Saturday, April 17, 2021

आप जानकर रह जाएंगे हैरान, अमेरिका ने भारत से लिया है 15 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज

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Khabar Satta Deskhttps://khabarsatta.com
खबर सत्ता डेस्क, कार्यालय संवाददाता
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वाशिंगटन। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका पर दो दशक में कर्ज का भार तेजी से बढ़ा है। खास बात यह है कि भारत का भी उस पर 216 अरब डॉलर (15 लाख करोड़ रुपये) का कर्ज है। अमेरिका के सिर पर कुल 29 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज चढ़ा हुआ है। एक अमेरिकी सांसद ने सरकार को बढ़ते कर्ज भार को लेकर आगाह किया है। चीन और जापान का अमेरिका पर सबसे ज्यादा कर्ज है।

हर अमेरिकी पर बढ़ रहा कर्ज 

वर्ष 2020 में अमेरिका का कुल राष्ट्रीय कर्ज भार 23.4 ट्रिलियन डॉलर था। इसका आशय यह हुआ कि प्रत्येक अमेरिकी पर 72,309 डॉलर (53 लाख रुपये से अधिक) का कर्ज है। अमेरिकी सांसद एलेक्स मूनी ने कहा, ‘हमारा कर्ज बढ़कर 29 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने जा रहा है। इसका मतलब है कि हर व्यक्ति पर कर्ज का भार और अधिक बढ़ रहा है। कर्ज के बारे में सूचनाए बहुत भ्रामक हैं कि यह जा कहां रहा है।

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चीन और जापान बड़े कर्जदाता

चीन और जापान हमारे सबसे बड़े कर्जदाता हैं, लेकिन वे वास्तव में हमारे दोस्त नहीं हैं। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में बाइडन सरकार के करीब दो ट्रिलियन डॉलर के प्रोत्साहन पैकेज का विरोध करते हुए वेस्ट वर्जीनिया का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद मूनी ने कहा, ‘चीन के साथ वैश्विक स्तर पर हमारी प्रतिस्पर्धा है। उनका हमारे ऊपर बहुत बड़ा कर्ज चढ़ा हुआ है।

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हमें उनका कर्ज चुकाना भी है

सांसद मूनी ने कहा कि चीन और जापान का हमारे ऊपर एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक का कर्ज है। सांसद मूनी ने कहा, ‘वे देश जो हमको कर्ज दे रहे हैं, हमें उनका कर्ज चुकाना भी है। जरूरी नहीं कि इन देशों को हमारे श्रेष्ठ हित का ध्यान हो, जिनके बारे में हम यह नहीं कह सकते कि वे दिल में हमेशा हमारे हित का खयाल रखते हैं।’

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भारत का 216 अरब डॉलर बकाया

उन्होंने कहा कि ब्राजील को हमें 258 अरब डॉलर देना है। भारत का हमारे ऊपर 216 अरब डॉलर बकाया है। हमारे विदेशी कर्जदाताओं की यह सूची लंबी है। वर्ष 2000 में अमेरिका पर 5.6 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज था जो ओबामा प्रशासन के दौरान दोगुना हो गया।

कर्ज का भार दोगुना  

मूनी ने कहा कि ओबामा के आठ साल के कार्यकाल के दौरान हमने अपने ऊपर कर्ज का भार दोगुना कर लिया। अब हम इसे और बढ़ाने जा रहे हैं। कर्ज और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का अनुपात काबू से बाहर हो गया है। हम प्रति व्यक्ति के हिसाब से प्रति वर्ष 10 हजार डॉलर का कर्ज विदेशों से ले रहे हैं।

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