामीणों तक सही और प्रभावी संदेश पहुंचा सकें।

साथ ही ग्रामीणों को साइबर हेल्पलाइन 1930 और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) की जानकारी भी दी गई।

नवोदय विद्यालय में 550 विद्यार्थियों को मिला साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण

अभियान के तहत पीएम श्री नवोदय विद्यालय, कान्हीवाड़ा में साइबर जागरूकता कार्यक्रम और साइबर क्विज का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में एसडीओपी केवलारी आशीष भराड़े मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी, साइबर सेल, विद्यालय प्रबंधन और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर 550 छात्र-छात्राओं को सोशल मीडिया फ्रॉड, फर्जी निवेश, ऑनलाइन ठगी, डेटा सुरक्षा और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।

गांवों में पुलिस ने किया सीधा जनसंवाद

सिवनी पुलिस की टीमों ने गांव-गांव पहुंचकर लोगों से सीधे संवाद किया। ग्रामीणों को समझाया गया कि—

  • किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
  • OTP, UPI PIN और बैंक संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
  • संदिग्ध कॉल और संदेशों से सतर्क रहें।
  • ऑनलाइन लेनदेन से पहले जानकारी की पुष्टि अवश्य करें।

सरल उदाहरणों के माध्यम से लोगों को साइबर अपराधियों के नए तरीकों से भी अवगत कराया गया।

एसपी कृष्ण लालचंदानी की अपील

पुलिस अधीक्षक कृष्ण लालचंदानी ने कहा कि साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता है।

उन्होंने नागरिकों से अपील की कि यदि किसी के साथ साइबर ठगी होती है तो घबराने के बजाय तुरंत 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही उन्होंने प्रत्येक नागरिक से अपने आसपास कम से कम 10 लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया।

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा ‘सेफ क्लिक अभियान 2.0’ का उद्देश्य डिजिटल माध्यमों से होने वाली ठगी, फिशिंग, फर्जी निवेश, सोशल मीडिया फ्रॉड और बैंकिंग धोखाधड़ी के प्रति लोगों को जागरूक करना है। अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों, ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी इलाकों में लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में साइबर जागरूकता का विस्तार डिजिटल ठगी के मामलों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कोटवारों और विद्यार्थियों को जोड़कर चलाया गया यह अभियान समाज के हर वर्ग तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन रहा है।

सिवनी पुलिस का ‘सेफ क्लिक अभियान 2.0’ केवल जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि डिजिटल रूप से सुरक्षित समाज बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यदि नागरिक सतर्क रहें और पुलिस द्वारा बताए गए सुरक्षा उपाय अपनाएं, तो साइबर ठगी के अधिकांश मामलों से बचा जा सकता है।

WhatsApp Cyber Fraud Alert: फर्जी जॉब, OTP और KYC Scam से कैसे बचें? जानिए बैंक अकाउंट सुरक्षित रखने के जरूरी टिप्स

WhatsApp Cyber Fraud Alert: WhatsApp पर ये 5 गलतियां खाली कर सकती हैं आपका बैंक अकाउंट, जानिए बचाव के आसान तरीके. भारत में करोड़ों लोग रोजाना WhatsApp का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अब यही ऐप साइबर ठगों का बड़ा हथियार बनता जा रहा है। फर्जी नौकरी, इनाम, KYC अपडेट और रिश्तेदार बनकर पैसे मांगने जैसे नए-नए तरीकों से लोगों के बैंक खाते खाली किए जा रहे हैं। कुछ आसान सावधानियां अपनाकर आप ऐसे साइबर फ्रॉड से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।

मुख्य बातें (Highlights)
● अनजान नंबरों से आने वाले ऑफर और संदेशों से रहें सतर्क।
● किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी जांच जरूर करें।
● OTP, बैंकिंग जानकारी या मोबाइल स्क्रीन किसी के साथ साझा न करें।
● परिवार के नाम पर पैसे मांगने वाले संदेशों की पहले पुष्टि करें।
● WhatsApp की सुरक्षा सेटिंग्स और टू-स्टेप वेरिफिकेशन जरूर चालू रखें।

WhatsApp Cyber Fraud Alert: WhatsApp पर बढ़ रहे हैं साइबर फ्रॉड के मामले

WhatsApp आज मैसेजिंग, वीडियो कॉल और दस्तावेज़ साझा करने का सबसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म बन चुका है। इसके बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधियों ने भी लोगों को ठगने के नए तरीके खोज लिए हैं। आजकल फर्जी नौकरी, लॉटरी, निवेश योजना, बैंक KYC अपडेट और कैशबैक जैसे झूठे ऑफर देकर लोगों से बैंकिंग जानकारी और पैसे ठगे जा रहे हैं।

अनजान नंबरों से आए संदेशों पर भरोसा न करें

अगर किसी अज्ञात नंबर से अचानक नौकरी, इनाम, निवेश या किसी आकर्षक ऑफर का संदेश मिले, तो बिना जांच किए उस पर भरोसा न करें। vसाइबर ठग पहले सामान्य बातचीत करके विश्वास जीतने की कोशिश करते हैं और बाद में पैसे या निजी जानकारी मांगते हैं। ऐसे नंबरों को तुरंत ब्लॉक और रिपोर्ट करना बेहतर विकल्प है।

किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले जांच करें

WhatsApp पर भेजे जाने वाले कई फर्जी लिंक देखने में बैंक, सरकारी वेबसाइट, कूरियर कंपनी या अन्य प्रसिद्ध प्लेटफॉर्म जैसे लगते हैं। यदि कोई लिंक KYC अपडेट, लॉगिन या बैंक संबंधी जानकारी भरने के लिए कहे, तो पहले उसकी सत्यता की पुष्टि करें। गलत लिंक पर क्लिक करने से आपकी निजी जानकारी चोरी हो सकती है और बैंक अकाउंट भी खतरे में पड़ सकता है।

OTP और स्क्रीन शेयर करना पड़ सकता है भारी

किसी भी परिस्थिति में अपना OTP, CVV, UPI PIN, बैंक पासवर्ड या मोबाइल स्क्रीन किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।

बैंक, सरकारी विभाग या कोई भी विश्वसनीय संस्था WhatsApp के जरिए OTP नहीं मांगती। स्क्रीन शेयर करने पर साइबर ठग आपके मोबाइल में मौजूद बैंकिंग ऐप और अन्य संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बना सकते हैं।

रिश्तेदार बनकर पैसे मांगने वाले मैसेज से रहें सावधान

साइबर अपराधी अब परिवार के सदस्य बनकर भी लोगों को निशाना बना रहे हैं। वे नया नंबर लेकर खुद को बेटा, बेटी, भाई या रिश्तेदार बताते हैं और किसी आपात स्थिति का हवाला देकर तुरंत पैसे मांगते हैं।

ऐसे मामलों में पैसे भेजने से पहले उस व्यक्ति के पुराने और सत्यापित नंबर पर कॉल करके जानकारी की पुष्टि अवश्य करें।

WhatsApp Cyber Fraud Alert के लिए सुरक्षा सेटिंग्स जरूर करें अपडेट

अपने WhatsApp अकाउंट को सुरक्षित रखने के लिए इन सुरक्षा फीचर्स का उपयोग करें—

  • प्रोफाइल फोटो, स्टेटस और लास्ट सीन केवल Contacts तक सीमित रखें।
  • Two-Step Verification चालू करें।
  • Silence Unknown Callers फीचर सक्रिय रखें।
  • समय-समय पर ऐप को अपडेट करते रहें।
  • किसी भी डिवाइस पर WhatsApp Web लॉगिन की नियमित जांच करें।

संदिग्ध संदेशों की तुरंत करें रिपोर्ट

यदि कोई संदिग्ध संदेश, लिंक या कॉल प्राप्त होती है, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय WhatsApp पर Report and Block विकल्प का उपयोग करें। इससे ऐसे फर्जी अकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई में मदद मिलती है और अन्य उपयोगकर्ताओं को भी साइबर धोखाधड़ी से बचाया जा सकता है।

साइबर फ्रॉड से बचने के लिए रखें ये बातें याद

किसी भी ऑफर पर तुरंत भरोसा न करें।
जल्दबाजी में पैसे ट्रांसफर न करें।
बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
केवल आधिकारिक वेबसाइट और ऐप का ही उपयोग करें।
किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करें।

डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर धोखाधड़ी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। साइबर अपराधी सोशल इंजीनियरिंग, फिशिंग और फर्जी पहचान के जरिए लोगों को निशाना बनाते हैं। ऐसे में डिजिटल जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

यदि लोग इन सावधानियों का पालन करते हैं, तो WhatsApp के माध्यम से होने वाले अधिकांश साइबर फ्रॉड से बचा जा सकता है। थोड़ी सतर्कता न केवल आपकी व्यक्तिगत जानकारी बल्कि आपके बैंक खाते और डिजिटल पहचान को भी सुरक्षित रख सकती है।

WhatsApp आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा है, लेकिन इसका सुरक्षित उपयोग भी उतना ही जरूरी है। किसी भी अनजान मैसेज, लिंक या ऑफर पर बिना जांच भरोसा न करें और अपनी बैंकिंग जानकारी हमेशा गोपनीय रखें। यही सतर्कता आपको बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है।

Seoni News: बारिश में तिरपाल के नीचे हुआ अंतिम संस्कार, केवलारी के इस गांव ने खोली विकास के दावों की पोल

मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के केवलारी विकासखंड से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने ग्रामीण विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम पंचायत चौरापाठा में श्मशान घाट पर टीन शेड नहीं होने के कारण मूसलाधार बारिश के बीच परिजनों को तिरपाल तानकर अंतिम संस्कार करना पड़ा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

मुख्य बातें (Highlights)

  • ● मामला केवलारी जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत चौरापाठा का
  • ● श्मशान घाट पर टीन शेड नहीं होने से बारिश में हुई परेशानी
  • ● परिजनों ने तिरपाल के नीचे किया अंतिम संस्कार
  • ● घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
  • ● ग्रामीणों ने मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाई

बारिश ने उजागर की श्मशान घाट की बदहाल व्यवस्था

केवलारी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत चौरापाठा में एक अंतिम संस्कार के दौरान श्मशान घाट की अव्यवस्था सामने आई। लगातार हो रही बारिश के बीच श्मशान स्थल पर टीन शेड नहीं होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों को तिरपाल लगाकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी।

इस दौरान मौजूद लोगों ने घटना का वीडियो भी बनाया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

ग्रामीणों ने लगाए उपेक्षा के आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान घाट पर टीन शेड और अन्य आवश्यक सुविधाओं की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

उनका आरोप है कि कई बार मांग रखने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिले। पहली ही तेज बारिश में व्यवस्थाओं की कमी साफ दिखाई दे गई।

वायरल वीडियो के बाद उठे सवाल

घटना का वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीण क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि अंतिम संस्कार जैसी मूलभूत सुविधा भी यदि सम्मानजनक तरीके से उपलब्ध नहीं हो पा रही है, तो ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

हालांकि, इस मामले में संबंधित पंचायत या प्रशासन की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि श्मशान घाट पर जल्द से जल्द टीन शेड, बैठने की व्यवस्था और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को अंतिम संस्कार के दौरान ऐसी कठिन परिस्थिति का सामना न करना पड़े।

ग्रामीण क्षेत्रों में श्मशान घाटों के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत टीन शेड, पहुंच मार्ग, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है। हालांकि कई गांवों में अब भी ऐसी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है, जिससे बारिश या अन्य मौसम की परिस्थितियों में लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।

यदि वायरल वीडियो के बाद प्रशासन संज्ञान लेता है, तो ग्राम पंचायत चौरापाठा के श्मशान घाट पर आवश्यक सुविधाओं के विकास का रास्ता खुल सकता है। साथ ही अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के श्मशान घाटों की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा होने की संभावना है।

चौरापाठा की यह घटना केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को भी सामने लाती है। अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील व्यवस्था के लिए सम्मानजनक और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना स्थानीय प्रशासन और पंचायतों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

MP सरकार का बड़ा तोहफा: दिव्यांग विद्यार्थियों को मिलेंगे लैपटॉप और मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, 31 अगस्त तक करें आवेदन

भोपाल: मध्यप्रदेश सरकार ने दिव्यांग विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। योजना के अंतर्गत पात्र छात्र-छात्राओं को लैपटॉप और मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जाएगी। आवेदन की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है।

मुख्य बातें (Highlights)
● 31 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन किए जा सकते हैं।
● पात्र दिव्यांग विद्यार्थियों को मिलेगा लैपटॉप या मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल।
● आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी।
● 15 सितंबर तक आवेदनों का परीक्षण और स्वीकृति।
● 3 दिसंबर, विश्व दिव्यांग दिवस पर होगा वितरण।
● योजना का उद्देश्य दिव्यांग विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है।

मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना के लिए आवेदन शुरू

सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। पात्र विद्यार्थी 31 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

योजना का उद्देश्य दिव्यांग विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी संसाधनों से जोड़ते हुए उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में सहयोग देना है।

पात्र विद्यार्थियों को क्या मिलेगा?

योजना के तहत पात्र एवं चयनित विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकता और पात्रता के अनुसार— लैपटॉप, मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल प्रदान की जाएगी, ताकि वे शिक्षा और दैनिक आवागमन दोनों में सुविधा प्राप्त कर सकें।

मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने क्या कहा?

सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार दिव्यांगजनों को शिक्षा, तकनीक और गतिशीलता से जोड़ने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि यह योजना दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ बनाएगी। साथ ही पात्र विद्यार्थियों से समय-सीमा के भीतर आवेदन करने और जिला अधिकारियों से योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन

सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के आयुक्त कृष्ण गोपाल तिवारी ने बताया कि योजना का पूरा संचालन ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। इससे आवेदन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध होगी।

उन्होंने संयुक्त एवं उप संचालकों को निर्देश दिए हैं कि सभी पात्र विद्यार्थियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर योजना का लाभ सुनिश्चित कराया जाए।

आवेदन से वितरण तक का पूरा शेड्यूल

आवेदन से वितरण तक का पूरा शेड्यूल

प्रक्रियातिथि
ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि31 अगस्त 2026
आवेदन परीक्षण एवं स्वीकृति15 सितंबर 2026 तक
लैपटॉप/मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल की खरीद प्रक्रिया15 अक्टूबर 2026 तक
वितरण3 दिसंबर 2026 (विश्व दिव्यांग दिवस)
वितरण की रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड5 दिसंबर 2026 तक

कैसे करें आवेदन?

योजना के पात्र छात्र-छात्राएं स्वयं ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्राप्त होने के बाद जिला कार्यालय पात्रता की जांच करेंगे और नियमों के अनुसार स्वीकृति प्रदान करेंगे।

विभाग ने विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से अपील की है कि अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन पूरा करें।

मध्यप्रदेश सरकार समय-समय पर दिव्यांगजनों के लिए शिक्षा, कौशल विकास और सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाएं संचालित करती है। मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना का उद्देश्य तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाकर दिव्यांग विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में बेहतर अवसर प्रदान करना है।

यह योजना आर्थिक रूप से जरूरतमंद दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। लैपटॉप से पढ़ाई में तकनीकी सहायता मिलेगी, जबकि मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल से उनकी आवाजाही आसान होगी, जिससे शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना दिव्यांग विद्यार्थियों को शिक्षा और तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। पात्र छात्र-छात्राओं को 31 अगस्त 2026 से पहले ऑनलाइन आवेदन कर इस योजना का लाभ अवश्य लेना चाहिए।

MP Pulse Polio Campaign: 3 दिन में 1.06 करोड़ से ज्यादा बच्चों को पिलाई गई पोलियो की खुराक, अभियान रहा सफल

भोपाल: मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान ने एक बार फिर बच्चों को पोलियो से सुरक्षित रखने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 28 से 30 जून तक चले राज्यव्यापी अभियान के दौरान 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के 1 करोड़ 6 लाख 51 हजार 737 बच्चों को पोलियो वैक्सीन की खुराक पिलाई गई।

मुख्य बातें (Highlights)
● 28 से 30 जून तक चला राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान
● प्रदेशभर में 1,06,51,737 बच्चों को पिलाई गई पोलियो की खुराक
● बूथों के साथ घर-घर जाकर भी बच्चों को दी गई वैक्सीन
● छूटे हुए बच्चों की पहचान कर उन्हें भी कराया गया टीकाकरण
● उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने अभियान की सफलता पर जताई खुशी

मध्यप्रदेश में सफल रहा राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान

मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का सफल संचालन 28 से 30 जून तक किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अभियान के दौरान 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के कुल 1 करोड़ 6 लाख 51 हजार 737 बच्चों को पोलियो वैक्सीन की खुराक पिलाई गई।

अभियान के सफल संचालन में प्रदेश के सभी जिलों ने बेहतर समन्वय, प्रभावी सूक्ष्म योजना, मजबूत मॉनिटरिंग और व्यापक जनजागरूकता के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बूथ से लेकर घर-घर तक पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीमें

स्वास्थ्य विभाग ने प्रत्येक पात्र बच्चे तक पोलियो की खुराक पहुंचाने के लिए व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं कीं। पोलियो बूथों के संचालन के साथ-साथ स्वास्थ्य कर्मियों ने घर-घर जाकर भी बच्चों को वैक्सीन पिलाई।

इसके अलावा अभियान के दौरान जिन बच्चों को किसी कारणवश पहले खुराक नहीं मिल सकी थी, उन्हें चिन्हित कर विशेष प्रयासों के माध्यम से टीकाकरण कराया गया।

दुर्गम क्षेत्रों में भी पहुंची स्वास्थ्य सेवाएं

अभियान के दौरान दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक विशेष टीमें भेजी गईं ताकि कोई भी पात्र बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे। इस उद्देश्य से स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने समन्वित रूप से कार्य किया।

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने जताई संतुष्टि

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान की सफलता पोलियो उन्मूलन के प्रति प्रदेश की प्रतिबद्धता, स्वास्थ्य कर्मियों की मेहनत और आम जनता के सहयोग का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भविष्य में भी बच्चों को पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास करती रहेगी।

जनप्रतिनिधियों और समुदाय की रही सक्रिय भागीदारी

अभियान की शुरुआत विभिन्न स्थानों पर जनप्रतिनिधियों द्वारा पोलियो बूथों का उद्घाटन कर की गई। अभियान के सफल संचालन में स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी रही।

राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का उद्देश्य जन्म से 5 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को पोलियो की खुराक उपलब्ध कराकर इस गंभीर बीमारी से बचाव सुनिश्चित करना है। भारत को वर्ष 2014 में पोलियो मुक्त घोषित किया गया था, लेकिन इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए समय-समय पर ऐसे अभियान चलाए जाते हैं, ताकि किसी भी संभावित संक्रमण को रोका जा सके।

इस खबर का असर

प्रदेशभर में बड़े पैमाने पर चलाया गया यह अभियान बच्चों के स्वास्थ्य सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। व्यापक टीकाकरण से पोलियो मुक्त भारत की उपलब्धि को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का सफल संचालन स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय प्रशासन और नागरिकों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। प्रत्येक पात्र बच्चे तक वैक्सीन पहुंचाने की यह पहल भविष्य में भी बच्चों को पोलियो से सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाएगी।

Seoni News: जल गंगा संवर्धन अभियान का जिला स्तरीय समापन, सिवनी कलेक्टर नेहा मीना ने जल संरक्षण को बताया भविष्य की जिम्मेदारी

सिवनी: सिवनी में शनिवार को आयोजित जल गंगा संवर्धन अभियान के जिला स्तरीय समापन समारोह में जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में कलेक्टर नेहा मीना ने जल बचाने को आने वाली पीढ़ियों के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी बताया, जबकि विधायक दिनेश राय ने हर खेत में तालाब और हर घर में वर्षा जल संचयन की आवश्यकता पर जोर दिया।

मुख्य बातें (Highlights)
● मानस भवन, सिवनी में हुआ जिला स्तरीय समापन समारोह
● जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान
● हर खेत में तालाब और हर घर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर जोर
● महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रही अभियान की विशेष उपलब्धि
● “मेरा वाटर बैंक” पहल का हुआ विमोचन
● उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी, कर्मचारी और जनप्रतिनिधि सम्मानित

मानस भवन में संपन्न हुआ जिला स्तरीय समापन कार्यक्रम

सिवनी के मानस भवन में शनिवार को जल गंगा संवर्धन अभियान का जिला स्तरीय समापन समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया।

इस अवसर पर अभियान के दौरान जिले में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों के पुनर्जीवन, पौधरोपण और जनजागरूकता के क्षेत्र में किए गए कार्यों का प्रस्तुतिकरण किया गया। उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को सम्मानित भी किया गया।

जल संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए हमारी जिम्मेदारी: कलेक्टर नेहा मीना

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर नेहा मीना ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि जिले में जनभागीदारी के माध्यम से कई नवाचार किए गए हैं, जिनसे जल संरक्षण के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। कलेक्टर ने खेत तालाब, अमृत सरोवर, वर्षा जल संचयन, जल संरचनाओं के संरक्षण और नदियों के कैचमेंट क्षेत्रों के विकास को निरंतर गति देने पर बल दिया।

उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से दीर्घकालिक कार्ययोजना बनाकर भूजल संवर्धन एवं जल सुरक्षा के लिए सतत प्रयास करने की अपील की।

हर खेत में तालाब और हर घर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग हो: विधायक दिनेश राय

कार्यक्रम में विधायक दिनेश राय ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देशभर में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया गया है। अब केवल पानी बचाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वर्षा जल को धरती के भीतर पहुंचाकर भविष्य सुरक्षित करना भी जरूरी है।

उन्होंने किसानों से अपनी कृषि भूमि पर छोटे-छोटे खेत तालाब बनाने का आग्रह किया, जिससे वर्षा जल का बेहतर उपयोग हो और भूजल स्तर में सुधार आए। साथ ही उन्होंने शहरी क्षेत्रों में प्रत्येक घर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

महिलाओं की भागीदारी बनी अभियान की सबसे बड़ी ताकत

जल गंगा संवर्धन अभियान में महिला जनप्रतिनिधियों, स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण महिलाओं की सक्रिय भागीदारी विशेष आकर्षण रही।

महिलाओं ने जल स्रोतों के संरक्षण, पौधरोपण, वर्षा जल संचयन, जनजागरूकता और सामुदायिक श्रमदान जैसे कार्यों में बढ़-चढ़कर योगदान दिया। ग्राम नंदौरा की सरपंच संगीता सोनकटे और ग्राम साजपानी की सरपंच सुदामा धुर्वे ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जनसहभागिता से जल संरक्षण के प्रयासों को व्यापक समर्थन मिला।

“मेरा वाटर बैंक” पहल बनी आकर्षण का केंद्र

समारोह में जनपद पंचायत धनोरा द्वारा विकसित “मेरा वाटर बैंक” पहल के लीफलेट का विमोचन किया गया।

इस पहल के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर वर्षा जल संचयन की व्यवस्था विकसित की जा रही है। प्रशासन के अनुसार इस पहल से लगभग एक करोड़ लीटर वर्षा जल का संचयन संभव हो सकेगा, जो भविष्य में जल संकट कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

उत्कृष्ट कार्य करने वालों को किया गया सम्मानित

अभियान में उल्लेखनीय योगदान देने पर विभिन्न विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों, पंचायत प्रतिनिधियों, शिक्षकों, वन विभाग के कर्मचारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया।

सम्मानित होने वालों में जनपद पंचायत धनोरा के सीईओ ओंकार सिंह ठाकुर, उपयंत्री चंद्रशेखर यादव, अभिनव सिंह ठाकुर, एपीओ मनरेगा भूपेंद्र सिंह राजपूत, सहायक यंत्री रोहणी बघेल, संगीता सोनकटे, सुदामा धुर्वे, नमिता साहू, संतोष सरयाम सहित विभिन्न विभागों के अनेक अधिकारी-कर्मचारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहे।

कार्यक्रम में रही जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उपस्थिति

समापन समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष मालती डेहरिया, जनपद पंचायत अध्यक्ष किरण भलावी, नगर पालिका अध्यक्ष ज्ञानचंद सनोड़िया, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अंजली शाह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान का उद्देश्य जल स्रोतों का संरक्षण, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना, भूजल स्तर में सुधार लाना और जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाना है। अभियान के तहत प्रदेशभर में तालाबों, कुओं, नदियों और अन्य जल संरचनाओं के संरक्षण एवं पुनर्जीवन पर कार्य किया जा रहा है।

जल संकट और बदलते जलवायु परिदृश्य के बीच ऐसे अभियान भविष्य की जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि नागरिक, किसान और स्थानीय संस्थाएं निरंतर भागीदारी निभाएं तो जल संरक्षण को स्थायी जनआंदोलन का रूप दिया जा सकता है।

सिवनी में आयोजित जल गंगा संवर्धन अभियान का समापन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जल संरक्षण के प्रति सामूहिक संकल्प का संदेश लेकर आया। जनभागीदारी, महिलाओं की सक्रिय भूमिका और “मेरा वाटर बैंक” जैसी पहलें भविष्य में जल सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।

Balaghat Flood: खेतों में बाढ़ से घिरे 16 ग्रामीणों को मौत के मुंह से निकाल लाई पुलिस, रेस्क्यू का Video चर्चा में

Balaghat Flood: मध्य प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के बीच बालाघाट जिले से राहत भरी खबर सामने आई है। किरनापुर थाना क्षेत्र के भानपुर गांव में खेतों पर काम करने गए 16 ग्रामीण अचानक बाढ़ के पानी से घिर गए। सूचना मिलते ही पुलिस, एसडीआरएफ और हॉक फोर्स ने संयुक्त अभियान चलाकर सभी ग्रामीणों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

मुख्य बातें (Highlights)

  • बालाघाट के किरनापुर थाना क्षेत्र के भानपुर गांव की घटना
  • खेतों में काम कर रहे 16 ग्रामीण बाढ़ के पानी में फंस गए
  • किरनापुर पुलिस, हट्टा पुलिस, एसडीआरएफ और हॉक फोर्स ने चलाया संयुक्त रेस्क्यू अभियान
  • सभी ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया
  • समय पर कार्रवाई से किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई
  • पुलिस ने बारिश के मौसम में सतर्क रहने की अपील की1

खेतों में काम के दौरान बढ़ा जलस्तर, चारों ओर से घिरे ग्रामीण

लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण बालाघाट जिले के किरनापुर थाना क्षेत्र के भानपुर गांव में खेतों पर कृषि कार्य करने गए करीब 16 ग्रामीण अचानक बाढ़ के पानी में फंस गए। देखते ही देखते आसपास के नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया, जिससे उनके वापस लौटने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया।

ग्रामीणों के चारों ओर पानी भर जाने से स्थिति गंभीर हो गई और उन्होंने मदद की गुहार लगाई।

पुलिस, एसडीआरएफ और हॉक फोर्स ने चलाया संयुक्त अभियान

घटना की सूचना मिलते ही किरनापुर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए हट्टा पुलिस, राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और हॉक फोर्स की टीम के साथ संयुक्त रेस्क्यू अभियान शुरू किया।

तेज बहाव और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद रेस्क्यू टीम ने समन्वय और साहस का परिचय देते हुए बाढ़ प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचकर सभी 16 ग्रामीणों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इसके बाद सभी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।

समय पर कार्रवाई से टला बड़ा हादसा

रेस्क्यू अभियान की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि सभी ग्रामीण सुरक्षित बचा लिए गए और किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। समय पर मिली सूचना और बचाव दल की त्वरित कार्रवाई से संभावित बड़ा हादसा टल गया।

बारिश के मौसम में पुलिस की महत्वपूर्ण अपील

मध्यप्रदेश पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि लगातार बारिश के दौरान नदी, नाले, पुल-पुलिया या जलमग्न रास्तों को पार करने का जोखिम न उठाएं।

पुलिस ने लोगों से खेतों या अन्य स्थानों पर जाने से पहले मौसम और जलस्तर की जानकारी लेने तथा प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की भी अपील की है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के मद्देनजर बैरिकेडिंग की गई है, इसलिए प्रतिबंधित मार्गों का उपयोग नहीं करना चाहिए।

किसी भी आपात स्थिति में नागरिक डायल-112 या नजदीकी पुलिस थाने से तत्काल संपर्क कर सकते हैं।

मध्य प्रदेश के कई जिलों में लगातार बारिश के कारण नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों तक पहुंचने और लौटने के दौरान जोखिम बढ़ जाता है। प्रशासन लगातार लोगों से सतर्क रहने और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की अपील कर रहा है।

यह घटना बताती है कि आपदा के समय त्वरित सूचना और विभिन्न एजेंसियों के बेहतर समन्वय से बड़ी जनहानि टाली जा सकती है। साथ ही यह लोगों के लिए भी संदेश है कि बारिश के दौरान जोखिम वाले क्षेत्रों में जाने से पहले पूरी सावधानी बरतें।

बालाघाट के भानपुर गांव में चलाया गया यह सफल रेस्क्यू अभियान पुलिस, एसडीआरएफ और हॉक फोर्स की तत्परता का उदाहरण है। समय पर की गई कार्रवाई से 16 ग्रामीणों की जान सुरक्षित बचाई जा सकी।