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MP /दिल्ली में BJP Join कर सकते है ज्योतिरादित्य सिंधिया, मोदी सरकार में बनेंगे मंत्री?

जानकारी के लिए आपको बता दें कि कमलनाथ सरकार के 6 मंत्रियों समेत कुल 22 विधायकों ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफे के तुरंत बाद ही कांग्रेस को अलविदा कह दिया था. इसके बाद कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई.

भोपाल: कांग्रेस से बगावत करने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया आज दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं. सूत्रों के हवाले से खबर है कि दिल्ली बीजेपी हेडक्वार्टर में गृहमंत्री अमित शाह और जेपी नेड्डा की उपस्थिति में ज्योतिरादित्य सिंधिया कमल का फूल थामेंगे. वहीं सूत्रों के हवाले से यह भी खबर है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया गुरुवार शाम 4 बजे भोपाल एयरपोर्ट पहुंचेंगे और मध्य प्रदेश से भाजपा उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करेंगे. भाजपा ज्योतिरादित्य सिंधिया को मोदी सरकार में मंत्री भी बना सकती है.

आपको बता दें कि कमलनाथ सरकार के 6 मंत्रियों समेत कुल 22 विधायकों ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफे के तुरंत बाद ही कांग्रेस को अलविदा कह दिया था. इसके बाद कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई है. मंगलवार को भोपाल में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई थी. इस बैठक में निर्दलीय समेत कुल 94 विधायक ही शामिल हुए थे. 

सिंधिया समर्थक विधायक बनेंगे मध्य प्रदेश में मंत्री
मध्य प्रदेश में बहुमत के लिए अब 104 विधायकों की जरूरत है. क्योंकि 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद विधानसभा की सदस्य संख्या 230 से घटकर 206 ही रह गई है. आपको बता दें कि 2 विधायकों की सीटें उनके देहांत के बाद खाली हैं जहां उपचुनाव होने हैं. सूत्र बता रहे हैं कि इस्तीफा देने वाले सिंधिया समर्थक विधायकों में से 5 से 7 को मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद मंत्री पद दिया जा सकता है. शिवराज सिंह चौहान की एक बार फिर से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में ताजपोशी हो सकती है.

भाजपा ने अपने विधायकों को भोपाल से बाहर भेजा इस बीच भाजपा ने अपने 106 विधायकों को भोपाल से हरियाणा के मानेसर भेज दिया है. सिंधिया समर्थक 19 विधायकों को भी बेंगलुरु से दिल्ली लाए जाने की संभावना है. जहां से फ्लोर टेस्ट के लिए उनको भोपाल लाया जा सकता है. आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में 26 मार्च को तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं. कांग्रेस ने भी अपने बचे हुए सभी विधायकों को मध्य प्रदेश से बाहर जयपुर भेज दिया है. 

बेंगलुरु में ठहराए गए सिंधिया समर्थक विधायक
प्रदुम्न सिंह तोमर, रघुराज कंसाना, कमलेश जाटव, रक्षा सरोनिया, जजपाल सिंह जज्जी, इमरती देवी, प्रभुराम चौधरी, तुलसी सिलावट, सुरेश धाकड़, महेंद्र सिंह सिसोदिया, ओपीएस भदौरिया, रणवीर जाटव, गिर्राज दंडोतिया, यशवंत जाटव, गोविंद सिंह राजपूत, हरदीप डंग, मुन्ना लाल गोयल और ब्रिजेंद्र यादव. 

HINDI GK | HOTEL और MOTEL में क्या अंतर होता है ?

यात्रियों के रात्रि विश्राम के लिए कुछ अस्थाई आवास बनाए जाते हैं। यहां प्रतिदिन के मान से किराया लेकर यात्रियों को विश्राम की सुविधाएं दीं जातीं हैं। होटल और मोटल दोनों में रात्रि विश्राम की सुविधाएं होतीं हैं, तो प्रश्न यह है कि एक ही प्रकार की सुविधाएं देने वाले भवनों को अलग अलग नाम से क्यों पुकारा जाता है। HOTEL और MOTEL में क्या अंतर होता है। आइए जानते हैं। 1975 से 2015 तक भारतीय रेल को सेवाएं दे चुके राजेंद्र अग्निहोत्री बताते हैं कि 

Hotel में किस तरह की सुविधाएं मिलतीं हैं

होटल में रहने के लिए आरामदायक कमरे होते हैं। होटलों का वर्गीकरण उसमें दी गयी सुविधाओं के अनुसार किया जाता है। उसे स्टार दिये जाते हैं 3, 5 या 7 स्टार। होटल में स्वीमिंग पूल, जिम, लाउंडरी, स्पा, बुटीक, बेन्क्वेट हाल और एक या अनेक रेस्टोरेंट होते हैं उसकी स्टार केटेगरी के अनुसार।

Motel में किस तरह की सुविधाएं मिलतीं हैं

मोटल में केवल रहने के लिए कमरे होते हैं। ये मुखयतः कम बजट वाले टूरिस्टों द्वारा रात में सोने के लिए उपयोग किये जाते हैं। मोटल में होटल जैसी दूसरी सुविधाएं जैसे रेस्टोरेंटों, जिम, लाउंडरी, स्वीमिंगपूल जैसी सुविधाएं नहीं होतीं। मोटल शहर से दूर किसी टूरिस्ट प्लेस, किसी बड़े गार्डन में भी हो सकते हैं। मोटल में रेस्टोरेंटों जरूर नहीं होते लेकिन आपको रूम सर्विस में चाय, काफी और स्नैक्स मिल जायेंगे।

MOTEL शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई

Motel शब्द Hotel में H के स्थान पर M जोड़कर बनाया गया है क्योंकि विदेशों में (खासकर) अमेरिका जैसी जगहों पर दूर दूर का प्रवास रोड से किया जाता है और इन Motorways पर आसपास बस्ती नहीं होती। इसके चलते Hotel बनाना फायदेमंद नहीं होता क्योंकि ये अधिकतर मुसाफ़िर गाड़ियों और ट्रक चलाने वाले इस्तेमाल करते हैं। इसलिए Hotel on motorways होने की वजह से ये Motel कहे जाते हैं। और इनमें सिर्फ बुनियादी सुविधाएं होती हैं और अक्सर इनका rate घंटे के दर से होता है, दिन के दर से नहीं। लोग अक्सर यहां नहाने धोने और नित्य कर्म निपटा कर थोड़ा आराम अपना सफर जारी रखते हैं।

MP /बसों में भरकर विधायको को कहाँ ले जाया जा रहा है ?

भोपाल में हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद खबर आ रही है कि बुधवार को सभी विधायकों को मध्य प्रदेश से बाहर ले जाया जाएगा.  

भोपाल: मध्य प्रदेश में जारी सियासी उठापटक के बीच पार्टियों की ओर से विधायकों को बचाए रखने की कोशिशें तेज हो गई हैं. जहां एक तरफ कांग्रेस बुधवार को अपने विधायकों को मध्य प्रदेश से बाहर ले जाएगी. वहीं बीजेपी ने पहले ही विधायकों को दिल्ली भेजने की तैयारी कर ली है.भोपाल में हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद खबर आ रही है कि बुधवार को सभी विधायकों को मध्य प्रदेश से बाहर ले जाया जाएगा. एकजुटता दिखाने के लिए कांग्रेस विधायकों ने मुख्यमंत्री से बैठक में राज्य से बाहर जाने की मांग की थी. जिसे मुख्यमंत्री ने मंजूरी दे दी. विधायकों का मानना है कि हमारी एकजुटता से दूसरे विधायक भी हमारे साथ आएंगे.

राजस्थान या फिर छत्तीसगढ़ में रहेंगे कांग्रेस विधायक
मुख्यमंत्री से मंजूरी के बाद विधायकों को स्पेशल प्लेन से एमपी से बाहर ले जाने की प्लानिंग शुरू हो गई है. बताया जा रहा है कि सभी विधायकों को राजस्थान या फिर छत्तीसगढ़ में रखा जा सकता है. इस दौरान चारों निर्दलीय विधायक भी साथ में रहेंगे.

दिल्ली से हरियाणा जाएंगे बीजेपी विधायक
उधर, भारतीय जनता पार्टी ने भी सभी विधायकों को दिल्ली भेजने की तैयारी कर दी है. सभी को इंडिगो की फ्लाइट से दिल्ली भेजा जा रहा है. बताया जा रहा है कि दिल्ली के बाद सभी विधायक हरियाणा के लिए रवाना होंगे

सिंधिया समर्थक 22 विधायक दे चुके हैं इस्तीफा
अब तक कुल 22 विधायक इस्तीफा दे चुके हैं. जिनमें से 6 कामलनाथ सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. इस्तीफा देने वाले विधायकों में रघुराज कंसाना, कमलेश जाटव, भांडेर से रक्षा संत्राव, अशोक नगर से जजपाल सिंह जज्जी, शिवपुरी से सुरेश धाकड़, ओपी एस भदौरिया, रणवीर जाटव, गिरराज दंडोतिया, जसवंत जाटव, हरदीप डंग, मुन्ना लाल गोयल, ब्रिजेंद्र यादव, दत्तिगांव से राजवर्धन सिंह, एंदल सिंह कंसाना, मनोज चौधरी शामिल हैं.
कुछ दिन पहले ही बेंगलुरु से लौटे बिसाहूलाल साहू ने भी कांग्रेस का हाथ छोड़ दिया है और बीजेपी के साथ जुड़ गए हैं.

इस्तीफा देने वालों में 6 मंत्री भी शामिल
इस्तीफा देने वालों में इमरती देवी, प्रभुराम चौधरी, तुलसी सिलावट, महेंद्र सिंह सिसोदिया, प्रद्युम्न सिंह तोमर, गोविंद राजपूत भी शामिल हैं, जो कमलनाथ सरकार में मंत्री थे.

करेंट अफेयर्स /प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से आज 10 मार्च 2020 के मुख्य समाचार

Current Affairs /Important from the point of view of competitive examinations, Today 10 March 2020 headlines
करेंट अफेयर्स /प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण आज 10 मार्च 2020 के मुख्य समाचार

करेंट अफेयर्स /प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण आज 10 मार्च 2020 के मुख्य समाचार

प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण 10 मार्च, 2020 के मुख्य समाचार निम्नलिखित हैं :

राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स

  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ में सड़क किनारे लगे दंगा आरोपियों के पोस्टरों को हटाने का आदेश दिया
  • जम्मू-कश्मीर: अनंतनाग जिले में सेना के गोला बारूद डिपो में विस्फोट में 2 मजदूर मारे गए
  • पंजाब सरकार ने कोरोनावायरस से सम्बंधित सावधानियों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए “कोवा पंजाब” मोबाइल एप्प लांच की
  • कर्नाटक: पिछली सरकार द्वारा शुरू की गई ‘शादी भाग्य योजना’ को बंद किया गया; इस योजना के तहत मुस्लिम दुल्हनों को आधार कार्ड और बीपीएल कार्ड जमा करने पर शादी के खर्च के लिए 50,000 रुपये प्रदान किये जाते थे
  • लेफ्टिनेंट जनरल के.जे.एस. ढिल्लों को रक्षा खुफिया एजेंसी (डीआईए) का महानिदेशक नियुक्त किया गया

आर्थिक करेंट अफेयर्स

  • बीएसई सेंसेक्स: 35,634.95 (-1.1,941.67), एनएसई निफ्टी 10,451.45 (-5-5)
  • सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई टेलीकम्युनिकेशन कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (TCIS) अफ्रीका में टेली-एजुकेशन और टेली-मेडिसिन के लिए eVBAB नेटवर्क प्रोजेक्ट में हिस्सा लेने के लिए  गाम्बिया के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किये

अंतर्राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स

  • अशरफ गनी ने दूसरे कार्यकाल के लिए अफगानिस्तान के राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली

खेल

  • पूनम यादव महिला टी-20 विश्व कप की टीम ऑफ़ द टूर्नामेंट में शामिल होने वाली एकमात्र भारतीय: आईसीसी
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MP / कमलनाथ सरकार गिरने की कगार पर, ये है नया बहुमत का आंकड़ा

MP / कमलनाथ सरकार गिरने की कगार पर, ये है नया बहुमत का आंकड़ा | क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थकों के इस्तीफे के बाद मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की राह आसान हो गई है. चुनावी आंकड़ों का गणित तो कमोबेश इसी तरफ इशारा कर रहा है. 

भोपाल: क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थकों के इस्तीफे के बाद मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की राह आसान हो गई है. चुनावी आंकड़ों का गणित तो कमोबेश इसी तरफ इशारा कर रहा है. सिंधिया समर्थित 20 विधायकों के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के दो विधायकों ने और इस्तीफा दे दिया.

सभी ने विधानसभा अध्यक्ष लालजी टंडन को अपने इस्तीफे की पेशकश कर दी है. कांग्रेस के 22 विधायकों का इस्तीफा स्वीकार होते ही विधानसभा की संख्या सिर्फ 206 विधायकों की हो जाएगी. बहुमत के लिए सिर्फ 104 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी. बीजेपी के पास फिलहाल 107 विधायकों का समर्थन है यानी इन हालात में बीजेपी सरकार बनाने का दावा कर सकती है.

मध्य प्रदेश में 230 विधानसभा सीटें हैं लेकिन विधानसभा का मौजूदा आंकड़ा 228  ही है.  दरअसल आगर-मालवा और जौरा विधानसभा क्षेत्र के विधायकों के निधन के बाद से ही दो सीटें खाली हैं. सियासी संकट से पहले कांग्रेस के पास 114 विधायक थे. इस वजह से सरकार बनाने का जादुई आंकड़ा 115 था. कांग्रेस को 4 निर्दलीय, 2 बीएसपी और एक एसपी विधायक का समर्थन. इस तरह कांग्रेस ने कुल 121 विधायकों के समर्थन से सरकार बनाई थी जबकि बीजेपी के पास 107 विधायक ही थे. हालांकि अब ये तस्वीर बदल चुकी है. अगर मौजूदा परिदृश्य की बात करें तो कांग्रेस के पास सरकार बनाने का जादुई आंकड़ा भी नहीं रहा गया है. 22 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार हो गए तो प्रदेश में एक बार फिर कमल खिल सकता है.

इन विधायकों ने इस्तीफे दिए: 
 प्रदुम्न सिंह तोमर
2. रघुराज कंसाना
3. कमलेश जाटव
4. रक्षा संत्राव, भांडेर 
5. जजपाल सिंह जज्जी, अशोक नगर
6. इमरती देवी
7. प्रभुराम चौधरी
8. तुलसी सिलावट
9. सुरेश धाकड़, शिवपुरी
10. महेंद्र सिंह सिसोदिया
11. ओपी एस भदौरिया
12. रणवीर जाटव
13. गिरराज दंडोतिया
14. जसवंत जाटव
15. गोविंद राजपूत
16. हरदीप डंग
17. मुन्ना लाल गोयल
18 ब्रिजेन्द यादव
19. राजवर्धन सिंह दत्तिगांव 
20. बिसाहूलाल शाहू (ये बीजेपी में शामिल हो गए है )
21. एंदल सिंह कंसाना
22. मनोज चौधरी 

महाआर्यमान सिंधिया : “इस्तीफा देने के लिए साहस चाहिए, पिता के फैसल पर गर्व’

महाआर्यमान सिंधिया : “इस्तीफा देने के लिए साहस चाहिए, पिता के फैसल पर गर्व’

भोपाल: ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस से छोड़ने से जहां पार्टी में बवाल मचा गया. कांग्रेस के नेताओं ने उन पर कई आरोप लगाए. वहीं सिंधिया के परिवार के लोगों ने उनके इस फैसले का स्वागत किया है. सिंधिया के इस्तीफे के बाद मध्य प्रदेश सियासत पूरी तरह से पलट गई है. एक-एक करके सिंधिया के समर्थक 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है. सिंधिया के इस फैसले पर उनकी बुआ और बेटे ने बधाई दी है. 

ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआ यशोधरा सिंधिया ने कहा, ”मैं बहुत खुश हूं और उन्हें बधाई देती हूं. यह ‘घर वापसी’ है. माधवराव सिंधिया ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत जनसंघ से की थी. कांग्रेस में ज्योतिरादित्य की उपेक्षा की जा रही थी.”

वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे महाआर्यमान ने ट्वीट किया. उन्होंने लिखा, ”मुझे अपने पिता पर गर्व है कि उन्होंने अपने लिए स्टैंड लिया. एक विरासत छोड़ने के लिए हिम्मत की जरूरत होती है. इतिहास खुद बताता है कि मेरा परिवार कभी सत्ता का भूखा नहीं रहा. वादे के मुताबिक हम भारत और मध्यप्रदेश में प्रभावी बदलाव लाएंगे.”

MP /अधीर रंजन बोले- मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार नहीं बच पाएगी

मध्य प्रदेश में बड़ा सियासी ड्रामा चल रहा है. कमलनाथ सरकार संकट से घिरी हुई है. 

नई दिल्ली/भोपाल: मध्य प्रदेश में बड़ा सियासी ड्रामा चल रहा है. कमलनाथ सरकार (Kamal Nath Govt) संकट से घिरी हुई है. ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya scindia) गुट के 20 कांग्रेस विधायकों ने विधायकी के साथ-साथ कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है. सिंधिया ने भी कांग्रेस की प्राथमिकता सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. सूत्रों के मुताबिक, शाम तक सिंधिया बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. सिंधिया के इस्तीफे पर लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chaudhary) ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस पार्टी ने इतना दिया है, उससे बेईमानी कर रहे हैं. उन्होंने कहा है कि इस फैसले से पार्टी का नुकसान हुआ है और लगता है मध्य प्रदेश में हमारी सरकार नहीं बच पाएगी. अधीर रंजन ने सिंधिया के इस फैसले को पार्टी के साथ गद्दारी करार दिया.

सिंधिया समर्थक 5 मंत्रियों को मंत्री पद से हटाने की सिफारिश
खबर आ रही है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्यपाल को चिट्ठे लिखकर सिंधिया समर्थक 5 मंत्रियों को मंत्री पद से हटाने की सिफारिश की है. CM ने जल्द आदेश जारी करने की अपील की है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री कमलनाथ की कुछ मंत्रियों और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के साथ बैठक हुई. इसके बाद सिंधिया समर्थक मंत्रियों को बर्खास्त करने का फैसला लिया गया. सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, प्रद्युम्न सिंह तोमर, इमरती देवी, तुलसी सिलावट, प्रभुराम चौधरी और महेंद्र सिंह सिसोदिया को बर्खास्त करने की सिफारिश की है. 

बेंगलुरू में ठहरे 19 विधायकों ने दिए इस्तीफे
बेंगलुरू में सिंधिया गुट के 19 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है. इन विधायकों में प्रदुम्न सिंह तोमर, रघुराज कंसाना, कमलेश जाटव, रक्षा संत्राव (भांडेर), जजपाल सिंह जज्जी (अशोक नगर), इमरती देवी, प्रभुराम चौधरी, तुलसी सिलावट, सुरेश धाकड़ (शिवपुरी), महेंद्र सिंह सिसोदिया, ओपी एस भदौरिया, रणवीर जाटव, गिरराज दंडोतिया, जसवंत जाटव, गोविंद राजपूत, हरदीप डंग, मुन्ना लाल गोयल, ब्रिजेन्द यादव शामिल हैं.  सूत्रों के हवाले से खबर है कि कांग्रेस के 7 और विधायक भी बीजेपी के संपर्क में हैं. आज देर रात तक ये 7 विधायक भी अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को सौंप सकते हैं.

MP Live Update : ज्योतिरादित्य ने छोड़ी कांग्रेस, दिग्विजय ने किया पलटवार

मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नाराज चल रहे कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। सिंधिया का अब भाजपा में शामिल होना लगभग तय माना जा रहा है। कांग्रेस के बागी विधायकों ने भी इस्तीफा दे दिया है। यहां पढ़ें हर अपडेट…

शिवराज ने कांग्रेस के बागी विधायक के साथ की प्रेस कांफ्रेंस

शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कांफ्रेंस की। इस्तीफा देने वाले कांग्रेस के विधयकों में से एक बुसाहू लाल ने कांफ्रेंस में कहा कि मैंने कांग्रेस से और साथ ही राज्य विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। मैं भाजपा में शामिल हो गया हूं। 

कमलनाथ सरकार के कामकाज से तंग आकर कांग्रेस के अधिकांश विधायक आने वाले दिनों में कांग्रेस से इस्तीफा दे देंगे। मुझे कांग्रेस द्वारा प्रताड़ित किया गया। उन्होंने कहा कि मैंने अपनी मर्जी से इस्तीफा दिया है। मैंने किसी के दबाव में इस्तीफा नहीं दिया। 

माफियाओं पर कार्रवाई से डरी भाजपा: दिग्विजय

दिग्विजय सिंह ने कहा कि कमलनाथ सरकार ने जिस तरह से मध्यप्रदेश के माफियाओं पर कार्रवाई की है, उससे भाजपा डर गई है। इसी कारण सरकार को अस्थिर करने की साजिश रची जा रही है। सिंधिया समर्थक विधायकों के बंगलूरू जाने पर उन्होंने कहा कि हमारे पास ये जानकारी और प्रमाण हैं कि जो तीन चार्टर्ड प्लेन बेंगलूरू गए थे, उसकी व्यवस्था भाजपा ने की थी। प्लेन में भाजपा के विधायक भी बैठे थे। 

उन्होंने कहा, भाजपा हर काम में बंगलूरू का ही क्यों इस्तेमाल करती है, वहां की सरकार क्यों सुरक्षा में लगाई जाती है? यह जनादेश को पलटने का संकेत है। एमपी में माफिया पर कार्रवाई के कारण भाजपा के नेता घबराए हुए हैं। शिवराज सरकार ने 15 साल तक घोटाले किए, इसकी परतें खुल रही हैं। हनी ट्रैप की भी परतें खुलेंगी, इसलिए ये साजिश की जा रही है।

सिंधिया खानदान ने अंग्रेज हुकूमत की मदद की थी

मध्यप्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुभाष यादव के बेटे और पूर्व सांसद अरुण यादव ने कहा कि आने वाला वक़्त अपने स्वार्थों के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं के 15 वर्षों तक किए गए ईमानदारी पूर्ण जमीनी संघर्ष के बाद पाई सत्ता को अपने निजी स्वार्थों के लिए झोंक देने वाले जयचंदों-मीर जाफरों को कड़ा सबक सिखाएगा।

आज ज्योतिरादित्य ने उसी घिनौनी विचारधारा के साथ एक बार पुनः खड़े होकर अपने पूर्वजों को सलामी दी है। ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा अपनाए गए चरित्र को लेकर मुझे जरा भी अफसोस नहीं है। सिंधिया खानदान ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी अंग्रेज हुकूमत और उनका साथ देने वाली विचारधारा की पंक्ति में खड़े होकर उनकी मदद की थी।

मुझे नहीं लगता मध्यप्रदेश में हमारी सरकार बच पाएगी

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि सिंधिया जी कांग्रेस पार्टी में कई वरिष्ठ पदों पर रहे और उनका सम्मान किया, शायद मोदी जी द्वारा दिए गए मंत्रियों के प्रस्ताव के कारण उन्हें लालच आ गया। हम जानते हैं कि उनका परिवार दशकों से भाजपा से जुड़ा हुआ है, लेकिन फिर भी यह एक बड़ा नुकसान है।

अधीर रंजन चौधरी ने कहा, यह वास्तव में हमारी पार्टी के लिए एक नुकसान होगा और मुझे नहीं लगता कि मध्यप्रदेश में हमारी सरकार बच पाएगी। यह भाजपा की वर्तमान राजनीति है, हमेशा विपक्षी दलों को गिराने और अस्थिर करने की कोशिश करती है।

क्या आप जानते है ? BJP के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया परिवार के गहरे संबंध

क्या आप जानते है ? BJP के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया परिवार के गहरे संबंध

ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया जनसंघ की नेता रह चुकी हैं. विजयाराजे सिंधिया ने 1957 में कांग्रेस से अपनी राजनीतिक पारी शुरू की थी. वह गुना लोकसभा सीट से सांसद चुनी गईं. लेकिन कांग्रेस में 10 साल बिताने के बाद पार्टी से उनका मोहभंग हो गया. विजयाराजे सिंधिया ने 1967 में जनसंघ जॉइन कर लिया.

भोपाल: मध्य प्रदेश में कमलनाथ ​सरकार को ज्योतिरादित्य सिंधिया ने तगड़ा झटका दे दिया है. सिंधिया पूरी तरह से बगावत के मूड में आ चुके हैं. ज्योतिरादित्य मंगलवार सुबह दिल्ली स्थित अपने आवास से ​अपनी रेंज रोवर में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के घर पहुंचे. सिंधिया खुद ही गाड़ी चला रहे थे और उनके साथ कोई और मौजूद नहीं था. सिंधिया को लेकर गृहमंत्री अमित शाह पीएम मोदी से मिलने 7 लोक कल्याण मार्ग पहुंचे. इसके बाद यह तो तय हो गया कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ने का मन पूरी तरह बना लिया है. वैसे ज्योतिरादित्य सिंधिया के परिवार का भाजपा के साथ पुराना कनेक्शन रहा है. अब ज्योतिरादित्य भी उसी राह पर चल पड़े हैं.

ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी जनसंघ की नेता थीं
उनकी दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया जनसंघ की नेता रह चुकी हैं. विजयाराजे सिंधिया ने 1957 में कांग्रेस से अपनी राजनीतिक पारी शुरू की थी. वह गुना लोकसभा सीट से सांसद चुनी गईं. लेकिन कांग्रेस में 10 साल बिताने के बाद पार्टी से उनका मोहभंग हो गया. विजयाराजे सिंधिया ने 1967 में जनसंघ जॉइन कर लिया. विजयाराजे सिंधिया की बदौलत ही ग्वालियर क्षेत्र में जनसंघ काफी मजबूत हुआ. वर्ष 1971 में पूरे देश में जबरदस्त इंदिरा लहर होने के बावजूद जनसंघ ने ग्वालियर क्षेत्र की तीन सीटों पर जीत हासिल की. विजयाराजे सिंधिया भिंड से, उनके पुत्र माधवराव सिंधिया गुना से और अटल बिहारी वाजपेयी ग्वालियर से सांसद बने.

पिता माधवराव सिंधिया कांग्रेस पार्टी के साथ जुड़े
गुना लोकसभा सीट लंबे समय तक सिंधिया परिवार के कब्जे में रही. ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया सिर्फ 26 साल की उम्र में गुना से सांसद चुने गए थे. हालांकि माधवराव सिंधिया ने जनसंघ से अपना नाता तोड़ लिया. आपातकाल खत्म होने के बाद 1977 में  माधवराव सिंधिया ने जनसंघ छोड़ दिया. इस बात को लेकर उनकी मां विजयाराजे सिंधिया खफा भी हुईं. लेकिन माधवराव सिंधिया ने अपनी राजनीति कांग्रेस में रहकर करने की ठानी थी. साल 1980 में माधवराव सिंधिया ने कांग्रेस के टिकट पर गुना से चुनाव लड़ा और जीतकर केंद्रीय मंत्री भी बने. 30 सितंबर 2001 को उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के निकट प्लेन क्रैश में माधवराव सिंधिया की मृत्यु हो गई.

दोनों बुआएं भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़ीं
वहीं विजयाराजे सिंधिया की बेटियों वसुंधरा राजे सिंधिया और यशोधरा राजे सिंधिया ने भारतीय जनता पार्टी (जनसंघ) के साथ अपने राजनीतिक पारी शुरू की और अब तक भाजपा के साथ बनी हुई हैं. वसुंधरा राजे सिंधिया 1984 में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल हुईं. वह कई बार राजस्थान की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं और राज्य में भाजपा की सबसे बड़ी नेता हैं. वर्तमान में वह भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं. उनके बेटे दुष्यंत भी बीजेपी से ही राजस्थान की झालवाड़ सीट से सांसद हैं.

ज्योतिरादित्य ने कांग्रेस के साथ राजनीति शुरू की
माधवराव सिंधिया की छोटी बहन और ज्योतिरादित्य सिंधिया की छोटी बुआ यशोधरा सिंधिया 1977 में अमेरिका चली गईं. वह जब भारत लौटीं तो 1994 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गईं. वह मध्य प्रदेश से भाजपा के टिकट पर 5 बार विधायक रह चुकी हैं. शिवराज सिंह चौहान की पूर्ववर्ती सरकार में वह मंत्री भी रह चुकी हैं. अपनी दादी और अपनी बुआओं के उलट ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने पिता की राह पर चलने का फैसला किया और कांग्रेस पार्टी के साथ जुड़कर राजनीति की. वह कांग्रेस नित संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे. गुना से लगातार सांसद चुने जाते रहे. लेकिन 2019 के लोक सभा चुनावों में उन्हें गुना सीट से हार का मुंह देखना पड़ा. अब ज्योतिरादित्य भी अपनी दादी और बुआओं की राह पर चलते हुए भाजपा के साथ जाते हुए दिख रहे हैं