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सिवनी में कल से ताबड़तोड़ कार्रवाई: अवैध अतिक्रमण पर चलेगा प्रशासनिक चाबुक

Seoni: सिवनी जिले में मॉडल रोड के निर्माण कार्य को गति देने के लिए प्रशासन ने सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी के तहत अवैध अतिक्रमण हटाने की मुहिम भी शुरू की जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा पहले ही सभी अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किया गया था, जिसकी समय-सीमा आज, 7 मार्च, को समाप्त हो चुकी है। अब प्रशासन ने 8 मार्च से अवैध अतिक्रमण पर बुलडोजर चलाने की तैयारी पूरी कर ली है।

जोडापुल से ज्यारत नाके तक चलेगी कार्रवाई

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई मुख्य रूप से जोडापुल से ज्यारत नाके के बीच आने वाले मार्ग पर की जाएगी। इस दौरान सभी स्थायी (परमानेंट) एवं अस्थायी (टेंपरेरी) अतिक्रमण को हटाया जाएगा। सड़क चौड़ीकरण के कार्य में बाधा बन रहे निर्माणों को प्रशासन जेसीबी मशीन की मदद से ध्वस्त करेगा।

प्रशासन की कड़ी चेतावनी

जिला प्रशासन ने अतिक्रमणकारियों को पहले ही नोटिस देकर स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने का अवसर दिया था, लेकिन समय-सीमा समाप्त होने के बाद अब बलपूर्वक कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी प्रकार की छूट या रियायत नहीं दी जाएगी और जिन लोगों ने अतिक्रमण नहीं हटाया, उन्हें मजबूरन प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

सुरक्षा व्यवस्था रहेगी कड़ी

कार्रवाई के दौरान पुलिस बल की तैनाती भी की जाएगी ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था या विरोध प्रदर्शन की स्थिति को संभाला जा सके। प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।

स्थानीय नागरिकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय नागरिकों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे शहर की सुंदरता और यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं, तो वहीं कुछ प्रभावित लोग इसे अपनी रोजी-रोटी पर असर डालने वाला फैसला मान रहे हैं।

मॉडल रोड प्रोजेक्ट को मिलेगी गति

गौरतलब है कि सिवनी में मॉडल रोड प्रोजेक्ट का कार्य प्रगति पर है, जिसके अंतर्गत सड़क चौड़ीकरण, सौंदर्यीकरण और अन्य आधारभूत संरचनाओं को विकसित किया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि इस अभियान के बाद मॉडल रोड प्रोजेक्ट में तेजी आएगी और शहर को एक नया स्वरूप मिलेगा।

सिवनी जिले में 8 मार्च से अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू होगी। प्रशासन ने पहले ही चेतावनी दे दी थी, और अब किसी भी तरह की लापरवाही या बहानेबाजी नहीं चलेगी। अवैध कब्जाधारियों को कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए जल्द से जल्द अपने अतिक्रमण हटाने होंगे।

सिवनी: नेटवर्क नहीं तो शादी नहीं, मोबाइल नेटवर्क की वजह से इस गांव के लड़के बैठे कुंवारे

Seoni Mobile Network News: सिवनी जिले में नेटवर्क की समस्या से सामाजिक जीवन प्रभावित. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सिवनी जिले (Seoni City) के नयेगांव गांव में मोबाइल नेटवर्क की भारी समस्या देखने को मिल रही है। यह गांव पेंच टाइगर रिजर्व के बफर जोन में स्थित है, जिसके कारण यहां किसी भी टेलीकॉम कंपनी का नेटवर्क उपलब्ध नहीं है।

नेटवर्क की इस कमी के कारण ग्रामीणों को आवश्यक संचार सेवाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। लेकिन, सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस समस्या के कारण यहां युवाओं की शादियां भी रुक रही हैं।

शादी के रिश्ते प्रभावित, लड़कियों के परिवारों की चिंता

गांव में मोबाइल नेटवर्क न होने की वजह से शादी के रिश्ते तय होने में परेशानी आ रही है। अक्सर लड़की वालों को यह चिंता होती है कि विवाह के बाद संचार कैसे होगा। कई बार रिश्ते तय होने से पहले ही टूट जाते हैं क्योंकि लोग कहते हैं – “यहां फोन नहीं चलता, जंगल का इलाका है।”

श्यामा बाई, जिनका 29 वर्षीय बेटा विवाह योग्य है, बताती हैं कि उन्हें बेटे की शादी के लिए काफी परेशानी हो रही है। वह कहती हैं, “लड़की वाले शादी के लिए तैयार नहीं होते, क्योंकि वे कहते हैं कि यहां फोन नहीं चलता, तो कैसे बात करेंगे?”

डुलम सिंह कुंजाम, जो इसी गांव के निवासी हैं, इस समस्या की पुष्टि करते हैं। उनका कहना है कि गांव में कई युवक-युवतियों की शादियां इसलिए नहीं हो रही हैं क्योंकि लड़की वाले मोबाइल नेटवर्क की समस्या के कारण रिश्ता करने से मना कर देते हैं।

आपात स्थिति में संचार सेवा की कमी बड़ी परेशानी

गांव में मोबाइल नेटवर्क की अनुपलब्धता से केवल शादियां ही नहीं, बल्कि आपातकालीन सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।

  • बीमार लोगों के लिए एंबुलेंस बुलाने में कठिनाई होती है।
  • स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को आवश्यक जानकारी के लिए 3 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।
  • बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
  • गांव की महिलाएं और किसान डिजिटल सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे।

गांव के लोग फोन पर बात करने के लिए कई किलोमीटर दूर जाने को मजबूर हैं। इस वजह से किसी भी आपात स्थिति में मदद समय पर नहीं मिल पाती।

प्रशासन से लगातार गुहार, लेकिन समाधान नहीं

ग्रामीणों ने प्रशासन से कई बार मोबाइल टावर लगाने की मांग की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। बीएसएनएल ने मोबाइल टावर लगाने के लिए आवेदन दिया है, लेकिन पर्यावरणीय नियमों के कारण यह प्रस्ताव अटका हुआ है।

पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश सिंह ने जानकारी दी कि अगर यह टावर स्वीकृत हो जाता है, तो नयेगांव के लोगों को नेटवर्क की समस्या से राहत मिल सकती है। लेकिन इस प्रक्रिया में समय लग सकता है।

डिजिटल इंडिया मिशन से कोसों दूर यह गांव

जब देश डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ रहा है, तब सिवनी का यह गांव आज भी संचार की मूलभूत सुविधा से वंचित है। यहां के लोगों के लिए मोबाइल नेटवर्क मिलना किसी सपने से कम नहीं।

समाधान क्या हो सकता है?

सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे इस गांव की समस्या पर ध्यान दें। इसके लिए –

  1. सौर ऊर्जा आधारित मोबाइल टावर लगाए जा सकते हैं।
  2. बफर जोन में सीमित नेटवर्क एक्सेस की अनुमति दी जा सकती है।
  3. सैटेलाइट फोन या वाई-फाई कॉलिंग जैसी वैकल्पिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

यदि जल्द समाधान नहीं किया गया, तो यह समस्या आने वाले समय में और गंभीर हो सकती है।

सिवनी जिले का नयेगांव गांव मोबाइल नेटवर्क की भारी समस्या से जूझ रहा है। इस वजह से युवाओं की शादियां रुक रही हैं, आपातकालीन सेवाएं प्रभावित हो रही हैं और ग्रामीणों को संचार में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन को जल्द से जल्द इस समस्या का हल निकालना चाहिए, ताकि गांव के लोग भी आधुनिक सुविधाओं का लाभ उठा सकें।

सिवनी में हिंदू नव वर्ष पर मठ मंदिर से प्रातः 10 बजे निकलेगी विशाल वाहन रैली

सिवनी: हिन्दू समाज की एकता, संस्कृति और परंपरा को मजबूत करने के उद्देश्य से सकल हिंदू समाज के नेतृत्व में मठ मंदिर सिवनी में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में समाज के सभी वर्गों के प्रतिनिधि, विभिन्न हिंदू संगठन, राजनीतिक व गैर-राजनीतिक संस्थाएँ, युवा शक्ति, मातृशक्ति, और समाज के वरिष्ठ जनों ने भाग लिया।

बैठक में हिन्दू समाज के महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई, और आगामी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, 30 मार्च को हिन्दू नव वर्ष के भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इस वर्ष हिंदू नव वर्ष को और भी भव्य रूप से मनाने हेतु विशेष योजनाएँ बनाई गई हैं।

हिन्दू नव वर्ष 30 मार्च को धूमधाम से मनाने की योजना

बैठक में निर्णय लिया गया कि हिंदू नव वर्ष के शुभ अवसर पर एक भव्य वाहन रैली का आयोजन किया जाएगा। यह वाहन रैली मठ मंदिर सिवनी में देवाधिदेव महादेव के दर्शन से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए हिंदू एकता का संदेश प्रसारित करेगी।

मठ मंदिर से पहली वाहन रैली प्रातः 10 बजे

  • 🚩 स्थान: मठ मंदिर, सिवनी
  • 🚩 दिन: रविवार, 30 मार्च 2025
  • 🚩 समय: प्रातः 10:00 बजे
  • 🚩 रैली प्रारंभ: मठ मंदिर देवाधिदेव महादेव
  • 🚩 नगर भ्रमण: प्रमुख मार्गों से होते हुए विभिन्न मंदिरों तक
  • 🚩 रैली का उद्देश्य: हिंदू समाज की एकता को दर्शाना, सनातन संस्कृति का प्रचार करना, और समाज में जागरूकता फैलाना

सभी हिंदू भाइयों और बहनों से अपील

हम सकल हिंदू समाज के माध्यम से आप सभी हिंदू भाइयों और बहनों से अपील करते हैं कि अधिक से अधिक संख्या में इस पवित्र आयोजन में भाग लें और इसे ऐतिहासिक रूप से सफल बनाएं।

आयोजन में क्या-क्या विशेष होगा?

✅ भगवा ध्वज यात्रा: हिंदू नव वर्ष के शुभारंभ के प्रतीक स्वरूप, रैली में हर हिंदू भाई भगवा ध्वज लेकर चलेगा।
✅ बड़े स्तर पर भजन-कीर्तन: पूरे नगर में हिंदू भक्ति और श्रद्धा की धारा प्रवाहित होगी।
✅ गुलाल और पुष्प वर्षा: रैली के दौरान श्रद्धालु गुलाल और पुष्प वर्षा करके उल्लास प्रकट करेंगे।
✅ संस्कृति का प्रचार: रैली के दौरान हिंदू संस्कृति, परंपराओं, और गौरवशाली इतिहास की झलक प्रस्तुत की जाएगी।

हिन्दू नव वर्ष का महत्व

क्या है हिन्दू नव वर्ष?

हिन्दू नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। यह दिन अत्यंत पावन माना जाता है क्योंकि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। इसी दिन भगवान राम का राज्याभिषेक हुआ था और महाराज विक्रमादित्य ने विक्रम संवत का शुभारंभ किया था।

हिंदू नव वर्ष मनाने की परंपरा

🔸 इस दिन घर और मंदिरों में विशेष पूजन किया जाता है।
🔸 मंदिरों में भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है।
🔸 नववर्ष के स्वागत में दीप जलाकर घरों को सजाया जाता है।
🔸 सूर्योदय के समय भगवा ध्वज फहराया जाता है।

भगवा ध्वज यात्रा क्यों जरूरी है?

🚩 भगवा ध्वज हमारी सनातन संस्कृति और हिंदू एकता का प्रतीक है।
🚩 यह यात्रा समाज में धर्म, संस्कृति और सनातन परंपराओं को जागरूक करने का कार्य करेगी।
🚩 यह आयोजन हिंदू समाज को एकजुट करने और धर्म व गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित करने का कार्य करेगा।

आयोजन में शामिल होने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश

📌 सभी हिंदू भाई-बहन भगवा वस्त्र पहनकर और ध्वज लेकर आएं।
📌 रैली में भाग लेने के लिए समय से पहले उपस्थित हों।
📌 सांस्कृतिक और धार्मिक अनुशासन बनाए रखें।
📌 पर्यावरण का ध्यान रखते हुए सफाई का विशेष ध्यान दें।

आयोजन समिति का संदेश

सकल हिंदू समाज द्वारा आयोजित यह भव्य कार्यक्रम हर हिंदू के लिए एक गौरवपूर्ण अवसर है। यह केवल रैली नहीं, बल्कि सनातन धर्म के उत्थान और हिंदू एकता का उत्सव है। इस आयोजन के माध्यम से हिंदू समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जड़ों से जुड़ने और अपनी संस्कृति पर गर्व करने का अवसर मिलेगा। आइए, इस आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लें और इसे ऐतिहासिक बनाएं। 🚩 जय श्री राम! 🚩

सिवनी जिले का ग्राम आमगांव देहवानी हर घर जल प्रमाणित स्वच्छ सुजल गांव हुआ घोषित

सिवनी: मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के ग्राम आमगांव देहवानी ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। जल जीवन मिशन एवं स्वच्छ भारत मिशन (ओडीएफ प्लस) योजना के अंतर्गत इस गांव को हर घर जल प्रमाणित स्वच्छ सुजल गांव घोषित किया गया है। यह सफलता न केवल ग्रामवासियों की सजगता, सहभागिता एवं सतत प्रयासों का परिणाम है, बल्कि यह पूरे जिले और प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।

ग्राम आमगांव देहवानी: जल जीवन मिशन की सफलता की कहानी

जल जीवन मिशन भारत सरकार की एक महत्त्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर को नल से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत ग्राम आमगांव देहवानी ने 100% घरों में पाइपलाइन के माध्यम से पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है।

इस कार्य में ग्रामवासियों की सक्रिय भागीदारी, प्रशासन का सहयोग, एवं जल संरक्षण के प्रति जागरूकता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब यहां के सभी परिवारों को स्वच्छ, सुरक्षित और निरंतर जल आपूर्ति प्राप्त हो रही है, जिससे जलजनित बीमारियों में भी कमी आई है।

ओडीएफ प्लस: स्वच्छता की दिशा में एक बड़ा कदम

ग्राम आमगांव देहवानी को शत-प्रतिशत ओडीएफ प्लस घोषित किए जाने का मतलब है कि यह गांव न केवल खुले में शौच से मुक्त हो चुका है, बल्कि यहां स्वच्छता एवं ठोस-तरल अपशिष्ट प्रबंधन की भी पूर्ण व्यवस्था है।

यह संभव हुआ है निम्नलिखित उपायों से:

  • हर घर में शौचालय निर्माण और उसका नियमित उपयोग
  • ग्राम स्तर पर ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली
  • स्वच्छता को लेकर निरंतर जागरूकता अभियान
  • स्कूलों एवं आंगनवाड़ी केंद्रों में स्वच्छता सुविधाओं की उपलब्धता

ग्रामवासियों की सहभागिता: सफलता की कुंजी

इस उपलब्धि के पीछे ग्रामवासियों की सजगता और सक्रिय भागीदारी सबसे बड़ी शक्ति रही है। गांव के प्रत्येक नागरिक ने स्वच्छता और जल संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाया है।

  • स्वच्छता समिति के माध्यम से ग्रामीणों को नियमित रूप से प्रशिक्षित किया गया।
  • घर-घर जाकर जल एवं स्वच्छता का महत्त्व समझाया गया।
  • स्कूलों और पंचायतों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
  • स्थानीय प्रशासन एवं समाजसेवी संगठनों ने मिलकर आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की।

ग्राम विकास की ओर बढ़ते कदम

ग्राम आमगांव देहवानी की यह उपलब्धि केवल एक शुरुआत है। जल जीवन मिशन एवं स्वच्छ भारत मिशन के सफल क्रियान्वयन से यह गांव अब नए आयामों की ओर अग्रसर है।

आने वाले वर्षों में गांव की योजनाएं:

✔ सतत जल आपूर्ति हेतु जल संरक्षण के नए उपाय
✔ वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष अभियान
✔ सौर ऊर्जा आधारित जल आपूर्ति प्रणाली
✔ ग्राम स्तर पर कचरा प्रबंधन के लिए नई योजनाएं
✔ बायोगैस संयंत्र और जैविक खाद उत्पादन को बढ़ावा

प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों का सहयोग

ग्राम की इस सफलता में स्थानीय प्रशासन, पंचायत प्रतिनिधियों, समाजसेवियों, एवं विभिन्न संगठनों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जल शक्ति मंत्रालय, राज्य सरकार, एवं स्थानीय निकायों ने इस पहल को हर संभव समर्थन प्रदान किया।

ग्राम आमगांव देहवानी का हर घर जल प्रमाणित स्वच्छ सुजल गांव के रूप में घोषित होना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह केवल सरकारी योजना की सफलता नहीं है, बल्कि यह ग्रामवासियों की एकजुटता और संकल्प का प्रतीक भी है।

यह पहल गांव के सतत विकास, स्वास्थ्य सुधार, एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नया अध्याय लिखेगी। इस अद्वितीय उपलब्धि के लिए सभी ग्रामवासियों, जनप्रतिनिधियों, एवं प्रशासन को कोटिशः बधाई!

Social Media Influencer को MP सरकार दे रही लाखों रुपए के इनाम जीतने का मौका – स्वच्छ मध्यप्रदेश रील प्रतियोगिता

Social Media Influencer को MP सरकार दे रही लाखों रुपए के इनाम जीतने का मौका – स्वच्छ मध्यप्रदेश रील प्रतियोगिता – मध्यप्रदेश सरकार द्वारा एक अनोखी पहल के तहत “स्वच्छ मध्यप्रदेश रील प्रतियोगिता” का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रतियोगिता के माध्यम से गांवों और शहरों में स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए नागरिकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रतिभागी रील बनाकर लाखों के इनाम जीत सकते हैं। आइए जानते हैं इस प्रतियोगिता के बारे में विस्तार से।

प्रतियोगिता का उद्देश्य

इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को गीले एवं सूखे कचरे के उचित निपटान के लिए प्रेरित करना है। सरकार चाहती है कि लोग खुले में कचरा फेंकने की आदत छोड़ें और कचरे के पुनः उपयोग पर ध्यान दें।

क्या है स्वच्छ मध्यप्रदेश रील प्रतियोगिता?

यह एक ऑनलाइन रील प्रतियोगिता है, जहां प्रतिभागियों को स्वच्छता से संबंधित रील वीडियो बनाकर अपलोड करना होगा। सबसे बेहतरीन और प्रभावशाली रील को लाखों रुपए तक का इनाम दिया जाएगा।

प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आवश्यक बिंदु:

  • रील वीडियो को स्वच्छता पर केंद्रित होना चाहिए।
  • गांवों और शहरों में स्वच्छता को बढ़ावा देने वाले संदेश को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना होगा।
  • वीडियो संक्षिप्त, रोचक और प्रेरणादायक होना चाहिए।

रील्स के मुख्य विषय

प्रतियोगियों को नीचे दिए गए विषयों पर रील्स बनाने होंगे:

1. गीला और सूखा कचरा अलग-अलग रखना एवं उसका उचित निपटान

कचरे का उचित प्रबंधन एक बड़ी समस्या है, और इसे सुलझाने के लिए हमें गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखना चाहिए।

  • गीला कचरा: सब्जियों के छिलके, बचा हुआ खाना, फल, पत्तियां आदि।
  • सूखा कचरा: प्लास्टिक, कांच, धातु, कागज, कपड़ा आदि।
  • कचरे का पुनर्चक्रण (Recycling) करने से पर्यावरण को स्वच्छ रखा जा सकता है।
  • सही तरीके से कचरा प्रबंधन करने के लिए घर-घर में दो अलग-अलग कूड़ेदान अनिवार्य रूप से प्रयोग करने चाहिए।

2. कचरे के पुनः उपयोग पर रील्स (Recycling और Upcycling)

कचरे का दोबारा उपयोग करना पर्यावरण के लिए अत्यंत लाभदायक होता है। इस पर आप निम्नलिखित प्रकार की रील्स बना सकते हैं:

  • पुरानी प्लास्टिक की बोतलों से डेकोरेशन आइटम बनाना।
  • पुराने अखबारों से पेपर बैग और अन्य उपयोगी वस्तुएं बनाना।
  • पुराने कपड़ों से नए उत्पाद तैयार करना, जैसे बैग, वॉल हैंगिंग आदि।
  • पुनः उपयोग (Upcycling) और Recycling से जुड़ी अनूठी और रोचक DIY (Do It Yourself) तकनीकों को दर्शाना।

3. खुले में कचरा नहीं फेंकना

भारत में खुले में कचरा फेंकना एक गंभीर समस्या है। इस पर प्रभावी रील बनाकर आप जागरूकता फैला सकते हैं:

  • खुले में कचरा फेंकने के दुष्प्रभाव को दर्शाना।
  • स्वच्छता अभियान में स्वयंसेवकों द्वारा किए जा रहे सराहनीय प्रयासों को दिखाना।
  • लोगों को डस्टबिन का सही उपयोग करने के लिए प्रेरित करना।
  • यदि कोई व्यक्ति सड़क पर कचरा फेंक रहा है, तो उसे प्रेरणात्मक तरीके से रोकने के तरीके दिखाना।

पुरस्कार राशि और विजेताओं का चयन

स्वच्छ मध्यप्रदेश रील प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागियों को लाखों रुपए के पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

मुख्य पुरस्कार:

  • पहला स्थान – ₹2,00,000
  • दूसरा स्थान – ₹1,00,000
  • तीसरा स्थान – ₹50,000

सांत्वना पुरस्कार: ₹25,000 पुरस्कार भी दिए जाएंगे।

रील्स की गुणवत्ता, संदेश की स्पष्टता और जागरूकता फैलाने की क्षमता के आधार पर विजेता चुने जाएंगे।

प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए कैसे आवेदन करें?

प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रजिस्टर करें और अपनी रील अपलोड करें।

🔗 भाग लेने के लिए क्लिक करें

आवेदन प्रक्रिया:

  • वेबसाइट पर जाएं और रजिस्ट्रेशन करें।
  • अपनी रील बनाएं और अपलोड करें।
  • निर्धारित समय सीमा तक अपनी एंट्री सबमिट करें।
  • विजेताओं की घोषणा आधिकारिक वेबसाइट पर की जाएगी।

स्वच्छता का महत्व और समाज पर प्रभाव

स्वच्छता न केवल स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, बल्कि यह पर्यावरण और समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

स्वच्छता से लाभ:

  • बीमारियों से बचाव होता है।
  • पर्यावरण शुद्ध और सुंदर बना रहता है।
  • समाज में स्वास्थ्य और जागरूकता का स्तर बढ़ता है।
  • पर्यटन को बढ़ावा मिलता है और देश की छवि सुधरती है।

अब आपकी बारी है! अपने गांव या शहर को स्वच्छ बनाने के लिए इस प्रतियोगिता में भाग लें और लाखों के इनाम जीतें!

जुमा साल में 52 बार आता है, होली साल में एक बार आती है: मुस्लिमों का होली के रंग से धर्म भ्रष्ट होता है तो वह घर से न निकलें

Juma Saal Me 52 Baar Aata Hai, Holi Saal Me Ek Baar Aati Hai: उत्तर प्रदेश के संभल जिले के सर्किल ऑफिसर (सीओ) अनुज चौधरी (Anuj Chopudhary) ने आगामी होली और रमज़ान के जुमे की नमाज को ध्यान में रखते हुए सांप्रदायिक सद्भाव और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जिन्हें होली के रंगों से असहजता महसूस होती है, उन्हें उस दिन घर के अंदर रहना चाहिए। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब आगामी होली का त्योहार शुक्रवार को पड़ रहा है, जिससे नमाज और होली दोनों एक ही दिन पड़ने से प्रशासन सतर्क हो गया है।

होली और जुमे की नमाज का मेल: प्रशासन की सतर्कता

संभल के सीओ अनुज चौधरी ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा, “होली साल में एक बार आती है, जबकि शुक्रवार की नमाज साल में 52 बार होती है। ऐसे में यदि किसी को रंगों से असहजता होती है, तो उन्हें घर के अंदर रहना चाहिए। जो लोग बाहर निकलते हैं, उन्हें व्यापक सोच रखनी चाहिए और सौहार्द बनाए रखना चाहिए।”

इस बयान के बाद स्थानीय समुदायों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली है। प्रशासन ने सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए विभिन्न स्तरों पर शांति समिति की बैठकें आयोजित की हैं, जिससे किसी भी प्रकार की टकराव या अशांति को रोका जा सके।

शांति बनाए रखने के लिए प्रशासन की तैयारियाँ

होली और जुमे की नमाज के एक ही दिन होने से प्रशासन ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती, प्रमुख स्थलों पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी, तथा संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाने जैसे उपाय अपनाए गए हैं।

प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देश:

  • कोई भी जबरन किसी को रंग न लगाए
  • शांतिपूर्ण तरीके से त्योहार मनाएं
  • सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार की उकसाने वाली गतिविधियों से बचें
  • धार्मिक स्थलों के पास विशेष सतर्कता बरती जाए
  • संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती

सांप्रदायिक सौहार्द और धार्मिक त्योहारों का महत्व

होली और ईद दोनों ही प्रेम, भाईचारे और आपसी सम्मान के प्रतीक हैं। जिस प्रकार मुस्लिम समुदाय ईद का इंतजार करता है और विशेष पकवान बनाकर एक-दूसरे से गले मिलता है, उसी तरह हिंदू समुदाय होली पर रंग लगाकर, मिठाइयाँ बाँटकर खुशियाँ मनाता है। दोनों त्योहारों का सार एकता और मेल-जोल में है।

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की प्रतिक्रिया

सीओ अनुज चौधरी के इस बयान की विपक्षी दलों ने आलोचना की है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता शरवेंद्र बिक्रम सिंह ने इसे भाजपा का समर्थन करने वाला बयान बताया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को प्रशासनिक भूमिका निभानी चाहिए, न कि किसी विशेष राजनीतिक दल का एजेंट बनना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि संभल के सीओ के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस मीडिया कमेटी के उपाध्यक्ष मनीष हिंदवी ने कहा कि सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे दोनों त्योहार शांति से मनाए जा सकें। उन्होंने यह भी कहा कि सीओ का यह बयान राजनीतिक है और इसे धर्म के चश्मे से देखने की जरूरत नहीं है।

संभल में पहले भी भड़क चुकी है हिंसा

संभल में धार्मिक मुद्दों पर पहले भी विवाद हो चुके हैं। नवंबर 2023 में एक मुगलकालीन मस्जिद के कोर्ट के आदेश पर हुए सर्वेक्षण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया था, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। ऐसे में प्रशासन इस बार होली और जुमे की नमाज के एक ही दिन पड़ने के कारण विशेष रूप से सतर्क है।

संभल के सीओ अनुज चौधरी का बयान भले ही विवादों में घिर गया हो, लेकिन उनका उद्देश्य शांति और सौहार्द बनाए रखना है। प्रशासन की ओर से सख्त निगरानी और सुरक्षा उपायों को लागू किया जा रहा है, जिससे कि कोई अप्रिय घटना न हो।

समाज के सभी वर्गों को भी एक-दूसरे के त्योहारों का सम्मान करना चाहिए और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व बनाए रखने के लिए प्रशासन का सहयोग करना चाहिए।

MP के CM मोहन यादव ने की एकात्म धाम, ओंकारेश्वर के विकास पर बैठक: सिंहस्थ 2028 तक ओंकारेश्वर बने प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल

भोपाल | मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एकात्म धाम, ओंकारेश्वर के समग्र विकास को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस दौरान उन्होंने ओंकारेश्वर में स्थापित आदि शंकराचार्य की विशाल प्रतिमा और सम्पूर्ण क्षेत्र के विकास को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

समाज को एकता के सूत्र में बांधने का केंद्र बने ओंकारेश्वर

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ओंकारेश्वर में स्थित आदि शंकराचार्य की प्रतिमा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सम्पूर्ण समाज को एकता के सूत्र में बांधने का कार्य करती है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रतिमा स्थल सहित सम्पूर्ण ओंकारेश्वर के विकास से जुड़े सभी आवश्यक कार्य शीघ्र पूर्ण किए जाएं, ताकि यह स्थान और अधिक भव्य और सुव्यवस्थित रूप ले सके।

सिंहस्थ 2028 तक ओंकारेश्वर बने प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल

मुख्यमंत्री ने 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए कहा कि ओंकारेश्वर को भी उज्जैन की तरह श्रद्धालुओं और पर्यटकों के विशेष आकर्षण का केंद्र बनाया जाए। इसके लिए सभी आवश्यक प्रयास किए जाएं, जिससे आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के एक महत्वपूर्ण स्थल के रूप में उभरे।

यात्रियों की सुविधा के लिए रोप-वे और मार्गों का होगा विस्तार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एकात्म धाम और आसपास के क्षेत्रों में आने-जाने के मार्गों को सुविधाजनक बनाने के लिए तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित रोप-वे परियोजना को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुगम यात्रा का अनुभव मिल सके।

इस बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी और संबंधित विभागों के प्रमुख उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ओंकारेश्वर के विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी न हो और सभी योजनाएं समय पर पूरी की जाएं।

सिवनी: पेंच टाइगर रिजर्व में वन्यजीव प्रबंधन के लिए राज्य स्तरीय दो दिवसीय कार्यशाला 07 एवं 08 मार्च को

Seoni News। वन्यजीव प्रबंधन को सुदृढ़ करने और भविष्य की रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश सरकार के निर्देशानुसार राज्य स्तरीय दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन 07 एवं 08 मार्च 2025 को पेंच टाइगर रिजर्व, सिवनी (खवासा) में किया जा रहा है।

वन्यजीव संरक्षण पर होगा गहन मंथन

पेंच टाइगर रिजर्व सिवनी के उपसंचालक ने जानकारी दी कि इस कार्यशाला में मध्यप्रदेश वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक सहित वरिष्ठ अधिकारी, टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक, वन्यजीव बाहुल्य वन वृत्तों के मुख्य वन संरक्षक, वनमंडल अधिकारी, वैज्ञानिक एवं सेवानिवृत्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक सम्मिलित होंगे। इसके अलावा, महाराष्ट्र, कर्नाटक जैसे अन्य राज्यों के मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक, एनटीसीए एवं एनजीओ के पदाधिकारी, टाइगर रिजर्व के फील्ड बायोलॉजिस्ट सहित 80 से अधिक विशेषज्ञ एवं अधिकारी इस कार्यशाला में भाग लेंगे।

कार्यशाला में इन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर होगी चर्चा

इस कार्यशाला में वन्यजीव प्रबंधन के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित विषय शामिल होंगे—

✔️ मानव-वन्यजीव द्वंद की परिस्थितियां एवं समाधान

✔️ स्थानीय समुदायों की सहभागिता से वन्यजीव संरक्षण

✔️ पर्यावास प्रबंधन हेतु भौगोलिक परिदृश्य का विश्लेषण

✔️ वन्यजीव कॉरिडोर की वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजना

मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण को मिलेगी नई दिशा

कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई रणनीति से मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण को एक नई दिशा मिलेगी। इस कार्यशाला का आयोजन पेंच टाइगर रिजर्व में होना और राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों की उपस्थिति, मध्यप्रदेश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को और सशक्त बनाएगी।

MP के विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में होगा अनोखा सुधार: राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन तेज

मध्यप्रदेश के विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिये राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का क्रियान्वयन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रभावी तरीके से किया जा रहा है। नीति के क्रियान्वयन के लिये राज्य शासन द्वारा आयुक्त और संचालक स्तर की अध्यक्षता में वरिष्ठ अधिकारियों की 14 समितियाँ गठित की गयी हैं। यह समितियाँ राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न ग्रुप और क्षेत्रों से संबंधित हैं। राज्य शासन ने स्कूल शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में टॉस्क फोर्स का गठन किया है। इसमें स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी पदेन सदस्य हैं। समिति में शासकीय एवं अशासकीय शिक्षाविदों को भी शामिल किया गया है।

सदस्यों के बीच परिचर्चा

राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं क्रियान्वयन के लिये सदस्यों के बीच परिचर्चा भी करायी गयी है। इसमें अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन के साथ समन्वय में विशेषज्ञ के उद्बोधन कराये गये हैं। उन्मुखीकरण के दौरान एनसीईआरटी के विभागाध्यक्ष द्वारा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या फाउण्डेशनल (एनसीएफ) स्टेज विकास प्रक्रिया और राज्य पाठ्यचर्या फाउण्डेशनल (एससीएफ) स्टेज के बारे में भी जानकारी दी गयी है। केन्द्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के दिशा-निर्देश अनुसार न्यू एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी) ट्रैकर को नियमित रूप से अपडेट किया जा रहा है।

समतामूलक और समावेशी शिक्षा

राज्य में विशेष आवश्यकता वाले चिल्ड्रन विथ स्पेशल नीड्स (सीडब्ल्यूएसएन) 9550 नये बच्चों की पहचान एवं उनका कक्षा-9 से 12 में नामांकन सुनिश्चित किया गया है। इसी के साथ विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के शिक्षण के लिये प्रदेश में 8500 शिक्षकों को वर्ष 2024 में 2 सत्रों में विशेष प्रशिक्षण भी दिलाया गया है। सभी विकासखण्डों में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संसाधन केन्द्र विकसित किये गये हैं।

व्यावसायिक शिक्षा पर जोर

नई शिक्षा नीति में विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा देने पर जोर दिया गया है। प्रदेश में 2383 विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा संचालित की जा रही है। इनमें करीब 4 लाख विद्यार्थियों का इनरोलमेंट किया गया है और उन्हें 14 ट्रेड में व्यावसायिक शिक्षा देने की व्यवस्था की गयी है। प्रदेश के 798 हायर सेकेण्डरी विद्यालयों में कृषि संकाय और 465 हायर सेकेण्डरी स्कूलों में कृषि ट्रेड संचालित किये जा रहे हैं। स्टार्स प्रोजेक्ट के अंतर्गत 100 विद्यालयों में नियमित छात्रों के साथ-साथ ड्रॉपआउट विद्यार्थियों की भी व्यावसायिक शिक्षा प्रारंभ की गयी है। प्रदेश के प्रत्येक सीएम राइज विद्यालय में 2 वोकेशनल ट्रेड्स के लिये लैब निर्मित की जा रही है। विभाग के 52 सीएम राइज विद्यालयों में रोबोटिक्स लैब की स्थापना भी करायी गयी है। वर्तमान में संचालित आईटी कोर्सेस के अलावा पं. सुंदरलाल शर्मा इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल एजुकेशन के सहयोग से एआई कोडिंग जैसे नवीन पाठ्यक्रम तैयार किये जा रहे हैं। ट्यूनिंग ऑफ स्कूल के अंतर्गत 520 विद्यालयों की ट्यूनिंग की गई है, जिसके अंतर्गत यह विद्यालय आपस में बेस्ट प्रैक्टिस का आदान-प्रदान करते हैं।

एमपी और राजस्थान सरकार मिलकर भगवान श्रीकृष्ण पाथेय के विकास के लिए करेंगे काम – MP CM MOHAN YADAV

Shri Krishna Patheya: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भगवान श्रीकृष्ण पाथेय के संदर्भ में मध्यप्रदेश और राजस्थान सरकार पूरी तरह एकमत हैं। दोनों राज्यों की सरकारें मिलकर इस पावन पथ के विकास हेतु ठोस कार्ययोजना बनाएंगी। इसके साथ ही, गुजरात सरकार से भी सहयोग लेकर भगवान श्रीकृष्ण के गुजरात गमन पथ को संरक्षित और विकसित किया जाएगा।

भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंग होंगे उजागर

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का ईश्वरीय स्वरूप तो स्तुत्य है ही, लेकिन इसके अलावा भी उनके जीवन के अनेक महत्वपूर्ण पहलू हैं, जिन्हें समाज के समक्ष प्रकाश में लाने की आवश्यकता है। इनमें उज्जैन में शिक्षा ग्रहण करना, सुदामा से मित्रता निभाना, वनवासी समाज से प्रेम और गुरू-शिष्य परंपरा की मिसाल स्थापित करना शामिल हैं। इन पहलुओं को उजागर कर समाज में भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

विशेषज्ञ समिति की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को समत्व भवन, मुख्यमंत्री निवास में श्रीकृष्ण पाथेय से संबंधित विषय विशेषज्ञ समिति की बैठक में उपस्थित थे। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीकृष्ण पाथेय के विकास के लिए पुरातत्वविदों, धर्माचार्यों एवं श्रीकृष्ण साहित्य के विद्वानों को भी समिति में जोड़ा जाएगा। इसके अलावा, भोपाल में आयोजित बैठक के साथ-साथ उज्जैन, जयपुर, भरतपुर, ब्रज एवं चौरासी कोस जैसे महत्वपूर्ण स्थलों पर भी बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिससे इस पवित्र परियोजना को गति मिल सके।

भगवान श्रीकृष्ण के गमन स्थलों का होगा अभिलेखीकरण

मुख्यमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि भगवान श्रीकृष्ण के गमन स्थलों का सटीक अभिलेखीकरण किया जाए। प्राचीन शास्त्रों, ऐतिहासिक दस्तावेजों एवं पुरातात्विक प्रमाणों के आधार पर भगवान श्रीकृष्ण के भ्रमण स्थलों की विस्तृत सूची तैयार की जाएगी। विशेष रूप से, उज्जैन के सांदीपनि आश्रम को श्रीकृष्ण पाथेय के विकास केंद्र के रूप में स्थापित किया जाएगा।

श्रीकृष्ण पाथेय का ऐतिहासिक महत्व और इसके विस्तार की योजना

विशेषज्ञों ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा लोक कल्याण के उद्देश्य से मथुरा, उज्जैन, द्वारका, ब्रज मंडल, मेवात, हाड़ौती, मालवा, निमाड़, गुजरात, राजस्थान, विदर्भ और महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में यात्राएं की गई थीं। किंतु उनका प्रमुख केंद्र उज्जैन ही था। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए उज्जैन को इस परियोजना के मुख्य केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

धार्मिक संस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में बड़ा कदम

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने धार्मिक पर्वों एवं सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी सहभागिता बढ़ाई है। उन्होंने बताया कि दशहरे पर शस्त्र पूजा, दीपावली पर गोवर्धन पूजा और हाल ही में गीता जयंती का आयोजन कर प्रदेश में सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा दिया गया है। इसी कड़ी में प्रदेश के 17 पवित्र धार्मिक स्थलों में शराबबंदी लागू करने का निर्णय लिया गया, जिससे समाज में सकारात्मक संदेश गया है।

श्रीकृष्ण पाथेय के विकास के लिए सरकार का प्रतिबद्ध रुख

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार श्रीकृष्ण पाथेय के विकास के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। भविष्य में भगवान श्रीकृष्ण की अन्य लीलाओं को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा ताकि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सके और सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार हो।

बैठक में उपस्थित प्रमुख सदस्य

इस बैठक में राजस्थान सरकार में राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त श्री ओंकार सिंह लखावत, महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के पूर्व निदेशक पद्मश्री डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित, मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार डॉ. श्रीराम तिवारी, उज्जैन के डॉ. शैलेन्द्र शर्मा, डॉ. रमन सोलंकी, मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन, अपर मुख्य सचिव श्री संजय शुक्ला, प्रमुख सचिव संस्कृति एवं पर्यटन श्री शिवशेखर शुक्ला सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं समिति के सदस्यगण उपस्थित थे। उज्जैन के कमिश्नर एवं कलेक्टर ने भी वर्चुअली बैठक में सहभागिता की।

इस बैठक में लिए गए निर्णयों से स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश सरकार भगवान श्रीकृष्ण पाथेय के विकास के लिए सक्रियता से कार्य कर रही है और अन्य राज्यों के साथ समन्वय बनाकर इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके माध्यम से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को उजागर किया जाएगा। यह पहल न केवल संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण में सहायक होगी, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी।