Dharmendra Pradhan Resigns: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र सौंपते हुए कहा कि देशभर में छात्रों के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था और राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया है। इस्तीफे की जानकारी उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किए गए पत्र के माध्यम से दी। इस घटनाक्रम की पुष्टि कई समाचार संस्थानों ने भी की है।
प्रमुख बातें
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पद से इस्तीफा दिया।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा त्यागपत्र।
- छात्रों के नाम खुला पत्र जारी किया।
- NEET-UG विवाद और परीक्षा सुधारों का किया जिक्र।
- छात्रों का भविष्य और राष्ट्रीय हित को बताया फैसले का कारण।
- प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों का जताया आभार।
इस्तीफे में क्या लिखा?
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र की शुरुआत “मेरे युवा साथियों” संबोधन से की। उन्होंने लिखा कि पिछले चार दशकों से वह छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधार के लिए काम करते रहे हैं और उनका हमेशा यह विश्वास रहा है कि मजबूत, समावेशी और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही देश की सबसे बड़ी ताकत है।
उन्होंने कहा कि युवाओं के सपनों और आकांक्षाओं का सम्मान करना उनका नैतिक दायित्व रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सेवा करने का अवसर उनके लिए गर्व की बात रही है।
NEET-UG विवाद का किया उल्लेख
पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने NEET-UG 2026 परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि परीक्षा में गड़बड़ी सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जांच सीबीआई को सौंपी, परीक्षा रद्द की और दोबारा परीक्षा कराई। साथ ही अगले वर्ष से परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में कराने का फैसला भी लिया गया।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा को निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराना था और केंद्र व राज्य सरकारों के समन्वय से यह प्रक्रिया पूरी की गई।
“छात्रों का भविष्य कानूनी विवादों में न उलझे”
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने त्यागपत्र में हाल के दिनों में हुए विरोध प्रदर्शनों का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं से उनका मन दुखी है। पत्र में उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि—
- देश विरोधी ताकतें मौजूदा हालात का फायदा उठाएं।
- देश की एकता प्रभावित हो।
- छात्र कानूनी विवादों में उलझें।
- युवाओं का ध्यान पढ़ाई और करियर से भटके।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र भेजने का निर्णय लिया।
प्रधानमंत्री और सहयोगियों का जताया आभार
अपने पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, विश्वास और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति भी धन्यवाद ज्ञापित किया।
उन्होंने लिखा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है और आगे भी वह देश तथा युवाओं के हित में काम करते रहेंगे।
विरोध प्रदर्शनों के बीच आया फैसला
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब NEET-UG परीक्षा को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। विपक्ष और छात्र संगठनों की ओर से लगातार उनकी जवाबदेही तय करने की मांग उठाई जा रही थी। हाल के दिनों में इस मुद्दे पर संसद में भी लगातार गतिरोध बना रहा।
इस फैसले का क्या असर होगा?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार को जल्द ही नया शिक्षा मंत्री नियुक्त करना होगा। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में शिक्षा मंत्रालय में परीक्षा सुधार, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर नए फैसले लिए जा सकते हैं।


