Homeदेशहिसार की बेटी को सैल्‍यूट; आठ माह का गर्भ, 48 घंटे बिना...

हिसार की बेटी को सैल्‍यूट; आठ माह का गर्भ, 48 घंटे बिना सोये चमोली आपदा में फंसे लोगों को बचाया

Date:

हिसार। उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर टूटने के बाद आई आपदा ने हर किसी को हैरान कर दिया। लोगों की जान बचाने के लिए अभी भी रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इस आपदा में हिसार की बेटी डा. ज्योति ने ऐसा काम किया है कि जिसकी मिसाल कभी नहीं भुलाई जा सकेगी। दरअसल इंडो तिब्बतियन बार्डर पुलिस (आईटीबीपी) में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर तैनात हिसार के सेक्टर 16-17 निवासी डा. ज्योति की तैनाती नवंबर माह में जोशीमठ में हुई थी। रोजना की तरह वह जोशीमठ में आईटीबीपी के अस्पताल में काम कर रही थीं कि तभी सुबह सूचना मिलती है कि ग्लेशियर टूटने से कई लोग हाइड्रो परियोजना के तहत बन रही टनल में फंस गए हैं।

अस्पताल में दो चिकित्सक थे, इसलिए एक चिकित्सक रेस्क्यू टीम के साथ टलन के पास चले गए तो दूसरे चिकित्सक के रूप में डा. ज्योति ने अस्पताल में जिम्मेदारी संभाली। आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि आठ माह का गर्भ होने के बावजूद वह अस्पताल में तीन दिन तक डटी रहीं। जिसमें शुरुआत के 48 घंटे तक वह बिना सोये पहली टनल से निकाले गए 12 मजदूरों को बचाने में जुटी रहीं। गर्भवती होने के बाद आसपास के लोगों व स्टाॅफ न आराम करने को कहा मगर लोगों की जान बचाने के जुनून ने उन्हें थकने तक नहीं दिया।

टनल में फंसे मजदूरों का ऑक्सीजन लेवल था कम

डा. ज्योति ने बताती हैं कि टनल एक में 12 मजदूर फंसे हुए थे। यह एक लोहे की रॉड पकड़े घंटों जिंदगी और मौत से जद्दोजहद करते रहे। इनसे से एक व्यक्ति बाकी मजदूरों को शायरी और गीत सुनाकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता था। इसी की प्रेरणा से सभी 12 मजूदूर लोहे को मजबूती से घंटों पकड़े रहे। जब यह अस्पताल में आए तो किसी को हाइपोथर्मिया तो किसी का ऑक्सीजन का स्तर काफी कम था। इसके साथ ही भारी तनाव में थे। आपदा 10 बजे करीब आई और रेस्क्यू के बार मजदूरों को करीब साढ़े छह बजे अस्पताल में लाया गया। तब वह एकमात्र चिकित्सक वहां थीं। इसलिए उन्होंने सबसे पहले ऑक्सीजन मुहैया कराई। मजदूरों को कपड़े, खाना आदि दिया। उनका तनाव दूर कराने के लिए परिजनों से बात आदि कराई गई। इन मजदूरों की तीन दिन तक उन्होंने सेवा की।

घर पर डिलीवरी कराने का लिया था फैसला

डा. ज्योति के पिता दिनेश कुमार हिसार में दक्षिण हरियाणा विद्युत वितरण निगम में जेई के पद पर तैनात हैं तो माता चंद्रावती गृहणी हैं। उनकी शादी सिरसा में इंजीनियर आशीष से हुई है, जो खुद भी आईटीबीपी में इंजीनियर हैं। डा. ज्योति ने बताया कि नवां महीना शुरू होने वाला था हमारी प्लानिंग थी कि घर जाकर डिलीवरी कराएंगे मगर आपदा की जानकारी मिलते ही सभी प्लान तत्काल रोक दिए। मन में एक ही बात आई जब तक दम है तब तक एक-एक जान बचाऊंगी। इस काम में मेडिकल टीम ने भी हरदम साथ दिया।

Khabar Satta
Khabar Sattahttps://khabarsatta.com
खबर सत्ता डेस्क, कार्यालय संवाददाता

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related