18 साल बाद 15 अगस्त को रक्षाबंधन, इस बार बाधा नहीं बनेगी भद्रा

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इस बार रक्षाबंधन 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के दिन रहेगा। दोनों उत्सव एक साथ मनने से पर्व की खुशियां दो गुनी दिखाई…

नई दिल्ली // इस बार रक्षाबंधन 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के दिन रहेगा। दोनों उत्सव एक साथ मनने से पर्व की खुशियां दो गुनी दिखाई देंगी। यह संयोग 18 साल बाद बना है। इसके पहले वर्ष 2000 में रक्षाबंधन व स्वतंत्रता दिवस एक साथ थे। इसके पूर्व नागपंचमी 5 अगस्त को सावन के तीसरे सोमवार पर होगी। सोमवार को नागपंचमी का संयोग 19 साल बाद बन रहा है।

खास बात यह है कि इस बार रक्षाबंधन पर अशुभ माना गया भद्रा योग भी नहीं है, जिस कारण श्रावणी के सभी संस्कार किए जा सकेंगे। इस दिन रात्रि में 9 बजे के बाद पंचक प्रारंभ होगा, परंतु इसके पूर्व की राखी बंधवाने से लेकर अन्य सभी अनुष्ठान संपन्न हो जाएंगे। आचार्य पं. धर्मेंद्र शास्त्री के अनुसार भाई-बहनों के पवित्र स्नेह का रक्षाबंधन पर्व इस बार 15 अगस्त को मनाया जाएगा।

इस दिन कई अन्य शुभ योग भी रहेंगे। भद्रा योग न होने के कारण ये सुबह से रात 9 बजे तक मनाया जा सकेगा। खास बात यह है कि इस साल रक्षाबंधन पर काफी लंबा मुहूर्त मिला है। लंबे अर्से के बाद सावन माह में 15 अगस्त के दिन चंद्र प्रधान श्रवण नक्षत्र में स्वतंत्रता दिवस आ रहा है।

14 अगस्त को… रात 1.46 बजे से शुरू होगा पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त- सुबह 6 से 7:30 व सुबह 10:30 से दोपहर 3 बजे तक व शाम को 4:30 से शाम 6.00 व रात को 6.00 से रात 9.00 बजे तक रहेगा।

प्रदोष योग…. पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ एक दिन पूर्व 14 अगस्त को रात 1.46 बजे से होगा, जो 15 अगस्त शाम 6 बजकर 2 मिनिट तक रहेगी। एक दिन पहले भद्रा दिन के 3:49 से तड़के 4:52 तक ही रहेगी। पं. शास्त्री के अनुसार 12 अगस्त को अंतिम श्रावण सोमवार पर पुन: प्रदोष योग रहेगा। शिव पूजा के लिए प्रदोष को काफी शुभ माना जाता है।

अतिफलदायक… शिव और नागदेवता की पूजा एक साथ

ज्योतिषी अंजना गुप्ता ने बताया कि श्रावण सोमवार पर नाग पंचमी को होना अति शुभ माना जाता है। सोमवार भगवान शिव के अधिपत्य वाला दिवस है। शिव के गले में नाग देव विराजमान रहते हैं। अागामी श्रावण सोमवार पर शिव व नागदेवता की एक साथ पूजा होगी। चौरसिया समाज द्वारा हर वर्ष नागपंचमी चौरसिया दिवस के रूप में मनाई जाती है। कई अन्य समाजों में भी नाग देवता की विशेष पूजा किए जाने की परंपरा है।

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