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हाथरस के सिकंदराराऊ कस्बे में भगदड़: बड़ा हादसा और उसकी भयावहता, 19 महिला, 3 बच्चे समेत 23 लोगों की मौत

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के सिकंदराराऊ कस्बे में हाल ही में एक बड़ा हादसा हुआ, जो सभी के लिए अत्यंत दुखद और भयावह था। घटना उस समय घटित हुई जब कस्बे में भोले बाबा का सत्संग चल रहा था। सत्संग के समाप्त होते ही, वहां उपस्थित भीड़ में अचानक भगदड़ मच गई, जिससे स्थिति पूरी तरह से अनियंत्रित हो गई।

इस भगदड़ में कई महिलाएं और बच्चे कुचल गए, जिससे मौके पर चीख पुकार मच गई और स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई। भगदड़ के कारण वहां उपस्थित लोगों में भय और आतंक का माहौल पैदा हो गया। भगदड़ की वजह से कई लोग घायल हो गए और कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। भगदड़ की स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस और अन्य सुरक्षाकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक स्थिति काफी बिगड़ चुकी थी।

इस प्रकार के हादसे हमारे समाज के लिए एक बड़ी चेतावनी हैं और यह दर्शाते हैं कि बड़े आयोजन के समय भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन की तैयारियों और भीड़ नियंत्रण के मौजूदा उपायों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हाथरस के सिकंदराराऊ कस्बे में हुए इस हादसे ने समुदाय को झकझोर कर रख दिया है और पूरे जिले में इस घटना की चर्चा हो रही है।

घटना का कारण

हाथरस के सिकंदराराऊ कस्बे में सत्संग समाप्त होते ही बड़ी संख्या में लोग वहाँ से निकलने की कोशिश कर रहे थे। इस जल्दबाजी में भगदड़ मच गई। भीड़ का प्रबंधन ठीक से नहीं हो पाया, जिसके कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। लोग एक दूसरे को देख नहीं पा रहे थे और धक्का-मुक्की के कारण कई लोग गिर गए।

विशेष रूप से महिलाएं और बच्चे इस अफरा-तफरी में गिरते चले गए, जिससे गंभीर चोटें आईं। भगदड़ के दौरान भीड़ का दबाव इतना बढ़ गया कि लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरते गए। ऐसी स्थितियों में भीड़ का एक साथ निकलने का प्रयास और अधिक खतरनाक हो जाता है।

इस प्रकार की घटनाओं में प्रबंधन की कमी और आपातकालीन सेवाओं का समय पर न पहुंच पाना भी एक बड़ा कारण बनता है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बड़े जनसमूह को नियंत्रित करने के लिए उचित व्यवस्थाएं पहले से ही तय होनी चाहिए।

भगदड़ के पीछे एक और महत्वपूर्ण कारण यह था कि स्थल पर प्रवेश और निकास के मार्ग स्पष्ट रूप से चिन्हित नहीं थे। प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं की अनुपस्थिति ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया।

इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और आयोजकों की तैयारियों पर भी सवाल खड़े किए हैं। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा उपायों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

घायलों और मृतकों की स्थिति

हाथरस के सिकंदराराऊ कस्बे में हुए इस भीषण हादसे में कई लोगों की जान चली गई। घायलों को तुरंत मेडिकल कॉलेज एटा भेजा गया, जहां उनकी इलाज की व्यवस्था की गई। हादसे के तुरंत बाद, मेडिकल कॉलेज में अफरा-तफरी मच गई और डॉक्टरों को घायलों की गंभीर स्थिति के साथ जूझना पड़ा। अब तक 23 लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है, और यह आंकड़ा बढ़ने की भी संभावना है, क्योंकि कई घायलों की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है।

स्थानीय लोग और प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल पर तुरंत पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में जुट गए। कई लोग अपने परिजनों की तलाश में इधर-उधर भटकते रहे, और घटनास्थल पर चीख पुकार का माहौल बना रहा। पुलिस और अर्धसैनिक बलों को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए तैनात किया गया था, ताकि राहत कार्य बिना किसी रुकावट के जारी रह सके।

हादसे के बाद, मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए पर्याप्त संसाधनों की कमी महसूस की गई। घायलों को प्राथमिक चिकित्सा देने के बाद, गंभीर रूप से घायल लोगों को बेहतर इलाज के लिए प्रमुख अस्पतालों में रेफर किया गया। इस हादसे ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया है और लोगों में भय और दुख का माहौल छा गया है।

स्थानीय प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों को सहायता देने का आश्वासन दिया गया है, और सरकार ने भी इस हादसे की जांच के आदेश दिए हैं। यह हादसा सिकंदराराऊ कस्बे के लिए एक बड़ी त्रासदी के रूप में उभर कर सामने आया है, और इसके प्रभाव से उबरने में समय लगेगा।

प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही

हाथरस के सिकंदराराऊ कस्बे में हुए इस भयावह हादसे के प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से उसकी गंभीरता और भयावहता को समझा जा सकता है। एक युवती जो उस समय वहां उपस्थित थी, ने बताया कि सत्संग में भारी संख्या में लोग आए थे। सत्संग के समाप्त होने के बाद, जब लोग वहां से जाने लगे तो भगदड़ मच गई।

युवती ने बताया कि भीड़ इतनी ज्यादा थी कि लोग एक-दूसरे को देख नहीं पा रहे थे। इस भगदड़ के दौरान महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। उन्होंने देखा कि कई महिलाएं और बच्चे गिरते चले गए और उन्हें संभालने का कोई मौका नहीं मिला। इस स्थिति में लोग एक-दूसरे को धकेलते हुए बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे, जिससे भगदड़ और भी भयावह हो गई।

इस हादसे के प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस भगदड़ में कई लोग घायल हुए और कुछ की जान भी चली गई। भगदड़ का कारण अत्यधिक भीड़ और इस भीड़ को नियंत्रित करने में असमर्थता था। युवती ने बताया कि जब तक बचाव दल पहुंचा, तब तक हालात काफी बिगड़ चुके थे।

प्रत्यक्षदर्शियों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए आयोजकों को भीड़ नियंत्रण के बेहतर उपाय अपनाने चाहिए। इस हादसे ने स्पष्ट किया कि बड़े आयोजनों में सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए, ताकि इस तरह की भयानक घटनाओं से बचा जा सके।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

भगदड़ के तुरंत बाद, प्रशासन ने तेजी से कदम उठाए और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पहुंचे। प्राथमिकता के आधार पर, घायलों को त्वरित चिकित्सा सहायता प्रदान की गई और निकटतम अस्पतालों में भेजा गया। चिकित्सा कर्मियों और बचाव दलों ने मिलकर घायलों को प्राथमिक उपचार दिया और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया। प्रशासन ने मृतकों की पहचान की प्रक्रिया भी आरंभ की, ताकि पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द सूचित किया जा सके।

घटना की गंभीरता को देखते हुए, प्रशासन ने एक उच्च-स्तरीय जांच समिति का गठन किया है। इस समिति का उद्देश्य भगदड़ के कारणों की गहनता से जांच करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय सुझाना है। समिति विभिन्न पहलुओं पर ध्यान देगी, जैसे कि सुरक्षा मानकों का पालन, आपातकालीन सेवाओं की तत्परता और भीड़ नियंत्रण के उपाय।

प्रशासन द्वारा जारी किए गए निर्देशों में, घटना स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के आदेश शामिल हैं। इसके अलावा, भीड़ प्रबंधन के लिए अतिरिक्त संसाधनों को जुटाने की आवश्यकता पर बल दिया गया है। अधिकारियों ने स्थानीय निवासियों और प्रत्यक्षदर्शियों से भी अपील की है कि वे जांच में सहयोग करें और किसी भी महत्वपूर्ण जानकारी को प्रशासन के साथ साझा करें।

इस हादसे ने प्रशासन और समूचे समुदाय को एक बार फिर से आपदा प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं की प्रभावशीलता पर विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। प्रशासन यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

सुरक्षा उपायों की कमी

हाथरस के सिकंदराराऊ कस्बे में हुए भगदड़ के इस हादसे ने एक बार फिर से हमारे ध्यान को सुरक्षा उपायों की कमी की ओर आकृष्ट किया है। इस तरह की घटनाओं में अक्सर देखा जाता है कि उचित सुरक्षा उपायों का अभाव होता है, जिससे भारी भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। यहां भी सत्संग के दौरान पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं थे, जिसके परिणामस्वरूप यह भगदड़ मची।

सत्संग जैसे बड़े आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्थाएं अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं। यहाँ पर मुख्य मुद्दा यह था कि आयोजन स्थल पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त संख्या में सुरक्षा कर्मी नहीं थे। इसके अलावा, आपातकालीन स्थितियों में बाहर निकलने के लिए आवश्यक निकास मार्गों की कमी और उनकी सही तरीके से पहचान न हो पाना भी एक गंभीर समस्या थी। यह देखा गया है कि ऐसी घटनाओं के दौरान भीड़ के बीच पैनिक फैल जाता है, जिससे भगदड़ मच जाती है और लोग घायल हो जाते हैं या उनकी जान तक चली जाती है।

सुरक्षा उपायों की कमी के कारणों में एक और महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि आयोजनकर्ताओं द्वारा पूर्वानुमानित भीड़ की संख्या का सही आंकलन नहीं किया गया था। इसके अतिरिक्त, आपातकालीन स्थितियों में मदद के लिए एम्बुलेंस और चिकित्सा सुविधाओं की भी कमी थी। यह भी ध्यान देने योग्य है कि किसी भी बड़े आयोजन में सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी केवल आयोजनकर्ताओं की नहीं होती, बल्कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस की भी होती है।

सुरक्षा उपायों की कमी की वजह से ऐसी घटनाएं बार-बार होती रहती हैं, जो न केवल लोगों की जान के लिए खतरा बनती हैं, बल्कि समाज में भय और असुरक्षा का माहौल भी पैदा करती हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि भविष्य में इस तरह के आयोजनों के लिए ठोस सुरक्षा उपायों की योजना बनाई जाए और उन्हें सही तरीके से लागू किया जाए।

भविष्य के लिए सुरक्षा सुझाव

भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए उचित सुरक्षा उपायों का अपनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। भीड़भाड़ वाले कार्यक्रमों और आयोजनों में भाग लेने वाले लोगों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखना चाहिए। सबसे पहले, आयोजन स्थल का चयन करते समय उसकी क्षमता और सुरक्षा सुविधाओं का ध्यान रखना आवश्यक है। यह सुनिश्चित करना चाहिए कि स्थल में पर्याप्त निकासी मार्ग और आपातकालीन निकासी के लिए योजनाएं हों।

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए उचित व्यवस्था होनी चाहिए। इसके लिए प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की नियुक्ति की जानी चाहिए जो भीड़ प्रबंधन में कुशल हों। इसके अलावा, बड़े आयोजनों में प्रवेश और निकासी के समय को व्यवस्थित करने के लिए उचित प्रबंधन तकनीकों का पालन करना चाहिए, जैसे कि लोगों को समय-समय पर बैचों में प्रवेश देना। सड़कों और गलियों में यातायात का उचित प्रबंधन भी आवश्यक है ताकि आपातकालीन सेवाओं को सुगमतापूर्वक पहुंच मिल सके।

इमरजेंसी स्थिति में लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए पूर्व योजना बनाना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए आयोजन स्थल पर आपातकालीन निकासी मार्गों की स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए और नियमित रूप से निकासी अभ्यास करवाना चाहिए। आपातकालीन स्थिति में लोगों को शांत और संयमित रहने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए ताकि भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न न हो।

सुरक्षा उपायों में तकनीकी साधनों का उपयोग भी महत्वपूर्ण है। सीसीटीवी कैमरों का उपयोग, इलेक्ट्रॉनिक स्कैनिंग उपकरणों का प्रयोग और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से भीड़ की स्थिति की निगरानी की जा सकती है। आपातकालीन सेवाओं के साथ समन्वय करना भी आवश्यक है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया दी जा सके।

समाज की प्रतिक्रिया

हाथरस के सिकंदराराऊ कस्बे में घटित इस हादसे ने समाज को गहरे रूप से झकझोर कर रख दिया है। व्यापक स्तर पर लोगों में दुख और आक्रोश का माहौल बना हुआ है। इस हादसे की भयावहता ने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर ऐसी घटनाएं क्यों और कैसे होती हैं।

सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं तीव्र हैं। ट्विटर, फेसबुक, और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफार्मों पर लोग अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं और प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कई लोग इस हादसे को प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम मानते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

प्रमुख राजनीतिक नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस हादसे की निंदा करते हुए कहा कि ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। कुछ संगठनों ने तो पीड़ितों के परिवारों को आर्थिक और मानसिक सहायता प्रदान करने की भी पेशकश की है।

आम जनता भी इस घटना से आहत है और वे अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों ने इस हादसे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए हैं। वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों और समाज में सुरक्षा और न्याय की भावना बनी रहे।

कुल मिलाकर, यह हादसा समाज की संवेदनशीलता को उजागर करता है और यह दिखाता है कि जनता सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई की ही नहीं, बल्कि न्याय और सुरक्षा की भी उम्मीद करती है।

सफल अधिकारी बनने सरल, सेवाभावी तथा संवेदनशील रहें : राज्यपाल श्री पटेल – MPINFO

राज्यपाल से प्रशिक्षु आई.ए.एस. अधिकारियों ने राजभवन में की भेंट: राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि अधिकारियों के लिए उनका व्यवहार सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। सफल अधिकारी बनने सरल, सेवाभावी तथा संवेदनशील रहें।

आप सभी की जहाँ भी पदस्थापना हो, जिनसे भी मिलें, सरल भाषा में आत्मीयता से बात करें। गरीबों एवं वंचितों की बेहतरी के लिए काम करना ही प्रशासनिक सेवा की सार्थकता है। राज्यपाल श्री पटेल भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2023 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि प्रभावी अधिकारी बनने के लिये सीखने का भाव जरूरी है। पूरे सेवाकाल में सीखते रहें। कार्य क्षेत्रों का सघन दौरा करें। जनता की समस्याओं को गम्भीरता से सुनें और समाधान करें। अधिकारियों तक जनता की एवं जनता तक आपकी पहुँच सुलभ हो।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण व जमीनी अनुभवों में अंतर होता है। व्यवहार में अनेक ऐसी समस्याएं आती हैं जिनका समाधान दिशा-निर्देशों में नहीं मिलता है। आप सभी को इन्हीं समस्याओं और चुनौतियों का समाधान जन-मन की आशा एवं अपेक्षा के अनुरूप करना होगा।

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि आप बहुत सौभाग्यशाली हैं, जिन्हें आजादी के अमृत प्रसंग में जनसेवा तथा देशसेवा का पुनीत अवसर प्राप्त हुआ है। आप सिविल सेवकों की उस पीढ़ी से हैं जो 2047 में देश को विकसित भारत बनाने के परिवर्तन काल के निर्णयकर्ता और साक्षी बनेंगे।

राज्यपाल श्री पटेल का महानिदेशक नरोन्हा अकादमी श्री जे.एन. कंसोटिया ने पौधा भेंट कर स्वागत और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। अकादमी की ओर से प्रशिक्षु अधिकारी श्री शिवम यादव ने प्रशिक्षण काल के अपने अनुभवों को साझा किया। श्रीमती नेहा भारतीय ने प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए अकादमी के प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी दी।

कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रमुख सचिव श्री मुकेश चंद गुप्ता, अपर सचिव श्री उमाशंकर भार्गव, विधि अधिकारी श्री उमेश कुमार श्रीवास्तव, प्रशिक्षु अधिकारी और संबंधित मौजूद थे।

सिवनी: बंद हुआ खवासा चेकपोस्ट, कलेक्टर और अन्य अधिकारियों ने किया निरीक्षण

सिवनी: मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में शासन द्वारा जारी नए आदेश के अनुपालन में अंतर्राज्यीय एकीकृत परिवहन जाँच चौकी खवासा का संचालन बंद कर दिया गया है। यह आदेश मध्यप्रदेश शासन परिवहन विभाग मंत्रालय, वल्लभ भवन भोपाल के आदेश क्रमांक 925/1429257/2023/आठ – भोपाल, दिनांक 30.06.2024 के आधार पर जारी किया गया है। इस आदेश के तहत 01 जुलाई 2024 से चेक पोस्ट का संचालन बंद कर दिया गया है।

कलेक्टर और अन्य अधिकारियों का निरीक्षण

कलेक्टर सुश्री संस्कृति जैन के निर्देशानुसार, अपर कलेक्टर श्री सी.एल. चिनाप, एडिशनल एस.पी. श्री जी.डी. शर्मा, अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी श्री देवेश बाथम, और प्रभारी रोड सेफ्टी एवं इंफोर्समेंट चैकिंग पॉइंट श्री रत्नाकर उइके द्वारा बंद परिवहन जाँच चौकी खवासा का औचक निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने रोड सेफ्टी और इंफोर्समेंट चैकिंग पॉइंट तथा मोबाइल यूनिट के लिए स्थल चयन किया और प्रवर्तन अमला को दिशा-निर्देश प्रदान किए।

परिवहन विभाग के निर्देश

परिवहन विभाग के निर्देशों के अनुसार, सिवनी जिले के खवासा क्षेत्र में स्थित अंतर्राज्यीय चेक पोस्ट को बंद करने का मुख्य उद्देश्य परिवहन प्रक्रिया को सरल और सुचारू बनाना है। इस निर्णय के बाद, यात्री और मालवाहक वाहनों को बिना किसी अवरोध के अंतर्राज्यीय सीमा पार करने की अनुमति होगी।

चेक पोस्ट बंद होने के लाभ

चेक पोस्ट बंद होने से कई लाभ होंगे। सबसे पहले, यह परिवहन में लगने वाले समय को कम करेगा और यात्रियों को बेवजह की देरी से निजात दिलाएगा। इसके अलावा, व्यापारियों को भी अपना माल तेजी से गंतव्य तक पहुँचाने में आसानी होगी। यह कदम राज्य के आर्थिक विकास में सहायक सिद्ध होगा क्योंकि वस्तुओं का परिवहन सुगमता से हो सकेगा।

रोड सेफ्टी और इंफोर्समेंट की भूमिका

हालांकि चेक पोस्ट को बंद कर दिया गया है, परंतु रोड सेफ्टी और इंफोर्समेंट चैकिंग पॉइंट और मोबाइल यूनिट की स्थापना के माध्यम से सुरक्षा और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। इन इकाइयों का मुख्य कार्य सड़कों पर यातायात नियमों का पालन कराना और वाहनों की नियमित जांच करना होगा।

स्थानीय निवासियों और व्यापारियों की प्रतिक्रिया

स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इस कदम से समय और संसाधनों की बचत होगी और व्यापारिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी। कई व्यापारियों ने इस निर्णय को सकारात्मक रूप में देखते हुए कहा कि इससे परिवहन खर्चों में कमी आएगी और माल की डिलीवरी समय पर हो सकेगी।

भविष्य की योजनाएँ और दिशा-निर्देश

आने वाले समय में, सरकार और परिवहन विभाग अन्य क्षेत्रों में भी इसी प्रकार के सुधारात्मक कदम उठाने की योजना बना रहे हैं। उनका उद्देश्य परिवहन प्रणाली को अधिक प्रभावी और सुविधाजनक बनाना है। इसके लिए, नई तकनीकों और प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाएगा ताकि यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके।

Seoni News: सिरी सीड्स इंडिया प्रायवेट लिमिटेड कम्पनी सिवनी जिले में प्रतिबंधित, कीटनाशक एवं उर्वरक गुण नियंत्रण अन्तर्गत लिया गया फैसला

सिवनी: जिले में कृषकों को गुणवत्ता युक्त आदान सामग्री उपलब्ध कराने हेतु जिला कलेक्टर महोदया सुश्री संस्कृति जैन के निर्देशानुसार एवं उपसंचालक कृषि सिवनी मोरिस नाथ द्वारा जिला स्तर पर 1 एवं अनुभाग स्तर पर 2 जांच दलों गठन किया गया है।

गठित दल द्वारा जिले में बीज, कीटनाशक एवं उर्वरक विक्रता संस्थानों में सतत् निरीक्षण किया जा रहा है। जिले में यूरिया के 27 नमूने एवं डी.ए.पी. के 6 नमूने जांच हेतु लिये जाकर उर्वरक गुण नियंत्रण प्रयोगशाला भेजे गये जिसमें यूरिया के 26 नमूने के परिणाम प्राप्त हुये 26 नमूने मानक स्तर के पाये गये एवं डी.ए.पी. के 3 नमूने मानक स्तर के एवं 3 नमूने अमानक स्तर के पाये गये।

अमानक स्तर के पाये गये नमूनों में संबंधित विक्रेता संस्थान एवं संबंधित कम्पनी को विक्रय प्रतिबंधित आदेश जारी कर कारण बताओं नोटिस जारी किये गये। जिले में 4 उर्वरक विक्रेता संस्थानों को अनियमितता पाये जाने पर कारण बताओं नोटिस जारी किये गये है।

जिले में खरीफ 2024 में बीज नमूना के 210 के लक्ष्य प्राप्त हुये थे जिसमें 212 नमूने जांच हेतु लिये जाकर बीज गुण नियंत्रण प्रयोगशाला भेजे गये है। 25 बीज नमूने के परिणाम प्राप्त हुये है जिसमें 25 मानक स्तर के पाये गये है। जांच दल द्वारा 14 संस्थानों में अनियमितता पाये जाने पर 7 बीज विक्रेता संस्थानों के लायसेंस निलम्बित किये गये एवं 7 बीज विक्रेता संस्थानों को कारण बताओं नोटिस जारी किये गये है।

अवैध बीज भण्डारण करने पर टालेन्द्र पारधी के विरूद्ध एफआईआर दर्ज की गई एवं सिरी राईडर मक्का बीज अंकुरण न होने की कृषकों द्वारा की गई शिकायत के संबंध में है सिरी राईडर मक्का विक्रेता संस्थान आराध्य ट्रेडर्स धनौरा का बीज लायसेंस निलंबन किया जाकर कम्पनी सिरी सीड्स इंडिया प्रायवेट लिमिटेड हैदराबाद तेलगाना को जिले में प्रतिबंधित किया गया है।

जिले के कृषकों को बीज, कीटनाशक एवं उर्वरक से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या होने पर सहायक संचालक कृषि सिवनी सह नोडल अधिकारी गुण नियंत्रण प्रफुल्ल घोडेसवार मो. न. 7693955285 से सम्पर्क कर सकते है

MP से हैरान करने वाली घटना: अंतिम संस्कार के 53 दिन बाद जिंदा हुई महिला, EX CM शिवराज सिंह चौहान की लाड़ली बहना योजना ने खोला राज

भिंड में हैरान करने वाली घटना: मृत घोषित महिला 53 दिन बाद मिली जिंदा: भिंड जिले में एक ऐसी घटना घटी जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। दो मई 2024 को घर से लापता हुई महिला के मामले ने तब एक नया मोड़ लिया जब 53 दिन बाद वह जिंदा पाई गई। इस अद्भुत घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना प्रारंभ: महिला के लापता होने की सूचना

भिंड के मेहगांव वार्ड क्रमांक 2 की निवासी ज्योति शर्मा, पति सुनील शर्मा, 2 मई 2024 को अचानक लापता हो गईं। परिजनों ने 3 मई को मेहगांव थाने में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। इस दौरान, पुलिस और परिजन दोनों ही महिला की खोजबीन में लगे रहे।

मृत घोषित: खेत में मिला जला हुआ शव

4 मई को मेहगांव के एक खेत में एक महिला का जला हुआ शव मिला। मायके और ससुराल पक्ष ने शव की पहचान ज्योति शर्मा के रूप में की। ज्योति के मायके वालों ने ससुराल वालों पर हत्या का आरोप लगाया। इसके बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम कराकर शव को परिजनों को सौंप दिया।

अंतिम संस्कार और तेरहवीं:

शव को मेहगांव लाकर ज्योति के ससुराल में अंतिम संस्कार किया गया। इसके बाद अस्थि विसर्जन प्रयागराज में किया गया और तेरहवीं के कर्मकांड भी पूरे किए गए। इस दौरान, पुलिस ने मामले को संदेहास्पद मानते हुए जांच जारी रखी और अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया।

सच का खुलासा:

50 दिन बाद, 22 जून को, ज्योति के पति सुनील ने पुलिस को सूचना दी कि उनके बैंक खाते से 2700 रुपये निकाले गए हैं। यह राशि लाड़ली बहना योजना के तहत आए पैसों के अलावा निकाली गई थी। बैंक मैनेजर से जानकारी मिलने पर पता चला कि यह पैसे यूपी के मथुरा और नोएडा से निकाले गए थे। सुनील ने बैंक मैनेजर को पूरी घटना बताई और बैंक मैनेजर ने पुलिस को सूचना दी।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई:

पुलिस ने बैंक से डिटेल निकलवाई और नोएडा के कियोस्क सेंटर के सीसीटीवी फुटेज चेक किए। फुटेज में ज्योति कुछ युवकों के साथ नजर आई। 23 जून को ज्योति नोएडा में फुटपाथ पर पैदल चलते हुए मिली। पुलिस ने उसे 25 जून को भिंड लाया और मेहगांव एसडीएम कोर्ट में पेश किया।

ज्योति का बयान और सच्चाई:

ज्योति ने कोर्ट में दिए बयान में कहा कि वह अपनी मर्जी से गई थी। कोर्ट ने उसे मायके पक्ष को सुपुर्द कर दिया। इस घटना के बाद यह स्पष्ट हो गया कि खेत में मिला शव ज्योति का नहीं था।

मामले की जांच और अनसुलझे सवाल:

अब सवाल उठता है कि खेत में मिला जला हुआ शव किसका था? पुलिस इस दिशा में जांच जारी रखे हुए है और इस रहस्यमयी मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

MP Budget Session: एमपी के बजट में बुनियादी ढांचे और हिंदुत्व पर रहेगा बड़ा फोकस

MP Budget Session: राज्य सरकार बुधवार को बजट पेश करने जा रही है, जिसमें लगभग 3 लाख करोड़ रुपए के बजट का प्रस्ताव है। इस बजट में सरकार ने महंगी परियोजनाओं को शामिल करने से परहेज किया है और ध्यान दिया है पुरानी परियोजनाओं को धन मुहैया कराने पर।

नई योजनाओं में मितव्ययिता

नई योजनाओं के संदर्भ में सरकार ऐसे प्रोजेक्ट्स को लाएगी जिनमें अधिक खर्च की आवश्यकता नहीं होगी। भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में वादा किया था कि सत्ता में आने पर लाड़ली बहनों के लिए घर बनाएगी। इस घोषणा के पश्चात लाड़ली बहना योजना के तहत पंजीकृत हर महिला अपने घर का इंतजार कर रही है।

लाड़ली बहना योजना

सूत्रों के अनुसार, इस योजना को मौजूदा हाउसिंग प्रोजेक्ट से जोड़ा जा सकता है। इसके साथ ही लाड़ली बहना योजना के तहत हर महिला को 1250 रुपए महीने का प्रावधान बजट में किया जाएगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान

बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस रहेगा। सूत्रों के अनुसार, इंफ्रास्ट्रक्चर पर 70 हजार करोड़ रुपए खर्च करने का प्रावधान किया जा रहा है।

धार्मिक स्थलों का विकास

धार्मिक स्थलों को भी बजट में शामिल किया गया है। सरकार गौशालाओं के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाएगी, जहां मवेशी रखे जाते हैं। साथ ही गौशालाओं के निर्माण पर भी ध्यान दिया जाएगा। राम वन गमन पथ के निर्माण, भगवान कृष्ण से जुड़े स्थलों के विकास तथा अन्य धार्मिक स्थलों के विकास के लिए भी धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है।

धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन

सरकार धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने की योजना बना रही है जिसके लिए बजट में धनराशि का प्रावधान किया जा रहा है।

शिक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान

बजट में पीएम एक्सीलेंस कॉलेज और सीएम एक्सीलेंस स्कूल पर ध्यान दिया जाएगा। सरकार अस्पताल भवनों के निर्माण के लिए भी धन का प्रावधान करने की योजना बना रही है।

MP के जबलपुर में T20 विश्व कप 2024 में भारत की जीत का जश्न, पटाखे फोड़ते समय 5 साल के मासूम के पेट में धातु का टुकड़ा घुसने से मौत

Jabalpur News: जबलपुर में टी20 विश्व कप 2024 में भारत की जीत का जश्न मनाने के लिए पटाखे फोड़ते समय एक पांच वर्षीय बच्चे के पेट में स्टील का टुकड़ा घुस जाने से उसकी मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि यह घटना रविवार को जिले के गोहलपुर इलाके में हुई।

गोहलपुर थाना प्रभारी प्रतीक्षा मार्को ने बताया कि कुछ बच्चे पटाखे जला रहे थे और उन्होंने एक पटाखा स्टील के गिलास के नीचे रख दिया था। विस्फोट से स्टील के टुकड़े उड़ गए। उन्होंने बताया कि एक टुकड़ा दीपक ठाकुर के पेट में जा लगा जो कुछ दूरी पर खड़ा था।

पुलिस ने बताया कि लड़के को अस्पताल ले जाया गया लेकिन उसे मृत घोषित कर दिया गया। उन्होंने बताया कि बच्चे एक दिन पहले टी20 विश्व कप में भारत की जीत का जश्न मनाने के लिए पटाखे फोड़ रहे थे। उन्होंने बताया कि पुलिस सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है और मामले की जांच जारी है।

नवविवाहिता की चौथी मंजिल से गिरकर मौत, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप, ससुराल वालों पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप

पुलिस ने बताया कि चार महीने पहले शादी करने वाली 23 वर्षीय महिला की रविवार देर रात कटारा हिल्स में अपने घर की चौथी मंजिल से गिरकर मौत हो गई। महिला के परिजनों ने आरोप लगाया है कि उसके ससुराल वालों ने उसे धक्का देकर मार डाला और घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। घटना की पुलिस जांच कर रही है। उन्होंने उसके ससुराल वालों पर दहेज के लिए उसे परेशान करने का आरोप लगाया है।

कटारा हिल्स पुलिस के अनुसार मृतका की पहचान विदिशा निवासी स्वाति पटेल के रूप में हुई है। उसके भाई अंकित पटेल ने पुलिस को बताया कि उसकी शादी चार महीने पहले भोपाल निवासी भूपेंद्र पटेल से हुई थी।

उन्होंने बताया कि रविवार रात को भूपेंद्र ने उन्हें फोन करके स्वाति को लेने आने और उसे फिर कभी अपने घर न आने देने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि जब वह अभी भी भूपेंद्र से बात कर रहा था, स्वाति ने अपने पति से फोन ले लिया और उससे (अंकित) कहा कि वह उसे लेने कभी न आए। अपना बयान जारी रखते हुए अंकित ने कहा कि कुछ मिनट बाद भूपेंद्र ने उसे फिर से फोन करके बताया कि वह और स्वाति उसके साथ शरारत कर रहे हैं।

अंकित ने आगे बताया कि रात करीब 1 बजे भूपेंद्र की मां ने उसके पिता को फोन करके बताया कि स्वाति सीढ़ियों से गिर गई है और उसकी हालत गंभीर है। अंकित ने भूपेंद्र को फोन किया तो उसने बताया कि स्वाति कपड़े सुखाते समय घर की चौथी मंजिल से गिर गई है।

जब अंकित भोपाल के अस्पताल पहुंचा तो उसे पता चला कि स्वाति की मौत हो चुकी है। इसके बाद अंकित ने पुलिस से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस को दिए गए बयान में उसने बताया कि स्वाति के ससुराल वाले उसे दहेज के लिए परेशान कर रहे थे। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है।

मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र: नर्सिंग घोटाले को लेकर विपक्ष ने किया हंगामा

भोपाल (मध्य प्रदेश): नर्सिंग कॉलेज घोटाले का मामला सोमवार को मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन भी गरमाया रहा। विपक्ष ने इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की और कहा कि यह विषय छात्रों के भविष्य से जुड़ा है।

संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि जो मामला अदालत में विचाराधीन है, उस पर चर्चा नहीं की जा सकती।

हालांकि, विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने कहा कि वह ऐसे विषय पर चर्चा चाहते हैं जो न्यायालय के विचाराधीन नहीं है। विपक्ष के हंगामे के कारण स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर को सदन की कार्यवाही कम से कम एक घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ी। जब विधानसभा की कार्यवाही फिर से शुरू हुई तो तोमर ने विपक्ष को आश्वासन दिया कि प्रासंगिक नियम के तहत वह कल यानी मंगलवार को इस मामले पर चर्चा की अनुमति देंगे।   

इससे पहले इस मामले को लेकर कैलाश विजयवर्गीय और उमंग सिंघार के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी। सिंघार ने आरोप लगाया कि मंत्री विश्वास सारंग को बचाने की कोशिश की जा रही है। सिंघार ने कहा, “हम नर्सिंग काउंसिल के मुद्दे पर चर्चा चाहते हैं और यह भी जानना चाहते हैं कि अनुमति किसने दी।”

इस दौरान विजयवर्गीय ने कहा कि राज्य सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा से नहीं डरती और न ही किसी चर्चा से भाग रही है। जहां तक ​​विपक्ष के स्थगन का सवाल है तो स्थगन किसी तात्कालिक घटना की स्थिति में लाया जाता है और विपक्ष द्वारा उठाया जा रहा मुद्दा पुराना है।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष को चेताया कि वे उत्तेजना में आकर कुछ न बोलें

विपक्ष जब नर्सिंग घोटाले पर चर्चा के लिए सत्ता पक्ष पर दबाव बना रहा था, एक के बाद एक आरोप लगा रहा था, तब मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि उनकी सरकार किसी मुद्दे से नहीं डरती। हालांकि, उन्होंने विपक्ष को चेतावनी दी कि वे जोश में आकर कुछ न कहें। उन्होंने कहा, “हमें इस तरह की बातें सुनने की आदत नहीं है। हम किसी से नहीं डरते।”